जया बच्चन के नाम वरिष्ठ लेखक पत्रकार अभिरंजन कुमार का खुला पत्र

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आदरणीया जया बच्चन जी,
बॉलीवुड के “ख़ानदानी” लोगों को मैं बॉलीवुड की अनेक समस्याओं की जड़ मानता हूं और आज आपने इसे साबित भी कर दिया। ऐसा लगता है कि आप जिस बड़ी थाली (देश) में खाती हैं, उसी में छेद करना चाहती हैं, छोटी थाली (बॉलीवुड के गंदे लोगों) को बचाने के लिए। लेकिन आपकी छोटी थाली में कचरा भरा है। जैसा कि रवि किशन ने कहा है- ड्रग्स भरे हैं।

आपको एक अच्छा कलाकार समझता था। अमिताभ बच्चन की बीवी बनने के बाद आपकी हाइट ऐसे ही बढ़ गयी थी। फिर जब आप ऐश्वर्या राय की सास बनीं, तो आपके ऐश्वर्य में थोड़ा और इजाफा हुआ। ये अलग बात है कि तमाम सेटिंग के बाद भी आपका अभिषेक बॉलीवुड का राहुल गांधी साबित हुआ।

खैर, आज पता चला कि आप जैसे खानदानी लोग, जो एक ऊंचाई प्राप्त कर लेते हैं, उन्हें सिर्फ अपना स्वार्थ दिखाई देता है और वे सुविधा की ज़िंदगी जीने के आदी हो जाते हैं। ऐसे लोग दिखाई तो बहुत बड़े देते हैं, लेकिन ये अप्रासंगिक लोग होते हैं हमारे समाज के। मेरे प्रिय नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने इसीलिए कहा था कि मेरे प्रभु मुझे इतनी ऊंचाई मत देना, जहाँ घास का एक तिनका भी न उगे और संवेदना को जमा देने वाली बर्फ हो केवल। अफसोस कि आप जैसे लोग बर्फ बन चुके हैं, संवेदना मर चुकी है आपकी।

आपके पति अमिताभ बच्चन के अभिनय का भी कायल रहा हूँ, लेकिन आपकी तरह यह शख्स भी अपनी सुविधा की ज़िंदगी में ज़रा भी ख़लल नहीं चाहता। पैसे लेकर या सरकारों को खुश करने के लिए दो-दो कौड़ी के विज्ञापन तो कर सकता है यह शख्स, लेकिन देशहित के किसी मुद्दे पर आवाज़ बुलंद नहीं कर सकता। रील लाइफ का एंग्री यंग मैन रियल लाइफ में कितना सुषुप्त, निष्क्रिय और निष्प्रभावी हो सकता है, यह अमिताभ बच्चन को देखकर पता चलता है। पता चलता है कि जब कोई व्यक्ति इतनी दौलत कमा लेता है कि उसपर विदेशों में अपने पैसे और संपत्ति छिपाने के आरोप लगने लगते हैं, तो वह जब भी खड़ा होगा, किसी गलत के साथ ही खड़ा होगा, किसी सही के साथ तो खड़ा हो ही नहीं सकता।

जब भी आपको राज्यसभा में देखता हूँ, तो मन में केवल यही खयाल आता है कि आप न जाने क्यों इतने लंबे समय से यहाँ बनी हुई हैं। मालूम नहीं राज्यसभा में आज तक आपने योगदान क्या दिया है। ये कौन लोग हैं, जो आप जैसी निष्क्रिय और अप्रासंगिक लोगों को ऑब्लाइज करने में उच्च सदन की एक सीट बर्बाद कर देते हैं? मेरा ख्याल है कि निश्चित रूप से यह सीट आप खरीदती होंगी (पैसे से या फिर लाइजनिंग करने के गुप्त समझौते के एवज में), वरना कोई राजनीतिक पार्टी आपको यह सीट यूं ही क्यों दे देगी, जबकि आपके नाम या आपके भाषण से उसकी पार्टी को चंद वोट मिलने भी संभव नहीं हैं?

