क्या हिजाब पर आये अदालत के निर्णय के मुताबिक अपने आचरण में सुधार करेंगे कट्टरपंथी

images (83)

 अशोक मधुप

हिजाब का मुद्दा तब आया तब पांच राज्यों में चुनाव चल रहा था। हिजाब का मामला जैसे ही सामने आया, देश भर में प्रदर्शन होने लगे। इससे लगा कि ये विवाद जानकर पैदा किया जा रहा है ताकि चुनाव वाले राज्यों में इसका लाभ लिया जा सके।

हाल में पैदा हुए हिजाब के विवाद पर आई याचिकाओं को भले ही कर्नाटक उच्च न्यायालय ने निरस्त कर दिया हो, किंतु लगता यह है कि ये विवाद अभी जारी रहेगा। इसको हवा देने वाले मानने वाले नहीं हैं। इस मामले को हवा देने वाले तत्व मुस्लिमों को एकजुट रखने के लिए और सरकार के सामने कानून व्यवस्था की चुनौती पैदा करने के लिए अभी इस मुद्दे को जिंदा रखना चाहेंगे। वे चाहेंगे कि केंद्र सरकार बदनाम हो। दुनिया में उसकी सेक्युलर छवि न बन पाए। वैसे भी सर्वोच्च न्यायालय में इस मसले के जाने और निर्णय आने तक तो इसे जिंदा रखा ही जा सकता है।

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई पूरी की। उसने शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पर प्रतिबंध को चुनौती देने वाली विभिन्न याचिकाओं को खारिज कर दिया। न्यायालय ने अपना फैसला सुनाते वक्त टिप्पणी की कि हिजाब कोई धार्मिक प्रतीक नहीं है। हिजाब पहनना जरूरी नहीं है। उल्लेखनीय है कि उडुपी के एक प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज की छात्राओं के एक समूह की कक्षाओं में उन्हें हिजाब पहनने देने की मांग से तब एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया था जब इसके विरोध में कुछ हिंदू विद्यार्थी भगवा शॉल पहनकर पहुंच गए थे। जबकि सरकार वर्दी संबंधी नियम पर अड़ी रही। उसका कहना था कि कॉलेज का एक ड्रेस कोड है, उसका कॉलेज में पालन करना होगा। यह मुद्दा राज्य के साथ−साथ देश के अन्य हिस्सों में फैल गया। कई जगह प्रदर्शन हुए। कर्नाटक में तो मामले को तूल पकड़ते देख स्कूल कॉलेज तक बंद करने पड़े।
हिजाब मामले की सुनवाई के लिए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ऋतुराज अवस्थी, न्यायमूर्ति कृष्ण एस दीक्षित एवं न्यायमूर्ति जेएम काजी की पीठ गठित की गयी। याचिका दायर करने वाली लड़कियों ने अनुरोध किया था कि उन्हें कक्षाओं में स्कूली वर्दी के साथ-साथ हिजाब पहनने की अनुमति दी जाए क्योंकि यह उनकी धार्मिक आस्था का हिस्सा है। माना जाता है कि कुछ तत्व हैं जो हिजाब, नागरिकता संशोधन विधेयक या अन्य मुद्दों को लेकर सरकार के सामने समस्याएं बनाए रखना चाहते हैं। हिजाब का मुद्दा तब आया तब पांच राज्यों में चुनाव चल रहा था। हिजाब का मामला जैसे ही सामने आया, देश भर में प्रदर्शन होने लगे। इससे लगा कि ये विवाद जानकर पैदा किया जा रहा है ताकि चुनाव वाले राज्यों में इसका लाभ लिया जा सके। सरकार के विरुद्ध मुस्लिमों को एकजुट किया जा सके।
आज दुनिया भर में मुस्लिम महिलाएं पर्दे का विरोध करती रही हैं। ये इससे निकल कर खुले आकाश में सांस लेना चाहती हैं। चाहती हैं कि उन्हें पर्दे से आजादी मिले। सानिया मिर्जा के शुरू के खेल के समय उसके द्वारा पहनी जाने वाली ड्रेस पर भी कुछ कट्टरपंथियों ने आवाज उठाई थी। उस समय सानिया ने कहा था कि मेरा खेल देखिए ड्रेस नहीं। दूसरे पूरे शरीर को ढंककर खेल हो भी नहीं सकते। अभी हाल में अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार आई। वहां की युवती और महिलाओं से पूछो कि क्या वह इसे स्वीकार करती हैं। अफगानिस्तान में अमेरिकी दखल के बाद वहां की युवतियों के लिए खुले स्कूल, कॉलेज के द्वार उनके लिए बंद हो गए। अब तक वह कहीं भी आ जा सकती थीं। वे अब तक नौकरी कर रहीं थीं। अपने व्यवसाय में लगीं थीं। तालिबान के आने के बाद उनका वह सब छिन गया। आज वे घरों में कैद होकर रह गई हैं।

कोर्ट में याचिका डालने वाली कुछ युवतियां आज स्कूल ड्रेस के साथ हिजाब पहनने की बात कर रही हैं। उधर बड़ी तादाद में यूरोप की तर्ज पर युवतियों द्वारा कपड़ों का साइज घटाने की मांग होती रही है। भारत में युवतियां चाहती हैं कि वह जो चाहें, वह पहनें। इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। कुछ लोगों को छोड़ सभी चाहते हैं और मानते हैं कि युवतियां अपनी मर्जी के वस्त्र पहनें और आगे बढ़ें। अब तो देश की फौज के द्वार भी उनके लिए खोल दिए गए हैं, किंतु शिक्षण संस्थाओं का एक ड्रेस कोड है। उसका वहां पालन होना चाहिए। यह ड्रेस कोड इसलिए है कि सारे छात्र−छात्राएं एक जैसे दिखाई दें। गरीब−अमीर का उनमें फर्क न आए। ऊंच−नीच की भावना उनमें घर न कर सके। इस निर्णय के बाद अच्छा है कि हिजाब पहनने की मांग करने वाली युवतियों को सदबुद्धि आ जाए, किंतु लगता है कि ऐसा होने वाला नहीं है।

Comment:

meritking giriş
betpark güncel giriş
betgaranti güncel giriş
kolaybet güncel giriş
betnano giriş
betpark
betpark
betpark
betpark
betpark
betpark
betnano giriş
vaycasino
vaycasino
vaycasino
vaycasino
vaycasino
vaycasino
betpark
betpark
supertotobet
supertotobet
betpark
betpark
supertotobet
bettilt giriş
supertotobet
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
vaycasino
vaycasino
hititbet giriş
hititbet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
supertotobet
supertotobet
vaycasino
vaycasino
bettilt giriş
bettilt giriş
jojobet giriş
jojobet giriş
vaycasino
vaycasino
vaycasino
vaycasino
betnano giriş
betpark giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark güncel giriş
supertotobet
supertotobet
jojobet giriş
jojobet giriş
jojobet giriş
jojobet giriş
roketbet giriş