नहरें

नहरें हमको पानी देकर, सबकी प्यास बुझाती हैं।
इनका पानी पीकर ही तो, फसलें भी लहराती हैं।

चंदा मामा

पापा! हम भीचंदा मामा, से मिलने को जाएंगे।
आसमान की सैर करेंगे, तोड़ के तारे लाएंगे।

साईकिल

पापा! एक साईकिल ला दो, उस पर पढऩे जाएंगे।
छुट्टी वाले दिन पार्क में, उसको खूब चलाएंगे।

-धर्मेन्द्र गोयल

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *