Generated by All in One SEO v4.9.10, this is an llms.txt file, used by LLMs to index the site. # उगता भारत : हिंदी समाचार पत्र ## Posts - [ग्रेटर नोएडा में संपन्न हुआ विश्व शांति यज्ञ: वक्ताओं ने कहा- वैदिक चिंतन से ही आ सकती है विश्व शांति](https://www.ugtabharat.com/110937/) - ग्रेटर नोएडा। यहां स्थित ग्राम अमरपुर में विशाल विश्व शांति यज्ञ का आयोजन किया गया। यज्ञ के आयोजक रहे धनीराम आर्य ने बताया कि यह यज्ञ विश्व शांति के लिए संपन्न कराया गया । जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना और मुख्य वक्ता के रूप में आर्य उप प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम - [बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में सम्पन्न हुई परिवर्तन योगेश संस्थान की ’37वीं सुदर्शन सभा’: डॉ आर्य को तक्षशिला विद्वत्ता सम्मान से किया गया सम्मानित](https://www.ugtabharat.com/110905/) - वाराणसी। काशी की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए, 14 जून, 2026 को बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) के परिसर में ’37वीं सुदर्शन सभा’ का भव्य आयोजन हुआ। यह कार्यक्रम ‘परिवर्तन योगेश संस्थान व उसके उपखण्ड ‘महर्षि सत्य सनातन अखाड़ा’ और ‘महर्षि सत्य सनातन हिंदी विद्यापीठ’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। इस - [क्या भारत से कम्युनिस्ट आंदोलन विदा हो गया है ?](https://www.ugtabharat.com/108000/) - केरलम में कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार का अंत होने के साथ ही कम्युनिस्टों का अंतिम किला ध्वस्त हो गया है। कई लोग इस पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कह रहे हैं कि इस किले के ध्वस्त होने से कम्युनिस्ट आंदोलन भारत से सदा के लिए विदा हो गया है। हमारा मानना है कि ऐसा कहना - [दक्षिण विजय के लिए भाजपा को क्या करना होगा ?](https://www.ugtabharat.com/107999/) - गंगोत्री से गंगासागर तक अपना विशाल साम्राज्य खड़ा करने वाली भाजपा के लिए दक्षिण अभी भी एक चुनौती बना हुआ है। राष्ट्रीय एकता और अखंडता को मजबूत करने का मनोविज्ञान मजबूत करने वाली भाजपा के लिए यह आवश्यक है कि वह दक्षिण को भी भगवा ध्वज के नीचे लाए। अभी हाल ही में संपन्न हुए - [माय बॉडी , माय चॉइस को प्रकृति वर्जित करती है](https://www.ugtabharat.com/107992/) - लेखक - आर्य सागर सृष्टा ने जिसे अनिश्वरवादी प्रकृति भी कह सकते हैं स्त्री व पुरुष शरीरों की पृथक पृथक रचना की। यह भिन्नता केवल शारीरिक स्वभावगत ही नहीं आंतरिक भी है। जो हार्मोन पुरुष को सुंदर सुडोल बनाते हैं वह स्त्री को कुरूप बीमार बना सकते हैं जो हार्मोन स्त्री को सुंदर स्वस्थ बनाते - [आर्य समाज का दसवां नियम](https://www.ugtabharat.com/107990/) - लेखक - आर्य सागर ‌आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती जी ने आर्य समाज के संगठन के मार्गदर्शन के लिए 10 नियमों का निर्माण किया। यह समस्त नियम महर्षि के गहन गंभीर ज्ञान सिंधु विलक्षण प्रतिभा के द्योतक है। समय-समय पर बहुत से विद्वानों ने इन नियमों की पक्ष विपक्ष बनाकर व्याख्या या चर्चा - [भारत दैट इज जातिस्तान ...](https://www.ugtabharat.com/107987/) - लेखक - आर्य सागर भारत सरकार के केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कल आजादी से पूर्व 1872 से लेकर देश की 16वीं व आजादी के बाद आठवीं जनगणना के साथ-साथ जातिगत गणना का भी निर्णय लिया वह भी तब जब भारतीय समाज को एकजुट होने की आवश्यकता थी, देश की सीमाओं पर तनाव है । यह जनगणना - [पांच राज्यों के चुनाव परिणाम के निहित अर्थ](https://www.ugtabharat.com/107968/) - पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और असम में हुए विधानसभा चुनावों के परिणाम अब हमारे सामने हैं। पांचो राज्यों के मतदाताओं ने जिस प्रकार अपना जनादेश दिया है, उसे एक परिपक्व जनादेश ही कहा जाएगा। सबसे पहले बाद पश्चिम बंगाल की करते हैं। 1905 में मुस्लिम सांप्रदायिकता के आधार पर बंगाल का विभाजन किया गया - [निराश फिर भी हूं नहीं, है उत्साहित मेरा जीवन ...](https://www.ugtabharat.com/107949/) - क्यों कहते हो मुझे खिसकता रेत मुट्ठी का, मेरी ' मुट्ठी ' में है बदलना चाल नियति का। क्यों कहते जाते हो मुझे मैं खामोश रहता हूं ? मर्यादा है छिपी इसमें बताऊं हाल हृदय का।। जो करना था मुझे न कर सका अफसोस मुझको है, डटे रहना -लगे रहना- मिली यह सोच मुझको है। - [" गद्दारों के शीशमहल "](https://www.ugtabharat.com/107931/) - इतिहास के कुछ तथ्य विवादित रहते हैं भले ही शेष इतिहास निर्विवादित रहता हो। इतिहास लिखा ही इस भाव से जाता है कि भावी पीढ़ियां, संतति या राष्ट्रजन अतीत की घटनाओं से प्रेरणा लें भले ही घटना गौरव का भाव प्रदान करें या लज्जा का। भारत में प्राचीन वैदिक काल से लेकर मौर्य काल तक - [अक्षय तृतीया पर्व](https://www.ugtabharat.com/107953/) - अक्षय तृतीया का पर्व वैशाख महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। प्रचलित कथा: यह कथा इस प्रकार है कि एक धर्मदास नाम के व्यक्ति ने अक्षय तृतीया का - [लोकसभा के सांसदों की संख्या में वृद्धि ?](https://www.ugtabharat.com/107930/) - केंद्र की मोदी सरकार इस समय संसदीय क्षेत्र परिसीमन संबंधी विधेयक लेकर आई है। यदि इस बिल को पास कर दिया जाता है तो संसद के लोकसभा सदस्यों की संख्या 543 से बढ़कर 850 हो जाएगी। सरकार का कहना है कि संसद में 30% महिलाओं के लिए स्थान आरक्षित करना है। दूसरे, जन समस्याओं को - [मनुस्मृति या संविधान किसे चुने](https://www.ugtabharat.com/107927/) - मनुस्मृति या संविधान इन दोनो में किसको चुने या कौन श्रेष्ठ है तो जो मनुस्मृति की विषय वस्तु अध्ययन से अनभिज्ञ हैं वह तपाक से संविधान का चयन करता है और जो संविधा - [डॉ अंबेडकर और आर्य समाज का शिक्षा आंदोलन](https://www.ugtabharat.com/107908/) - डा. अम्बेडकर जी का जन्म 1891 में हुआ था। उस समय स्वामी दयानंद जी संसार में नहीं थे ,परंतु उनके द्वारा स्थापित आर्य समाज बहुत सक्रियता के साथ कार्य कर रहा था। उनके मानस पुत्रों ने सारे देश को अपने वैचारिक प्रभाव में ले लिया था। जिस समय डॉक्टर अंबेडकर युवावस्था में प्रवेश कर रहे - [राजस्थान में 'किला जिहाद'](https://www.ugtabharat.com/107888/) - लेखक - आर्य सागर शौर्य त्याग वीरता की भूमि राजस्थान में 300 से अधिक किले हैं। आज भी प्रत्येक किला खामोशी से हमारे सनातनी हिंदू शासकों सैनिकों के शौर्य की गवाही देता है, जब जब सातवीं शताब्दी से ही पश्चिम भारत के इन किलों पर कट्टरपंथी इस्लामिक अरब अफगान तुर्क जिहादी आक्रांताओं ने हमला किया - [वंदे मातरम पर बवाल क्यों ? अध्याय 7](https://www.ugtabharat.com/107751/) - वंदे मातरम पर बवाल उनके लिए बहुत बड़ा संदेश था कि भारत के लोग किसी भी प्रकार के आतंक अथवा अत्याचार से डरने वाले नहीं हैं। इसलिए अंग्रेजों को अपनी दमनकारी और - [विद्या प्रचारिणी सभा मारवाड़, आर्य समाज और विजय सिंह पथिक जी](https://www.ugtabharat.com/107855/) - आज राजस्थान केसरी, क्रांतिकारी विजय सिंह पथिक जी की जन्म जयंती है। पथिक जी का नश्वर शरीर आज हमारे बीच नहीं नहीं है लेकिन उनके विचार यश काया सदैव जीवित रहेगी। - [उन बेटों का क्या जीना, जिनकी माता बंधन में ......](https://www.ugtabharat.com/107852/) - रचना: स्व0 पं0 चन्द्रभानु आर्योपदेशक संस्थापक व आद्य सम्पादक शांतिधर्मी आजाद पिता भारत माता दौलतखाना लन्दन में। उन बेटों का क्या जीना, जिनकी माता बंधन में।। विलायत में भेज दिया भारत का सोना चाँदी। भारतीय नेताओं की ये कैसी आँखें बाँधी। मेरे देश की जनता बिल्कुल समझ लई है आँधी। मार गिरा दें गोरों को - [भारतवर्ष के स्वतंत्रता आंदोलन में शहीद विजय सिंह पथिक का रहा है महत्वपूर्ण योगदान](https://www.ugtabharat.com/107849/) - 27 फरवरी जयंती के विशेष अवसर पर विशेष आलेख वस्तुत: 21 फरवरी 1915 को भारत वर्ष की स्वतंत्रता की घोषणा स्वतंत्रता आंदोलन में प्रमुख एवं अग्रणी भूमिका निभाने वाले श्री विजय सिंह पथिक और उनके साथियों ने कर दी थी । भारत के स्वतंत्रता संग्राम में जिन देदीप्यमान सितारों ने स्वतंत्रता संग्राम में अपने प्राणों - [स्वाधीनता का उपासक, दमन व स्वेच्छाचारिता का काल 'विजय सिंह पथिक'](https://www.ugtabharat.com/107846/) - लेखक - आर्य सागर अतीत का स्वर्णिम वैदिक काल हो या पराधीनता का मुगलों व अंग्रेजराज हो,समय- समय पर भारत माता वीर - वीरांगनाओं का प्रसव करती रही है। इसकी कोख कभी बांझ नहीं हुई अर्थात भारत माता की वीर पुत्रियों की कोख से वीर संताने जन्म लेती रही है।ऐसी ही एक माता 'कंवल (कमल) - [वंदे मातरम पर बवाल क्यों ? अध्याय 6](https://www.ugtabharat.com/107745/) - राष्ट्रगीत का हिंदी भावार्थ ' वंदेमातरम' के बारे में कहा जाता है कि अंग्रेजों ने जब ' गॉड सेव द क्वीन' नामक अपने गीत को भारत के प्रत्येक विद्यालय में लागू करके उसे भारत के नन्हें-मुन्हें नौनिहालों को गाने के लिए विवश करने की नीति अपनाई तो बंकिम चंद्र चटर्जी को ब्रिटिश सरकार का यह - [वंदे मातरम पर बवाल क्यों ? अध्याय 5](https://www.ugtabharat.com/107744/) - वन्देमातरम् की पृष्ठभूमि और बंकिम चंद्र चटर्जी छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा औरंगजेब के शासनकाल में जिस " हिंदवी स्वराज्य " की स्थापना की गई थी, वह अपने चरम पर पहुंचा और एक दिन वह आया जब शिवाजी महाराज द्वारा आरंभ किए गए इस ' हिंदवी स्वराज्य ' के आंदोलन ने अपना रंग दिखाया तथा लगभग - [वीर हकीकत राय, बसंत पंचमी और पतंग उत्सव](https://www.ugtabharat.com/107837/) - अविभाजित उत्तर भारत (पाकिस्तान का सिंध - पंजाब प्रांत) में "बसंत पंचमी" इस उत्सव तीन कारणों से याद किया जाता है। एक है पतंगबाजी की परंपरा और दूसरा है वीर बालक हकीकत राय जी का बलिदान और तीसरा है पीला रंग। ये दोनों "बसंत पंचमी" से इस कदर जुड़ गए हैं कि बसंत पंचमी का - [हर्षोल्लास के साथ मनाई गई स्वामी दयानंद जी की 202 वीं जयंती](https://www.ugtabharat.com/107831/) - ग्रेटर नोएडा। (12 फरवरी 2026) यहां पर गुरुकुल मुर्शदपुर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में आर्य उप प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम बुद्ध नगर के तत्वावधान में आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती जी की 202 वीं जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर स्वामी दयानंद जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश - [वंदे मातरम पर बवाल क्यों ? अध्याय 4](https://www.ugtabharat.com/107743/) - वेद का राष्ट्रगान और वर्तमान भारत का राष्ट्रगान वैदिक राष्ट्रीय प्रार्थना आ ब्रह्मन्‌ ब्राह्मणो ब्रह्मवर्चसी जायतामा राष्ट्रे राजन्यः शूरऽइषव्योऽतिव्याधी महारथो जायतां दोग्ध्री धेनुर्वोढानड्वानाशुः सप्तिः पुरन्धिर्योषा जिष्णू रथेष्ठाः सभेयो युवास्य यजमानस्य वीरो जायतां निकामे निकामे नः पर्जन्यो वर्षतु फलवत्यो नऽओषधयः पच्यन्तां योगक्षेमो नः कल्पताम्‌॥ ( यजुर्वेद ; अध्याय २२, मन्त्र २२) अर्थ: " हे ब्रह्मन्‌ - - [टैरिफ के बावजूद आर्थिक क्षेत्र में अमेरिका से आगे निकलता शेष विश्व](https://www.ugtabharat.com/107811/) - दिनांक 20 जनवरी 2025 को डॉनल्ड ट्रम्प अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति बनाए गए थे। वर्ष 2024 में ट्रम्प ने अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव “Make America Great Again” अर्थात “अमेरिका को पुनः महान बनाएं”, नारे के साथ जीता था। वर्ष 2025 का पूरा वर्ष भर पूरे विश्व ने ट्रम्प को अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में कार्य - [माता सत्यवती अकैडमी की प्रधानाचार्या का शांति यज्ञ हुआ संपन्न](https://www.ugtabharat.com/107806/) - ग्रेटर नोएडा (विशेष संवाददाता) स्वर्गीय प्रोफेसर श्री विजेंद्र सिंह आर्य की धर्मपत्नी श्रीमती शीला आर्या की अरिष्टी के अवसर पर शांति यज्ञ का आयोजन किया गया। स्मरण रहे कि श्रीमती शीला आर्या का विगत २३ जनवरी को देहान्त हो गया था। दिनांक २८ जनवरी को सुबह उनके निवास स्थान ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 37 के - [देशभक्त स्वतंत्रता सेनानी की मनाई गई पुण्यतिथि : राष्ट्र रक्षा और धर्म रक्षा का लिया गया संकल्प](https://www.ugtabharat.com/107803/) - पलवल। देशभक्त स्वतंत्रता सेनानी आर्य समाज के नेता और कन्या गुरुकुल हसनपुर के संस्थापक स्वर्गीय महाशय मनफूलसिंह की 38 वीं पुण्यतिथि के अवसर पर भव्य समारोह के साथ पूर्णाहुति संपन्न हो गई। कन्या गुरुकुल भुसावर की ब्रह्मचारिणियों ने वेदपाठ किया और पलवल क्षेत्र की सैकड़ो प्रतिष्ठित महिला एवं पुरुषों ने आहुतियां प्रदान की। गुरुकुल कांगड़ी - [वंदे मातरम पर बवाल क्यों ? अध्याय - 3](https://www.ugtabharat.com/107741/) - स्वराज्य, विश्व कल्याण और वंदेमातरम डॉ राकेश कुमार आर्य वेद ने अपने राष्ट्र के नागरिकों से अर्थात आर्यजनों से राष्ट्र को महान बनाए रखने के संदर्भ में विशेष अपेक्षा की है। उसका मानना है कि राष्ट्र के निवासी ऊंचे चरित्र वाले हों। ऊंचे चिंतन वाले हों। ऊंची सोच वाले हों। उनके विचारों में महानता हो। - [कुरान को सर्वप्रथम हिन्दी भाषा में अनुवाद (translate) कराने का श्रेय महर्षि दयानंद को है](https://www.ugtabharat.com/107794/) - ।।ओ३म्।। स्वामी दयानन्द पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने सर्वप्रथम अपनी आत्म-कथा लिखी।इस आत्म-कथा के हिन्दी में होने के कारण हिन्दी को ही इस बात का गौरव है कि आत्म-कथा साहित्य का शुभारम्भ हिन्दी व स्वामी दयानन्द से हुआ। स्वामी दयानन्द के समय तक वेदों का भाष्य-व्याख्यायें-प्रवचन-लेखन-शास्त्रार्थ आदि संस्कृत में ही होता आया था। महर्षि पहले व्यक्ति - [आतंकवादी, न्याय, न्यायालय और अधिवक्ता](https://www.ugtabharat.com/107790/) - डॉ राकेश कुमार आर्य आतंकवाद देश और समाज में अराजकता फैलाने के लिए कुछ समुदायों के द्वारा जानबूझकर फैलाया जाता है। यह पूर्णतया प्रायोजित होता है। इसके पीछे बड़े-बड़े शातिर लोगों का दिमाग काम कर रहा होता है। परंतु इसे प्रस्तुत इस प्रकार किया जाता है कि जैसे ये कुछ भटके हुए नौजवानों का खेल - [भारतीय वामपंथ का कष्टमय प्रसव](https://www.ugtabharat.com/107787/) - लेखक - आर्य सागर वामपंथ एक वैश्विक विचारधारा है इसका भारतीय वर्जन बहुत ही विषैला कुटिल संकीर्ण है। ताजा तरीन घटनाक्रम से इसे समझते हैं। हरियाणा के फतेहाबाद जिले के एक मजदूर परिवार में 10 बेटियों के बाद 11वीं संतान के रूप में अभी कुछ दिन पहले बेटे का जन्म होता है। परिवार में जहां - [स्वामी भीष्म जी महाराज की घर वापसी आंदोलन में भूमिका](https://www.ugtabharat.com/107785/) - 43वीं पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि (आर्यसमाज के शुद्धि आंदोलन के इतिहास को जानने के लिए #डॉ_विवेक_आर्य कृत आर्यसमाज और शुद्धि आंदोलन पुस्तक पढ़े। मुख्य 550 रुपए। डाक खर्च सहित। मंगवाने के लिए whatsapp से 094855 99275 पर संपर्क करें) स्वामी भीष्म जी महाराज ने सत्यार्थप्रकाश को पढ़कर आर्य धर्म प्रचार करने की ठान ली - [वंदे मातरम पर बवाल क्यों ? अध्याय 1](https://www.ugtabharat.com/107735/) - क्या होती है राष्ट्र वन्दना ? भारत की वैदिक संस्कृति परकल्याण की संस्कृति है। कृतज्ञता की संस्कृति है। देवों की संस्कृति है। हमें जो कोई कुछ कहीं से देता है, हम उसके प्रति कृतज्ञता का भाव रखते हैं और जीवन भर रखते हैं। इसी से हमारे यहां पर कथित रूप से बहुदेवतावाद का विस्तार और - [वंदे मातरम पर बवाल क्यों ? अध्याय 2](https://www.ugtabharat.com/107739/) - लेखक - डॉ राकेश कुमार आर्य स्वराज्य , विश्व कल्याण और वंदेमातरम वेद मनुष्य को शिक्षा देता है कि वह ' सामूहिक कल्याण' पर ध्यान केंद्रित करे। जब वेद ने अपना ' संगठन सूक्त' बनाकर हमको दिया तो उसमें संपूर्ण विश्व के मानव समाज से यह अपेक्षा की गई कि वह सब के कल्याण के - [वीर ब्रह्मचारी पं० हरिशरण जी बाईबलाचार्य  मेरठ उत्तर प्रदेश](https://www.ugtabharat.com/107763/) - स्वामी ओमानंद जी के संस्मरण जि० मेरठ में सेवा गुरुकुल दयानन्द बाग शेरसा रोहतक तथा गुरुकुल बुकलाना तथा अध्ययन भी किया । इनकी शास्त्रार्थ करने तथा देखने में बहुत ही रुचि थी । इस लग्न में बाईबल तथा कुरान का भी अध्ययन किया । बाईबल का तो वह आचार्य बन गया । अच्छे अच्छे पादरियों - [श्रद्धानंद जी के शुद्धि आंदोलन को दी जाएगी नई दिशा : स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज](https://www.ugtabharat.com/107758/) - स्वामी श्रद्धानंद के बलिदान दिवस के उपलक्ष्य में संगोष्ठी हुई संपन्न : श्रद्धानंद जी के शुद्धि आंदोलन को दी जाएगी नई दिशा : स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज जिला प्रतिनिधि सभा ने स्वामी श्रद्धानंद को भारत रत्न देने की मांग उठाई ग्रेटर नोएडा। यहां स्थित प्रतिष्ठित संस्थान जीएनआईओटी में आर्य उप प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम बुद्ध - [धूला भंगी और हरवीर गुलिया](https://www.ugtabharat.com/107686/) - भारत के शौर्य की गाथा : मुगलकालीन भूले बिसरे हिंदू योद्धा भारत की धर्म - राष्ट्र - परंपरा को बनाए रखने के लिए अपने रक्त और पसीने को बहाने में वाल्मीकि समाज के लोगों का भी बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इन लोगों को भारत पर अवैध रूप से शासन करने वाले अलाउद्दीन खिलजी के - [भारत के इतिहास के गौरव : छावा संभाजी](https://www.ugtabharat.com/107683/) - डॉ राकेश कुमार आर्य संभाजी के पिता छत्रपति शिवाजी मैथिलीशरण गुप्त जी भारत के स्वर्णिम अतीत को रेखांकित करते हुए लिखते हैं :- उनके चतुर्दिक-कीर्ति-पट को है असम्भव नापना, की दूर देशों में उन्होंने उपनिवेश-स्थापना । पहुँचे जहाँ वे अज्ञता का द्वार जानो रुक गया, वे झुक गये जिस ओर को संसार मानो झुक गया॥” - [इतिहास उसी का होता है ....](https://www.ugtabharat.com/107681/) - इतिहास एक झरोखा है, नव पीढ़ी शक्ति प्राप्त करे। शक्ति के अवगाहन से नव सृष्टि का निर्माण करे।। इतिहास स्वयं को पाने का साधन सबसे उत्तम है। साधना बनती साधन से, ऋषि -कथन ये उत्तम है।। फलवती साधना हो उसकी जिसका साधन सुथरा हो। इतिहास उसी का होता है, जो धर्म हित रण में उतरा - [स्वामी श्रद्धानन्द का शुद्धि आंदोलन](https://www.ugtabharat.com/107661/) - १९२० के दशक में नव-मुसलमानों का सामाजिक ढाँचा अत्यंत विचित्र था। वे आस्था से तो मुसलमान हो गए, पर अपने पूर्वजों के हिन्दू रीति-रिवाज, संस्कार और लोकविश्वास उन्होंने पूरी तरह नहीं छोड़े। उन्होंने बहुदेव-पूजा का स्थान सूफी पीरों, फकीरों और शहीदों की मजारों को दे दिया। मंदिरों की जगह खानकाहें और समाधियों की जगह कब्रें - [अंधविश्वास : शिव की सवारी बैल](https://www.ugtabharat.com/107660/) - डॉ डी के गर्ग प्रचलित मान्यता: शिव हिमालय पर्वत पर रहते है और उनकी सवारी बैल है। नंदी की उत्पत्ति के बारे में कई कथाएं है कौन सी कथा सत्य और प्रामाणिक हैं ये कथाकार और उनके अनुयायियों को मालूम होगा क्योंकि ये कथाएं वैज्ञानिक रूप से और ईश्वरीय नियमों के विरोध होने के कारण - [सत्यरानी चढ्ढा - दहेज विरोधी आंदोलन का मुखर चेहरा !](https://www.ugtabharat.com/107626/) - सत्यरानी चढ्ढा के आंदोलन का यह परिणाम हुआ। भारतीय दंड संहिता में 1983 में दहेज उत्पीड़न का ऐतिहासिक 498 ए सेक्शन जोड़ा गया वहीं इंडियन एविडेंस एक्ट में धारा 113 - [ब्राह्मण शब्द को लेकर भ्रांतियां एवं उनका निवारण](https://www.ugtabharat.com/107621/) - डॉ विवेक आर्य ब्राह्मण शब्द को लेकर अनेक भ्रांतियां हैं। इनका समाधान करना अत्यंत आवश्यक है। क्यूंकि हिन्दू समाज की सबसे बड़ी कमजोरी जातिवाद है। ब्राह्मण शब्द को सत्य अर्थ को न समझ पाने के कारण जातिवाद को बढ़ावा मिला है। शंका 1 ब्राह्मण की परिभाषा बताये? समाधान- पढने-पढ़ाने से,चिंतन-मनन करने से, ब्रह्मचर्य, अनुशासन, सत्यभाषण - [प्रकाश पर्व दीपावली पर विशेष : धर्मनिरपेक्षता और भारत का सर्वोच्च न्यायालय](https://www.ugtabharat.com/101649/) - हमारे देश की राजनीति जिस प्रकार परस्पर राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के बीच उलझी हुई दिखाई देती है, उसके चलते अनेक बार ऐसा आभास होता है कि जैसे देश को राजनीति के द्वारा शासित न करके सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा शासित किया जा रहा है। जब देश के लोगों ने अपने जनमत से देश को एक साफ - [अपने महापुरुषों के चरित्र को ठीक से समझना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता : स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज](https://www.ugtabharat.com/101617/) - ग्रेटर नोएडा ( विशेष संवाददाता ) अंसल सोसाइटी में चले पांच दिवसीय ऋग्वेद पारायण यज्ञ में मुख्य व्याख्याता के रूप में उपस्थित रहे अंतरराष्ट्रीय आर्य सन्यासी संत स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज ने अंतिम दिन उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि श्री कृष्ण जी के चरित्र को बिगाड़ कर हमारे पाखंडियों ने बहुत बड़ा - [भारत के मूल में सनातन हिंदू संस्कृति का आधार है](https://www.ugtabharat.com/101664/) - किसी भी राष्ट्र के मूल में कुछ तत्व निहित होते हैं, जिनके बल पर वह देश आगे बढ़ता है और समाज के विभिन्न वर्गों को एकता के सूत्र में पिरोए रखता है। भारत के एक राष्ट्र के रूप में, इसके मूल में, सनातन हिंदू संस्कृति का आधार है जो हजारों वर्षों से भारत को आज - [देश की एकता के शिल्पकार सरदार वल्लभभाई पटेल](https://www.ugtabharat.com/101778/) - स्वाधीन भारत के पहले गृहमंत्री और उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को हुआ था। उन्होंने भारत के स्वाधीनता आंदोलन में बढ़ चढ़कर भाग लिया था। गांधी जी के आवाहन पर वह अपने विधि व्यवसाय को छोड़कर स्वाधीनता आंदोलन में सम्मिलित हुए थे। यद्यपि वह गांधी जी की कांग्रेस में अपने - [*बंदे में था दम*!](https://www.ugtabharat.com/101740/) - लेखक आर्य सागर तिलपता ग्रेटर नोएडा 🖋️। 354 साल पहले आज ही के दिन 27 अक्टूबर 1670 को राजौरी जम्मू कश्मीर के एक साधारण क्षत्रिय परिवार में एक बालक का जन्म हुआ उस बालक की उम्र जब 15 वर्ष की हुई तो उसके हाथों एक गर्भवती हिरणी का शिकार हो गया पश्चाताप के कारण वह - [ऋषि निर्वाण दिवस पर युगपुरुष स्वामी दयानन्द सरस्वती को कोटि-कोटि नमन !](https://www.ugtabharat.com/101812/) - (ऋषि निर्वाण दिवस) पावन पर्व दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं ! एवं क) संक्षिप्त जीवन-परिचय स्वामी दयानन्द सरस्वती का जन्म- नाम मूलशंकर था। उनका जन्म 12 फरवरी 1824 में टंकारा ( काठियावड़, मौरवी राज्य– गुजरात) में हुआ। उनके पिता श्रीकर्षणजी तिवाड़ी, शिवभक्त औदीच्य ब्राह्मण थे। सन् 1834 में मूलशंकर ने पिता के आदेश पर, शिवरात्रि का - [औरंगजेब के काले कारनामे और भारतीय इतिहास](https://www.ugtabharat.com/101946/) - (यह लेख उन मतांधों के लिए है जो आज के दिन औरंगज़ेब की जयंती गर्व से बनाने की मूर्खता कर रहे है) मुगल खानदान में सबसे लम्बे समय तक राज औरंगज़ेब का रहा था। जितना लम्बा औरंगज़ेब का राज था उतनी ही लम्बी उसके अत्याचारों की सूची थी। भारत के 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त करने - [नशे की चपेट में आता पंजाब का युवा वर्ग](https://www.ugtabharat.com/102003/) - जिस समय खालसा पंथ की स्थापना की गई थी, उस समय देश में मुगलों के अत्याचार अपने चरम पर थे। खालसा का अभिप्राय शुद्धता से है। इस शुद्धता का अभिप्राय था कि जिस इस्लाम के नाम पर मुगल बादशाह सनातन वैदिक धर्मी हिंदू समाज पर अत्याचार कर रहे थे, उससे शुद्ध पवित्र कोई नहीं था। - [*राष्ट्र चिंतन* *ये सिख तो हिन्दुओं के दुश्मन हैं*](https://www.ugtabharat.com/101986/) - सिख भी हिंदुओं का संहार और कत्लेआम चाहते हैं आचार्य श्रीहरि कनाडा में हिन्दू सभा मंदिर पर सिखों की हिंसा हुई, हमला हुआ, मंदिर को अपमानित करने का काम हुआ है, मंदिर में उपस्थित श्रद्धालुओं को निशाना बनाने की कोशिश हुई, कुछ श्रद्धालु हमले के शिकार भी हुए है, पुलिस खामोश थी, कनाडा की सरकार - [अमेरिकी राष्ट्रपति के हिंदू कार्ड खेलने के निहितार्थ](https://www.ugtabharat.com/102032/) - कमलेश पांडेय पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति व रिपब्लिकन पार्टी के पुनः उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प का यह कहना कि हम अमेरिका को फिर से मज़बूत बनाएंगे और ताकत के ज़रिए शांति वापस लाएंगे, एक ऐसी लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता है जिसकी अपेक्षा हरेक जनतांत्रिक राष्ट्राध्यक्ष से की जाती है लेकिन जब अशान्ति की जड़ में वोट बैंक हो और - [सनातन काल से छठ पूजा का विधान](https://www.ugtabharat.com/102082/) - आचार्य डा. राधेश्याम द्विवेदी छठ पर्व या छठ कार्तिक शुक्ल की षष्ठी को मनाया जाने वाला एक हिन्दू पर्व है। इस पूजा का महत्व सनातन काल से ही देखा जा सकता है। इसका आरंभ महाभारत काल में कुंती द्वारा सूर्य की आराधना तथा सूर्य के आशीर्वाद स्वरूप उन्हें पुत्र कर्ण की प्राप्ति होने के समय - [मोपला नरसंहार पर गैर कांग्रेसी नेताओं के विचार](https://www.ugtabharat.com/102121/) - लेखक :-- चौधरी छोटूराम (उस समय युनिनिस्ट पार्टी के नेता) मद्रास राज्य(वर्तमान केरल) के मालाबार में सन 1921-22 में मोपला जाति के मुस्लिमो द्वारा 10000 से अधिक हिन्दुओ का कत्लेआम किया गया था। उनके बचाव में आये सैकड़ो ब्रिटिश भी मौत के घाट उतार दिए गए थे। ये दंगा हिंदुस्तान के इतिहास में सबसे बड़े - [बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के निहितार्थ और भारत](https://www.ugtabharat.com/102136/) - बांग्लादेश में इस समय हिंदू समुदाय के लोग जीवन मरण के दौर से गुजर रहे हैं। उनके लिए चारों ओर असुरक्षा ही असुरक्षा दिखाई देती है। सरकारी स्तर पर भी उनके लिए कोई ऐसा प्रबंध नहीं किया जा रहा है जिससे लगे कि सरकार अपने कर्तव्य और दायित्वों के प्रति संवेदनशील है। सरकार में जिस - [सनातन के मानवीय शाश्वत मूल्य और मानवता](https://www.ugtabharat.com/102231/) - —विनय कुमार विनायक सनातन धर्म के सारे पंथ मत की अच्छाई को धारण करके मानवता बचाई जा सकती विश्व में सच्चाई लाई जा सकती हिन्दू धर्म की खासियत है नारी को देवी माता समझी जाती छोटी कन्याओं का पूजन कर नारी को मातृ रुप मानी जाती सनातनी होके नारी को बलात्कार हत्या से बचाई जा - [बिरसा मुंडा जयंती - आर्य अनार्य के झूठे विमर्श के अवसान का अवसर](https://www.ugtabharat.com/102413/) - बिरसा मुंडा महान क्रांतिकारी थे, जनजातीय समाज को साथ लेकर उलगुलान किया था उन्होने। उलगुलान अर्थात हल्ला बोल, क्रांति का ही एक देशज नाम। वे एक महान संस्कृतिनिष्ठ समाज सुधारक भी थे, वे संगीतज्ञ भी थे जिन्होंने सूखे कद्दू से एक वाद्ध्ययंत्र का भी अविष्कार किया था जो अब भी बड़ा लोकप्रिय है। इसी वाद्ध्ययंत्र - [भारत के 1235 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास भाग - 409](https://www.ugtabharat.com/102362/) - [हिंदी स्वराज के संस्थापक शिवाजी और उनके उत्तराधिकारी पुस्तक से] वीर योद्धा संभाजी महाराज शिवाजी के पश्चात उनके पुत्र संभाजी महाराज ने उनके उत्तराधिकारी के रूप में गद्दी संभाली। इतिहासकारों का मानना है कि संभाजी महाराज यद्यपि अपने पिता शिवाजी महाराज की भांति तो संघर्षशील और साहसी नहीं थे, परंतु फिर भी उन्होंने इतिहास में - [क्या आप साईं बाबा को भगवान मानते है?](https://www.ugtabharat.com/102473/) - (पाखंड खंडन) जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी। गोस्वामी तुलसीदास की इस चौपाई का नाम लेकर एक हिन्दू नेता ने यह तर्क दिया कि आप चाहे साईं बाबा को पूजिये चाहे किसी अन्य को आपकी भावना प्रधान होनी चाहिए। आपको साईं बाबा को भगवान मानने में किसी को दिक्कत नहीं होनी चाहिए। - [विश्ववारा वैदिक संस्कृति](https://www.ugtabharat.com/102694/) - वेद अपौरूषेय है। सर्वप्रथम सृष्टि में परमबह्म परमात्मा ने अमैथुनी सृष्टि का प्रादुर्भाव कर हमें चार ऋषियों अग्नि, वायु, आदित्य, अंगिरा के हृदय में अपौरूषेय ज्ञान क्रमशः ऋगवेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद को उक्त ऋषियों को दिया। इसी प्रकार सृष्टि के प्रारंभ के प्रथम सत्र में मैथुनी सृष्टि को भी उत्पन्न कर सृष्टि में समस्त - [मल्लिकार्जुन खड़गे बनाम भगवाधारी योगी](https://www.ugtabharat.com/102670/) - डॉ डेलोन नाम के एक फ्रेंच नागरिक को गोवा के पवित्र न्यायाधिकरण में 2 वर्ष कठोर कारावास का दंड भुगतना पड़ा था। इस दंड के लिए उनका अपराध केवल इतना था कि उन्होंने एक युवक से सेंट एंथोनी की मूर्ति बांह से हटाने के लिए कह दिया था, क्योंकि डॉ डेलोन को उस युवक की - [भारत के 43 विश्व धरोहर स्मारक](https://www.ugtabharat.com/102743/) - आचार्य डा. राधेश्याम द्विवेदी विश्व धरोहर सप्ताह हर साल 19 नवंबर से 25 नवंबर तक पूरे विश्व में मनाया जाता है। विश्व विरासत स्थल ऐसे विशेष स्थानों (जैसे वन क्षेत्र, पर्वत, झील, मरुस्थल, स्मारक, भवन, या शहर इत्यादि) को कहा जाता है, जो विश्व विरासत स्थल समिति द्वारा चयनित होते हैं; और यही समिति इन - [एक अत्याचारी, अन्यायी, अलोकतांत्रिक, असंवैधानिक, अमानवीय प्रस्ताव 'साम्प्रदायिक और लक्षित हिंसा रोकथाम विधेयक 2011'](https://www.ugtabharat.com/102854/) - यह बिल क्या है और किसने बनाया यह तो सभी को ज्ञात ही होगा कि सोनिया गांधी की सलाहकार परिषद् ने 'साम्प्रदायिक और लक्षित हिंसा रोकथाम विधेयक 2011' नाम से एक ऐसे हिन्दू विरोधी काले कानून का प्रारूप तैयार किया है जिसमें यह मान लिया गया है कि जब कभी भी साम्प्रदायिक दंगे होंगे तो - [चौधरी छोटूराम एवं शुद्धि आन्दोलन](https://www.ugtabharat.com/102875/) - #जयंती_दिवस 24 नवम्बर पर विशेष:- दीनबंधु चौधरी छोटूराम जैसा किसान हितैषी आज तक नहीं हुआ। चौधरी साहब ने अपना जीवन किसानों के हित के लिए जिया। किसान चाहे किसी भी मजहब या जाति का रहा हो, उनके लिए वह अपना था। उन्होंने अपने प्रेरणास्रोत ऋषि दयानंद के वाक्य ‘किसान राजाओं का राजा होता है।’ को - [सम्भल उपद्रव,सभ्य समाज को शस्त्र युक्त करना आवश्यक](https://www.ugtabharat.com/102903/) - दिव्य अग्रवाल (लेखक व विचारक) मजहबी उपद्रवियों की ताकत पर अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी जैसे लोगों का आतंक उत्तर प्रदेश ने देखा है। संभल में जिस तरह इस्लामिक भीड़ को कईं किलोमीटर तक से बुलाकर एकत्र कर उपद्रव काटा गया यदि पुलिस मोर्चा नहीं संभालती तो मजहबी भीड़ किस तरफ जाती यह कोई नहीं - [मजहबी ठेकेदार विक्टिम कार्ड खेलना बंद करें, पुलिसकर्मियों के भी परिवार होते हैं](https://www.ugtabharat.com/102899/) - दिव्य अग्रवाल (लेखक व विचारक) कभी कभी लिखते हुए भी सोचना पड़ता है की समाज के दोहरे मापदंड पर क्या लिखें लेकिन लिखना पड़ता है लोगो को दर्पण दिखाना पड़ता है। सम्भल की घटना पर स्वयंभू घोषित बुद्धिजीवी और इस्लामिक समाज के कुछ ठेकेदार माननीय न्यायालय और पुलिस फोर्स को अप्रत्यक्ष रूप से दोषी करार - [संभल विवाद की वास्तविकता](https://www.ugtabharat.com/103054/) - 1947 में जब देश आजाद हुआ तो एक मिथक कांग्रेस की ओर से गढ़ा गया कि देश को आजाद कराने में हिंदू - मुस्लिम दोनों समुदायों का बराबर का योगदान है । यद्यपि मुस्लिम अपने लिए अलग देश लेने में सफल हो गए थे, परन्तु जो मुसलमान उस समय देश में रह गए थे, उनका - [सबसे पवित्र ग्रंथ नही हो सकता संविधान](https://www.ugtabharat.com/103083/) - भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान दिवस पर संसद के केंद्रीय कक्ष में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि संविधान सबसे पवित्र ग्रंथ है, क्योंकि हमने संविधान के जरिए सामाजिक न्याय और समावेशी विकास के कई बड़े लक्ष्यों को हासिल किया है। संविधान निर्माताओं की प्रगतिशील और समावेशी सोच की छाप हमारे संविधान - [पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 पर उठते हुए सवालों का जवाब आखिर कौन देगा?](https://www.ugtabharat.com/103121/) - क्या आपको पता है कि प्रथम मुस्लिम आक्रांता मुहम्मद बिन कासिम ने 712 ई में भारत के सिंध प्रांत पर आक्रमण किया और काफी उत्पात मचाया। उसके बाद उसके अनुयायी यानी मुस्लिम आक्रमणकारी अपनी सुविधा के अनुसार भारत पर आक्रमण करते हुए आए, यहां के समृद्ध मंदिरों व बाजारों सहित प्रमुख जगहों पर लूटपाट मचाई - [ओ३म् से 'बोम' तक पहुँचा अफगानिस्तान](https://www.ugtabharat.com/103097/) - इतिहास की पड़ताल पुस्तक से .. आजकल अफगानिस्तान में जो कुछ भी हो रहा है उससे हम भारतवासियों को बहुत कुछ सीखने की आवश्यकता है। हमें यह पता होना चाहिए कि अफगानिस्तान कभी भारतवर्ष का एक अंग हुआ करता था। आर्यावर्त कालीन अनेकों सम्राटों का इस क्षेत्र पर शासन रहा है। उस समय वैदिक संस्कृति - [दलितोद्धार सभा के सौजन्य से विचार गोष्ठी हुई संपन्न](https://www.ugtabharat.com/103258/) - सनातन वैदिक दल से अलग नहीं है दलित वर्ग ग्रेटर नोएडा। यहां स्थित ग्राम छांयसा में एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया । जिसमें ' वैदिक सनातन धर्म और दलित समाज की समस्याएं ' विषय पर विचार रखे गए विद्वानों ने अपने विचार प्रकट किए निष्कर्ष निकाला गया कि दलितों का यदि सबसे बड़ा - [देश तो चलेगा बहुमत की इच्छा से ही ....](https://www.ugtabharat.com/103354/) - कहते हैं कि जो राजा या शासन पद्धति जनभावनाओं को नहीं समझ पाते हैं, रणनीतिक रूप से अकस्मात गोलबंद किए हुए उग्र लोगों के द्वारा नष्ट कर दिए जाते हैं। मुगलिया सल्तनत से लेकर ब्रिटिश साम्राज्य का हश्र हमारे-आपके सामने है। वहीं, एक बार नहीं बल्कि कई दफे हुआ पारिवारिक लोकतांत्रिक सत्ता का पतन भी - [भारत के विरुद्ध पाकिस्तान से नजदीकी बढ़ाता बांग्लादेश](https://www.ugtabharat.com/103352/) - 1971 के मुक्ति संग्राम के बाद भारत के सैन्य समर्थन से पाकिस्तान से आजाद हुआ बांग्लादेश इन दिनों भारत से दूर और पाकिस्तान के पास जाता नजर आ रहा है। इस साल अगस्त में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से ही वहां सियासी उथल-पुथल चल रही है और माहौल में भारत के खिलाफ - [कमी संविधान में है या हमारे समाज की मानसिकता में है ?](https://www.ugtabharat.com/103351/) - ‘संविधानों का जीवनकाल’ विषय पर शिकागो विश्वविद्यालय में प्रकाशित पत्र के अनुसार संविधानों का औसत जीवनकाल मात्र 17 वर्ष है। 50 वर्ष की अवधि के बाद महज 19 प्रतिशत संविधान ही जीवित रह पाते हैं। ऐसे में भारतीय संविधान की 75 वर्षों की दीर्घ यात्रा इसकी स्वीकार्यता और लचीलेपन का द्योतक तो है ही, साथ - [महापुरुषों का ये वर्गीकरण घातक होगा](https://www.ugtabharat.com/103454/) - संसार के जितने भी मत, पंथ, संप्रदाय हैं, उनका कोई ना कोई महापुरुष हुआ है। जिसे किसी संप्रदाय विशेष का प्रवर्तक कहा जा सकता है। संप्रदायों के इन प्रवर्तकों को लेकर लोगों ने उनकी चित्र पूजा आरंभ की। धीरे-धीरे जो महापुरुष जन कल्याण के लिए संसार में आया था, वह किसी विशेष वर्ग या संप्रदाय - [आर्यसमाज का मेघ जाति उत्थान आंदोलन](https://www.ugtabharat.com/103699/) - आर्य समाज और मेघ 19 वीं शताब्दी में धार्मिक तथा समाज सुधारक आंदोलनों में आर्य समाज निःसन्देह सबसे महत्वपूर्ण था. स्यालकोट के डस्का शहर में सन् 1884 में और जफ़रवाला में 1887 में आर्यसमाज स्थापित हो चुकी थी. ये दोनों समाजें मेघोद्धार का केंद्र थीं.हिंदू समाज के दमन से तंग आए निम्नजातियों के हिन्दू इस्लाम - [धर्म संसद : इस्लामिक जिहाद से मुक्ति का मार्ग](https://www.ugtabharat.com/103742/) - जब शतकों से इस्लामिक जिहाद के भीषण अत्याचारों से मानवता त्राहि - त्राहि करती आ रही हो फिर भी कोई राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संगठन इससे सभ्य समाज को सुरक्षित रखने में असफल हो रहा हो तो वैश्विक समाज क्या करे? ऐसे में इन जेहादियों की घृणित और हिंसक सोच से जनमानस को अवगत करा कर - [अपने विनाश को मौन होकर देखता हिंदू समाज](https://www.ugtabharat.com/103765/) - अब से लगभग १०० वर्ष पूर्व महात्मा गांधी भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग ले रहे थे। उनकी विचारधारा के अनुकूल कार्य करने वाले लोगों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही थी। कांग्रेस पर उनका लगभग एकाधिकार हो चुका था । उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने १९३७ में वर्धा में अपनी बैठक आयोजित की। - [गुरु गोविन्द सिंह जी के प्रकाश उत्सव के अवसर पर हिन्दू समाज के लिए सन्देश](https://www.ugtabharat.com/103860/) - मुगल शासनकाल के दौरान बादशाह औरंगजेब का आतंक बढ़ता ही जा रहा था। चारों और औरंगज़ेब की दमनकारी नीति के कारण हिन्दू जनता त्रस्त थी। सदियों से हिन्दू समाज मुस्लिम आक्रांताओं के झुंडों पर झुंडों का सामना करते हुए अपना आत्म विश्वास खो बैठा था। मगर अत्याचारी थमने का नाम भी नहीं ले रहे थे। - [नेहरू जी का राजहठ और भारतीय लोकतंत्र](https://www.ugtabharat.com/103952/) - पंडित जवाहरलाल नेहरू लोकतंत्र में विश्वास रखने के उपरांत भी साम्यवादी विचारधारा से प्रेरित थे। जब वह स्वाधीन भारत के पहले प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने लोकतंत्र को समाजवादी देशों की भांति हांकने का प्रयास किया। हम सभी जानते हैं कि साम्यवादी अर्थात कम्युनिस्ट देशों में कोई एक नेता होता है, वही अपनी पार्टी का नेता - [संसार का विनाश और विश्व नेता](https://www.ugtabharat.com/103975/) - इतिहास की पड़ताल पुस्तक से ... बेशक चाहे दुनिया का आम आदमी अपनी दैनिक जीवन चर्या को खींचने के लिए कितनी ही बड़ी जंग क्यों न लड़ रहा हो और चाहे उसे वैश्विक राजनीति से अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए कितनी ही अपेक्षाएँ क्यों न हों? पर वैश्विक राजनीति के पंच या तथाकथित - [बांग्लादेश - पाकिस्तान बनाम भारत](https://www.ugtabharat.com/104022/) - बांग्लादेश के निर्माण में भारत की भूमिका पर अपनी पीठ थपथपाते हुए कांग्रेस इसे तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की महान उपलब्धि के रूप में प्रचारित प्रसारित करती रही है। उसका कहना रहा है कि श्रीमती गांधी ने इन दोनों देशों को अलग-अलग करके भारत की सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण और साहसिक निर्णय लिया - [कश्मीर से पंडित पलायन के चार दशक](https://www.ugtabharat.com/104038/) - कश्मीर के सर्वाधिक नए जन सांख्यिकीय आंकड़ों पर नजर डाले तो स्वतंत्रता के समय वहां घाटी में 15% कश्मीरी पंडितों की आबादी थी जो आज 1 % से नीचे होकर 0 % की ओर बढ़ गई है। हाल ही के इतिहास में कश्मीर के ज.स. सांख्यिकी में यदि परिवर्तन का सबसे बड़ा कारक खोजें तो - [तैमूरलंग का आतंकी अभियान (भाग 2)](https://www.ugtabharat.com/104045/) - मजहब ही तो सिखाता है आपस में बैर रखना पुस्तक से ... - डॉ राकेश कुमार आर्य सिकन्दर बुतशिकन कश् मीर वैसे तो हमारी भारतीय सांस्कृतिक विरासत का बेजोड़ उदाहरण है, पर पिछले कुछ समय से कश्मीरियत का अभिप्राय कश्मीर की उस गंगा - जमुनी तहजीब से लगाया जा रहा है जिसमें वहाँ के हिन्दुओं - [सर्वत्र व्याप रहा है ऋषि का आलोक](https://www.ugtabharat.com/104077/) - स्वामी दयानंद जी महाराज द्वारा स्थापित आर्य समाज जैसी पवित्र संस्था को स्थापित हुए अब 150 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। इस कालखंड में हमारे देश के राष्ट्रीय इतिहास में अनेक घटनाएं घटित हुई हैं। यदि सूक्ष्मता से अवलोकन किया जाए तो आर्य समाज ने भारत के राष्ट्रीय इतिहास को इस कालखंड में बड़ी गहराई - [बाबर व अकबर के शासन काल में हिन्दू दमन भाग (1)](https://www.ugtabharat.com/104119/) - बाबर व अकबर के शासन काल में हिन्दू दमन जिन आर्यों के धर्म पर हम भारतीयों को नाज है, जिनकी मर्यादा विश्व में कल बेजोड़ थी और आज है। उनको विदेशी मानना इस राष्ट्र - [प्रयागराज, तीर्थराज और त्रिवेणी संगम की वास्तविकता, भाग - 5](https://www.ugtabharat.com/104162/) - प्रयागराज, तीर्थराज और त्रिवेणी संगम की वास्तविकता, भाग - 5 - [धूला भंगी और हरवीर गुलिया](https://www.ugtabharat.com/104264/) - धूला भंगी और हरवीर गुलिया भंगी या महतर शब्द का भी एक विशेष अर्थ है। वास्तव में अलाउद्दीन खिलजी ने जहां - जहां हमारे वीर सरदार योद्धाओं से अपने समक्ष आत्मसमर्पण - [अन्तिम हिन्दू (भाग 1)](https://www.ugtabharat.com/104271/) - जब संसार का अन्तिम हिन्दू भगवान् के सामने पहुँचा तो पादरी की तरह उसने भी हाथ उठाकर आरोप लगाया " पिता ! मेरी जाति ने तेरे लिये विशाल मन्दिर बनाये। तेरी सोने हीरो - [दहेज रोधी कानूनों पर एक समीक्षात्मक पर्यालोचन](https://www.ugtabharat.com/104286/) - दहेज रोधी कानून पर एक समीक्षात्मक पर्यालोचन - [संत रविदास का मुगल विरोध और भीम मीम का छलावा](https://www.ugtabharat.com/104306/) - संत रविदास का मुगल विरोध और भीम मीम का छलावा - [प्रयागराज महाकुंभ में अंतर्निहित है - समावेशी सांस्कृतिक दृष्टि](https://www.ugtabharat.com/104335/) - विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक समागम, प्रयागराज महाकुंभ मेला, आध्यात्मिकता, आस्था और सांस्कृतिक विरासत का शानदार उत्सव है। यह आयोजन, जो पवित्र गंगा यमुना और पौराणिक - [राजन तुम हो साँच खरे, खुब लढे तुम जंग](https://www.ugtabharat.com/104370/) - अभी 2 दिन पहले 'छावा' फिल्म देखी जो हिंदवी साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी के पुत्र संभाजी राजे के ऊपर बनी है। संभाजी राजे एक महान मराठा योद्धा कुशल सैन्य - [इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू](https://www.ugtabharat.com/104364/) - इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया उन्होंने हिंदी भाषा को ' हिंदुस्तानी ' कहकर उसमें उर्दू के शब्दों का भरपूर प्रयोग करने पर बल दिया। - [इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू (अध्याय - 2)](https://www.ugtabharat.com/104378/) - इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू (अध्याय - 2) मार्क्सवादी नेहरू और भारतीय इतिहास ( ‘डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया की डिस्कवरी’ ) - [मज़हब और क्रूसेड युद्ध अर्थात् धार्मिक युद्ध](https://www.ugtabharat.com/104451/) - मज़हब और क्रूसेड युद्ध अर्थात् धार्मिक युद्ध - [स्वामी दयानंद सरस्वती के जीवन और कार्यों की प्रमुख विशेषताएँ](https://www.ugtabharat.com/104443/) - स्वामी दयानंद सरस्वती के जीवन और कार्यों की प्रमुख विशेषताएँ - [इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू (अध्याय 5)](https://www.ugtabharat.com/104456/) - डिस्कवरी ऑफ इंडिया की डिस्कवरी - [आर्यसमाज वैदिक धर्म प्रचारक एवं समाज सुधारक संस्था है](https://www.ugtabharat.com/104463/) - आर्यसमाज ऋषि दयानन्द द्वारा चैत्र शुक्ल पंचमी तदनुसार 10 अप्रैल, सन् 1875 को मुम्बई नगर में स्थापित एक धार्मिक, सामाजिक, राष्ट्रवादी एवं वैदिक समाज सुधारक संस्था - [क्रूर एवं आक्रांता मुगल शासक हमारे इतिहास नायक कैसे हो सकते हैं ?](https://www.ugtabharat.com/104490/) - क्रूर एवं आक्रांता मुगल शासक हमारे इतिहास नायक कैसे हो सकते हैं ? - [आर्य समाज हिन्दू समाज का प्रहरी है](https://www.ugtabharat.com/104493/) - आर्य समाज हिन्दू समाज का प्रहरी है - [मज़हब और क्रूसेड युद्ध अर्थात् धार्मिक युद्ध (भाग - 2)](https://www.ugtabharat.com/104503/) - मज़हब ही तो सिखाता है आपस में बैर रखना (पुस्तक से ..) अध्याय - 9 (भाग - 2) डॉ राकेश कुमार आर्य इतिहास को हमें इतिहास बोध के साथ पढ़ना चाहिए। केवल घटनाओं को याद करने के दृष्टिकोण से इतिहास पढ़ना नितांत गलत है। इतिहास इसलिए बनाया जाता है कि अतीत की घटनाओं से - [इतिहास का विकृतिकरण और नेहरु - अध्याय 6](https://www.ugtabharat.com/104510/) - इतिहास का विकृतिकरण और नेहरु - अध्याय 6 - [धार्मिक ग्रन्थों में नारी का तुलनात्मक अध्ययन](https://www.ugtabharat.com/104522/) - धार्मिक ग्रन्थों में नारी का तुलनात्मक अध्ययन - [इतिहास का ठुकराया हीरा- वीर छत्रपति शम्भा जी](https://www.ugtabharat.com/104534/) - वीर शिवाजी के पुत्र वीर वीर छत्रपति शम्भा का जन्म 14 मई 1657 को हुआ था। आप वीर शिवाजी के साथ अल्पायु में औरंगजेब की कैद में आगरे के किले में बंद भी रहे - [अमेरिका में हिंदू मंदिरों पर हमले चिंता का विषय](https://www.ugtabharat.com/104538/) - वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती भागीदारी और सहभागिता के दृष्टिगत कई शक्तियां ऐसी हैं जो भारत से अनावश्यक ईर्ष्या भाव रखती हैं। उनका हर संभव प्रयास होता है कि जैसे भी हो भारत को रोका जाए और घेरा जाए। इसी सोच के चलते खालिस्तानी अलगाववादी विदेशी शक्तियों के मोहरे बन रहे हैं। यही कारण - [मुगल वंश के पतन के कुछ अज्ञात कारण](https://www.ugtabharat.com/104561/) - मुगल साम्राज्य का पतन कोई संयोग नहीं था, बल्कि यह चार अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में हिंदू वीरों द्वारा छेड़े गए प्रतिरोध का संगठित परिणाम था। जब औरंगज़ेब ने भारत के इस्लामीकरण की योजना बनाई और अपनी सैन्य शक्ति के बल पर हिंदू सभ्यता को मिटाने की कोशिश की, तब उसे चार दिशाओं से जबरदस्त टकराव - [मज़हब और क्रूसेड युद्ध अर्थात् धार्मिक युद्ध (भाग – 3)](https://www.ugtabharat.com/104604/) - मज़हब ही तो सिखाता है आपस में बैर रखना (पुस्तक से ...) अध्याय - 9 (भाग - 3) मज़हब और क्रूसेड युद्ध अर्थात् धार्मिक युद्ध डॉ राकेश कुमार आर्य गतांक से आगे .. चतुर्थ क्रूस युद्ध (1202-1204) अभी तक पोप की शक्ति में पर्याप्त वृद्धि हो चुकी थी। जिस प्रकार मुसलमानों के यहाँ खलीफा मजहब - [इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू (अध्याय 9)](https://www.ugtabharat.com/104629/) - डिस्कवरी ऑफ इंडिया की डिस्कवरी पुस्तक से .. नेहरू बोले - आर्य विदेशी थे डॉ राकेश कुमार आर्य पंडित जवाहरलाल नेहरू ने हिंदुस्तान की कहानी लिखनी तो आरंभकर दी, परंतु वह यह नहीं जानते थे कि इस कहानी का शुभारंभकहां से हुआ? इसके सूत्रधार कौन थे? इसीलिए उन्होंने अपनी पुस्तक के पृष्ठ संख्या 83 पर - [औरंगज़ेब को लेकर चल रही निरर्थक बहस](https://www.ugtabharat.com/104678/) - औरंगज़ेब को लेकर चल रही निरर्थक बहस - [बांग्लादेश की फितरत और भारत](https://www.ugtabharat.com/104681/) - डॉ राकेश कुमार आर्य बांग्लादेश में जब से सरकार बदली है तब से लेकर अब तक बड़ी संख्या में हिंदुओं का नरसंहार हो चुका है। अभी तक इस नरसंहार में मरने वाले लोगों की स्पष्ट संख्या तो कोई ज्ञात नहीं हो पाई है, परंतु इतना अवश्य है कि हिंदू समाज के स्त्री पुरुषों को वहां - [औरंगजेबी मानसिकता का उपचार वास्तविक इतिहास से अवगत कराना जरूरी](https://www.ugtabharat.com/104691/) - औरंगजेबी मानसिकता का उपचार वास्तविक इतिहास से अवगत कराना जरूरी - [तुगलक के 1 लाख सैनिकों का पहाड़ी हिंदुओं ने किया सफाया - भारत में इस्लाम](https://www.ugtabharat.com/104695/) - तुगलक के 1 लाख सैनिकों का पहाड़ी हिंदुओं ने किया सफाया - भारत में इस्लाम - [इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू (अध्याय - 12)](https://www.ugtabharat.com/104711/) - डॉ राकेश कुमार आर्य (डिस्कवरी ऑफ इंडिया की डिस्कवरी) (अध्याय - 12) हिंदी-हिंदू-हिंदुस्तान के विरोधी नेहरू यद्यपि नेहरू जी की द डिस्कवरी ऑफ इंडिया में हिंदी, हिंदू और हिंदुस्तान का भरपूर प्रयोग हुआ है, परंतु इसके उपरांत भी उनके बारे में यह भी सच है कि वे इन तीनों शब्दों का कुछ अलग ही अर्थ - [वक्फ संशोधन पर कितना भ्रम, कितना सच?](https://www.ugtabharat.com/104776/) - वक्फ संशोधन पर कितना भ्रम, कितना सच? प्रत्येक राजनीतिक दल अपना राजनीतिक प्रभुत्व बनाए रखने के लिए ही राजनीति कर रहा है। ऐसे में यह - ["पुत्रेण दुहिता समा" (मनुस्मृति ९.