गोधन न्याय योजना क्या है, किसानों को इसका लाभ कैसे मिलेगा

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जे. पी. शुक्ला

छत्तीसगढ़ के पशुपालकों को लाभ पहुंचाने के लिए छत्तीसगढ़ में गोधन न्याय योजना चलाई जा रही है। मुख्यमंत्री गोधन न्याय योजना के तहत राज्य सरकार पशुपालन करने वाले किसानों से गाय का गोबर खरीदेगी।

हमारे देश में ज़रूरतमंद लोगों को सुविधाएं मुहैया कराने के लिए भारत सरकार उनकी मदद के लिए तरह-तरह की योजनाएं चलाती रही है। उनका सीधा उद्देश्य गरीब तबके और जरूरतमंद लोगों तक योजनाओं के लाभ को पहुंचाना है। ऐसी कई योजनाएं राज्य सरकारों द्वारा अपने-अपने राज्यों में भी चलाई जाती हैं। कहीं मुफ्त राशन योजना, किसी राज्य में बच्चों या बेटियों के लिए कोई योजना और ज्यादातर राज्यों में तो वृद्धावस्था पेंशन योजना भी चलाई जाती है। ऐसी ही एक योजना छत्तीसगढ़ में भी चलाई जा रही है, जिसका सीधा लाभ उन किसानों को दिया जा रहा है जो पशुपालन करते हैं।

गोधन न्याय योजना क्या है?

छत्तीसगढ़ के पशुपालकों को लाभ पहुंचाने के लिए छत्तीसगढ़ में गोधन न्याय योजना चलाई जा रही है। मुख्यमंत्री गोधन न्याय योजना के तहत राज्य सरकार पशुपालन करने वाले किसानों से गाय का गोबर खरीदेगी। इस योजना के तहत सरकार पशुपालन से खरीदे गए गोबर का उपयोग वर्मीकम्पोस्ट खाद बनाने में करेगी। इस योजना के माध्यम से छत्तीसगढ़ सरकार गायों के लिए भी काम कर रही है।

गोधन न्याय योजना का उद्देश्य

जुलाई 2020 में शुरू की गई GNY योजना के अनुसार, खरीदे गए गाय के गोबर से वर्मीकम्पोस्ट और अन्य उत्पाद तैयार करने के लिए स्वयं सहायता समूहों (SHG) को शामिल किया जाना था। दावा किया गया कि गोबर की खरीद और इसे वर्मीकम्पोस्ट में बदलने से राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा और पशुपालकों को इसका लाभ मिलेगा।

शुरुआत में वर्मीकम्पोस्ट की कीमत आठ रुपये प्रति किलो तय की गई थी। लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर रु10 और फिर रु 12 प्रति किलो कर दी गयी, जिसकी छत्तीसगढ़ सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की।

योजना के तहत फरवरी, 2021 तक राज्य भर में कुल 40.359 लाख (4.03 मिलियन) क्विंटल गोबर की खरीद की गई थी। उम्मीद के विपरीत प्रदेश भर में खरीदे गए 40.359 लाख क्विंटल गोबर में से कुछ ही मात्रा में गोबर का उपयोग वर्मी कम्पोस्ट बनाने के लिए किया गया। यदि पूरे गोबर का उपयोग किया जाता तो राज्य भर में लगभग 20 लाख क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट तैयार हो जाता, लेकिन राज्य के कृषि मंत्री के अनुसार प्रदेश भर में लगभग 95,680 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट ही तैयार हुआ है। कुल तैयार वर्मीकम्पोस्ट में से आधे से भी कम किसानों को बेचा गया।

सरकार किसानों से जो गोबर खरीदती है, उसका इस्तेमाल वर्मीकम्पोस्ट खाद बनाने में होता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जहां पिछले साल तक सरकार किसानों से 100 करोड़ रुपये तक का गोबर खरीद चुकी है, वहीं 50 लाख टन गोबर किसानों और गौशालाओं से खरीदा गया है।

दो रुपये प्रति किलो की दर से खरीदा जाएगा गोबर

एक रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा गोधन न्याय योजना के माध्यम से पहली बार 21 जुलाई 2020 को गोबर की खरीद शुरू की गई थी। इसके तहत सरकार अब तक एक सौ करोड़ रुपये मूल्य का गोबर खरीद चुकी है। गोबर की मात्रा की बात करें तो अब तक सरकार 50 लाख टन गोबर किसानों और गौशालाओं से खरीद चुकी है। इस योजना का सीधा लाभ राज्य के पशुपालकों को मिलेगा। योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसानों को पहले छत्तीसगढ़ गोधन न्याय योजना के तहत आवेदन करना होगा।

पहले चरण में 2240 गौशालाओं को जोड़ा जाएगा, फिर 2800 गौशालाओं के निर्माण के बाद कुछ दिनों में दूसरे चरण में गाय का गोबर भी खरीदा जाएगा। इस योजना के तहत छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा गाय का गोबर 2 रुपये प्रति किग्रा. की दर से खरीदा जाएगा।

गोधन न्याय योजना से किसानों को क्या लाभ है?

अगर किसी किसान के पास तीन या चार मवेशी हैं तो वह आसानी से 1500 रुपये प्रतिमाह कमा सकता है। अगर आपको पीएम किसान योजना के तहत सालाना 6000 रुपये मिलते हैं, तो गोधन न्याय योजना के तहत सालाना 12,000 रुपये मिलेंगे।

केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि या पीएम किसान योजना के तहत देश भर के किसानों को तीन समान किश्तों में सालाना 6000 रुपये मिलते हैं।

गोधन न्याय योजना सहित प्रदेश के गौठानों में मशरूम उत्पादन, मुर्गी उत्पादन, मछली पालन, बकरी पालन, चावल मिल, कोदो-कुटकी और लाख प्रसंस्करण जैसी विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से हजारों लोगों को रोजगार मिला है। गौठानों में महिला स्वयं सहायता ने करीब 6 लाख क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन किया है। वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन कुछ ही दिनों में 12 लाख क्विंटल तक पहुंचने का अनुमान है। अगर एक साल में 20 लाख क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन होता है तो इसका कारोबार दो हजार करोड़ रुपये का होगा।

वर्मी कम्पोस्ट के प्रयोग से प्रदेश में जैविक खेती बढ़ रही है। जिन लोगों के पास खेती योग्य जमीन या मवेशी नहीं है, उन्हें भी इस योजना से अच्छी आमदनी हो रही है।

इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का छत्तीसगढ़ का मूल निवासी होना अनिवार्य है। उसके पास आधार कार्ड, अपना बैंक खाता, मोबाइल नंबर आदि होना चाहिए। आवेदक को अपने पशुओं की संख्या के बारे में संबंधित विभाग को सूचित करना होगा।

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