आज वह रवि किशन भी, जो आपकी नज़र में शायद इतना छोटा कलाकार रहा है कि अपने मुंह से आपको उसका नाम लेना तक गवारा नहीं, आपकी तुलना में लाख दर्जे बेहतर और ईमानदार दिख रहा है। उसका आपकी तरह बॉलीवुड में खानदान नहीं चलता तो क्या हुआ? लेकिन उसने दिखाया है कि इस देश को खानदान की नहीं, ईमान की ज़रूरत है।

रवि किशन ने लोकसभा में बॉलीवुड के ड्रग्स कनेक्शन का मुद्दा उठाया तो आपको शर्म आ गई? आपकी इंडस्ट्री में कास्टिंग काउच होता है, कभी शर्म आई आपको?आपकी इंडस्ट्री अंडर वर्ल्ड से कनेक्टेड है, कभी शर्म आई आपको? आपकी इंडस्ट्री में दाऊद इब्राहिम जैसे अपराधियों और राष्ट्रद्रोही दंगाइयों का सिक्का चलता रहा है, कभी शर्म आई आपको? आपकी इंडस्ट्री का स्टार मुंबई दंगों का अपराधी निकला, कभी शर्म आई आपको? आपकी इंडस्ट्री का स्टार रात में सड़क पर सोते हुए लोगों को कुचल डालता है, कभी शर्म आई आपको? आपकी इंडस्ट्री में मां के सामने एक बेटा अश्लील अशोभनीय कार्यक्रम पेश करता है और मां हंसती रहती है, कभी शर्म आई आपको? आपकी इंडस्ट्री ने अपने धंधे के लिए साल दर साल औरतों के कपड़े उतारने का काम किया, एक औरत होकर भी कभी शर्म आई आपको? आपकी इंडस्ट्री के एक स्टार ने कहा कि उसे यह देश रहने लायक नहीं लगता, तब शर्म आई थी आपको? उस वक़्त आपने उस स्टार से क्यों नहीं कहा था कि “अभागे, जिस थाली में खाते हो उसी में छेद करते हो?”

लेकिन आज जब बॉलीवुडियों के ड्रग्स कनेक्शन की बात खुल रही है, तो शर्म आने लगी है आपको? आप बॉलीवुड के ड्रग माफिया के खिलाफ आवाज़ उठाने के बजाय उल्टे आवाज़ उठाने वालों पर ही शर्मिंदा हो रही हैं? जया जी, देश समझ रहा है कि आप किसको बचाना चाहती हैं। आपकी इंडस्ट्री में हत्या जैसी प्रतीत होने वाली इतनी बड़ी संदिग्ध मौत हो गई और बिना मुकम्मल जांच के बड़ी बेशर्मी से उसे आत्महत्या का नाम दे दिया गया, क्या इसपर शर्म नहीं आती आपको? सरकारी गुंडों ने आपकी इंडस्ट्री की एक अभिनेत्री का दफ्तर तोड़ दिया, उसे “हरामखोर” कहा, आप एक औरत हैं, इसके बावजूद शर्म नहीं आई आपको?

जया जी, कहीं आपने भी तो ड्रग माफिया से सुपारी नहीं ले ली है, उन्हें बचाने की, मामले को और आगे बढने से रोकने की? हो सकता है, आप सफल भी जाएं, क्योंकि आपके और आपके परिजनों के राजनीतिक कनेक्शन भी बड़े तगड़े हैं, लेकिन आपकी यह साज़िश सफल नहीं होने दी जानी चाहिए।

और हां, जिस थाली को छेद होने से बचाने की आप बात कर रही हैं, उस थाली में छेद होना ही है अब। देश का प्यार और पैसा पाकर बॉलीवुड इतना अभिमानी हो गया है कि अब वह इस देश और देश के लोगों को ही तुच्छ समझने लगा है। देश के अन्य हिस्सों के लोगों को जलील करने लगा है वह। अहसान जताने लगा है वह, कि तुम मेरी बदौलत हो, जबकि वह स्वयं उन्हीं लोगों के अहसानों तले दबा हुआ है, जिनपर वह अपना अहसान जता रहा है। वह दिन दूर नहीं, जब बॉलीवुड द्वारा अपमानित, प्रताड़ित और षड्यंत्रों का शिकार हुए लोग संघर्ष का बिगुल फूंकेंगे और पटना, लखनऊ, शिमला, भोपाल, जम्मू, चंडीगढ़ इत्यादि अनेक जगहों पर देश भर में ऐसी-ऐसी कई इंडस्ट्रीज खड़ी कर देंगे। इंतज़ार कीजिए प्लीज़!

धन्यवाद,
आपका
अभिरंजन कुमार
(वरिष्ठ लेखक-पत्रकार अभिरंजन कुमार के फेसबुक वॉल से)

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