देश की जनता के पैसे से ऐश करने वाले संत नही होते

रज्जाक अहमद

विवादित संत आसाराम बापू के साथ एक और शर्मनाक विवाद  जुड़ गया। इस बार का मामला इतना संगीन व घिनौना है कि जिसे सुनकर हर सभ्य व्यक्ति को ऐसे लोगों से नफरत होने लगती है। लेकिन दुख की बात यह है कि अभी विवाद की जांच शुरू भी नही हुई थी कि मामले का राजनीतिकरण हो गया। भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती व अन्य और कई ने कथित संत को क्लीनचिट दे दी और मामले को कांग्रेस व उसकी अध्यक्षा की तरफ मोड़ने की नाकामयाब कोशिश कर डाली, जबकि इस मामले में कांग्रेस ने आसाराम को ना दोषी कहा ना निर्दोष। मेडिकल रिपोर्ट व पीड़िता का बयान इसकी पुष्टि करता है कि बापू दोषी हैं या निर्दोष। आशाराम बापू का विवादों से पुराना नाता है। उन पर मध्य प्रदेश में मंदिर की जमीन पर कब्जा करने का मुकदमा है। गुजरात में आश्रम की जमीनों में अवैध कब्जे हैं। जिनमें से गुजरात सरकार ने कुछ जमीनें खाली करायी हैं। कुछ पर मुकदमे लिखे हैं। जांच जारी है। उनका वह आश्रम भी साबरमती गुजरात में ही है, जहां पर दो बच्चों की हत्या एक अनुष्ठान के लिए करायी गयी। वह मुकदमा भी आसाराम के खिलाफ कायम हुआ। ये सारे मामले गुजरात व मध्य प्रदेश के हैं जहां पर भाजपा की सरकारें हैं। उमा भारती जी बतायें कि वहां इनके साथ कौन साजिश कर रहा है या इन्हें बदनाम कर रहा है? इलजाम ये भी है कि दिल्ली व राजस्थान में कांग्रेस की सरकारें हैं इस लिए संत को फंसाया जा रहा है। मैं समझता हूं कि पहले तो संत की परिभाषा तय होनी चाहिए कि कौन संत है कौन नही? एक कथा वाचक या प्रवचन कर्ता व संत में फर्क होता है। संत किसी ना किसी अखाड़े से दीक्षा लेकर उससे जुड़ा होता है, उसका एक सिजरा होता है। जिसका संत अपने जीवन में निर्वाहन करता है। आसाराम किसी अखाड़े से जुड़े नही हैं, ना दीक्षा ली है। इसलिए यह संत नही हैं। एक कथित प्रवचन कर्ता या कोई भी पीले कपड़े पहनने वाला क्या संत हो सकता है? संतों की भाषा में संयम होता है।

इनकी भाषा शैली पर गौर करिये, दिल्ली बसंत बिहार रेपकांड जिसने सारा देश हिला कर रख दिया, उस पर इन महाशय का बेशर्मी भरा बयान आया(बॉयफ्रेंड के साथ घूमेगी तो यही होगा) जब मीडिया ने इसका बयान सारे देश को दिखाया तो इसने मीडिया कर्मी व पत्रकारों को ‘कुत्ता’ शब्द इस्तेमाल किया और कहा कि मैं इन कुत्तों को टुकड़ा नही डालने वाला, इसे सारे देश ने सुना। गाजियाबाद में इस संबंध में एक पत्रकार द्वारा सवाल पूछने पर इसने बौखलाहट में पत्रकार को लात मार दी। जिसका बाद में गाजियाबाद में मुकदमा कायम हुआ, जमीनों के मुकदमे इन पर चल ही रहे हैं। महाराष्ट्र में सूखा पड़ा था, लोग एक एक बूंद पानी को तरस रहे थे, पशु पानी बिना दम तोड़ रहे थे, उस समय इस बाबा ने होली खेलने के नाम पर हजारों लीटर पानी बर्बाद कर दिया। मीडिया के बवाल उठाने पर इसने कहा कि मैं जब चाहूं, जहां चाहूं, बारिश करा सकता हूं। ये सिर्फ बाबा नही, स्वयं-भू भगवान है।

धर्म की शिक्षा देने वाला अपराधी उस आम अपराधी से ज्यादा बड़ा गुनाहगार है, जिसे धर्म का ज्ञान नही होता। क्या इनमें संत होने का कोई गुण है? संतों के रहने का ठिकाना पहाड़ का एकांतवास या फिर दूर दराज जंगलों में आश्रम बनाकर होता है। जहां कोई शोर ना हो, दुनियादारी की बातें ना हों। सिर्फ भगवान का गुणगान व चर्चा हो। ये तो फाइव स्टार जैसे महलों में रहने वाले धार्मिक व्यापारी हैं। इनके पास हजारों करोड़ रूपये की संपत्ति है। लेकिन इस देश में संत भी बंट गये हैं। ये हमारे संत, वो तुम्हारा संत। अब संत ईश्वर भक्ति में कम सत्ता सुख में ज्यादा ध्यान लगा रहे हैं। कुछ तो भगवा की आड़ में राजनीति व व्यापार दोनों कर रहे हैं।

ये कथित संत हजारों करोड़ के कारोबारी व व्यापारी हं लेकिन भाजपा की नजर में हर कथा वाचक, प्रवचन कर्ता या भगवा कपड़े पहनने वाला संत है। क्योंकि धर्म की बैशाखी से ही दिल्ली की सत्ता का रास्ता तय जो करना है। काश उमा जी आपके बच्चे होते ये घटना आपके किसी प्रिय के साथ घटती तब आपको अहसास होता दर्द किसे कहते हैं? दिल्ली पुलिस ने दो दिन तक इस केश की जांच करायी, कई एनजीओ ने भी जांच की, तब जाकर पूर्ण संतुष्टि के बाद मैडिकल व अन्य जांच में बलात्कार साबित होने के बाद वाद पंजिका पर मुकदमा दर्ज कर जोधपुर ट्रांसफर कर दिया। अब इस की जांच स्वयं जोधपुर के पुलिस कमिश्नर बीजू जार्ज जोजफ कर रहे हैं।

आश्रम के मीडिया प्रभारी सुनील वानखेड़े ने रिपोर्ट का पता चलते ही बयान दे डाला कि 15 अगस्त को जिस दिन की ये घटना है, बापू जोधपुर में थे ही नही। लेकिन जांच में यह बात झूठ साबित हो गयी, 12 अगस्त से 16 तक आसाराम जोधपुर के मणई स्थित इसी आश्रम में थे। पीड़ित किशोरी ने भी आश्रम की उस कुटिया की पहचान कर दी जहां अनुष्ठान के नाम पर उसके साथ बलात्कार हुआ।

किशोरी आसाराम द्वारा संचालित एक गुरूकुल की ही छात्रा है। मगर इन्हें इससे क्या मतलब ? किसी की बेटी की इज्जत लुटे या धार्मिक उन्माद फैले इन्हें तो केवल सत्ता चाहिए, लेकिन एक बात स्पष्टï है कि देश की जनता को मूर्ख बनाकर उसके पैसे से ऐश करने  वाले लोग कभी संत नही हो सकते? बलात्कार मामले पर नरेन्द्र मोदी के आए बयान पर धन्यवाद।

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