नये आयामों का आगाज देती नई शिक्षा नीति

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डॉ0राकेश राणा
बेहतर शैक्षिक वातावरण के साथ शिक्षा की उन्नत संस्कृति का विकास हो सके, इस बात का पूरा ख्याल रखा गया है। नई शिक्षा नीति में ज्ञान के विस्तार की दिशा में नए क्षैतिजों को खोलने का उद्यम किया गया है। लोकल और ग्लोबल के सफल संयोजन की कोशिश में निर्मित यह दस्तावेज निश्चित ही दोनों जरुरतों को पूरा करने की दिशा में नवाचार की नींव रखेगा। नई शिक्षा नीति नए भारत की नींव को मजबूत करेगी। भारत ने लंबे इंतजार के बाद शिक्षा के क्षेत्र में समयानुकूल आमूलचूल बदलाव का एक ठोस एजेंडा निर्धारित किया है। जो नई शिक्षा नीति के जरिए बड़े बदलावों को आयोजित करने की दीर्घकालीन योजना के साथ मूर्त रुप लेगा। शिक्षा के माध्यम से ही कोई समाज स्वयं को रुपांतरित कर सकता हैं।
नई शिक्षा नीति के तहत जो बहु-स्तरीय प्रवेश और अन्यत्र प्रयासों हेतु बाहर आने की व्यवस्था के नए आयाम जुड़ें है, ये नई नीति को नया बनाते है। यह उदार व्यवस्था उदारीकरण के दौर के भारतीय समाज की जरुरतों के हिसाब से नए अवसरों के द्वार खोलेगी। भारत ने अपनी नई शिक्षा नीति में बाजार की जरुरतों से निपटने को विशेष तरजीह दी है। शिक्षा व्यवस्था को अमेरिकी पैटर्न पर विस्तारित करने का यह प्रयास सामयिक महत्व का तो है ही साथ ही देश की अर्थव्यवस्था को नया रंग, रुप और तेवर देने में भी यह अहम् रहेगा। क्योंकि शिक्षा व्यवस्था का मौजूदा परिदृश्य नैराश्यपूर्ण है। निरन्तर स्तरहीन शिक्षा के हम शिकार हो रहे है। शिक्षा के गिरते स्तर और शिक्षकों की कमी तथा सांस्थानिक स्वायत्तता के संकट एवं फर्जी शिक्षण संस्थाओं के फैलते जंजाल ने इस नैराश्यपूर्ण परिदृश्य को और सघन कर दिया है। नई राष्टृय शिक्षा नीति में ऐसी समस्याओं के समाधान के लिए जो मल्टी-डिसिप्लीनिरी यूनिवर्सिटिज की स्थापना का प्लान है, वह बहुत हद तक इन संकटों से निपटने में मददगार बनेगा। नई शिक्षा नीति-2020 में विदेशी शिक्षण संस्थाओं को आमंत्रण इसी प्रभावी समाधन के रुप में देखा और समझा जा सकता है।
विदेशी विश्वविद्यालयों की साझेदारी भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों के साथ तीन स्तरों पर प्लान की गई है। पहला अनुसंधान के क्षेत्र में, दूसरा शिक्षण के क्षेत्र में और तीसरा डिग्री देने वाले शिक्षण केन्द्रों के रुप में। नई शिक्षा नीति में भाषा, गणित और विज्ञान को केन्द्र में रखते हुए लिबरल आर्ट्स को विशेष तरजीह दी गई है। पश्चिमी शिक्षा पद्धति से सार्थक तत्व ग्रहण करते हुए नई शिक्षा नीति, हमारी नयी वैश्विक जरुरतों को पूरा करेगी। साथ-साथ आशांवित है कि भारतीय मूल्यों के संरक्षण करने की दिशा में प्राचीन भारतीय ज्ञान को प्रासंगिकता प्रदान करते हुए पुनरुत्थित भारत की संकल्पना को साकार बनाने में यह मददगार बनेगी।

