सृजनाभिनंदनम उत्सव में रिकॉर्ड पुस्तकों का विमोचन एवं परिचर्चा हुई सम्पन्न : नव सृष्टि संवत पर दिग्गज साहित्यकारों, कलाकारों को सृजनविभूति सम्मान से किया गया विभूषित

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नई दिल्ली । ( विशेष संवाददाता) यहां स्थित हिंदी भवन में वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर राकेश छोकर, दिल्ली विश्वविद्यालय की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ रीता नामदेव एवं वाङ्गमय कला संगम द्वारा आयोजित सृजनाभिनंदनम उत्सव में देश विदेश के नामचीन साहित्यकारों, अभिनय, रंगमंच ,कला जगत के दिग्गजों ने शिरकत की।इस अवसर पर 11 पुस्तकों के विमोचन/ परिचर्चा के साथ साथ विभिन्न सम्मान भी प्रदान किये गये। उक्त कार्यक्रम के संयोजक के रूप में श्री राकेश छोकर का विशेष पुरुषार्थ भाव रहा। जिन्होंने कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए हमें बताया कि इस कार्यक्रम में देश के अनेक नामचीन साहित्यकारों , कलाकारों ,पत्रकारों ने भाग लिया।


उन्होंने बताया कि विशिष्ट अतिथियों के द्वारा दीप प्रज्वलन, सरस्वती वंदना के साथ आरंभ हुए उत्सव में प्रथमतया अतिथियों का अभिनंदन एवं सम्मान किया गया।मानद कुलपति,निर्माता निर्देशक एवं धराधाम प्रमुख डॉ सौरभ पांडेय के आशीर्वचन उपरांत वरिष्ठ रचनाकार नई दिल्ली के मदनलाल मनचंदा,झाबुआ, म.प्र. के यशवंत भंडारी यश,अभिनेता ,चार्ली चैप्लिन द्वितीय डॉ राजन कुमार मुंबई,डॉ विनय कुमार सिंघल गुरुग्राम, डॉ वीणा शंकर शर्मा मेरठ, अंजू दासन, सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता डॉ राकेश कुमार आर्य जैसे दिग्गजो की रिकॉर्ड पुस्तकों का विमोचन किया गया। डॉ रीता नामदेव ,मदन लाल मनचंदा,यशवंत भंडारी यश की पुस्तकों पर परिचर्चा प्रसिद्ध व्यंग्यकार, आलोचक सुभाष चन्दर,उर्दू के साहित्यकार हक़्क़ानी अल कासमी, राकेश छोकर, डॉ राकेश कुमार आर्य, राजन कुमार ने की। डॉ राकेश कुमार आर्य ने कहा कि भारत को समझने के लिए पहले सनातन को समझना होगा। उन्होंने कहा कि साहित्य वह होता है जो समाज और संसार को सुव्यवस्थित रखने की क्षमता रखता हो। केवल श्रृंगार रस में डूब कर समाज का अहित करने वाले पुस्तक लेखन को साहित्य नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि रामचरितमानस को समझने के लिए हमें रामायण को भी पढ़ना पड़ेगा। डॉ रीता नामदेव के प्रयास की भूरि भूरि प्रशंसा करते हुए डॉक्टर आर्य ने कहा कि उनका प्रयास वंदनीय है। हमें प्रेम को भारतीय अर्थ और संदर्भ में समझना होगा। डॉ आर्य ने कहा कि भारतीय वैदिक वांगमय प्रेम की पराकाष्ठा का नाम ही धर्म है। जो हमको जोड़ने का काम करता है। प्रेम सृजन का, श्रद्धा का, स्नेह का, वात्सल्य का, देश भक्ति का, राष्ट्रभक्ति का, सामाजिक समरसता और विश्व बंधुत्व का प्रतीक है। डॉ आर्य ने कहा कि आज हम 02 अरब 96 करोड़ 8 लाख 53 हजार 125 वां सृष्टि संवत बना रहे हैं, जो कि संसार का सबसे प्राचीन सृष्टि संवत है। यह