सत्येन्द्र नाथ श्रीवास्तव ‘मतवाला’ बस्ती की एक खास शक्सीयत

डा.राधे श्याम द्विवेदी
सत्येन्द्र नाथ श्रीवास्तव मतवाला 4 अक्टूबर 1946 को गोरखपुर में एक कायस्थ परिवार में जन्म लिए थे। उनकी शिक्षा सेंट एंड्रयूज कालेज गोरखपुर और गोरखपुर विश्व विद्यालय (अब दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्व विद्यालय) से हुई थी । वह भारतीय स्टेट बैंक के अनेक शाखाओं में प्रबंधक के रूप में दीर्घ काल तक सेवा दिए थे। बस्ती जिले के नगरपालिका क्षेत्र के काली कुंज बैरियहवा मोहल्ले में उन्होंने अपना आशियाना बना रखा है। सेवा मुक्त होने पर वह बस्ती को अपनी कर्म भूमि बनाई । वह
भारतीय स्टेट बैंक के कई शाखाओं के प्रबंधक रहे । जो भी उनके पास किसी काम के लिए जाता तो वह उनके कार्यशैली और व्यवहार से पूर्ण रूपेण प्रभावित हो जाता था।

साहित्य साधना और सामाजिक संगठनों मैं भरी ऊर्जा:-

बैंक से अवकाश प्राप्त करने के बाद सत्येंद्र नाथ श्रीवास्तव ‘मतवाला’ अंतिम समय तक साहित्य साधना में लगे रहे। उनके पत्नी के साथ 5 पुत्रियां और एक पुत्र पौत्र के साथ भरा पूरा परिवार रह रहा है। वह विभिन्न सामाजिक सगठनों से जुड़े थे। साहित्य में उनकी गहरी अभिरुचि थी वह कायस्थ वाहिनी बस्ती मंडल संरक्षक रहे। वे प्रेम चंद साहित्य और जन कल्याण संस्थान के वे संस्थापक रहे। उनकी रचनाएं जहां पराग तथा नंदन जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं और जनपद के क्षेत्रीय पत्र पत्रिकाओं में नियमित रूप से प्रकाशित होती रही हैं। उन्होंने बस्ती जिले का इतिहास, बस्ती जिले का गौरव और बस्ती मंडल का इतिहास, बस्ती मंडल का गौरव नामक पुस्तक लिखकर इस मंडल के स्थानीय कवियों, समाजसेवियों तथा साहित्यकारों को समुचित स्थान दिया है। वर्तमान समय में पूर्वांचल के गौरव नामक पुस्तक पर उनका कार्य चल रहा था। उन्हें डा. वी.के. वर्मा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज की ओर से ‘राष्ट्रीय सेवा सम्मान’ सम्मान से सम्मानित किया गया था। अन्य अनेक संस्थाओं और संगठनों ने भी उन्हें सम्मानित कर रखा है।

बस्ती के यायावर निराला थे मतवाला जी :-

अपनी कविताओं के माध्यम से लोगों के दिलों में हमेशा बसेे रहेंगे। वे साहित्य जगत के यायावर थे। उनके नाम के अनुरूप उनका जीवन भी था। वे सदा ही मतवाले अंदाज में ही जीते थेे। मतवाला जी के जीवन में भी उतार-चढ़ाव आते रहे हैं पर उन्होंने अपने सुख पर कभी दुःख को वरीयता नहीं दिया। उनके व्यक्तित्व में हंसी, रुमानियत भरी पड़ी है । कवि सम्मेलन जैसे किसी कार्यक्रम को आयोजित करना अपने आप में एक दुरूह कार्य है , लेकिन मतवाला जी की लिए कार्यक्रम आयोजित करना दाएं बाएं हाथ का खेल था । मतवाला जी अपने आप में एक काव्योत्सव थे । कवि तथा साहित्यकार के रुप में मतवाला जी जहां जनपद में हमेशा ऊर्जावान रहें , वहीं बैंक कर्मी तथा समाजसेवी के रुप में सदैव तत्पर और अपनी पहचान को कायम रखी। बैंक में उन्होंने अपना कार्य हंसते मुस्कुराते सेवाभाव से सम्पन्न किया था।

स्वास्थ्य में गिरावट और महाप्रयाण:-

पिछले कुछ दिनों से उनके स्वास्थ्य में गिरावट आई। प्लेट लेट में भारी कमी के चलते उन्हें लखनऊ के डा. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था ।
77 वर्षीय मतवाला जी का 18 सितंबर 2023 की रात निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार बस्ती के कुआनो नदी मूडघाट के तट पर किया गया। मुखाग्नि उनके पुत्र आकाश श्रीवास्तव ने दी। बड़ी संख्या में बस्ती वासी, धार्मिक और विभिन्न राजनीतिक दलों के लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। उनका निधन साहित्य के क्षेत्र में बस्ती के लिए अपूर्णनीय क्षति हुई है। हम उनके उन्नत आध्यात्मिक जीवन की कामना करते हैं।

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