१.३०)](https://www.ugtabharat.com/104781/) - "पुत्रेण दुहिता समा" (मनुस्मृति ९.१.३०) अर्थात - पुत्री पुत्र के समान होती है वह आत्मारूप है अतः वह पैतृक संपत्ति की अधिकारिणी है। महर्षि मनु दुनिया के प्रथम विधिवेत्ता थे जिन्होंने पुत्रों के समान पुत्री को भी माता पिता संपत्ति में अधिकार दिया इतना ही नहीं माता के धन (मातृधन) पर तो केवल पुत्री का - [हैदराबाद स्टेट में इस्लामिक आतंक के पहले शिकार वेद प्रकाश जी](https://www.ugtabharat.com/104786/) - हैदराबाद स्टेट में इस्लामिक आतंक के पहले शिकार वेद प्रकाश जी वेद प्रकाश जी का पूर्व नाम दासप्पा था। दासप्पा संवत् 1827 में गुंजोटी में पैदा हुए। इनकी माता का ना - [इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू (अध्याय - 14)](https://www.ugtabharat.com/104853/) - डॉ राकेश कुमार आर्य इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू (डिस्कवरी ऑफ इंडिया की डिस्कवरी) अध्याय - 14 तब था धरती पर अंधकार नेहरू जी द डिस्कवरी ऑफ इंडिया अर्थात हिंदुस्तान की कहानी नामक अपनी पुस्तक के पृष्ठ 101 पर मैक्स मूलर के इस कथन को भारत के संदर्भ में बड़े गर्व के साथ लिखते हैं - [डॉ अम्बेडकर का राष्ट्रवादी चिंतन](https://www.ugtabharat.com/104855/) - डॉ विवेक आर्य भारतीय राजनीति अपनी महत्वकांक्षाओं को पूरा करने के लिए जैसे अपने क्रांतिकारियों को जाति के आधार पर विभाजित कर लेती है वैसे ही महान व्यक्तित्वों को भी हमने जाति भेद के आधार पर विभाजित कर लेती है। डॉ अम्बेडकर। यह नाम सुनते ही पाठकों के मन में एक दलितों के अधिकारों के - ['संस्कृति नाशकों' के विरुद्ध हिन्दू राजवंशों का 'राष्ट्रीय संकल्प' ](https://www.ugtabharat.com/104867/) - भारत के 1235 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास (भाग-1) वे थमे नहीं, हम थके नहीं अध्याय - 2 डाँ० राकेश कुमार आर्य हिंदू शक्ति के बिखराव के इस काल को यद्यपि हम अच्छा नहीं मानते, पर फिर भी इस काल में विदेशी 'संस्कृति नाशक' इस्लामिक आक्रांताओं को देश में न घुसने देने का 'राष्ट्रीय संकल्प' - [इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू अध्याय -16](https://www.ugtabharat.com/104878/) - इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू (डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया की डिस्कवरी) पुस्तक से .. (अध्याय -16 ) डॉ राकेश कुमार आर्य भारत में मांसाहार और नारी का सम्मान वैदिक संस्कृति के प्रति पूर्णतया उपेक्षित भाव रखने वाले नेहरू जी अपनी उक्त पुस्तक द डिस्कवरी ऑफ इंडिया के पृष्ठ 128 पर लिखते हैं कि- "शिकार एक बाकायदा - [पहलगाम की घटना और मज़हबी तालीम](https://www.ugtabharat.com/104892/) - देवेंद्र सिंह आर्य विगत 22 अप्रैल को पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने जिस प्रकार कश्मीर के पहलगाम में 28 पर्यटकों की नृशंस हत्या कर खून की होली खेली है, वह सारे देश के लिए हतप्रभ करने वाली घटना है। इस घटना को केंद्र सरकार ने बड़ी गंभीरता से लिया है। जिसके चलते पाकिस्तान से सारे राजनयिक - [हिंदुत्व के व्यापक विरोध के कारण गजनवी 10 प्रतिशत भारत भी नहीं जीत पाया था](https://www.ugtabharat.com/104896/) - भारत के 1235 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास (अध्याय - 4) डॉ० राकेश कुमार आर्य पाठक वृंद ! हमारी इतिहास संबंधी यह शोधपरक श्रृंखला पिछले कई वर्ष से निरंतर प्रकाशित होती रही है। जिसे पाठकों की बहुत अधिक प्रशंसा प्राप्त हुई है। इस श्रृंखला में प्रकाशित हुए सभी लेखों को हमने ' भारत के 1235 - [प्रजापति गौतमी, जो चाह कर भी बौद्ध भिक्षुणी ना बन सकी](https://www.ugtabharat.com/104919/) - As a religious teacher Women's religious and ritualistic rights are still limited in Buddhism, Christianity and Islam लेखक - आर्य सागर प्रजापति गौतमी बुद्ध की मौसी थी ।बुद्ध की माता महामाया का अकस्मात निधन होने के पश्चात राजकुमार सिद्धार्थ जो आगे चलकर महात्मा बुद्ध कहलाए उनका लालन-पालन उनकी मौसी गौतमी ने किया। बौद्ध दर्शन को - [जब स्वतंत्रता के लिए बिना राजा के ही लड़ती रहीं जातियां](https://www.ugtabharat.com/104940/) - भारत के 1235 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास खण्ड़ - 01 वे थमे नही , हम थके नहीं (अध्याय -5) राकेश कुमार आर्य पाठक वृंद ! हमारी इतिहास संबंधी यह शोधपरक श्रृंखला पिछले कई वर्ष से निरंतर प्रकाशित होती रही है। जिसे पाठकों की बहुत अधिक प्रशंसा प्राप्त हुई है। इस श्रृंखला में प्रकाशित हुए - [भारत को सदियों से आलोकित रखा है बप्पारावल की देशभक्ति ने](https://www.ugtabharat.com/104946/) - महमूद गजनवी के बीच के काल में एक बप्पारावल नाम ऐसा मिलता है जिसने इतिहास की दुर्गंध को सुगंध में परिवर्तित करने का महती कार्य किया। यद्यपि उसका पुरूषार्थ - [पाकिस्तान को हराना भी है और मिटाना भी है](https://www.ugtabharat.com/104972/) - वर्तमान में भारत-पाकिस्तान की सीमा पर जिस प्रकार के हालात बने हुए हैं ,उनके दृष्टिगत सारे देश की मांग यही है कि पाकिस्तान को इस बार पाठ पढ़ा ही देना चाहिए। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत की सेना ही यह तय करेगी कि उसे पाकिस्तान को किस प्रकार, कब - [अपने कर्मों का फल चखता पाकिस्तान](https://www.ugtabharat.com/104998/) - आतंकवाद नाम के जिस जिन्न को अमेरिका सहित विश्व की कई शक्तियां अपने लिए एक रक्षाकवच मानकर या अपने शत्रुओं को आतंकवाद के माध्यम से नष्ट करने की कुत्सित भावना के वशीभूत होकर पाल रही थीं , अब उनके लिए ही आतंकवाद स्वयं एक समस्या बन गया है। प्रकृति का यह एक स्वाभाविक नियम भी - [काशी ज्ञानवापी मस्जिद और औरंगज़ेब](https://www.ugtabharat.com/105027/) - काशी ज्ञानवापी मस्जिद और औरंगज़ेब न्यायालय द्वारा काशी ज्ञानवापी मस्जिद में पुरातत्व विभाग द्वारा सर्वेक्षण करने का आदेश जब से दिया गया है। तब से मुस्लिम समाज मे - [भारत बुद्ध की नहीं युद्ध की आदि भूमि है](https://www.ugtabharat.com/105035/) - लेखक - आर्य सागर जब यह कहा जाता है कि भारत युद्ध की नहीं बुद्ध की भूमि है तो यह प्राचीन क्षात्र धर्म शौर्य परंपरा के साथ एक घिनौना मजाक है। वेदों में जितनी ऋचाएं ईश्वर देवों की स्तुतिपरक है उतनी ही ऋचाएं राजा को रणभूमि गमन संग्राम को प्रेरित करने वाली हैं। बुद्ध से - [पाकिस्तान का टूटना निश्चित है ...](https://www.ugtabharat.com/105063/) - पाकिस्तान का निर्माण सांप्रदायिक घृणा के आधार पर हुआ था। सांप्रदायिकता कभी भी मानवता की समर्थक नहीं होती है। इसके अतिरिक्त एक सामान्य सिद्धांत यह भी है कि यदि - [बलूचिस्तान को सही इतिहास पढ़ना होगा](https://www.ugtabharat.com/105075/) - बलूचिस्तान अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है और बलूचिस्तान के इतिहास के साथ गद्दारी की गई है बलूचिस्तान का इतिहास पुरापाषाण काल से ही है - [मुक्ति के अभिलाशी बन गये 'दास'](https://www.ugtabharat.com/105106/) - भारत के 1235 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास ( खण्ड-01) वे थमे नहीं हम थके नहीं (अध्याय 8) डॉ राकेश कुमार आर्य इसीलिए महाभारत (अ. 145) में कहा गया है कि शासक को चाहिए कि भयातुर मनुष्यों की भय से रक्षा करे, दीन-दुखियों पर अनुग्रह करे, कर्तव्य अकर्तव्य को विशेष रूप से समझे तथा राष्ट्र - [भारत की सामरिक शक्ति का लोहा मानता विश्व समाज](https://www.ugtabharat.com/105117/) - डॉ राकेश कुमार आर्य भारत ने हाल ही में जिस प्रकार पाकिस्तान में एयर स्ट्राइक कर अपनी शक्ति का परिचय दिया है, उससे सारा संसार स्तब्ध रह गया है। संसार की बड़ी-बड़ी शक्तियों की आंखें खुल गई हैं उन्हें पता चल गया है कि वह भारत को जितना समझकर आंक।रहे थे , भारत उससे कई - [देश के निर्माण में अग्रणी भूमिका में रहा है आर्यवीर दल : डॉ राकेश कुमार आर्य](https://www.ugtabharat.com/105175/) - बलिया। यहां पर आर्यवीर दल और आर्य प्रतिनिधि सभा बलिया के संयुक्त तत्वावधान में वैदिक युवा चरित्र निर्माण शिविर एवं शौर्य प्रदर्शन कार्यक्रम के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान के राष्ट्रीय प्रणेता डॉ राकेश कुमार आर्य ने कहा कि देश के निर्माण में - [मुसलमानों से मंदिर वापस लेने अवरोध के काऱण](https://www.ugtabharat.com/80892/) - मुसलमानों से मंदिर वापस लेने अवरोध के काऱण सभी जानते हैं की इस समय पूरे भारत में लगभग ऐसे चार हजार मंदिर हैं जिन पर मुस्लिम शासकों ने मस्जिद या दरगाह बनवा दिए थे कुछ तो ऐसे हैं जिन को देख कर सम्मान्य व्यक्ति भी कह सकता है की यह मस्जिद किसी मंदिर को तोड़ - [पाकिस्तान से भारत की सीमा में](https://www.ugtabharat.com/80951/) - लेखक- श्री इन्द्रकुमार विद्यार्थी प्रस्तोता- प्रियांशु सेठ शाम की रुपहली किरणें हमारे साथ की सीमा के बाहिर झांक रहीं थीं, किन्तु हमारे भाग्य में उन्हें देखना बदा न था। १५ अगस्त से पूर्व तो हम अपने शहर से एक मील स्टेशन तक सैर को जा सकते थे, किन्तु इधर उधर के अप्रत्याशित कत्लों के भय - [हिन्दू धर्म में एक ईश्वर के अतिरिक्त वृक्ष आदि की पूजा भाग -१](https://www.ugtabharat.com/81469/) - डॉ डी के गर्ग अक्सर ऐसा कहते है की हिन्दू धर्म में एक नहीं अनेको भगवान् है ,किसकी पूजा करें ये समझ नहीं आता ,इसका लाभ विधर्मी उठाते है और कुछ सीधे सच्चे भावुक लोग इस्लाम आदि के चंगुल में फस जाते है। यधपि इस विषय पर लिखने का मेरा कोई इरादा नहीं था फिर - [भारत के राष्ट्रवादी मुसलमान : अराजक तत्वों के खिलाफ बनना पड़ेगा 'मदारी बाबा'](https://www.ugtabharat.com/81611/) - राष्ट्र हमारी सोच में निवास करता है। इस सोच के वशीभूत होकर हम अपने समस्त देशवासियों को अपना भाई-बहन मानते हैं । जब भी हमारी सामूहिक चेतना आगे बढ़ने का निर्णय लेती है या आगे बढ़कर कुछ कर दिखाती है तो चाहे चंद्रयान-3 अभियान हो या फिर सर्जिकल स्ट्राइक हो, सभी पर हमको समान रूप - [कश्मीर के कृष्णभक्त कवि: परमानंद](https://www.ugtabharat.com/82016/) - डा० शिबन कृष्ण रैणा {’सुदामा-चरित’ परमान्द की प्रसिद्ध रचना है और इस में वर्णित यह पद (पंक्तियाँ) आज तक मुझे याद हैं।श्रीकृष्ण जन्म-प्रसंग को कवि ने यों वर्णित किया है: "गटिमंज गाशाव चान्ये ज्यनय जय जय जय दीवकी नंदनय।" (तेरे जन्म लेने पर अंधकार प्रकाश में बदल गया। हे दवकी-नंदन! तेरी जय-जयकार हो।) परमानन्द की - [मुस्लिम वक्फ बोर्ड और आम नागरिक](https://www.ugtabharat.com/82088/) - 1947 के बंटवारे को हम सब देशवासियों को एक गंभीर चुनौती और दुखद त्रासदी के रूप में लेना चाहिए । देश के संजीदा लोग इस बात पर सहमत भी हैं कि हमें देश की एकता और अखंडता को मजबूत करने के लिए काम करना चाहिए। इसके उपरांत भी कुछ लोग हैं जो अभी भी देश - [देश का विभाजन और सावरकर, अध्याय -12 (ख) सोहरावर्दी की देशद्रोही सोच](https://www.ugtabharat.com/82804/) - यह पूर्णतया सत्य है कि यदि सावरकर नहीं होते तो पाकिस्तान आज के बहुत बड़े भारत के भाग को ले जाने में सफल हो जाता। सावरकर की सोच पर काम करते हुए उस समय ऐसे अनेक हिंदू वीर रहे जिन्होंने देश के कई शहरों को या भागों को पाकिस्तान में जाने से रोकने में अपने - [मीनाक्षीपुरम, तमिलनाडु के धर्मान्तरण की हृदयविदारक घटना...](https://www.ugtabharat.com/82988/) - # 23 फरवरी 1981 का दिन था वह जब तमिलनाडु के मीनाक्षीपुरम में डाॅक्टर नसरुद्दीन कमाल अपने साथियों के साथ एक दलित परिवार को बंधक बनाए हुए थे घर के सभी लोगों ने इस्लाम कबूल लिया था और घर के लोग ही क्यों लगभग एक हजार दलित धर्मांतरण करके जबरन मुस्लिम बनाए चुके थे इसलिए - [देश का विभाजन और सावरकर : अध्याय 15 क निजाम हैदराबाद का देश विरोधी आचरण](https://www.ugtabharat.com/83049/) - 'सावरकर समग्र' के खंड 6 के पृष्ठ संख्या 342 पर सावरकर जी तैमूर लंग के विषय में बताते हैं कि तैमूर लंग तुर्क था। प्रारंभ में उसने इस्लाम धर्म स्वीकार नहीं किया था। उसने बगदाद को जीतने के पश्चात वहां के समस्त मुस्लिम ग्रंथों और अनेक स्थानों की मस्जिदों को जला डाला था। ईसवी सन - [देश का विभाजन और सावरकर, अध्याय -17 ख पिताजी के बारे में...](https://www.ugtabharat.com/83342/) - मुझे अच्छी तरह याद है कि मेरे पूजनीय पिताश्री राणा सखीर चन्द जी कपूर मधियाना जिला झंग में मिडल स्कूल के प्राचार्य थे। समाज में उनका बड़ा सम्मान था। उन दिनों प्राचार्य के प्रति लोग विशेष श्रद्धा रखते थे। सभी लोग उन्हें सम्मान की दृष्टि से देखते थे। घर में पूरी तरह शांति थी। समृद्धि - [देश का विभाजन और सावरकर, अध्याय -20 क असहनीय थी विभाजन की त्रासदी](https://www.ugtabharat.com/83693/) - 1947 का अगस्त माह । मैं तब 4 वर्ष का था। पर उन दिनों की अनेक घटनाएं आज भी मेरे मन मस्तिष्क में ज्यों की त्यों जमी बैठी हैं। जिन बातों का अनुभव व्यक्ति को बहुत बड़ी अवस्था में जाकर होता है, वह मुझे बचपन के उन दिनों में हो गया था। चित्त पर उनकी - [देश का विभाजन और सावरकर, अध्याय -20 ख सारे कांग्रेसी मौन हो गए थे](https://www.ugtabharat.com/83753/) - उस समय नेहरू गांधी की कांग्रेस के किसी भी नेता के पास समय नहीं था कि हम लोगों की पीड़ा के विषय में कोई सोचे, सुने या समझे। जब ये लोग शिकारी कुत्ते की भांति हमारा शिकार कर रहे थे, तब भी हमारा राष्ट्रीय नेतृत्व हाथ पर हाथ धरे बैठा था। यह कर्तव्य के प्रति - [जुम्मे की नमाज के बाद देशभर में तनाव... कई जगह सड़कों पर 'हमास' के समर्थन में उतरा जिहादी झुंड](https://www.ugtabharat.com/83918/) - इजरायल और फिलस्तीनी आतंकी संगठन हमास के बीच चल रहे युद्ध का असर भारत में भी देखने को मिल रहा है दरअसल, आज यानी शुक्रवार को जुम्मे की नमाज के बाद देशभर में तनाव माहौल बना हुआ है. बताया जा रहा है कि कई जगह सड़कों पर जिहादी झुंड उतर कर इस्लामिक आतंकी संगठन हमास - [जिहादी ऊंट पर शरीयत की नकेल !](https://www.ugtabharat.com/84012/) - भारत के सभी लोग इन कहावतों को अच्छी तरह जानते होंगे कि "कांटे से काँटा निकाला जाता है " और जहर का इलाज जहर से ही होता है " यह बात इसलिए बताई जा रही है कि इन दिनों भारत सहित सभी देशों में इस्लाम समर्थक जिहाद केनाम पर हर प्रकार के अपराध , हिंसा - [मुसलमानों का सेकुलरिज्म एक साजिश है !](https://www.ugtabharat.com/84016/) - आजकल मुसलमान भी कांग्रेसियों के साथ मिलकर सेकुलरिज्म की वकालत करने लगे हैं , और सामान्य हिन्दू ऐसा मने लगे हैं कि यह लोग देश में धर्म के आधार पर होने वाले विद्वेष और दंगों पर रोक लगा कर आपसी सौहार्द फैलाना चाहते हैं , लेकिन बहुत कम लोग मुसलमानों और कांग्रेसियों की छुपी हुई - [शांति के लिए शक्तिमान बनें__](https://www.ugtabharat.com/84154/) - "शक्ति ही तो शांति का आधार है " l शांति स्थापित करने के लिए शक्तिमान बनना ही होगा l बार-बार आत्मसमर्पण को विवश होने से तो अच्छा है कि संगठन की शक्ति का शंखनाद हो और हिंदुओं में तेजस्विता का संचार हो l मुसलमानों के दिल में जगह बनाने के प्रयास में वर्षों से सक्रिय - [हमास को समर्थन दिया जाना हो सकता है देश के लिए खतरनाक](https://www.ugtabharat.com/84194/) - "बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना" इस कहावत को दुष्टता के स्तर तक चरितार्थ करते घूम रहे थे एएमयू (अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी) के वामपंथी - मुस्लिम विद्यार्थी। उन्होंने फलस्तीनी आतंकी संगठन हमास की क्रूरता के समर्थन में आतंकी नारों और मजहबी क्रूरता के नारों से पूरे परिसर को दहला दिया। इससे गैर इस्लामी छात्रों के बीच - [वाल्मीकी समाज के आराध्य देव वीर गोगा जी महाराज सामाजिक समरसता की मशाल ***](https://www.ugtabharat.com/84363/) - * आश्चर्य किंतु सत्य है कि इक्कीसवीं शताब्दी में पढ़े लिखे लोग संत और ऋषि, योद्धा और महापुरुष और यहां तक कि भगवान को भी जातियों में बंट कर अपने को उच्च समाज का बतलाते हुए नहीं थकते हैं! अपने ही धर्म के दूसरी जाति या समाज का व्यक्ति उनके मंदिर में जाकर पूजा अर्चना - [धनुष और चतुरंगिणी सेना का अर्थ](https://www.ugtabharat.com/85273/) - धनुरनुषंगरणक्षणसंगपरिस्फुरदंगनटत्कटके कनकपिशंगपृषत्कनिषंगरसद्भटश्रृंगहताबटुके । हतचतुरंगबलक्षितिरंगघटद् बहुरंगरटद् बटुके जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ।। अनुषंग का अर्थ साथ होना और धनु तो धनुष है, यहाँ धनु: के अंतिम विसर्ग के साथ संधि के कारण “र” अक्षर आ रहा है। रण के समय (क्षण) उत्तेजना से कांपते अंगों के लिए परिस्फुरद्अंग कहा गया है। कटके का अर्थ - [नहले पर दहला](https://www.ugtabharat.com/85775/) - एक मतान्ध आकर बोला की आर्यसमाज और इस्लाम तो एक ही हैं। दोनों निराकार ईश्वर को मानते है और दोनों मूर्तिपूजा में विश्वास नहीं करते। मैंने कहा आपको पूरी जानकारी नहीं हैं। ईश्वर और अल्लाह एक नहीं हैं। ईश्वर वो है जिनके विषय में वेदों में बताया गया हैं। अल्लाह वो है जिनके विषय में - [वाल्मीकी समाज के आराध्य देव वीर गोगा जी महाराज सामाजिक समरसता की मशाल](https://www.ugtabharat.com/86268/) - * आश्चर्य किंतु सत्य है कि इक्कीसवीं शताब्दी में पढ़े लिखे लोग संत और ऋषि, योद्धा और महापुरुष और यहां तक कि भगवान को भी जातियों में बंट कर अपने को उच्च समाज का बतलाते हुए नहीं थकते हैं! अपने ही धर्म के दूसरी जाति या समाज का व्यक्ति उनके मंदिर में जाकर पूजा अर्चना - [हिन्दू_संस्कृति_की_अजेयता_और_वर्तमान_खतरा](https://www.ugtabharat.com/86354/) - # बहुत आक्रमणों को झेला हमने, एक के बाद एक। करते रहे संघर्ष पर हार कभी नहीं मानी। मिश्र, फारस, यूनान, रोम, स्केंडनेविया... सभी की संस्कृति का विनाश हुआ पर हिंदू अड़े रहे, लड़ते पिटते, हारते, जीतते... पर अड़े रहे। कैसे? कहाँ से आई इतनी #जिजीविषा? क्या केवल #योद्धाओंकासंघर्ष? अगर संघर्ष केवल योद्धाओं का था - [भारत के विभाजन के समय हुए थे भयंकर सांप्रदायिक दंगे](https://www.ugtabharat.com/87391/) - भारत -पाक विभाजन दंगों की भीषण मारकाट युक्त घटनाओं से विचलित वैरागी होने वाले मुस्लिम धोबी किशोर युवक मुंशी के ब्रह्मचारी मनु देव तथा कालांतर में जीवनमुक्त योगी सन्यासी श्रद्धेय स्वामी "सत्यपति परिव्राजक महाराज" बनने की त्याग तपस्या तितिक्षा मुमुक्षत्व ईश्वर के प्रति समर्पण से युक्त जीवन यात्रा का स्वामी जी द्वारा स्वयंकथित वर्णन || - [आर्य समाज एक क्रांतिकारी संगठन ( कल ,आज और कल) स्वामी दयानंद जी के इतिहास ज्ञान के आदि स्त्रोत , भाग 1](https://www.ugtabharat.com/87547/) - स्वामी दयानंद जी महाराज के इतिहास संबंधी ज्ञान के आदि स्रोत के रूप में उनके 79 वर्षीय गुरु बिरजानंद जी, बिरजानंद जी के 129 वर्षीय गुरु पूर्णानंद जी और पूर्णानंद जी के 160 वर्षीय गुरु आत्मानंद जी थे। इन तीनों ही महान विभूतियों से स्वामी जी का साक्षात्कार हुआ था। बात को समझने के दृष्टिकोण - [आर्य समाज - एक क्रांतिकारी संगठन: स्वामी दयानंद जी के इतिहास ज्ञान के आदि स्त्रोत , भाग 2](https://www.ugtabharat.com/87577/) - इस अवसर पर अपना ओजस्वी वक्तव्य देते हुए दंडी स्वामी बिरजानन्द जी महाराज ने लोगों का आवाहन किया था कि वे सब देश के लिए एक होकर काम करें । राष्ट्र की उन्नति के लिए सबके संयुक्त प्रयास से ही विदेशी सत्ता को देश से उखाड़ फेंकने में सफलता मिल सकती है। उपरोक्त पुस्तक से - [स्वामी दयानंद किसी की निंदा या आलोचना नहीं अपितु सत्य का मंडन और असत्य का खंडन करते थे](https://www.ugtabharat.com/88188/) - स्वामी दयानंद जी महाराज द्वारा रचित अमर ग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाश का सबसे अधिक प्रचार आर्यसमाज से सम्बन्ध रखने वाले सदस्यों की अपेक्षा आर्यसमाज से सम्बन्ध न रखने वाले जनमानस ने अधिक किया हैं चाहे वह सनातन धर्म,सिख ,कबीर पंथी,जैन, बौद्ध,सिख, ईसाई, इस्लाम आदि किसी भी मत से क्यूँ न सम्बंधित हो। सत्यार्थ प्रकाश के खंडन - [सामाजिक-पारिवारिक मूल्यों के रखवाले है राम](https://www.ugtabharat.com/88619/) - डॉ0 राकेश राणा राम का अतीत इतना व्यापक और विस्तारित है कि उस पर समझ और संज्ञान की सीमाएं है। उन्हें चिन्हित करना बहुत दूर की कोड़ी है। भारतीय समाज में राम उस वट-वृक्ष की तरह है जिसकी छत्रछाया में भक्त, आलोचक, आम, खास, आराधक, विरोधक, सम्बोधक सबके सब न जाने कितने सालो से एक - [माघ स्नान और प्रयागराज](https://www.ugtabharat.com/88679/) - स्वामी गोपाल आनंद बाबा - विभूति फीचर्स भारत में प्रत्येक वर्ष पौष संक्रान्ति से माघ संक्रांति तक अथवा मकर संक्रान्ति से आगामी माघ पूर्णिमा तक पवित्र जल में स्नान यानि पावन नदियों में स्नान सहित किन्हीं भी नदी में स्नान भी अनादि कालीन चल रही है। पावन-पवित्र तीर्थों में इन दोनों डुबकी लगाकर स्नान करने - [भारत की संस्कृति के उन्नायक गुरु गोविंद सिंह और जफरनामा](https://www.ugtabharat.com/88915/) - गुरु गोविन्द सिंह और जफरनामा का सच (गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती पर विशेष रूप से प्रचारित) गुरु गोविन्द सिंह जी एक महान योद्धा होने के साथ साथ महान विद्वान् भी थे. वह ब्रज भाषा, पंजाबी, संस्कृत और फारसी भी जानते थे. और इन सभी भाषाओँ में कविता भी लिख सकते थे. जब औरंगजेब - [धर्म के मूलभूत अर्थ को समझो](https://www.ugtabharat.com/89429/) - #डॉविवेकआर्य देश के केंद्रीय विद्यालयों में प्रात:कालीन प्रार्थना संस्कृत और हिंदी में पढ़ी जाती हैं। इस प्रार्थना का संस्कृत भाग उपनिषद्, महाभारत आदि ग्रंथों की शिक्षाओं पर आधारित होता हैं जैसे "असतो मा सद्गमय तमसो माँ ज्योतिर्गमय" तथा "दया कर दान विद्या का हमें परमात्मा देना'' आदि। मध्य प्रदेश के रहने वाले एक व्यक्ति ने - [मोपला कांड की वीभत्सता और भारतीय इतिहास](https://www.ugtabharat.com/89466/) - अक्टूबर 1920,कालीकट (मोपला) आज खिलाफत मंडल की सभा में पंजाब से मौलाना अल्लाहबख्श आए हुए थे, कालीकट के मुसलमानों ने खिलाफत मंडल के नेता रामनारायण नंबूदरी को समझाया कि अलाहबख्श के भाषण से पहले हिन्दू-मुस्लिम एकता दिखाने के लिए जुलूस में अल्लाहबख्श की बग्घी को घोड़ों के बजाए हिन्दू नौजवानों द्वारा खिंचवाया जाए, इससे हिन्दू-मुस्लिम - [CAA कानून का विरोध शरीयत के अनुसार](https://www.ugtabharat.com/91257/) - दिव्य अग्रवाल (लेखक व विचारक) CAA कानून संविधान विरोधी और UCC मजहबी विरोधी क्यों- यह कैसी विडंबना है जब बात CAA कानून की हो तो इस्लामिक कट्टरपंथी कहते हैं कि सारे धर्म और मजहब एक सामान है अतः धर्म के आधार पर गैर इस्लामिक लोगो को इस कानून के अंतर्गत लाभ देना असंवैधानिक है । - [बनारस हिंदुस्तान का काबा है](https://www.ugtabharat.com/91650/) - जब बाबरी ढांचा गिरा दिया गया था तो ओवैसी ने कहा कि अल्लाह का घर तोड़ दिया गया , एक तरह यह मक्का के काबा को अल्लाह का घर बताते हैं , फिर बाबरी ढांचा को अल्लाह का घर बता देते हैं , अगर अल्लाह काबा के आलावा कहीं और रह सकता है तो हिन्दू - [.....तो क्या इतिहास मिट जाने दें ? अध्याय 8 भारत हिंदू राष्ट्र था, है और रहेगा](https://www.ugtabharat.com/91887/) - हमारे देश के इतिहास की समीक्षा करने से हमें पता चलता है कि यहां पर अनेक ऐसे सूफी संत हुए हैं जिन्होंने अपने मकड़ जाल में फंसाकर भारत के सनातन का विनाश करने में किसी प्रकार की कमी नहीं छोड़ी । उन्होंने भारत के लोगों को ऐसी ऐसी गोलियां गटकाईं कि उन्हें सटकते ही कइयों - [....तो क्या इतिहास मिट जाने दें, अध्याय 10 , ओमप्रकाश राजभर और महाराजा सुहेलदेव की आत्मा](https://www.ugtabharat.com/92133/) - सुहेलदेव भारतीय इतिहास के एक ऐसे महानायक हैं जिन पर प्रत्येक भारतीय को गर्व होना चाहिए। उन्हीं के नाम पर उत्तर प्रदेश में ओमप्रकाश राजभर नाम के एक नेता सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी चलाते हैं। वास्तव में सुहेलदेव इस समय राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। उनका राजनीति में सिद्धांत क्या है ? – - [सूरा फातिहा दोबारा नाजिल नहीं हुयी इसे सुधारा गया था](https://www.ugtabharat.com/92346/) - सूरा फातिहा दोबारा नाजिल नहीं हुयी इसे सुधारा गया था (नोट -हमारा मकसद किसी की भावना को ठेस पंहुचना नहीं बल्कि उस सचाई को जाहिर करना है ,जिसे इरादतन छुपाया गया है ) इस्लामी मान्यता के अनुसार कुरान किसी व्यक्ति की रचना नहीं है ,बल्कि अल्लाह ने आसमान से नाजिल की है चूँकि यह अल्लाह - [सूरा फातिहा का वैदिक आधार !](https://www.ugtabharat.com/92598/) - सूरा फातिहा का वैदिक आधार ! हमारे सभी सम्माननीय जागरुक पाठक ,जो इस ब्लॉग को लगातार पढ़ते आये हैं ,वह इस बात को अच्छी तरह से जानते हैं ,कि जब मुस्लिम ब्लोगरों के पास कोई समुचित ,तर्कपूर्ण उत्तर नहीं होता ,या उनके पास कोई प्रमाण नहीं होता ,तो वह लोग गाली गलौच पर उतर जाते - [जन्नत में भारतीय मसाले !](https://www.ugtabharat.com/93252/) - आजकल जो कट्टरवादी मुस्लिम जिहाद के नाम पर भारत के विरुद्ध आतंक फैलाते रहते हैं ,और इसी काम को जन्नत में जाने का तरीका समझने की भूल कर रहे हैं .उनको शायद यह बात पता नहीं है ,कि यदि वह किसी तरह जन्नत में भी घुस जायेंगे तो उनको अल्लाह जो शराब पिलाएगा ,उसमें जिन - ["गुरु ग्रन्थ साहिब में मांस शराब नशे आदि का खन्डन।"](https://www.ugtabharat.com/93575/) - दसों गुरू और भक्त जन जिनकी वाणी गुरू ग्रन्थ साहब में दर्ज है, मांस शराब आदि के सेवन को महापाप मानते थे। आइये हम सभी जन गुरु की शिक्षाओं पर चलते हुए अपने जीवन में मद्य मांसादि का सेवन कदापि न करने का संकल्प लें जिससे कि इस पर्व को मनाना वास्तव में सार्थक हो - [मैंने इस्लाम क्यों छोड़ा](https://www.ugtabharat.com/93837/) - लेखक :डॉ आनंदसुमन सिंह पूर्व डॉ कुंवर रफत अख़लाक़ इस्लामी साम्प्रदाय में मेरी आस्था दृड़ थी | मै बाल्यकाल से ही इस्लामी नियमो का पालन किया करता था | विज्ञानं का विद्यार्थी बनने के पश्चात् अनेक प्रश्नों ने मुझे इस्लामी नियमो पर चिन्तन करने हेतु बाध्य किया | इस्लामी नियमो में कुरआन या अल्लाहताला या - [तेलंगाना हैदराबाद लोकसभा सीट भारत की महत्वपूर्ण सीटों में से एक](https://www.ugtabharat.com/94040/) - दिव्य अग्रवाल (लेखक व विचारक) तेलांगना हैदराबाद लोकसभा सीट भारत की महत्वपूर्ण सीटों में से एक है इसका कारण है की धार्मिक तुष्टिकरण की राजनीति कर ओवैसी ब्रदर्स का इस सीट पर कईं वर्षो से दबदबा रहा है । परन्तु इस बार यह सीट सबसे ज्यादा सुर्ख़ियों में है उसका कारण भाजपा प्रत्याशी कोम्पेला माधवी - [धर्म और मत में पाप-पुण्य को लेकर मान्यताओं की तुलना](https://www.ugtabharat.com/94649/) - ईसाइयत- हर व्यक्ति जन्म से पापी हैं क्यूंकि सृष्टि के आदि में हव्वा (Eve) और आदम (Adam) ने बाइबिल के ईश्वर के आदेश की अवमानना की थी। इसलिए ईश्वर ने हव्वा को शाप देकर पापी करार दिया था। इस पाप से बचाने वाला केवल एक मात्र ईसा मसीह है क्यूंकि वह पापों को क्षमा करने - [आपको मालूम है कि जन्नत की हकीकत क्या है ?](https://www.ugtabharat.com/94991/) - विश्व के लगभग सभी धर्मों में स्वर्ग और नर्कके बारे में विस्तार से वर्णन किया गया है.इन में सभी धर्मों की बातों में काफी समानता पायी जाती है. लेकिन स्वर्ग या जन्नत के बारे में जो बातें लिखी गयी हैं वह सिर्फ पुरुषों को रिझाने वाली बातें लिखी गयी हैं.जैसे मरने के बाद जन्नत में - [भारत का समृद्ध सांस्कृतिक इतिहास](https://www.ugtabharat.com/95014/) - भारतवर्ष अनादि काल से ही अपनी समृद्धता के लिये सम्पूर्ण विश्व में आकर्षण का केन्द्र रहा है, अपने ज्ञान व योग के कारण भारतीय संस्कृति आज भी सभी संस्कृतियों की जननी है। दुर्भाग्यवश, अधिकतर मनुष्य समृद्धता का अर्थ भौतिकवादी विचारधारा से ग्रस्त होने के कारण आर्थिक दृष्टिकोण पर मापते हैं, परन्तु भारतीय संस्कृति की समृद्धता - [कुरान में उपनिषद् का वचन !](https://www.ugtabharat.com/95058/) - जो लोग कुरान और बाइबिल को पढ़ चुके हैं , उनको अच्छी तरह से पता होगा कि कुरान में नबियों के बारे में जीतनी भी बातें दी गयी हैं उनमे अधिकांश बाइबिल से ली गयी है , कुछ तो ज्यों की त्यों ली ली गयीं और कुछ को ऐसा बदल दिया गया है जो अरबों - [अफगानिस्तान का हिंदू वैदिक अतीत, भाग - 7 , भारत का सिकन्दर सम्राट ललितादित्य मुक्तापीड़*](https://www.ugtabharat.com/95701/) - * वीर सावरकर जी हिंदुओं की दिग्विजय के विषय में कहते हैं कि "साधारणतः सन् 550 के बाद हिंदू राजाओं ने सिंधु नदी को विभिन्न मार्गों से लाँघकर आज जिन्हें बलूचिस्तान, अफगानिस्तान, इराक, हिंदूकुश, गिलगित, कश्मीर इत्यादि कहा जाता है और जो प्रदेश सम्राट अशोक के पश्चात् वैदिक हिंदुओं के हाथ से यवन, शक, हूण - [ईश्वर की सबसे बड़ी कृपा क्या हैं?](https://www.ugtabharat.com/95741/) - ईसाई- पाप क्षमा करना मुस्लमान- जन्नत और हूरें प्रदान करना पौराणिक हिन्दू- अवतार लेकर दुःख दूर करना वैदिक धर्मी- पुरुषार्थ के लिए बुद्धि प्रदान करना प्रिय मित्रों ईश्वर हमारे ऊपर अनेक उपकार करते हैं। विभिन्न विभिन्न मत मतान्तर अपनी अपनी मान्यता के अनुसार ईश्वर की कृपा का होना मानते हैं। वैसे तो सत्कर्म करने के - [कुरान में गौ वध का वाकया](https://www.ugtabharat.com/95773/) - कुरान और गोवध लेखक- आचार्य डॉ० श्रीराम आर्य, कासगंज, उ०प० [अनेक मुस्लिम विद्वान् गोबध को कुरान सम्मत बताकर गौहत्या जैसे घोर पाप का समर्थन करते हैं तथा हिन्दुओं की गौ के प्रति आस्था पर चोट पहुंचाते हैं। इस्लाम के होनहार विद्वानों ने अपने इस मूर्खतापूर्ण हरकतों के पीछे अल्लाह को कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं - [गंगाजमुनी तहजीब ?](https://www.ugtabharat.com/96517/) - भारत सदा से एक शांतिप्रिय देश रहा है .यहाँ जितने भी धर्म और सम्प्रदाय पैदा हुए ,उन सबके मानने वाले मिलजुल कर रहते ए हैं ,और सब एक दूसरे के विचारों का आदर करते आये है .क्योंकि भारत के सभी धर्मों में ,प्रेम ,करुणा,मैत्री ,परस्पर सद्भावना और अहिंसा को धर्म का प्रमुख अंग कहा गया - [नफरत और हिंसा कौन फैलाता है?](https://www.ugtabharat.com/96590/) - #डॉविवेकआर्य [एक अपरिपक्व नेता ने हिंदुओं को नफरत और हिंसा फैलाने वाला कहा है। हिंदू समाज की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि उसका स्वाध्याय बहुत कमजोर है। आप इस्लाम का इतिहास और मजहबी पुस्तक कुरान उठाकर देखिए आपको पता चल जायेगा कि नफरत कौन फैला रहा है।] भारत पर 7वीं शताब्दी में मुहम्मद बिन - [मीनाक्षीपुरम, तमिलनाडु के धर्मान्तरण की हृदयविदारक कहानी...](https://www.ugtabharat.com/96775/) - 23 फरवरी 1981 का दिन था वह, जब तमिलनाडु के मीनाक्षीपुरम में डाॅक्टर नसरुद्दीन कमाल अपने साथियों के साथ एक दलित परिवार को बंधक बनाए हुए थे। घर के सभी लोगों ने इस्लाम कबूल लिया था, घर के लोग ही क्यों लगभग एक हजार दलित धर्मांतरण करके जबरन मुस्लिम बनाए चुके थे। इसलिए मीनाक्षीपुरम का - [इस्लाम की लम्बी सोच](https://www.ugtabharat.com/97037/) - -पंकज सक्सेना कोई भी विचार जो १४०० साल पुराना है, उसे हमें लम्बी सभ्यतागत दृष्टि में ही समझना होगा। जिस तरह भारत एक सभ्यतागत राष्ट्र है, उसी तरह इस्लाम एक सभ्यतागत शक्ति है और इसे उसी प्रकार से समझा जाना चाहिए। मुसलमान यह कहते हैं कि ‘इस्लाम कभी नहीं हारा’। दुखद बात यह है कि - [गांधी जी का बेटा हीरालाल जब बन गया था मुसलमान](https://www.ugtabharat.com/97672/) - महात्मा गांधी के पुत्र हरिलाल गाँधी ने 27 जून 1936 को नागपुर में इस्लाम कबूल किया था और 29 जून 1936 को मुंबई में उसने इसकी सार्वजनिक घोषणा की कि वो हरिलाल गाँधी से अब्दुल्लाह बन गया है। 1 जुलाई 1936 को जकारिया ने अब्दुल्लाह के घर की बैठक में बैठे हुए रोष भरे शब्दों - [भारतीय इतिहास का प्रथम जौहर !](https://www.ugtabharat.com/98223/) - सिंध के शासक राजा दाहर और मुहम्मद बिन कासिम के बीच पांच दिन का निर्णायक युध्द 16 जून 722 ईस्वी से शुरु हुआ । सिंध इतिहास के प्रसिध्द ग्रंथ चचनामा में इसका विस्तार से वर्णन है । युध्द के पांचवें दिन 20 जून 722 को दाहर अपने दो पुत्रों जैसिया , धरसिया और एक लाख - [पाकिस्तान से भारत की सीमा में](https://www.ugtabharat.com/98376/) - लेखक- श्री इन्द्रकुमार विद्यार्थी प्रस्तोता- प्रियांशु सेठ शाम की रुपहली किरणें हमारे साथ की सीमा के बाहिर झांक रहीं थीं, किन्तु हमारे भाग्य में उन्हें देखना बदा न था। १५ अगस्त से पूर्व तो हम अपने शहर से एक मील स्टेशन तक सैर को जा सकते थे, किन्तु इधर उधर के अप्रत्याशित कत्लों के भय - [लेख माला "वे पंद्रह दिन" प्रशांत पोळ ... और 14 अगस्त 1947 को आधिकारिक रूप से पाकिस्तान बना](https://www.ugtabharat.com/98173/) - कलकत्ता.... गुरुवार, 14 अगस्त सुबह की ठण्डी हवा भले ही खुशनुमा और प्रसन्न करने वाली हो, परन्तु बेलियाघाट इलाके में ऐसा बिलकुल नहीं है. चारों तरफ फैले कीचड़ के कारण यहां निरंतर एक विशिष्ट प्रकार की बदबू वातावरण में भरी पड़ी है. गांधीजी प्रातःभ्रमण के लिए बाहर निकले हैं. बिलकुल पड़ोस में ही उन्हें टूटी - [| काश मानव धर्म को समझते ||](https://www.ugtabharat.com/99335/) - ऋषि दयानंद जी ने अपने अमर ग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाश के अंत में, स्वमत्वव्या मन्तव्य प्रकाश प्रकरण में धर्म और अधर्म को समझाते हुए लिखते है :- “धर्मा धर्म” जो पक्षपात रहित, न्यायाचरण, सत्यभाषादियुक्त ईश्वराज्ञा, वेदों से अविरुद्ध है, उसको ‘धर्म’ और जो पक्षपात सहित अन्यायाचरण, मिथ्याभाषणादि ईश्वराज्ञा भंग वेद विरुद्ध है, उसको ‘अधर्म’ मानता हूँ| - [हिंदू महासभा का गठन और उद्देश्य](https://www.ugtabharat.com/99728/) - 🚩"" अखिल भारत हिन्दू महासभा "" का गठन पहली बार 1882 ईस्वी में लाहौर शहर में तीन महान सपूत लाला लाजपत राय, पतलू चन्द्र चटर्जी ( लाहौर हाई कोर्ट के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश ) और शादी राम जी ने मिलकर किया जो कि "" हिन्दू महासभा "" के रूप में प्रचलित हुआ। चुकी "" हिन्दू - [इरफान हबीब और रोमिला थापर को एक खत](https://www.ugtabharat.com/100241/) - #VIJAYMANOHARTIWARI वामपंथी इतिहासकार इरफान हबीब और रोमिला थापर को कुछ समय पहले एक चिट्ठी लिखी थी। मैंने उन्हें लिखा है कि आज इतिहास को लेकर भारतीयों में पहले से ज्यादा जागरूकता है। इंटरनेट ने तथ्यों को उजागर करने में बहुत मदद की है। आखिर ऐसा क्या सच सामने आ गया है कि एक समय इतिहास - [पुण्य भूमि है भारत भूमि](https://www.ugtabharat.com/100367/) - बृहस्पति आगम में एक श्लोक है, "हिमालयात् समारभ्य यावत् इन्दु सरोवरम्, तं देवनिर्मितं देशं हिन्दुस्थानं प्रचक्षते"। जो स्पष्ट कहता है कि "हिमालय से प्रारंभ होकर इन्दु सरोवर (हिन्द महासागर) तक यह देव निर्मित देश "हिन्दुस्थान" कहलाता है। इसके अतिरिक्त "विष्णु पुराण" में इसी "भरत भूमि" पर जन्म लेने को लालायित देवतागण भी इसका यश गान - [हरियाणा की जनता ने बचाया देश का सम्मान](https://www.ugtabharat.com/100720/) - मैंने अभी कुछ समय पूर्व अपने एक लेख में लिखा था कि हरियाणा के लोगों ने लोकसभा चुनाव के समय भाजपा को 46 सीटों पर बढ़त दी थी। जिससे भाजपा को कम करके आंकने की आवश्यकता नहीं है। मेरा अनुमान था कि भाजपा विधानसभा चुनाव में तीसरी बार भी सत्ता में आ सकती है। - [गुर्जरों के शौर्य की कहानी :पाकिस्तानी रिटायर्ड मेजर की जवानी](https://www.ugtabharat.com/100946/) - गुर्जर जाति भारत की क्षत्रिय जातियों में गिनी जाती है इसके शौर्य और वीरता की भाग विदेशी आक्रमण कार्यो ने भी मानी थी। इसकी वीरता और शौर्य का उल्लेख करते हुए पाकिस्तान के रिटायर्ड मेजर जनरल मुकीश खान ने अपनी पुस्तकcrisis of leadership ’ में लिखा है कि, भारतीय सेना का एक अभिन्न अंग होते - [भारत में द्विराष्ट्रवाद के जनक सर सैयद अहमद खान](https://www.ugtabharat.com/101339/) - 17 अक्टूबर, 1817 को जन्मे सैयद अहमद खान 1838 में ईस्ट इंडिया कंपनी से जुड़े। अंग्रेजो का विश्वास जीतकर वह 1867 में एक न्यायालय के न्यायाधीश भी बने और 1876 में सेवानिवृत्त हुए। अप्रैल 1869 में सैयद अहमद खान अपने बेटे के साथ इंग्लैंड गए, जहां छह अगस्त को उन्हें ‘ऑर्डर ऑफ द स्टार ऑफ - [इतिहास की पड़ताल पुस्तक से ... *महमूद गजनवी और तालिबान - अध्याय-08*](https://www.ugtabharat.com/101678/) - जब हम मध्यकाल में मुस्लिम आक्रमणकारियों के आक्रमणों के बारे में पढ़ते हैं तो अक्सर यह प्रश्न हमारे अंतर्मन में उठता है कि विदेशी आक्रमणकारियों के आक्रमण के समय देश के राजनीतिक केंद्रों के रूप में मान्यता प्राप्त रहे किलों की अपेक्षा धार्मिक आस्था के केंद्र हमारे मंदिर ही क्यों लूटे गए? यदि इस प्रश्न - [भारत के 1235 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास भाग - 409 [हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक शिवाजी और उनके उत्तराधिकारी " पुस्तक से] *वीर योद्धा संभाजी महाराज* - *अध्याय -08*](https://www.ugtabharat.com/101753/) - शिवाजी के पश्चात उनके पुत्र संभाजी महाराज ने उनके उत्तराधिकारी के रूप में गद्दी संभाली। इतिहासकारों का मानना है कि संभाजी महाराज यद्यपि अपने पिता शिवाजी महाराज की भांति तो संघर्षशील और साहसी नहीं थे, परंतु फिर भी उन्होंने इतिहास में अपना विशिष्ट और महत्वपूर्ण स्थान बनाया। उन्होंने भी अपने पिता के पदचिन्हों पर चलने - [वेदों में ईश्वर के एक होने के प्रमाण](https://www.ugtabharat.com/101824/) - लेखक-पंडित धर्मदेव विद्यामार्तण्ड [Monotheism अंग्रेजी के इस शब्द से बहुत लोग एक असमंजस की स्थिति में हैं। इसका अर्थ है एकेश्वरवाद अर्थात ईश्वर एक है। पश्चिमी विचारकों ने वेदों को लेकर एक भ्रान्ति है कि वेदों में ईश्वर अनेक है अर्थात वेद बहुदेवतावाद का समर्थन करते है। उनकी दूसरी मान्यता यह है कि सेमेटिक मत - [धमकियों की बढ़ती घटनाओं पर मुस्लिम संगठनों व मुसलमीन पार्टियों की चुप्पी क्या आतंकियों को मौन समर्थन नहीं!*](https://www.ugtabharat.com/101830/) - तिरुपति में इस्कॉन मंदिर, उज्जैन का महाकाल मन्दिर, उज्जैन रेलवे स्टेशन, हनुमानगढ़ जंक्शन सहित राज्य के श्रीगंगानगर, बीकानेर, जोधपुर, कोटा, बूंदी, उदयपुर, जयपुर रेलवे स्टेशन के साथ राजस्थान के कुछ अन्य धार्मिक स्थलों को दीपावली के दौरान आगामी 30 अक्टूबर और 2 नवम्बर को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। धमकी देने वाला - [राम नाम से भावनाएं आहत होती हैं तो इस्लामिक कलमे से क्यों नहीं](https://www.ugtabharat.com/102112/) - दिव्य अग्रवाल अखंड ब्रह्माण्ड जिन सिद्धांतों पर चलता है उन सिद्धांतों का निर्माण करने वाले सनातन धर्म को कुछ मजहबी लोगों ने कमजोर समझ लिया है जिसका सर्वप्रथम कारण सनातनी समाज है । ५०० वर्ष तक प्रभु श्री राम मंदिर के निर्माण हेतु संघर्ष करने वाली कौम मंदिर निर्माण होने के पश्चात भविष्य के लिए - [भारत के 1235 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास भाग - 410 [हिंदवी स्वराज के संस्थापक शिवाजी और उनके उत्तराधिकारी पुस्तक से...]](https://www.ugtabharat.com/102281/) - वीरयोद्धा सम्भाजी महाराज अध्याय-8 शिवाजी के पश्चात उनके पुत्र संभाजी महाराज ने उनके उत्तराधिकारी के रूप में गद्दी संभाली। इतिहासकारों का मानना है कि संभाजी महाराज यद्यपि अपने पिता शिवाजी महाराज की भांति तो संघर्षशील और साहसी नहीं थे, परंतु फिर भी उन्होंने इतिहास में अपना विशिष्ट और महत्वपूर्ण स्थान बनाया। उन्होंने भी अपने पिता - [नेहरू और सावरकर के लेखन का मौलिक अंतर](https://www.ugtabharat.com/102324/) - नेहरू जयंती 14 नवंबर पर विशेष ‘सावरकर समग्र’ के खंड 6 के पृष्ठ संख्या 342 पर सावरकर जी तैमूर लंग के विषय में बताते हैं कि तैमूर लंग तुर्क था। प्रारंभ में उसने इस्लाम धर्म स्वीकार नहीं किया था। उसने बगदाद को जीतने के पश्चात वहां के समस्त मुस्लिम ग्रंथों और अनेक स्थानों की मस्जिदों - [_मौलाना आजाद किस बूते 'राष्ट्रीय शिक्षा' के प्रतीक हैं?