इतिहास के तथ्यों के साथ खिलवाड़ क्यों?

शिव कुमार गोयल
कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने दिल्ली के जामिया मिलिया क्षेत्र में स्थित बटाला हाउस में हुई मुठभेड फर्जी थी सिमी से ज्यादा खतरनाक संघ है, मुंबई में ताज होटल पर हमले के दौरान पुलिस अधिकारी करकरे की मृत्यु पाकिस्तानी आतंकवादियों ने नही हिंदूवादियों ने की जैसे शिगूफे छोडऩे की श्रंखला में अब नया शिगूफा छोड़ा है-सावरकर ने भारत विभाजन का समर्थन किया था-जिन्ना ने नहीं।
पाकिस्तान द्वारा भारत पर किये आक्रमण के दौरान श्री चिरंजीव का आकाशवाणी से झूठिस्तान प्रसारित किया जाया करता था। उसमें वे पाकिस्तान द्वारा भारत के विरूद्घ किये जाने वाले निराधार व शरारतपूर्ण दुष्प्रचार का भण्डाफोड़ कियाा करते थे। आज पाकिस्तानी मीडिया को भारत के विषय में किसी प्रकार के दुष्प्रचार की आवश्यकता नही रह गयी है। दिग्विजय सिंह भारत की सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी के महासचिव के नाते उसकी ओर से अपनी भूमिका को और बढ़ा चढ़ाकर पेश करने को स्वत: तत्पर दिखते है।
सावरकर ने भारत विभजन का समर्थन किया था यह कहकर दिग्गी राजा ने अपनी मानसिक विकृति व इतिहास के अज्ञान का ही भौंडा प्रदर्शन किया है। इतिहास का तथ्य तो यह है कि वीर सावरकर ने न केवल गुरू से अंत तक भारत विभाजन का पग पग पर डटकर विरोधा किया अपितु जीवन के अंतिम श्वास तक वे भारतको पुन: अखण्ड देखने का सपना मन में संजाए रहे।
मुस्लिम लीग की कुटिल योजना
24 मार्च 1940 को मुस्लिम लीग ने अपने लाहौर अधिवेशन में भारत का विभाजन कराकर नये इस्लामी राज पाकिस्तान बनाए जाने की मांग का प्रस्ताव पेशा किया। प्रस्ताव में कहा गया हिंदू और मुसलमान अलग अलग कौम हैं। दोनों के बीच कोई समानता नही है।
मियां जिन्ना ने कहा हिंदू और मुसलमान कभी एक संयुक्त राष्ट्र के रूप में रह सकते हैं यह ए क कोरा स्वप्न है। राष्ट्र की किसी भी परिभाषा के अनुसार मुसलमान एक राष्ट्र हैं अत: उनका अपना राज्य होना चाहिए। (सीएच फिलिप्स लिखित छि इबोल्यूशन आफ इंडिया एण्ड पाकिस्तान पृष्ठ 253-54)।
मुस्लिम लीग की भारत विभाजन की मांग का कड़े शब्दों में विरोध करते हुए वीर सावरकर ने एक दिसंबर 1940 को हिंदू महासभा के मदुरा अधिवेशन में कहा मुस्लिम लीग का भारत विभाजन का प्रस्ताव हमारी मातृभूमि के टुकड़े टुकड़े करने, उसे खंडित करने की कुटिल योजना का अंग है। कांग्रेस सहित सभी राष्ट्रवादी दलों को भारत को खण्डित करने की इस मनोवृत्ति को मिलकर असफल करना चाहिए।
अगले वर्ष अप्रैल 1941 में मुस्लिम लीग के मद्रास अधिवेशन में भी मियां जिन्ना ने धमकी देते हुए कहा-यदि ब्रिटिश सरकार मुस्लिम लीग की पाकिस्तान की मांग को अस्वीकार करती है तो वह बाहरी सहायता (उनका संकेत पेन इस्लामिक गठबंधन के देशों में से था) से पाकिस्तान के निर्माण में संकोच नही करेंगे।
