भारत के 50 ऋषि वैज्ञानिक अध्याय – 9 भारत के महान रसायनशास्त्री नागार्जुन

images (75)

भारत के 50 ऋषि वैज्ञानिक
अध्याय – 9

भारत के महान रसायनशास्त्री नागार्जुन

छत्तीसगढ़ का भारत के सांस्कृतिक इतिहास और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान है। आज भी यह प्रदेश अपनी विशेष पहचान रखता है। इसी प्रदेश में दूसरी शताब्दी में नागार्जुन नाम के एक महान रसायनशास्त्री का जन्म हुआ था। नागार्जुन भारत की मनीषा के प्रतिनिधि ऋषियों में से एक हैं।
इनका जन्म महाकौशल में हुआ था। उस समय महाकौशल की राजधानी श्रीपुर हुआ करती थी ,जो आजकल छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में सिरपुर के नाम से जानी जाती है।
हमारे घरों में रसोई रस और रसायन का केंद्र हुआ करती थी।
रस और रसायन शब्द से ही रसोई शब्द बना है। रसोई में अनेक प्रकार के रस रसायन रखे होते थे। जिन्हें दादी मां या घर की कोई भी वृद्ध महिला भोजन आदि में उतने अनुपात में डाला करती थी ,जिससे परिवार के सभी लोग स्वस्थ रहें। इसीलिए रसोई से परिवार के प्रत्येक सदस्य के स्वास्थ्य का सीधा संबंध होता था। यही कारण था कि घर में दादी मां या कोई भी वृद्ध महिला परिवार के किसी भी सदस्य के अस्वस्थ होने पर उसे रसोई में से ही कोई न कोई ऐसी चीज बना कर देती थी, जिससे वह स्वस्थ हो जाता था। हींग, हल्दी, सौंफ, जीरा, इलायची, काली मिर्च, सिरका , शहद, छाछ, दही आदि रसोई की शान हुआ करते थे। आज हमने अपनी रसोई को रस और रसायन वाली रसोई के स्थान पर किचन बना दिया है। जिसमें स्वास्थ्य संबंधी उपरोक्त चिंतन को निकाल कर बाहर फेंक दिया गया है। अब यह किचन किच किच अर्थात प्रत्येक प्रकार की अस्त व्यस्तता और अव्यवस्था का केंद्र बन गई है।
रसोई को रस और रसायन का केंद्र बनाने में हमारे चरक, सुश्रुत जैसे विद्वानों का अथवा चिकित्सा संबंधी वैज्ञानिकों का विशेष योगदान रहा। एक लंबी प्रक्रिया से गुजरने के बाद इन्होंने रसोई का नियंत्रण दादी मां या किसी भी ऐसी वृद्ध महिला को दिया जो सबके साथ न्याय करने में सक्षम होती थी। यही कारण था कि अब से कुछ समय पूर्व तक भी घरों में दूध आदि बांटने की जिम्मेदारी घर में दादी मां को दी जाती थी, जो प्रत्येक पोती पोते आदि को निष्पक्ष होकर दूध आदि का वितरण किया करती थी। ऐसी ही निष्पक्ष महिला के हाथों में हमारा स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का निदान हुआ करता था।
जब तक भारत में महिलाओं को शिक्षा लेने का पूर्ण अधिकार था तब तक वह स्वास्थ्य संबंधी नियमों और तत्संबंधी साहित्य का अध्ययन अवश्य करती थीं। कालांतर में जब महिलाओं से वेद के पठन-पाठन का अधिकार छीन लिया गया तो भी वह परंपरा से स्वास्थ्य संबंधी कुछ सुने सुनाए ऐसे नियम और सूत्रों को पकड़े रहीं, जिनसे परिवार स्वस्थ रह सकता था।
नागार्जुन ने रस रसायन की ओर विशेष ध्यान दिया। यही कारण था कि उन्होंने ‘सुश्रुत संहिता’ के पूरक के रूप में ‘उत्तर तन्त्र’ नामक पुस्तक लिखी। नागार्जुन ने रसायन शास्त्र और धातु विज्ञान पर बहुत शोध कार्य किया। रसायन शास्त्र पर इन्होंने कई पुस्तकों की रचना की। जिनमें ‘रस रत्नाकर’ और ‘रसेन्द्र मंगल’ बहुत प्रसिद्ध हैं। अपनी ‘उत्तर तंत्र’ नाम की पुस्तक में नागार्जुन ने अनेक प्रकार की औषधियां बनाने के तरीके बताए हैं। मनुष्य की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के निदान के लिए उन्होंने ‘आरोग्यमंजरी’ नामक पुस्तक की भी रचना की थी। इसके अतिरिक्त उन्होंने कक्षपुट तंत्र, योगसर और योगाष्टक नामक पुस्तकों का लेखन किया। इन पुस्तकों के माध्यम से उन्होंने मानव शरीर में होने वाली अनेक प्रकार की व्याधियों की औषधियां तैयार करने के उपाय बताए।