_](https://www.ugtabharat.com/102340/) - शंकर शरण वर्ष २००८ में भारत में मौलाना अबुल कलाम आजाद के जन्मदिन 11 नवंबर को ‘राष्ट्रीय शिक्षा दिवस’ घोषित किया था। यह भारत के शैक्षिक-सांस्कृतिक पतन का ठोस प्रमाण है, कि शिक्षा के ऐसे क्षुद्र राजनीतिकरण पर भी कोई आवाज नहीं उठी। उलटे अधिकांश बौद्धिक हर साल इस दिन को मौलाना आजाद का गुणगान - [राम मंदिर और देश के छद्दम कालनेमि बन रहे राजनीतिज्ञ](https://www.ugtabharat.com/95962/) - डॉ राकेश कुमार आर्य श्रीरामचन्द्र जी और कृष्णा भगवान के चरित्रों का अध्ययन करने पर एक बात प्रमुखता से सामने आती है कि अपने जीवनकाल में इस दोनों को ही अनेक बार जनता ने ही अपमानित किया। लेकिन उनका अंत किस तरह हुआ, उससे हमें शिक्षा लेनी चाहिए। रावण, कंस और हिरणकश्यप अपवाद को छोड़, - [महमूद गजनवी और तालिबान](https://www.ugtabharat.com/102351/) - जब हम मध्यकाल में मुस्लिम आक्रमणकारियों के आक्रमणों के बारे में पढ़ते हैं तो अक्सर यह प्रश्न हमारे अंतर्मन में उठता है कि विदेशी आक्रमणकारियों के आक्रमण के समय देश के राजनीतिक केंद्रों के रूप में मान्यता प्राप्त रहे किलों की अपेक्षा धार्मिक आस्था के केंद्र हमारे मंदिर ही क्यों लूटे गए? यदि इस प्रश्न - [सामाजिक और धार्मिक क्रांति के अग्रदूत गुरु नानक देव](https://www.ugtabharat.com/102422/) - गुरुनानक देव जयन्ती- 15 नवम्बर 2024 के उपलक्ष्य में -ललित गर्ग – भारतीय संस्कृति में गुरु नानकदेव एक महान पवित्र आत्मा थे, वे ईश्वर के सच्चे प्रतिनिधि थेे। सिख धर्म के दस गुरुओं की कड़ी में प्रथम हैं गुरु नानक। अणु को विराट के साथ एवं आत्मा को परमात्मा के साथ एवं आत्मज्ञान को प्राप्त - [स्वराज्य केसरी -आर्य नेता लाला लाजपत राय 17 नवम्बर को पुण्य तिथि पर प्रकाशित](https://www.ugtabharat.com/102575/) - #डॉविवेकआर्य आर्यसमाज मेरे लिए माता के सामान है और वैदिक धर्म मुझे पिता तुल्य प्यारा है- लाला लाजपत राय आज़ादी के महानायकों में लाला लाजपत राय का नाम ही देशवासियों में स्फूर्ति तथा प्रेरणा का संचार कराता है। अपने देश धर्म तथा संस्कृति के लिए उनमें जो प्रबल प्रेम तथा आदर था उसी के कारण - [जामिया मिलिया इस्लामिया इस्लामी कन्वर्जन की सच होती बातें,शिकायत करने वाली ऋचा को न्याय का इंतजार](https://www.ugtabharat.com/102732/) - डॉ मयंक चतुर्वेदी 'विश्वविद्यालय प्रशासन एवं अल्पसंख्यकों पर कार्रवाई करने का भय पुलिस पर भी हो सकता है, देश की राजधानी में यह संकेत मिले हैं, जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में हुई पिछले माह 16 अक्टूबर को प्रताड़ित परिवर्तित नाम रिचा द्वारा पुलिस में शिकायत देने के बाद अब एक माह गुजर जाने के बाद - [सनातन हिंदू एकता पदयात्रा के फलितार्थ क्या हो सकते हैं ?](https://www.ugtabharat.com/103062/) - - सौरभ तामेश्वरी कटेंगे तो बटेंगे हो या जात-पात की करो विदाई हम सब हिन्दू भाई-भाई का नारा। बीते दिनों में यह खूब चर्चा में हैं। पहला नारा राजनीतिक मंच से भारतीय जनता पार्टी की ओर से उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराष्ट्र चुनाव के समय दिया। वहीं दूसरा अभी देश-दुनिया में प्रसिद्ध संत - [शांति के लिए शक्तिमान बनें](https://www.ugtabharat.com/103180/) - “शक्ति ही तो शांति का आधार है ”। शांति स्थापित करने के लिए शक्तिमान बनना ही होगा । बार-बार आत्मसमर्पण को विवश होने से तो अच्छा है कि संगठन की शक्ति का शंखनाद हो और हिंदुओं में तेजस्विता का संचार हो । मुसलमानों के दिल में जगह बनाने के प्रयास में वर्षों से सक्रिय संघ - [विश्व शान्ति हेतु इस्लामिक दर्शन में संशोधन आवश्यक](https://www.ugtabharat.com/103220/) - सामान्यतः आज देश के विभिन्न भागों में बंग्ला देशी व पाक परस्त ज़िहादी अनेक प्रकार से इस्लामिक आतंकवाद में लिप्त हैं, जिससे बढती हुई राष्ट्रीय व सामाजिक समस्याओं का किसी को अनुमान ही नहीं हो रहा है । क्योंकि भारत की हज़ारों वर्ष पुरानी सत्य सनातन संस्कृति और दर्शन को आज के छद्म सेक्युलर केवल - [तैमूर लंग का आतंकी अभियान](https://www.ugtabharat.com/103966/) - इस्लाम के नाम पर विजय अभियानों का आयोजन करने वाले प्रत्येक आक्रमणकारी ने मज़हबी जुनून और उग्रवाद का परचम लहराकर सारे संसार को आतंकित करने का कार्य किया। इस दृष्टिकोण से यदि देखा जाए तो इस्लामिक आतंकवाद कल परसों की बात नहीं है, यह इस्लाम के जन्म के साथ ही पैदा हुआ है। यह अलग - [बाबर व अकबर के शासन काल में हिंदू दमन (भाग ॥)](https://www.ugtabharat.com/104236/) - बाबर व अकबर के शासन काल में हिंदू दमन - [जहांगीर, शाहजहां और औरंगजेब की हिंदू नीति - भाग- 2](https://www.ugtabharat.com/104415/) - जहांगीर, शाहजहां और औरंगजेब की हिंदू नीति शा हजहाँ ने अपना नाम द्वितीय तैमूर भी रख लिया था। इसके पीछे उसका कारण केवल यही था कि वह तैमूर की क्रूरता व निर्दयता - [कमजोर मोदी का मजबूत निर्णय](https://www.ugtabharat.com/104733/) - बोर्ड संशोधन बिल को पारित कर दिया है। ध्यान रहे कि इस विध्वंसकारी और देश विरोधी कानून को देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 1954 में देश की संसद - [इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू (अध्याय - 13)](https://www.ugtabharat.com/104771/) - डॉ. राकेश कुमार आर्य (डिस्कवरी ऑफ इंडिया की डिस्कवरी) पुस्तक से ... वेद मानव द्वारा निर्मित वेदों को लेकर भारतीय ऋषियों की मान्यता रही है कि यह सृष्टि प्रारंभ में ईश्वर प्रदत्त ज्ञान है। जो कि सृष्टि को सुव्यवस्थित ढंग से चलाने के लिए दिया गया। इनमें धर्म की व्यवस्था है। भारतीय ऋषियों की इस - [गोपनीय जानकारी बनी सीजफायर का आधार](https://www.ugtabharat.com/105038/) - गोपनीय जानकारी बनी सीजफायर का आधार - [सनातन हिंदू धर्म एवं भारत में उत्पन्न समस्त मत पंथ विश्व में शांति चाहते हैं](https://www.ugtabharat.com/105052/) - सनातन हिंदू धर्म एवं भारत में उत्पन्न समस्त मत पंथ विश्व में शांति चाहते हैं भारत में सनातन हिंदू धर्म तो अनादि एवं अनंत काल से चला आ रहा है परंतु बाद के खं - [साईं बाबा मुस्लिम या हिन्दू : हिन्दू देवी देवताओं के समतुल्य साईं बाबा को बैठाना अज्ञानतापूर्ण](https://www.ugtabharat.com/105092/) - साईं बाबा मुस्लिम या हिन्दू : हिन्दू देवी देवताओं के समतुल्य साईं बाबा को बैठाना अज्ञानतापूर्ण साईं बाबा की मूर्तियां बनाकर उनकी पूजा-अर्चना की जाने लगी है। - [अल्लाह की बेटी पर तालिबान का सितम](https://www.ugtabharat.com/8000/) - पाकिस्तान की बेटी मानवाधिकार कार्यकर्ता और लड़कियों में शिक्षा की अलख जगाने वाली 14 साल की मलाला यूसुफजई पर तालिबान ने जो गोली मारी है, वह मलाला के साथ ही इसलाम के बुनियादी उसूलों पर भी चली है। इसलाम लड़कियों को शिक्षा हासिल करने का अधिकार देता है, जिसे रोकना किसी भी सूरत जायज नहीं - [अल्लाह की बेटी पर तालिबान का सितम](https://www.ugtabharat.com/1791/) - पाकिस्तान की बेटी मानवधिकार कार्यकर्ता और लडकियों में शिक्षा की अलख जगाने वाली 14 साल की मलाला युसुफजई पर तालिबान ने जो गोली मारी है। वह मलाला के साथ ही इसलाम के बुनियादी उसूलों पर भी चही है। इसलाम लडकियों को शिक्षा हासिल करने का अधिकार देता है, जिसे रोकना किसी भी सूरत में जायज - [जामिया के विद्यार्थियों का ऐलान , हम अल्लाह को मानते हैं लोकतंत्र को नहीं](https://www.ugtabharat.com/13221/) - आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार देशद्रोह के आरोपित शरजील इमाम के समर्थन में जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों द्वारा रैली निकालने के बाद अब इन छात्रों ने ऐलान किया है कि वो लोकतंत्र को नहीं, अल्लाह को मानते हैं। Students of Jamia द्वारा इस तरह की पोस्ट पर हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई भाई-भाई, गंगा-यमुना तहजीब की राग रागने वाले, संविधान - [जहर उगलता मौलाना : मोदी शाह से उल्टी करवाएंगे , इंशाअल्लाह भारत की इकोनॉमी बर्बाद होगी](https://www.ugtabharat.com/13300/) - ज़मीन पर चाहे जो भी स्थिति हो, लिबरलों के गिरोह विशेष का का पूरा जोर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में अपने अनुरूप माहौल बनाने का रहता है। वो चाहते हैं कि देश के 0.045% क्षेत्र के कुछ हिस्से में हुए विरोध-प्रदर्शन को यूँ दिखाया जा रहा है जैसे कि पूरा देश सुलग रहा हो। अमेरिका के राष्ट्रपति - [मूर्तिपूजक देशों को जवाब है कोरोना यातना और ज्यादा बढ़ाए , विद्रोह करने वालों को दंडित करे अल्लाह : आईएसआईएस](https://www.ugtabharat.com/14238/) - कोरोना वायरस से जहाँ पूरे देश में दहशत फैला हुआ है, वहीं आतंकी मुसलमानों ने इसको लेकर एक अलग ही राग छेड़ रखी है। किसी ने इसे अल्लाह का अजाब करार दिया तो किसी ने इसे अल्लाह का प्रकोप। कुछ दिनों पहले उत्तर प्रदेश देवबंद के उलेमा ने कोरोना वायरस पर अजीबेगरीब और बेतुका सा - [तस्लीमा नसरीन : जब पूरी दुनिया को अल्लाह ने बनाया तो फिर कोरोनावायरस से मक्का क्यों बंद कर दिया ?](https://www.ugtabharat.com/14250/) - धर्म एक ऐसी चीज़ हैं जो इंसान को इंसान बनाये रखने में मदद करती है।दुःख में उसे प्रेरणा देती है और सु:ख में अहंकारी बनने से बचाती हैं। लेकिन यह धर्म तभी तक एक खूबसूरत चीज हैं जब तक इसमें और इसको मानने वाले लोगों के बीच कोई व्यक्ति न आ जाये। मुस्लिम धर्म में - [इंशाअल्लाह मेरा इंडिया इस्लामिक राज्य हो जाएगा: एनएसयूआई महासचिव शौकत अली](https://www.ugtabharat.com/17907/) - आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार एक तरफ मोदी सरकार देश में फैले कोरोना को निष्क्रिय करने दिन-रात जुटी हुई है, विपरीत इसके कांग्रेस और इसके संगठन देश में साम्प्रदायिकता फ़ैलाने में दिन-रात एक किए हुए हैं। पहले नागरिक संशोधक कानून के विरोध में कितना उपद्रव, फिर जमातियों द्वारा कोरोना वारियर्स पर थूकना और पत्थराव, जमातियों को मस्जिदों - [ईश्वर और अल्लाह एक नहीं](https://www.ugtabharat.com/21720/) - मैंने अपनी पुस्तक वेद और कुरान की समीक्षा को लिखकर दिया था 2008 में, प्रमाण के साथ लिखा है जिसका एक प्रमाण मैं उठाकर दे रहा हूँआज आप लोगों को | पहली बात यह है इस्लामी मान्यता अनुसार अल्लाह तो मुख्य नाम है,अल्लाह जैसा परमात्मा का मुख्य नाम ओम है | ठीक इसी प्रकार अल्लाह - [भूमि पूजन करती महिलाओं से अमानतुल्लाह के लोगों ने कहा 'राम नहीं अल्लाह बोलो'](https://www.ugtabharat.com/24278/) - जीतेंद्र ने हमें इस पूरी घटना की वीडियो उपलब्ध करवाई। साथ ही यह भी कहा कि दूसरे पक्ष ने पुलिस का ध्यान केवल तलवार वाली घटना पर गौर दिलवाकर मुकेश-गगन को गिरफ्तार करवा दिया है। हमसे कोई बातचीत नहीं की। इनके अलावा एक दीपक नाम का साथी भी जेल में डाल दिया गया। जिसकी कोई - ['बस नाम रहेगा अल्लाह का , हम देखेंगे हम देखेंगे'- नारे के सही अर्थ और संदर्भ](https://www.ugtabharat.com/31307/) - 👉बस नाम रहेगा अल्लाह का ! 👉👉हम देखेंगे, हम देखेंगे !! एक संभोग क्रिया होती है,इसे निषेचन अथवा मैथुन भी कहते हैं। यही संभोग जब पति पत्नी के बीच होता है तो मंगल,शुभदायक और वंशवृद्धि हेतु आवश्यक माना जाता है। यही संभोग जब किसी वेश्या से किया जाता है तो वह नीच और अशुभ माना - [महाराष्ट्र के मच्छिंद्रनाथ मंदिर में मुस्लिमों की भीड़ ने घुसकर लगाए अल्लाहू अकबर के नारे](https://www.ugtabharat.com/35408/) - मुस्लिम भीड़ ने मच्छिंद्रनाथ मंदिर में आरती को किया बाधित (साभार: YouTube) लगभग 50 से 60 मुस्लिम कट्टरपंथियों ने मलंग गढ़ किले के ऊपर बने मच्छिंद्रनाथ के प्राचीन मंदिर में घुसकर हिंदू श्रद्धालुओं द्वारा की जा रही आरती को बाधित करने के लिए ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के - [ईश्वर अल्लाह तेरो नाम ?](https://www.ugtabharat.com/35881/) - सेक्युलर भजन - ईश्वर अल्लाह तेरो नाम कितना सही है? कुरान के अल्लाह व वेद के ईश्वर में अन्तर अलग अलग भाषाओं में सर्वव्यापी परमात्मा के अलग अलग नाम हैं । मूर्खों ने परमात्मा के नाम पर हिन्दू मुस्लिम सिक्ख जैन बोद्ध ईसाई आदि अनेक मतमतान्तर खडे कर लिए हैं । अल्लाह अरबी भाषा - ["अल्लाह हू अकबर'' बोलना बाकी था अब तो वह भी बोल दिया गया .......](https://www.ugtabharat.com/42876/) - देश में ऐसा कौन व्यक्ति होगा जो किसानों की समस्याओं के प्रति लापरवाही बरतने वाली सरकार के प्रति सहानुभूति रखता हो ? निश्चित रूप से किसी भी सरकार के किसान विरोधी दृष्टिकोण को कोई भी व्यक्ति पसंद नहीं करेगा। पर जब किसानों के समर्थन में कहीं ऐसे लोग आंदोलन कर रहे हों, जिनके तार देश - [जब नाम रहेगा अल्लाह का.....](https://www.ugtabharat.com/43060/) - ११ सितम्बर २००१ को जब दहल उठा था अमेरिका और विश्व इस्लामी आतंक से,पर आज लड़ रहा है “ग्लोबल हिंदुत्व से”- जब अमेरिका व पूरा का पूरा विश्व दहल गया था,दो हवाई जहाज जाकर टकरा गए थे वर्ल्ड ट्रेड टावर पर और देखते ही देखते,तीन हज़ार लोग समा गए थे असमय काल के मुख में।उनका - [उत्तर प्रदेश : ‘इंशाअल्लाह… आपके पेशाब में चिराग जलवाने का काम करूँगा’: सपा के लिए वोट माँग रहे सलमान कुरैशी](https://www.ugtabharat.com/48097/) - सपा नेता सलमान कुरैशी का वीडियो वायरल उत्तर प्रदेश में 2022 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। उससे पहले मुस्लिमों का वोट हासिल करने के लिए सपा (SP) नेता अजीबोगरीब - [अल्लाह का जन्म भारत में वेद से हुआ था](https://www.ugtabharat.com/52715/) - हमें पूरा विश्वास है कि लेख का यह शीर्षक पढ़ते ही प्रबुद्ध पाठकों के मन में कई शंकाएं उत्पन्न हो जाएंगी , कोई इस बात को असंभव और झूठ मानेगा , कोई इस बात को केवल मजाक समझ कर हंसी में उड़ा देगा , लेकिन इस बात को साबित करने के लिए हमें कुछ ऐसे - [बस अल्लाह का करम है](https://www.ugtabharat.com/66252/) - सुबह सुबह बुजुर्ग अब्दुल चच्चा अपने घोड़े को जीन पहना रहे थे। मैने पूछा कैसे हो? वो बड़े खुश मिजाजी से बोले अल्लाह का करम है, सब इत्मीनान से हैं। मैने कहा कि चच्चा,, अब तो आपकी उम्र हो गई, वो तपाक से बोले, बेटा घोड़ा और आदमी तब तक जवान रहते हैं जब तक - [मौलाना अरशद मदनी जब ॐ और अल्लाह एक, फिर अज़ान और नमाज में ॐ क्यों नहीं?](https://www.ugtabharat.com/72270/) - चलो देर आए दुरुस्त आए, अप्रयत्क्ष रूप में इस्लामिक संगठन जमीयत-उलेमा-ए-हिंद और उसके चीफ मौलाना अरशद महमूद मदनी ने मान गए कि ॐ और अल्लाह एक हैं। अब हिन्दू संगठन यह भी प्रश्न कर रहे है कि जब ॐ और अल्लाह एक है फिर अज़ान और नमाज़ में ॐ का जाप कब? अल्पज्ञानी मदनी को - [ओम अल्लाह एक है तो ओम क्यों नहीं बोलते?](https://www.ugtabharat.com/72276/) - मदनी का ज्ञान ओम अल्लाह एक है तो ओम क्यों नहीं बोलते? अल्लाह बोलने की जिद क्यों? इस्लाम की पैदाइश जहां हुई वहां के हाल देखें: मदनी जब हज़ या उमेरा करने मक्का जाएँ तो वहाँ 8000वर्ष प्राचीन सउदी में मक्का के निकट हुई खुदाई में एक प्राचीन शहर के अवशेष देखने जाएँ जहां एक - [ईश्वर और अल्लाह एक नहीं हैं*](https://www.ugtabharat.com/72331/) - ये लेख विभिन्न विद्वानों के लेख पर आधारित ४ भागो में है। कृपया पूरा पढ़े और मुस्लिम वर्ग को शेयर करे। मुस्लिम नेता मेहमूद मदनी ने कहा है की ईश्वर और अल्ला एक ही है ,ऐसा गाँधी ने भी कहा की ईश्वर अल्ला तेरो नाम ,और बहुत से सेक्युलर नेता ऐसा कहते आये है की - [ईश्वर और अल्लाह एक नहीं हैं*](https://www.ugtabharat.com/72381/) - ईश्वर और अल्लाह एक नहीं हैं ये लेख विभिन्न विद्वानों के लेख पर आधारित ४ भागो में है। कृपया पूरा पढ़े और मुस्लिम वर्ग को शेयर करे। भाग -2 मुस्लिम नेता मेहमूद मदनी ने कहा है की ईश्वर और अल्ला एक ही है ,ऐसा गाँधी ने भी कहा की ईश्वर अल्ला तेरो नाम ,और बहुत - [ईश्वर और अल्लाह एक नहीं हैं*](https://www.ugtabharat.com/72437/) - ईश्वर और अल्लाह एक नहीं हैं *ये लेख विभिन्न विद्वानों के लेख पर आधारित ४ भागो में है। भाग -3 मुस्लिम नेता मेहमूद मदनी ने कहा है की ईश्वर और अल्ला एक ही है ,ऐसा गाँधी ने भी कहा की ईश्वर अल्ला तेरो नाम ,और बहुत से सेक्युलर नेता ऐसा कहते आये है की ईश्वर - [ईश्वर और अल्लाह एक नहीं हैं*](https://www.ugtabharat.com/72497/) - ये लेख विभिन्न विद्वानों के लेख पर आधारित ४ भागो में है। *डॉ डी के गर्ग मुस्लिम नेता मेहमूद मदनी ने कहा है की ईश्वर और अल्ला एक ही है ,ऐसा गाँधी ने भी कहा की ईश्वर अल्ला तेरो नाम ,और बहुत से सेक्युलर नेता ऐसा कहते आये है की ईश्वर कहो या अल्ला दोनों - [इस्लाम में अल्लाह का नाम बर्बाद है !](https://www.ugtabharat.com/74224/) - इस्लाम में अल्लाह का नाम बर्बाद है ! विश्व के लगभग सभी लोग इस सत्य को स्वीकार करते हैं कि जरूर कोई एक ऐसी अलौकिक शक्ति है , जो इस सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को नियंत्रित कर रही है .और बिना किसी की सहायता के संचालित कर रही है .धार्मिक उसी शक्ति को ईश्वर मानकर विभिन्न नामों - [अल्लाह का जन्म भारत में हुआ था](https://www.ugtabharat.com/76215/) - अल्लाह का जन्म भारत में हुआ था अल्लाह शब्द का जन्म वेद से हुआ है हमें पूरा विश्वास है कि लेख का यह शीर्षक पढ़ते ही प्रबुद्ध पाठकों के मन में कई शंकाएं उत्पन्न हो जाएंगी , कोई इस बात को असंभव और झूठ मानेगा , कोई इस बात को केवल मजाक समझ कर हंसी - [अल्लाह शब्द का जन्म वेद से हुआ है !](https://www.ugtabharat.com/83280/) - हमें पूरा विश्वास है कि लेख का यह शीर्षक पढ़ते ही प्रबुद्ध पाठकों के मन में कई शंकाएं उत्पन्न हो जाएंगी , कोई इस बात को असंभव और झूठ मानेगा , कोई इस बात को केवल मजाक समझ कर हंसी में उड़ा देगा , लेकिन इस बात को साबित करने के लिए हमें कुछ ऐसे - [क्या ईश्वर और अल्लाह सचमुच एक हैं ?](https://www.ugtabharat.com/85404/) - 🛕ईश्वर और अल्लाह एक नहीं हैं🛕 [देखें प्रमुख 11 अंतर] (१) ईश्वर सर्वव्यापक (omnipresent) है, जबकि अल्लाह सातवें आसमान पर रहता है. (२) ईश्वर सर्वशक्तिमान (omnipotent) है, वह कार्य करने में किसी की सहायता नहीं लेता, जबकि अल्लाह को फरिश्तों और जिन्नों की सहायता लेनी पडती है. (३) ईश्वर न्यायकारी है, वह जीवों के कर्मानुसार - [अल्लाह की कौन सी बात सत्य है ?](https://www.ugtabharat.com/87937/) - अल्लाह ने अपनी कलाम के ज्यादा जगह में बताया 6 दिनों में आसमानों को और जमीं को बनाया यह लग भाग 12,से 13 जगह बताया कुरान में | लेकिन एक जगह यह भी बता दिया कि धरती को दिन में बनाया, और चार दिन में खाने पिने का सामान बनाया | अब अल्लाह की कौन - [सब बुत उठवाए जाएँगे ⋅⋅⋅ बस नाम रहेगा अल्लाह का”](https://www.ugtabharat.com/89543/) - “ साभार : पुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ फ़ैज अहमद फ़ैज को जावेद अख्तर और मुनव्वर राणा जैसे “प्रगतिशील” लोग आज तानाशाही के विरोधी शायर के रूप में प्रचारित कर रहे हैं । पाकिस्तानी तानाशाह जनरल जिया उल हक़ के विरुद्ध फ़ैज अहमद फ़ैज ने जो ग़जल “व यबक़ वज़ह उ रब्बिक” (रब्ब का चेहरा) शीर्षक से लिखी - [अल्लाह सुबानहू तआला सभी के लिए रहमोकरम तथा अपनी रहमत फजीलत अता फरमाए।](https://www.ugtabharat.com/95800/) - लेकिन निरीह मूक प्राणियों का वध किया जाना अनैतिकता और अधर्म को प्रोत्साहित करना है : सरकार को समझना चाहिए अपना राजधर्म ईद के अवसर पर दी जा रही निरीह प्राणियों की बलि के अवसर पर विशेष आज प्रत्येक दयावान व्यक्ति का हृदय बहुत ही व्यथित है, क्योंकि आज बहुत सारे निरीह, निरपराध,मूक प्राणियों यथा - [अल्लाह ने मूसा से बातें कि || जो अल्लाह मूसा पैगम्बर से बातें करें वह अल्लाह निराकार कैसे ?](https://www.ugtabharat.com/102844/) - अल्लाह ने मूसा से बातें कि || जो अल्लाह मूसा पैगम्बर से बातें करें वह अल्लाह निराकार कैसे ? कुरान की आयातों के साथ प्रमाण प्रस्तुत किया गया इसे आप लोग भी पढ़ कर देखें | وَلَمَّا جَآءَ مُوسَىٰ لِمِيقَـٰتِنَا وَكَلَّمَهُۥ رَبُّهُۥ قَالَ رَبِّ أَرِنِىٓ أَنظُرْ إِلَيْكَ ۚ قَالَ لَن تَرَىٰنِى وَلَـٰكِنِ ٱنظُرْ إِلَى ٱلْجَبَلِ - [भाषा और भूगोल का मानव जीवन में महत्व](https://www.ugtabharat.com/76218/) - राहुल पाण्डेय भाषा और लिपि की बात करें तो भारत में सबसे पुरानी सिंधु लिपि ही मानी जाएगी जो अभी तक पढ़ी नहीं जा सकी है। इसके बारे में भाषाविद इतना ही जान पाए हैं कि इसकी पहली लाइन दाएं से बाएं चलती है और दूसरी बाएं से दाएं। इसमें लगभग चार सौ संकेत हैं, - [इस्लाम के अंधकूप से कैसे निकलें ?](https://www.ugtabharat.com/76341/) - भले ही भारत के सेकुलर इस्लाम को धर्म कहते रहें ,लेकिन जिन विद्वानों ने निष्पक्ष रूप से इस्लामी साहित्य का गहन अध्ययन किया हैं ,उन्होंने इस्लाम को धर्म नहीं माना है क्योंकि इस्लाम के विचार मानवता विरोधी , तर्कहीन , परस्पर विरोधी और कल्पित मान्यताताओं पर आधारित है , और यदि इस्लाम को एक ऐसा - [यज्दियों के कत्लेआम का असली कारण ?](https://www.ugtabharat.com/76460/) - यज्दियों के कत्लेआम का असली कारण ? क्योंकि यह विश्व का एकमात्र ऐसा धर्म है ,जो मानता है कि हरेक व्यक्ति जो भले कर्म करता है ,मरने के बाद उसका जन्म भारत में ही होता है ,जबकि इस्लाम पुनर्जन्म को नहीं मानता यदि हम निष्पक्ष होकर मुसलमानों का इतिहास और उनकी कुरान से प्रेरित कपट - [सारा दोष मुसलमानों का ही नहीं गलती हमारी भी है?](https://www.ugtabharat.com/76547/) - सारी गलती मुसलमान की क्यो? दी केरल स्टोरी देखने के बाद शायद हर व्यक्ति खासकर लड़कियों के मन मे अल्लाह, जेहाद, जन्नत और इस्लाम जैसे शब्दों के लिये नफरत बैठ ही जाएगी जो कि सुरक्षा दृष्टि से ठीक है। लेकिन आत्मचिंतन कीजिये कि आखिर मुसलमान का दोष ही क्या है? वो तो घोड़े पर बैठकर - [महर्षि दयानंद की 200 की जयंती के अवसर पर विशेष - तेजस्वी राष्ट्रवाद के समर्थक और समाज सुधारक थे स्वामी दयानंद](https://www.ugtabharat.com/76723/) - समाज सुधारक के रूप में ऋषि दयानंद महर्षि दयानंद जी महाराज ने अपने समय में प्रचलित बाल विवाह जैसी अनेक कुरीतियों का डटकर विरोध किया। उन्होंने लोगों को शास्त्रों के माध्यम से बाल विवाह जैसी कुप्रथा के विरुद्ध जागृत करने का कार्य किया । उन्होंने लोगों को बताया कि 25 वर्ष की अवस्था से पूर्व - [कुरान में पवित्र अश्लील शब्द](https://www.ugtabharat.com/76711/) - कुरान में पवित्र अश्लील शब्द किसी भी व्यक्ति की शराफत , शिष्टता ,गुण अवगुण और स्वभाव उसके द्वारा बोलचाल प्रयोग किये या लिखे गए शब्दों से पता चल जाते हैं .दुनिया की हरेक भाषा में पुरुष स्त्री के गुप्त अंगों से सम्बंधित शिष्ट और अश्लील शब्द पाए जाते हैं .और सभ्य लोग उन्हीं शब्दों का - [बाइबिल में हिन्दुओं का उल्लेख](https://www.ugtabharat.com/76907/) - बाइबिल में हिन्दुओं का उल्लेख जिहादियों का मुकाबला इस्राएल से सीखो ! हमें यह लेख तब लिखना पड़ा जब 12 अगस्त 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लद्दाख के लेह में लोगों के सामने यह बात कहीं कि " पाकिस्तान में सीधी लड़ाई लड़ने की हिम्मत नहीं है ,इसलिये वह आतंकवादियों के सहारे परोक्ष युद्ध - [इब्नबतूता के ब्यौरों में देखें दक्षिण भारत में काफिरों का कत्लेआम- भारत में इस्लाम](https://www.ugtabharat.com/76976/) - -विजय मनोहर तिवारी यह दक्षिण भारत के काफिरों की करुण कथा है। इब्नबतूता माबर पहुँचा है। यह वर्तमान तमिलनाडु में चेन्नई के आसपास का इलाका है। अब यह मोहम्मद तुगलक के कब्जे में है। तुगलक की तरफ से स्थानीय कब्जेदार शरीफ जलालुद्दीन एहसन शाह ने बगावत कर दी और पाँच साल तक माबर पर राज - [कांग्रेस की तुष्टिकरण की राजनीति ने खिलाया कर्नाटक में खेल : मुस्लिमों का आरक्षण हटाना भाजपा को पड़ा महंगा](https://www.ugtabharat.com/76994/) - राकेश सैन गाजियाबाद। ( यूरो डेस्क ) कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने परम्परा अनुसार खुल कर तुष्टिकरण की चौसर खेली। राज्य की पूर्व भाजपा सरकार ने मुसलमानों को अन्य पिछड़ा वर्ग के कोटे से दिए जा रहे चार प्रतिशत आरक्षण की सुविधा वापिस ले ली। अस्सी के दशक की बात है, शाहबानो नामक केस - [कुरान के अवतरण का रहस्य](https://www.ugtabharat.com/77045/) - मुसलमान कुरान के बारे में हमेशा यही दावा करते हैं की कुरान किसी व्यक्ति या व्यक्तिओं की रचना नहीं बल्कि आसमानी किताब है जो अल्लाह ने नाजिल है अर्थात ऊपर से उतारी है इस बात से ऐसा लगता है कि अल्लाह धरती से काफी ऊपर किसी जगह रहता है लेकिन ऐसा समझना अवैज्ञानिक और मूर्खता - [इस्लाम और कुरआन :शराब का गुणगान](https://www.ugtabharat.com/77122/) - दुनिया की सभी साहित्य और धर्म में शराब के बारे में कुछ न कुछ जरूर लिखा गया है .शराब बनाने और पीनेपिलाने का रिवाज हरेक देश में हजारों सालों से हो रहा है .मगर इस्लाम एकमात्र ऐसा धर्म है ,जो शराब को हराम बता कर खुद को सबसे श्रेष्ठ बताता है .यदि हम फारसी और - [देश विभाजन और सावरकर ? अध्याय 2, एक गांधीवादी के आरोप](https://www.ugtabharat.com/77192/) - अभी पिछले दिनों एक हिमांशु कुमार नामक गांधीवादी का लेख पढ़ा। इन महोदय ने अपने लेख के प्रारंभ में लिखा है कि 'मोदी ने अब से चौदह अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मरण दिवस घोषित करवा दिया है। ये सोच रहे हैं कि इस बहाने हमें हर साल भारत के विभाजन के लिए जिम्मेदार बता कर - [देश विभाजन और सावरकर, अध्याय 3 सर सैयद अहमद खान का द्विराष्ट्रवाद](https://www.ugtabharat.com/77227/) - 14 मार्च 1888 को मेरठ में दिए गए अपने भड़काऊ भाषण में सर सैयद अहमद खान ने स्पष्ट कर दिया था कि हिंदू-मुस्लिम मिलकर इस देश पर शासन नहीं कर सकते । अपने भाषण में उन्होंने कहा- “सबसे पहला प्रश्न यह है कि इस देश की सत्ता किसके हाथ में आनेवाली है ? मान लीजिए, - [भारत के 50 ऋषि वैज्ञानिक अध्याय - 45 वैदिक हिंदू धर्म के रक्षक ऋषि देवल](https://www.ugtabharat.com/77804/) - वैदिक हिंदू धर्म के रक्षक ऋषि देवल सामान्यतया एक ऐसी धारणा हमारे देश में बनाई गई है कि ऋषि मनीषियों का धर्म और राजनीति से किसी प्रकार का मेल नहीं होता। जबकि सच यह है कि शस्त्र की धार जब कभी काल विशेष में हल्की पड़ी है तो शास्त्ररक्षकों ने उसे तेज करने में अपने - [भारत के 50 ऋषि वैज्ञानिक अध्याय - 45, वैदिक हिंदू धर्म के रक्षक ऋषि देवल](https://www.ugtabharat.com/77864/) - सामान्यतया एक ऐसी धारणा हमारे देश में बनाई गई है कि ऋषि मनीषियों का धर्म और राजनीति से किसी प्रकार का मेल नहीं होता। जबकि सच यह है कि शस्त्र की धार जब कभी काल विशेष में हल्की पड़ी है तो शास्त्ररक्षकों ने उसे तेज करने में अपने दायित्व का निर्वाह किया है। समाज की - [भाषा ज्ञान के अभाव में हिंदू समाज की स्थिति](https://www.ugtabharat.com/78904/) - भाषा ज्ञान के अभाव में हिन्दुओं को मूर्ख बनाने का एक उदाहरण देखिये :-- . दुष्प्रचार: गुजरात में जामनगर शहर के पास समुद्र में एक टापू है जिसका नाम है “पिरोटन = Pirotan” . इस पीरोटन द्वीप में जा कर आप समुद्री जीव-जंतु को बहुत ही करीब से देख सकते हैं और प्रकृति के दर्शन - [ईद मुबारिक ---- बलि का महत्त्व](https://www.ugtabharat.com/78947/) - ईद मुबारिक ---- बलि का महत्त्व ईद का हिन्दी पर्याय त्यौहार । ईद अथवा त्यौहार वह विशेष दिन है जो किसी महत्त्वपूर्ण कार्य अथवा धार्मिक आस्थाओं के कारण वर्ष के शेष दिनों से विशिष्टता रखता है । इस दिन कुछ विशेष रीतिरिवाज किये जाते हैं । मुसलमान लोग वर्ष में दो ईद मनाते हैं । - [मुसलमान कुरान की इज्जत करते हैं ?](https://www.ugtabharat.com/80057/) - मुल्ले मौलवी मुसलमानों को यही सिखाते है कि दूसरों के धर्मग्रन्थ मनुष्यों ने बनाये हैं ,और कुरआन अल्लाह कि किताब है .हालांकि उनके पास इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है .फिरभी मुसलमान दूसरों क्र धर्मग्रंथों कि निंदा करना अपना अधिकार मानते हैं ,लेकिन कुरआन पर उंगली उठाने पर दंगे और हंगामा कर देते है.और कहते - [बनारस हिंदुस्तान का काबा है](https://www.ugtabharat.com/80101/) - जब बाबरी ढांचा गिरा दिया गया था तो ओवैसी ने कहा कि अल्लाह का घर तोड़ दिया गया , एक तरह यह मक्का के काबा को अल्लाह का घर बताते हैं , फिर बाबरी ढांचा को अल्लाह का घर बता देते हैं , अगर अल्लाह काबा के आलावा कहीं और रह सकता है तो हिन्दू - [प्राधिकरण को अब देने पड़ेंगे दस फीसदी भूखंड](https://www.ugtabharat.com/8361/) - 21 अक्टूबर 2011 के आदेश के विरूद्घ नोएडा प्राधिकरण की अर्जी को उच्च न्यायालय इलाहाबाद की पूर्णपीठ ने 14 मई को निरस्त कर दिया। नोएडा प्राधिकरण का कहना था कि वह 64.70 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा और किसानों को दस फीसदी, भूखंड देने की स्थिति में नहीं हैं, क्योंकि प्राधिकरण के पास इतना बजट नहीं है। - [आतंकवाद गया ही कहां था?](https://www.ugtabharat.com/1373/) - पिछले दिनों अमेरिका का बोस्टन और भारत का बंगलौर आतंकी घटनाओं से दहलाए गये हैं। कई टिप्पणीकारों या समाचार पत्रों ने अमेरिका के बोस्टन में घटी आतंकी घटना पर कहा है कि अमेरिका में आतंकवाद फिर लौटा। मुझे टिप्पणीकारों की ऐसी टिप्पणियों पर तरस आता है। क्योंकि ऐसी बातें करना अपनी बुद्घिहीनता का ही परिचय - [इंकलाब जिंदाबाद-3](https://www.ugtabharat.com/1314/) - शांता कुमारगतांक से आगे...असेम्बली में बम के इस धमाके ने लंदन समेत विश्व की जनता के भी कान खोल दिये। अभी ब्रिटिश सरकार की छाती पर सांडर्स वध के घाव भरे भी न थे कि इस नये आघात से उसका वक्षस्थल चीत्कार कर उठा। चारों ओर नाकाबंदी करके सभी टेलीफोन और तारें सरकार ने अपने - [वेदों ने गौ माता को अवध्या कहकर पूजनीया माना है](https://www.ugtabharat.com/2634/) - राकेश कुमार आर्यवैदिक संस्कृति संसार की सर्वोत्तम संस्कृति है। इस संस्कृति ने अहिंसा को धर्म के दस लक्षणों में जीवन को उन्नतिशील बनाने वाले दस यम नियमों में प्रमुख स्थान दिया है। इसने दुष्ट की दुष्टता के दमन के लिए मन्यु की अर्थात सात्विक क्रोध की तो कामना की है, परंतु अक्रोध को धर्म के ही दस - [इस्लाम और जीव दया-4](https://www.ugtabharat.com/2527/) - गतांक से आगे...विद्वान मौलाना ने जानवरों के प्रति इस्लाम किस तरह से सजग है और दया का भाव रखता है, इसे कुरान की आयतों से और हदीसों से समझाने का प्रयास किया है।मसअरी कहते हैं-इसलाम में जानवर को मारते समय कुछ सख्त हिदायतें दी गयीं हैं। मारते समय किस तरह और किन बातों को ध्यान - [इस्लाम साहित्य में शाकाहार-3](https://www.ugtabharat.com/2433/) - गतांक से आगे....पैगंबर साहब खलीफा और सूफी संतों के जीवन में झांककर देखते हैं तो वे शहद व दूध का बड़े पैमाने पर उपयोग करते थे और आज भी उनके अनुयायी करते हैं।पवित्र कुरान में सूरा अन्नहल में शहद के लिए कहा गया है-व ओ हया रब्बोका इलन्नहले अनित्तखेजी मिनल जिबाले बुयूतन व मिनश्शजरे व - [पंथ निरपेक्षता को दफऩ कर दिया अब्दुल्ला परिवार ने](https://www.ugtabharat.com/3037/) - जम्मू कश्मीर में शेख़ अब्दुल्ला परिवार आजकल पंथ निरपेक्षता को लेकर आग उगल रहा है। महरुम शेख़ अब्दुल्ला के सुपुत्र और केन्द्रीय मंत्री फारुख अब्दुल्ला, आगे उनके फरजन्द और जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला दोनों घाटी में हकलान हो रहे हैं और लोगों को बता रहे हैं कि केन्द्र में भाजपा की सरकार आ - [इस्लाम के नये आन्दोलन से भारत को ख़तरा](https://www.ugtabharat.com/5460/) - इराक़ में गृह युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा , ऐसी चिन्ता बहुत से शान्तिप्रेमियों को सता रही है । बहुत से विद्वान इसे इस्लाम के ही भीतर के विभिन्न सम्प्रदायों के बीच की लड़ाई बता कर दुख प्रकट कर रहे हैं । कुछ विशेषज्ञों के अनुसार सारा दोष अमेरिका का है । यदि - [अरब की प्राचीन समृद्ध वैदिक संस्कृति और भारत](https://www.ugtabharat.com/5246/) - अरब देश का भारत, भृगु के पुत्र शुक्राचार्य तथा उनके पोत्र और्व से ऐतिहासिक संबंध प्रमाणित है, यहाँ तक कि “हिस्ट्री ऑफ पर्शिया” के लेखक साइक्स का मत है कि अरब का नाम और्व के ही नाम पर पड़ा, जो विकृत होकर “अरब” हो गया। भारत के उत्तर-पश्चिम में इलावर्त था, जहाँ दैत्य और दानव - [अलाउद्दीन की सेना को भी परास्त किया था हम्मीर देव चौहान ने](https://www.ugtabharat.com/4800/) - सुल्तान ने किला यूं ही छोड़ दियासुल्तान जलालुद्दीन खिलजी के विषय में हमें अधिक जानकारी समकालीन इतिहास लेखक जियाउद्दीन बर्नी की पुस्तक ‘तारीखे फिरोजशाही’ से मिलती है। बरनी ने रणथंभौर पर सुल्तान की चढ़ाई का बड़ा रोचक वर्णन किया है । वह लिखता है कि जब सुल्तान ने रणथंभौर पर चढ़ाई की तो वहाँ का - [आतंकवाद को लेकर अनिर्णय में फंसा विश्व समुदाय](https://www.ugtabharat.com/6320/) - पेरिस में एक ‘शार्ली अब्दो’ पत्रिका के कार्यालय में आतंकियों ने जिस प्रकार प्रैस की स्वतंत्रता पर आक्रमण कर अपनी क्रूरता का नंगा नाच किया है, उससे विश्व समाज पुन: कुछ सोचने पर बाध्य हो गया है। विगत 7 जनवरी को घटी इस घटना पर बहुत कुछ लिखा जा चुका है। भावनात्मक बातें भी हो - [अकबर की सच्‍चाई भारतीय इतिहास के आइने में](https://www.ugtabharat.com/6139/) - यह विडंबना ही है कि विश्व को ज्ञान देने वाले भारत को ही दुनिया का सबसे झूठा इतिहास पढ़ाया जा रहा है। महाराणा प्रताप और भगत सिंह को आतंकी तो विश्व के सबसे क्रूर और अतातई में से एक अकबर की महानता के गीत गए जा रहे है। भारत की इतिहास की किताबों में अकबर - [आईएस ने दक्षिण एशिया में भी अपनी दस्तक दे दी है](https://www.ugtabharat.com/5712/) - -तनवीर जाफ़री-इराक़ तथा सीरिया के बड़े हिस्से पर अपना नियंत्रण करने के बाद इस्लाम के नाम पर संचालित होने वाले आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने संभवत: दक्षिण एशिया में भी अपनी दस्तक दे दी है। बावजूद इसके कि इराक व सीरिया में आईएस हमलावरों को अमेरिकी गठबंधन सेना के साथ-साथ आईएस विरोधी कुर्द,शिया तथा - [धर्मवीर ‘हकीकत राय’ का बलिदान](https://www.ugtabharat.com/5607/) - संकरा प्रसाद अवस्थी‘‘गायन्ति देवा: किल गीतकानी धन्यास्तुते भारत भूमिभागे’’ ऐसा हमारा भारतवर्ष देश, जिसके बारे में देवों ने भी भूरि-भूरि प्रशंसा की है और ऐसी कामना की है कि यह भारतभूमि धन्य है और हमारा जन्म बारंबार केवल ऐसी भारत भूमि में ही हो। इस देश की सौंधी मिट्टी में ऐसी उर्वरा शक्ति है कि - [योग और वेदों के प्रकाण्ड विद्वान थे योगीपुरूष श्रीकृष्ण](https://www.ugtabharat.com/4760/) - एक मुस्लिम महिला ने लिखा कि हिन्दू बनकर मंदिर में क्या घंटा बजाओगी। हिन्दुओं के भगवान श्रीकृष्ण तो नशेडी औरतबाज थे, रासलीला रचाते थे और फिर क्यों तुम काफिर हो गई। इस प्रश्न का जवाब है कि तुम किस भ्रम में हो? यकीनन मेरे कान्हा तो योगी और वेदों के प्रकांड विद्वान और एक पत्नीव्रता - [क्या यीशु मसीह एक हिन्दू संत थे?](https://www.ugtabharat.com/4696/) - ईसा मसीह कश्मीर में दफऩ है, ईसा मसीह को क्रूस पर चढ़ाना, जीसस एक हिन्दू संत, जीसस और भारत, जीसस कश्मीर, इस्लामी मान्यता के अनुर्सा अल्लाह लोगों का मार्गदर्शन करने के लिए समय समय पर अपने नबी या रसूल भेजता रहता है ,और अल्लाह ने फरिश्तों के द्वारा द्वारा कुछ रसूलों को किताब भी दी - [खौफभरे लम्हों की कलमबंद स्मृतियां](https://www.ugtabharat.com/4674/) - डॉ. सुभाष रस्तोगीविभाजन निस्संदेह इस उपमहाद्वीप की सबसे बड़ी भयावह त्रासदी थी, जिसमें लगभग डेढ़ करोड़ लोग उजड़े, आठ से दस लाख लोग नृशंस कत्लोगारत का शिकार हुए। इन्सानियत इतनी शर्मसार हुई कि उसे मुंह तक छिपाने के लिए ठौर नहीं मिला। प्रत्येक धर्म, संप्रदाय, मजहब की इसमें बराबर की भागीदारी थी। भारतीय उपमहाद्वीप की - [हिन्दुओं को मिले तीन विकल्प-इस्लाम, मृत्यु, कश्मीर छोड़ो](https://www.ugtabharat.com/4329/) - कश्मीर का सुल्तान सिकंदरकश्मीर दुर्भाग्य और दुर्दिनों से जूझ रहा था। धर्म नष्ट हो रहा था, और ‘दीन’ फैलता जा रहा था। अंधेरा गहराता जा रहा था, और दूर होने का नाम नही लेता था। इसी काल में कश्मीर का सुल्तान सिकंदर बन गया। इसने अपनी उपाधि ही ‘बुतशिकन’ (मूर्ति तोडऩे वाला) की रख छोड़ी - [हमारी वैदिक इतिहास परंपरा में हिंसा निषेध और गाय](https://www.ugtabharat.com/11404/) - वेद ने मनुष्य से अन्य प्राणियों के प्रति मित्रस्य चक्षुषा समीक्षामहे-अर्थात प्रत्येक प्राणी को अपना मित्र समझो, ऐसा व्यवहार करने का निर्देश दिया है। इसलिए अपने मित्रों के बीच रहकर कोई अनपेक्षित और अवांछित प्रतियोगिता वेद ने आयोजित नही की, अपितु सबको अपने अपने मर्यादा पथ में जीवन जीने के लिए स्वतंत्र छोड़ा। एक मनुष्य - [भारत के वेदों का जब अरब में भी था भारी सम्मान](https://www.ugtabharat.com/13690/) - प्राचीन अरबी काव्य-संग्रह ‘शायर-उल्-ओकुल’ में एक महत्त्वपूर्ण कविता है। इस कविता का रचयिता ‘लबी-बिन-ए-अख़्तर-बिन-ए-तुर्फा’ है। यह मुहम्मद साहब से लगभग 2300 वर्ष पूर्व (18वीं शती ई.पू.) हुआ था । इतने लम्बे समय पूर्व भी लबी ने वेदों की अनूठी काव्यमय प्रशंसा की है तथा प्रत्येक वेद का अलग-अलग नामोच्चार किया है— ‘अया मुबारेक़ल अरज़ युशैये - [घर वापसी को रोकने के लिए बनी थी तब लीग](https://www.ugtabharat.com/14719/) - -आर्यवीर पिछले दो सप्ताह के कुछ समाचारों को क्रमबद्ध रूप से पढ़िए। निजामुद्दीन दिल्ली में तब्लीग जमात के कार्यक्रम में हज़ारों लोगों का देश और विदेश से एकत्र होना। उनमें से कई सौ का कोरोना वायरस से पीड़ित होना। उन पीड़ितों का सारे देश में फैल जाना। उनमें से अनेकों की कोरोना से मौत हो - [बलिदान दिवस पर : धर्म रक्षक एवं आर्य साहित्य के यशस्वी प्रकाशक रक्तसाक्षी महाशय राजपाल](https://www.ugtabharat.com/14828/) - ========== महाशय राजपाल प्रथम पीढ़ी के प्रमुख ऋषिभक्तों में से एक थे। वह आर्य साहित्य के प्रमुख प्रकाशक थे। उनका प्रकाशन मैसर्स सरस्वती संस्थान आर्य पुस्तकालय के नाम होता था जिसका मुख्यालय लाहौर था। उन्होंने अपने जीवन में उन्नत स्तर का आर्य साहित्य प्रकाशित कर वैदिक धर्म का प्रचार प्रसार किया। उनका जन्म अमृतसर में - [कार्ल मार्क्स और धर्म](https://www.ugtabharat.com/16981/) - 5 अप्रैल को कार्ल मार्क्स का जन्मदिन बनाया गया। अनेक कम्युनिस्ट धर्म को अफीम कह रहे थे। इस लेख से जानिए कि क्या धर्म अफीम है? नहीं। तो फिर अफीम क्या है?-डॉ विवेक आर्यकार्ल मार्क्स के वचन पढ़िए1.) Religion is the opium of the masses अर्थात रिलिजन लोगों का अफीम है !2.) The first requisite - [मुस्लिम तुष्टीकरण ,महात्मा गांधी और भारतीय राजनीति](https://www.ugtabharat.com/20604/) - डॉ विवेक आर्य 1921 में गाँधी ने अंग्रेजी कपड़ों के बहिष्कार का ऐलान किया। उन्होंने विदेशी कपड़ों की होली जलाने का निर्णय लिया। स्वामी श्रद्धानन्द को जब यह पता चला तो उन्होंने महात्मा गाँधी को तार भेजा। उसमें उन्होंने गाँधी जी से कहा कि आप विदेशी कपड़ों को जलाकर अंग्रेजों के प्रति शत्रुभाव को बढ़ावा - [बीजिंग की सड़कों पर फहराएंगे तिरंगा : श्याम सुंदर पोद्दार](https://www.ugtabharat.com/21160/) - चीन ने इस बार बह भारत पर प्रहार बहुत सोच समझ कर किया है। चीन के पास भारत के ऊपर बहुत सी बातो में उसकी भारत की तुलना मे बहुत मज़बूती है। उन्ही सभी चीन की भारत पर मज़बूती को देखते हुए चीन ने उचित समझा की भारत पर प्रहार करके वह कोरोना मामले से - [मुसलमानों में प्रचलित जाति प्रथा और बाबासाहेब अंबेडकर](https://www.ugtabharat.com/21238/) - मुसलमानों में भी जाति प्रथा है । यद्यपि हमारे भीतर कुछ ऐसा भाव बैठाया गया है जैसे जाति प्रथा केवल हिन्दू समाज में है और इस जाति प्रथा को भी ब्राह्मणों ने अपने आपको श्रेष्ठ सिद्ध करने के लिए बनाया है। मुसलमानों की जाति - प्रथा पर भी बाबासाहेब के वैसे ही स्पष्ट विचार थे - [मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिया महत्वपूर्ण निर्णय, अब शहीदों के नामों पर होंगे यूपी की सड़कों के नाम](https://www.ugtabharat.com/25044/) - उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी कार्यशैली के लिए विशेष चर्चा में बने रहते हैं। उनके कई निर्णय साहसिक और ऐतिहासिक होते हैं ।अब उन्होंने ऐसा ही एक नया निर्णय लिया है ,जिसकी लोगों में सकारात्मक चर्चा है । मुख्यमंत्री ने कई जिलों में सड़क मार्ग का नाम वहां के शहीदों के नाम पर - [मुस्लिम तुष्टीकरण, महात्मा गांधी और भारतीय राजनीति](https://www.ugtabharat.com/27276/) - डॉ विवेक आर्य 1921 में गाँधी ने अंग्रेजी कपड़ों के बहिष्कार का ऐलान किया। उन्होंने विदेशी कपड़ों की होली जलाने का निर्णय लिया। स्वामी श्रद्धानन्द को जब यह पता चला तो उन्होंने महात्मा गाँधी को तार भेजा। उसमें उन्होंने गाँधी जी से कहा कि आप विदेशी कपड़ों को जलाकर अंग्रेजों के प्रति शत्रुभाव को बढ़ावा - [इतिहास की एक दुर्घटना](https://www.ugtabharat.com/28808/) - *1920 में अचानक भारत की तमाम मस्जिदों से दो पुस्तकें वितरित की जाने लगी! एक पुस्तक का नाम था “कृष्ण तेरी गीता जलानी पड़ेगी", और दूसरी पुस्तक का नाम था "उन्नीसवीं सदी का लंपट महर्षि"! ये दोनों पुस्तकें "अनाम" थीं! इसमें किसी लेखक या प्रकाशक का नाम नहीं था, और इन दोनों पुस्तकों में - [संत कवि गंगादास जी ने जलाई थी रानी लक्ष्मीबाई की चिता](https://www.ugtabharat.com/29256/) - डॉ. जे एन शर्मा संत गंगादास के भाई के पौत्र चौधरी हरदयाल सिंह द्वारा दी गई वंशावली से ज्ञात होता है कि गंगादास के पूर्वज अमृतसर के निकट किसी स्थान से आकर ग्राम रसूलपुर में बस गए थे। डॉ. ब्रजपाल सिंह संत ने बोली के आधार पर पंजाब के माझ प्रदेश से इनका - [इतिहास की एक अविस्मरणीय दुर्घटना](https://www.ugtabharat.com/29636/) - *१९२० में अचानक भारत की तमाम मस्जिदों से दो पुस्तकें वितरित की जाने लगी! एक पुस्तक का नाम था “कृष्ण तेरी गीता जलानी पड़ेगी", और दूसरी पुस्तक का नाम था "उन्नीसवीं सदी का लंपट महर्षि"! ये दोनों पुस्तकें "अनाम" थीं! इसमें किसी लेखक या प्रकाशक का नाम नहीं था, और इन दोनों पुस्तकों में - [प्राचीन काल में अरब वालों का धर्म क्या था?](https://www.ugtabharat.com/29692/) - येरुश्लम ( ईज़राईल ) जिसको अरबी में "बैत् अल मुकद्दस" यानी कि पवित्र स्थान बोला जाता है । ईसाई, यहूदी और मुसलमान इसे पवित्र स्थान मानते हैं । जिसमें एक ८ लाख दिनार का एक पुस्तकालय है जो कि तुर्की के गवर्नर ने सुल्तान अब्दुल हमीद के नाम पर बनवाया था । # इस - [मजहब ही तो सिखाता है आपस में बैर रखना, अध्याय - 2](https://www.ugtabharat.com/32556/) - अल्लाह के इस्लाम और मुल्ला के इस्लाम के बीच जब यह गुप्त समझौता हुआ तो उसके पश्चात इन गुंडों में से जो बादशाह ,सुल्तान या सेनापति बने उन्होंने संसार में कत्लेआम का ऐसा इतिहास लिखा जो केवल और केवल मजहबी जुनून, मजहबी उन्माद और कट्टर सांप्रदायिकता का वह इतिहास है जिसमें सर्वत्र मानवता की लाश - [धर्म विहीन नहीं मजहब विहीन कहिए](https://www.ugtabharat.com/33631/) - डॉ विवेक आर्य तमिलनाडु में एक स्नेहा नामक महिला ने स्थानीय सचिवालय से अपने निजी "No Caste No Religion" अर्थात" जाती विहीन और धर्म विहीन" लिखा हुआ प्रमाण पत्र प्राप्त किया है। इस प्रमाण पत्र के लिए उक्त महिला ने 9 वर्षों तक प्रतीक्षा की हैं। उक्त महिला का कहना है कि यह जाति विहीन - [महात्मा गांधी और बाल्मीकि मंदिर की घटना](https://www.ugtabharat.com/34633/) - #डॉविवेकआर्य घटना 2 मई, 1947 की है। दिल्ली के वाल्मीकि मंदिर में प्रार्थना करने के लिए उपस्थित हुए महात्मा गाँधी ने क़ुरान की कुछ आयतों का पाठ किया। इस पर प्रस्तुत सज्जन ने आक्षेप किया तो उसे पुलिस ने पकड़ लिया। गाँधी जी ने प्रार्थना बंद कर दी और अपने भाषण में कहा कि ऐसी - [महात्मा गांधी, इस्लाम और आर्य समाज, भाग- 1](https://www.ugtabharat.com/34974/) - #डॉविवेकआर्य Mahatma and Islam - Faith and Freedom: Gandhi in History के नाम से मुशीरुल हसन नामक लेखक की नई पुस्तक प्रकाशित हुई हैं जिसमें लेखक ने इस्लाम के सम्बन्ध में महात्मा गाँधी के विचार प्रकट किये हैं। इस पुस्तक के प्रकाश में आने से महात्मा गाँधी जी के आर्यसमाज से जुड़े हुए पुराने - [आर्य समाज और महात्मा गांधी , भाग 2](https://www.ugtabharat.com/35064/) - लेखक- पं० चमूपति जी, प्रस्तोता- प्रियांशु सेठ, #डॉविवेकआर्य •अनजाने में मिथ्याकथन महात्मा कहते हैं ऋषि ने अनजाने में मिथ्या कथन किया है। 'अनजाने में मिथ्या कथन' से महात्मा का तात्पर्य क्या है? क्या ऋषि ने इन मत मतान्तरों का भाव अशुद्ध समझा? यह सम्भव है! अन्ततोगत्वा ऋषि भी मनुष्य थे। दूसरा यह कि समझा - [सत्य पथ के बलिदानी महाशय राजपाल](https://www.ugtabharat.com/35702/) - 6 अप्रैल/बलिदान-दिवस पूरे संसार को ‘दारुल इस्लाम’ बनाने का दुःस्वप्न देखने वाले कट्टरपंथी प्रायः अन्य धर्मावलंबियों की भावनाओं का अनादर कर अपनी संकीर्णता का परिचय देते रहते हैं। 1920 में लाहौर में कुछ मुसलमानों ने दो पुस्तकें प्रकाशित कीं। ‘कृष्ण तेरी गीता जलानी पड़ेगी’ में श्रीकृष्ण को चरित्रहीन बताते हुए उन पर भद्दी टिप्पणियां - [महाशय राजपाल और इतिहास की एक अविस्मरणीय दुर्घटना](https://www.ugtabharat.com/37288/) - इतिहास की एक अविस्मरणीय दुर्घटना: १९२० में अचानक भारत की तमाम मस्जिदों से दो पुस्तकें वितरित की जाने लगी! एक पुस्तक का नाम था “कृष्ण तेरी गीता जलानी पड़ेगी", और दूसरी पुस्तक का नाम था "उन्नीसवीं सदी का लंपट महर्षि"! ये दोनों पुस्तकें "अनाम" थीं! इसमें किसी लेखक या प्रकाशक का नाम नहीं था, और - [जाकिर नाईक की आर्य समाज द्वारा पोल खोल](https://www.ugtabharat.com/39774/) - #डॉविवेकआर्य विषय-वेद और क़ुरान में से ईश्वरीय ज्ञान कौन सा हैं? डॉ ज़ाकिर नाईक ने अपने वीडियो में केवल क़ुरान को सभी के मानने के लायक धार्मिक पुस्तक बताता है। उसके अनुसार प्रत्येक काल में अल्लाह की ओर से धार्मिक पुस्तकें तौरेत, जबूर, इंजील एवं अंत में क़ुरान अवतरित करी गई। क़ुरान अंतिम एवं - [पंजाब का हिंदी रक्षा आंदोलन : गुरुकुल झज्जर का महातप](https://www.ugtabharat.com/40517/) - लेखक :- डॉ रघुवीर वेदालंकार श्री विरजानंद देैवकरणि जी प्रस्तुति :- अमित सिवाहा आचार्य भगवान्देव जी आर्यप्रतिनिधि सभा पंजाब के उपप्रधान एवं कार्यकर्ता प्रधान भी थे। ऐसी परिस्थिति में हिन्दी आन्दोलन को हरयाणा से चलाने का उत्तरदायित्व भी इन्हीं पर आ गया। इसी कार्य में तीव्रता लाने के लिए २८ जुलाई १८५७ को रोहतक - [कुरान की 26 आयतें और सत्यार्थ प्रकाश का 14 वां समुल्लास](https://www.ugtabharat.com/40690/) - पढ़ लो हिन्दुओं " भाईचारे का भूत", और " सेकुलरिज्म का नशा" उतर जाएगा 【संग्रह करने योग्य पोस्ट】 1- Verse 9 Surah 5 فَاِذَاانْسَلَخَالۡاَشۡهُرُالۡحرِكِيۡنَحَيۡثُوَجَدْتُّمُوۡهُمۡوَخُذُوۡهُمۡوَاحۡصُرُوۡهُمۡوَاقۡعُدُوۡالَهُمۡكُلَّمَرۡصَدٍ​ ۚفَاِنۡتَابُوۡاوَاَقَامُواالصَّلٰوةَوَاٰتَوُاالزَّكٰوةَفَخَلُّوۡاسَبِيۡلَهُمۡ​ ؕاِنَّاللّٰهَغَفُوۡرٌرَّحِيۡمٌ मतलब: फिर, जब हराम (प्रतिष्ठित) महीने बीत जाएं तो मुशरिकों को जहां कहीं पाओ क़त्ल करो, उन्हें पकड़ो और उन्हें घेरो और हर घात की जगह उनकी ताक में - [धर्म और मत/ मज़हब में अंतर क्या हैं?](https://www.ugtabharat.com/42094/) - #डॉविवेकआर्य नास्तिकों के एक समूह में नीचे दिया गया चित्र दर्शाया गया। इस चित्र में दर्शया गया कि इस्लाम, ईसाई,बुद्ध, जैन आदि धर्मों के जन्मदाता तो ज्ञात हैं। मगर हिन्दू धर्म के जन्मदाता का नाम बताये। इस पोस्ट का मुख्य उद्देश्य हिन्दू समाज का उपहास करना था। क्यूंकि साधारण हिन्दू युवक इस पोस्ट से - [गांधी जन्मजात हिन्दू विरोधी थे *](https://www.ugtabharat.com/43984/) - इतिहास की एक अविस्मरणीय दुर्घटना: मोहनदास करमचंद गांधी को समझने के लिए ये छोटा सा आर्टिकल बहुत है। गांधी जन्मजात हिन्दू विरोधी थे । १९२० में अचानक भारत की तमाम मस्जिदों से दो पुस्तकें वितरित की जाने लगी! एक पुस्तक का नाम था “कृष्ण तेरी गीता जलानी पड़ेगी", और दूसरी पुस्तक का नाम था "उन्नीसवीं - [भगत छनकू राम-धर्मरक्षा के लिए प्राण न्योछावर करने वाली महान आत्मा](https://www.ugtabharat.com/45431/) - #डॉविवेकआर्य यह घटना उनीसवीं सदी के शुरुआत में बहावलपुर (आज के पाकिस्तान में) की मुसलमानी रियासत की है। छनकू नाम का एक दुकानदार इस रियासत में था जो श्री राम जी का अनन्य भक्त था। एक बार कुछ जिहादियों ने इसकी दुकान से कुछ सामान माँगा और इसके तौलने पर तौल कम बताकर छनकू को - [भारत में मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति और महात्मा गांधी](https://www.ugtabharat.com/45809/) - #डॉविवेकआर्य 1921 में गाँधी ने अंग्रेजी कपड़ों के बहिष्कार का ऐलान किया। उन्होंने विदेशी कपड़ों की होली जलाने का निर्णय लिया। स्वामी श्रद्धानन्द को जब यह पता चला तो उन्होंने महात्मा गाँधी को तार भेजा। उसमें उन्होंने गाँधी जी से कहा कि आप विदेशी कपड़ों को जलाकर अंग्रेजों के प्रति शत्रुभाव को बढ़ावा न दे। - [50 हजार हिन्दी सत्याग्रहियों को कोटी कोटी नमन हरियाणे को बनाने वाला आर्यसमाज है ---------](https://www.ugtabharat.com/46040/) - हरियाणा दिवस की हार्दिक बधाई (हिंदी रक्षा आंदोलन ओर स्वामी ओमानंद सरस्वती) ..................... (1957) हरियाणा निर्माता स्वामी ओमानंद जी महाराज को शत शत नमन आचार्य जी का जीवन यौवनकाल से ही संघर्षपूर्ण रहा है । वैसे तो आज के युग में गुरुकुलों का संचालन और वह भी आर्ष पाठविधि से, अपने आप में समय और - [इन महिलाओं की रही थी भारतीय संविधान बनाने में महत्वपूर्ण भागीदारी](https://www.ugtabharat.com/46540/) - स्वाति सिंह भारत में 26 नवंबर 1949 को निर्वाचित संविधान सभा द्वारा भारतीय संविधान अपनाया गया था और 26 जनवरी 1950 को इसे लागू किया गया था। संविधान सभा में कुल 389 सदस्य थे। लेकिन अब इसे संयोग कहें या दुर्भाग्य कि संविधान निर्माण के संदर्भ में हमें केवल अग्रणी पुरुष सदस्यों के रूप में - [संगठन के मामले में हिंदू समाज का कोई जवाब नहीं](https://www.ugtabharat.com/46594/) - प्रो. रामेश्वर मिश्र पंकज संसार के सभी समाजों के संगठन के जो आधार होते हैं, वे सर्वविदित हैं। सर्वप्रथम तो यह आधार समान पूर्वजों के वंशज होने की स्मृति और अनुभूति के रूप में होता है। जब तक की स्मृति संभव है और विश्व में जो भी मानवीय इतिहास के विषय में स्मृतियाँ हैं, तब - [गजवा ए हिंद की इस सच्चाई की आपको भी होनी चाहिए जानकारी](https://www.ugtabharat.com/48631/) - अनुराग शुक्ला खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक पुलवामा हमले से करीब एक साल पहले हुई जैश-ए-मोहम्मद की बैठक में भारत के खिलाफ गजवा-ए-हिंद जारी रखने का फैसला किया गया था पुलवामा हमले के बाद चरम पर पहुंचा भारत-पाकिस्तान तनाव विंग कमांडर अभिनंदन की रिहाई के बाद से घटता लग रहा है. लेकिन यह बात अभी भी - [वीर बालक हकीकत रायः सिर कटवा दिया मगर इस्लाम स्वीकार नहीं किया](https://www.ugtabharat.com/51612/) - मृत्युंजय दीक्षित वीर बालक हकीकत राय के बलिदान दिवस (वसंत पंचमी)पर विशेष- भारत की महान धरती ने एक से बढ़कर एक वीर सपूतों को जन्म दिया है जिन्होंने अपनी मातृभूमि व हिंदू धर्म की रक्षा के लिये प्राणों की आहुति देने में भी रंचमात्र चिंता नहीं की । इनमें सपोतों में कुछ ऐसे भी हैं - [क्या झूठी गवाही देना अपराध नहीं है ?](https://www.ugtabharat.com/53487/) - (हमें पूरा विश्ववास है कि इस लेख को पढ़ कर कुछ मुस्लिम पाठक संदेह करेंगे , इसलिए हम पहले उनसे यह सवाल करते हैं ,कुरान में 25 रसूलों का वर्णन है , मुस्लिम सभी पर ईमान रखते है , लेकिन क्या कारण है कि अजान में सिर्फ मुहम्मद के रसूल होने की गवाही दी जाती - [आर्यसमाज और महात्मा गांधी -- भाग 2](https://www.ugtabharat.com/53809/) - लेखक- पं० चमूपति जी, प्रस्तोता- प्रियांशु सेठ, #डॉ_विवेक_आर्य •अनजाने में मिथ्याकथन महात्मा कहते हैं ऋषि ने अनजाने में मिथ्या कथन किया है। 