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मोदी के जनादेश तले संघ परिवार का संकट

पुण्‍य प्रसून वाजपेयी ठीक तेरह बरस पहले जिन आर्थिक नीतियों को लेकर संघ परिवार बीजेपी को कटघरे में खड़ा करता था। तेरह बरस बाद उन्ही आर्थिक नीतियों को लेकर संघ हरी झंडी दिखाने से नहीं कतरा रहा है। तेरह बरस पहले भी संघ के प्रचारक रहे अटलबिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री की कुर्सी पर थे और तेरह […]

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विकास की भारतीय रुपरेखा

कन्‍हैया  झा “सर्वे भवन्तु सुखिनः” श्रृंखला (*) के आखिरी दसवें लेख में “विराट भारत” की कल्पना दी गयी है. एक विराट राष्ट्र ऐसा विशाल है “जिसमें सब चमकते हैं” अर्थात सभी विकसित हैं. “अर्थस्य मूलह राज्यम” के अनुसार शासनतंत्र का मुख्य कार्य देश के अर्थ पुरुषार्थ को पोषित कर सम्पन्नता लाना है. सन 1991 से  […]

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महाराणा प्रताप और दानवीर भामाशाह

विनोद बंसल मेवाड़ के राजा उदय सिंह के घर जन्मे उनके ज्येष्ठ पुत्र महाराणा प्रताप को बचपन से ही अच्छे संस्कार, अस्त्र-शस्त्रों का ज्ञान और धर्म की रक्षा की प्रेरणा अपने माता-पिता से मिली। उन दिनों दिल्ली में सम्राट अकबर का राज्य था जो भारत के सभी राजा-महाराजाओं को अपने अधीन कर मुगल साम्राज्य का […]

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अब्दुल्ला परिवार छेड़ रहा मरघट की धुनें

डॉ0 कुलदीप  चंद्र  अग्निहोत्री पिछले दिनों लोकसभा के लिये हुये चुनावों में उधमपुर क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी डा० जितेन्द्र सिंह चुने गये । जम्मू कश्मीर में जब भी चुनाव होते हैं तो संघीय संविधान के अनुच्छेद ३७० का प्रश्न सदा प्रमुख रहता है । चुनाव चाहे लोक सभा के हों या विधान […]

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‘बिना दूध देती चार गायों से कमाता हूं 40 हजार महीना’

(राजस्थान पहले से ही गौ-भक्त और राष्ट्र भक्त लोगों की जन्मभूमि और कर्मभूमि रहा है। आज भी वीर भूमि में गौ-भक्तों की कमी नही है। ऐसे ही ऐ गौ-भक्त हैं रामेश्वर लाल माहेश्वरी। जो कि जिला बीकानेर की तहसील कोलायत के गांव गजनेर के निवासी हैं। पिछले दिनों श्री माहेश्वरी से हमारी मुलाकात हुई तो […]

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‘योग भूमि’ बनाओ कश्मीर को

राकेश कुमार आर्यजो कश्मीर कभी जीवन मुक्त होने के लिए हमारे ज्ञानी महात्माओं की ‘योगभूमि’ हुआ करती थी, विडंबना देखिए कि वही कश्मीर मुगल काल में बादशाहों के लिए सैर सपाटे का स्थान बन कर ‘भोगभूमि’ बन गयी और इसी परंपरा को अंग्रेजों ने भी अपने शासन काल में यथावत बनाये रखा।पर स्वतंत्र भारत में […]

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टूटना शाख से एक सुर्ख गुलाब का

जब सत्ताधीशों के अपनी गलत नीतियों के कारण मस्तिष्क सठिया जाते हैं और जब देश किन्हीं भी कारणों से सामाजिक, आर्थिक राजनीतिक और धार्मिक आदि मोर्चों पर मार्गदर्शन की मांग करने लग जाता है, तब एक राष्ट्रसाधक लेखक अपनी लेखनी से नवसृजन की नींव रखता है और भटके हुए राजनीतिज्ञों को सही राह दिखाकर अपनी […]

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होती है नर से भारी नारी

डा0 इन्द्रा देवीलम्बे समय से एक सी मुद्रा, भंगिया एवं तेवर में प्रचलित होने के कारण नारी सशक्ति शब्द धिस पिट सा गया है। इसकी स्थिति उस अप्रचलित नोट या सिक्के की भॉंति है जो मूल्य और उपयोगिता को खो देने के पश्चात भी एक लोभ के वशीभूत बटुए में एक और अपना स्थान सुरक्षित […]

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क्यों है आवश्यक गाय को ”राष्ट्र माता”घोषित करना

भारतीय नस्ल के गोवंष संरक्षण, सम्पोशण, संवर्धन एवं गोउत्पादों के विनियोगार्थ केन्द्रीय तथा सभी राज्यों में स्वतन्त्र ” गोपालन मन्त्रालय ” के गठन से ही गोरक्षा एवं गोसेवा के वास्तविक लक्ष्यों की प्राप्ति संभव।-पूनम राजपुरोहित ”मानवताधर्मी”(प्रख्यात गोविषयक-चिन्तक)भारतवर्ष में धार्मिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, सामाजिक और व्यवहारिक दृष्टि से पूज्या गोमाता तथा उसके अखिल गोवंश को उनके […]

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अपने ही देश में बेगाने हिंदू

सचिन शर्माकांग्रेसनीत संप्रग -2 सरकार व छद्म सेक्यूर पार्टियों ने लगता है कि देश से हिंदुओं के सफाये का मन पूरी तरह बना लिया है। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में तमाम हिंदू विरोधी कार्य किये गये मसलन दंगा रोधी बिल, कश्मीर घाटी से पंडितों की वापसी का प्रयास न करना, असम व पूर्वोत्तर के राज्यों […]

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