*पूज्य गुरुदेव स्वामी सत्यपति जी महाराज की प्रथम पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि*

IMG-20220209-WA0008

4-2-2022

*उत्तम गुरु जी बहुत सौभाग्य से ही मिलते हैं*

मेरा परिचय पूज्य गुरुदेव श्री स्वामी सत्यपति जी महाराज से लगभग ईस्वी सन् 1977 में हुआ। लगभग 3-4 वर्ष तक लगातार मैं उनके सत्संग में रहा। उन दिनों मैं गीत संगीत के माध्यम से वेद प्रचार करता था। *हमारे परिवार की वैदिक पृष्ठभूमि को देखते हुए, उन्होंने मुझे आजीवन ब्रह्मचारी रहकर वैदिक विद्वान एवं योगी बनने की प्रेरणा दी, और यह समझाया कि “गीत संगीत गाना बजाना मनुष्य जीवन का लक्ष्य नहीं है। मनुष्य जीवन का मुख्य लक्ष्य मोक्ष प्राप्ति करना है।”*
मैंने अपनी कुछ मानसिक तैयारी करके सन् 1981 में घर छोड़ दिया और लक्ष्य की प्राप्ति के लिए गुरुजी के साथ हो गया। तब से अर्थात सन् 1981 से लेकर सन् 2021 (उनके जीवन की संपूर्णता) तक लगभग 40 वर्ष उनके सान्निध्य में रहा। सन् 1981 से 1988 तक लगभग 8 वर्ष दिन-रात उनके साथ ही रहा। जिसमें 5 वर्ष हम भारत भर में रेलों में यात्रा करते रहे। देश के अनेक स्थानों में घूमते हुए वेद प्रचार भी करते रहे। पढ़ते रहे, पढ़ाते रहे, ध्यान योग शिविर भी चलाते रहे। फिर उसके बाद सन् 1986 में 10 अप्रैल को आर्य वन विकास फार्म, रोजड गुजरात में दर्शन योग महाविद्यालय की स्थापना पूज्य गुरुदेव ने की। इस महाविद्यालय का प्रारंभिक नाम “दर्शन एवं योग प्रशिक्षण शिविर” था। बाद में बदलकर “दर्शन योग महाविद्यालय” रख दिया गया।
सन् 1986 से 1988 तक 2 वर्ष के लिए पहला सत्र आयोजित किया गया था, जो कि बाद में बढ़ कर ढाई वर्ष तक चला। इस प्रथम सत्र में 10 ब्रह्मचारियों ने प्रवेश लिया था, जिनमें से एक मैं भी था। इस प्रथम सत्र में गुरुजी पढ़ाते थे। मैं पढ़ता भी था, और अपने सहपाठियों को पढ़ाता भी था। क्योंकि उससे पहले पूज्य गुरुदेव के साथ पांच वर्ष तक देशभर में घूम घूमकर मैं योग सांख्य आदि पांच दर्शन पढ़ चुका था। मेरी पढ़ने पढ़ाने में रुचि भी थी और योग्यता भी अच्छी थी। इसलिए गुरु जी ने मुझे मेरे सहपाठियों को पढ़ाने का निर्देश दिया। उनके निर्देश के अनुसार मैंने 5 दर्शन तथा 11 उपनिषद अपने अनेक सहपाठियों को पढ़ाये और छठा मीमांसा दर्शन गुरु जी से पढ़ा।
1988 के बाद गुरुजी संन्यासधर्म का पालन करते हुए वेदप्रचार में चले गये। इस सत्र के उत्तम परिणामों को देखते हुए आर्य जगत् के अनेक विद्वानों तथा आर्य वन संस्था के प्रबंधक महानुभावों ने गुरु जी महाराज को विनम्र निवेदन किया कि, इसे आगे भी चलाया जाए। तो पूज्य गुरुदेव के निर्देशानुसार हम दोनों ने इस महाविद्यालय का कार्य आगे बढ़ाया। अर्थात आचार्य ज्ञानेश्वर जी को गुरु जी ने दर्शन योग महाविद्यालय रोजड़ की व्यवस्था प्रबंध का कार्य सौंपा, और मुझे मेरी रुचि एवं योग्यता के अनुसार दर्शन उपनिषद आदि शास्त्र पढ़ाने तथा क्रियात्मक योग प्रशिक्षण करने का कार्य भार सौंपा।
दो, चार महिने में गुरुजी वेद प्रचार कार्यक्रम से वापस दर्शन योग महाविद्यालय रोजड़ लौट आते थे, और हमारा मार्गदर्शन करते थे। इस प्रकार से उनके अंतिम समय तक अर्थात लगभग 40 वर्ष तक मैं उनके निर्देशन में चला, और उनके अनुशासन में रहा। प्रथम सत्र में जब हम विद्यार्थी थे, तब गुरुजी ने कहा था कि, *”कोई भी विद्यार्थी मुझसे पूछे बिना, अपने व्यक्तिगत जीवन की भविष्य की कोई भी योजना न बनाये.” “तो मैंने गुरुजी के निर्देश का पूरा पालन किया, और मैंने गुरु जी से पूछे बिना अपनी एक भी योजना नहीं बनाई। जो गुरुजी ने आदेश निर्देश दिया, मैंने 40 वर्षों तक वही किया। और उनकी श्रद्धापूर्वक सेवा भी की। उसी का फल है, कि ईश्वर की कृपा एवं पूज्य गुरुदेव के आशीर्वाद से मेरी बहुत अच्छी प्रगति हुई।”*
पूज्य स्वामी सत्यपति जी महाराज के निर्देश में रहकर उनके अनुशासन का पालन करते हुए सन् 1981 से लेकर सन् 2006 तक (लगभग 25 वर्ष) मैंने ब्रह्मचर्य आश्रम के नियमों का श्रद्धापूर्वक पालन किया। दर्शन वेद उपनिषद आदि शास्त्रों का अध्ययन अध्यापन किया, और महर्षि पतंजलि जी के बताए अष्टांग योग के अभ्यास में पूरी तपस्या की। इसका फल यह हुआ कि ईश्वर की कृपा से मुझे उच्च स्तर का वैराग्य प्राप्त हुआ, और फिर विनम्र निवेदन करने पर पूज्य स्वामी सत्यपति जी महाराज ने 29 मई सन् 2006 को मुझे संन्यास आश्रम की दीक्षा दी।