'अनजाने में मिथ्या कथन' से महात्मा का तात्पर्य क्या है? क्या ऋषि ने इन मत मतान्तरों का भाव अशुद्ध समझा? यह सम्भव है! अन्ततोगत्वा ऋषि भी मनुष्य थे। दूसरा यह कि समझा तो - [अकबर महान या महाधूर्त ?](https://www.ugtabharat.com/54642/) - सेकुलर रोग से ग्रस्त कुछ वामपंथी और कांग्रेसी विचार रखने वाले इतिहासकारों ने हुमायूँ के बेटे मुग़ल बादशाह अकबर को एक धर्मनिरपेक्ष और हिन्दू मुस्लिम एकता और भाईचारे का प्रतीक बता दिया है , और उसे "अकबर आजम -اكبرِ اعظم " ( akabar the greate ) की उपाधि दे डाली है ,लेकिन अकबर न तो - [प्राचीन अरब का समाज और भारत के वेद](https://www.ugtabharat.com/55854/) - प्राचीन अरबी काव्य-संग्रह ‘शायर-उल्-ओकुल’ में एक महत्त्वपूर्ण कविता है। इस कविता का रचयिता ‘लबी-बिन-ए-अख़्तर-बिन-ए-तुर्फा’ है। यह मुहम्मद साहब से लगभग 2300 वर्ष पूर्व (18वीं शती ई.पू.) हुआ था । इतने लम्बे समय पूर्व भी लबी ने वेदों की अनूठी काव्यमय प्रशंसा की है तथा प्रत्येक वेद का अलग-अलग नामोच्चार किया है— ‘अया मुबारेक़ल अरज़ युशैये - [प्राचीन अरब का समाज और भारत के वेद](https://www.ugtabharat.com/56585/) - प्राचीन अरबी काव्य-संग्रह ‘शायर-उल्-ओकुल’ में एक महत्त्वपूर्ण कविता है। इस कविता का रचयिता ‘लबी-बिन-ए-अख़्तर-बिन-ए-तुर्फा’ है। यह मुहम्मद साहब से लगभग 2300 वर्ष पूर्व (18वीं शती ई.पू.) हुआ था । इतने लम्बे समय पूर्व भी लबी ने वेदों की अनूठी काव्यमय प्रशंसा की है तथा प्रत्येक वेद का अलग-अलग नामोच्चार किया है— ‘अया मुबारेक़ल अरज़ युशैये - [कार्ल मार्क्स की शैतानियां और मार्क्सवाद](https://www.ugtabharat.com/56808/) - उगता भारत ब्यूरो (5 अप्रैल को कार्लमार्क्स का जन्मदिन कम्युनिस्टों ने महान कहकर बनाया। कम्युनिस्टों की एक खास पहचान हैं। ये खुद भी अँधेरे में रहते है और अन्यों को भी अँधेरे में रखते हैं। मार्क्स के जीवन के अज्ञात कर्मों को इस लेख के माध्यम से पढ़कर सोचिये क्या कार्लमार्क्स वाकई में महान था?) - [गांधी जी का मुस्लिम तुष्टिकरण और आज का हिंदू समाज](https://www.ugtabharat.com/56812/) - डॉ. विवेक आर्य 1921 में गाँधी ने अंग्रेजी कपड़ों के बहिष्कार का ऐलान किया। उन्होंने विदेशी कपड़ों की होली जलाने का निर्णय लिया। स्वामी श्रद्धानन्द को जब यह पता चला तो उन्होंने महात्मा गाँधी को तार भेजा। उसमें उन्होंने गाँधी जी से कहा कि आप विदेशी कपड़ों को जलाकर अंग्रेजों के प्रति शत्रुभाव को बढ़ावा - [रतन लाल जैसे कालनेमि शिक्षकों की सघन जांच आवश्यक है - दिव्य अग्रवाल](https://www.ugtabharat.com/57478/) - दिल्ली विश्वविद्यालय में पूरे देश के विद्यार्थी शिक्षा लेने आते है परन्तु इस विश्वविद्यालय के अनेकों शिक्षा केंद्रों में बहुत से अध्यापक ऐसे हैं जो समाज के लिए कालनेमि रूपी दानव की भूमिका निभा रहे हैं । हिन्दू कालेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत रतन लाल ने ज्ञानवापी शिवलिंग पर अभद्र टिप्पणी करते - [ज्ञानवापी मस्जिद का सच और अनवर शेख](https://www.ugtabharat.com/57516/) - ज्ञानवापी मस्जिद में मिले शिवलिंग के पश्चात अब यह बात स्पष्ट हो गई है कि मध्यकाल में तुर्क और मुगल शासक भारत की संस्कृति और धर्म स्थलों को मिटाकर या अपवित्र करके भारत में सर्वत्र इस्लाम का परचम लहराने की योजना पर कार्य करते रहे थे ।अभी तक जो लोग इस बात को लेकर बार-बार - [वैदिक सम्पत्ति तृतीय - खण्ड अध्याय -मुसलमान और आर्यशास्त्र](https://www.ugtabharat.com/57614/) - गतांक से आगे... इसके आगे मुसलमानी धर्म में सब को लाने के लिए लिखा है कि- चीला छोड़ो न दीन का धांचा मत खाव, सुनो बटाऊ बाबरे मत भूल न जाव। सांचा दीन रसूल का सो तमे सही करिजाणों, जो कोई आवे दीन में उनको दीन में आणों।। अर्थात् हे मुसाफिर! सुन। भूलना नहीं, धोखा - [महात्मा गाँधी इतिहास के आईने में](https://www.ugtabharat.com/58847/) - #डॉ_विवेक_आर्य 1920 के आरम्भ की बात है। महात्मा गाँधी ने देश के आज़ादी की लड़ाई के साथ मुसलमानों के खिलाफत आंदोलन को नत्थी कर दिया। यह मुसलमानों का निजी मामला था। गाँधी जी यह सोचते थे कि इससे भारतीय मुसलमान भारतीय स्वाधीनता संग्राम में भाग लेने लगेंगे। स्वामी श्रद्धानन्द भी उसी काल में राष्ट्रीय राजनीती - [योग, इस्लाम एवं मालदीव](https://www.ugtabharat.com/59521/) - डॉ. विवेक आर्य 21 जून को योग दिवस के अवसर पर मालदीव में योग करने का कट्टरपंथी मुस्लिम संगठनों ने यह कहकर विरोध किया है कि इस्लाम में केवल एक अल्लाह की इबादत करने का आदेश है, जबकि हिन्दू समाज में तो सूर्य, पेड़, जल, नदी, पर्वत आदि सभी की पूजा का विधान हैं। इसलिए - [ऐसे लोग नहीं होते सभ्य समाज में रहने योग्य](https://www.ugtabharat.com/60127/) - सिद्धार्थ ताबिश आपको शायद याद होगा कि पाकिस्तान में मशहूर कव्वाल साबरी ब्रदर्स वाले अमजद साबरी को 2016 में ईशनिंदा के जुर्म में गोलियों से भून दिया था.. उनका गुनाह ये था कि उन्होंने एक शादी में एक कव्वाली गायी थी जिसमें दूल्हे और दुल्हन की तुलना पैगंबर के दामाद अली और बेटी फातिमा से - [अखिलेश कुमार आर्य का हृदय गति रुकने से हुआ निधन](https://www.ugtabharat.com/61274/) - बदायूं। जीवन के पीछे मौत एक शिकारी की तरह लगी होती है। यह शिकारी कब झपट्टा मार ले और कब हमारे जीवन का अंत हो जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। किसी किसी कवि ने बड़ा सुंदर लिखा है :- कफन बढ़ा तो किस लिए नजर तू डबडबा गई, श्रंगार क्यों सहम गया बाहर क्यों - [वैदिक धर्म की सार्वभौमिकता](https://www.ugtabharat.com/61797/) - वैदिक धर्म की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि या विश्व का प्रथम धर्म होने के साथ केवल मनुष्यों की नहीं बल्कि प्राणी मात्र के कल्याण कामना चाहता है , वेद और गीता इस बात की पुष्टि करते है , उदहारण के लिए , शं नो अस्तु द्विपदे शं चतुष्पदे " यजुर्वेद 36:8 दो पैर - [नेहरू काल में हुई थी 30 किताबें प्रतिबंधित जबकि मोदी काल में हुई हैं अब तक पांच](https://www.ugtabharat.com/66664/) - उगता भारत ब्यूरो कांग्रेस सरकारों ने 30 किताबों को रोका…भाजपा ने 5 पर लगाया बैन । किताबें आपकी सच्ची दोस्त और गाइड होती हैं…मगर जरूरी नहीं कि वो जो रास्ता आपको दिखाना चाहती हों, आपकी सरकार उससे सहमत हो। दुनिया भर में अलग-अलग देशों में आज तक हजारों किताबें बैन हो चुकी हैं। किसी किताब - [क्या यीशु / जीसस ही एक मात्र उद्धारक है?](https://www.ugtabharat.com/69816/) - ईसाई लोगों की दृढ़ व प्रमुख मान्यता है कि मुक्ति केवल यीशु के माध्यम से ही मिल सकती है और ईसाई धर्मांतरण भी ठीक इसी बात पर आधारित है कि यीशु में विश्वास से सभी पाप धूल जाते है और हमेशा के लिए मुक्ति (salvation) मिल जाती है। इसलिए हिंदुओ व अन्य लोगों, जिसका धर्मांतरण - [अरब के महान कवि द्वारा वेदों का गुणगान](https://www.ugtabharat.com/70131/) - (Admiration of VEDAS, by Great Arabic poet Labee, 3745 years ago, in Arabic poem, is as follows:) हजरत मोहम्मद साहब का जन्म सोमवार 5 अप्रैल 571 ईस्वी (आज से 1445 वर्ष पूर्व) को, सऊदी अरब के मक्का में हुआ था. मोहम्मद के जन्म से 2300 वर्ष पूर्व अर्थात् आज से 3745 वर्ष पूर्व (=1700 BCE) - [स्वामी दयानंद किसी की निंदा या आलोचना नहीं अपितु सत्य का मंडन और असत्य का खंडन करते थे](https://www.ugtabharat.com/70357/) - स्वामी दयानंद जी महाराज द्वारा रचित अमर ग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाश का सबसे अधिक प्रचार आर्यसमाज से सम्बन्ध रखने वाले सदस्यों की अपेक्षा आर्यसमाज से सम्बन्ध न रखने वाले जनमानस ने अधिक किया हैं चाहे वह सनातन धर्म,सिख ,कबीर पंथी,जैन, बौद्ध,सिख, ईसाई, इस्लाम आदि किसी भी मत से क्यूँ न सम्बंधित हो। सत्यार्थ प्रकाश के खंडन - [मोहन भागवत का बयान और भारत में जातिवाद](https://www.ugtabharat.com/72175/) - शुद्र को लेकर हमारे देश में अक्सर चर्चा होती रहती है और उनकी दयनीय स्थिति के लिए मनु महाराज को दोषी बताया जाता रहता है। मनु को जातिवाद का जनक भी कहा जाता है। जबकि सच यह नहीं है मनु वर्ण व्यवस्था के समर्थक है। यह वर्ण व्यवस्था पूरे संसार में आज भी ज्यों की - [एनटीपीसी दादरी में सीएसआर द्वारा स्कूल की बालिकाओं को साइकिल वितरित](https://www.ugtabharat.com/74865/) - दादरी। भारत सरकार द्वारा संचालित बालिका सशक्तिकरण अभियान के अंतर्गत एनटीपीसी दादरी द्वारा सीएसआर के माध्यम से अपने समीपवर्ती शासकीय विद्यालयों की कक्षा 8 पास बालिकाओं के बीच साइकिल वितरण टाउनशिप स्थित कम्युनिटी सेंटर में आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित बेसिक शिक्षा अधिकारी गौतम बुध नगर श्रीमती ऐश्वर्या - [श्री कृष्ण एक कर्म योगी थे जो एक वैदिक विद्वान थे](https://www.ugtabharat.com/77049/) - अर्थात वेद की 16000 कुछ ऋचाओं के ज्ञाता थे। जिन्हें वास्तविक जानकारी नहीं होती है । इन्हीं 16000 ऋचाओं में श्री कृष्ण जी रमण करते रहते थे ,जिनका मनन करते रहते थे ,जिनमें विचार मग्न रहते थे ,उन्हीं को 16000 गोपिकाऐं कह देते हैं जो श्री कृष्ण जी के चरित्र हनन की सबसे गलत बात - [आर्य समाज के महान लेखक-पंडित चमूपति](https://www.ugtabharat.com/78167/) - (15 जून को महाकवि पंडित चमूपति का स्वर्गवास हुआ था) पं॰चमूपति ने प्रथम विश्वयुद्ध के आरम्भ में आर्यसमाज में प्रवेश पाया। अधिक उपयुक्त तो यह होगा कि हम यह कहें कि आर्यसमाज उनमेँ प्रविष्ट हुआ। बहुत छोटी आयु में ही काव्य कला उनमेँ प्रस्फुटित हो गई। 22-24 वर्ष की आयु तक पहुँचते-पहुँचते वे देश के - [वीर हकीकत के बलिदान की प्रासांगिकता" पर गोष्ठी संपन्न* *देश धर्म के बलिदानी अमर रहते हैं -आचार्या श्रुति सेतिया*](https://www.ugtabharat.com/89746/) - गाजियाबाद,सोमवार 5 फरवरी 2024, केन्द्रीय आर्य युवक परिषद् के तत्वावधान में 'वीर हकीकत के बलिदान की प्रासांगिकता " विषय पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया।य़ह कोरोना काल से 615 वां वेबिनार था। वैदिक विदुषी आचार्या श्रुति सेतिया ने कहा कि यूं तो सभी लोग इस नश्वर जगत में पैदा होते हैं,जीते हैं और अंत - [आर्य समाज के सुप्रसिद्ध विद्वान पंडित चमूपति जी](https://www.ugtabharat.com/89964/) - पंडित चमूपति आर्यसमाज के प्रसिद्ध विद्वान और प्रचारक थे। आप हिन्दी, संस्कृत, अंग्रेजी, उर्दू, अरबी व फारसी आदि अनेक भाषाओं के विद्वान थे। आप अच्छे कवि एवं लेखक भी थे। आपने कई भाषाओं में अनेक प्रसिद्ध ग्रन्थों की रचना की है। उन्होने गुरुकुल में अध्यापन भी किया और आर्य प्रतिनिधि सभा पंजाब के उपदेशक व - [उत्तर प्रदेश में मुस्लिमों आक्रान्ताओं द्वारा परिवर्तित किए गए धर्म स्थल](https://www.ugtabharat.com/91138/) - डा. राधेश्याम द्विवेदी (यह सूची एक विद्धान श्री सीताराम गोयल की एक प्रारम्भिक रिपोर्ट “LIST OF MOSQUES IN VARIOUS STATES WHICH WERE BUILT AFTER DEMOLISHING THE HINDU TEMPLES” BY Sita Ram Goel / https:skanda 987 .files .wordpress.com के आधार पर तैयार की गयी है। ) इस सूची में उन स्थलों के नाम का उल्लेख किया - [भेदभाव और सुविधाओं की कमी से प्रभावित बालिका शिक्षा यशोदा गुर्जर](https://www.ugtabharat.com/93062/) - अजमेर, राजस्थान हाल ही में राजस्थान के शिक्षा मंत्री ने राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित स्कूलों के विकास से संबंधित कई अहम निर्देश दिया है. उन्होंने स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में लागू होने वाले नवाचारों और नई तकनीकों पर आधारित गतिविधियों से राज्य के ग्रामीण विद्यालयों को जोड़ने में प्राथमिकता पर ज़ोर दिया है - [महात्मा गाँधी, इस्लाम और आर्यसमाज भाग 1](https://www.ugtabharat.com/93159/) - #डॉविवेकआर्य Mahatma and Islam - Faith and Freedom: Gandhi in History के नाम से मुशीरुल हसन नामक लेखक की नई पुस्तक प्रकाशित हुई हैं जिसमें लेखक ने इस्लाम के सम्बन्ध में महात्मा गाँधी के विचार प्रकट किये हैं। इस पुस्तक के प्रकाश में आने से महात्मा गाँधी जी के आर्यसमाज से जुड़े हुए पुराने प्रसंग - [स्वामी दयानन्द और सर सैयद का कुरआन भाष्य](https://www.ugtabharat.com/94437/) - मित्रो ऋषि दयानन्द जहां सत्य प्रियता और निर्भय स्पष्ट वक्तृता के मूर्त अवतार थे, वहां नीति और शिष्टाचार के भी अद्वितीय धनी थे। चांदापुर वह पहली रणस्थली जहां ऋषि का सामना ईसाई पादरियोँ और मुस्लिम मौलवियोँ से एक साथ हुआ। आर्यधर्म ने अपने तर्कास्त्र से सामी (Semitic) मजहबो की पोलपट्टी खोल कर रख दी। पादरी - [योजनाओं से जुड़ता गांव](https://www.ugtabharat.com/96663/) - पूनम अजमेर, राजस्थान हाल ही में यह खबर आई कि राजस्थान सरकार राज्य के सभी गांवों की जानकारी को ऑनलाइन करने की तैयारी में है. इसके लिए मुख्यमंत्री ई-ग्राम परियोजना पर काम चल रहा है. इसके तहत राज्य के सभी राजस्व गांवों से जुड़े सरकारी विभागों की सूचनाएं एक पोर्टल ई-ग्राम पर मिल जाएंगी. इस - [ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की शिक्षा और सरकारी स्कूलों की स्थिति](https://www.ugtabharat.com/97031/) - बबन मिश्रा अजमेर, राजस्थान राजस्थान में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सभी सरकारी स्कूलों का जिला स्तर पर निगरानी करने का फैसला किया है. इसके लिए प्रशासन और विभागीय अधिकारियों को जिला प्रभारी नियुक्त किया गया है. जो अपने-अपने प्रभारित जिले में प्रतिमाह दो - [संगीत से औरंगजेब का अल तकिया !!!](https://www.ugtabharat.com/97175/) - अहले सुन्नत के मुताबिक संगीत हराम है। इसलिये जो कोई भी मुसलमान इसमें अतीत में शामिल रहा है या वर्तमान में है या भविष्य मेंं होगा वह सुन्नत ए रसूल के मुताबिक क्या कहलाया जायेगा ? ऐसा ही एक हरामखोर था औरंगजेब। क्योंकि उसने जहां एक तरफ संगीत को दफन किया वहीं दूसरी तरफ संगीत - [सर्वखाप पंचायत की बलिदान - गाथा](https://www.ugtabharat.com/97376/) - लेखक :- श्री पंडित जगदेव सिंह सिद्धांति इतिहास संरक्षक :- चौधरी कबूल सिंह शोरों (मुज्जफरनगर) प्रस्तुति :- अमित सिवाहा वर्तमान सृष्टि के आरम्भ काल में ही आर्यावर्त में मानव जाति ने वास कर लिया था। समयानुसार आर्यावर्त भारत नाम से विख्यात हुआ। इस प्रकार भारतीय राष्ट्र का इतिहास अति प्राचीन है। गत करोड़ वर्षों के - [स्वामी रामभद्राचार्य जी के नाम खुली चिट्ठी](https://www.ugtabharat.com/97545/) - स्वामी रामभद्राचार्य जी, कुलाधिपति जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय चित्रकूट, उत्तर प्रदेश विषय - महर्षि दयानन्द के विरुद्ध असत्य टिप्पणी करने के सन्दर्भ में। आदरणीय स्वामी जी, सादर नमस्ते। आशा है आप सकुशल होंगे। दिनांक 20 जुलाई 2024 को आपके यूट्यूब चैनल पर से एक वीडियो अपलोड हुआ है जिसका शीर्षक है -“आर्य समाज के संस्थापक - [वे पन्द्रह दिन *४ अगस्त, १९४७*](https://www.ugtabharat.com/97838/) - प्रशांत पोळ आज चार अगस्त... सोमवार. दिल्ली में वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन की दिनचर्या, रोज के मुकाबले जरा जल्दी प्रारम्भ हुई. दिल्ली का वातावरण उमस भरा था, बादल घिरे हुए थे, लेकिन बारिश नहीं हो रही थी. कुल मिलाकर पूरा वातावरण निराशाजनक और एक बेचैनी से भरा था. वास्तव में देखा जाए तो सारी जिम्मेदारियों से - [श्री कृष्ण एक कर्म योगी थे जो एक वैदिक विद्वान थे](https://www.ugtabharat.com/98771/) - कृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं। श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर विशेष आलेख की दूसरी किस्त गतांक से आगे। श्री कृष्ण एक कर्म योगी थे जो एक वैदिक विद्वान थे। चारों वेदों में लगभग 16000 ऋचाएं हैं। श्रीकृष्ण वेद की 16000 ऋचाओं के ज्ञाता थे। जिन्हें वास्तविक जानकारी नहीं होती है वे लोग अल्पज्ञता के कारण,व अविद्या के - [योजनाओं की पहुंच से दूर ग्रामीण](https://www.ugtabharat.com/98979/) - सुमन मेघवंशी अजमेर, राजस्थान "मेरे परिवार में 8 सदस्य हैं. बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के दस्तावेज़ बने हुए हैं. इसके बावजूद हमें किसी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है. कभी लाभार्थी के लिस्ट में नाम नहीं आया. पंचायत में भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है. समझ में नहीं आता है कि - [भारत की संविधान सभा में भी मौजूद थे पाकिस्तान समर्थक सदस्य](https://www.ugtabharat.com/102304/) - भारत का संविधान बनाने वाली संविधान सभा में 23 सदस्य ऐसे थे जो 1946 में पाकिस्तान बनाने के लिए मुस्लिम लीग के टिकट पर जीते थे। लेकिन जब इन्होंने पाकिस्तान बना लिया तो उसके बाद यह बड़ी होशियारी से पाकिस्तान नहीं गए और फिर नेहरू गांधी ने इनको भारत के संविधान बनाने का ही जिम्मा - [विश्व के प्रमुख अक्षरधाम मंदिर](https://www.ugtabharat.com/102518/) - आचार्य डॉ. राधेश्याम द्विवेदी हिंदू-सनातन धर्म के संस्कार और परंपराएं हिंदू या सनातन धर्म से उत्पन्नित अनेक पंथ संप्रदाय, परंपराएं, आंदोलन और संप्रदाय हिंदू धर्म के भीतर फल फूल रहे हैं। यह धर्म एक या एक से अधिक देवी-देवताओं पर केंद्रित परंपराएं और उप-परंपराएं भी रखता है। हिंदू धर्म की सभी विचारधारा या संप्रदाय वेद - [आर्य क्षत्रिय परंपरा के अमर बलिदानी वीर गोकुला जाट](https://www.ugtabharat.com/103762/) - आर्य धर्म की महान क्षत्रिय परम्परा को कौन नही जानता, एक ऐसी परम्परा जिसमें समय समय पर अनेकों शूरवीर सामने आये और कभी राष्ट्रभक्ति तो कभी धर्म के लिए अपने प्राण तक दांव पर लगा दिए। इस महान क्षत्रिय परम्परा के शौर्य और वीरता के कारण ही भारत के सामने विश्व थर थर काँपता रहा - [सामूहिक भागीदारी से आदर्श गांव का निर्माण संभव है](https://www.ugtabharat.com/103924/) - किसी भी देश के विकास की संकल्पना केवल महानगरों और औद्योगिक क्षेत्रों की संख्या से ही नहीं होती है बल्कि इसमें गांव की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है. विशेषकर ऐसा गांव जिसे आदर्श गांव की संज्ञा दी जा सके. एक आदर्श गांव वह है जहां लोगों को बुनियादी सुविधाएं, सामाजिक सद्भाव, शिक्षा और स्वास्थ्य के - [संविधान सभा की बहस से संबंधित तथ्य](https://www.ugtabharat.com/104094/) - ९ दिसंबर १९४६ को भारत के संविधान के निर्माण के लिए संविधान सभा की पहली बैठक हुई। इस सभा की अध्यक्षता डॉ सच्चिदानंद सिन्हा द्वारा की गई थी जबकि दो दिन बाद अर्थात - [आर्यावर्त पब्लिक स्कूल पल्ला में अपार उत्साह से संपन्न हुआ गणतंत्र का उत्सव](https://www.ugtabharat.com/104098/) - ग्रेटर नोएडा (विशेष संवाददाता) वैदिक संस्कारों के प्रति समर्पित यहां पर स्थित आर्यावर्त पब्लिक स्कूल ग्राम पल्ला ग्रेटर नोएडा में 76 वें गणतंत्र दिवस का राष्ट्रीय पर्व धूमधाम से विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों, संगीतमय नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से मनाया गया। कार्यक्रमों के माध्यम से बालक बालिकाओं ने भारतीय समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा की विभिन्न झांकियां प्रस्तुत - [महाभारत में प्रक्षिप्त (मिलावट) है, एकलव्य का कथानक](https://www.ugtabharat.com/104872/) - लेखक - आर्य सागर वैदिक कालीन गुण कर्म स्वभाव पर आधारित श्रेष्ठ सामाजिक वर्ण आश्रम व्यवस्था पर भारतीय वामपंथी व मूल निवासी गैंग का एक चिर परिचित विधवा विलाप 20वीं सदी से ही चल रहा है विशेष तौर पर महाभारत ग्रंथ को लेकर। तथाकथित समतावादी वामपंथी दुराग्रही ढीठ मानसिकता का परिचय भारतीय ऐतिहासिक महाकाव्य रामायण - [राष्ट्रभाषा हिन्दी और देवनागरी लिपि](https://www.ugtabharat.com/55692/) - लेखक- डॉ० भवानीलाल भारतीय प्रस्तोता- प्रियांशु सेठ, #डॉ_विवेक_आर्य सहयोगी- डॉ० ब्रजेश गौतमजी (हिन्दी राष्ट्रभाषा लेखमाला भाग 2) देश के गृहमंत्री अमित शाह जी ने हिंदी भाषा को राष्ट्रीय भाषा बनाने के लिए आग्रह किया। गृहमंत्री जी का कहना था कि हिंदी को अंग्रेजी के स्थान पर प्राथमिकता देनी चाहिए। उनके इस बयान में कुछ भी - [वृद्ध आश्रमों की कारागार में पड़े 'उग्रसेन' और आज के कंस](https://www.ugtabharat.com/105178/) - वृद्ध आश्रम की कारागार में पड़े 'उग्रसेन' और आज के कंस - [मानव जीवन का लक्ष्य क्या है ?](https://www.ugtabharat.com/105171/) - नर से नारायण बनने से अभिप्राय है जो परमपिता परमात्मा के दिव्य गुण हैं उन्हें अपने चित्त में धारण करो ताकि तुम भी प्रभु के तदरूप हो वस्तुत: मानव जीवन का लक्ष्य - [वैदिक सम्पत्ति 281 - कंपनी राज्यपाल और जातीयता](https://www.ugtabharat.com/105173/) - (ये लेखमाला हम पं. रघुनंदन शर्मा जी की 'वैदिक सम्पत्ति' नामक पुस्तक के आधार पर सुधि पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहें हैं ) प्रस्तुतिः देवेन्द्र सिंह आर्य (चेयरमैन - 'उगता भारत' ) अर्थात् मित्रो ! आओ गौवों के बड़े बड़े गोष्ठ बनाने का उद्यम करें। वह उद्यम माता के समान है। इसी से मनुष्य - [जब देवकांत बरूआ ने इन्दिरा से कहा था - आप मुझे प्रधानमंत्री बना दो..](https://www.ugtabharat.com/105168/) - डॉ राकेश कुमार आर्य बात उस समय की है जब देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के विरुद्ध इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा अपना निर्णय सुना दिया गया था। यह निर्णय 1971 में श्रीमती गांधी द्वारा रायबरेली से लड़े गए लोकसभा के चुनाव के दौरान उनके द्वारा बरती गई अनियमितताओं को लेकर सुनाया गया था। - [गुर्जर शासकों के बारे में राणा हसन अली का विवरण](https://www.ugtabharat.com/105164/) - गुर्जर शासकों के बारे में राणा हसन अली का विवरण - [महापुरुषों का आर्विभाव ऋतुराज बसन्त की तरह होता है](https://www.ugtabharat.com/105160/) - महापुरुषों का आर्विभाव ऋतुराज बसन्त की तरह होता है धरती रूप सवारती, जब आवै ऋतुराज। सौन्दर्य मौद सुगन्ध का, होता है आगाज़॥2531॥ धरती और समाज के भूषण कौन है - सज्जन भूषण लोक के धरती का है बसन्त। कायाकल्प कर देत है, नेक सलाह से संत॥2532॥ धरती बसन्त के बिना और सभा सन्त के बिना - [महर्षि दयानन्द एवं ब्रह्मचर्य](https://www.ugtabharat.com/105162/) - लेखक- ब्रह्मचारी इन्द्रदेव "मेधार्थी" (गुरुकुल झञ्जर) प्रस्तुति- प्रियांशु सेठ समय-समय पर अनेक ऐसे लोकोत्तर महापुरुष हुये हैं जिन्होंने अपनी अद्भुत प्रतिभा एवं कर्मशीलता से संसार में मानवता की स्थापना की है। और ब्रह्मचर्य को अपने जीवन में धारण के साथ साथ लोक में भी प्रचार करने का यत्न किया है। किन्तु इस विषय में जितना - [वैदिक संपत्ति - 282 कंपनी राज्यपाल और जातीयता](https://www.ugtabharat.com/105158/) - (ये लेखमाला हम पं. रघुनंदन शर्मा जी की 'वैदिक सम्पत्ति' नामक पुस्तक के आधार पर सुधि पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहें हैं ) प्रस्तुतिः देवेन्द्र सिंह आर्य (चेयरमैन 'उगता भारत') गतांक से आगे ... इसलिए न तो यह सम्पत्ति शुभ कामनावाली ही है और न इस प्रकार की राज्यप्रणाली ही उत्तम है। ऐसी राज्य-प्रणाली - [गार्गी कन्या गुरुकुल का आठ दिवसीय प्रशिक्षण शिविर हुआ संपन्न](https://www.ugtabharat.com/105152/) - इगलास। ( विशेष संवाददाता ) श्रुति सौरभ धर्मार्थ न्यास द्वारा संचालित गार्गी कन्या गुरुकुल में आठ दिवसीय आर्य वीरांगना प्रशिक्षण शिविर के समापन का शुभारंभ वेद की पावन ऋचाओं से ऐश्वर्य की प्राप्ति की कामना के साथ हुआ। प्रातः 9 बजे राष्ट्रीय प्रार्थना के साथ शिविर समापन समारोह कार्यक्रम का शुभारंभ एम एल सी मानवेंद्र - [GNIOT में आगामी 29 जून को होगी ' जातीय संघर्षों में टूटा भारतीय हिंदू समाज' विषय पर आर्य प्रतिनिधि सभा की विचार गोष्ठी](https://www.ugtabharat.com/105149/) - ग्रेटर नोएडा। (अजय कुमार आर्य) GNIOT में आगामी 29 जून को ' जातीय संघर्षों में टूटा भारतीय हिंदू समाज' विषय पर आर्य प्रतिनिधि सभा की विचार गोष्ठी की जाएगी। इस संबंध में जानकारी देते हुए आर्य प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम बुद्ध नगर के भाषा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष आर्य सागर ने बताया कि इस संबंध में - [वैदिक धर्म के लिए समर्पित व्यक्तित्व का नाम है मंसाराम आर्य](https://www.ugtabharat.com/105146/) - वैदिक धर्म के लिए समर्पित व्यक्तित्व का नाम है मंसाराम आर्य - [आर्य समाज दादरी (मेरठ) का वार्षिक सम्मेलन हुआ संपन्न](https://www.ugtabharat.com/105138/) - आर्य समाज दादरी (मेरठ) का वार्षिक सम्मेलन हुआ संपन्न - [जातिगत जनगणना और भारत की राजनीति](https://www.ugtabharat.com/105136/) - जातिगत जनगणना और भारत की राजनीति - [परिवारों से मिटता दादी मां का अस्तित्व चिंता का विषय](https://www.ugtabharat.com/105114/) - परिवारों से मिटता दादी मां का अस्तित्व चिंता का विषय "मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, आचार्य देवो भव, अतिथि देवो भव" अर्थात माता-पिता, गुरु और अतिथि का देवता के समा - [हमें मनुष्य जन्म वेदधर्म के पालन तथा मोक्ष प्राप्ति के लिए मिला है](https://www.ugtabharat.com/105111/) - संसार में बहुत कम मनुष्य ऐसे हैं जो अपने जीवन के उद्देश्य पर विचार करते हैं। यदि वह ऐसा करते हैं और उन्हें सौभाग्य से कोई सद्गुरु या सत्साहित्य प्राप्त हो जाये, तो ज्ञात होता है कि हमें हमारा यह जन्म परमात्मा ने हमारे पूर्व जन्म के कर्मों के आधार पर शुभ व अशुभ कर्मों - ["वृक्षों में जीवन", सिद्धांत के प्रतिपादक भीष्म थे](https://www.ugtabharat.com/105102/) - "वृक्षों में जीवन", सिद्धांत के प्रतिपादक भीष्म थे। - [आपरेशन सिंदूर : विजय का श्रेय, पराजय का अपयश किसको ?](https://www.ugtabharat.com/105100/) - सफल सैन्य नियंत्रित सीमित आतंक रोधी अभियान ऑपरेशन सिंदूर के रूप में आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वाॅरफेयर के मामले में भारत का लोहा पूरी दुनिया ने माना है। विशेषज्ञ बताते हैं भावी युद्ध आकाश में ही नहीं अंतरि - [हमने भेद व्योम का खोला](https://www.ugtabharat.com/105097/) - डॉ राकेश कुमार आर्य हम ही विज्ञान के नायक थे, हम वसुधा के उन्नायक थे । हम मानवता के साधक थे, हम ही विधि - विधायक थे।। हम प्राणी मात्र के चिंतक थे, संस्कृति - धर्म के रक्षक थे। हम नीति नियामक नायक थे, हम ही वसुधा के रक्षक थे।। हमने नापी सूरज की दूरी - [मैं और मेरा धर्म](https://www.ugtabharat.com/105095/) - मैं कौन हूं और मेरा धर्म क्या है? इस विषय पर विचार करने पर ज्ञात होता है कि मैं एक मुनष्य हूं और मनुष्यता ही मेरा धर्म है। विचार करें तो हम, मैं कौन हूं मेरा धर्म - [भारत - पाक तनाव और विश्व राजनीति](https://www.ugtabharat.com/105090/) - भारत - पाक तनाव बात 1962 की है जब अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जे0एफ0 कैनेडी ने भारत के प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के सामने न्यूक्लियर टेक्नो - [वैदिक संपत्ति 278 - वेदमंत्रों के उपदेश](https://www.ugtabharat.com/105085/) - वैदिक संपत्ति मनुष्य के आहारप्रकरण में लिख आये हैं कि मनुष्य की असली खूराक फल, फूल और दूध दधि है। ये पदार्थ पशुओं और फलदार दरख्तों तथा फलदार बेलों - [मन की शांति कैसे मिले](https://www.ugtabharat.com/105083/) - मन की शांति कैसे मिले - [सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल : अज्ञता का द्वार रुकना चाहिए](https://www.ugtabharat.com/105078/) - सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल : अज्ञता का द्वार रुकना चाहिए - [अमृतसर में हिन्दुओ और सिखों की लाशों से भरी ट्रैन आती थी लिखा रहता था, "ये आज़ादी का नजराना"](https://www.ugtabharat.com/105071/) - अमृतसर में हिन्दुओ और सिखों की लाशों से भरी ट्रैन आती थी लिखा रहता था, "ये आज़ादी का नजराना" - [अनेकेश्वरवाद (Polytheism) की कल्पना एक अंधविश्वास - भाग 1](https://www.ugtabharat.com/105069/) - डॉ0 डी. के. गर्ग अनेकेश्वरवाद एक ऐसा विश्वास है जिसमे हरेक धर्म मत और संप्रदाय का मानने वाला उलझा हुआ है। ईसाई जीसस को ईश्वर का पुत्र बताने के साथ साथ जीसस , मरियम और क्रॉस को पूजते है , ईश्वर स्तुति से कोई लेना देना नहीं। मुस्लिम अल्ला के साथ साथ मोहम्मद,कब्र को भी - [महाराणा प्रताप के पूर्वजों की शौर्यगाथा](https://www.ugtabharat.com/105065/) - महाराणा प्रताप के पूर्वजों की शौर्यगाथा - [अंतर समीक्षा में चूक करती भारतीय राजनीति](https://www.ugtabharat.com/105060/) - अंतर समीक्षा में चूक करती भारतीय राजनीति पहलगाम आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री श्री मोदी ने जिस प्रकार देश का नेतृत्व किया है, उससे उनके व्यक्तित्व में और चार च - ["कैयट" का कश्मीर](https://www.ugtabharat.com/105057/) - लेखक - आर्य सागर वैदिक सभ्यता की शुरुआत से ही कश्मीर विलास का नहीं विद्वता का प्रतिनिधि व संवाहक रहा है। वैदिक काल ही नहीं मध्यकाल तक भी वेद ,वेदांग ,संस्कृत, दर्शन साहित्य के एक से बढ़कर एक विद्वान कश्मीर ने दिये है। 14वी शताब्दी तक काशी नगरी की विद्या में प्रतिद्वंदी यदि कोई भूमि - [विभाजन की ओर बढ़ता पाकिस्तान ?](https://www.ugtabharat.com/105055/) - पाकिस्तान की ओर से भारत के पहलगांव में हुए आतंकी हमले के बाद आखिरकार युद्ध विराम हो गया है, लेकिन इस युद्ध विराम के बाद क्या आतंक को संरक्षण देने वाले पाकिस्तान - [... निश्चित रूप से आप आगे बढ़ेंगे](https://www.ugtabharat.com/105050/) - डॉ राकेश कुमार आर्य एक बीज को आप धरती में बोते हैं तो अनेक ढेले उसके ऊपर आ पड़ते हैं। उन ढेलों की जिद होती है कि हम तुझे बाहर नहीं निकलने देंगे। उधर बीज की प्रतिभा कहती है कि तुम चाहे जितने पहले बैठा लो, मुझे फूट कर बाहर निकलना ही है। बीज मिट्टी - [मनुष्य का आत्मा कर्म करने में स्वतन्त्र और फल भोगने में परतंत्र है](https://www.ugtabharat.com/105048/) - मनुष्य का आत्मा कर्म करने में स्वतन्त्र और फल भोगने में परतंत्र है - [इतिहास पुरुष महाराणा प्रताप का जीवन सब भारतीयों के लिये प्रेरक एवं अनुकरणीय है](https://www.ugtabharat.com/105046/) - भारत के इतिहास में गौरवपूर्ण स्थान रखने वाले इतिहास पुरुष महाराणा प्रताप का जीवन सब भारतीयों के लिये प्रेरक एवं अनुकरणीय है - [इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू - अध्याय 19](https://www.ugtabharat.com/105044/) - भारत के सम्राट और महात्मा बुद्ध नेहरू जी भारत के आर्य हिंदू शासकों को साम्राज्यवादी देखते हैं। इसलिए उनके विशाल राज्यों को वह साम्राज्य के रूप में ही प्रत्तुत - [आत्मविश्वास से भरा मोदी का भारत](https://www.ugtabharat.com/105041/) - डॉ राकेश कुमार आर्य भारत और पाकिस्तान के बीच चला अघोषित युद्ध अचानक रोक किया गया । कई लोगों को इस बात ने बहुत अधिक निराश किया है कि देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आई हुई जीत को हार में परिवर्तित करके जिस प्रकार स्वीकार किया है, उसे राष्ट्रीय दृष्टिकोण से किसी भी - [आस्तिकता और चमत्कार](https://www.ugtabharat.com/105033/) - आस्तिकता जीवन की आधारशिला है और आस्तिकता की आधारशिला है परमेश्वर की सर्वव्यापकता और न्याय व्यवस्था को जानना और मानना। अच्छी प्रकार जानकर ही मानने से कुछ लाभ हो - [आज की बचत ही कल की उन्नति की बुनियाद है](https://www.ugtabharat.com/105030/) - आज की बचत ही कल की उन्नति की बुनियाद है । - [1857 क्रांति के महानायक धन सिंह कोतवाल गुर्जर को क्रांति की बरसी के अवसर पर किया गया याद](https://www.ugtabharat.com/105021/) - 1857 क्रांति के महानायक धन सिंह कोतवाल गुर्जर को क्रांति की बरसी के अवसर पर किया गया याद - ["मनुस्मृति का व्यावहारिक और वैज्ञानिक स्वरूप" विषय पर विचार गोष्ठी हुई संपन्न](https://www.ugtabharat.com/105016/) - आर्य प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम बुद्ध नगर के तत्वावधान में यहां स्थित करण सिंह मेमोरियल पब्लिक स्कूल में मनुस्मृति का व्यावहारिक और वैज्ञानिक स्वरूप विषय पर विचार - [घोर घने वन में ......](https://www.ugtabharat.com/105014/) - एक बार विदुर जी संसार भ्रमण करके धृतराष्ट्र के पास पहुँचे तो धृतराष्ट्र ने कहा, "विदुर जी ! सारा संसार घूमकर आये हो आप, कहिये कहाँ-कहाँ पर क्या देखा आपने ?" विदुर जी बोले, "राजन् ! कितने आश्चर्य की बात देखी है मैंने। सारा संसार लोभ शृंखलाओं में फँस गया है। काम, क्रोध, लोभ, भय - [स्वतंत्रता सेनानी स्वामी रामेश्वरानन्द जी महाराज (गुरुकुल घरौण्डा)](https://www.ugtabharat.com/105011/) - स्वतंत्रता सेनानी स्वामी रामेश्वरानन्द जी महाराज (गुरुकुल घरौण्डा) स्वामी जी का जन्म एक ग्रामीण कृषक परिवार में 1890 ई० में हुआ । स्वामी जी का बाल्यकाल अत्यन्त - [विश्व को विश्वगुरू भारत ने दिया था राष्ट्र का वैज्ञानिक स्वरूप](https://www.ugtabharat.com/105009/) - विश्व को विश्वगुरू भारत ने दिया था राष्ट्र का वैज्ञानिक स्वरूप लोगों का विचार है वेद में राष्ट्रनिर्माण की कल्पना नही। ऐसा कहने वाले वेद को देखे बिना ऐसा कहते - [नमन सिंदूर](https://www.ugtabharat.com/105003/) - 22 अप्रैल की ढलती शाम में जिस पहलगाम की बैसरन घाटी में पाक प्रायोजित आतंकवाद ने सांप्रदायिक घृणा और धार्मिक विद्वेष बढ़ाने के लिए नरसंहार किया, उससे न केवल भारतीय आवाम बल्कि पूरा विश्व दुखी और स्तब्ध था। शासनिक प्रशासनिक चूक कहां हुई सवाल इसका नहीं, सवाल अवाम में यह उठा कि कब तक पाकिस्तान - [युद्ध से भी आती है शांति पाक का इलाज सिर्फ युद्ध है](https://www.ugtabharat.com/105001/) - युद्ध से भी आती है शांति - [हल्दीघाटी का युद्ध , महाराणा प्रताप और चेतक](https://www.ugtabharat.com/104983/) - हल्दीघाटी का युद्ध जब चल रहा था तो उसमें अनेक सैनिक , योद्धा , हाथी , घोड़े मारे जा चुके थे । उसी दिन बरसात भी हुई थी , उसकी वजह से सैनिकों , घोड़ों व हाथियों का - [श्री मद्दयानन्द आर्ष ज्योतिर्मठ गुरुकुल, पौंधा-देहरादून का भव्य रजत जयन्ती समारोह आगामी 30, 31 मई एवं 1 जून, 2025 को आयोजित](https://www.ugtabharat.com/104980/) - मनमोहन कुमार आर्य श्रीमद् दयानन्द आर्ष ज्योतिर्मठ गुरुकुल, देहरादून का रजत जयन्ती समारोह आगामी 30 व 31 मई एवं 1 जून, 2025 को गुरुकुल पौंधा के परिसर में आयोजित किया जा रहा है। गुरुकुल ने जून, 2000 में स्थापित होने के बाद 25 वर्ष का कार्यकाल पूरा किया है। इस अवधि में गुरुकुल में अनेक - [सैनिकों का सम्मान : समर्पण और बलिदान की पहचान](https://www.ugtabharat.com/104977/) - हमारे सैनिक, जो सीमाओं पर अपने प्राणों की बाजी लगाते हैं, हमारे असली नायक हैं। युद्ध की आशंका में लौटते सैनिकों को ट्रेन में सीट दें, सड़क पर मिलें तो अपने वाहन से आगे छोड़ें, और होटलों में निशुल्क ठहरने की सुविधा दें। उनका सम्मान हमारा कर्तव्य है, न कि महज़ औपचारिकता। जहाँ भी मिले, - [हमने कभी उनका चित्र न देखा](https://www.ugtabharat.com/104975/) - सच्चा साधु तो वही है जो नाम, चाम व दाम से ऊपर उठ जावे। आर्य समाज के साधुओं के सामने आरंभिक काल में यही आदर्श था। हमारे संन्यासी ऐसा साधु बनकर दिखाने का यत्न करते रहे। श्री स्वामी स्वतंत्रतानन्द जी महाराज इस दृष्टि से आर्य सन्यासियों के लिए ही एक आदर्श नहीं थे ,अपितु संन्यासी - [भारत ने मिसाइल नहीं 'मिसाल' दागी है](https://www.ugtabharat.com/104969/) - भारत ने पहलगाम आतंकी हमले का प्रतिशोध लेकर न केवल पाकिस्तान को बल्कि सारे संसार को यह दिखा दिया है कि वह विकल्पविहीन संकल्प का धनी राष्ट्र है। उसका एक ही संकल्प है - पौरुष। उसका एक ही विकल्प है - पराक्रम। उसके लिए एक ही लक्ष्य है - राष्ट्रीय एकता। भारत के राजनीतिक दलों - [अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती रुपए की ताकत एवं भारत में बढ़ता विदेशी मुद्रा भंडार](https://www.ugtabharat.com/104937/) - प्रहलाद सबनानी दिनांक 7 फरवरी 2025 को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर की तुलना में भारतीय रुपए की कीमत सबसे निचले स्तर अर्थात 87.44 रुपए प्रति अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गई थी। इसके बाद धीरे धीरे इसमें सुधार होता हुआ दिखाई दिया है एवं अब दिनांक 30 अप्रेल 2025 को यह 84.50 रुपए प्रति डॉलर - [वेदों के पांच ऋषि](https://www.ugtabharat.com/104929/) - - डॉ विवेक आर्य ऋग्वेद 10/150/ 1-5 मन्त्रों में अग्नि रूप परमेश्वर को सुख प्राप्ति के लिए आवाहन करने का विधान बताया गया है। ईश्वर से प्रार्थना करने और यज्ञ में पधारकर मार्गदर्शन करने की प्रार्थना की गई है। धन, संसाधन, बुद्धि, सत्कर्म इच्छित पदार्थों, दिव्या गुणों आदि की प्राप्ति के लिए व्रतों का पालन - [UPSC टॉपर या जाति टॉपर ? : प्रतिभा गुम, जाति और पृष्ठभूमि का बाज़ार गर्म](https://www.ugtabharat.com/104934/) - देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा अब जातीय गौरव का तमाशा बन चुकी है। जैसे ही रिज़ल्ट आता है, प्रतिभा और मेहनत को धकिया कर जाति, धर्म और ‘किसान की झोपड़ी’ की स्क्रिप्ट सोशल मीडिया पर दौड़ने लगती है। एसी कमरों में पढ़ने वाले अब खुद को किसान का बेटा घोषित करते हैं, ताकि संघर्ष बिके। - [सिविल सेवा में इस्तीफों का मंथन : राजनीति, प्रशासन और मानसिक तनाव का समीकरण](https://www.ugtabharat.com/104931/) - भारत में सिविल सेवाओं से इस्तीफों की बढ़ती संख्या एक गंभीर मुद्दा बन गई है। कई आईएएस और आईपीएस अधिकारी, जिनमें कम्य व मिश्रा, रोमन सैनी और अन्य युवा अधिकारी शामिल हैं, अपने पदों से इस्तीफा दे रहे हैं। इसके पीछे राजनीतिक दबाव, प्रशासनिक हताशा, स्वायत्तता की कमी और मानसिक स्वास्थ्य संकट जैसे कारण हैं। - [इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू - अध्याय 18](https://www.ugtabharat.com/104923/) - इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू ( डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया की डिस्कवरी ) पुस्तक से ... सम्राट अशोक और नेहरू की राजनीति डॉ राकेश कुमार आर्य शा स्त्र और शस्त्र का समन्वय ही किसी देश को महान बनाता है। शास्त्र किसी भी राष्ट्र की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना का नाम है। शस्त्र उसकी सैनिक शक्ति और - [संसार में वेदों की अप्रवृत्ति होने से अविद्यायुक्त मत-मतान्तर उत्पन्न हुए हैं](https://www.ugtabharat.com/104917/) - मनमोहन कुमार आर्य संसार में वर्तमान समय में शताधिक अवैदिक मत-मतान्तर प्रचलित हैं जिनकी प्रवृत्ति व प्रचलन पांच हजार वर्ष पूर्व हुए महाभारत युद्ध के बाद हुआ है। सभी मतों का आधार प्रायः चार प्रमुख मत हैं जो पुराण, जैन मत के ग्रन्थों, बाईबल तथा कुरान आदि ग्रन्थों के आधार पर प्रचलित हुए हैं। महाभारत - [पाक को सबक सिखाना एवं आतंकवाद को उखाड़ना होगा](https://www.ugtabharat.com/104914/) - ललित गर्ग जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए बर्बर एवं क्रूर आतंकी हमले से सारा देश गम एवं गुस्से में दिख रहा है, वही मोदी सरकार इस बार आर-पार के मूड में दिख रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी ( सीसीएस ) की बैठक के बाद भारत ने पाकिस्तान - [हमारे कुल, गोत्र - वंश की परंपरा में झलकता है इतिहास : डॉ आर्य](https://www.ugtabharat.com/104909/) - महाशय बृजलाल आर्य की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम हुआ संपन्न फरीदाबाद। यहां स्थित ग्राम नीमका में आर्य समाज के विद्वान और एक समर्पित व्यक्तित्व के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त स्वर्गीय मo बृजलाल आर्य की पुण्यतिथि के अवसर पर विशेष यज्ञ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पूर्व उप जिलाधिकारी रहे इंदर सिंह - [इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू अध्याय - 17](https://www.ugtabharat.com/104907/) - इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू (डिस्कवरी ऑफ इंडिया की डिस्कवरी ) पुस्तक से .. चंद्रगुप्त, चाणक्य और सिकंदर डॉ राकेश कुमार आर्य नेहरू जैसे इतिहास लेखकों की यह विशेषता रही है कि वह भारत के महान सम्राटों, शासकों और समाज सुधारकों या राष्ट्र निर्माताओं को किन्ही विदेशी सम्राट, शासक या समाज सुधारक अथवा राष्ट्र निर्माता - [तैमूर को किसने हराया ?](https://www.ugtabharat.com/104905/) - डॉ विवेक आर्य हिन्दू समाज की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे जातिवाद से ऊपर उठ कर सोच ही नहीं सकते। यही पिछले 1200 वर्षों से हो रही उनकी हार का मुख्य कारण है। इतिहास में कुछ प्रेरणादायक घटनाएं मिलती है। जब जातिवाद से ऊपर उठकर हिन्दू समाज ने एकजुट होकर अक्रान्तायों का न - [पराधीनता की भव्य निशानी अंग्रेजों द्वारा निर्मित नोएडा 'विक्टरी पिलर' कब ध्वस्त होगा ?](https://www.ugtabharat.com/104899/) - लेखक - आर्य सागर सन 1802 आते आते अंग्रेजों का शासन बंगाल अवध फर्रुखाबाद हैदराबाद मेसूर में स्थापित हो गया। दिल्ली आगरा उनकी पहुंच से फिर भी बहुत दूर था। अंग्रेजों को सर्वाधिक परेशानियां इसी हिस्से पर कब्जे को लेकर आयी थी। कारण सीधा था गुर्जर जाट अहीर सैनी जैसी कृषक लेकिन युद्ध कौशल में - [शौर्य के बल पर स्थापित व्यसन मुक्त अद्वितीय, अपूर्व गांव 'मिरगपुर' जनपद सहारनपुर एक रिपोर्ट](https://www.ugtabharat.com/104886/) - लेखक - आर्य सागर भारत राज्यों का संघ हैं लेकिन भारत की आत्मा भारत के 6 लाख से अधिक गांवों में बसती है भारत के संत महात्माओ ने इस आत्मा को समय-समय पर जागृत किया है। यूं तो प्रत्येक गांव के बसने की, भिन्न-भिन्न भूभाग आंचल के अनुसार प्रत्येक गांव की सांस्कृतिक सामाजिक परंपराओं में - [सत्यार्थ प्रकाश में वर्णित आर्य राजाओं की वंशावली में दोष है](https://www.ugtabharat.com/104883/) - भारत के 1235 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास भाग - 1 (वे थमें नहीं, हम थके नहीं) अध्याय - 3 डॉ राकेश कुमार आर्य महर्षि दयानंद जी महाराज ने अपने अमर ग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश के ग्यारहें समुल्लास में आर्य राजाओं की वंशावली दी है। जिसे हम यहां यथावत देकर तब उस पर विचार करेंगे कि - [वेद प्रतिपादित ईश्वर के सत्यस्वरूप व अन्य सभी मान्यताओं में विश्वास करने से जीवन की सफलता](https://www.ugtabharat.com/104881/) - मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य का आत्मा सत्य व असत्य का जानने वाला होता है परन्तु अपने प्रयोजन की सिद्धि, हठ, दुराग्रह तथा अविद्या आदि दोषों के कारण वह सत्य को छोड़ असत्य में झुक जाता है। ऐसा होने पर मनुष्य की भारी हानि होती है। मनुष्य को सत्य को पकड़ कर रखना चाहिये और असत्य - [काल और धर्म का सम्बन्ध](https://www.ugtabharat.com/104875/) - ब्र0 वेदव्रत मीमांसक युग-काल को मापने के जैसे घटी, मुहूर्त, तिथि, मास और वर्ष आदि मान हैं इसी प्रकार युग भी एक मानदण्ड है युग चार प्रकार के हैं। 1 कलियुग 2 द्वापर युग 3 त्रेता युग तथा 4 सतयुग। कलियुग 432000 वर्षों का होता है; द्वापर 864000 वर्षों का, त्रेता 1296000 वर्षों का तथा - [दार्शनिकों का अनोखा संसार यूनानी दार्शनिक' डायोजिनीज'](https://www.ugtabharat.com/104869/) - लेखक - आर्य सागर भारतीय दार्शनिक हो या पश्चिमी दार्शनिक उनका अपना अनोखा ही संसार रहा है। मान -अपमान ,लाभ -हानि,गरीबी- अमीरी से दूर स्वतंत्र शांत निर्भीक जीवन उनका रहा है। दार्शनिकों के इसी अनोखे संसार में एक यूनानी दार्शनिक थे डायोजिनीज, ईसा से 320 वर्ष पूर्व इनका काल माना जाता है ।