भारतीय आदर्श इंटर कॉलेज तिलपता में मनाया गया 74 वां गणतंत्र दिवस

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ग्रेटर नोएडा । (विशेष संवाददाता) यहां स्थित भारतीय आदर्श इंटर कॉलेज तिलपता में 74 वां गणतंत्र बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय से बड़ी गहराई से जुड़े रहे शिक्षा विद श्री लज्जाराम भाटी ने कहा कि इस विद्यालय ने अनेक प्रतिभाएं पैदा करके देश और समाज को दी है। उन्होंने कहा कि जिस समय इस क्षेत्र में दूर-दूर तक शिक्षा का उजाला दिखाई नहीं देता था, उस समय इस पवित्र भूमि पर विद्या का दीप जलाने का कार्य यहां की तत्कालीन पीढ़ी के लोगों ने किया। उसी का परिणाम है कि आज यहां पर हजारों की संख्या में छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। श्री भाटी ने गणतंत्र दिवस के बारे में बताया कि इस दिन 2 साल 11 महीने 18 दिन की घोर तपस्या के पश्चात बने हमारे संविधान को लागू किया गया था। इसी दिन हमारे देश के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद बनाए गए थे।


सुप्रसिद्ध इतिहासकार डॉ राकेश कुमार आर्य ने संविधान की प्रक्रिया की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अंग्रेजों ने 1771 के रेगुलेटिंग एक्ट से लेकर गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935 तक भारत में 15 संविधान लागू किए थे। उन्होंने यह सारा कार्य हमारे देश को गुलाम बनाए रखने के लिए किया था। जुलाई 1946 में देश की संविधान सभा के चुनाव हुए। तब 9 दिसंबर 1940 को डॉ सच्चिदानंद सिन्हा की अध्यक्षता में संविधान सभा की पहली बैठक संपन्न हुई। 11 दिसंबर को संविधान सभा का विधिवत अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद को बनाया गया। बी एन राव द्वारा तैयार किए गए संविधान के उद्देश्य प्रस्तावों को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 13 दिसंबर को पढ़कर सुनाया। इस संविधान सभा में उस समय 389 सदस्य चुने गए थे । परंतु संविधान सभा की पहली बैठक के समय मुस्लिम लीग और नवाब हैदराबाद के सदस्यों ने इसका बाय काट कर दिया था।
डॉक्टर आर्य ने कहा कि आजादी के बाद इस संविधान सभा का पुनर्गठन किया गया। उस समय 289 सदस्य रहे। उसी समय देश के संविधान की प्रारूप समिति का गठन करके उसका अध्यक्ष डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को बनाया गया। 26 नवंबर 1949 को संविधान बनकर तैयार हुआ । जिसे हम आजकल संविधान दिवस के रूप में मनाते हैं। कांग्रेस ने 26 जनवरी 1921 को पहली बार रावी नदी के किनारे पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में पूर्ण स्वाधीनता का संकल्प लिया था। तब बसंत पंचमी का दिन था और यह संयोग है कि इस बार भी इस दिन बसंत पंचमी साथ साथ मनाई जा रही है। 26 जनवरी 1950 को देश का संविधान लागू हुआ और देश के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद बनाए गए। तभी से हम यह दिन राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाते आ रहे हैं।
संस्था के संस्थापक नेताजी बलबीर सिंह आर्य ने कहा कि शिक्षा दीप चलाना बहुत बड़ा यज्ञ है। हमने अपने पूर्वजों से जिस परंपरा को प्राप्त किया है उसे आगे बढ़ाने के लिए जीवन भर संघर्ष करते रहेंगे। श्री आर्य ने कहा कि विद्यालय के माध्यम से देश के लिए सुसंस्कृत युवा पीढ़ी देना उनके जीवन का लक्ष्य है । इसी प्रकार विशिष्ट वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त करते हुए समाजसेवी रईस राम भाटी ने कहा कि भारत का गणतंत्र हमें निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। जीवन में विकास और उन्नति के प्रत्येक अवसर प्रदान करता है। उन्होंने बच्चों से कहा कि उन्हें भी गणतंत्र द्वारा प्रदान किए गए इन अवसरों का सदुपयोग करना चाहिए। श्री भाटी ने कहा कि स्वतंत्रता हमें अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए प्राप्त हुई है । जब हम गुलाम थे तब हमारे ऊपर अनेक प्रकार के पहरे थे और आज हम अपने व्यक्तित्व का स्वतंत्रता पूर्वक चयन कर सकते हैं। इस स्वतंत्रता का सदुपयोग करने से विद्यार्थियों को किसी भी प्रकार से पीछे नहीं रहना चाहिए।
कार्यक्रम का सफल संचालन समाजसेवी और विभिन्न प्रकार के पुरस्कारों के विजेता बालचंद नागर द्वारा किया गया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि भारत अनंत संभावनाओं का देश है। युवा शक्ति में सबसे प्रथम स्थान पर होने के कारण भारत में अनेक प्रकार की संभावनाएं आज भी मौजूद हैं। आवश्यकता इन संभावनाओं को तलाशने की है और तराशने की है। श्री नागर ने कहा कि प्रत्येक गणतंत्र दिवस इन संभावनाओं को तलाशने और तराशने का एक सुअवसर प्रदान करते हुए प्रतिवर्ष हमारे बीच आता है। एक शिक्षक होने के नाते हम सब इन संभावनाओं को तलाशने और तराशने की अपनी जिम्मेदारी को बखूबी समझते हैं।
कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य श्रीमती अमरेश ने सभी उपस्थित महानुभावों और अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर श्री सुखबीर सिंह आर्य, महाशय किशन लाल आर्य, श्री महावीर सिंह आर्य, भाजपा के वरिष्ठ नेता सुनील भाटी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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