नई शिक्षा नीति में बहु-वैषयिक शिक्षण संस्थानों की अवधारणा के तहत साइंस, गणित, भाषा इंजीनियरिंग, मेडिकल, और सामाजिक विज्ञान तथा मानविकी विषयों की पढ़ाई का जो मॉडल है, वह वास्तव में विश्वविद्यालय की आत्मानुरुप शिक्षण पद्धति का एक मुक्कमल प्रारुप है। जो वैश्विक स्तर पर यूनिवर्सिटीज में यूनिवर्सल वैल्यूज को विकसित करने के लिए आवश्यक पहल है। इससे एक अच्छी बात यह भी होगी कि शिक्षण परिसरों में एक समरसता का माहौल पनपेगा। समानता का भाव अपने अस्तित्व को मजबूत करेगा। समग्रता में अवलोकन से स्पष्ट होता है कि नई शिक्षा नीति वैश्विक शैक्षिक मूल्यों को संपोषित करते हुए भारतीय समाज के रुपांतरण में अहम् बनेगी। शिक्षा क्षेत्र में सम्पूर्ण सुविधाओं के साथ भाषा, संगीत, दर्शन, साहित्य, इंडोलॉजी, आर्ट, नृत्य, थिएटर, खेल, गणित इत्यादि विषयों पर ज़ोर दिया गया है।
भारत में परम्परागत ग्रैजुएशन का पैटर्न तीन वर्षीय रहा है वहीं अमेरिका में यह चार साल के पैटर्न पर आधारित है। भारत की नई शिक्षा नीति-2020 में ग्रैजुएशन को उसी चार वर्षीय पैटर्न पर ढ़ालने की पहल की गई है। जिसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारतीय छात्रों के लिए अमेरिकी संस्थानों में शोध के अवसर सहज और सुलभ बनेगें। वह एम.ए. करने के बजाय सीधे अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पी.एच.डी. हेतु अप्लाई कर सकेंगें। अब उन्हें एम.ए. करने की बाध्यता नहीं है। वही हम वैश्विक शैक्षिक पैटर्न को फॉलों कर एक समान शिक्षण की दिशा में भी अपनी नयी पीढ़ी को तैयार कर रहे होंगें। क्योंकि विश्व के अधिकांश देशों में स्नातक चार साल में ही पूरा होता है। जिसके तहत यह व्यवस्था सभी जगह है कि प्रथम वर्ष पूरा करने पर सर्टिफिकेट प्रदान किया जाता है। दो साल पूरा करने पर डिप्लोमा दे दिया जाता है तथा तीन साल में ग्रैजुएशन की डिग्री प्राप्त होती है एवं चौथा साल रिसर्च ओरिएन्टेशन का होता है। जिससे विद्यार्थी अपनी रुचि के हिसाब से विशेषज्ञता की दिशा में अनुसंधान के लिए तैयार हो सके।
साथ ही भारत में अब इसका एक लाभ यह होगा कि कोई यदि चाहे तो अपने ग्रैजुएशन में समाजशास्त्र पढ़ने के साथ-साथ मेडिकल अथवा इंजीनियरिंग की पढ़ाई भी कर सकता है। विदेशों में छात्र आर्ट और इंजिनियरिंग की पढ़ाई एक साथ दोनों कोर्स लेकर कर सकते हैं। इस पैटर्न को अपनाने का लाभ यह होता है कि युवाओं में एक होलीस्टिक-एप्रोच विकसित होती है। नवचार की संस्कृति भी इससे मजबूत होती है। समग्रता और इनोवेशन के नजरिए का विकास कैसे हो इसी बात को ध्यान में रखते हुए भारत ने अपनी नई राष्टृय शिक्षा नीति में नवाचारी संस्कृति के विकास हेतु पर्याप्त अभ्यासों को समाहित करने का प्रयास किया है। ताकि अनुसंधान के क्षेत्र में प्रवेश करने वाले विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति के साथ सहज वातावरण में नयी खोजों और प्रयासों का परिवेश प्रदान किया जा सके। विद्यार्थी नई शिक्षा व्यवस्था के तहत ग्रैजुएशन के बाद सीधा पांच से छः वर्ष पी.एच.डी. करने में लगाऐगें। ताकि शोधार्थी अच्छे शोध-पत्र प्रकाशित कर सके और अन्य शिक्षण संस्थाओं के अकादमिक आयोजनों में एक्सपोजर ले सके और अपने देश व समाज को कोई सार्थक योगदान दे सके।
निष्कर्षतः नई शिक्षा नीति-2020 नए भारत की नयी जरुरतों के हिसाब से एक अच्छा डृफट है। जो वैश्विक मांगों के साथ-साथ स्थानीयता को समझते हुए भारतीय सामाजिक-सांस्कृतिक मूल्यों व मान्यताओं के संरक्षण और संवर्द्धन का संयोजन करेगी और हमारी स्थानीय जरुरतों को पूरा करेगी। इन सभी मोर्चां पर नई राष्टृय शिक्षा नीति-2020 एक मार्ग-दर्शक दस्तावेज के रुप में विजनरी-डाक्यूमेंट की भूमिका में उभरेगा। इस शानदार स्वपन को यथार्थ में बदलने के उद्यम की जरुरत है। किसी, नीति, नियम या योजना को जमीन पर उतारना ही उसकी सफलता की असल कसौटी है। इस बेहतरीन नीति को नीयत के साथ लागू किया जायेगा तो निश्चित ही यह नए भारत के निर्माण के साथ देश को विश्वशक्ति के रुप स्थापित करने में मददगार बनेगी।
लेखक युवा समाजशास्त्री है! e-mail:prof.ranarakesh@gmail.com

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