यह वही काल - [इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू अध्याय - 15](https://www.ugtabharat.com/104865/) - इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू (डिस्कवरी ऑफ इंडिया की डिस्कवरी) अध्याय - 15 महाकाव्य और खयाली इतिहास डॉ राकेश कुमार आर्य हम सभी जानते हैं कि जिस समय राम मंदिर आंदोलन चल रहा था और राम जन्मभूमि का मामला न्यायालय में भी विचाराधीन था तो उस समय कांग्रेस ने किस प्रकार रामायण और राम को - [दुनिया को नृत्य व नाटक (अभिनय) सिखाने वाले भरत मुनि](https://www.ugtabharat.com/104862/) - लेखक - आर्य सागर यूनेस्को ने आज 'मेमोरी ऑफ़ द वर्ल्ड रजिस्टर' में भागवत गीता व भरत मुनि रचित नाट्यशास्त्र को शामिल किया है। गीता जो महाभारत का ही एक अंश है उससे अधिकांस सनातन धर्मी गीता पारायण करने जिज्ञासु जन परिचित है लेकिन नाट्य शास्त्र से आज भी बहुत कम लोगों का परिचय है। - [कोई समस्या नहीं होती, जो हल न हो सकती हो](https://www.ugtabharat.com/104860/) - किसी भी रात का अंधेरा इतना बलवान नहीं होता, कि वह सवेरा होने ही न दे। लगातार रात ही रात चलती रहे। "रात का समय अवश्य ही पूरा होता है, फिर सुबह सूर्य निकलता है, सब कुछ साफ दिखता है, और सब परेशानियां दूर हो जाती हैं।" ठीक इसी प्रकार से जीवन में भी समस्याएं - [जालियाँवाला बाग हत्याकांड की कहानी](https://www.ugtabharat.com/104857/) - डॉ विवेक आर्य जालियाँवाला बाग हत्याकांड (Jalianwala Bagh Massacre) की कहानी सुनते ही आज भी हर भारतीय की रूह कांप जाती है। यह ऐसा बर्बर हत्याकांड अंग्रेजों ने हम भारतीयों पर किया था। जिसकी निंदा आज तक की जाती है। अंग्रेजों के द्वारा किये गए इस बर्बर हत्याकांड के लिए आज भी ब्रिटेन के उच्च - [क्या इस जन्म से पहले हमारा अस्तित्व था और मृत्यु के बाद भी रहेगा?](https://www.ugtabharat.com/104850/) - मनमोहन कुमार आर्य हम कौन हैं? इस प्रश्न पर जब हम विचार करते हैं तो इसका उत्तर हमें वेद एवं वैदिक साहित्य में ही मिलता है जो ज्ञान से पूर्ण, तर्क एवं युक्तिसंगत तथा सत्य है। उत्तर है कि हम मनुष्य शरीर में एक जीवात्मा के रूप में विद्यमान हैं। हमारा शरीर हमारी आत्मा का - [वेदों को अपना लेने से विश्व की समस्त समस्याओं का समाधान](https://www.ugtabharat.com/104848/) - मनमोहन कुमार आर्य हमारा विश्व अनेक देशों में बंटा हुआ है। सभी देशों के अपने अपने मत, विचारधारायें तथा परम्परायें आदि हैं। कुछ पड़ोसी देशों में मित्रता देखी जाती है तो कहीं कहीं पर सम्बन्धों में तनाव भी दृष्टिगोचर होता है। दो देशों का तनाव कब युद्ध में बदल जाये इसका अनुमान नहीं किया जा - [भारत को पुनः विश्वगुरु के रूप में स्थापित करने हेतु सांस्कृतिक संगठनों को भी विशेष भूमिका निभानी होगी](https://www.ugtabharat.com/104842/) - प्रहलाद सबनानी प्राचीनकाल में भारत विश्व गुरु रहा है इस विषय पर अब कोई शक की गुंजाईश नहीं रही है क्योंकि अब तो पश्चिमी देशों द्वारा पूरे विश्व के प्राचीन काल के संदर्भ में की गई रिसर्च में भी यह तथ्य उभरकर सामने आ रहे हैं। भारत क्यों और कैसे विश्व गुरु के पद पर - [कम्युनिज्म (साम्यवाद) का काला इतिहास](https://www.ugtabharat.com/104837/) - कम्युनिज्म (साम्यवाद) का काला इतिहास रूस में 25 अक्तूबर (या 7 नवंबर) 1917 की घटना को पहले अक्तूबर या नवंबर क्रांति कहा जाता था, लेकिन 1991 में कम्युनिज्म के वि - [जीवन की सफलता वेदों के स्वाध्याय, सद्व्यवहार एवं आचरण में है](https://www.ugtabharat.com/104840/) - मनमोहन कुमार आर्य हम मनुष्य इस कारण से हैं कि हम अपने मन व बुद्धि से चिन्तन व मनन कर सत्यासत्य का निर्णय करने सहित सत्य का ग्रहण एवं असत्य का त्याग करते हैं व करने में समर्थ हैं। यह कार्य पशु व पक्षी योनि के जीवात्मा नहीं कर सकते। इसका कारण यह है कि - [ईश्वर के दर्शन का साधन ओंकार](https://www.ugtabharat.com/104834/) - ईश्वर के दर्शन का साधन 'ओंकार - [आगरा के सेन्ट पीटर्स चर्च में पहुंचे महर्षि दयानन्द – फिर क्या हुआ ?](https://www.ugtabharat.com/104832/) - आगरा के सेन्ट पीटर्स चर्च में पहुंचे महर्षि दयानन्द – फिर क्या हुआ ? सेन्ट पीटर्स चर्च (गिरजाघर) प्रसिद्ध एवं दर्शनीय है । इस चर्च के अध्यक्ष लाट पादरी (बिशप) - [जीवन क्या है ?](https://www.ugtabharat.com/104828/) - जीवन को जिसकी जैसी जिसकी समझ थी उसने जीवन को उसी रुप में देखा सामान्य या विशेष, विकसित या अविकसित। एक सांसारिक व्यक्ति के लिए तो लग्जरियस लाइफ, - [क्या हनुमान आदि वानर बन्दर थे ?](https://www.ugtabharat.com/104823/) - क्या हनुमान आदि वानर बन्दर थे ? - [सात्त्विकता और धर्माचरण के बिना स्थायी विकास असंभव – दिल्ली सम्मेलन में हुआ शोध प्रस्तुत](https://www.ugtabharat.com/104808/) - सात्त्विकता और धर्माचरण के बिना स्थायी विकास असंभव – दिल्ली सम्मेलन में हुआ शोध प्रस्तुत - [मानव जाति की सबसे उत्तम सम्पत्ति ईश्वर एवं वेद हैं](https://www.ugtabharat.com/104792/) - मानव जाति की सबसे उत्तम सम्पत्ति ईश्वर एवं वेद हैं - [आत्मगौरव और स्वतंत्रता के भाव से पूरित विभिन्न हिन्दू राजवंश](https://www.ugtabharat.com/104820/) - आत्मगौरव और स्वतंत्रता के भाव से पूरित विभिन्न हिन्दू राजवंश - [प्राइवेट सिस्टम का खेल : आम आदमी की जेब पर हमला](https://www.ugtabharat.com/104817/) - प्राइवेट सिस्टम का खेल : आम आदमी की जेब पर हमला - [चिकन नेक, बांग्लादेश, चीन और भारत](https://www.ugtabharat.com/104814/) - डॉ राकेश कुमार आर्य बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद मोहम्मद यूनुस का वहां की सत्ता पर काबिज होना मात्र संयोग नहीं था। इसके पीछे वे सभी भारत विरोधी शक्तियां काम कर रही थीं जो भारत को घेरकर रखने में अपनी भलाई समझती हैं। भारत विरोधी शक्तियों की इसी मानसिकता के चलते मोहम्मद यूनुस के - [जाति और धर्म बनाम राष्ट्र](https://www.ugtabharat.com/104811/) - जाति और धर्म बनाम राष्ट्र. देश के अधिकांश नेता ऐसे हैं जो ' जाति' शब्द का अर्थ नहीं जानते। इतना ही नहीं, उन्हें ' धर्म' का भी अर्थ ज्ञात नहीं है । - [बिहार राज्य आर्य प्रतिनिधि सभा का राष्ट्र निर्माण एवं धर्म रक्षा सम्मेलन हुआ आरंभ](https://www.ugtabharat.com/104806/) - महर्षि दयानंद सरस्वती जी महाराज की 200 वीं जयंती और आर्य समाज के 150 वर्ष पूर्ण होने के पावन अवसर पर यहां स्थित दयानंद कॉलेज मीठापुर बिहार आर्य प्रतिनिधि सभा - [पटना के लॉर्ड हार्डिंग पार्क का नाम महर्षि दयानंद पार्क रखने की उठी मांग](https://www.ugtabharat.com/104802/) - पटना के लॉर्ड हार्डिंग पार्क का नाम महर्षि दयानंद पार्क स्वाधीनता आंदोलन के साथ-साथ सामाजिक सुधारों के क्षेत्र में भी आर्य समाज का विशेष योगदान रहा है। - [वेदों की रक्षा व प्रचार से ही विश्व में मानवता की रक्षा सम्भव है](https://www.ugtabharat.com/104800/) - वेदों की रक्षा व प्रचार से ही विश्व में मानवता की रक्षा सम्भव है - [महर्षि दयानन्द, सत्यार्थ प्रकाश और आर्यसमाज हमें क्यों प्रिय हैं ?](https://www.ugtabharat.com/104798/) - मनमोहन कुमार आर्य सृष्टि के आरम्भ से लेकर अद्यावधि संसार में अनेक महापुरूष हुए हैं। उनमें से अनेकों ने अनेक ग्रन्थ लिखे हैं या फिर उनके शिष्यों ने उनकी शिक्षाओं का संग्रह कर उसे ग्रन्थ के रूप में संकलित किया है। हम अपने जीवन में उत्तम महान पुरूष को प्राप्त करने के लिए निकले तो - [महात्मा दयानन्द वानप्रस्थ जी का ‘यज्ञ की प्रेरणा किसको’ विषय पर एक संक्षिप्त उपदेश](https://www.ugtabharat.com/104796/) - महात्मा दयानन्द वानप्रस्थ जी का ‘यज्ञ की प्रेरणा किसको’ विषय पर एक संक्षिप्त उपदेश - [ईश्वर, सृष्टि व प्रकृति को लेकर कुछ शंका-समाधान](https://www.ugtabharat.com/104794/) - ईश्वर, सृष्टि व प्रकृति को लेकर कुछ शंका-समाधान - [नशेड़ी युवक से क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल](https://www.ugtabharat.com/104790/) - नशेड़ी युवक से क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल - [श्रम करो - पुरुषार्थ करो](https://www.ugtabharat.com/104784/) - संघर्ष करो - संघर्ष करो, जीवन ज्योति प्रदीप्त करो। संग्राम क्षेत्र यह जीवन है, यहां अपने को उद्दीप्त करो ।। रुक जाना नहीं जीवन होता, जीवन चलते जाना है। काम पथिक का चलते रहना, रुकना ही मिट जाना है ।। श्रम करो - पुरुषार्थ करो , यही सनातन कहता है। विश्राम नहीं, थकने से पहले - [जीवन की मर्यादा है श्रीराम का जीवन](https://www.ugtabharat.com/104779/) - डॉ. वन्दना सेन श्रीराम जीवन की मर्यादा हैं। सांस्कृतिक प्रेरणा है। समरसता का पर्याय हैं। भारतीय सांस्कृतिक दर्शन की धारा को प्रवाहित करने वाले भारतीय साहित्य में वसुधैव कुटुम्बकम का भाव सदैव समाहित रहा है। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण और संत तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस ने सामाजिक समरसता के भाव का प्रवाहन बहुत ही - [टैरिफ युद्ध का भारतीय अर्थव्यवस्था पर नहीं होगा अधिक प्रभाव](https://www.ugtabharat.com/104773/) - टैरिफ युद्ध का भारतीय अर्थव्यवस्था पर नहीं होगा अधिक प्रभाव - [मनु महाराज की प्रतिमा संसद के प्रांगण में लगाने की मांग के साथ मनु महोत्सव हुआ संपन्न](https://www.ugtabharat.com/104763/) - विश्व के पहले त्रिदिवसीय मनु महोत्सव का समापन हो गया है।मनु महाराज की प्रतिमा संसद के प्रांगण में लगाने की मांग के साथ मनु महोत्सव हुआ संपन्न - [मनु की समाज वैज्ञानिक व्याख्या पर बने आम सहमति : डॉ सतपाल सिंह](https://www.ugtabharat.com/104748/) - आर्य प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम बुद्ध नगर के तत्वावधान में चल रहे विश्व के पहले मनु महोत्सव में बोलते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं बागपत के सांसद डॉ सत्यपाल सिंह - [विश्व के पहले मनु महोत्सव का ग्रेटर नोएडा में हुआ शुभारंभ: मनु की ऋणी है विश्व की सारी व्यवस्था : विनय आर्य ](https://www.ugtabharat.com/104744/) - ग्रेटर नोएडा। यहां स्थित प्राचीन गुरुकुल सिकंदराबाद की शाखा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खेरली के प्रांगण में विश्व का पहला मनु महोत्सव आर्य प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम बुद्ध नगर के तत्वावधान में पूरी भव्यता के साथ प्रारंभ हो गया है। कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए आर्य प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम बुद्ध नगर के अध्यक्ष - [प्रभु-प्राप्ति चाहता है साधक, किन्तु मनोविकार कितने हैं बाधक ?](https://www.ugtabharat.com/104735/) - संग्रह-भोग दोनों छिपे, नहीं अकेला काम। राग-द्वेष बाधा बड़ी, कैसे पाऊँ राम॥2770॥ तत्त्वार्थ: - मेरे प्रिय पाठक, उपरोक्त दोहे का मर्म समझें इससे पूर्व इस क्रम को समझेंगे तो बात समझ में आ जायेगी। वस्तु, व्यक्ति अथवा परिस्थिति के प्रति सबसे पहले मन में आसक्ति उत्पन्न होती है। आसक्ति से राग पैदा होता है। अमुक - [वैदिक संपत्ति 272 वेदमंत्रों के उपदेश](https://www.ugtabharat.com/104736/) - (ये लेखमाला हम पं. रघुनंदन शर्मा जी की 'वैदिक सम्पत्ति' नामक पुस्तक के आधार पर सुधि पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहें हैं) प्रस्तुतिः देवेन्द्र सिंह आर्य (चेयरमैन 'उगता भारत') जो लोग कहते हैं कि प्राचीन सायं सन्तान के पीछे दिवाने फिरते थे, वे गलती पर हैं। मोक्षार्थी आर्य कभी सन्तान की इच्छा नहीं करते - [प्रधानमंत्री मोदी और 'वटवृक्ष' आरएसएस](https://www.ugtabharat.com/104734/) - प्रधानमंत्री मोदी और 'वटवृक्ष' आरएसएस - [भगत सिंह की जेल नोटबुक की कहानी](https://www.ugtabharat.com/104729/) - भगत सिंह की जेल नोटबुक की कहानी भगत सिंह और उनके साथी सुखदेव और राजगुरु के शहादत दिवस इसी महीने में है। भगत सिंह की जेल डायरी के दिलचस्प इतिहास को समझ - [‘अग्नि’ किस प्रकार हमारे मन, बुद्धि और बल के लिए लाभकारी है?](https://www.ugtabharat.com/104725/) - परमात्मा के प्रति समर्पण का क्या महत्त्व है? का त उपेतिर्मनसो वराय भुवदग्ने शन्तमा का मनीषा। का वा यज्ञैः परि दक्षं त आप केन वा ते मनसा दाशेम।। ऋग्वेद मन्त्र 1.76.1 (कुल मन्त्र 823) (का) क्या (ते) आपका (उपेतिः) उपाय, तरीका, पूजा (मनसः) मन का (वराय) वरण किया (सुधार के लिए) (भुवत्) हो (अग्ने) सर्वोच्च - [धूर्त शेल्डन पोलाक और संस्कृत व संस्कृति द्रोही मूर्ति परिवार](https://www.ugtabharat.com/104722/) - The intellectual conspiracy of the Western left to arbitrarily interpret Sanskrit literature सन् 1832 में लेफ्टिनेंट कर्नल जोसेफ बोडेन ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में संस्कृत की चेयर स्थापित की जिसमें जर्मन इंडोलॉजिस्ट मैक्स मूलर को कथित तौर पर संस्कृत ग्रंथो की व्याख्या , वेदों के अनुवाद का काम सौंपा गया था। अंग्रेजों का उद्देश्य वैदिक संस्कृत - [वैदिक नव वर्ष के विविध आयाम](https://www.ugtabharat.com/104719/) - वैदिक नव वर्ष के विविध आयाम कालगणना ,ज्योतिष की दृष्टि से वैदिक नववर्ष संसार का सबसे प्राचीन कैलेंडर दिनदर्शिका की रचना करता है जिसकी रचना वैदिक आर्यों ने की । - [स्किल इंडिया शहीद रामप्रसाद बिस्मिल की सोच](https://www.ugtabharat.com/104716/) - अमर शहीद रामप्रसाद बिस्मिल ने एक सदी पहले ही स्किल इंडिया व तकनीकी शिक्षा का विचार दे दिया था... जब भारतवर्ष स्वतंत्र भी नहीं था बिस्मिल बार-बार कहा करते थे... - [शहीद रामप्रसाद बिस्मिल के पूर्वज](https://www.ugtabharat.com/104713/) - लेखक - आर्य सागर मरते बिस्मिल रोशन लहरी अशफाक अत्याचार से | होंगे पैदा सैकड़ों इनके रुधिर की धार से|| ( राम प्रसाद बिस्मिल गोरखपुर डिस्ट्रिक्ट जेल) राम प्रसाद बिस्मिल के दादा ठाकुर नारायण लाल तोमर बारबाई गांव मुरैना जिले मध्य प्रदेश के मूल निवासी थे | यह गांव चंबल नदी के बीहड़ में पड़ता - [विश्व शांति एवं समृद्धि के लिए हिंदुओं को एक करने का प्रयास करता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ](https://www.ugtabharat.com/104699/) - राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समस्त हिंदू समाज को एक करने के प्रयास भारत में तो सफल होते हुए दिखाई दे रहे हैं और इसका स्पष्ट सकारात्मक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ - [नव-सम्वत्सर अर्थात् नववर्ष आरम्भ, आर्यसमाज स्थापना दिवस एवं रामनवमी वैदिक धर्मियों के तीन महनीय पर्व](https://www.ugtabharat.com/104709/) - मनमोहन कुमार आर्य रविवार दिनांक 30 मार्च, 2025 को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा है। इसी दिन से विक्रमी सम्वत्सर 2082 तथा वेद और सृष्टि सम्वत्सर 1,96,08,53,126 का आरम्भ हो रहा है। जिस प्रकार हम अपने जन्म दिवस एवं महत्वपूर्ण पर्वों को मनाते हैं उसी प्रकार से इस दिवस को भी आर्य पर्व के रूप में मनाया - [भारत में गर्मी का जल्दी आना और लू का बढ़ना](https://www.ugtabharat.com/104706/) - भारत में गर्मी का जल्दी आना और लू का बढ़ना - [शरीर को सदा स्वस्थ तथा बलवान् बनाने के अचूक उपाय](https://www.ugtabharat.com/104703/) - शरीर को सदा स्वस्थ तथा बलवान् बनाने के अचूक उपाय - [इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू अध्याय 11](https://www.ugtabharat.com/104701/) - डिस्कवरी ऑफ इंडिया की डिस्कवरी - [कुआँ सूखने पर ही पता चलता है पानी की कीमत](https://www.ugtabharat.com/104688/) - कहावत “जब तक कुआँ सूख नहीं जाता, हमें पानी की कीमत का पता नहीं चलता” हमें इस बात की याद दिलाती है कि हमें अपने जीवन और संसाधनों के प्रति जागरूक और कृतज्ञ रहना चाहिए। चाहे वह जल हो, प्रेम हो, स्वतंत्रता हो या स्वास्थ्य, हमें इनका सम्मान और संरक्षण करना चाहिए ताकि आने वाली - [संघर्ष किसके जीवन में नहीं है ?](https://www.ugtabharat.com/104685/) - संघर्ष किसके जीवन में नहीं है? अर्थात सभी के जीवन में हैं कुछ लोग आपको प्रत्येक परिस्थिति में खुश दिखाई देते होंगे। "ऐसा नहीं है, कि उनके जीवन में कोई समस्याएं नहीं आती। कोई चिंता नहीं होती, कोई तनाव नहीं होता, या परिस्थितियों से उन्हें कोई संघर्ष नहीं करना पड़ता। चिंताएं परेशानियां दुख समस्याएं सबके - [वैदिक संपत्ति 271 वेदमंत्रों के उपदेश](https://www.ugtabharat.com/104676/) - (ये लेखमाला हम पं. रघुनंदन शर्मा जी की 'वैदिक सम्पत्ति' नामक पुस्तक के आधार पर सुधि पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहें हैं) प्रस्तुतिः देवेन्द्र सिंह आर्य (चेयरमैन 'उगता भारत') आर्यों की कामसम्बन्धी नीति संसार का अनुभव बतलाता है कि व्यक्ति, समाज और राष्ट्र को समय समय पर सन्तति अर्थात् जनसंख्या की आवश्यकता, आवश्यकता और - [सुनहरा लम्हा : धरती पर लौटीं सुनीता विलियम्स](https://www.ugtabharat.com/104673/) - (सुनीता विलियम्स की उपलब्धियाँ न केवल भारतीय वैज्ञानिकों बल्कि देश के युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत हैं।) सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर की धरती पर सुरक्षित वापसी एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि मानी जा रही है। वे जून 2024 में बोइंग के "स्टारलाइनर" मिशन के तहत अंतरिक्ष गए थे, लेकिन तकनीकी खामियों के चलते - [सात्त्विक - सुख किसे कहते है ?](https://www.ugtabharat.com/104671/) - आत्मा-बुद्धि पवित्र हों, सात्त्विक - सुख कहलाय । श्रेय-मार्ग का पथिक ही, इस दौलत को पाय॥2768॥ तत्त्वार्थ : - प्रस्तुत दोहे में मन लोय है किन्तु बुद्धि को निर्मलता के साथ-साथ मन का निर्मल होना नितान्त आवश्यक है। इसके अतिरिक्त आत्मा पर मल, विक्षेप और आवरण के जो पर्दे पड़े, हैं, उनका शमन करना, उनका - [अमर हुतात्मा भगत सिंह और आर्य समाज](https://www.ugtabharat.com/104654/) - अमर हुतात्मा भगत सिंह और आर्य समाज अमर हुतात्मा भगत सिंह। उत्तर भारत में उस समय इस वीर की ख्याति इतनी फैल गई थी कि सशस्त्र क्रान्ति और - [ऋषि दयानन्द ने सत्यार्थ प्रकाश ग्रन्थ की रचना क्यों की ?](https://www.ugtabharat.com/104668/) - कोई भी विद्वान जिस विषय को अच्छी प्रकार जानता है, उसको लोगों को जनाने व उस ज्ञान व विद्या से अपरिचित लोगों को परिचित कराने के लिये उस विषयक अपने ग्रन्थ वा पुस्तक की रचना करता है। संसार में इसी उद्देश्य से सहस्रों व लाखों ग्रन्थ लिखे गये हैं। इसके विपरीत कुछ लोग धनोपार्जन व - [इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू ( डिस्कवरी ऑफ इंडिया की डिस्कवरी )](https://www.ugtabharat.com/101304/) - प्रस्तावना : नेहरू बोले : मुसलमान तो मैं भी हूं ... हम सभी जानते हैं कि पंडित जवाहरलाल नेहरू स्वाधीनता के पश्चात देश के पहले प्रधानमंत्री बने थे। उन्हें देश की स्वाधीनता के पश्चात लोगों की प्राण रक्षा की कोई चिंता नहीं थी। उन्हें प्रधानमंत्री पद पाने की चिंता थी। जिसके चलते उस समय लाखों - [मनुस्मृति में मिलावट व मनु महोत्सव 2025 ग्रेटर नोएडा](https://www.ugtabharat.com/104637/) - मनुस्मृति में मिलावट व मनु महोत्सव 2025 ग्रेटर नोएडा आर्य प्रतिनिधि सभा गौतम बुद्ध नगर - [इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू (अध्याय 10)](https://www.ugtabharat.com/104659/) - ( डिस्कवरी ऑफ इंडिया की डिस्कवरी ) (अध्याय 10 ) - डॉ राकेश कुमार आर्य भारत आर्य और द्रविड़ में बंटा रहा? पिता के पत्र पुत्री के नाम नामक पुस्तक में नेहरू जी के द्वारा अपनी पुत्री इंदिरा गांधी के लिए लिखे गए पत्रों के संकलन में वह लिखते हैं- "रामायण पढ़ने से मालूम होता - [गाँधी जी की अहिंसा के कुछ उदाहरण](https://www.ugtabharat.com/104652/) - गाँधी जी की अहिंसा के कुछ उदाहरण - [शहीद भगत सिंह, राजगुरु , सुखदेव आदि के बलिदान का बदला किसने लिया ?](https://www.ugtabharat.com/104634/) - आज (23 march 2025) शहीद- ए -आजम भगत सिंह, राजगुरु ,सुखदेव जैसे मृत्युंजय वीरों का शहादत दिवस है। ठीक आज ही के दिन लाहौर सेंट्रल जेल में 9 दशक पूर्व भगत सिंह राजगुरु सुखदेव को अंग्रेजी साम्राज्य ने फांसी दे दी। दिल्ली बम असेंबली कांड लाहौर षड्यंत्र कांड सांडर्स वध के लिए भगत सिंह राजगुरु - [चक्रवर्ती सम्राट कनिष्क गुर्जर वंश से थे – भाग 4](https://www.ugtabharat.com/104600/) - कनिष्क गुर्जर वंश वैदिक आर्यों की ही संतान थे गुर्जर सम्राट कनिष्क और उनके वंशज। कई इतिहासकारों ने ऐसा माना है कि गुर्जर शासकों का धर्म मिहिर अर्थात सूर्य था । - [क्या मातृत्व स्त्री के पैरों की बेड़ी है?](https://www.ugtabharat.com/104631/) - लेखक - आर्य सागर फ्रांसीसी स्त्रीवादी सीमोन द बुवा ने एक बार कहा था- मातृत्व स्त्री मुक्ति की राह में बांधा है। उसी दौर में यूरोप जर्मनी में नाजी पार्टी ने एक नारा दिया- स्त्री -मुक्ति से स्त्रियों को खुद को मुक्त करना चाहिए। लोकतंत्र, नस्ल को लेकर नाजी विचारधारा अमानवीय अविकसित पुर्वाग्रह से भले - [भारत के इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है गुर्जर समाज का : केशव प्रसाद मौर्य](https://www.ugtabharat.com/104620/) - भारत के इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है गुर्जर समाज का : केशव प्रसाद मौर्य यहां के गांव बंबावड़ में स्थित आम्रपाली स्कूल में एक विशाल जनसभा को गुर्जर समाज - [भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की ओर दिया जा रहा है विशेष ध्यान](https://www.ugtabharat.com/104617/) - प्राचीनकाल में भारत के नागरिकों में स्वास्थ्य के प्रति चेतना का भाव जागृत रहता था। जागरूकता तो यहां तक थी कि किस प्रकार जीवन की दिनचर्या स्थापित हो कि परिवार में कोई बीमार ही नहीं हो, बीमारी का निदान तो आगे की प्रक्रिया रहती है। उस खंडकाल में प्रत्येक नागरिक इतना सजग रहता था कि - [वैदिक सम्पत्ति - 270 चतुर्थ खण्ड वेदों की शिक्षा](https://www.ugtabharat.com/104615/) - (ये लेखमाला हम पं० रघुनाथ शर्मा जी की वैदिक सम्पत्ति नामक पुस्तक के आधार पर सुधि पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं।) प्रस्तुति - देवेंद्र सिंह आर्य चेयरमैन 'उगता भारत सन्तति-बिस्तार का भयङ्कर चित्र खींचते हुए प्रो० माल्थस आदि प्रजनन शास्त्री कहते हैं कि संसार में जन संख्या सदैव बढ़ती रहती है और उस - [ट्रम्प प्रशासन द्वारा टैरिफ सम्बंधी लिए जा रहे निर्णयों का भारत पर प्रभाव](https://www.ugtabharat.com/104612/) - अमेरिका में दिनांक 20 जनवरी 2025 को नव निर्वाचित राष्ट्रपति श्री डॉनल्ड ट्रम्प द्वारा ली गई शपथ के उपरांत ट्रम्प प्रशासन आर्थिक एवं अन्य क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण फैसले बहुत तेज गति से ले रहा है। इससे विश्व के कई देश प्रभावित हो रहे हैं एवं कई देशों को तो यह भी समझ में नहीं - [खाद्य पदार्थों में कीटनाशक अवशेषों की बढ़ती समस्या](https://www.ugtabharat.com/104609/) - खाद्य पदार्थों में कीटनाशक अवशेषों की बढ़ती समस्या कुछ खाद्य पदार्थ, जैसे सब्ज़ियाँ, फल, अनाज, दालें और मसाले, विनियामक निकायों द्वारा निर्धारित अधिकतम अवशेष - [काम, क्रोध और लोभ से छुटकारा कैसे मिले](https://www.ugtabharat.com/104607/) - लोभ छटै संतोष से, काम छटै कर त्याग । लोभ-काम के त्याग से, बुझे क्रोध की आग ॥2765॥ भावार्थ :- प्राय देखा गया है कि मनुष्य काम, क्रोध और लोभ के भँवर-जाल में डूबता ही चला जाता है और मानव - जीवन बड़ा ही कष्टकर हो जाता है। लोभ ऐसी व्याधि है, जो जीवन भर - [चक्रवर्ती सम्राट कनिष्क गुर्जर वंश से थे – भाग 3](https://www.ugtabharat.com/104598/) - चक्रवर्ती सम्राट कनिष्क गुर्जर वंश से थे – भाग 3 - [चक्रवर्ती सम्राट कनिष्क गुर्जर वंश से थे - भाग 2](https://www.ugtabharat.com/104595/) - चक्रवर्ती सम्राट कनिष्क गुर्जर वंश से थे - भाग 2 - [चक्रवर्ती सम्राट कनिष्क गुर्जर वंश से थे - भाग 1](https://www.ugtabharat.com/104594/) - चक्रवर्ती सम्राट कनिष्क गुर्जर वंश से थे - भाग 1 - [अथर्ववेद-सामवेद भाष्यकार पंडित विश्वनाथ विद्यालंकार का संक्षिप्त परिचय](https://www.ugtabharat.com/104590/) - अथर्ववेद और सामवेद भाष्यकार तथा अनेक प्रसिद्ध वैदिक ग्रंथों के रचयिता पण्डितप्रवर श्रद्धेय पं. विश्वनाथ विद्यालंकार विद्यामार्तण्ड वैदिक साहित्य के मर्मज्ञ विद्वान् थे। पंडित विश्वनाथ विद्यालंकार का संक्षिप्त परिचय - [ईश्वर हमारा माता, पिता और आचार्य भी है](https://www.ugtabharat.com/104588/) - मनमोहन कुमार आर्य ईश्वर सच्चिदानन्दस्वरूप, निराकार, सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान, न्यायकारी, दयालु, अजन्मा, अनादि, अनन्त, अनुपम, सर्वाधार, सर्वेश्वर, सर्वव्यापक, सर्वान्तर्यामी, अजर, अमर, अभय एवं सृष्टिकर्ता है। वह जीवात्माओं के जन्म-जन्मान्तर के कर्मों के अनुसार न्याय करते हुए उन्हें भिन्न-भिन्न योनियों में जन्म देकर उनको सुख व दुःख रूपी भोग व फल प्रदान करता है। संसार में असंख्य - [होली दहन : हिंदू विज्ञान का रोग नाशक महायज्ञ](https://www.ugtabharat.com/104584/) - लेखक: डॉ सुरेश चव्हाणके मुख्य संपादक एवं चेयरमैन सुदर्शन न्यूज चैनल) भारत की संस्कृति और परंपराएँ सदियों से वैज्ञानिकता और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम रही हैं। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण परंपरा है होलीका दहन, जिसे अधिकांश लोग केवल एक धार्मिक अनुष्ठान मानते हैं। परंतु, यह केवल आस्था से जुड़ा पर्व नहीं, बल्कि एक गहन - [आत्मगौरव और स्वतंत्रता के भाव से पूरित विभिन्न हिन्दू राजवंश- अध्याय-1](https://www.ugtabharat.com/104581/) - भारत के 1235 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास भाग - 426 वे थमें नहीं, हम थके नहीं डॉ राकेश कुमार आर्य स्वामी विवेकानंद और योगी अरविंद का मत रहा है कि भारत की शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य अपने देश की विरासत की आध्यात्मिक महानता पर बल देना और उसे बनाए रखने के लिए हमारे दायित्व - [कौन सी धातु के बर्तन में भोजन करने से क्या क्या लाभ और हानि होती है ?](https://www.ugtabharat.com/104578/) - कौन सी धातु के बर्तन में भोजन करने से क्या क्या लाभ और हानि होती है ? - [नाम अनेक - वह ' एक' है](https://www.ugtabharat.com/104571/) - तारक है, निस्तारक है, वाहक है , संवाहक है । वह जगत नियंता परमेश्वर, नायक और नियामक है।। वही पालन कर्ता ,सुखकर्ता , दु:ख हर्ता भी कहा जाता, सृष्टि कर्ता परमेश्वर ही , न्यायाधीश कहा जाता।। ब्रह्मा विष्णु महेश वही है, गायत्री हमें बताती है। भू: भुव: स्व:- कहकर, सही अर्थ हमें समझाती है।। वरणीय - [प्रसिद्धि की बैसाखी बनता साहित्य में चौर्यकर्म](https://www.ugtabharat.com/104575/) - डॉ. सत्यवान सौरभ हरियाणा के एक लेखक द्वारा राज्य गान के रूप में एक गीत के चयन को लेकर हाल ही में एक बहस छिड़ी है, जिस पर साहित्यिक चोरी का आरोप लगाया गया है। अन्य लेखकों ने इस मामले पर अपनी चिंता व्यक्त की है और इसे राज्य के मुख्यमंत्री के ध्यान में लाया - [ईश्वर से प्रार्थना क्यों?](https://www.ugtabharat.com/104573/) - सर्व-प्रथम तो यह जानने की बात है कि 'प्रार्थना' किसे कहते हैं,तथा प्रार्थना कब करनी चाहिए।जो व्यक्ति प्रार्थना की परिभाषा व लक्षण को नहीं जानते,वे ही ऐसी शंकाएं किया करते हैं। ऋषि दयानन्द ने 'प्रार्थना' का स्वरुप निम्न प्रकार दर्शाया है-"अपने पूर्ण पुरुषार्थ के उपरान्त,उत्तम-कर्मों की सिद्धि के लिए परमेश्वर वा किसी सामर्थ्य वाले मनुष्य - [मुजफ्फरनगर में भारतीय संस्कार और संस्कृति से जुड़ा एक अनोखा गांव ऐसा भी](https://www.ugtabharat.com/104568/) - आर्य सागर मुजफ्फरनगर। टिटोड़ा जनपद मुजफ्फरनगर पश्चिमी उत्तर प्रदेश का ऐसा अनोखा गांव है जो पिछले 77 वर्षों से होली पर 3 दिन का यज्ञ महोत्सव आयोजित करता आ रहा है। जिस पर समसामयिक ज्वलंत विषयों पर वैचारिक गोष्ठी होती है ,जिसमें सभी अतिथि विद्वान वक्ता ग्रामीण सहभागी होते हैं। वैदिक जगत का ऐसा कोई - [सबसे अधिक मूल्यवान और उत्तम योनि मनुष्य की है](https://www.ugtabharat.com/104565/) - "संसार में लाखों योनियां हैं। उनमें से सबसे अधिक मूल्यवान और उत्तम योनि मनुष्य की है।" क्योंकि मनुष्य जीवन में बहुत सारी सुख सुविधाएं हैं, जो अन्य प्राणियों को ईश्वर ने लगभग नहीं दी। जैसे कि "ईश्वर ने मनुष्यों को 'विशेष बुद्धि' दी। बोलने के लिए 'भाषा' दी। कर्म करने के लिए 'दो हाथ' दिए। - [हमें जीवन तथा सुख-दुःख सृष्टिकर्ता ईश्वर की न्याय-व्यवस्था से मिलते है](https://www.ugtabharat.com/104563/) - मनमोहन कुमार आर्य हम मनुष्य कहलाते हैं। हमारा जन्म हमारे माता-पिता की देन होता है। माता-पिता को हमें जन्म देने व पालन करने में अनेक कष्ट उठाने पड़ते हैं। यदि हमारे माता-पिता यह सब न करते तो हमारा न जन्म होता और यदि जन्म होता भी तो हम स्वस्थ, बुद्धिमान व ज्ञानवान् न बनते। हमारे - [इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू (अध्याय - 08)](https://www.ugtabharat.com/104559/) - भारत की स्थापत्य कला पर नेहरू जी के विचार (अध्याय - 08) डॉ राकेश कुमार आर्य हिंदुस्तान की खोज के चौथे अध्याय में नेहरू जी सिंध घाटी की सभ्यता से अपनी बात को आरंभ करते हैं। वह कहते हैं कि- " हिंदुस्तान के गुजरे हुए जमाने की सबसे पहली तस्वीर हमें सिंध घाटी की सभ्यता - [आर्य समाज कर रहा है राष्ट्र जागरण में महत्वपूर्ण योगदान : डॉ राकेश कुमार आर्य](https://www.ugtabharat.com/104556/) - मुजफ्फरनगर। यहां पर शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्र जागरण के लिए मशहूर टिटोडा गांव के साधु आश्रम में आयोजित किए गए राष्ट्र जागरण सम्मेलन में विभिन्न वक्ताओं ने अपने ओजस्वी विचारों से उपस्थित जनगण का मार्गदर्शन किया। कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए श्री मांगेराम आर्य ने हमें बताया कि यहां पर पिछले 77 वर्ष - [आर्य समाज अस्तौली का 97 वां वार्षिकोत्सव धूमधाम से हुआ संपन्न](https://www.ugtabharat.com/104553/) - ग्रेटर नोएडा ( विशेष संवाददाता) यहां स्थित ऐतिहासिक आर्य समाज अस्तौली का 97 वां वार्षिकोत्सव धूमधाम से संपन्न हो गया। इस कार्यक्रम में अंतर्राष्ट्रीय संत स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज की विशेष उपस्थिति रही। जिन्होंने दो दिन तक लोगों का निरंतर मार्गदर्शन किया और वर्तमान में हिंदुत्व के सामने खड़ी चुनौतियों का सामना करने के लिए - [विदेशों में हिन्दू धर्म स्थलों पर आक्रमणों के पीछे का सच](https://www.ugtabharat.com/104550/) - विदेशों में हिन्दू धर्म स्थलों पर आक्रमणों के पीछे का सच खालिस्तानी अलगाववादियों से जुड़े कुछ अराजक तत्वों ने एक बार फिर अमेरिका में कैलिफोर्निया स्थित स्वामी - [ट्रम्प प्रशासन के टैरिफ सम्बंधी निर्णयों से कैसे निपटे भारत](https://www.ugtabharat.com/104548/) - ट्रम्प प्रशासन अमेरिका में विभिन्न उत्पादों के हो रहे आयात पर टैरिफ की दरों को लगातार बढ़ाते जाने की घोषणा कर रहा है क्योंकि ट्रम्प प्रशासन के अनुसार इन देशों द्वारा अमेरिका से किए जा रहे विभिन्न उत्पादों के आयात पर ये देश अधिक मात्रा में टैरिफ लगाते हैं। चीन, कनाडा एवं मेक्सिको से अमेरिका - [स्वच्छ भारत का महादेव मेहतर, दक्ष भारत का शिल्पी कारीगर](https://www.ugtabharat.com/104545/) - सृष्टि के आदिकाल से ऋषि, महर्षि, मुनि, धर्माचार्य और विश्ववारा संस्कृति के महानायकों, लोकनायकों ने स्वच्छता और दक्षता को जीवन के प्रथम सोपान में रखा है। यही कारण था कि यज्ञ वै श्रेष्ठतम् कर्म:को आराध्य मानकर प्रत्येक मनुष्य यज्ञ से ही अपना कार्य प्रारंभ करता था। ऋषि एवं ऋषिकाओं ने मान रखा था कि संस्कृत, - [संस्कार सोलह दिए विश्व को ...](https://www.ugtabharat.com/104541/) - संस्कार सोलह दिए विश्व को वह पुण्य भारत देश है। उत्कृष्ट भाषा संस्कृति और उत्कृष्ट जिसका वेश है ।। गर्भाधान क्रिया है वह जिसमें बीज का आधान हो। - [डांडी यात्रा और स्वामी दयानन्द](https://www.ugtabharat.com/104532/) - - डॉ विवेक आर्य आज 12 मार्च को डांडी यात्रा के 95 वर्ष पूर्ण होते है। डांडी यात्रा के माध्यम से गांधी जी ने अंग्रेजों द्वारा बनाए गए नमक कानून को तोड़कर उनकी सत्ता को चुनौती दी थी। बहुत कम लोग जानते है कि गाँधी जी के प्रयासों से लगभग अर्ध शताब्दी पहले स्वामी दयानन्द - [कश्मीर पर विदेश मंत्री एस जयशंकर की दो टूक](https://www.ugtabharat.com/104529/) - भारत विश्व की आर्थिक शक्ति बनने की ओर तेजी से अग्रसर है। ऐसे में भारत के तेजी से बढ़ते कदमों को देखकर कई हमारे देश के विदेश मंत्री एस. जयशंकर का होना हमारे - [इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू (अध्याय 7)](https://www.ugtabharat.com/104527/) - इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू (डिस्कवरी ऑफ इंडिया की डिस्कवरी) - [क्या स्त्रियों को भी गायत्री जप का अधिकार है](https://www.ugtabharat.com/104518/) - गायत्री मन्त्र के जप का अधिकार स्त्रियों को नहीं है। ये हमारे शास्त्रों के विरुद्ध है। प्राचीन काल में सभी स्त्रियां व पुरुष नित्य गायत्री की उपासना करते - [मनुस्मृति और नारी जाति](https://www.ugtabharat.com/104516/) - मनुस्मृति और नारी जाति का अपमान किया है। मनुस्मृति में नारी के विषय में बहुत सारी अनर्गल बातें लिखी है। मैंने पूछा आपने कभी मनुस्मृति पुस्तक रूप में देखी है। वह - [स्वामी भीष्म जी का बल](https://www.ugtabharat.com/104514/) - स्वामी भीष्म जी का बल - [वैदिक सम्पत्ति -269 चतुर्थ खंड वेदों की शिक्षा](https://www.ugtabharat.com/104508/) - वैदिक सम्पत्ति -269 चतुर्थ खंड वेदों की शिक्षा - [स्फटिक है आत्मा,अन्तःकरण में दोष](https://www.ugtabharat.com/104505/) - स्फटिक है आत्मा, अन्तःकरण में दोष । अन्तःकरण सुधार ले, सुख-शान्ति का कोष॥2763॥ तत्त्वार्थ:- पाठकों को यह बात अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि आत्मा स्फटिक की तरह अमल है, निर्मल है और दोष मुक्त है। आवश्यकता है अन्तःकरण को पवित्र करने की। इस अन्तःकरण में ही सूक्ष्म शरीर रहता है। राग-द्वेष,काम - क्रोध, ईष्या-घृणा, - [अमृत महोत्सव](https://www.ugtabharat.com/104501/) - देवभूमि भारत से हो रही स‌द्भाव की वृष्टि कायम सर्वत्र अमन, है वतन की दृष्टि आस्था के बाड़ा में खिल रहा संस्कार सुमन नव सुरभि से प्रफुल्लित तन-मन कण-कण से निकल रहा अमर संदेश रव सचमुच यही भारत का अमृत महोत्सव। निरंतर बह रही प्यार की हवा समस्त रोग की एक मात्र दवा सुलगना बन्द - [निजी अस्पतालों में मरीजों का शोषण सबसे बड़ी चिंता का विषय](https://www.ugtabharat.com/104497/) - निजी अस्पतालों में मरीजों का शोषण सबसे बड़ी चिंता का विषय - [आर्य समाज के विशिष्ट कवि व भजनोपदेशक स्वामी भीष्म जी महाराज](https://www.ugtabharat.com/104495/) - आर्य समाज के विशिष्ट कवि व भजनोपदेशक स्वामी भीष्म जी महाराज - [देश में पहली बार आर्य उप प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम बुद्ध नगर द्वारा मनाया जाएगा मनु व मनुस्मृति महोत्सव 2025](https://www.ugtabharat.com/104487/) - प्रतिवर्ष नववर्ष के अवसर पर राष्ट्रीय महोत्सव के रूप में मनाने की डाली जाएगी परंपरा यह एक सर्वविदित तथ्य है कि संसार के आदि संविधान निर्माता और व्यवस्थापक महर्षि मनु के साथ बहुत भारी अन्याय किया गया है । देश में अनेक लोगों ने मनु की कथित जाति व्यवस्था पर न जाने कितने पत्थर फेंक - [अकबर को जब वीर हिन्दू रमणी किरण देवी ने सबक सिखाया था](https://www.ugtabharat.com/104484/) - अकबर को जब वीर हिन्दू रमणी किरण देवी ने सबक सिखाया था दिल्ली में वह "मीना बाजार" लगवाता था। उसमें आने वाली हिन्दू युवतियों पर निगाह रखता था। - [आत्मा के जन्म - मरण व जीवन का न आरम्भ है और न अन्त है](https://www.ugtabharat.com/104482/) - आत्मा का जन्म -मरण व जीवन का न आरम्भ है और न अन्त है - [नशे के विरुद्ध व्यापक अभियान की आवश्यकता](https://www.ugtabharat.com/104480/) - नशे के विरुद्ध अभियान पंजाब में आतंकवाद की ही तरह नशे एवं ड्रग्स के धंधे ने व्यापक स्तर पर अपनी पहुंच बनाई है, जिसके दुष्परिणाम पंजाब के साथ-साथ समूचे देश को - [विश्व को अनुपम हमारी देन है](https://www.ugtabharat.com/104475/) - डॉ राकेश कुमार आर्य चर्चा हमारे उत्थान की संसार में सब ओर थी, हमारे ज्ञान और विज्ञान की धाक चहुंओर थी। हमारे सद्‌गुणों की कीर्ति पर संसार सारा मुग्ध था, विधाता के हाथ में हमारी नियति की डोर थी।। ऋषिगण हमारे उपनिषद में करते थे चर्चा ब्रह्म की, जीवन जगत के गंभीर प्रश्न और मानव - [भाषा विवाद : सांझी विरासत को आग मत लगाओ](https://www.ugtabharat.com/104472/) - बहुत ही दु:ख का विषय है कि आज संस्कृत और संस्कृतनिष्ठ हिंदी को लेकर दक्षिण के तमिलनाडु से एक बार फिर विरोधी स्वर उठते हुए दिखाई दे रहे हैं। वहां के मुख्य - [यहां कठिनाइयों से गुज़रती है ज़िंदगी](https://www.ugtabharat.com/104468/) - सुप्रिया सिन्हा पटना, बिहार देश के बड़े शहरों और महानगरों में दो तरह की ज़िंदगी नज़र आती है. एक ओर जहां चमचमाती सड़कें, गगनचुंबी इमारतें और आधुनिक सुख सुविधाओं से सजी कॉलोनियां होती हैं, वहीं दूसरी ओर संकरी गलियों में झुग्गी झोपड़ियां भी आबाद होती हैं. जिसे स्लम बस्ती के रूप में जाना जाता है. - [व्यक्ति का वास्तविक विकास किसे कहते हैं?](https://www.ugtabharat.com/104465/) - व्यक्ति का विकास किसे कहते हैं? परिवार में वास्तविक विकास तो तभी कहलाता है, जब परिवार के सदस्य एक घर में रहते हों। साथ में बैठकर खाना खाते हों, आपस के सुख-दु - [अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप कृपया ध्यान दें ...](https://www.ugtabharat.com/104460/) - अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के बीच अभी हाल ही में व्हाइट हाउस में जिस प्रकार की गर्म गर्मी का माहौल बना और यूक्रेन के - [स्वाध्याय व साधना से आत्मा की उन्नति व शारीरिक सुख का लाभ होता है](https://www.ugtabharat.com/104458/) - स्वाध्याय व साधना से आत्मा की उन्नति व शारीरिक सुख का लाभ होता है - [वैदिक संपत्ति - 268 चतुर्थ खण्ड वेदों की शिक्षा](https://www.ugtabharat.com/104449/) - वैदिक संपत्ति - 268 चतुर्थ खण्ड वेदों की शिक्षा - [शमशानों के सन्नाटे ही](https://www.ugtabharat.com/104428/) - डॉ राकेश कुमार आर्य ना रूप बचे , ना भूप बचे, काल के ग्रास बने सब ही। ना योगी बचे,ना तपसी बचे, नामशेष रह गए सब ही।। जिनसे कभी धरती हिलती थी, वह भी मिट्टी की भेंट चढ़े। जिनसे कभी अंबर डरता था, वह भी मिट्टी में दबे पड़े।। अप्रतिम जिनका बाहुबल था, विराट बने - [महाकुंभ अद्भुत अद्वितीय विश्व सांस्कृतिक एकता का प्रतीक](https://www.ugtabharat.com/104446/) - महाकुंभ: एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विश्व भर का सबसे बड़ा व श्रैष्ठतम उत्सव था ।महाकुंभ एक ऐसा उत्सव है जो हर 12 वर्षों में आयोजित किया जाता है,इस वर्ष यह महाकुंभ 144 वर्ष बाद के विशेष महत्व को दर्शाते हुए आयोजित किया गया,जिसमें लाखों श्रद्धालु और साधु-संत एकत्रित हुए थे और संगम नदी में स्नान - [2050 तक आधी दुनिया होगी दृष्टि दोष की गिरफ्त में](https://www.ugtabharat.com/104435/) - 2050 तक आधी दुनिया होगी दृष्टि दोष की गिरफ्त में - [क्यों क्रूर बदमाशी का रूप ले रही है रैगिंग ?](https://www.ugtabharat.com/104440/) - रैगिंग को प्रभावी ढंग से समाप्त करने के लिए सख्त और त्वरित दंड आवश्यक है। संभावित रैगर्स को हतोत्साहित करने के लिए, सुनिश्चित करें कि तत्काल अनुशासनात्मक उपाय किए जा - [वैदिक सम्पत्ति - 267 आर्य गृह, ग्राम और नगर](https://www.ugtabharat.com/104438/) - वैदिक सम्पत्ति - 267 आर्य गृह, ग्राम और नगर - [कैग की रिपोर्ट बनाम कट्टर ईमानदार](https://www.ugtabharat.com/104432/) - अन्ना आंदोलन के दौरान केजरीवाल ने कैग की रिपोर्ट का हवाला देकर ही कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे । केजरीवाल कहते थे कि वो जब सत्ता में आएंगे तो इस - [मुनष्य को वेदाध्ययन करने सहित उपासक तथा सदाचारी होना चाहिये](https://www.ugtabharat.com/104430/) - मुनष्य को वेदाध्ययन बुद्धि को सद्ज्ञान प्राप्ति, अपने आचरणों की शुद्धि व परोपकार में लगाते हैं वह मनुष्य धन्य होते हैं। उन्हें आत्म-सन्तोष रूपी सुख - [बिखरे मोती](https://www.ugtabharat.com/104426/) - आँसुओं के संदर्भ में दो शब्द एवम् 'शेर' : - "ठहरो मनुष्य की कान्ति के अमर मोतियो !" आँखों में ही ठहरो । आँखो से बाहर निकलकर अपना अपमान क्यों कराना चाहते हो ? संसार में आँसुओं का मोल पत्थर - हृदय क्या जाने ? इनकी परख तो वहीं समझता है जिसका हृदय करुणा और - [इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू - अध्याय -4](https://www.ugtabharat.com/104423/) - इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू ( डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया की डिस्कवरी ) भारत के अतीत का विशाल दृश्य डॉ राकेश कुमार आर्य हिंदुस्तान की कहानी में "हिंदुस्तान के अतीत का विशाल दृश्य" नामक अध्याय के शीर्षक को पढ़ने से लगता है कि नेहरू जी अपनी इस पुस्तक में रामायणकालीन, महाभारतकालीन और इस बीच या उसके - [केजरीवाल के लिए जी का जंजाल बनी कैग रिपोर्ट](https://www.ugtabharat.com/104421/) - केजरीवाल के लिए जी का जंजाल बनी कैग रिपोर्ट - [वैदिक संपत्ति 266 - आर्य गृह, ग्राम और नगर](https://www.ugtabharat.com/104418/) - वैदिक संपत्ति 266 - आर्य गृह, ग्राम और नगर - [क्या आप सरदार पटेल पर.. मुस्लिमों के जानलेवा हमले के बारे में जानते हैं..?](https://www.ugtabharat.com/104413/) - क्या आप सरदार पटेल पर.. मुस्लिमों के जानलेवा हमले के बारे में जानते हैं..? बिल्कुल नहीं.. क्योंकि यह स्कूलों के शिक्षाक्रम से निकाल दिया गया है.. क्योंकि इससे भाईचारे वाले मजहब की सच्चाई सामने आती है..! आज भी कहीं दंगे होते हैं.. तो दंगा करने वाले समाज का नाम प्रकाशित करने पर पाबंदी है.. क्या - [जब नेहरू ने तत्कालीन राष्ट्रपति की उपेक्षा कर संविधान की मूल प्रति पर पहले स्थान पर कर दिए थे अपने हस्ताक्षर](https://www.ugtabharat.com/104406/) - डॉ राकेश कुमार आर्य यह एक आश्चर्यजनक संयोग ही था कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू जहां तड़क-भड़क का जीवन जीने में विश्वास रखते थे, वहीं देश के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद पूर्णतया सादगी से रहना पसंद करते थे। नेहरू जी पर विदेशी संस्कृति का प्रभाव था, जबकि डॉ राजेंद्र प्रसाद भारतीयता - [मनुस्मृति का सन्देश है कि सब मनुष्य विद्या पढे़ व धर्मात्मा होकर अन्य सबको सद्धर्म का उपदेश करें](https://www.ugtabharat.com/104403/) - मनुस्मृति का सन्देश है कि सब मनुष्य विद्या पढे़ व धर्मात्मा होकर अन्य सबको सद्धर्म का उपदेश करें - [यमों व नियमों के पालन से ही आत्मा की उन्नति सम्भव है](https://www.ugtabharat.com/104401/) - यमों व नियमों के पालन से ही आत्मा की उन्नति सम्भव है - [दलितों और नारी जाति के सच्चे हितैषी थे स्वामी श्रद्धानंद](https://www.ugtabharat.com/104397/) - दलितों और नारी जाति के सच्चे हितैषी थे स्वामी श्रद्धानंद - [विवाह के झूठे वादों से दुष्कर्म के बढ़ते मामले](https://www.ugtabharat.com/104394/) - विवाह के झूठे वादों से दुष्कर्म के मामले हाल के वर्षों में बलात्कार के ऐसे मामलों की संख्या में वृद्धि हुई है, जिनमें अभियुक्त पर बलात्कार का आरोप लगाया जाता है - [भारतीय राष्ट्रवाद का प्रमुख मूल्य है मानवतावाद: डॉ आर्य](https://www.ugtabharat.com/104391/) - यहां पर स्थित अमलतास कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन तिलौथू में स्वर्गीय विपिन बिहारी सिंह जी की स्मृति में आयोजित की गई संगोष्ठी में ' सभ्यता संस्कृति और राष्ट्रवाद - [इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू - अध्याय 3](https://www.ugtabharat.com/104389/) - डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया की डिस्कवरी भारत की सांस्कृतिक विरासत की संसार के अनेक विद्वानों ने मुक्त कंठ से सराहना की है, परंतु (नेहरू जी कई बार और कई स्थानों पर भारती - [जब नेताजी ने कहा था कि चरण स्पर्श करना या शीश झुकाना गुलामी का प्रतीक है, इसलिए केवल जय हिंद बोलो...](https://www.ugtabharat.com/104385/) - डॉ राकेश कुमार आर्य आज मैं बिहार के सासाराम जिले में प्रवास पर हूं। यहां पर तिलौथू हाउस में श्रीमान रणजीत सिन्हा जी के यहां रुका हुआ हूं। यहां पर कई प्रकार की विशेष जानकारी प्राप्त हुई। श्रीमान सिंह जी के एक संबंधी आजाद हिंद फौज की लेफ्टिनेंट लेफ्टिनेंट भारती 'आशा' सहाय चौधरी के सुपुत्र - [सत्संग स्वर्ग और कुसंग नरक है](https://www.ugtabharat.com/104382/) - सत्संग स्वर्ग और कुसंग नरक है स्वर्ग और नरक है सत्संग और कुसंग - [दिल्ली की नई मुख्यमंत्री : चुनौतियों का सफर](https://www.ugtabharat.com/104363/) - दिल्ली की नई मुख्यमंत्री : चुनौतियों का सफर - [ऋषि दयानन्द के बतायें मार्ग पर चलकर जीवन को सफल बनायें](https://www.ugtabharat.com/104373/) - हम वेदों के पुनरुद्धार एवं देश से अविद्या व अन्धविश्वासों को दूर करने के लिये ऋषि दयानन्द सहित उनके गुरु स्वामी विरजानन्द, स्वामी दयानन्द के संन्यास गुरु - [आयकर कानून के सरल होने से विवाद घटेंगे](https://www.ugtabharat.com/104368/) - वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में गुरुवार को 64 साल पुराने आयकर कानून - 1961 के सरलीकरण और इसमें चले आ रहे बेवजह के प्रविधानों को समाप्त करने के - [ऋषि दयानन्द के तप, त्याग व भावनाओं को ध्यान में रखकर हमें उनके वेद-भाष्य सहित सभी ग्रन्थों का स्वाध्याय व आचरण करना चाहिये](https://www.ugtabharat.com/104360/) - ऋषि दयानन्द के तप, त्याग व भावनाओं को ध्यान में रखकर हमें उनके वेद-भाष्य सहित सभी ग्रन्थों का स्वाध्याय व आचरण करना चाहिये - [अचानक मौतें : उत्सवों में घुलती अनदेखी त्रासदी...](https://www.ugtabharat.com/104358/) - अचानक मौतें शादी-ब्याह और उत्सव अब खुशियों के बजाय अनहोनी के साये में सिमट रहे हैं। देखते ही देखते अचानक गिरते लोग ओर मौत,ये घटनाएँ डराने लगी हैं। - [स्वामी जगदीश्वरानन्द सरस्वती का आर्य वैदिक साहित्य के प्रणयन एवं सम्पादन में प्रशंसनीय योगदान](https://www.ugtabharat.com/104355/) - स्वामी जगदीश्वरानन्द सरस्वती का आर्य वैदिक साहित्य के प्रणयन एवं सम्पादन में प्रशंसनीय योगदान - [माता पिता की सेवा से ही सन्तान का जीवन सुखी व सफल होता है](https://www.ugtabharat.com/104351/) - हम इस संसार में माता-पिता के द्वारा जन्म प्राप्त पर यहां आये हैं। यदि हमारे माता-पिता न होते तो हमारा जन्म नहीं हो सकता था। माता पिता की सेवा से ही सन्तान का - [अत्यधिक महत्वकांक्षा से टूटती परिवार के रिश्तों की डोर](https://www.ugtabharat.com/104348/) - अत्यधिक महत्वकांक्षा से टूटती परिवार के रिश्तों की डोर - [श्रम करो - पुरुषार्थ करो](https://www.ugtabharat.com/104343/) - श्रम करो - पुरुषार्थ करो , यही सनातन कहता है विश्राम नहीं, थकने से पहले ,ज्ञान पुरातन कहता है।। - [धनाढ्यों का विदेश पलायन देश के लिए कितना हानिकारक है ?](https://www.ugtabharat.com/104330/) - धनाढ्यों का विदेश पलायन देश के लिए कितना हानिकारक है ? - [जनरेशन जेड का भारत](https://www.ugtabharat.com/104332/) - वर्ष 1997 से लेकर वर्ष 2016 की अवधि के बीच पैदा होने वाले बच्चों को जनरेशन जेड ( जेन जी) या नेटजेनरेशन भी कहा जाता है इस जनरेशन के और अन्य भी नाम है। 