सावरकर जी का करारा उत्तर
मियां जिन्ना की इस धमकी पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए वीर सावरकर ने कहा पैन इस्लामिक गठबंधन का मुकाबला हिंदू बौध गठबंधन से किया जाएगा जो जम्मू से जापान तक फैला हुआ है। उन्होंने जिन्ना को चेतावनी देते हुए कहा हिंदुस्तान ने शक हूण, आदि विदेशियों के आक्रमण देखे हैं तथा उन्हें परास्त कियाा है। मियां जिन्ना विदेशी सहायता से हमारे राष्ट्र को खंडित करने का सपना कदापि न देखें।
वीर सावरकर अपने भाषणों में खुलकर भारत विभाजन की योजना को राष्ट्रघाती बताकर उसका कड़ा विरोध करते थे जबकि मियां जिन्ना अपने भाषणों में जहर उगलते हुए कहते थे कि मुसलमान अल्पसंख्यक नही वरन एक राष्ट्र हैं और उनका अपना अलग राज्य होना चाहिए। देश के वे क्षेत्र जहां मुसलमानों की संख्या अधिक है जैसे भारत के पश्चिमोत्तर व पूर्वी इलके इन्हें मिलाकर स्वतंत्र व सार्वभौम राज्य बना देना चाहिए। हम दस करोड़ मुसलमान एक राष्ट्र है जिनके पास उनकी स्वयं की संस्कृति व सभ्यता है। भाषा है, स्त्री पुरूषों के विशेष पहनावे हैं। एक ही साहित्य व एक ही विचार है। नियम एवं आचार विचार में सामंजस्य है। एक ही इतिहास व परंपरा है।
श्री सावरकर ने भाषणों व वक्तव्यों के माध्यम से घोषणा की कि भारत सदैव से एक राष्ट्र रहा है। अनेक ऐसे देश हैं जहां अनेक जातियां, विभिन्न मत पंथों के अनुयाई रहते हैं किंतु उस देश की राष्ट्रीयता को चुनौती नही दी जा सकती।
लार्ड क्रिप्स को जवाब
मार्च 1942 में क्रिप्स मिशन भारत आया्र। वीर सावरकर के नेतृत्व में डा. मुंजे, डा. श्यामप्रसाद मुखर्जी, ला. गणपतराय तथा ज्वाला प्रसाद श्रीवास्तव ने लार्ड क्रिप्स से भेंटकर स्पष्ट कहा आत्मनिर्णय की आड़ में भारत का विभाजन किसी भी हालत में स्वीकार नही किया जा सकता। क्रिप्स के मुंह से निकला भारत कभी एकीकृत राज्य नही रहा। सावकर जी ने कहा हमारी पवित्र मातृभूमि हिंदुस्थान सांस्कृतिक व राष्ट्रीय दृष्टिकोण से अविभाज्य इकाई है। मैं समयाभाव के कारण इतिहास व भौगोलिक तत्य प्रस्तुत नही कर रहा किंतु हमारे पास ऐसे तमाम तथ्य हैं जो आपके कथन को असत्य सिद्घ कर सकते हैं।
क्रिप्स से भेंट के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए सावरकर जी ने कहा हम मुस्लिम लीग के भारत विभाजन के षडयंत्र को कदापि सफल नही होने देंगे। अंतिम क्षणों तक पाकिस्तान गठन का विरोधा करेंगे।
लुई फिशर निरूत्तरित हो गये