25 वर्ष तक ब्रह्मचर्य आश्रम के नियमों का श्रद्धापूर्वक पालन करने के बाद, जब मैंने संन्यास आश्रम में प्रवेश किया, तो गुरुजी पूज्य स्वामी सत्यपति जी महाराज के निर्देश के अनुसार मैंने देशभर में घूम घूम कर वेद-प्रचार करने का कार्य विधिवत् आरंभ किया। उससे पहले कभी-कभी गुरु जी के निर्देशानुसार वेद प्रचार के लिए जाता था, और अधिकतम समय दर्शन, वेद, उपनिषद आदि शास्त्रों के अध्ययन-अध्यापन तथा पातंजल अष्टांग योग के अभ्यास में ही व्यतीत करता था।
पूज्य स्वामी जी महाराज ने अनेक बार समय-समय पर मेरी गंभीर परीक्षाएं ली।
एक बार मुझसे पूछा – *क्या आपको समाधि प्राप्त हो गई है? क्या आपको ईश्वर का साक्षात्कार हो गया है?*
मैंने बड़ी विनम्रता से कहा – *जी हां, गुरुदेव! ईश्वर की कृपा से और आपके आशीर्वाद से मुझे समाधि प्राप्त हो गई है। और ईश्वर का साक्षात्कार भी हो गया है।* तब उन्होंने कहा, कि *”आप अपनी समाधि की अनुभूतियां लिखें।” मैंने अपनी अनुभूतियां लिखकर गुरु जी को समर्पित कीं। उन्हें पढ़कर पूज्य गुरुदेव अति प्रसन्न हुए और उन्होंने कहा कि “मैंने जिस उद्देश्य से दर्शन योग महाविद्यालय की स्थापना की थी, मेरा वह उद्देश्य सफल हो गया।”*
*पूज्य गुरुदेव स्वामी जी महाराज ईश्वर, ऋषि और साक्षात शरीरधारी गुरु, इन तीन को सबसे ऊपर मानते थे। और कहते थे कि अपनी मान्यताओं को छोड़ दो। “इन तीनों की बात को ऊंचा मानो, तभी आप ठीक प्रकार से ईश्वर तक पहुंच पाएंगे। अन्यथा आप भटक जाएंगे।” मैंने उनसे यह बात बहुत अच्छी प्रकार से सीखी। और मैं भी ऐसा ही मानता हूं।*
ईश्वर की महती कृपा से तथा गुरुजी महाराज के आशीर्वाद से मुझे बहुत अधिक लाभ हुआ। *एतदर्थ मैं ईश्वर का अत्यंत कृतज्ञ हूं। पूज्य गुरुदेव का अत्यंत आभारी हूँ, और उनके प्रति अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। उन्होंने जो मेरा जीवन निर्माण किया है, मैं उनके ऋण से कभी भी उर्ऋण नहीं हो पाऊंगा। ऐसी मैं उनके प्रति अपनी भावना व्यक्त करता हूँ।”* और आप सभी महानुभावों से भी यह निवेदन करता हूँ कि *आप सब भी इसी गुरुशिष्य परंपरा में चलें। अपने गुरुजनों के निर्देश और अनुशासन का पालन करें। “जो व्यक्ति अपने गुरुजी पर जितनी अधिक श्रद्धा रखकर चलेगा, उसका उतना ही अधिक कल्याण होगा।” यह मेरा प्रत्यक्ष अनुभव है। ऐसे उत्तम गुरुजी संसार में कभी कभार मिलते हैं। स्वामी सत्यपति जी महाराज जैसे गुरुजी बहुत सौभाग्य से ही मिलते हैं।*

*लेखक — स्वामी विवेकानंद परिव्राजक, निदेशक, दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात।*

Comment:

grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
betvole giriş
betvole giriş
fenomenbet
betvole giriş
betkanyon
betvole giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
imajbet giriş
vaycasino giriş
imajbet giriş
vaycasino giriş
safirbet giriş
safirbet giriş
betvole giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
timebet giriş
timebet giriş
maxwin
realbahis giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
timebet giriş
timebet giriş
betpuan giriş
betpuan giriş
vaycasino giriş
meritking giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
kulisbet giriş
mariobet giriş
mariobet giriş
realbahis giriş
vaycasino giriş
grandbetting giriş
hititbet giriş
superbahis giriş
süperbahis giriş
norabahis giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betvole giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
betwild giriş
betwild giriş
imajbet giriş
damabet
betnano giriş
betnano giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
vaycasino giriş
betvole giriş
betpark giriş
betvole giriş
betpark giriş