7 से 19 - [नाम अनेक - वह 'एक' है](https://www.ugtabharat.com/104329/) - तारक है, निस्तारक है, वाहक है , संवाहक है । वह जगत नियंता परमेश्वर, नायक और नियामक है।। वही पालन कर्ता ,सुखकर्ता , दु:ख हर्ता भी कहा जाता, सृष्टि कर्ता परमेश्वर ही , न्यायाधीश कहा जाता।। ब्रह्मा विष्णु महेश वही है, गायत्री हमें बताती है। भू: भुव: स्व:- कहकर, सही अर्थ हमें समझाती है।। वरणीय - [गुरुकुल नवप्रभात वैदिक विद्यापीठ नुआंपाली बरगड़म ओडिशा का वार्षिकोत्सव हुआ सम्पन्न](https://www.ugtabharat.com/104323/) - गुरुकुल नवप्रभात वैदिक विद्यापीठ नुआंपाली बरगड़म ओडिशा का वार्षिकोत्सव हुआ सम्पन्न - [तप का वैदिक स्वरुप](https://www.ugtabharat.com/104320/) - तप का वैदिक स्वरुप एक युवक पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद के किसी गांव का है। इसके विषय में प्रचारित हैं कि इसने 41दिन अनवरत खड़े होकर आज के परिपेक्ष्य - ['होता' भाव जीवन में धारो](https://www.ugtabharat.com/104312/) - बनकर हंस रहो जग में, मत भीगो जग के पानी में। हीरे के सम रहो चमकते, कुछ कर लो काम जवानी में।। वसु - भाव से जीना सीखो, वृद्धि करो, मुझे भी करने दो। ऐश्वर्यसंपन्न बन जीवन जिओ, सुखी रहो, मुझे भी रहने दो।। 'होता' भाव जीवन में धारो, सर्वस्व समर्पित कर डालो। सद्भाव - - [विद्या : धर्म का आठवाँ लक्षण](https://www.ugtabharat.com/104311/) - विद्या : धर्म का आठवाँ लक्षण अविद्या का नाश और विद्या की वृद्धि करनी चाहिए। विद्या का जो पढ़ना-पढ़ाना है यही सबसे उत्तम है। - [दान एक निष्काम सेवा ? दान देने सम्बंधित भ्रांतिया और निवारण](https://www.ugtabharat.com/104310/) - संसार में जितने भी दान हैं अर्थात् जल, अन्न, गौ, पृथ्वी, वस्त्र, तिल, सुवर्ण और घृतादि। .इन सभी दानों में से वेदविद्या का दान अतिश्रेष्ठ है।इसलिए जितना बन सके. उतना तन, मन, धन से विद्या में वृद्धि करें। - [हिंदू राष्ट्रनीति व हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज (क)](https://www.ugtabharat.com/104309/) - यह दिन छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन को ही नहीं , उनके चरित्र महाराष्ट्र तथा जनमानस के लिए भी एक अभूतपूर्व घटना थी । शिवाजी ने राज्याभिषेक से 20 वर्ष पूर्व - [राजनीति में युवाओं की भागीदारी की आवश्यकता](https://www.ugtabharat.com/104301/) - राजनीति में युवाओं की भागीदारी की आवश्यकता पहला कदम सरकार द्वारा युवा मानदंड में बदलाव करना होगा। आज 34-35 वर्ष की आयु के लोगों को भी युवा माना जाता है। - [भारत ने विभिन्न क्षेत्रों में प्राप्त की हैं असाधारण उपलब्धियां](https://www.ugtabharat.com/104300/) - भारत ने विभिन्न क्षेत्रों में प्राप्त की हैं असाधारण उपलब्धियां - [आखिर दिल्ली में क्यों ढ़हा ‘आप’ का किला ?](https://www.ugtabharat.com/104298/) - आखिर दिल्ली में क्यों ढ़हा ‘आप’ का किला ? - [देश का पार्टी तंत्र बनाम लोकतंत्र](https://www.ugtabharat.com/104287/) - जहां लोकतंत्र योग्य लोगों को सामने लाने की भावना पर बल देता है, वहीं पार्टी तंत्र अयोग्य लोगों के माध्यम से लोकतंत्र को हड़पने का या उसकी हत्या करने का काम करता - [देश के कर्णधार हमारे शिक्षक व शिष्य कैसे हों?](https://www.ugtabharat.com/104285/) - देश के कर्णधार हमारे शिक्षक व शिष्य कैसे हों? - [सत्य के ग्रहण तथा अन्धविश्वासों के त्याग में ही जीवन की सार्थकता है](https://www.ugtabharat.com/104283/) - सत्य के ग्रहण तथा अन्धविश्वासों के त्याग में ही जीवन की सार्थकता है - [आप की राजनीति और दिल्ली के चुनाव परिणाम](https://www.ugtabharat.com/104278/) - दिल्ली चुनाव परिणाम केजरीवाल के खिलाफ आए हैं। केजरीवाल पिछले 11 वर्ष से जिस प्रकार दिल्ली की जनता का मूर्ख बना रहे थे, झूठे वादे कर लोगों को भ्रमित कर रहे थे, - [अवैध प्रवासियों की अनीतिपूर्ण वापसी जुड़े सवाल](https://www.ugtabharat.com/104277/) - डंकी रूट यानी गैरकानूनी तरीके से अमेरिका गये करीब 200 भारतीयों को राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने जिस असुविधा एवं अपमानजनक तरीके से अपने सैनिक विमान अवैध प्रवासियों - [अंतिम हिंदू](https://www.ugtabharat.com/34933/) - "अन्तिम हिन्दू" हितकारी प्रकाशन समिति, हिण्डौन सिटी द्वारा ‘अन्तिम हिन्दू’ नाम की एक लघु पुस्तक प्रकाशित की गई है। पुस्तक का मुद्रित मूल्य है रुपये 14.00 है। पुस्तक के आवरण पृष्ठ के अन्दर के पृष्ठ पर विचारक ओर राजनेता मधु लिमये जी की चेतावनी प्रकाशित की गई है। उन्होंने कहा है ‘‘जैसा कि 50 वर्ष - [रेपो दर में कमी के साथ ही भारत में ब्याज दरों के नीचे जाने का चक्र प्रारम्भ](https://www.ugtabharat.com/104265/) - रेपो दर में कमी के साथ ही भारत में ब्याज दरों के नीचे जाने का चक्र प्रारम्भ - [नई कृषि योजना से किसान हो पायेगा धन-धान्य पूर्ण?](https://www.ugtabharat.com/104261/) - नई कृषि योजना से किसान हो पायेगा धन-धान्य पूर्ण? - [दहेज प्रथा व दहेज उन्मूलनरत संगठनों के सम्बन्ध में गांधी जी की विचार दृष्टि](https://www.ugtabharat.com/104257/) - दहेज प्रथा व दहेज उन्मूलनरत संगठनों के सम्बन्ध में गांधी जी की विचार दृष्टि - [किताबों और अखबारों को बनाइए अपना साथी, ज़िन्दगी को जीने और देखने का बदल जाएगा नज़रिया](https://www.ugtabharat.com/104247/) - किताबों और अखबारों को बनाइए अपना साथी, ज़िन्दगी को जीने और देखने का बदल जाएगा नज़रिया - [संविधान की धज्जियां उड़ाते राहुल गांधी](https://www.ugtabharat.com/104253/) - संविधान की धज्जियां उड़ाते राहुल गांधी - [शमशानों के सन्नाटे ही](https://www.ugtabharat.com/104246/) - शमशानों के सन्नाटे ही - [स्वामी श्रद्धानन्द द्वारा सन् 1891 के हरिद्वार कुम्भ मेले में प्रथमवार वैदिक धर्म का प्रचार किया था](https://www.ugtabharat.com/104245/) - स्वामी श्रद्धानन्द द्वारा सन् 1891 के हरिद्वार कुम्भ मेले में प्रथमवार वैदिक धर्म का प्रचार किया था - [आत्मा का स्वरूप क्या है?](https://www.ugtabharat.com/104228/) - आत्मा का स्वरूप क्या है? - [नये पथ पर दस जनपथ](https://www.ugtabharat.com/8223/) - प्रणव मुखर्जी को राषट्रपति पद के उम्मीदवार बनाये जाने का जिस तरह खुद सोनिया ने यूपीए की बैठक में चार लाइनें पढ़कर ऐलान किया, उसके बाद से दिल्ली के राजनीतिक गलियारे में चर्चा यही है कि क्या गांधी परिवार बदल गया है? या सोनिया गांधी बदल गई है? चर्चा की वजह एक ही है। जिस - [‘‘स्वराज्य ले लो’’ से स्वराज्य खरीद लो तक](https://www.ugtabharat.com/8216/) - ‘‘स्वराज्य ले लो’’ से स्वराज्य खरीद लो तक - [वैदिक सम्पत्ति 265 - आर्य गृह, ग्राम और नगर](https://www.ugtabharat.com/104234/) - वैदिक सम्पत्ति 265 - आर्य गृह, ग्राम और नगर - [आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है](https://www.ugtabharat.com/104229/) - आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है - [सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को समर्पित रहा ज्ञान इंटरनेशनल स्कूल पल्ला का 16वां वार्षिकोत्सव](https://www.ugtabharat.com/104209/) - बसंत पंचमी के अवसर पर ज्ञान इंटरनेशनल स्कूल पल्ला का वार्षिक उत्सव बड़े हर्ष और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। ज्ञात रहे कि इस विद्यालय की स्थापना वर्ष 2009 में की - [आर्यदीप पब्लिक स्कूल का 30वां वार्षिकोत्सव हुआ संपन्न](https://www.ugtabharat.com/104210/) - आर्यदीप पब्लिक स्कूल का 30वां वार्षिकोत्सव हुआ संपन्न - [सत्व - भाव में जीते रहना](https://www.ugtabharat.com/104205/) - जब नभ में सूरज चढ़ता हो, मौन रह , करते सब वंदन। भूमंडल की सभी शक्तियां, शीश झुकाए करें अभिनंदन।। उत्थान काल में बढ़ती गर्मी, विस्तार दिलाती है तुमको। जैसे नभ में चढ़ा सूर्य, हर लेता है सारे तम को।। उत्थान काल में बढ़ते रहना, विनम्र और सहज बनकर। सत्व - भाव में जीते रहना, - [बजट 2025 : मध्यम वर्ग के लिए बड़ी सौगात](https://www.ugtabharat.com/104199/) - बजट 2025 : मध्यम वर्ग के लिए बड़ी सौगात - [प्रयागराज, तीर्थराज और त्रिवेणी संगम की वास्तविकता, भाग - 4](https://www.ugtabharat.com/104160/) - प्रयागराज, तीर्थराज और त्रिवेणी संगम की वास्तविकता, भाग - 4 - [चिंताजनक है बच्चों के साथ समय न बिताना](https://www.ugtabharat.com/104192/) - चिंताजनक है बच्चों के साथ समय न बिताना - [वित्तीय वर्ष 2025-26 का अग्रणी, पथप्रदर्शक एवं अतुलनीय बजट](https://www.ugtabharat.com/104198/) - वित्तीय वर्ष 2025-26 का अग्रणी, पथप्रदर्शक एवं अतुलनीय बजट Budget 2025 - [वसंत हृदय में धार ले, कहती है नव भोर](https://www.ugtabharat.com/104189/) - वसंत हृदय में धार ले, कहती है नव भोर - [आधुनिक इतिहास में शुद्धि समर्थक राष्ट्र नेताओं के नाम](https://www.ugtabharat.com/104167/) - आधुनिक इतिहास में शुद्धि समर्थक राष्ट्र नेताओं के नाम - [तैमूरलंग का सामना](https://www.ugtabharat.com/104170/) - तैमूरलंग के नाम से सभी भारतीय परिचित है। तैमूर के अत्याचारों से हमारे देश की भूमि रक्तरंजित हो गई। उसके अत्याचारों की कोई सीमा नहीं थी। - [वैदिक ईश्वर स्तुति प्रार्थना उपासना मन्त्र](https://www.ugtabharat.com/104164/) - वैदिक ईश्वर स्तुति प्रार्थना उपासना मन्त्र - [प्रयागराज, तीर्थराज और त्रिवेणी संगम की वास्तविकता, भाग - 3](https://www.ugtabharat.com/104158/) - प्रयागराज, तीर्थराज और त्रिवेणी संगम की वास्तविकता, भाग - 3 - [काम भयंकर विषधर है](https://www.ugtabharat.com/104165/) - काम भयंकर विषधर है, नहीं बचा दंश से कोई भी। काम कुचाली भूचाली के, ना बचा वेग से कोई भी।। बहुत भयंकर डकैत देह में, बैठा हुआ है छुप करके। जागृत करता पापवासना, विवेक का दीप बुझा करके।। जितने भर भी पाप जगत में, होता सबका मुखिया काम। देह जलाता - गेह जलाता, अपयश - - [प्रयागराज, तीर्थराज और त्रिवेणी संगम की वास्तविकता, भाग - 1](https://www.ugtabharat.com/104005/) - प्रयागराज, तीर्थराज और त्रिवेणी संगम - [किए का फल मिलना निश्चय](https://www.ugtabharat.com/104141/) - किए का फल मिलना निश्चय - [सीमित संसाधनों से प्रभावित होती कृषि](https://www.ugtabharat.com/104142/) - सीमित संसाधनों से प्रभावित होती कृषि - [क्या भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बन जाएगा](https://www.ugtabharat.com/104143/) - क्या भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बन जाएगा - [सामाजिक नैतिकता को दीमक सरीखा चाट रहा एकल परिवारों का चलन](https://www.ugtabharat.com/104144/) - सामाजिक नैतिकता को दीमक सरीखा चाट रहा एकल परिवारों का चलन - [अमेरिका की फंडिंग बन्द होने से बीमार होता विश्व स्वास्थ्य संगठन](https://www.ugtabharat.com/104138/) - अमेरिका की फंडिंग बन्द होने से बीमार होता विश्व स्वास्थ्य संगठन - [प्रयागराज भगदड़ : प्रशासनिक लापरवाही या भक्तों का उन्माद](https://www.ugtabharat.com/104135/) - प्रयागराज भगदड़ के बारे में सुनना दुर्भाग्यपूर्ण है, जिसके परिणामस्वरूप कई लोगों की जान चली गई। यह घटना निस्संदेह विभिन्न मीडिया प्लेटफार्मों पर व्यापक चर्चाओं - [डटकर संघर्ष किया हमने](https://www.ugtabharat.com/104131/) - मिला है जीवन लड़ने को, तूफान जगत के जितने भी। 'अर्जुन' ! तुझको लड़ना होगा, महारथी खड़े हों कितने भी।। तूफानों से पीठ फेरना, ना रहा हमारी रीति में। डटकर संघर्ष किया हमने, यही लिखा हमारी नीति में।। जब ललकारे कोई ' दुर्योधन', करे चीरहरण किसी नारी का। कभी तेज तुम्हारा झुके नहीं, करो अंत - [वित्तीय वर्ष 2025-26 के केंद्रीय बजट से मिल सकती हैं कई सौगातें](https://www.ugtabharat.com/104130/) - वित्तीय वर्ष 2024-25 की पहली छमाही (अप्रेल-सितम्बर 2024) में भारत की आर्थिक विकास दर कुछ कमजोर रही है। प्रथम तिमाही (अप्रेल-जून 2024) में तो सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर गिरकर 5.2 प्रतिशत के निचले स्तर पर आ गई थी। इसी प्रकार द्वितीय तिमाही (जुलाई-सितम्बर 2024) में भी सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर 5.4 - [यमुना जल पर केजरीवाल का बवाल](https://www.ugtabharat.com/104127/) - दिल्ली विधानसभा चुनाव का प्रचार इस समय अपने चरम पर है। भारतीय राजनीति में अपनी नौटंकियों के लिए मशहूर हो चुके आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल चुनाव में अपनी जमीन को खिसकती देखकर कुछ बौखलाए से लग रहे हैं। उन्होंने उन्होंने अपने चिर परिचित शैली में हरियाणा पर आरोप लगाया है कि - [रामचन्द्र जी का अद्भुत दर्शन](https://www.ugtabharat.com/104089/) - रामचन्द्र जी का अद्भुत दर्शन - [सन्यास किसे कहते हैं ?](https://www.ugtabharat.com/104115/) - सन्यास किसे कहते हैं ? - [वैदिक सम्पत्ति -264 आर्य गृह, ग्राम और नगर](https://www.ugtabharat.com/104114/) - वैदिक सम्पत्ति दे सीधे, मिट्टी लकड़ी और घास के छोटे छोटे मकान झाड़ने और लीपने पोतने से नित्य पवित्र हो जाते हैं, परन्तु बड़े ऊंचे और ईंट पत्थर के मकान इतनी - [चाईना डोर पर कब लगेगा प्रतिबंध ?](https://www.ugtabharat.com/104106/) - चाईना डोर का प्रयोग पतंगबाज़ी में किया जाता है। और भारत पूरे विश्व में पतंगबाज़ी के लिये प्रसिद्ध है। वसंत पंचमी जैसे अनेक त्योहारों पर तथा - [विश्व का मार्गदर्शक है भारतीय संविधान](https://www.ugtabharat.com/104104/) - भारतीय संविधान ने देश के सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान किए हैं तथा उनके साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया, किन्तु देश में आज भी ऊंच-नीच, अस्पृश्यता - [भारतीय गणतंत्र के नए संकल्प](https://www.ugtabharat.com/104101/) - भारतीय गणतंत्र दिवस हमारा राष्ट्रीय पर्व है, इसी दिन 26 जनवरी, 1950 को हमारी संसद ने भारतीय संविधान को पास किया। इस दिन भारत एक संप्रभु, समाजवादी, - [नेताजी सुभाष चंद्र बोस : एक आराधनीय राष्ट्र पुरुष](https://www.ugtabharat.com/104084/) - दिनांक 30 दिसंबर 1943 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने पोर्ट ब्लेयर में सर्वप्रथम तिरंगा फहराया था। ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली को स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ( जिन्हें कांग्रेस ने चाचा नेहरू के रूप में प्रचारित किया है ) ने एक पत्र प्रेषित किया था। जिसमें लिखा था कि "मुझे - [वेद एवं वैदिक साहित्य के स्वाध्याय से मनुष्य श्रेष्ठ गुणों से युक्त मनुष्य बनता है](https://www.ugtabharat.com/104079/) - वैदिक साहित्य सृष्टि की आरम्भ में परमात्मा द्वारा अमैथुनी सृष्टि में उत्पन्न चार ऋषियों को दिया गया ईश्वरीय सत्य, पूर्ण व निर्दोष ज्ञान है। प्राचीन मान्यता है - [वैदिक सम्पत्ति -263 आर्य गृह, ग्राम और नगर](https://www.ugtabharat.com/104058/) - ( यह लेखमाला हम पंडित रघुनंदन शर्मा जी की वैदिक सम्पत्ति नमक पुस्तक के आधार पर सुधि पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं।) प्रस्तुति: - देवेंद्र सिंह आर्य चेयरमैन 'उगता भारत' गतांक से आगे ... अर्थ की तीसरी शाखा गृह है। सर्दी गर्मी और वर्षा के कष्ट से बचने तथा अन्य सामाजिक कार्यों को - [स्वतंत्रता आंदोलन पर शिवाजी के विचारों का प्रभाव](https://www.ugtabharat.com/104069/) - हिंदवी स्वराज के संस्थापक शिवाजी और उनके उत्तराधिकारी पुस्तक से ... - डॉ राकेश कुमार आर्य इति हास में कोई भी घटना अपने समकालीन इतिहास को अवश्य प्रभावित करती है। यदि उस घटना के समकालीन घटना चक्र पर दृष्टिपात किया जाए तो पता चलता है कि एक घटना दूसरी को और दूसरी घटना तीसरी को - [लक्ष्मण को किसने मूर्छित किया?](https://www.ugtabharat.com/45421/) - गोस्वामी तुलसीदास रचित श्री रामचरित मानस के अनुसार युद्ध भूमि में लक्ष्मण रावण पुत्र मेघनाद द्वारा छोड़ी गई शक्ति से मूर्छित हुए है लेकिन आदि कवि राम रावण के समकालीन महर्षि वाल्मीकि के युद्ध कांड में वर्णित वर्णन के अनुसार लक्ष्मण को रावण ने मूर्छित किया था। वाल्मीकि रामायण में १ नहीं ६ से अधिक - [भारत के भविष्य को लेकर नेताजी सुभाषचंद्र बोस की दृष्टि](https://www.ugtabharat.com/104066/) - 23 जनवरी : नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जन्म तिथि पर लेख जब नेताजी सुभाषचंद्र बोस के विचारों को भारत के तात्कालीन समकक्ष राजनैतिक नेताओं ने स्वीकार नहीं किया तब नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने भारत के भविष्य को लेकर अपनी दूरदृष्टि को धरातल पर लाने के उद्देश्य से अपने कार्य को न केवल भारत बल्कि - [क्या है सबसे घाटे का सौदा ?](https://www.ugtabharat.com/104057/) - बिखरे मोती कभी खाई कभी शिखर पै, जीवन गया ये बीत । अहंता-ममता में फंसा, करी ना हरि से प्रीत॥2752॥ भावार्थ :- देखो, हिमालय की प्राकृतिक सौन्दर्य और रचना को देखो। कहीं ऊँचे-ऊँचे शिखर हैं तो कहीं गहरी और घुमावदार खाइयाँ है, कहीं फूलों की मनभावन और रमणीक घाटियाँ हैं। कहीं बीहड़, वन है जिनमें - [सामूहिक भागीदारी से स्लम बस्तियों का विकास संभव है](https://www.ugtabharat.com/104059/) - - मीना गुर्जर जयपुर, राजस्थान देश के सभी नागरिकों को एक समान बुनियादी सुविधाओं का लाभ मिले इसके लिए केंद्र से लेकर सभी राज्यों की सरकारें प्रयासरत रहती हैं और योजनाएं संचालित करती हैं. लेकिन अभी भी देश के कई ऐसे इलाके हैं जहां लोगों को बुनियादी सुविधाएं प्राप्त करने के लिए भी संघर्ष करनी - [शैक्षिक गुणवत्ता के लिए बुनियादी ढांचे का विकास ज़रूरी है](https://www.ugtabharat.com/104052/) - - पूनम कुमारी पटना, बिहार इस वर्ष की शुरुआत में शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी यूडीआईएसई प्लस (Unified District Information System for Education) डेटा के अनुसार 2023-24 में स्कूलों में दाखिले की संख्या में करीब 37 लाख की कमी दर्ज की गई है. सबसे अधिक माध्यमिक स्तर पर करीब 17 लाख नामांकन में कमी पाई गई - [वैश्विक स्तर पर भारतीय रुपए के मान को गिरने से बचाने हेतु कम करना होगा आयात](https://www.ugtabharat.com/104051/) - एक अमेरिकी डॉलर की तुलना में भारतीय रुपया 86.62 रुपए तक के रिकार्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है, बहुत सम्भव है कि आगे आने वाले समय में यह 87 रुपए अथवा 90 रुपए के स्तर को भी पार कर जाय। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में रुपए की गिरावट के लिए वैश्विक स्तर पर कई कारक - [आर्यसमाज के महाधन महात्मा दीपचन्द आर्य](https://www.ugtabharat.com/104039/) - चंचला लक्ष्मी को वैदिक धर्म के प्रचार द्वारा श्री व यशस्वी रुप में बदलने का सत्कार्य करने वाले महात्मा दीपचन्द आर्य भारत में मध्यकाल में देश में अविद्या छा जाने के कारण जो नाना अन्धविश्वास एवं कुरीतियां उत्पन्न हुईं उससे कई मत-मतान्तर उत्पन्न हुए और इनसे परस्पर वैर भावना में वृद्धि हुई। ऋषि दयानन्द ने - [तीन अनादि सत्तायें ईश्वर, जीव व प्रकृति न होतीं तो संसार का अस्तित्व न होता](https://www.ugtabharat.com/104046/) - संसार में तीन अनादि सत्तायें हैं। यह सत्तायें नित्य अर्थात् सदा रहने वाली हैं। इनका अभाव कभी नहीं होता। जो पदार्थ अनादि होता है वह अनन्त अर्थात् नाशरहित व अमर भी होता है। इस कारण से इन तीनों पदार्थों का कभी नाश व अभाव नहीं होगा। हमारा आधुनिक विज्ञान वेदों से कोसों दूर है। वह - [भारत ने अंतिरक्ष में दो सैटेलाइट जोड़कर हासिल की महत्वपूर्ण उपलब्धि](https://www.ugtabharat.com/104034/) - - रामस्वरूप रावतसरे गाजियाबाद ( ब्यूरो डेस्क ) भारत ने वर्ष 2025 की शुरुआत के साथ ही अंतरिक्ष क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की है। इसरो ने अंतरिक्ष में ही स्पेडेक्स मिशन के दो सैटेलाइट मॉड्यूल आपस में जोड़ लिए हैं। इस मिशन में ‘डॉकिंग’ की प्रक्रिया पूरी हो गई है। यह क्षमता हासिल करने - [ऋषि दयानन्द ने वेदों का प्रचार विश्व कल्याण की भावना से किया](https://www.ugtabharat.com/104030/) - ऋषि दयानन्द ने आर्यसमाज की स्थापना किसी नवीन मत-मतान्तर के प्रचार अथवा प्राचीन वैदिक धर्म के उद्धार के लिये ही नहीं की थी अपितु उन्होंने वेदों का जो पुनरुद्धार व प्रचार किया उसका उद्देश्य विश्व का कल्याण करना था। यह तथ्य उनके सम्पूर्ण जीवन व कार्यों पर दृष्टि डालने व मूल्याकंन करने पर विदित होता - [महाकुम्भ बना दक्षिण एशिया में भारतीय सॉफ्ट पावर का प्रतीक](https://www.ugtabharat.com/104029/) - दुनिया की सबसे बड़ी धार्मिक सभा, महाकुंभ मेला, 13 जनवरी 2025 को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में शुरू हो गया है। कुंभ मेला दक्षिण एशिया में भारतीय सॉफ्ट पावर का अद्वितीय उदाहरण है। यह विश्व की सबसे बड़ी धार्मिक सभा होने के साथ-साथ भारत की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और आर्थिक शक्ति का प्रतीक है। कुंभ मेला - [अफ़गानिस्तान के साथ भारत के संबंध और तालिबान](https://www.ugtabharat.com/104025/) - अफ़गानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद भारत ने काबुल में अपना दूतावास फिर से खोल दिया है। भारत ने अब तक केवल तालिबान को अलग-थलग करने पर ध्यान केंद्रित किया है। हालाँकि, एक सीमा के बाद, यह विकल्प कम लाभ देगा, क्योंकि कई अन्य देश अब तालिबान से जुड़ना शुरू कर रहे हैं और - [मनुष्य की पूर्ण शारीरिक एवं आत्मिक उन्नति वेदज्ञान के आचरण से ही सम्भव](https://www.ugtabharat.com/104013/) - मनुष्य का शरीर जड़ प्रकृति से बना होता है जिसमें एक सनातन, शाश्वत, अनादि, नित्य चेतन सत्ता जिसे आत्मा के नाम से जाना जाता है, निवास करती है। जीवात्मा को उसके पूर्वजन्मों के कर्मों का भोग कराने के लिये ही सर्वव्यापक एवं सच्चिदानन्दस्वरूप परमात्मा उसे जन्म व शरीर प्रदान करते हैं। शुभ व पुण्य कर्मों - [महिला सशक्तिकरण की दौड़ जीतती भारतीय रेलवे](https://www.ugtabharat.com/104012/) - कैबिनेट द्वारा स्वीकृत नियुक्तियों के नवीनतम दौर के साथ पहली बार रेलवे बोर्ड में महिलाएँ ड्राइवर की सीट पर हैं। कांच की छत को तोड़ते हुए, रेलवे बोर्ड का नेतृत्व पहले से ही एक महिला द्वारा किया जा रहा है, अब संचालन और व्यवसाय विकास के प्रभारी एक महिला सदस्य हैं और उसी रैंक की - [वसुधा उसका घर होता है...](https://www.ugtabharat.com/104011/) - यह तेरा है - यह मेरा है, ये विचार बहुत ही छोटा है। जो फंसा हुआ इस द्वंद्व-भाव में, चिंतन उसका खोटा है।। बांहों को खोल बढ़ा जो आगे, बड़ा वही होता है। व्यापक विस्तृत चिंतन उसका, प्रेरक सबका होता है।। बड़ी सोच के स्वामी का, हृदय ही मंदिर होता है। हितार्थ समस्त जगती के, - [प्रयागराज, तीर्थराज और त्रिवेणी संगम की वास्तविकता, भाग - 2](https://www.ugtabharat.com/104010/) - महाकुंभ पर ज्योतिष पीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को चुनौती सनातन जीवन की एक शैली है । जिसे अपनाकर मनुष्य अपने परमध्येय अर्थात मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है। हम बहुत सौभाग्यशाली हैं कि हम उन ऋषि पूर्वजों की संतानें हैं जिन्होंने हमारे जीवन का लक्ष्य मोक्षप्राप्ति रखा है। इसी मोक्ष की प्राप्ति के लिए मनुष्य को - [घंटों से नहीं मनोयोग से बढ़ती है काम की गुणवत्ता](https://www.ugtabharat.com/103993/) - सप्ताह में काम के दिन और घंटों से जुड़ा विवाद एक बार फिर जोर पर है। बहुराष्ट्रीय कंपनी लार्सन एंड टूब्रो के चेयरमैन एस.एन सुब्रमण्यम ने इस बात पर अपनी बेबसी जाहिर की है कि वह अपने कर्मचारियों से सप्ताह में 90 घंटे काम नहीं करवा पा रहे हैं। उनके मुताबिक कर्मचारियों को रविवार के - [मराठों के पतन के कारण (भाग 1)](https://www.ugtabharat.com/103992/) - भारत भारत के 1235 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास हिंदवी स्वराज के संस्थापक शिवाजी और उनके उत्तराधिकारी पुस्तक से .. जीत के उल्लास में पराजय विराजती है नहीं। पराजय के शोक में जीत गीत गाती है नहीं॥ उत्थान और पतन का क्रम सदा से चल रहा। जैसा जिसका कर्म है मिल वैसा ही फल रहा।। - [राहुल गांधी के देश विरोधी खतरनाक बोल](https://www.ugtabharat.com/103994/) - राहुल गांधी अब अपनी पप्पू वाली छाप को बहुत पीछे छोड़ चुके हैं। जहां लोग उनकी ' पप्पू मानसिकता ' पर अपने राजनीति में बच्चा मानकर उन पर व्यंग्य किया करते थे, वे अब उनकी सोच की भयानकता को समझने लगे हैं । देश की राजधानी नई दिल्ली में कांग्रेस के नए मुख्यालय के उद्घाटन - [पशु चिकित्सकों की कमी से चुनौती बनता पशुपालन](https://www.ugtabharat.com/103989/) - देश के अन्य राज्यों की तरह राजस्थान के बीकानेर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में भी पशुपालन न केवल रोजगार का प्रमुख साधन है बल्कि इससे जुड़े आर्थिक और सामाजिक पहलू भी इस क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं. लेकिन पशुपालन में बढ़ती कठिनाइयों ने किसानों और पशुपालकों के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी है. इनके - [महर्षि दयानन्द और युगान्तर](https://www.ugtabharat.com/103983/) - [कवि स्वभाव से ही बागी होता है। काव्य-कला के नियम भी उस पर बन्दिश न लगा पाते हैं। बगावत अगर सत्य की स्वीकृति हो तो कविता का ही दूसरा नाम बन जाती है। भला बगावत के बगैर कविता का चरित्र ही क्या है? कवि के भावों की सजावट कविता है और चरित्र की बगावत कवि-ता। - [जीवात्मा का जन्म-मरण उसके कर्मों व ईश्वर के अधीन है](https://www.ugtabharat.com/103974/) - हम मनुष्य शरीरधारी होने के कारण मनुष्य कहलाते हैं। हमारे भीतर जो जीवात्मा है वह सब प्राणियों में एक समान है। प्राणियों में भेद जीवात्माओं के पूर्वजन्मों के कर्मों के भेद के कारण होता है। हमें जो जन्म मिलता है वह हमारे पूर्वजन्म के कर्मों के आधार पर परमात्मा से मिलता है। यदि हमने पूर्वजन्म - [लोहड़ी के त्योहार का इतिहास और परम्परा](https://www.ugtabharat.com/103972/) - भारतीय जन-जीवन कृषि पर आधारित हैं। जनवरी मास के इन दिनों तक मकई, तिलहन, दालें, मूंगफली, बाजरा आदि फसलें किसान के घर में आ जाती हैं। उस फसल के कुछ अंश को दान करके और जलती हुयी आग में डाल कर ईश्वर का धन्यवाद किया जाता हैं।यह प्राचीन काल की उसी परम्परा का निर्वाह किया - [भारत की चुनावी प्रक्रिया में महिलाओं की सशक्त भूमिका](https://www.ugtabharat.com/103973/) - चुनावों में विभिन्न राजनीतिक दल महिलाओं को लुभाने के लिये आकर्षक कल्याणकारी योजनाओं एवं मुफ्त की सुविधाएं देने की बढ़-चढ़ कर घोषणाएं करने लगे हैं। महिलाओं को ध्यान में रखकर बनाई गईं कल्याणकारी योजनाएं एवं मुफ्त की सुविधाएं अब गेमचेंजर बन रही हैं। महिलाओं के खाते में सीधे नगद ट्रांसफर की जाने वाली स्कीम तो - [आर्य वस्त्र और वेशभूषा, वैदिक सम्पत्ति - 262](https://www.ugtabharat.com/103965/) - ये लेखमाला हम पंडित रघुनंदन शर्मा जी की वैदिक सम्पत्ति नामक पुस्तक के आधार पर सुधि पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं। गतांक से आगे ... आ र्य सभ्यता में केशों की भाँति नाखूनों का भी बड़ा महत्व है। नाखूनों के द्वारा श्रम की इयत्ता अर्थात् मर्यादा और प्रकार अर्थात् विधि से सम्बन्ध रखनेवाली - [राष्ट्रभाषा हिन्दी और देवनागरी लिपि](https://www.ugtabharat.com/103962/) - अपने विचारों को दूसरे तक प्रेषित करने में हमें भाषा की आवश्यकता पड़ती है। स्वामी दयानन्द जब धर्म प्रचार के क्षेत्र में आये तब उनके सामने यही समस्या थी कि वे किस भाषा के द्वारा अपने विचारों को अन्यों तक सम्प्रेषित करें। उनकी मातृभाषा गुजराती थी किन्तु उत्तर भारत में उससे विचारों के सम्प्रेषण में - [मनुष्य महानता को कब प्राप्त होता है](https://www.ugtabharat.com/103964/) - मनुष्य महानता को कब प्राप्त होता है:- आपदा को परिणत करे, अवसर में इन्सान। सोने से कुन्दन बने, कीमत होय महान्॥2751॥ भावार्थ :- इस दृश्यमान संसार में आज तक जितने भी महापुरूष हुए हैं, उनके जीवन में विषम और भयावह परिस्थिति अवश्य आई है,चाहे वह रूस का टाल्सटाय हो, अमेरिका का मार्टिन लूथर किंग हो, - [स्वामी विवेकानन्द : भारत की आध्यात्मिक शक्ति के अमर उद्घोष](https://www.ugtabharat.com/103951/) - 12 जनवरी विवेकानंद जयंती पर विशेष विवेकानंद ने सनातन हिन्द को विश्व में स्थापित किया विश्व वन्दनीय स्वामी विवेकानन्द जैसी महान विभूति ने शायद हिन्दुत्व जागरण जैसे महान कार्य के लिये अपना सारा जीवन ही अर्पित कर दिया था। और यही कारण है कि स्वामी जी का स्थान आज विश्व में सर्वोत्तम है। परम अवतार - [प्रयागराज में आयोजित हो रहे महाकुंभ मेले का आध्यात्मिक एवं आर्थिक महत्व](https://www.ugtabharat.com/103931/) - हिंदू सनातन संस्कृति के अनुसार कुंभ मेला एक धार्मिक महाआयोजन है जो 12 वर्षों के दौरान चार बार मनाया जाता है। कुंभ मेले का भौगोलिक स्थान भारत में चार स्थानों पर फैला हुआ है और मेला स्थल चार पवित्र नदियों पर स्थित चार तीर्थस्थलों में से एक के बीच घूमता रहता है, यथा, (1) हरिद्वार, - [घटती बेटियां : कोख में ही छीन रहें साँसें, फिर संकट में हरियाणा की 'सुकन्या समृद्धि'](https://www.ugtabharat.com/103950/) - हरियाणा में 2024 में लिंगानुपात आठ साल के सबसे निचले स्तर पर पहुँच गया है। हरियाणा में जन्म के समय लिंगानुपात 2024 में गिरकर 910 हो गया है, जो 2016 के बाद सबसे कम है, जब यह अनुपात 900 था। राज्य ने कभी भी डब्ल्यूएचओ द्वारा अनुशंसित आदर्श लिंगानुपात 950 को हासिल नहीं किया है। - [वेद ईश्वर प्रदत्त ज्ञान व सत्य विद्या के ग्रन्थ हैं](https://www.ugtabharat.com/103932/) - संसार में जितनी भी ज्ञान की पुस्तकें हैं वह सब मनुष्यों ने ही लिखी व प्रकाशित की हैं। ज्ञान के आदि स्रोत पर विचार करें तो ज्ञात होता है कि सृष्टि की उत्पत्ति व मानव उत्पत्ति के साथ आरम्भ में ही मनुष्यों को वेदों का ज्ञान प्राप्त हुआ था। जो लोग नास्तिक व अर्ध नास्तिक - [वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में मध्यमवर्गीय परिवारों को देनी होगी राहत](https://www.ugtabharat.com/103949/) - किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को गति देने में मध्यमवर्गीय परिवारों की प्रमुख भूमिका रहती है। देश में ही निर्मित होने वाले विभिन्न उत्पादों की मांग इन्हीं परिवारों के माध्यम से निर्मित होती है। गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे परिवार जब मध्यमवर्गीय परिवारों की श्रेणी में शामिल होते हैं तो उन्हें नया - [स्वामी भीष्म जी महाराज का जीवन परिचय](https://www.ugtabharat.com/103886/) - सदा सुख शांति फैले मेरे भगवान दुनिया में। बनावे फिर से हम अपने वतन की शान दुनिया में। व्रतधारी, सदाचारी बने नर नार भारत में। वेद विद्या पढ़े सीखे ज्ञान विज्ञान दुनिया में। बहे दुध की नदियां मेरे इस देश भारत में। पशु, पक्षी गऊ माता ना हो कुर्बान दुनिया में। एशिया सर्व यूरोप में - [देश एवं मानव निर्माण में गोरक्षा एवं गोसंवर्धन का महत्वपूर्ण स्थान](https://www.ugtabharat.com/103897/) - परमात्मा ने मनुष्यादि जीवात्माओं को शुभ कर्म कर मुक्तादि सुख प्रदान करने के लिये इस सृष्टि को उत्पन्न कर इसे धारण किया है। परमात्मा में ही यह सारा ब्रह्माण्ड विद्यमान है। आश्चर्य होता है कि असंख्य व अनन्त लोक-लोकान्तर परमात्मा के निमयों का पालन करते हुए सृष्टि उत्पत्ति काल 1.96 अरब वर्षों से अपने अपने - [गायब होती बेटियाँ : आख़िर किसकी बन रहीं शिकार](https://www.ugtabharat.com/103937/) - (लापरवाही या नाकामयाबी, क्यों नहीं ढूँढ पाती पुलिस?) हरियाणा के हिसार में लापता बेटी की खोज में परेशान एक पिता ने मुख्यमंत्री नायब सैनी से मिलने का प्रयास किया। इस दौरान पुलिस ने सीएम के पास जाने से रोका तो दंपती ने आत्मदाह करने का प्रयास किया। घटना उस समय हुई जब मुख्यमंत्री का काफ़िला - [कुम्भ मेला आयोजन रहस्य (भाग-2)](https://www.ugtabharat.com/103874/) - विशेष - ये लेख विद्वानों के प्रसिद्ध लेख और उनके विचारों पर आधारित हैं। कृपया अपने विचार बताये। विश्लेषण - वेदों के अनुसार सृष्टि की रचना की ईसाई वर्ष २०२५ में लगभग १,९६,०८,५३,१२५ वर्ष हो गए है।विक्रमी संवत् यानि हिन्दू नव वर्ष कहते हैं उसको २०८१ वर्ष हुए हैं और रामायण काल को लगभग १० - [ऋणी है वसुधा भारत की](https://www.ugtabharat.com/103923/) - आभा का रथ भारत ही, प्रकाश पुंज जगती भर का। प्रकाश किरण बिखराता है, करता दूर अंधेरा जग का।। ऋणी है वसुधा भारत की, सिरमौर समझती है अपना। इस धर्मस्थली से होता आया, साकार जगत का हर सपना।। धर्म प्रेमी और महीपति , सम्राट हुए महीपाल हुए। इस धर्म धरा भारत भू- पर, न जाने - [विदेशों में भारतीय गिरमिटियों द्वारा विकसित हिन्दी एवं संस्कृति](https://www.ugtabharat.com/103922/) - दस जनवरी ‘विश्व हिन्दी दिवस’ पर विशेष हमारे प्रिय पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी जी ने कभी कहा था, हम भारतीय विश्व में जहाँ भी जाते हैं, अपने साथ एक छोटा सा भारत लेकर जाते हैं। इस गर्वोक्त करने वाली पंक्ति में एक अर्थ यह भी निहित ही है कि, हमारे हृदय में बसा हुआ यह - [तैंतीस कोटि देव](https://www.ugtabharat.com/103868/) - भारतवर्ष में देवों का वर्णन बहुत रोचक है। देवों की संख्या तैंतीस करोड़ बतायी जाती है और इसमें नदी, पेड़, पर्वत, पशु और पक्षी भी सम्मिलित कर लिये गये है। ऐसी स्तिथि में यह बहुत आवश्यक है कि शास्त्रों के वचन समझे जाएँ और वेदों की वास्तविक शिक्षाएँ ही जीवन में धारण की जाएँ। देव - [कितना सही है राष्ट्रगान पर विवाद खड़ा करना](https://www.ugtabharat.com/103896/) - तमिलनाडु राज्यपाल आर.एन. रवि के तमिलनाडु विधानसभा से अपना पारंपरिक सम्बोधन दिए बिना चले गए। राज्यपाल का प्रस्थान उनके निर्धारित सम्बोधन से पहले राष्ट्रगान नहीं बजाए जाने के विरोध में था, जिसे वे आवश्यक मानते थे। तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि ने विधानसभा में साल के पहले सत्र का उद्घाटन भाषण दिए बिना ही सदन - [धार्मिक समाज सुधारकों की परंपरा को बचाने की लड़ाई](https://www.ugtabharat.com/103890/) - शिवगिरी मठ सभी दलों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखता है। वार्षिक शिवगिरी यात्रा के दौरान राजनीतिक दलों के नेताओं को यात्रियों को संबोधित करने का अवसर दिया जाता है। हाल के वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने यात्रियों को संबोधित किया है। इस वर्ष - [अमेरिकी आर्थिक नीतियां अन्य देशों को विपरीत रूप से प्रभावित कर सकती है](https://www.ugtabharat.com/103891/) - वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अन्य देशों की मुद्राओं की कीमत अमेरिकी डॉलर की तुलना में गिर रही है। इससे, विशेष रूप से विभिन्न वस्तुओं का आयात करने वाले देशों में वस्तुओं के आयात के साथ मुद्रा स्फीति का भी आयात हो रहा है। इन देशों - [कश्यप ऋषि और कश्मीर का सम्बन्ध](https://www.ugtabharat.com/103887/) - भारत के गृहमंत्री अमित शाह जी ने पिछले दिनों कश्मीर के इतिहास से जुड़ी एक पुस्तक के विमोचन के अवसर पर संकेत दिया कि कश्मीर को कश्यप ऋषि के साथ जोड़ा जा सकता है। उन्होंने अपने संबोधन में यह भी संकेत दिया कि जो कुछ हमने खोया था, उसे प्राप्त करने का समय अब बहुत - [कुम्भ मेला आयोजन रहस्य (भाग-1)](https://www.ugtabharat.com/103869/) - विशेष - ये लेख विद्वानों के प्रसिद्ध लेख और उनके विचारों पर आधारित हैं। कुम्भ मेला का वर्तमान स्वरूप कुम्भ मेला हर 12 साल में भारत के चार स्थानों हरिद्वार, प्रयागराज (इलाहाबाद), उज्जैन और नासिक में आयोजित होता है। जिसमें करोड़ों श्रद्धालु हर बारहवें वर्ष प्रयाग, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में से किसी एक स्थान - [सुख और दुख रहस्य (भाग 2)](https://www.ugtabharat.com/103819/) - विशेष - ये लेख प्रसिद्ध वैदिक विद्वानों के लेख और उनके विचारों पर आधारित ४ भाग में है। कृपया अपने विचार बतायें। जन्म लेने पर दुख क्यों आता है? एक व्यक्ति ने पूछा कि जन्म लेने पर दुख क्यों आता है, इसका जन्म लेने से क्या संबंध है? तो ऋषियों ने उत्तर दिया, कि प्रकृति, - [श्री 'भारतेंदु' हरिश्चंद्र – महर्षि दयानंद के समकालीन हिंदी के महान् साहित्यकार](https://www.ugtabharat.com/103863/) - ६ जनवरी १८८५ को भारतेन्दु हरिश्चंद्र का देहांत हुआ था। हिंदी के महान् साहित्य निर्माता श्री बाबू 'भारतेंदु' हरिश्चंद्र (जन्म ९ सितम्बर १८५०, अवसान ६ जनवरी १८८५ - दोनों वाराणसी में) १८६९ में स्वामी दयानंद के काशी के पण्डितों के साथ हुए मूर्तिपूजा विषयक ऐतिहासिक शास्त्रार्थ में दृष्टा के रूप में उपस्थित थे । हरिश्चंद्र - [सुधार के बावजूद संकटों से घिरा भारतीय विमानन क्षेत्र](https://www.ugtabharat.com/103824/) - भारतीय विमानन क्षेत्र, जो वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है, आर्थिक विकास और कनेक्टिविटी में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के तहत एक मज़बूत नियामक ढांचे के बावजूद, कोझीकोड (2020) में एयर इंडिया एक्सप्रेस दुर्घटना जैसी बार-बार होने वाली घटनाएँ विमानन सुरक्षा में प्रणालीगत चुनौतियों को उजागर करती हैं। अंतर्राष्ट्रीय मानकों - [आर्यसमाज वेदज्ञान से युक्त शुद्ध आचरण करने वाले मनुष्य का निर्माण करता है](https://www.ugtabharat.com/103859/) - देश और समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता है कि सभी मनुष्यों की बुद्धि व शरीर के बल का पूर्ण विकास कर उन्हें शुद्ध ज्ञान व शक्ति सम्पन्न मनुष्य बनाया जाये। ऐसे व्यक्ति ही देश व समाज के लिये उत्तम, चरित्रवान, देशभक्त तथा परोपकार की भावना से युक्त होते हैं व देश व समाज के लिए - [अविमुक्तेश्वरानंद जी आर्य समाज की चुनौती स्वीकार करो](https://www.ugtabharat.com/103849/) - ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी का कहना है कि प्रयागराज में 14 जनवरी से चलने वाले महाकुंभ के मेले के अवसर पर आर्य समाजियों, बौद्धों और जैनियों को भी डुबकी नहीं लगानी चाहिए, क्योंकि उनकी मान्यता है कि गंगा में डुबकी लगाने से किसी के पाप नहीं धुल जाते। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी के इस - [कृषि संकट से जूझते बीकानेर के किसान](https://www.ugtabharat.com/103822/) - रक्षा शर्मा लूणकरणसर, राजस्थान राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्र में स्थित बीकानेर अपनी विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कृषि के लिए सदैव एक चुनौती रहा है. यहां के किसान जो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपनी मेहनत और साहस से अपनी आजीविका चलाते हैं, आज आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं. उनकी सबसे बड़ी समस्या - [सांस्कृतिक परम्पराओं के चलते पूरे विश्व में अपना विशेष स्थान बनाता भारत](https://www.ugtabharat.com/103826/) - आर्थिक क्षेत्र में प्रगति की दृष्टि से भारत की अपनी विशेषताएं हैं, जो अन्य देशों में नहीं दिखाई देती हैं। उदाहरण के लिए भारत में आयोजित होने वाले धार्मिक आयोजनों एवं मेलों आदि में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं द्वारा न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से इन मेलों/कार्यक्रमों में भाग लिया जाता है बल्कि इन श्रद्धालुओं द्वारा - [भारत ही पहला धर्मस्थल](https://www.ugtabharat.com/103829/) - मेरी साधना उस भारत की, जिसके पीछे संसार चला। मानवता की शिक्षा पाकर, मानव ने इतिहास रचा।। मथुरा काशी की गूंज कभी, यूरोप में गूंजा करती थी। वेद मंत्र के गीत को सुनकर, उसकी धरा धन्य होती थी।। वहां वेद का जीवन दर्शन ही, लोगों को मार्ग बताता था। उपदेशन वैदिक ऋषियों का, जीवन को - [सुख और दुख रहस्य (भाग 1)](https://www.ugtabharat.com/103799/) - विशेष - ये लेख प्रसिद्ध वैदिक विद्वानों के लेख और उनके विचारों पर आधारित ४ भाग में है। सुख का विपरीत दुःख है। सभी को किसी ना किसी दुख ने पकड़ रखा है. जिसके इलाज के लिए उल्टे सीधे रास्ते अपनाकर और जीवन की राह को दुर्गम बना रहे हैं. यहां तक कि दुख निवारण - [ब्रह्मराक्षस विवेचना](https://www.ugtabharat.com/103801/) - आपने ब्रह्मराक्षस शब्द सुना होगा और कल्पना की होगी कि ये किसी दुष्ट व्यक्ति का नाम है,और मंदिरों में इसकी प्रतिमा देखकर इसके विषय में समझने की जिज्ञासा हो सकती है। मडिकेरी के ओंकारेश्वर शिव मंदिर की क्षेत्रीय किंवदंती के अनुसार,मंदिर का निर्माण एक राजा द्वारा ब्रह्मराक्षस द्वारा उत्पन्न बुराई को दूर करने के लिए - [वैदिक सम्पत्ति 261 - आर्य वस्त्र और वेशभूषा](https://www.ugtabharat.com/103788/) - (ये लेखमाला हम पं. रघुनंदन शर्मा जी की 'वैदिक सम्पत्ति' नामक पुस्तक के आधार पर सुधि पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहें हैं) प्रस्तुतिः - देवेन्द्र सिंह आर्य (चेयरमैन 'उगता भारत) गतांक से आगे .... राजा के लिए लिखा है कि- शिरो मे श्रीर्यशो मुखं त्विषिः केशाश्च श्मश्रूणि । राजा मे प्राणो अमृत सम्राट् चक्षुविराट् - [पानीपत का तृतीय युद्ध](https://www.ugtabharat.com/103803/) - भारत के 1235 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास भाग .... (अध्याय - 16) पा नीपत भारतीय इतिहास का एक प्रमुख स्थल है। जिसने कई बार भारतीय इतिहास को परिवर्तन की दिशा देने का काम किया है। यह अलग बात है कि परिवर्तन सदा हमारे अनुकूल ना रहा हो, लेकिन परिवर्तन तो परिवर्तन है। पानीपत का - [पिछले पांच हजार वर्षों में दयानन्द के समान ऋषि नहीं हुआ](https://www.ugtabharat.com/103804/) - महाभारत का युद्ध पांच हजार वर्ष से कुछ वर्ष पहले हुआ था। महाभारत युद्ध के बाद भारत ज्ञान-विज्ञान सहित देश की अखण्डता व स्थिरता की दृष्टि से पतन को प्राप्त होता रहा। महाभारत काल के कुछ ही समय बाद ऋषि जैमिनी पर आकर देश से ऋषि परम्परा समाप्त हो गई थी। ऋषि परम्परा का आरम्भ - [वेद, वैदिक और भारतीय ज्योतिष साहित्य में पृथ्वी](https://www.ugtabharat.com/103793/) - प्रस्तुत लेख में ब्रह्माण्ड में अनेक पृथिवियों, पृथ्वी के गोल होने, पृथ्वी की गति, ऊपरी आवरण और गर्भ, आकर्षण-शक्ति, मूल तथा पृथ्वी पर समुद्र और हिन्दुओं के विभिन्न ग्रन्थों (शास्त्रों) में वर्णित वनस्पति के विषय में लेखन का प्रयास किया गया है। अथर्ववेद (८/९/१) में 'कतमस्या पृथिव्या:' में हमें इस विराट नभोमण्डल में उक्त छन्दांश - [माँ के गीतों के वे बोल ...](https://www.ugtabharat.com/103790/) - इतिहास की पड़ताल पुस्तक से .... अध्याय - 17 देश अपनी आजादी की 75 वीं वर्षगाँठ मनाने की तैयारियों में जुट गया है। किसी भी देश व समाज को खड़ा करने के लिए 74 वर्ष बहुत होते हैं। यद्यपि राष्ट्र के सनातन स्वरूप को देखते हुए 74 वर्ष एक अरब 40 करोड़ की जनसंख्या को - [हृदय का भाव कितना महत्त्वपूर्ण](https://www.ugtabharat.com/103785/) - हृदय का भाव कितना महत्त्वपूर्ण और प्रभावी होता है : - विचार से भी सूक्ष्म है, हृदय के सद्‌‌भाव । ईष्ट-दे व तक पहुँचता एक श्रध्दा का भाव॥2749॥ भावार्थ:- विचार से भी सूक्ष्म भाव होता इन्हें चित्त में उठने वाली उर्मियाँ भी कहा जाता है। जिनका प्रभाव हृदय स्पर्शी होता है। किसी वक्तव्य को समझने - [क्या वेदों में पशुबलि, माँसाहार आदि का विधान है?](https://www.ugtabharat.com/103770/) - त्रिपुरा सरकार ने मंदिरों में दी जाने वाली पशुबलि पर रोक लगा दी। हम उनके इस निर्णय का स्वागत करते हैं। धर्म के नाम पर पशुबलि अन्याय है। ईद पर भी इसी प्रकार से पशुबलि का निषेध होना चाहिए। कुछ लोग सरकार के निर्णय के विरुद्ध वेदों में पशुबलि के विधान होने की बात कर - [ऋषि दयानन्द के जीवन के अन्तिम प्रेरक शिक्षाप्रद क्षण](https://www.ugtabharat.com/103773/) - महर्षि दयानन्द की मृत्यु जोधपुर में वैदिक धर्म का प्रचार करते हुए उनके विरोधियों के षडयन्त्र के अन्तर्गत उन्हें संखिया जैसे विषैले पदार्थ का सेवन कराने से अजमेर में दीपावली 30 अक्तूबर, 1883 मंगलवार सायं लगभग 6:00 बजे हुई थी। मृत्यु के दिन मृत्यु से आधे घण्टे पूर्व की उनकी जीवन की प्रमुख घटनाओं का - [स्लम बस्तियों को भी विकास की प्रक्रिया से जोड़ने की ज़रूरत](https://www.ugtabharat.com/103769/) - पिछले एक दशक से चली आ रही स्वच्छ भारत अभियान योजना के बहुत सफल परिणाम सामने आने लगे हैं. सितंबर 2024 तक, भारत भर में 5.87 लाख से अधिक गांवों ने ओडीएफ प्लस का दर्जा हासिल कर लिया है, जिसमें 3.92 लाख से अधिक गांव ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली लागू कर रहे हैं और 4.95 - [हिंदू समाज का पुनर्जागरण आवश्यक क्यों ?](https://www.ugtabharat.com/103766/) - हिन्दू समाज की अपनी एक दैवीय विशेषता है जिस कारण सृष्टि के प्रारंभ से ही उसने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है | जब संसार के अन्य भागों में बोलने योग्य भाषा तक का आविष्कार नहीं हुआ था तब भारत में ऋग्वेद जैसा ज्ञान भण्डार अवतीर्ण हो चुका था | धर्म, आध्यात्म,विज्ञान,स्वास्थ्य, युद्ध, संगीत, भूगोल, - [सी से कैमल नहीं, क्रम से कैमल](https://www.ugtabharat.com/103759/) - ऊंट जिसे रेगिस्तान का जहाज कहते हैं उसके लिए दुनिया की भिन्न भिन्न भाषाओं में अनेक नाम है । ऊंट के लिए सर्वाधिक शब्द संस्कृत भाषा में मिलते हैं यह संस्कृत भाषा की विलक्षणता है इसमें एक वस्तु के लिए जहां अनेक नाम मिलते हैं तो एक ही नाम यहां अनेक वस्तुओं का द्योतक होता - [आर्य समाज ईश्वरीय ज्ञान वेद का प्रचारक संसार का अद्वितीय संगठन है](https://www.ugtabharat.com/103754/) - संसार में अनेक संगठन है जिनके अपने-अपने उद्देश्य व लक्ष्य हैं तथा जिसे पूरा करने के लिये वह कार्य व प्रचार करते हैं। सभी संगठन या तो धार्मिक होते हैं या सामाजिक। इनसे इतर भी अनेक विषयों को लेकर अनेक संगठन बनाये जाते हैं। देश की रक्षा करने के लिये भी सभी देशों की सरकारें - [बिखरे मोती](https://www.ugtabharat.com/103746/) - भक्ति की सबसे ऊँची अवस्था के संदर्भ में शेर :- तौफीक - ए - खुदा , बड़ी मुश्किल से होती है। जब भी होती है, तो वाहिद की आँख रोती है॥2741॥ वाहिद - भक्त, साधक जमाल अर्थात् बेपनाह,बसूरती, सौन्दर्य की पराकाष्ठा महर्षि देव दयानन्द का आविर्भाव इतिहास को अविस्मरणीय घटना के संदर्भ में: - दया - [वैदिक सम्पत्ति 260 - आर्य वस्त्र और वेशभूषा](https://www.ugtabharat.com/103744/) - (ये लेखमाला हम पं. रघुनंदन शर्मा जी की 'वैदिक सम्पत्ति' नामक पुस्तक के आधार पर सुधि पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहें हैं) गताक से आगे .. वर्तमान समय में वस्त्रों के अनेकों तर्ज और फैशनों से भले आदमी कहलानेवाले गृहस्थों को कितना कष्ट हो रहा है, यह किसी समझदार आदमी से छिपा नहीं है। - [प्रखर वक्ता और उत्कृष्ट सांसद प्रकाश वीर शास्त्री को भारत रत्न देने की हुई मांग](https://www.ugtabharat.com/103752/) - अमरोहा। यहां स्थित रहरा गांव में प्रकाशवीर शास्त्री इंटर कॉलेज में सुप्रसिद्ध आर्य नेता प्रखर वक्ता और उत्कृष्ट सांसद प्रकाशवीर शास्त्री की 101 वीं जयंती के अवसर पर स्थापित की गई उनकी प्रतिमा के अनावरण समारोह के अवसर पर उन्हें भारत रत्न देने की मांग की गई है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप - [जिंदगी निकट से होकर चली गई...](https://www.ugtabharat.com/103757/) - हम संसारीजन जब परस्पर एक दूसरे से कुशल क्षेम पूछते हैं तो अक्सर कुशल क्षेम बताने वाला व्यक्ति यह कहता हुआ पाया जाता है कि 'बस कर रहे हैं टाइम पास।' युधिष्ठिर परिव्राजक जी इस विषय में अपने प्रवचनों में कहते हैं कि जैसे कोई व्यक्ति रेलवे स्टेशन पर जाता है और वहाँ जाकर उसे - [आशा है नव साल की, सुखद बने पहचान](https://www.ugtabharat.com/103716/) - खिली-खिली हो जिंदगी, महक उठे अरमान। आशा है नव साल की, सुखद बने पहचान॥ दर्द दुखों का अंत हो, विपदाएँ हो दूर। कोई भी न हो कहीं, रोने को मजबूर॥ छेड़ रही है प्यार की, मीठी-मीठी तान। नए साल के पँख पर, ख़ुशबू भरे उड़ान॥ बीत गया ये साल तो, देकर सुख-दुःख मीत। क्या पता? - [नई भोर का स्वागतम](https://www.ugtabharat.com/103718/) - मिटे सभी की दूरियाँ, रहे न अब तकरार। नया साल जोड़े रहे, सभी दिलों के तार।। बाँट रहे शुभकामना, मंगल हो नववर्ष। आनंद उत्कर्ष बढ़े, हर चेहरे हो हर्ष।। माफ करो गलती सभी, रहे न मन पर धूल। महक उठे सारी दिशा, खिले प्रेम के फूल।। गर्वित होकर जिंदगी, लिखे अमर अभिलेख। सौरभ ऐसी खींचिए, - [नए साल का सूर्योदय, खुशियों के लिए उजाले हो](https://www.ugtabharat.com/103720/) - पल-पल खेल निराले हो, आँखों में सपने पाले हो। नए साल का सूर्योदय यह, खुशियों के लिए उजाले हो॥ मानवता का संदेश फैलाते, मस्जिद और शिवाले हो। नीर प्रेम का भरा हो सब में, ऐसे सब के प्याले हो॥ होली जैसे रंग हो बिखरे, दीपों की बारात सजी हो, अंधियारे का नाम ना हो, सबके - [नए साल में गांव को स्वच्छ बनाने का संकल्प लें](https://www.ugtabharat.com/103739/) - पूरी दुनिया में इस समय पर्यावरण और इससे जुड़े मुद्दे सबसे अहम माने जा रहे हैं. विशेषकर घरों से निकलने वाला कचरा सबसे अधिक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है. इससे न केवल वातावरण बल्कि मानव सभ्यता भी प्रभावित हो रही है. एक अनुमान के मुताबिक अकेले भारत में ही प्रतिदिन डेढ़ लाख मीट्रिक टन कूड़ा - [नहीं नववर्ष ये अपना](https://www.ugtabharat.com/103734/) - नहीं नववर्ष ये अपना, हमारा चैत्र होता है। खिलेंगे पुष्प उपवन में वही नव वर्ष होता है।। प्रभु की सृष्टि को समझो बड़ा विज्ञान इसमें है। पढ़ा कर वेद को बंदे, छुपा यह ज्ञान जिसमें है।। कभी ऋत सत्य को समझो सनातन हर्ष होता है... खिलेंगे पुष्प उपवन में वही नव वर्ष होता है।। 1।। - [अंग्रेजों और मराठों के मध्य युद्ध](https://www.ugtabharat.com/103731/) - [हिन्दवी - स्वराज के संस्थापक शिवाजी और उनके उत्तराधिकारी पुस्तक से] (अध्याय 15) सूर्य ढलने लगा अब हिंदवी स्वराज्य का। हृदय को छलने लगा फूट का वह राज था।। आघात अपने आप दे आप को छलने लगे। तीर शकुनिवाद के अपनों पर चलने लगे।। मराठों ने भारत से मुगलिया सत्ता को सदा-सदा के लिए उखाड़ - [ग्रामीण क्षेत्रों में शैक्षिक संसाधनों को पूरा करने की ज़रूरत](https://www.ugtabharat.com/103727/) - भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की समस्या हमेशा ध्यान देने की मांग करती रही है. हालांकि समय के साथ इसमें काफी सुधार हुआ है, लेकिन स्थिति अभी भी उतनी संतोषजनक नहीं है जितनी होनी चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में शैक्षिक बुनियादी ढांचे की कमी, शिक्षकों की कमी, शैक्षिक संसाधनों का अभाव और कमजोर सामाजिक परिवेश - [महर्षि दयानन्द की प्रमुख देन चार वेद और उनके प्रचार का उपदेश](https://www.ugtabharat.com/103725/) - महर्षि दयानन्द ने वेद प्रचार का मार्ग क्यों चुना? इसका उत्तर है कि उनके समय में देश व संसार के लोग असत्य व अज्ञान के मार्ग पर चल रहे थे। उन्हें यथार्थ सत्य का ज्ञान नहीं था जिससे वह जीवन के सुखों सहित मोक्ष के सुख से भी सर्वथा अपरिचित व वंचित थे। महर्षि दयानन्द - [तुलसी है संजीवनी](https://www.ugtabharat.com/103722/) - तुलसी है संजीवनी, तुलसी रस की खान। तुलसी पूजन से मिटें, जीवन के व्यवधान।। विष्णु प्रिया तुलसी सदा, करती है कल्यान। तुलसी है वरदायिनी, जीवन का वरदान ।। जिस घर में तुलसी पुजे, रहे प्रभू का वास। रोग पाप सब के मिटे, तन-मन हो उल्लास।। तुलसी सालिगराम की, महिमा अजब महान। हम सब का कर्तव्य - [स्वामी श्रद्धानन्द जी का ऐतिहासिक भाषण](https://www.ugtabharat.com/103705/) - (यह लेख 2019 में प्रकाशित किया गया था) जलियांवाला बाग घटना। 13 अप्रैल 1919 को बैसाखी के दिन अंग्रेज डायर द्वारा निहत्थे भारतीयों के खून से लिखी ऐसी दर्दनाक इतिहास की घटना है। जिसके इस वर्ष 100 वर्ष पूर्ण होने जा रहे हैं। पंजाब सहित देशभर में रौलेट एक्ट रूपी काला कानून देशवासियों को प्रथम - [नया साल सिर्फ़ जश्न नहीं, आत्म-परीक्षण और सुधार का अवसर भी](https://www.ugtabharat.com/103703/) - 31 दिसम्बर की आधी रात को हम 2024 को अलविदा कह देंगे और कैलेंडर 1 जनवरी यानी 2025 के नए साल के दिन के लिए अपना नया पन्ना खोलेगा। उतार-चढ़ाव, मजेदार पल और कुछ ख़ास नहीं-यह सब अब अतीत की बात हो जायेंगे। हम एक नए साल के मुहाने पर खड़े हैं, जो हमारे सामने - [हिन्दू धर्मरक्षक महाराजा सूरजमल के बलिदान की अमर गाथा](https://www.ugtabharat.com/103700/) - "दिल्ली के बादशाह नवाब नजीबुद्दौला के दरबार में एक सुखपाल नाम का ब्राह्मण काम करता था। एक दिन उसकी लड़की अपने पिता को खाना देने महल में चली गयी। मुग़ल बादशाह उसके रूप पर मोहित हो गया। और ब्राह्मण से अपनी लड़की कि शादी उससे करने को कहा और बदले में उसको जागीरदार बनाने का - [शांत और शालीन व्यक्तित्व के धनी थे डॉ मनमोहन सिंह](https://www.ugtabharat.com/103695/) - भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह अब इस संसार में नहीं रहे। उनकी शांत - शालीन और गंभीर मुखमुद्रा उन्हें राजनीति में एक विशिष्ट स्थान प्रदान करती थी। उनका व्यक्तित्व अपने आप में निराला और अनोखा था। अपने राजनीतिक जीवन में सरदार मनमोहन सिंह ने अनेक प्रकार की आलोचनाओं को बहुत शालीनता के साथ - [अग्निहोत्र करने से परिवार ज्ञानवान् होकर सत्यमार्गानुगामी एवं निरोगी होता है](https://www.ugtabharat.com/103686/) - वैदिक धर्म एवं संस्कृति की विशेषता है कि इसके सब सिद्धान्त एवं मान्यतायें ज्ञानयुक्त होने सहित तर्क एवं युक्ति की कसौटी पर खरे हैं। वैदिक धर्म का पालन करते हुए सभी गृहस्थियों के लिए प्रतिदिन प्रातः एवं सायं अग्निहोत्र यज्ञ का विधान किया गया है। अग्निहोत्र का विधान प्रत्येक गृहस्थी मनुष्य का प्रमुख कर्तव्य होता - [भारत अपना प्यारा हमको](https://www.ugtabharat.com/103672/) - जहां लेना जन्म समझते हैं, सौभाग्य देव अपने मन में। उसको हम भारत कहते हैं, नहीं और कहीं जगती भर में।। नदियों की कल कल प्यारी है, झरने भी गीत सुनाते हैं। धरती से बादल मिलने को , रिमझिम का गीत सुनाते हैं।। जहां आनंदी हमको धूप मिले, नव संदेश मिले, उपदेश मिले। जगती भर - [मोहन भागवत के बयान और मोदी सरकार](https://www.ugtabharat.com/103691/) - भाजपा जिस हिंदुत्व के सहारे सत्ता में पहुंची थी यदि वह स्वयं या उसका मार्गदर्शक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हिंदुत्व की ओर से मुंह फेरकर खड़े हुए या उन्होंने कांग्रेस की भांति किसी दोगली विचारधारा को अपनाकर उसे हिंदुत्व का स्वरूप देने का प्रयास किया तो देश की जनता उन्हें माफ नहीं करेगी। यह शीशे - [फुटपाथों और सड़कों पर अतिक्रमण, चलना हुआ मुश्किल](https://www.ugtabharat.com/103683/) - आजकल हम देखते हैं कि बड़ी संख्या में स्ट्रीट वेंडर्स ने व्यस्त बाज़ार के पास नो-वेंडिंग ज़ोन में स्टॉल लगा रखे हैं। इनके लिए नो-वेंडिंग ज़ोन की स्थापना सुचारू यातायात प्रवाह सुनिश्चित करने और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए की जा सकती है। हालाँकि, इनमें से कई विक्रेता अपने परिवार, जिसमें बुज़ुर्ग माता-पिता और - [कांग्रेस का ‘वामपंथीकरण’ ही राहुल गांधी की नई राजनीति का उद्देश्य](https://www.ugtabharat.com/103680/) - पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि यदि उनकी सरकार आई तो सिर्फ जाति जनगणना ही नहीं बल्कि आर्थिक सर्वेक्षण भी होगा। दरअसल, इसके जरिए वह पता लगाएंगे कि किसके पास कितनी संपत्ति है। फिर नई राजनीति शुरू होगी। इससे साफ है कि जेएनयू के युवा वामपंथी नेताओं - [गांवों तक आधारभूत संरचनाओं को मज़बूत करने की जरूरत](https://www.ugtabharat.com/103677/) - - कमलेश अजमेर, राजस्थान दिसंबर के पहले सप्ताह में राजस्थान में आयोजित हुए तीन दिवसीय 'राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इंवेस्टमेंट समिट 2024' सुर्ख़ियों में रहा. इस दौरान करीब 30 ट्रिलियन निवेश से संबंधित एमओयू पर हस्ताक्षर हुए. राज्य सरकार को उम्मीद है कि इससे राज्य को विकास की राह में आगे बढ़ने में मज़बूती मिलेगी. इस - [ऋषि मुनियों की भूमि भारत](https://www.ugtabharat.com/103671/) - ऋषि मुनियों की भूमि भारत, मानवता की रही उपासिका। वेद के गीत सुनाती हमको, प्रेम स्नेह की रही साधिका।। राष्ट्र का बोध कराती हमको, प्रेम के भाव जगाती है। अपनी संतति मान सभी को, प्रेम से गले लगाती है।। ऊंचाई हमारे भावों में भर, हृदय को पवित्र बनाती है। सत्व- भाव का सेतु बनकर, जीवन - [उत्तरकालीन पेशवा](https://www.ugtabharat.com/103633/) - भारत के 1235 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास .... (हिन्दवी स्वराज के संस्थापक शिवाजी और उनके उत्तराधिकारी पुस्तक से .. अध्याय-14) पेशवा नारायणराव माधवराव प्रथम के पश्चात मराठा साम्राज्य दुर्बल होने लगा, क्योंकि उसके पश्चात इस साम्राज्य की संरक्षा व सुरक्षा के लिए कोई मजबूत इच्छाशक्ति वाला पेशवा इस साम्राज्य को नहीं मिला। माधवराव की - [देश के अप्रतिम नेता अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत का जश्न](https://www.ugtabharat.com/103650/) - 25 दिसम्बर, 2024 का सुशासन दिवस विशेष महत्त्व रखता है क्योंकि यह अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जयंती है। इस मील के पत्थर को मनाने के लिए, प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग ने 19 से 24 दिसम्बर, 2024 तक चलने वाले 'प्रशासन गाँव की ओर' नामक एक सप्ताह के अभियान की घोषणा की है। - [कर्मचारियों की कमी से जूझती शासन व्यवस्था](https://www.ugtabharat.com/103651/) - सरकारी कर्मचारियों का छोटा आकार अधिकारियों पर अत्यधिक बोझ डालता है, जिससे प्रभावी नीति निष्पादन मुश्किल हो जाता है। अपर्याप्त जनशक्ति और अत्यधिक प्रक्रियाओं के कारण सेवाओं में देरी होती है, क्योंकि अधिकारी काम की मात्रा को संभालने के लिए संघर्ष करते हैं। भारतीय राज्य में प्रति व्यक्ति सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों की संख्या कम - [संसद के कलुषित परिवेश का जिम्मेवार कौन?](https://www.ugtabharat.com/103648/) - संसद में शोर-शराबा, वेल में जाकर नारेबाज़ी करना, एक-दूसरे पर निजी कटाक्ष करना यहां तक कि कई बार हाथापाई पर उतारू हो जाना आज संसद की आम तस्वीर है। आखिर सियासी पार्टियों और सांसदों का बर्ताव इतना अराजक क्यों हो गया है? क्या आज पार्टियों के निहित स्वार्थों ने संसद को मज़ाक बनाकर रख दिया - [जो प्रभु के अभिमुख रहे, छूटता जा संसार](https://www.ugtabharat.com/103632/) - जो प्रभु के अभिमुख रहे, छूटता जा संसार। जैसे रवि के सामने, नहीं टिकै अन्ध‌कार ॥2740॥ भावार्थ :- मेरे प्रिय पाठकगण इसे एक दृष्टान्त से समझे । जिस प्रकार सूर्य जब पीठ पीछे होता है, तो व्यक्ति अथवा की छाया आगे-आगे होती है, जो कामी-कभी बाधा भी बन जाती है किन्तु व्यक्ति सूर्य के अभिमुख - [वैदिक सम्पत्ति - 259 : वैदिक आर्यों की सभ्यता](https://www.ugtabharat.com/103631/) - (यह लेख वाला हम पंडित रघुनंदन शर्मा जी की वैदिक सम्पत्ति नामक पुस्तक के आधार पर सुधि पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं।) आर्य वस्त्र और वेशभूषा गतांक से आगे ... अर्थ में भोजन के बाद दूसरा नम्बर वस्त्रों का है। भोजन की तरह आर्य सभ्यता में वस्त्रों पर भी विशेष प्रकाश डाला गया - [वेदों के आचरण से ही मनुष्य को अभ्युदय एवं निःश्रेयस प्राप्त होते हैं](https://www.ugtabharat.com/103654/) - हमें मनुष्य जीवन जन्म-जन्मान्तरों में दुःखों से सर्वथा निवृत्त होने के लिए एक अनुपम साधन मिला है। यह हमें परमात्मा द्वारा प्रदान किया गया है। माता-पिता, सृष्टि तथा समाज हमारे जन्म, इसके पालन व उन्नति में सहायक बनते हैं। हमें अपने जीवन के कारण व उद्देश्यों पर विचार करना चाहिये। इस कार्य में वेद व - [बड़ा दिन अर्थात भीष्म पितामह का निर्वाण पर](https://www.ugtabharat.com/103634/) - महाभारत का युद्घ संसार का प्राचीन काल का विश्व युद्घ था। इस युद्घ को कुछ लोगों ने भारतीय इतिहास को अंधकारमयी सिद्घ करने के लिए काल्पनिक करार दिया। लेकिन वैज्ञानिक शोधों से अब प्रमाणित हो चुका है कि महाभारत का युद्घ हुआ था। अब प्रश्न ये आता है कि यह युद्घ हुआ कब? सचमुच जानने - [बड़ा दिन अर्थात भीष्म पितामह का निर्वाण पर्व](https://www.ugtabharat.com/7870/) - महाभारत का युद्घ संसार का प्राचीन काल का विश्व युद्घ था। इस युद्घ को कुछ लोगों ने भारतीय इतिहास को अंधकारमयी सिद्घ करने के लिए काल्पनिक करार दिया। लेकिन वैज्ञानिक शोधों से अब प्रमाणित हो चुका है कि महाभारत का युद्घ हुआ था। अब प्रश्न ये आता है कि यह युद्घ हुआ कब? सचमुच जानने - [न्यायात् पथः प्रविचलन्ति पदं न धीरा:](https://www.ugtabharat.com/42907/) - महर्षि दयानन्द ने अपने ५९ साल के अल्पकालीन जीवन में धर्म की उन्नती के लिए बहुत बड़ा कार्य कर दिखाया। उनमें कार्य करने की अद्भुत क्षमता थी। असीम शक्ति थी। वे निडर और साहसी थे। कर्मठ थे। कार्य करते हुए थकते नहीं थे। अपने लक्ष्य की ओर बिना रुके बढ़े जाते थे। अपने पथ से - [संतान के प्रति माता पिता के कर्तव्य](https://www.ugtabharat.com/18073/) - अधिकार से पहले कर्तव्य, अध्याय 2 संतान के प्रति माता पिता के कर्तव्य आजकल जिसे हम कर्तव्य के नाम से जानते हैं प्राचीन काल में वही हमारे देश में विधि थी । उस समय विधि का पालन करना सबके लिए वैसे ही अनिवार्य था जैसे आज कानून का पालन करना अनिवार्य है । विधि विधेयात्मक - [कलम आज उनकी जय बोल .....](https://www.ugtabharat.com/41215/) - हमारे जिन क्रांतिकारियों ने भारत के विषय में और भारतीय स्वाधीनता के विषय में इतने ऊंचे विचार रखे उन्हीं के कारण आज हम स्वतंत्र भारत के स्वतंत्र नागरिक हैं। आज हम स्वतंत्र होकर सोच सकते हैं और स्वतंत्र होकर लिख सकते हैं। जिनके बलिदानों ने हमें आजादी की ये नेमत दी है, उनके विषय में - [पूजनीय प्रभु हमारे भाव उज्ज्वल कीजिए](https://www.ugtabharat.com/12970/) - जब हम किसी भी शुभ अवसर पर या नित्य प्रति दैनिक यज्ञ करते हैं तो उस अवसर पर हम यह प्रार्थना अवश्य बोलते हैं :-- पूजनीय प्रभो हमारे , भाव उज्ज्वल कीजिये । छोड़ देवें छल कपट को, मानसिक बल दीजिये ।। 1।। वेद की बोलें ऋचाएं, सत्य को धारण करें । हर्ष में हो - [भास्कराचार्य : प्राचीन भारतीय गणितज्ञ](https://www.ugtabharat.com/74556/) - हमारे देश में ऐसे कई प्राचीन नगर रहे हैं जो अपनी वैज्ञानिक उपलब्धियों के लिए समकालीन विश्व में विख्यात थे। उनमें उज्जैन का नाम सर्वोपरि है। इसी उज्जैन की वेधशाला के प्रधान के रूप में काम करने वाले भास्कराचार्य भारत की महान धरोहर हैं। भास्कराचार्य का जन्म विद्वानों ने 1114 ई0 में माना है जबकि - [कथाकार एवं निबंधकार यशपाल का आजादी की लड़ाई और साहित्य में योगदान](https://www.ugtabharat.com/103619/) - प्रसिद्ध हिन्दी कथाकार एवं निबंधकार यशपाल का जन्म 3 दिसम्बर 1903 को फिरोजपुर (पंजाब) में हुआ था। उनके पूर्वज हिमाचल के भूम्पल गांव, हमीरपुर के रहने वाले थे। दादा गरदुराम विभिन्न स्थानों पर व्यापार करते थे और भोरंज तहसील के टिक्कर भारिया और खरवरिया के निवासी थे। पिता हीरालाल एक दुकानदार और तहसील क्लर्क थे। - [योग दर्शन पर व्याख्यान/ प्रवचन](https://www.ugtabharat.com/103615/) - योग दर्शन से आप सभी लोग परीचित हैं इसको जितना पढ़े उतना भी हमें लगता है कि हम बहुत कम जानते हैं और जीवन को सुंदर बनाने के लिए योग से बढ़कर और कोई दूसरा मार्ग हमारे पास नहीं है, विकल्प नहीं है । मनुष्य अपने जीवन को सुंदर बनाना चाहे तो योग मार्ग पर - [महान आर्य संन्यासी स्वामी श्रद्धानन्द](https://www.ugtabharat.com/103613/) - वैदिक धर्म एवं संस्कृति के उन्नयन में स्वामी श्रद्धानन्द जी का महान योगदान है। उन्होंने अपना सारा जीवन इस कार्य के लिए समर्पित किया था। वैदिक धर्म के सभी सिद्धान्तों को उन्होंने अपने जीवन में धारण किया था। देश भक्ति से सराबोर वह विश्व की प्रथम धर्म-संस्कृति के मूल आधार ईश्वरीय ज्ञान ‘‘वेद” के अद्वितीय - [समाज को किसने तोड़ा ?](https://www.ugtabharat.com/103609/) - इतिहास की पड़ताल पुस्तक से (अध्याय-15) 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के दृष्टिगत सपा ब्राह्मणों को लुभाने का हर संभव प्रयास कर रही थी। इसी के चलते सपा समर्थक एक पूर्व आईएएस और इतिहासकार ने एक पोस्ट लिखी थी कि ब्राह्मणों ने समाज को तोड़ा नहीं बल्कि जोड़ा है। इसे पढ़कर कई लोगों को - [जब गांधी जी ने स्वामी श्रद्धानंद के हत्यारे अब्दुल रशीद को अपना भाई कहा था](https://www.ugtabharat.com/103606/) - २३ दिसंबर १९२६, अपने छोटे से आवास पर एक आर्य (हिंदू) सन्यासी रोग शैय्या पर औषधि का सेवन करके शांत अवस्था में लेटे हुए थे। अचानक आवास की सीढ़ियों पर कुछ हलचल हुई और एक व्यक्ति प्रकट हुआ। यह कोई विशेष बात नहीं थी रोगी संयासी से बहुधा लोग मिलने आ ही जाते थे। सन्यासी - [महर्षि दयानन्द को राष्ट्र कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर की भाव-भरित श्रद्धांजलि](https://www.ugtabharat.com/103590/) - महर्षि दयानन्द ने वेद प्रचार की अपनी यात्राओं में बंगाल वा कोलकत्ता को भी सम्मिलित किया था। वह राष्ट्र कवि श्री रवीन्द्रनाथ टैगोर के पिता श्री देवेन्द्रनाथ टैगोर व उनके परिवार से उनके निवास पर मिले थे। आपका जन्म कोलकत्ता में 7 मई सन् 1861 को हुआ तथा मृत्यु भी कोलकत्ता में ही 7 अगस्त - [स्वामी श्रद्धानंद जी की हत्या, सावरकर और गांधी](https://www.ugtabharat.com/103580/) - (23 दिसंबर को बलिदान दिवस पर विशेष) सफल वक्ता वही होता है जो श्रोताओं को अपनी बात से सहमत और संतुष्ट तो कर ही ले साथ ही उसकी भाषण कला ऐसी हो जिससे लोग वही कुछ करने के लिए प्रेरित और आंदोलित भी हो उठें जिसे वह वक्ता उनसे कराना चाहता है। भाषण के अंत - [हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया सूर्य के उत्तरायण में प्रवेश का पावन पर्व](https://www.ugtabharat.com/103587/) - श्री मोहन कृति आर्ष तिथि पत्रम (वैदिक पंचांग) किया गया जारी ग्रेटर नोएडा (विशेष संवाददाता) यहां स्थित गामा सेक्टर में एक विशेष सांस्कृतिक भव्य आयोजन के माध्यम से आगामी संवत का वैदिक पंचांग जारी किया गया। श्री मोहन कृति आर्ष तिथि पत्रम (वैदिक पंचांग) के संपादक और आर्षायण ट्रस्ट के अध्यक्ष आचार्य दार्शनेय लोकेश ने - [भीष्म पितामह और क्रिसमस डे की वास्तविकता](https://www.ugtabharat.com/103577/) - क्या आप भी बोलते हैं हैप्पी क्रिसमस डे? क्या आप भी देते हैं बड़े दिन की बधाइयां? यदि हां तो जानिए इसकी वास्तविकता बड़ा दिन या बढ़ा दिन! क्या है इसका इतिहास? क्या यह जीसस से जुड़ा हुआ है? क्या यह santa-claus से जुड़ा हुआ है। क्या यह भीष्म पितामह से संबंध रखता है? महाभारत - [भारत में बुज़ुर्ग आबादी की समस्याएँ](https://www.ugtabharat.com/103574/) - भारत अपने जनसांख्यिकीय परिवर्तन के एक अनोखे चरण में है। भारत की विशेषता है कि यहाँ युवा आबादी में वृद्धि हो रही है, जो विकास को गति देने के लिए एक अवसर हो सकता है। हालाँकि, एक समानांतर घटना जिस पर भारत के आर्थिक विकास के संदर्भ में समान रूप से ध्यान देने की आवश्यकता - [तार - तार होती संसद की गरिमा और भारतीय लोकतंत्र](https://www.ugtabharat.com/103569/) - संविधान-निर्माता भीमराव आंबेडकर को लेकर भारतीय संसद में जो दृश्य पिछले कुछ दिनों में देखने को मिले हैं, वे न केवल शर्मसार करने वाले है बल्कि संसदीय गरिमा को धुंधलाने वाले हैं। अंबेडकर को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं। दोनों पक्षों ने गुरुवार को संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान हाथापाई भी - [भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का प्रतीक कुंभ का मेला](https://www.ugtabharat.com/103568/) - सारी दुनिया जानती और मानती है कि भारत एक सांस्कृतिक राष्ट्र है। अपनी अति विशिष्ट भौगोलीय स्थिति के कारण भारत सदा से विश्व के लिए उत्सुकता का केन्द्र रहा है। हिमाच्छादित पर्वतों से रेगिस्तान तक, कल-कल बहती सदानीरा नदियों से पठार तक, प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर घाटियों से विशाल समुन्द्र तक, अंडमान सरीखे टापुओं से - [मर्यादा पुरुषोत्तम राम का आदर्श, प्रेरक एवं अनुकरणीय जीवन](https://www.ugtabharat.com/103565/) - वैदिक धर्म एवं संस्कृति में मर्यादा पुरुषोत्तम राम का जीवन आदर्श, अनुकरणीय एवं प्रेरक उदाहरणों से युक्त जीवन है। वह आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श पति, आदर्श राजा, आदर्श शत्रु, आदर्श मित्र, ईश्वर, वेद एवं ऋषि परम्पराओं को समर्पित, उच्च आदर्शों एवं चरित्र से युक्त महापुरुष व महामानव थे। त्रेता युग में चैत्र मात्र के - [अंबेडकर के प्रति सच्ची श्रद्धा राष्ट्र दृष्टिकोण में, न कि नाम जपने में](https://www.ugtabharat.com/103563/) - सरकार ने महिला सशक्तीकरण पर ध्यान केंद्रित करते हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 जैसी पहल की है। इसने अंबेडकर की विरासत का सम्मान करने के लिए पंच तीर्थ स्थलों का निर्माण करके दलितों की गरिमा पर ज़ोर दिया। ज्ञान (गरीब, युवा, अन्नदाता, नारी) जैसे कार्यक्रमों का उद्देश्य दलितों सहित हाशिए पर पड़े समूहों को - [रामप्रसाद बिस्मिल जी के जीवन के कुछ संस्मरण](https://www.ugtabharat.com/103559/) - 19 दिसंबर-बलिदान दिवस नशा छोङ राष्ट्र भक्त कैसे बने पं० रामप्रसाद बिस्मिल जी का जन्म उत्तरप्रदेश में स्थित शाहजहांपुरा में 11 जून 1897 ई. को हुआ था। इनके पिता का नाम मुरलीधर तथा माता का नाम मूलमती था। इनके घर की आर्थिक अवस्था अच्छी नहीं थी। बालकपन से ही इन्हें गाय पालने का बड़ा शौक - [भारत के स्वतन्त्रता प्राप्ति संग्राम के महान क्रान्तिकारी ठाकुर रोशन सिंह](https://www.ugtabharat.com/103556/) - बलिदान दिवस 19 दिसम्बर पर श्रद्धा सुमन "आप मेरे लिये दुखी ना हो मै परमात्मा की गोद मे शान्ति से सोने जा रहा हूँ." जन्म - 22 जनवरी सन 1892 ई. ग्राम नवादा, शाहजहाँपुर, उत्तरप्रदेश. बलिदान पर्व - 19 दिसंबर सन 1927 ई. मलाका कारागार, नैनी, इलाहाबाद, उत्तरप्रदेश. ठाकुर रोशन सिंह का जन्म 22 जनवरी - [हरयान या हरियान शब्दों से नहीं, अहिराणा शब्द से हुई है हरियाणा की व्युत्पत्ति](https://www.ugtabharat.com/103541/) - हरयान या हरियान शब्दों से नहीं, अहिराणा शब्द से हुई है हरियाणा की व्युत्पत्ति : डॉ. रामनिवास 'मानव' हरियाणा प्रदेश के नाम की व्युत्पत्ति के संबंध में विविध थ्योरियाँ हैं। हरियाणा एक प्राचीन नाम है। वैदिक युग में इस क्षेत्र को ब्रह्मवर्त, आर्यवर्त और ब्रह्मोपदेश के नाम से जाना जाता था। ये सभी नाम हरियाणा - [जब बारूद की खेती सस्ती हो](https://www.ugtabharat.com/103551/) - प्रेम सुधा रस पीता चल, भारत को भव्य बनाता चल। प्रेम की गगरी छलके ना, सोच को दिव्य बनाता चल।। गहरे - गहरे घाव बने हैं, राज भी गहरे लगते हैं। आठ दशक होने को आए, क्यों देश में पहरे लगते हैं ? शांति - शांति चिल्लाते हैं, पर बीज रक्त के बोते हैं। ऐसे - [आनंद बने जीवन परिभाषा](https://www.ugtabharat.com/103550/) - विश्व-परिवार समझ अपना, आर्यत्व हृदय में वास करे। देवत्व प्राप्ति हेतु मन में, श्रेष्ठत्व भाव सदा प्रवास करे।। दूर हटा और दूर हटा, घृणा के भाव बसे मन में। सहज प्रवाह में बहता चल, आनंद मिलेगा जीवन में।। जीवन की ज्योति जलती रहे, दूर हताशा हो मन की। श्रृंगार हृदय का करने को , उत्साह - [रामप्रसाद बिस्मिल : एक क्रान्तिकारी, जो कवि भी था](https://www.ugtabharat.com/103546/) - आज - 19 दिसम्बर को - क्रान्तिकारी राम प्रसाद 'बिस्मिल', और कुछ अन्य क्रान्तिकारियों, का बलिदान-दिवस है। भारत मां के अनेक सपूतों ने मातृभूमि के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग किया है - 'बिस्मिल' भी उनमें से एक थे। हम उन लोगों को श्रद्धांजलि-स्वरूप थोड़ा याद कर सकते हैं। वैसे, किसी भी बलिदानी को याद - [सच ही तो है - अंबेडकर जी सम्मान का विषय हैं फैशन का नहीं](https://www.ugtabharat.com/103532/) - भाजपा के डीएनए में प्रारंभ से ही “दलित विमर्श” रहा है, क्योंकि इसका मातृ संगठन आरएसएस प्रारंभ से ही “सामाजिक समरसता” के मार्ग पर चलने वाला संगठन रहा है। इस “दलित विमर्श” के ही डीएनए का परिणाम है कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद ही इस देश में अंबेडकर जी को ‘भारत रत्न’ - [प्रतिहार वंशी शासकों और भारतीय संस्कृति के बारे में विद्वानों के मत](https://www.ugtabharat.com/103526/) - राणा अली हसन चौहान क्या कहते हैं ? राणा अली हसन चौहान पाकिस्तान के बहुत ही प्रतिष्ठित इंजीनियर, इतिहास लेखक और भाषाविद रहे हैं। वे उन कम पाकिस्तानियों में से हैं जो उर्दू, फारसी, अरबी के अलावा सिंधी, पंजाबी तथा हिंदी व संस्कृत में भी पारंगत थे। वे नागरी लिपि के एक बड़े प्रवर्तकों में - [घरेलू विवाद से दहेज़ के झूठे मामलों में उलझते पुरुष](https://www.ugtabharat.com/103518/) - जब वैवाहिक कलह के कारण घरेलू विवाद उत्पन्न होते हैं, तो अक्सर पति के परिवार के सभी सदस्यों को फंसाने की कोशिश की जाती है। ऐसे में अदालतों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, ताकि किसी कानून का दुरुपयोग कर किसी निर्दोष को न फंसाया जा सके। अदालतों को दहेज उत्पीड़न के मामलों में कानून के - [धर्मनिरपेक्ष नागरिक संहिता : असमानता और अन्याय को दूर करने की औषधि](https://www.ugtabharat.com/103517/) - धर्मनिरपेक्ष नागरिक संहिता, जिसे समान नागरिक संहिता के रूप में भी जाना जाता है, सभी नागरिकों के लिए, चाहे उनकी धार्मिक सम्बद्धता कुछ भी हो, व्यक्तिगत मामलों-जैसे विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति के अधिकार-को नियंत्रित करने वाले कानूनों का एक ही सेट प्रस्तावित करती है। भारत वर्तमान में हिंदू कानून, मुस्लिम कानून (शरिया) और ईसाई - [भारतीय युवाओं में बढ़ रही व्यसन की प्रवृति को रोकना जरूरी](https://www.ugtabharat.com/103513/) - आज भारत के विभिन्न कस्बों, नगरों, विशेष रूप से महानगरों में, कम उम्र के नागरिकों के बीच व्यसन की समस्या विकराल रूप धारण करती हुई दिखाई दे रही है। देश के कुछ भागों में विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में विद्यार्थी भी नशे की लत का शिकार हो रहे हैं। भारत का युवा यदि गलत दिशा में - [परमात्मा सब जीवात्माओं को मनुष्यादि जन्म देने वाले माता व पिता होने से उपासनीय हैं](https://www.ugtabharat.com/103509/) - परमात्मा और आत्मा का सम्बन्ध व्याप्य-व्यापक, उपास्य-उपासक, स्वामी-सेवक, मित्र बन्धु व सखा आदि का है। परमात्मा और आत्मा दोनों इस जगत की अनादि चेतन सत्तायें हैं। ईश्वर के अनेक कार्यों में जीवों के पाप-पुण्यों का साक्षी होना तथा उन्हें उनके कर्मानुसार सुख व दुःख रूपी फल वा भोग प्रदान करना है। हमारा जो जन्म व - [हमारे लिए खाद्य सुरक्षा अब और भी अधिक जरूरी हो गई है](https://www.ugtabharat.com/20016/) - प्रियंका सौरभ प्रियंका सौरभ रोटी, कपड़ा और मकान को मनुष्य की मूलभूत आवश्यकताएं कहा जाता है। इन मूलभूत आवश्यकताओं की आवश्यकता को पूरा करने के लिए इंसान बहुत मेहनत करता है। भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियां आम जनता को सुरक्षित भोजन के महत्व के बारे में पर्याप्त जानकारी प्रदान करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही - [निजी स्कूलों को नियंत्रित कर अध्यापकों की भर्ती करें सरकार](https://www.ugtabharat.com/21622/) - प्रियंका सौरभ दरअसल सरकारी स्कूल फेल नहीं हुए हैं बल्कि यह इसे चलाने वाली सरकारों, नौकरशाहों और नेताओं का फेलियर है. सरकारी स्कूल प्रणाली के हालिया बदसूरती के लिए यही लोग जिम्मेवार है जिन्होंने निजीकरण के नाम पर राज्य की महत्वपूर्ण सम्पति का सर्वनाश कर दिया है. वैसे भी वो राज्य जल्द ही बर्बाद हो - [मैला ढोने वालों की दुर्दशा](https://www.ugtabharat.com/27922/) - ------------------------------- ( 28 साल पहले एक कानून के माध्यम से इस पर प्रतिबंध लगाने एवं तकनीकी प्रगति के बावजूद, मानव अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता पैदा करने वाली , मैनुअल स्कैवेंजिंग भारत में बनी हुई है। मैनुअल स्कैवेंजिंग का तात्पर्य किसी भी तरीके से मैन्युअल रूप से सफाई करने, शुष्क शौचालयों और सीवरों से मानव उत्सर्जन - [पड़ोसी चाहे कोई भी हो उससे सजग और सावधान रहना ही समझदारी है](https://www.ugtabharat.com/28113/) - प्रियंका सौरभ —-प्रियंका सौरभ पड़ोस में शांति हो, तो इन्सान चैन की नींद सोता है, लेकिन यह शांति तभी बनी रह सकती है, जब पड़ोसी के साथ-साथ हम भी शांति के पक्षधर हों और ये समझ आ जाये कि क्या पडोसी शांति के लायक है? वर्चस्व की जंग हमेशा शांति को मारने का काम करती - [प्रतिभाशाली युवाओं की कमी झेलता भारतीय लोकतंत्र](https://www.ugtabharat.com/30488/) - प्रियंका सौरभ एक देश का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि वह कितना युवा है। 15-24 वर्ष के बीच के सभी युवा, आमतौर पर कॉलेज जाने वाले छात्र होते हैं। उनके करियर विकल्प में इंजीनियर, डॉक्टर, शिक्षक, खेल, रक्षा और कुछ उद्यमी शामिल हैं। विशेष रूप से भारत के संदर्भ में, राजनीति को कैरियर विकल्प के रूप - [खुलने लगे स्कूल, हो न जाए भूल](https://www.ugtabharat.com/30862/) - ( बिना परीक्षा कॉलेजों और स्कूलों की बड़ी कक्षाओं के छात्रों को ‘कोरोना सर्टिफिकेट’ देना कोई बेहतर कदम नहीं है। कोरोना काल में वर्चुअल कक्षाओं ने इंटरनेट को भी शिक्षा की महत्वपूर्ण कड़ी बना दिया है लेकिन हमने ये भी जाना कि देश में एक बड़े वर्ग के पास न तो स्मार्ट फोन है और - [हमारी आर्थिक तस्वीर को बदल सकते हैं मछली और पशुपालन](https://www.ugtabharat.com/31043/) - ( हरियाणा जैसे छोटे राज्य द्वारा पशु क्रेडिट कार्ड योजना इस क्षेत्र को आर्थिक तौर पर मजबूत बनाते है. फिर भी कुछ अन्य कदम इस क्षेत्र में किसानों को अपनी तरफ आकर्षित कर सकते है. यह लाखों लोगों को विशेष रूप से ग्रामीण लोगों को स्वरोजगार प्रदान करता है. इसने महिलाओं के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण - [क्या महिलाओं को घरेलू काम के लिए वेतन दिया जाना चाहिए ?](https://www.ugtabharat.com/31998/) - प्रियंका सौरभ (भारत में घरेलू श्रम के सवाल पर एक महत्वपूर्ण अभियान चल रहा है। ये मुख्य रूप से महिलाएं हैं जो 'महिलाओं के काम' करती हैं, लेकिन अन्य लोगों के घरों में। वो मांग करते हैं कि उनकी शर्तों को परिभाषित किया जाए, न्यूनतम मजदूरी की गारंटी दी जाए, और श्रमिकों की स्थिति - [सोच बदल कर ही मासिक धर्म की गरिमा बढ़ सकती है](https://www.ugtabharat.com/36015/) - (मासिक धर्म के कलंक को तोड़ने और मासिक धर्म अपशिष्ट कार्यशालाओं और शौचालय डिजाइनों को बढ़ावा देने जैसी पहल के साथ शिक्षा और व्यवहार परिवर्तन के माध्यम से राष्ट्रीय नीति को बदलने की आवश्यकता है।) महिलाओं के लिए मासिक धर्म एक प्राकृतिक और स्वस्थ जैविक प्रक्रिया है, इसके बावजूद, यह अभी भी भारतीय समाज - [आखिर नसबंदी की जिम्मेवारी भी महिलाओं पर क्यों ?](https://www.ugtabharat.com/52685/) - ( पुरुष नसबंदी की कम लागत और सुरक्षित प्रक्रिया के बावजूद, भारत की एक तिहाई से अधिक यौन सक्रिय आबादी में महिला नसबंदी को क्यों अपनाया जा रहा है ? पुरुष नसबंदी का विकल्प नगण्य-सा है। हमारे राष्ट्रीय परिवार और स्वास्थ्य सर्वेक्षण में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि वर्तमान में 15-49 वर्ष - [सेक्स ऑब्जेक्ट' जमाने में महिला सशक्तिकरण](https://www.ugtabharat.com/53281/) - (सोशल मीडिया पर पाया गया है कि लड़कियों को लड़कों की तुलना में अधिक बार यौन रूप से चित्रित किया जाता है। सोशल मीडिया ने "किशोर लड़कियों के लिए कुछ यौन कथाओं के अनुरूप होने के लिए सदियों पुराने दबावों को बढ़ाया है। यह दर्शाता है कि महिलाओं के साथ एक ऐसी वस्तु के रूप - [आखिर खेतों में किसान कब तक मरते रहेंगे करंट से ?](https://www.ugtabharat.com/61165/) - कारण जो भी हो, यह बहुत दुखद है कि हमारे किसान, हमारे देश के खाद्य प्रदाता, अपनी दैनिक दिनचर्या को ईमानदारी से निभाने में मर रहे हैं। नयी योजनाओं के साथ-साथ बिजली के ढीले तार ठीक करना, हाईवोल्टेज बिजली पोल का समाधान ढूंढना, खेत में लगाई जाली से बचना, रात को पानी चलाते समय सावधानी - [भाई-बहन के अटूट रिश्ते के क्या हैं मायने ?](https://www.ugtabharat.com/62107/) - - -प्रियंका सौरभ भाई-बहन का रिश्ता दुनिया के सभी रिश्तों में सबसे ऊपर है। हो भी न क्यों, भाई-बहन दुनिया के सच्चे मित्र और एक-दूसरे के मार्गदर्शक होते है। जब बहन शादी करके ससुराल चली जाती है और भाई नौकरी के लिए घर छोड़कर किसी दूसरे शहर चला जाता है तब महसूस होता है कि - [बेरोजगारी में नंबर वन हरियाणा: युवाओं के साथ खेलती सरकार, क्यों नहीं हो रही भर्तियां?](https://www.ugtabharat.com/62950/) - अगर सरकार की मंशा ही है तो आखिर क्यों राज्य में लाखों पदों के खाली होने के बावजूद यहां के औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग में आईटीआई इंस्ट्रक्टर के पदों पर भर्ती नहीं होती? शिक्षकों के खाली पदों को क्यों नहीं भरा जाता? एचएसआईआईडीसी एवं पुलिस के चयनित उम्मीदवारों को जॉइनिंग क्यों नहीं दी जाती? सरकार को - [जब रिश्ते हैं टूटते, होते विफल विधान....](https://www.ugtabharat.com/63483/) - जब रिश्ते हैं टूटते, होते विफल विधान। गुरुवर तब सम्बल बने, होते बड़े महान।। बच्चों के विकास में, शिक्षकों की आदर्श भूमिका सही मूल्यों और गुणों के प्रवर्तक और प्रेरक की होनी चाहिए। इस प्रकार, छात्रों को ज्ञान सीधे चम्मच खिलाने के बजाय, उन्हें बच्चों में पूछताछ, तर्कसंगतता की भावना विकसित करने का प्रयास करना - [खुशियों और सौगातों का त्योहार है दीपावली](https://www.ugtabharat.com/65844/) - बाकी सारे त्योहारों का धार्मिक महत्व है पर दीपावली का एक व्यावसायिक महत्व है। सोना और चांदी की बिक्री भी इसी सीजन में सबसे ज्यादा होती है और कपड़ों की भी। इस मौके पर उपहार और भेंटें देने के कारण भी तमाम सारे गिफ्ट आइटमों की बिक्री भी बढ़ जाती है। यानी अकेले दीपावली का - [नए साल के पँख पर](https://www.ugtabharat.com/69865/) - नए साल के पँख पर बीत गया ये साल तो, देकर सुख-दुःख मीत ! क्या पता? क्या है बुना ? नई भोर ने गीत !! माफ़ करे सब गलतियां, होकर मन के मीत ! मिटे सभी की वेदना, जुड़े प्यार की रीत !! जो खोया वो सोचकर, होना नहीं उदास ! जब तक साँसे हैं - [अपनी सांस्कृतिक गतिविधियों के कारण वर्ष-भर चर्चित रहा नारनौल का मनुमुक्त 'मानव' मेमोरियल ट्रस्ट](https://www.ugtabharat.com/70142/) - (नववर्ष-विशेष) अपने आईपीएस बेटे मनुमुक्त 'मानव' की असमय मृत्यु उपरांत दुनिया-भर के युवाओं में मनु के अक्स को देखते हुए, उन्हें ट्रस्ट के माध्यम से पुरस्कार प्रदान कर, आगे बढ़ने के हेतु प्रेरित करते हैं ट्रस्टी कांता भारती और चीफ ट्रस्टी डॉ रामनिवास 'मानव'।यह संभवतः दुनिया का एकमात्र ट्रस्ट है, जिसे बेटे की स्मृति में - [स्वार्थों के लिए मनुवाद का राग](https://www.ugtabharat.com/70653/) - मनुस्मृति या भारतीय धर्मग्रंथों को मौलिक रूप में और उसके सही भाव को समझकर पढ़ना चाहिए। विद्वानों को भी सही और मौलिक बातों को सामने लाना चाहिए। तभी लोगों की धारणा बदलेगी। दाराशिकोह उपनिषद पढ़कर भारतीय धर्मग्रंथों का भक्त बन गया था। इतिहास में उसका नाम उदार बादशाह के नाम से दर्ज है। फ्रेंच विद्वान - [बने विजेता वो सदा, ऐसा मुझे यकीन। आँखों में आकाश हो, पांवों तले जमीन।।](https://www.ugtabharat.com/70824/) - बने विजेता वो सदा, ऐसा मुझे यकीन। आँखों में आकाश हो, पांवों तले जमीन।। जीवन में सफल होने के लिए धैर्य रखना और अपने सपनों के लिए समर्पित रूप से कड़ी मेहनत करना महत्वपूर्ण है। जीवन में कुछ भी मुफ्त नहीं है, और इसलिए हमें जीवन में बड़ी चीजें हासिल करने के लिए अपने सभी - [केंद्र और राज्य सरकार के बीच पिसता आम आदमी](https://www.ugtabharat.com/71156/) - एक दशक से देश की सियासत में एक तरह की राजनीति कुछ अलग ही तरीके से चल पड़ी है, जिसके चलते छोटे-छोटे मामलों पर बड़े-बड़े पदों पर बैठे लोगों को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। केंद्र से अलग पार्टी की सरकार वाले राज्यों के पास अक्सर इस बात का रोना रहता - [पशु चिकित्सा को चिकित्सा की जरूरत](https://www.ugtabharat.com/72371/) - सूदूर ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं को पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करवाना बहुत जरूरी है। इसके साथ ही नये पशु अस्पतालों का निर्माण और उनमें आवश्यक स्टाफ की नियुक्ति, आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता,हर पशु का बीमा, खण्ड स्तर पर पशु धन मेलों का आयोजन और पालकों को हरसंभव मदद मुहैया करवाकर उन्हें दूध का सही दाम - [कृषि रोबोट: किसानों का किफायती दोस्त](https://www.ugtabharat.com/75398/) - कृषि क्षेत्र में भारत में किसान घट रहे हैं। कुछ सामान्य वाक्यों को दोहराकर खेती के पेशे को छोड़ रहे हैं कि यह अब लाभदायक नहीं है, दिन-ब-दिन जोखिम भरा होता जा रहा है। इसके नुकसान युवाओं को भी इसमें रुचि नहीं लेने देते हैं। रोबोटिक्स निश्चित रूप से कृषि क्रांति लाएगा। हालांकि आगे की - [दफ्तरों के इर्द-गिर्द खुशियां टटोलते पति-पत्नी](https://www.ugtabharat.com/79592/) - आज एकल परिवार और महिलाओं की नौकरी पर जाने से दांपत्य सुख के साथ-साथ पारिवारिक सुख जो होना चाहिए वह नहीं है। बच्चे किसी और पर आश्रित होने के कारण टीवी मोबाइल में घुसे रहते हैं। कामकाजी पति-पत्नी के मामलों में यह बात सामने आ रही है कि दोनों ऑफिस के बाद घर में मोबाइल - [संसद को उपहास का पात्र बनाते सांसद](https://www.ugtabharat.com/88113/) - संसद में शोर-शराबा, वेल में जाकर नारेबाज़ी करना, एक-दूसरे पर निजी कटाक्ष करना यहां तक कि कई बार हाथापाई पर उतारू हो जाना आज संसद की आम तस्वीर है। आखिर सियासी पार्टियों और सांसदों का बर्ताव इतना अराजक क्यों हो गया है? क्या आज पार्टियों के निहित स्वार्थों ने संसद को मज़ाक बनाकर रख दिया - [भारत में नारी उत्पीड़न अर्थात पूरी व्यवस्था के लिए एक बड़ा प्रश्नचिह्न](https://www.ugtabharat.com/98838/) - प्रियंका सौरभ गाजियाबाद ( ब्यूरो डेस्क ) अगर यह बलात्कार संस्कृति नहीं है, जिसे समाज के समझदार पुरुषों और महिलाओं, संस्थानों और सरकारी अंगों द्वारा समर्थित और बरकरार रखा जाता है, तो यह क्या है? आप सभी कानून, सभी तेज़ अदालतें, यहाँ तक कि मौत की सज़ा भी ला सकते हैं, लेकिन कुछ भी नहीं - [भारतीय स्कूली शिक्षा प्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता](https://www.ugtabharat.com/103457/) - विभिन्न शैक्षिक सुधारों और नीतियों के बावजूद, भारत की स्कूली शिक्षा प्रणाली को बहुआयामी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। भारत की स्कूली शिक्षा प्रणाली में महत्त्वपूर्ण बदलाव हुए हैं, जो लंबे समय तक चलने वाले शैक्षणिक पथ और सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक कौशल के बीच की खाई के कारण चुनौतियों का सामना कर - [संसदीय गरिमा पर अविश्वास](https://www.ugtabharat.com/103486/) - (राज्यसभा के सभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नोटिस) राज्यसभा में सभापति के खिलाफ विपक्ष खेमे ने अविश्वास प्रस्ताव लाने का नोटिस दिया है। भारतीय संसद के इतिहास में यह पहला मौका होगा, जहां राज्यसभा में किसी सभापति के खिलाफ अविश्वास का नोटिस आया हो। दरअसल, यह मौका इसलिए सामने आया, क्योंकि सभापति के सदन में - [पेशवा बालाजी बाजीराव उर्फ नाना साहेब व माधवराव प्रथम](https://www.ugtabharat.com/103406/) - भारत के 1235 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास (हिन्दी स्वराज के संस्थापक शिवाजी और उनके उत्तराधिकारी पुस्तक से) कोई व्यक्ति संसार से जाता है तो सामान्यतः उसके अनुयायी उसके अधूरे कार्यों को पूर्ण करने का संकल्प लेते देख जाते हैं, परंतु यह सत्य है कि जो भी महापुरुष संसार से जाता है उसके जाने के - [राजा सुहेलदेव और प्रधानमंत्री श्री मोदी](https://www.ugtabharat.com/103435/) - इतिहास की पड़ताल पुस्तक से .... (अध्याय-14 ) आज हमारे देश का इतिहास करवट ले रहा है और कुछ सीमा तक उसे करवट दिलवाई भी जा रही है। हमारे ऐसा कहने का अभिप्राय है कि जब हम विश्व नेतृत्व की स्थिति में आते जा रहे हैं और विश्व को कोरोना वैक्सीन देने सहित कई क्षेत्रों - [नेहरू ने ब्रिटिश सत्ता से देश को मुक्त कराने वाले देश के नायकों का हक़ ही नहीं छीना, उन पर घोर अत्याचार भी किये](https://www.ugtabharat.com/103450/) - कांग्रेस के हाथ में १९४७ में देश की बागडोर इसलिए आई कि कांग्रेस ने १९४५ के केंद्रीय विधान सभा का चुनाव इस प्रतिज्ञा के साथ जीता था कि मुस्लिम लीग की माँग देश का विभाजन कभी नही स्वीकार करेगी।.गांधी जी की लाश पर ही पाकिस्तान बनेगा। कांग्रेस ने देश के हिंदू मतदाताओं से विश्वासघात करके - [ब्रह्मचर्य के दिवाने आचार्य भगवान देव (स्वामी ओमानंद जी)](https://www.ugtabharat.com/103444/) - आचार्य जी ने अपने यौवन काल से ही एक ऊंचे और तपस्वी का जीवन व्यतीत किया है । नियम और व्रतों का पालन जिस श्रद्धा और कड़ाई से ये करते हैं वैसा हमने आज तक दूसरे किसी व्यक्ति को नहीं करते देखा । जिन लोगों ने आचार्य जी को निकट से देखा है वे इस - [चौधरी मातूराम का जनेऊ संघर्ष](https://www.ugtabharat.com/103440/) - लेखक - जगतसिंह हुड्डा स्त्रोत - देहात रत्न चौधरी मातूराम आर्य जीवन वृत प्रथम पीढ़ी के आर्यसमाजी चौ० मातूराम ने चौथी पास करने के बाद 'पढ़ाई छोड़ दी' और 16 वर्ष की आयु में ही इस क्षेत्र में पहले यज्ञोपवीत (जनेऊ) धारण कर आर्य समाजी बने और समाज में फैली कुरीतियों का पर्दाफाश करने का - [भारत में दान करने की प्रथा से गरीब वर्ग का होता है कल्याण](https://www.ugtabharat.com/103422/) - भारत में हिंदू सनातन संस्कृति के संस्कारों में दान दक्षिणा की प्रथा का अलग ही महत्व है। भारत में विभिन्न त्यौहारों एवं महापुरुषों के जन्म दिवस पर मठों मंदिरों, गुरुद्वारों एवं अन्य पूजा स्थलों पर समाज के सम्पन्न नागरिकों द्वारा दान करने की प्रथा अति प्राचीन एवं सामान्य प्रक्रिया है। गरीब वर्ग की मदद करना - [समान पैदावार के साथ स्वास्थ्य जोखिम कम करेगी प्राकृतिक खेती](https://www.ugtabharat.com/103418/) - किसानों की खाद की मांग को पूरा करने के लिए शहरी गीले कचरे से खाद बनाने को राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन में शामिल करें। विकेंद्रीकृत अपशिष्ट प्रबंधन: स्थानीय खाद बनाने के समाधानों के लिए शहर-किसान भागीदारी को बढ़ावा दें। खाद बनाने की तकनीक और मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन में किसान प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मज़बूत करें। जन - [मानवता समानता का संदेश देने वाले संत गुरु घासीदास](https://www.ugtabharat.com/103412/) - 18 दिसंबर गुरु घासीदास जयंती पर विशेष छत्तीसगढ़ के संतो में बाबा गुरु घासीदास का नाम सबसे प्रथमत:आता है। इस धरती ने अपने गर्भ से अनेक रत्नों को जन्म दिया है, जिनमें बाबा घासीदास महारत्नों में से एक है। बाबा घासीदास का जन्म बलौदा बाजार भाटापारा जिले के एक छोटे से ग्राम गिरौधपुरी में18 दिसंबर - [भारतीय स्वतंत्रता समर के एक अविस्मरणीय योद्धा सरदार वल्लभभाई पटेल](https://www.ugtabharat.com/103397/) - सरदार पटेल के काम करने और निर्णय लेने के ढंग से लोग अच्छी तरह परिचित हो गए थे । कभी कोई बात उनके मुख से निकल गई तो समझिये वह पत्थर की लकीर हो गई । पाकिस्तान भी सरदार के इस स्वभाव से परिचित हो गया था । पूर्वी बंगाल से प्रारम्भ में जब लाखों - [भारत के इतिहास के महानायक सरदार वल्लभभाई पटेल](https://www.ugtabharat.com/103392/) - सरदार पटेल की पुण्यतिथि 15 दिसम्बर पर शत शत नमन सरदार पटेल के योगदान को एक बार फिर जानें हैदराबाद में सामूहिक रूप से हिन्दूओं का नरसंहार किया जा रहा था. 1- आजाद भारत में 562 रजवाड़ों में से सिर्फ़ तीन को छोड़कर सभी ने भारत में विलय का 2- हैदराबाद की आबादी का 80% - [वेदाध्ययन व वेद प्रचार से अविद्या दूर होकर विद्या वृद्धि होती है](https://www.ugtabharat.com/103386/) - मनुष्य एक ज्ञानवान प्राणी होता है। मनुष्य के पास जो ज्ञान होता है वह सभी ज्ञान स्वाभाविक ज्ञान नहीं होता। उसका अधिकांश ज्ञान नैमित्तिक होता है जिसे वह अपने शैशव काल से माता, पिता व आचार्यों सहित पुस्तकों व अपने चिन्तन, मनन, ध्यान आदि सहित अभ्यास व अनुभव के आधार पर अर्जित करता है। मनुष्य - [ईश्वर विषयक कतिपय शंकाओं के ऋषि दयानन्द के समाधान](https://www.ugtabharat.com/103382/) - आज हम वेदों के अविद्वतीय विद्वान वेद-ऋषि स्वामी दयानन्द सरस्वती जी द्वारा ईश्वर विषय में की जाने वाली कुछ शंकाओं के समाधान प्रस्तुत कर रहे हैं। उन्होंने प्रश्न उपस्थित किया है कि आप ईश्वर-ईश्वर कहते हो परन्तु ईश्वर की सिद्धि किस प्रकार करते हो? इसका उत्तर देते हुए वह कहते हैं कि वह सब प्रत्यक्षादि - [संविधान का निर्माण और भारतीय गणतंत्र](https://www.ugtabharat.com/103377/) - प्रत्येक गणतंत्र दिवस प्रतिवर्ष हमें अपने संविधान, अपनी संविधान सभा और संविधान सभा के सम्मानित सदस्यों के बारे में कुछ सोचने व समझने की प्रेरणा देता है। 