जून 1942 में अमरीकी पत्रकार व लेखक लुई फिशर भारत आए। वे मुस्लिम लीग की भारत विभाजन की मांग के संबंध में राजनेताओं के विचार जानना चाहते थे। उन्होंने पहले जिन्ना से भेंट की। अगले वीर सावरकर से भेंट करने पहुंचे। लुई फिशर ने सावरकर जी से प्रश्न किया जब मुस्लिम लीग पाकिस्तान की मांग कर रही है तो आप भारत विभाजन को स्वीकार क्यों नही कर लेते? सावकर जी ने फिशर से प्रतिप्रश्न किया नीग्रो अमरीका में नीग्रोलैंड की मांग करते आ रहे हैं, आप नीग्रोलैंड की मांग क्यों नही मान लेते? फिशर ने उस मांग को राष्ट्रविरोधी बताया। सावरकरजी ने कहा ठीक उसी प्रकार पाकिस्तान की मांग को स्वीकार करना राष्ट्रविरोधी व अप्रजातांत्रिक मानते हैं हम।
लुई फिशर ने कालांतर में एक लेख लिखा-सावरकर के हृदय में मैंने जहां राष्ट्रभक्ति की असीमित भावना पाई वहीं जिन्ना के हृदय में भारत व भारतीय संस्कृति के प्रति घोर घृणा के बीच दिखाई दिये।
गांधीजी को पत्र लिखा
श्री सावकर जी ने अपने स्तर पर भारत विभाजन के विरोध में राष्ट्रीय जागरण के कार्य में लगे रहे। कांग्रेस के नेता सी. राजगोपालचारी जिन्ना से पत्र व्यवहार करते रहे। अंदर ही अंदर कांग्रेस भारत विभाजन की भूमिका बनाने में लगी रही। जब गांधी जी ने सितंबर (1944) में जिन्ना से भेंट करने जाने का कार्यक्रम बनाया तो सावरकर जी को लगा कि इससे मियां जिन्ना का दुस्साहस बढ़ेगा तथा गांधीजी से सौदेबाजी करेगा। सावकरजी ने डा. श्यामप्रसाद मुखर्जी को गांधीजी के पास पत्र लेकर भेजा। डा. मुखर्जी ने गांधीजी से कहा-आप मियां जिन्ना के पास जाकर उसका भाव न बढ़ाएं। भारत माता को खंडित करने के दुष्टतापूर्ण व राष्ट्रद्रोह में संलग्न व्यक्ति को महत्व कदापि नही दिया जाना चाहिए। किंतु गांधीजी तो हिंदू मुस्लिम भाईचारे की मृगमारीचिका में फंसे हुए थे। उन्होंने मुखर्जी के सुझाव को अनदेखा कर जिन्ना से भेंट की। मियां जिन्ना का अहंकार इतना चरमोत्कर्ष पर पहुंच गया कि उसने गांधीजी व कांग्रेस की योजना को अंगहीन कीड़े लगा तथा दीमक खाया पाकिस्तान कहकर अस्वीकार कर दिया।
सावकरजी ने चेतावनी देते हुए कहा कि जिस कांग्रेस का जन्म भारतीय राष्ट्र का एकता के सूत्र में बांधने के लिए हुआ था, वह अपने लक्ष्य से पीछे हट गयी है। वह मिथ्या व नकली राष्ट्रीयता का शिकार बनकर मातृभूमि को विभाजित करने को तैयार हो गयी है।
अखंड हिंदुस्थान सम्मेलन
सावरकर जी ने भारत विभाजन के विरोध में 7 अपगैल और 8 अक्टूबर 1944 को दिल्ली में हिंदू महासभा भवन में अखंड हिंदुस्थान सम्मेलन करने का कार्यक्रम बनाया।
सम्मेलन के विषय में प्रसारित विज्ञप्ति में उन्होंने कहा-जिन्ना पहले की अपेक्षा अधिक दृढ़ता से देश् के विभाजन की मांग कर रहे हैं। गांधीजी इस असहनीय मांग को स्वीकार करने के लिए तैयार होते दिखाई दे रहे हैं। मुसलमान सार्वजनिक रूप से घोषणा कर रहे हैं कि उन्हें तथाकथित भारत राष्ट्र से कोई सरोकार नही है। उनका स्वयं काा अपना राष्ट्र है तथा वे अधिक से अधिक प्रांतों का विभाजन चाहते हैं।

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