नागार्जुन ने अपनी बात को देवताओं से संवादात्मक शैली में प्रस्तुत किया है। दिव्य शक्तियों के प्रति अत्यधिक आकर्षित रहने वाली भारतीय जनता पर उनके इस प्रकार के लेखन का विशेष प्रभाव पड़ा । जिससे लोगों में यह धारणा बनी कि उनका विशेष दिव्य आत्माओं से सीधा संबंध है और वह भगवान के संदेशवाहक हैं। अपनी ‘रस रत्नाकर’ पुस्तक में उन्होंने पारे की योगिक बनाने के प्रयोगों को भी स्पष्ट किया है इसके अतिरिक्त चांदी, सोना, टीन और तांबे की कच्ची धातु निकालने और उसे शुद्ध करने के उपाय भी इस पुस्तक में दिए गए हैं। उनके भीतर यह विलक्षण प्रतिभा थी कि वे पारे से सोना बना सकते थे। पारे से संजीवनी बनाने के लिए नागार्जुन ने पशुओं और वनस्पति तत्व सहित अम्ल और खनिजों का प्रयोग करने की विधि भी बताई है। हीरे, धातु और मोती घोलने के लिए उन्होंने वनस्पति से बने तेजाब का परामर्श दिया है। उसमें खट्टा दलिया, पौधे और फलों के रस को सम्मिलित किया गया है। पुस्तक में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अन्य धातुओं को किस प्रकार सोने में परिवर्तित किया जा सकता है।
हमारे लिए यह कितने गर्व और गौरव का विषय है कि पश्चिमी देशों के लोग आज भी नागार्जुन का अनुकरण करते हैं। कहने का अभिप्राय है कि जिस पश्चिम की ओर हम जीवन के अनेक क्षेत्रों में प्रेरणा लेने के लिए उल्लू की भांति मुंह उठाए देखते रहते हैं, वही पश्चिमी जगत अभी भी हमें अघोषित रूप से अपना गुरु मानकर हमारे ऋषियों की ओर देखता है। हमारे साथ समस्या यह है कि हम अपने ऋषियों के बारे में ही नहीं जानते।
हमें नागार्जुन जी के बारे में यह भी समझ लेना चाहिए कि एक नागार्जुन बौद्ध काल में भी हुए हैं। जबकि एक दूसरे नागार्जुन का जन्म सन 931 में गुजरात में सोमनाथ के निकट दैहक नामक किले में भी हुआ माना जाता है।
कुछ भी हो नागार्जुन एक ऐसे चिकित्सा शास्त्री वैज्ञानिक थे जिन्होंने मानव देह को लेकर विशेष कार्य किया और मनुष्य देह को देर तक काम में लाकर शरीर में बैठे आत्मा नाम के रथी के लिए इस रथ को अधिक देर तक कारगर बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण शोधात्मक कार्य किया। उनके इसी परिश्रम को कई लोगों ने उनके द्वारा की गई अमरता की साधना का नाम दिया है।
माना कि इस शरीर को सौ वर्ष की अवस्था से दो सौ चार सौ वर्ष तक और अधिक बनाए रखने को करोड़ों अरबों वर्ष की सृष्टि और उसके पश्चात फिर सृष्टि के अनवरत कालक्रम में अमरता नहीं कहा जा सकता ,परंतु मृत्यु को पीछे धकेलने का और अपने शरीर रूपी रथ की उचित संभाल करने का काम भी बहुत बड़ी साधना ही होता है। आज का पश्चिमी जगत जब केवल पेट भरने और जीभ के स्वाद के लिए नए-नए खाद्य पदार्थ बना रहा है तो उसने सारे संसार के मनुष्य जीवन को नर्क बना दिया है । तब अपने नागार्जुन जैसे महान साधक ऋषी वैज्ञानिकों का पुरुषार्थ निश्चय ही समझ में आ सकता है कि उन्होंने अमरता की साधना करके संसार का कितना भारी उपकार किया था ?
इनके जीवन के कालखंड पर निश्चय ही स्पष्टता होनी चाहिए।

डॉ राकेश कुमार आर्य
संपादक : उगता भारत

Comment:

Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
betnano giriş
betnano giriş
vdcasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betebet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betebet giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
parmabet giriş
grandpashabet giriş
betpas giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
pusulabet giriş
parmabet giriş
parmabet giriş
betnano giriş
betparibu giriş
grandpashabet giriş
betlike giriş
safirbet giriş
safirbet giriş
betparibu giriş
betlike giriş
parmabet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
parmabet giriş
betlike giriş
vaycasino giriş
betparibu giriş
klasbahis giriş
madridbet giriş
madridbet giriş
mariobet giriş
mariobet giriş
grandpashabet giriş
betlike giriş
parmabet giriş
grandpashabet giriş
betparibu giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
norabahis giriş
parmabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
betebet giriş