हमारा का सौभाग्य है कि हम सबसे प्राचीन सृष्टि संवत के मानने वाले हैं। प्रथम सत्र प्रसिद्ध लेखक मदनलाल मनचंदा को समर्पित रहा। जिनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर श्री राकेश छोकर द्वारा बहुत ही गहन और विस्तृत प्रकाश डाला गया और पूरे सदन की ओर से उनके कृतित्व का अभिनंदन किया गया। वक्ताओं ने साहित्य और समाज पर अपना अपना विद्वत्तापूर्ण संबोधन प्रस्तुत किया। उन्होंने इस बात की आवश्यकता अनुभव की कि साहित्य को युवा निर्माण राष्ट्र निर्माण और विश्व निर्माण की उच्चतम भाव से प्रेरित होना चाहिए। वक्ताओं का मानना था कि भारत ने ही संसार को प्रत्येक क्षेत्र में नेतृत्व प्रदान किया है।
दोनों सत्रों में क्रमशः सरस्वत अतिथि के रूप में धराधाम प्रमुख, निर्माता निर्देशक ,मानद कुलपति डॉ सौरभ पांडेय,ट्रू मीडिया के संपादक डॉ ओमप्रकाश प्रजापति,अध्यक्षता डॉ विनय कुमार सिंघल, डॉ राकेश कुमार आर्य ने की।मुख्य आतिथ्य सुभाष चन्दर,चंद्रमोहन मनचंदा का रहा।विशिष्ट आतिथ्य हक़्क़ानी अल कासमी (संपादक: अंदाज ए बयां) नई दिल्ली,डॉ राजन कुमार : गिनीज़ बुक रिकॉर्ड होल्डर ,फ़िल्मनिर्माता निर्देशक,अभिनेता, कवि,लेखक) मुंबई,नरसिम्हा मूर्थी (अंतरराष्ट्रीय विचारक) बंगलुरू,नमिता राकेश (प्रसिद्ध लेखिका एवं कवयित्री, पूर्व निदेशक: गृह मंत्रालय)फरीदाबाद,चंद्रमणि ब्रह्मदत्त,(अध्यक्ष: इंद्रप्रस्थ लिटरेचर फेस्टिवल)नई दिल्ली, प्रमुख लेखिका डॉ संजीव कुमारी, यशवंत भंडारी यश (प्रसिद्ध कवि, विचारक)झाबुआ, म. प्र.,ओम सपरा नई दिल्ली, वीरेंद्र सिंह पथिक,अश्विनी दासन, पीयूष प्रभात, डॉ किरण खटाना बैसला, आर्टिस्ट उदित नारायण बैसला, आर्टिस्ट हनुमान सैनी, पत्रकार शेखरसिंह पंवार, युवा कवि जितेंद्र पांडेय, दैनिक सच कहूं के संपादक ऋषिपाल अरोड़ा,ब्यूरों चीफ रविन्द्र सिंह, सरिता सिंह, सुश्री रेखा, रंगकर्मी जितेंद्र सिंह, पत्रकार एस एस डोगरा, ओमवीर सिंह, पत्रकार अजय बावरा,ब्यूरो चीफ अमित गुप्ता, डॉ महेश वर्मा, निधि भार्गव मानवी, डॉ राजेश शर्मा,सुरजीत शौकीन,पत्रकार संजय जैन आदि की उपस्थिति रहीं।
प्रबुद्ध विभूतियों को अभिनंदन पत्र एवं सृजन विभूति सम्मान से सम्मानित किया गया। वाङ्गमय कला संगम की ओर से डॉ रीता नामदेव को वाग्देवी विभूषण, डॉ राकेश छोकर को वाग्देवी वाचस्पति से विभूषित किया गया। स्वागत भाषण राकेश छोकर, आभार डॉ रीता नामदेव ने जताया।संचालन डॉ वीणा शंकर शर्मा ने किया। ज्ञात रहे कि डॉक्टर रीता नामदेव और श्री विनय कुमार सिंघल दोनों ने ही साहित्य की अप्रतिम आराधना की है। श्री सिंघल आंखों से बहुत ही कम दिखाई देने के बावजूद साहित्य की साधना में लगे हुए हैं। जिनकी एक-एक पंक्ति मां भारती की आरती मगन दिखाई देती है। इसी प्रकार डॉ संजीव कुमारी हैं जिन्होंने आल्हा ऊदल पर शोध पूर्ण कार्य करते हुए आल्हा की तर्ज में काव्यात्मक रचनाकार इतिहास को सजीवता प्रदान की है। उनका साहित्यिक सफर भी गौरवपूर्ण रहा है।

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