1946 में भारत की संविधान सभा का गठन भारतीय संविधान के निर्माण के लिए किया गया था। ग्रेट ब्रिटेन से स्वतंत्र होने के पश्चात भारत की संविधान सभा - [संसद में हुई संविधान पर जोरदार बहस : प्रधानमंत्री मोदी ने पूरी फॉर्म में आकर किया विपक्ष पर हमला](https://www.ugtabharat.com/103367/) - गाजियाबाद ( ब्यूरो डेस्क )कांग्रेस ने संविधान पर बहस कराकर एक बार फिर अपनी फजीहत करा ली है। उम्मीद की जाती थी कि संविधान पर बहस करने के मुद्दे को कांग्रेस के नेता राहुल गांधी अपने पक्ष में भुनाने में सफल होंगे। इस बहस के बहाने वह भाजपा के उन सभी प्रयासों की पोल खोलेंगे, - [इंडिया गठबंधन की रार से में पिसते क्षेत्रीय दल](https://www.ugtabharat.com/103353/) - कांग्रेस के नेतृत्व वाले ‘इंडिया गठबंधन’ में नेतृत्व के सवाल पर जो मौजूदा चिल्ल-पों मची हुई है और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व पर एक बार फिर से जो सवाल उठाए जा रहे हैं, उससे न तो तृणमूल कांग्रेस नेत्री व पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का राजनीतिक भला होने वाला - [ईश्वर में अविश्वास क्यों ?](https://www.ugtabharat.com/103332/) - व्याख्याता - शास्त्रार्थ महारथी पं॰ रामचंद्र देहलवी जी प्रस्तुति - ‘अवत्सार’ आजकल कुछ मित्रादि अथवा दूसरे व्यक्ति जब मुझसे मिलते हैं तो मुझसे प्रायः वह प्रश्न किया करते हैं, "क्या कारण है कि ईश्वर के अस्तित्व के विषय में इतने भाषण होते हैं फिर भी लोगों का ईश्वर में विश्वास समाप्त होता जा रहा है - [आर्य सुधारक थे महात्मा बुद्ध](https://www.ugtabharat.com/103331/) - बौद्ध मत के प्रवर्तक महात्मा बुद्ध के बारे में यह माना जाता है कि वह आर्य मत वा वैदिक धर्म के आलोचक थे एवं बौद्ध मत के प्रवर्तक थे। उन्हें वेद विरोधी और नास्तिक भी चित्रित किया जाता है। हमारा अध्ययन यह कहता है कि वह वेदों को मानते थे तथा ईश्वर व जीवात्मा के - [भाई परमानंद जी का संघर्षशील जीवन](https://www.ugtabharat.com/103333/) - गुरु तेग बहादुर के साथ ही बलिदान देने वाले भाई मतिदास, जिन्हें मुस्लिम ना बनने पर औरंगजेब के आदेश से आरे से बीच से चीर दिया गया था और जिनके बलिदान से भाव विह्वल हो गुरु ने उन्हें भाई की उपाधि से विभूषित किया था, के वंश में जन्मे बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी भाई परमानन्द - [बालासाहेब देवरस जी अस्पृश्यता प्रथा के घोर विरोधी थे](https://www.ugtabharat.com/103328/) - 11 दिसम्बर 2024 श्री बालासाहेब देवरस की जयंती पर विशेष लेख परम पूज्य श्री मधुकर दत्तात्रेय देवरस जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तृतीय सरसंघचालक थे। आपका जन्म 11 दिसम्बर 1915 को श्री दत्तात्रेय कृष्णराव देवरस जी और श्रीमती पार्वती बाई जी के परिवार में हुआ था। आपने वर्ष 1938 में नागपुर के मॉरिस कॉलेज से - [आर्यसमाज एक अद्वितीय धार्मिक, आध्यात्मिक, सामाजिक एवं राष्ट्रीय संगठन है](https://www.ugtabharat.com/103326/) - संसार में किसी विषय पर सत्य मान्यता एक व परस्पर पूरक हुआ करती हैं जबकि एक ही विषय में असत्य मान्यतायें अनेक होती व हो सकती हैं। संसार में ईश्वर व धर्म = अध्यात्म विषयक मान्यतायें भी एक समान व परस्पर एक दूसरे की पूरक होती हैं। इसी कारण से संसार में ईश्वर एक ही - [केवल युधिष्ठिर की विवाहिता पत्नी थी द्रौपदी](https://www.ugtabharat.com/101140/) - द्रौपदी का केवल एक पति था-युधिष्ठिर विवाद क्यों पैदा हुआ था:- (१) अर्जुन ने द्रौपदी को स्वयंवर में जीता था। यदि उससे विवाह हो जाता तो कोई परेशानी न होती। वह तो स्वयंवर की घोषणा के अनुरुप ही होता। (२) परन्तु इस विवाह के लिए कुन्ती कतई तैयार नहीं थी। (३) अर्जुन ने भी इस - [मोक्ष वाले पीपल से दिव्य अवलोकन](https://www.ugtabharat.com/101562/) - यह घटना बाल प्रभु के आठ वर्ष के उम्र की संबत 1845 विक्रमी की है। छपिया के नैरित्य कोण फिरोजपुर के गांव को सीमा लगती है। यहां उपवन वाटिका बहुत था। यह स्थान रेलवे स्टेशन के तरफ़ जाने वाले मार्ग पर पड़ता है। एक बार घनश्याम प्रभु झट से एक पेड़ पर चढ़ गए और - [देवता किसे कहते हैं और देवता कितने प्रकार के होते हैं ?](https://www.ugtabharat.com/100850/) - प्र०- देवता किसे कहते है? उ०-देवो दानाद्वा, दीपनाद्वा द्योतनाद्वा , द्युस्थानो भवतीति वा । दान देने वाले देव कहाते हैं दीपन अर्थात विद्या रुपी प्रकाश करने वाले देव कहाते हैं । द्योतन अर्थात सत्योपदेश करने वाले देव कहाते हैं ।विद्वान भी विद्या आदि का दान करने से देव कहाते हैं विद्वानसो ही देवा । सब - [आत्मनिर्भरता की ओर किशोरियों का पहला कदम](https://www.ugtabharat.com/101567/) - "मैं बीए में पढ़ रही हूं. मैं पढ़ लिख कर आत्मनिर्भर बनना चाहती हूं, लेकिन मुझे ये नहीं पता था कि आगे भविष्य में क्या करना है? मैंने सुना है कि आज के युग में कंप्यूटर के ज्ञान के बिना भविष्य नहीं है. नौकरी मिलना संभव नहीं है. लेकिन मेरे पास इसे सीखने की कोई - [वैदिक साधन आश्रम तपोवन, देहरादून में एक नये गुरुकुल का शुभारम्भ](https://www.ugtabharat.com/101559/) - वैदिक साधन आश्रम तपोवन, देहरादून में शुक्रवार, दिनांक 18-10-2024 से बालकों/युवकों के लिए एक नये गुरुकुल का शुभारम्भ किया गया है। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में हमें भी कुछ समय के लिए भाग लेने का अवसर मिला। आयोजन में आर्यसमाज के प्रसिद्ध नेता स्वामी आर्यवेश जी तथा विख्यात आर्य नेता एवं विद्वान् ऋषिभक्त ठाकुर - [दिव्य भाव से करो मित्रता](https://www.ugtabharat.com/103301/) - जीवन में छल छद्मों से, बचता चल - तू बचता चल। मार्ग बना निष्कंटक अपना, पाप-घात से बचता चल ।। जितने भर भी दिव्य भाव हैं, चुनता चल तू - चुनता चल। जितने भर भी दुष्ट भाव हैं, मन से दूर हटाता चल।। भव्य भाव में जीना दुर्लभ , पर नहीं असंभव कुछ भी। दिव्य - [जीवन का संदेश यही है](https://www.ugtabharat.com/103302/) - जीवन का संदेश यही है , बात करो - तुम तारों से। ऊंचा देखो- ऊंचा सोचो, न उलझो नीच विचारों में।। लड़ो साहसी योद्धा बनकर, अंधियारी तुम रातों से। जो भूत नहीं माने बातों से, मनवा दो उसको लातों से।। यश की चादर ओढ़ बढ़ो तुम, पड़ताल व्योम की करने को। करतल-पृष्ठे पुण्य करो तुम, - [अंधकार नहीं रोक सका है](https://www.ugtabharat.com/103299/) - जीवन की हारी बाजी को, जो हार गया- सो हार गया। जिसने पलटा इस पासे को, वह पार गया - वह पार गया।। अंधकार नहीं रोक सका है, कभी सवेरे को जग में। गहन निशा भी छंट जाती है, संकल्प धार लो यदि मन में।। नियम शाश्वत चलता आया, जहां अंधेरा, होता वहीं सवेरा। जहां - [काल सर्प दोष प्रपंच](https://www.ugtabharat.com/103294/) - मेरे पास एक सुप्रसिद्ध धर्म गुरु मिलने आये और कुछ देर की वार्ता के बाद उन्होंने मेरी तरफ देखा और बोले आपको काल सर्प योग लगा हुआ है, बहुत मुश्किल का समय आपके सामने आ चूका है। कुछ देर रूककर बोले कि घबराना नहीं इसका उपाय किसी दिन बता दूंगा, सब ठीक हो जाएगा। मैंने - [इच्छाओं के क्षेत्र में दो प्रकार के लोग.........](https://www.ugtabharat.com/103288/) - सबके पास कुछ न कुछ सुविधाएं हैं और कुछ-कुछ कमियां भी हैं। उन कमियों को दूर करने के लिए सब में इच्छाएं भी हैं। इच्छाओं के क्षेत्र में दो प्रकार के लोग संसार में देखे जाते हैं। एक वे, "जो अपने पास उपलब्ध सुविधाओं पर अधिक ध्यान देते हैं। जो वस्तुएं जीवन चलाने के लिए - [क्रांतिकारी संन्यासी और भारत की राजनीति](https://www.ugtabharat.com/103285/) - कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर कई बार चर्चाओं आ चुके हैं। उनकी मानें तो योगी आदित्यनाथ जैसे भगवाधारी साधु संतों को राजनीति में नहीं रहना चाहिए। अब इस बात को कहकर खड़गे अपनी राजनीतिक हताशा का प्रदर्शन कर रहे हैं या वह वास्तव में इस बात के प्रति - [इतिहास की पड़ताल पुस्तक से... निज गौरव और निज देश का अभिमान (अध्याय-10)](https://www.ugtabharat.com/102497/) - महात्मा गांधी से भी पहले सत्याग्रह को भारतीय स्वाधीनता संग्राम का हथियार बना देने वाले विजय सिंह पथिक भी क्रांतिकारी साहित्यकारों की श्रेणी के महान् व्यक्तित्व थे। पथिक जी क्रांतिकारी व सत्याग्रही होने के अलावा कवि, लेखक और पत्रकार भी थे। अजमेर से उन्होंने नव संदेश और राजस्थान संदेश के नाम से हिन्दी के अखबार - [भारत के 1235 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास भाग - 410](https://www.ugtabharat.com/102501/) - [हिन्दवी - स्वराज के संस्थापक शिवाजी और उनके उत्तराधिकारी पुस्तक से] हिंदवी स्वराज्य का संघर्ष और छत्रपति राजाराम महाराज (अध्याय -09) छत्रपति संभाजी महाराज का जिस प्रकार मुगलों ने निर्दयता और क्रूरता के साथ वध कर दिया था, उसके परिणामस्वरूप मराठा साम्राज्य के सामने कई प्रकार के प्रश्न आ खड़े हुए थे। सर्वप्रथम स्वराज्य की - [भारत के 1235 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास भाग - 410](https://www.ugtabharat.com/102507/) - [हिन्दवी - स्वराज के संस्थापक शिवाजी और उनके उत्तराधिकारी पुस्तक से] हिंदवी स्वराज्य का संघर्ष और छत्रपति राजाराम महाराज (अध्याय -09) भाग - 2 द्वीप पर मुगल सेना का आक्रमण राजाराम महाराज अपनी ओर से पूर्ण सावधानी बरतते हुए यद्यपि तुंगभद्रा के तट तक पहुँच गए थे, परंतु शत्रु भी उनका पीछा करता आ रहा - [श्री राम के जीवन की ये घटना आपकी आंखें खोल सकती है](https://www.ugtabharat.com/102763/) - वनवास के समय एक राक्षस विराध जंगलों में आग लगाता हुआ पशुयों व मनुष्यो को खाता हुआ आगे बढ़ रहा था, वन में श्री राम से टकरा जाता है और कहता है यदि जीवन चाहिये तो स्त्री और अस्त्र-शस्त्र को छोड़ कर भाग जाओ... यदि जीवितुमिच्छास्ति त्यक्तवा सीताम् निरायुधौ अब यह क्या है? वस्तुतः यही है - [सूरजपुर मखैना की कोठी का प्रांगण, कभी था स्वाधीनता का समरांगण](https://www.ugtabharat.com/102751/) - भारत में सर्वत्र इतिहास बिखरा पड़ा है। खोजी नजरें जब उस पर पड़ती हैं तो जैसे सोने की खान में मिट्टी के हर कण में से सोना तलाश लेने वाली नजरें सोना निकाल लेती हैं, वैसे ही अनुसंधान और तार्किक दृष्टिकोण वाले विद्वज्जन इतिहास को खोज लिया करते हैं। जलालपुर ग्राम पंचायत सूरजपुर मखैना की - [वेदादि ग्रन्थों के स्वाध्याय से मनुष्य अन्धविश्वासों व अशुभ कर्मों से बचता है](https://www.ugtabharat.com/103265/) - वेद अपौरुषेय रचना है। सृष्टि के आरम्भ में परमात्मा ने ही अपने अन्तर्यामीस्वरूप से चार ऋषियों अग्नि, वायु, आदित्य एवं अंगिरा को उनकी आत्माओं में वेदों का ज्ञान कराया वा दिया था। प्राचीन काल से अद्यावधि-पर्यन्त सभी ऋषि वेदों की परीक्षा कर इस तथ्य को स्वीकार करते आये हैं कि वेद वस्तुतः ईश्वर से ही - [वेदों को जाने](https://www.ugtabharat.com/103244/) - ================== !!!! ---: वेदों की शाखाएँ :--- !!!! वेद का ज्ञान अनन्त हैः-- "अनन्ता वै वेदाः।" वैदिक-वाङ्मय ज्ञान का भण्डार है। वैदिक संस्कृत ज्ञान का सागर है। वेद के विद्वानों, ऋषियों ने वैदिक ज्ञान को सुरक्षित रखने के अनन्त उपाय किए। एक उपाय वेद की शाखा से सम्बन्धित है। जैसे वृक्षों में अनन्त शाखाएँ होती - [देश की समस्याओं का जखीरा और बढ़ती जनसंख्या](https://www.ugtabharat.com/103245/) - आजकल जनसंख्या के गणित पर देश में बड़ी चर्चा छिड़ी हुई है। कोई आबादी बढ़ाने की बात करते नजर आते हैं तो कोई आबादी घटाने की। हाल ही में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में देश की घटती आबादी को लेकर चिंता जता दी। उन्होंने यह कहा है कि प्रजनन दर घटी तो समाज - [ब्रह्मचर्य बल की महिमा](https://www.ugtabharat.com/103241/) - स्वामी भीष्म जी यूँ तो कभी किसी बारात-विवाह आदि में नहीं जाते थे मगर एक बहुत बड़े धनाढ्य सेठ जी जो उनका बहुत मान करते थे और उन्हें गुरु जी कहते थे, तो उनके बार-बार कहने पर उनके पुत्र के विवाह में बारात में मेरठ जाने के लिए तैयार हो गए । उस जमाने में - [आर्य समाज वेदनिहित सत्य सिद्धान्तों पर आधारित एक धार्मिक एवं सामाजिक संगठन है](https://www.ugtabharat.com/103238/) - आर्यसमाज एक धार्मिक एवं सामाजिक संगठन है जो विद्या से युक्त तथा अविद्या से सर्वथा मुक्त सत्य सिद्धान्तों को धर्म स्वीकार करती है और इनका देश देशान्तर में बिना किसी भेदभाव के प्रचार करती है। आर्यसमाज की स्थापना से पूर्व देश व विश्व अविद्या से ग्रस्त था। धर्म तथा मत-मतान्तरों में अविद्या प्राबल्य था। लोगों - [भारत में सहकारिता आंदोलन को सफल होना ही होगा](https://www.ugtabharat.com/103235/) - भारत में आर्थिक विकास को गति देने के उद्देश्य से सहकारिता आंदोलन को सफल बनाना बहुत जरूरी है। वैसे तो हमारे देश में सहकारिता आंदोलन की शुरुआत वर्ष 1904 से हुई है एवं तब से आज तक सहकारी क्षेत्र में लाखों समितियों की स्थापना हुई है। कुछ अत्यधिक सफल रही हैं, जैसे अमूल डेयरी, परंतु - [वेदमंत्रो के उपदेश](https://www.ugtabharat.com/102490/) - (यह लेख माला हम पंडित रघुनंदन शर्मा जी की पुस्तक वैदिक सम्पत्ति नामक से अपने सुधि पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं।) गतांक से आगे .... ऐसे आहार को आयों की परिभाषा में सात्त्विक आहार कहते हैं। सात्त्विक आहार का स्वरूप और प्रभाव वर्णन करते हुए भगवद्गीता में कृष्ण भगवान् कहते हैं कि- आयुः - [वैदिक सम्पत्ति - 257.. वेद मित्रों के उपदेश](https://www.ugtabharat.com/103216/) - यह लेखमाला हम पंडित रघुनंदन शर्मा जी की वैदिक सम्पत्ति नामक पुस्तक के आधार पर सुधि पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं। गतांक से आगे ... कलियुग का वर्णन करते हुए महाभारत वनपर्व अध्याय ११० में लिखा है कि- ये यवान्ना जनपदा गोधूमात्रास्तथैव च । तान् देशान् संश्रयिष्यन्ति युगान्ते पर्युपस्थिते ।। अर्थात् जिन देशों - [मनुष्य को प्रतिदिन ईश्वर के उपकारों का स्मरण करना चाहिये](https://www.ugtabharat.com/103228/) - हमें यह ज्ञात होना चाहिये कि ईश्वर क्या व कैसा है? उसके गुण, कर्म व स्वभाव क्या व कैसे हैं? इसका ज्ञान करने का सरलतम तरीका सत्यार्थप्रकाश ग्रन्थ का अध्ययन है। हमारी दृष्टि में संसार में सत्यार्थप्रकाश ग्रन्थ के समान दूसरा महत्वपूर्ण ग्रन्थ नहीं है। इसके अध्ययन से मनुष्य की सभी शंकायें व समस्यायें दूर - [संसार की श्रेष्ठतम रचना हमारी सृष्टि ईश्वर से ही प्रकाशित हुई है](https://www.ugtabharat.com/103226/) - प्रत्येक रचना एक रचयिता की बनाई हुई कृति होती है। हमारी यह विशाल सृष्टि किस रचयिता की कृति है, इस पर विचार करना आवश्यक एवं उचित है। सृष्टि की रचना व उत्पत्ति आदि विषयों का अध्ययन करने पर यह अपौरुषेय रचना सिद्ध होती है। अपौरुषेय रचनायें वह होती हैं जिनको मनुष्य नहीं बना सकते। संसार - [भारत के 1235 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास भाग - 413](https://www.ugtabharat.com/103096/) - हिंदवी स्वराज के संस्थापक शिवाजी और उनके उत्तराधिकारी पुस्तक से .. महान पेशवा बालाजी विश्वनाथ - अध्याय 11 मराठा शासनकाल में प्रधानमंत्री को ही पेशवा कहा जाता था। राजा की अष्टप्रधान परामर्शदात्री परिषद में इसका स्थान सबसे प्रमुख होता था। इसलिए बराबर वालों में प्रथम या प्रधान होने के कारण यह पद प्रधानमंत्री का पद - [भारत के 1235 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास भाग - 414](https://www.ugtabharat.com/103209/) - (हिन्दी स्वराज के संस्थापक शिवाजी और उनके उत्तराधिकारी पुस्तक से..) महान पेशवा बाजीराव प्रथम - अध्याय 12 जैसा कि हम पूर्व अध्याय में ही स्पष्ट कर चुके हैं कि बालाजी विश्वनाथ की मृत्यु के उपरांत उनके पुत्र बाजीराव प्रथम को मराठा साम्राज्य का अगला वंशानुगत पेशवा बनाया गया। बाजीराव प्रथम अपने उत्कृष्ट सैनिक गुणों, नेतृत्व - [यज्ञ (हवन) करने की सही विधि](https://www.ugtabharat.com/103207/) - हमारे बहुत से आर्य समाज के मित्र या अन्य सनातनी भी बहुत सा यज्ञ करते और करवाते हैं परन्तु यज्ञ का पूरा लाभ जैसा कि शास्त्रों में वर्णित है वैसा लाभ नहीं उठा पाते। इसका कारण है कि बहुत प्रकार की भिन्न भिन्न यज्ञ पद्धतियों का प्रचलित होना। प्रत्येक आर्य समाज में या गायत्री संस्थानों - [नए चाणक्य के अवतार के रूप में प्रकट हुए हैं भाजपा के देवेंद्र फडणवीस](https://www.ugtabharat.com/103204/) - महाराष्ट्र में सरकार गठन की राजनीति में दस दिन की सघन वार्ताओं और खासी नाटकीयता के बाद आखिर अंधेरा छंट गया और देवेंद्र फडणवीस तीसरी बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। फडणवीस का मुख्यमंत्री बनना न केवल महाराष्ट्र बल्कि देश की राजनीति को एक नई दिशा एवं दृष्टि देगा। क्योंकि फडणवीस ने अपने - [डॉक्टर अम्बेडकर का आर्थिक दृष्टिकोण](https://www.ugtabharat.com/103158/) - 6 दिसम्बर 2024 - डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर की पुण्यतिथि पर विशेष लेख आज भारत, पूरे विश्व में आर्थिक दृष्टि से एक सशक्त राष्ट्र बनकर उभर रहा है। वैश्विक स्तर पर कार्य कर रहे वित्तीय एवं निवेश संस्थान भारत की आर्थिक प्रगति की मुक्त कंठ से सराहना कर रहे हैं। भारत आज विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं - [भारत के 1235 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास भाग - 412](https://www.ugtabharat.com/102835/) - (हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक शिवाजी और उसके उत्ताधिकारी पुस्तक से ..) शिवाजी द्वितीय और महारानी ताराबाई - इससे पहले कि हम इस अध्याय के बारे में कुछ लिखें मैथिली शरण गुप्त की इन पंक्तियों रसास्वादन लेना उचित होगा- 'हाँ! वृद्ध भारतवर्ष ही संसार का सिरमौर है। ऐसा पुरातन देश कोई विश्व में क्या और है? - [काल भैरव कथा](https://www.ugtabharat.com/102917/) - डॉ डी के गर्ग पौराणिक मान्यता : एक बार ब्रह्मा, बिष्णु में श्रेष्ठता को लेकर विवाद चल रहा था। इस विवाद को सुलझाने के लिए ब्रह्मा, बिष्णु एवं सभी देवी-देवता और ऋषि मुनि भगवान शिव के पास आते हैं। भगवान शिव ने सभी देवी-देवता और ऋषि मुनियों ने से पूछा कि आप ही बताइए सबसे - [ब्याज दरों में अब कमी होनी ही चाहिए](https://www.ugtabharat.com/103181/) - भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर श्री शक्तिकांत दास ने अपने वर्तमान कार्यकाल का अंतिम मुद्रा नीति वक्तव्य (मोनेटरी पॉलिसी स्टेट्मेंट) दिनांक 06 दिसम्बर 2024 को प्रातः 10 बजे जारी किया है। इस मुद्रा नीति वक्तव्य में रेपो दर में किसी भी प्रकार का परिवर्तन नहीं करते हुए इसे पिछले 22 माह से (अर्थात 11 मुद्रा - [प्राथमिकताएं तय करनी होंगी मुख्यमंत्री फडणवीस को](https://www.ugtabharat.com/103174/) - अभी हाल ही में संपन्न हुए महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव के परिणामों की यदि निष्पक्षता के साथ समीक्षा की जाए तो पता चलता है कि इन चुनावों में देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र की जनता की पहली पसंद रहे । इसलिए यदि वह प्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं तो यह बहुमत के जनमत का स्वागत ही माना - [जीवन में संयम, आवश्कतायें सीमित रखने एवं शक्ति-संचय आवश्यक है](https://www.ugtabharat.com/103161/) - संसार में सभी जीवन पद्धतियों में वैदिक धर्म एवं तदनुकूल जीवन पद्धति श्रेष्ठ एवं महत्वूपर्ण है। इसे जानकर और इसके अनुसार जीवन व्यतीत करने पर मनुष्य अनेक प्रकार की समस्याओं से बच जाता है। मनुष्य को अपनी शारीरिक शक्तियों के विकास वा उन्नति पर ध्यान देना चाहिये। इसके लिये उसे समय पर जागना, शौच, भ्रमण, - [ईसाईयों द्वारा धर्मान्तरण की समाज सुधारकों द्वारा निंदा](https://www.ugtabharat.com/103170/) - हमारे देश के संभवत शायद ही कोई चिंतक ऐसे हुए हो जिन्होंने प्रलोभन द्वारा धर्मान्तरण करने की निंदा न की हो। महान चिंतक एवं समाज सुधारक स्वामी दयानंद का एक ईसाई पादरी से शास्त्रार्थ हो रहा था। स्वामी जी ने पादरी से कहा की हिन्दुओं का धर्मांतरण करने के तीन तरीके है। पहला जैसा मुसलमानों - [संसार समर है तुम योद्धा हो](https://www.ugtabharat.com/103165/) - संसार क्षेत्र में संबंध निभाना, हर किसी के वश की बात नहीं। रो - रोकर जो काटें जीवन को, ढंग जीने का उनको ज्ञात नहीं।। संसार समर है तुम योद्धा हो, किरदार निभाना भूल गए। अमृत चखने तुम आए थे, यहां नींद नशे में टूल रहे।। अपनों को अपना कह न सके, कभी कष्ट निवारक - [कहीं यौवन की धूप मचलती है....](https://www.ugtabharat.com/103164/) - कोई माथा पीट रहा जग में, एक धेला उसके पास नहीं। कोई कुबेर बना बैठा जग में, दुख का तनिक आभास नहीं।। कोई बनी कोठी को त्याग रहा , कोई कब्ज़ा करता कोठी पर। कोई भोजन को भी त्याग रहा, कोई लड़ता देखा रोटी पर।। कोई रक्त बहाता बंधु का, कोई निज रक्त लुटाता बंधु - [अग्निहोत्र-यज्ञ करने से यज्ञकर्ता को मिलता है ईश्वर का आशीर्वाद](https://www.ugtabharat.com/103149/) - वैदिक कर्म-फल सिद्धान्त के अनुसार मनुष्य जो शुभ व अशुभ कर्म करता है, उसका फल उसे परमात्मा से अवश्य मिलता है। शुभ व पुण्य कर्मों का फल सुख तथा अशुभ व पाप कर्मों का फल दुःख होता है। हम पुस्तकें पढ़ते हैं तो इसका फल पुस्तक में वर्णित विषय का ज्ञान होना होता है। इसी - [समस्त संसार में ईश्वर एक सत्य, चेतन एवं आनन्दस्वरूप सत्ता है](https://www.ugtabharat.com/103146/) - हमारा यह संसार अनादि काल से बना हुआ है जिसे इसके कर्ता ‘सृष्टिकर्ता’ अर्थात् सर्वशक्तिमान ईश्वर ने बनाया है। संसार का यह स्वाभाविक नियम है कि कोई भी पदार्थ कर्ता के द्वारा ही बनाया जाता है। कर्ता द्वारा ही किसी पदार्थ का स्वरूप परिवर्तन भी किया जाता है जिसे भी निर्माण की संज्ञा दी जाती - [डॉ. भीमराव अम्बेडकर और भारत का आर्थिक दृष्टिकोण](https://www.ugtabharat.com/103143/) - आज हमारा देश भारत पूरे विश्व में आर्थिक दृष्टि से एक सशक्त राष्ट्र बनकर उभर रहा है। वैश्विक स्तर पर कार्य कर रहे वित्तीय एवं निवेश संस्थान भारत की आर्थिक प्रगति की मुक्त कंठ से सराहना कर रहे हैं। भारत आज विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच सबसे तेज गति से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था बन - [वैदिक संपत्ति - 256, वेदमंत्रों के उपदेश](https://www.ugtabharat.com/103099/) - (ये लेखमाला हम पं. रघुनंदन शर्मा जी की ‘वैदिक संपत्ति’ नामक पुस्तक के आधार पर सुधि पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहें हैं) प्रस्तुतिः देवेन्द्र सिंह आर्य (चेयरमैन ‘उगता भारत’) गतांक से आगे … दूसरे अन्न पशुओं को भी दिया जाता है, जिससे दूध और घृत की प्राप्ति होती है। तीसरे थोड़ा बहुत यज्ञशेषान प्रसाद - [ग्रृहस्थ आश्रम और यजुर्वेद](https://www.ugtabharat.com/103105/) - यजुर्वेद के अनुसार (महर्षि दयानंद सरस्वती द्वारा किया गया भाष्य) २) ॥अध्याय ८ मंत्र १० ।। भावार्थ - इस संसार में मनुष्यजन्म को पाकर स्त्री और पुरुष ब्रह्मचर्य्य, उत्तम विद्या, अच्छे गुण और पराक्रमयुक्त होकर विवाह करें। विवाह की मर्यादा ही से सन्तानों की उत्पत्ति और रतिक्रीड़ा से उत्पन्न हुए सुख को प्राप्त होकर नित्य - [क्या श्री राम दीपावली को अयोध्या लौटे थे ?](https://www.ugtabharat.com/103100/) - भारतीय संस्कृति में पर्वों को मनाने की लंबी परंपरा है । यही कारण है कि यहां पर्वों का बहुत बड़ा महत्व है । लोगों के हृदय में आस्था है,विश्वास है, श्रद्धा है,भक्ति है और समर्पण है । हमारे देश में एक कहावत प्रचलित है "बारह महीने तेरह त्योहार" इन सभी पर्वों के पीछे बहुत बड़ी - [प्रभु की अनन्त कृपाओं के संदर्भ में](https://www.ugtabharat.com/103098/) - प्रभु - कृपा नित बरसती, दिखता नहीं है कोष। ज्यों वारिद बिन रात में, बरसती रहती ओस ॥ वारिद अर्थात बादल॥2735॥ भावार्थ :- जिस प्रकार साफ आसमान से रात में गिरती हुई ओस की बूँदें दृष्टिगोचर नहीं होती है, ठीक इसी प्रकार हम पर परम पिता परमात्मा की अनेक प्रकार की अनन्त कृपाएँ बरसती हुई - [आर्य समाज गोविंदपुरम का त्रिदिवसीय वार्षिक सम्मेलन हुआ संपन्न, विभिन्न विद्वानों ने रखे राष्ट्रोपयोगी विचार](https://www.ugtabharat.com/103093/) - वैदिक चिंतन दर्शन से ही राष्ट्र में शांति संभव : डॉ राकेश कुमार आर्य गाजियाबाद। (विशेष संवाददाता) यहां स्थित आर्य समाज गोविंदपुरम का तीन दिवसीय वार्षिक सम्मेलन संपन्न हो गया। अंतिम दिवस को अति विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता डॉ राकेश कुमार - [निरंतर हारते हुए राहुल गांधी को अभी बहुत कुछ सीखना होगा](https://www.ugtabharat.com/103060/) - कांग्रेस की उलटी गिनती का क्रम रूकने का नाम नहीं ले रहे हैं। महाराष्ट्र के नतीजे इसी बात को रेखांकित कर रहे हैं। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस न तो भारतीय जनता पार्टी को टक्कर दे पा रही है और न ही देशहित के प्रभावी मुद्दे उठा पा रही है। देश में कॉर्पाेरेट विरोधी - [भाजपा का मजबूत संगठन और महाराष्ट्र में उसकी शानदार जीत](https://www.ugtabharat.com/103058/) - संगठन सर्वोपरि होता है। संगठन की एकता किसी भी सियासी दल को शून्य से शिखर तक पहुंचा सकती है। महाराष्ट्र में भाजपा का स्थानीय दलों को पछाड़कर अव्वल पायदान पर काबिज होने के पीछे उसका मजबूत संगठन ही है। दशक पूर्व तक पार्टी अपना पैर जमा रही थी, अन्य दलों के सहारे थी लेकिन इस - [भावशून्य हो रही है नई पीढ़ी](https://www.ugtabharat.com/8482/) - शिक्षा व्यवस्था में हैं खामियां जो माता पिता अपने बच्चों पर ध्यान नहीं देते वे बच्चे घर पर टीवी, वीडियो आदि के रोग ग्रस्त हो जाते हैं। जो नहीं देखा सुना जाना चाहिए वह सब उसके माध्यम से अबोध बालक जानने लगता है। जिससे पढ़ाई में विशेष ध्यान नहीं दे पाते और उसी में सुख - [देश की समृद्धि व विकास में किसानों का योगदान](https://www.ugtabharat.com/8481/) - प्रो. डी.सी. सारण भारतीय समाज की ये विसंगतियां और खुली धांधली किसान के शिक्षित, जागृत और संगठित होने के साथ ही समाप्त होने वाली है। गांव और किसान के शोषण की व्यथा-कथाओं से इतिहस भरा पड़ा है। किसान शक्ति का योजनाबद्ध विभाजन और उसके आर्थिक स्रोतों को चूसने का सिलसिला अंग्रेजों ने शुरू किया था। - [मानव अधिकार हमारे स्वभाव में अंतर्निहित हैं](https://www.ugtabharat.com/8483/) - हर कोई दूसरे की तरफ अगुवाई के लिए देख रहा था तथा हमलावरों पर कोई नियंत्रण नहीं रहा। राष्ट्रसंघ अगले युद्ध को रोकने में असमर्थ एक लाचार संस्था साबित हुआ। नाजियों के द्वारा प्रायोजित नस्ल की सर्वोच्चता का झूठा सिद्धांत तथा खून की प्यासी दो अन्य शक्तियों की धनलिप्ता के कारण 1939 में द्वितीय विश्वयुद्ध - [योग क्या है?](https://www.ugtabharat.com/8487/) - साधना के विघ्नः साधना एक लम्बी प्रक्रिया है। इसमें कुछ मास ही नहीं, अपितु कई वर्ष भी लग जाते हैं। अतः साधक को बड़े धैर्य से काम करना होता है। प्रत्येक कार्य में विघ्न आते हैं, उसी प्रकार साधना में भी अनेक विघ्न आते हैं। उनको पार करना साधक का कार्य है। दृढ़ निश्चय और - [मौन व्रत स्वेच्छा या मजबूरी](https://www.ugtabharat.com/8488/) - गांधीवादी अन्ना हजारे की ओर से शुरू किये गये एक सप्ताह के ‘मौन व्रत’ का उद्देश्य भले ‘आत्म शांति’ घोषित किया गया हो लेकिन इसके आयोजन का समय कुछ और ही कहानी बयां करता है। दरअसल देश में बड़े बदलाव लाने की उम्मीदें जगाने के बाद हजारे पक्ष की ओर से पिछले कुछ दिनों में - [राष्ट्र की प्राणशक्ति हैं संस्कार](https://www.ugtabharat.com/8485/) - जातिवाद के प्रति आपके लगाव ने आपको आपके न्यायपथ से भटका दिया। दूसरा आकर्षण आपके लिए यह था कि आपके, आपकी जाति के लोग भी आपसे यही अपेक्षा करते हैं कि आप अपना निर्णय अपने व्यक्ति के हित में ही देंगे। यदि आप ऐसा करेंगे तो ये आपके अपने लोग आपको सम्मान देंगे और समाज - [‘उगता-भारत’ कर रहा है अपना नाम सार्थक](https://www.ugtabharat.com/8484/) - दादरी। अखिल भारतीय मानवाधिकार निगरानी समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष कुमार अग्रवाल का कहना है कि ‘उगता-भारत’ पत्र अपने नाम के अनुरूप कार्य कर रहा है। उज्ज्वल भविष्य के संकल्पबद्ध समाचार पत्र के लेख मैं नियमित रूप से पढ़ता हूं जिससे मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि इस पत्र के द्वारा राष्ट्र - [टूटता पाषाण है, पाषाण के आघात से](https://www.ugtabharat.com/8486/) - ये प्राविधान वास्तव में तो राज्य की धर्मनिष्ठ राजनीति के प्रति निष्ठा की घोषणा है, परन्तु यह शब्द इसमें डाला नही गया है। यदि इनके साथ शीर्षक में ही यह स्पष्ट कर दिया जाता कि राज्य की धर्मनिष्ठ राजनीति के प्रति निष्ठा की घोषणा’ तो महर्षि का मन्तव्य पूर्णतः स्पष्ट हो जाता। इसका परिणाम ये - [1857 की क्रांति नायक शहीद धनसिंह कोतवाल शोध संस्थान द्वारा किया गया वेबीनार का आयोजन : ईस्टर्न पेरिफेरल या गाजियाबाद मेरठ हाईवे का नाम रखा जाए धन सिंह कोतवाल गुर्जर के नाम पर](https://www.ugtabharat.com/17206/) - मेरठ । ( संवाददाता ) आज 1857 की क्रांति का सूत्रधार करने वाले महान क्रांतिकारी धनसिंह कोतवाल और उनके अन्य अनेकों बलिदानी साथियों को याद किया गया । इस संबंध में '1857 के क्रांतिनायक शहीद धनसिंह कोतवाल शोध संस्थान' की ओर से एक वेबीनार का आयोजन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया गया । जिसमें - [विश्व वृद्ध की विदाई](https://www.ugtabharat.com/103019/) - अब से लगभग 2300 साल पहले यूनानी अध्येताओं का एक दल उस काल में ज्ञान वृद्ध भारत में आया.... भारत के आचार्यों से ज्ञान का अर्जन करने के लिए भारत से कुछ सीखने जानने के लिए । भारत वर्ष अपने ज्ञान को बांटता रहा है । वही जब मध्यकाल में इसकी 75 फीसदी आबादी जिसमें - [उपनिषद में ईश्वर का विवरण](https://www.ugtabharat.com/103017/) - यद्वाचाऽनभ्युदितं, येन वागभ्युद्यते । तदेव ब्रह्म त्वं विद्धि,नेदं यदिदमुपासते ।।-(केन० 1/4) जो वाणी द्वारा प्रकाशित नहीं होता,जिससे वाणी का प्रकाश होता है,उसी को तू ब्रह्म जान।जिसका वाणी से सेवन किया जाता जाता है,वह ब्रह्म नहीं है। यन्मनसा न मनुते,येनाहुर्मनो मतम् । तदेव ब्रह्म त्वं विद्धि,नेदं यदिदमुपासते ।।-(केन० 1/5) जिसका मन से मनन नहीं किया जाता,जिसकी - [आर्यसमाज की महान विभूती- डॉ भवानी लाल भारतीय](https://www.ugtabharat.com/99056/) - स्वामी दयानंद कि वैदिक विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाने में हज़ारों आर्यों ने अपने अपने सामर्थ्य के अनुसार योगदान दिया। साहित्य सेवा द्वारा श्रम करने वालो ने पंडित लेखराम की अंतिम इच्छा को पूरा करने का भरपूर प्रयास किया। डॉ भवानीलाल भारतीय आर्य जगत कि महान विभूति हैं जिनका सम्पूर्ण जीवन साहित्य सेवा द्वारा ऋषि - [कर तू, संधि कर](https://www.ugtabharat.com/103016/) - वेद धर्म के गीत सुनाकर, सबको राह दिखाता चल। जहां-जहां अंधकार मिले, पुरुषार्थ से उसे हटाता चल।। वेद ज्ञान का अमृत पीकर, हो जा, मन से मतवाला। खो जा शिव की मस्ती में, हृदय बना भक्ति वाला।। पारसमणि वेद को लेकर, मन के लोहे पर फेरा कर। आभास किया कर परिवर्तन का, वृत्तियों को तू - [ईश्वर की सर्वव्यापकता पर शंका समाधान](https://www.ugtabharat.com/103018/) - शंका-१ यदि ईश्वर सब जगह है तो क्या वह मल मूत्र में, सूअर, कुत्ते,चौर-डाकू में भी है? फिर तो ईश्वर भी गंदा हो जाएगा। समाधान - जब हम चुम्बक के टुकड़े को मल में, गन्दगी में, डालते हैं तो चुम्बक का लोहा गंदा होता है, उसकी आकर्षण शक्ति गंदी नहीं होती। पृथ्वी पर मल मूत्र - [सिख हिन्दू एकता की मिसाल- गुरु तेग बहादुर जी](https://www.ugtabharat.com/102848/) - डॉ. राजेन्द्र साहिल संसार को ऐसे बलिदानियों से प्रेरणा मिलती है, जिन्होंने जान तो दे दी, परंतु सत्य का त्याग नहीं किया। नवम पातशाह श्री गुरु तेग बहादुर जी भी ऐसे ही बलिदानी थे। गुरु जी ने स्वयं के लिए नहीं, बल्कि दूसरों के अधिकारों एवं विश्वासों की रक्षा के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग - [यमदूत कौन? भ्रांति निवारण](https://www.ugtabharat.com/102870/) - Dr DK Garg यमदूत यानि यमराज की कल्पना किसी के लिए भी डरावनी हो सकती है।क्रोधवश किसी को भी यमदूत कहते हुए अपने सुना होगा ।खासतौर पर अत्याचार करने वाले के लिए यमदूत शब्द का प्रयोग किया जाता है।यमदूत का नाम सुनकर एक ऐसे व्यक्ति की छवि सामने आती है जो काफी मोटा ,काला , - [डॉ. अंबेडकर का संस्कृत प्रेम](https://www.ugtabharat.com/102840/) - इतिहास की पड़ताल पुस्तक से डॉक्टर भीमराव अंबेडकर भारतीय स्वाधीनता संग्राम के एक ऐसे नेता रहे हैं, जिन्होंने अपनी प्रतिभा और योग्यता के बल पर अपना विशेष सम्मानपूर्ण स्थान प्राप्त किया। वह भारतीय संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे और प्रारूप समिति के अध्यक्ष के नाते उन्होंने संविधान में वही लिखा जो उनसे संविधान - [ध्यान का प्रपंच और भोली भाली जनता](https://www.ugtabharat.com/102648/) - डॉ डी के गर्ग भाग 7 विशेष=ये लेख माला जो कि पांच भागो में है,वैदिक विद्वानों के लेख और विचारों पर आधारित है।जनहित में आपके सम्मुख प्रस्तुत है,कृपया शेयर करे। अभी तक आपने योग के सात अंगों के विषय में जाना, इनमें महारत होने के बाद ही साधक समाधि की स्थिति में पहुंच सकता है। - [ईश्वर की सत्ता तर्क और निष्कर्ष](https://www.ugtabharat.com/102878/) - * वेद ईश्वर की सत्ता में विश्वास रखते हुए आस्तिकता का प्रचार करता है । परन्तु संसार में कुछ नास्तिक लोग हैं जो ईश्वर की सत्ता को स्वीकार नहीं करते । "न तं विदाथ य इमा, जजानाऽन्यद्युष्माकमन्तरं बभूव । नीहारेण प्रावृता जल्प्या चाऽसुतृप उक्थशासश्चयन्ति ।।" (ऋ० १०/८२/७) तुम उसको नहीं जानते जो इन सबको उत्पन्न - [वही देश के रक्षक बनते](https://www.ugtabharat.com/102914/) - राष्ट्र की धड़कन बन जा प्यारे, जीवन सफल बनाना है। गीत देश के गाता चल तू, भारत भव्य बनाना है।। शब्दों के वाक जाल में फंसकर, जिनकी कविता फूटा करती। कभी नहीं लेखनी उनकी, नेतृत्व राष्ट्र का कर सकती।। जिनके भावों में निर्भयता, और ठेठ निडरता वास करे। वही देश के रक्षक बनते, गुणगान सदा - [दयानन्द का वास्तविक स्वरूप](https://www.ugtabharat.com/102921/) - संसार में कितने लोगों ने अपने को ईश्वर का संदेशहर कहकर अपने नाम से पंथ चलाये और आज उनके लाखों-करोड़ों अनुयायी दृष्टिगोचर होते हैं। कितनों ने गुरु बनकर अपने चेले-चेलियों की बुद्धि की आंखों पर पट्टी बांधी और उनका तन, मन और धन हड़प लिया। कोई-कोई तो इतने बढ़े कि स्वयं परमेश्वर बन बैठे और - [स्वतंत्रता सैनानी, गौ प्रेमी लाला हरदेवसहाय जी](https://www.ugtabharat.com/102924/) - आपका जन्म 26 नवम्बर सन 1892 ई० में हिसार शहर के निकटतम गांव सातरोड़ खुर्द के एक सर्व सम्पन्न अग्रवाल परिवार में ला. मुसद्दीलाल के यहां हुआ । आपका पालन - पोषण घर की सम्पन्नता के कारण बहुत अच्छे तथा अमीराना ढंग से हुआ । आपकी शिक्षा हिन्दी के माध्यम से हुई और उसके बाद - [आदिवासी समाज और ईसाइयत](https://www.ugtabharat.com/102932/) - #डॉविवेकआर्य भारत जैसे बड़े देश में करोड़ों लोग वनक्षेत्र में सदियों से निवास करते है। कुछ लोग उन्हें आदिवासी कहते है क्योंकि उनका मानना है कि आदिकाल में सबसे प्रथम जनजाति इन्हीं के समान थी। कालांतर में लोग विकसित होकर शहरों में बसते गए जबकि आदिवासी वैसे के वैसे ही रहे। हम इसे भ्रान्ति मानते - [कनाडा एवं अमेरिका से भारत में रिवर्स ब्रेन ड्रेन की सम्भावना बढ़ रही है](https://www.ugtabharat.com/102895/) - वैश्विक स्तर पर लगातार कुछ इस प्रकार की परिस्थितियां निर्मित होती दिखाई दे रही हैं, जिससे विशेष रूप से कनाडा एवं अमेरिका से भारत की ओर रिवर्स ब्रेन ड्रेन की सम्भावना बढ़ती जा रही है। कनाडा में खालिस्तानियों द्वारा चलाए जा रहे भारत विरोधी आंदोलन के चलते वहां निवासरत भारतीयों एवं मंदिरों पर लगातार हमले - [ओ३म् “सर्गारम्भ से वेद बिना भेदभाव मनुष्यों की अविद्या दूर कर रहे हैं”](https://www.ugtabharat.com/102890/) - ============= हमारी यह सृष्टि सर्वव्यापक, सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, सच्चिदानन्दस्वरूप, अनादि व नित्य परमात्मा से बनी है। ईश्वर, जीव तथा प्रकृति तीन अनादि व नित्य सत्तायें हैं। सृष्टि प्रवाह से अनादि है। इसमें सृष्टि की उत्पत्ति, स्थिति तथा प्रलय का क्रम अनादि काल से चला आ रहा है और अनन्त काल तक चलता रहा है। सभी अनन्त - [ओ३म् “ब्रह्मचर्य ईश्वर में विचरण, संयम और कर्तव्यों का पालन करना है”](https://www.ugtabharat.com/102884/) - ============ वेद एवं वैदिक साहित्य में ब्रह्मचर्य की चर्चा मिलती है। प्राचीन काल में मनुष्य जीवन को चार आश्रमों में बांटा गया था। प्रथम आश्रम ब्रह्मचर्य आश्रम कहलाता था। इसके बाद गृहस्थ आश्रम का स्थान था। ब्रह्मचर्य आश्रम जन्म से 25 वर्ष की आयु तक मुख्य रूप से माना जाता है परन्तु ब्रह्मचर्य का पालन - [नेटवर्क मार्केटिंग : युवाओं के लिए एक सुनहरा करियर विकल्प](https://www.ugtabharat.com/102863/) - सूर्या सिन्हा समाजसेवक आज का युवा वर्ग करियर में नए अवसरों की तलाश में है, और नेटवर्क मार्केटिंग (एनएम) उन्हें एक ऐसा विकल्प देता है जो रोजगार के साथ आत्मनिर्भरता और व्यक्तिगत विकास को भी बढ़ावा देता है। सही मार्गदर्शन, मेहनत और समर्पण के साथ, नेटवर्क मार्केटिंग युवाओं के लिए एक शानदार करियर विकल्प बन - [चुनाव परिणाम : सत्ता पक्ष को फिर मिला जनादेश](https://www.ugtabharat.com/102859/) - सुरेश हिंदुस्तानी देश के दो राज्यों के साथ कुछ राज्यों के उपचुनाव के परिणाम ने सत्ता पक्ष के प्रति अपना जनादेश दिया है। हर चुनाव में सत्ता के प्रति जनता में किसी न किसी बात पर आक्रोश रहता है, लेकिन महाराष्ट्र और झारखण्ड के चुनाव में ऐसा कुछ भी दिखाई नहीं दिया। जनता ने फिर - [गौतम अडानी पर अमेरिका में मुकदमा](https://www.ugtabharat.com/102789/) - गौतम अडाणी पर अमरीका में दो मुकदमे अमरीका की सरकार ने दायर किये हैं,दोनों में आरोप एक ही है कि अडाणी के मोबाइल फोन से भारत सरकार के अधिकारियों को घूस देने की बात की गयी और अडाणी के विण्डो कम्प्यूटर में माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल के स्प्रेडशीट में भी घोटालों के साक्ष्य हैं । अडाणी ने - [वैदिक संपत्ति 255, वेदमंत्रों के उपदेश](https://www.ugtabharat.com/102832/) - (ये लेखमाला हम पं. रघुनंदन शर्मा जी की 'वैदिक संपत्ति' नामक पुस्तक के आधार पर सुधि पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहें हैं) प्रस्तुतिः देवेन्द्र सिंह आर्य (चेयरमैन 'उगता भारत') गतांक से आगे ... अर्थात् जहाँ जहाँ अन्न का वर्णन मिलता है, वहाँ -वहाँ सर्वत्र ही अन्न का तात्पर्य आहार ही है, अनाज नहीं। इसीलिए - [*"विशेष" मानव - जीवन का अन्तिम लक्ष्य क्या है :](https://www.ugtabharat.com/102829/) - "विशेष" मानव - जीवन का अन्तिम लक्ष्य क्या है :- मल आवरण विक्षेप की, पर्ते चढ़ी हजार। मानव-जीवन में करो, आत्मा का परिष्कार॥2734॥ तत्त्वार्थ :- मेरे प्रिय पाठक बड़ी सरलता से उपरोक्त दोहे के आशय को समझें इसको ऐसे समझें जैसे एक गोल रोटी है और उसके चार भाग हैं, जिनके नाम है- A.B.C. D. - [बंटेंगे तो कटेंगे पर इतनी चिल्लाहट क्यों](https://www.ugtabharat.com/102825/) - डॉ.नर्मदेश्वर प्रसाद चौधरी हमारे देश में किसी भी बात का बतंगड़ बनाना हमारी नियति में शामिल है। पिछले दिनों यूपी के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ ने बांग्लादेश के संदर्भ एक बात कहीं थी कि बटोगे तो कटोगे । चूँकि भारत में भी दो राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने थे तो इस बात को विधानसभा - [ओ३म् “आर्यसमाज सत्य के प्रचार और असत्य को छुड़ाने का एक सार्वभौमिक आन्दोलन है”](https://www.ugtabharat.com/102810/) - ============== आर्यसमाज विश्व का ऐसा एक अपूर्व संगठन है जो किसी मनुष्य व महापुरुष द्वारा प्रचारित मत का प्रचार नहीं करता अपितु सृष्टि में विद्यमान सत्य की खोज कर सत्य का स्वयं ग्रहण करता व उसके प्रचार द्वारा विश्व के सभी मनुष्यों से उसे अपनाने, ग्रहण व धारण करने का आग्रह करता है। ऋषि दयानन्द - [बहता चल तू बहता चल,](https://www.ugtabharat.com/102740/) - गाता चल तू गाता चल, गीत ओज के गाता चल। राष्ट्र का यौवन मचल उठे, वही गीत निराला गाता चल।। चार दिनों की चांदनी होती, फिर रात अंधेरी आएगी। चांदनी रहते पौरुष दिखला, तभी कथा तेरी मचलाएगी।। कोठी - बंगले, हाथी- घोड़े, किसके साथ गए पगले । संसार की चिकनी फिसलन पर , बड़े - - [महाराष्ट्र ने दिया है हिंदू राष्ट्रवाद का संदेश](https://www.ugtabharat.com/102803/) - महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव परिणामों ने केन्द्र की मोदी सरकार को नई ऊर्जा प्रदान की है। हरियाणा के बाद निरंतर दूसरे बड़े और एक महत्वपूर्ण राज्य में जिस प्रकार भाजपा नीत गठबंधन महायुति की सत्ता में फिर से वापसी हुई है , वह न केवल शानदार है बल्कि भाजपा के लिए जानदार भी है। लोकसभा चुनाव - [अडानी पर अमेरिकी कोर्ट के आरोप की सच्चाई ये है](https://www.ugtabharat.com/102797/) - पहले हिंडनबर्ग, अब कोर्ट ने गौतम अडानी को निशाना बनाया है. अमेरिकी कोर्ट ने कहा है कि अडानी ने ठेके लेने के लिए भारत की 4 राज्य सरकारों को 250 मिलियन डॉलर की रिश्वत दी इससे भारत का विपक्ष, सोरोस गैंग और लश्कर मीडिया सर्दी में भी लुंगी डांस की धुन पर ऊ लाला कर - [30 परिवारों के 150 ईसाइयों ने अपनाया सनातन वैदिक धर्म*](https://www.ugtabharat.com/102793/) - उत्तर प्रदेश के मेरठ में ईसाई मिशनरियों के द्वारा बरगलाकर ईसाई मजहब में कन्वर्ट किए गए 30 परिवारों के 150 लोगों ने एक साथ अपने मूल धर्म में वापसी कर ली। ये सभी मूल रूप से जाटव समाज से आते हैं, लेकिन कुछ वर्षों पहले इन्हें लालच देकर ईसाई बना दिया गया था। सनातन में - [मध्य प्रदेश : गहिरा गुरु का प्रेरक व्यक्तित्व](https://www.ugtabharat.com/102785/) - गाहिरा गुरु पुण्य तिथि 21 नवम्बर_ मध्यप्रदेश के रायगढ़ और सरगुजा जिले में गोंड, कंवर, उरांव, कोरवा, नगेसिया, पंडो आदि वनवासी जातियां वर्षों से रहती हैं। ये स्वयं को घटोत्कच की संतान मानती हैं। मुगल आक्रमण के कारण उन्हें जंगलों में छिपना पड़ा। अतः वे मूल हिन्दू समाज से कट गये। गरीबी तथा अशिक्षा के - [यह चार अवस्था मानव की...](https://www.ugtabharat.com/102775/) - हंस भाव में जीता है जो, नर देह वही कहलाता है। ब्रह्मचर्य की यह अवस्था, जीवन सफल बन जाता है।। वसु - भाव में जीने वाला, वर देह का बनता अधिकारी। गृहस्थ आश्रम में रह मानव, तैयार करे जीवन क्यारी।। वानप्रस्थ का जीवन जिसका, उसने परहित में श्रृंगार किया। ' होता' की कर प्राप्त अवस्था, - [काल्पनिक राम का जनाजा ??](https://www.ugtabharat.com/102772/) - अम्बेडकरवादी, बौद्ध,ईसाई व मुसलमान लोग भगवान राम कृष्ण गीता रामायण वेद उपनिषद मनुस्मृति व आर्यों को लेकर बहुत दुष्प्रचार कर रहे हैं। काल्पनिक राम का जनाजा नामक एक लेख में कुछ धूर्तों ने इतिहास को तोड मरोड कर पेश किया है और मनमाने दोष लगाये हैं। इस लेख की समीक्षा इस प्रकार है:- 1.आक्षेप -श्रीलंका - [क्या रिटायरमेंट आयु बढ़ाने का फैसले का उचित है?](https://www.ugtabharat.com/102676/) - आचार्य डॉ राधेश्याम द्विवेदी 01अप्रैल 2025 से लागू करने की योजना सरकार ने लंबे समय से रिटायरमेंट आयु बढ़ाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही थी और अब कैबिनेट की बैठक में इसे मंजूरी दे दी गई है। भारत सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए केंद्रीय कर्मचारियों की रिटायरमेंट आयु में 2 साल की - [• "ईश्वर सर्वशक्तिमान् है" का वास्तविक तात्पर्य • •](https://www.ugtabharat.com/102722/) - गुण - ऊहापोह (सिद्धांत रक्षा - वाद-विवाद) • • ऊहा द्वारा सिद्धान्त को समझाने और उसकी रक्षा करने का चमत्कार ! • पंडित सत्यानन्द वेदवागीश घटना भारत के स्वतन्त्र होने से पूर्व की है। पेशावर-आर्यसमाज का वार्षिकोत्सव था। एक दिन रात्रि के अधिवेशन में पं० बुद्धदेव जी विद्यालंकार का 'ईश्वर' विषय पर व्याख्यान था। उस - [*बुद्धिमान् राजा*](https://www.ugtabharat.com/102718/) - 🕉️ रात्रि कहानी 🕉️ किसी के पास धन बहुत है तो यह कोई विशेष भगवत्कृपा की बात नहीं है। ये धन आदि वस्तुएँ तो पापी को भी मिल जाती हैं—‘सुत दारा अरु लक्ष्मी पापी के भी होय।’ इनके मिलने में कोई विलक्षण बात नहीं है। एक राजा थे। उस राजा की साधु-वेशमें बड़ी निष्ठा थी। - [बुनियादी सुविधाओं से जोड़ना होगा स्लम बस्तियों को](https://www.ugtabharat.com/102714/) - सीताराम गुर्जर जयपुर, राजस्थान अपनी ऐतिहासिक इमारतों, विविध संस्कृति और पर्यटक आकर्षणों के लिए राजस्थान की राजधानी जयपुर दुनिया भर में मशहूर है. लेकिन इसका एक और पक्ष भी है जिसे काफी हद तक नजरअंदाज कर दिया जाता है. यह पहलू है शहर की स्लम बस्तियां, जहां हजारों लोग जीवन की बुनियादी सुविधाओं के बिना - [गुरुकुल शिक्षा पद्धति की ओर लौटने की पुकार: हमारी जड़ों की ओर एक पुनर्निवेश*](https://www.ugtabharat.com/102710/) - (✍️बृजेश सिंह तोमर) 👉भारत की महान सभ्यता, जिसकी नींव गुरुकुल शिक्षा पद्धति पर टिकी थी, आज पश्चिमी शिक्षा प्रणाली के दबाव में अपनी पहचान खोती जा रही है। एक समय था जब गुरु शिष्य को न केवल शिक्षा देते थे, बल्कि उसे जीवन जीने की कला, संस्कृति, और संस्कारों से भी अवगत कराते थे। लेकिन - [वह कवि-कभी नहीं हो सकता](https://www.ugtabharat.com/102702/) - वह कवि-कभी नहीं हो सकता, जो नव पीढ़ी को भ्रष्ट करे। जो अधेड़ उम्र में जाकर भी, श्रृंगार - भोग में मस्त रहे।। हिंदी का होकर हिंदी से, जिसका मन करता द्रोह सदा। उर्दू की गजलें करता हो, वह कवि-कभी नहीं हो सकता।। उसको मैं कैसे कहूं कवि, जो अंग्रेजी पर मरता हो। परदेसी भाषा - [भारत में रोजगार के संदर्भ में बदलना होगा अपना नजरिया](https://www.ugtabharat.com/102698/) - भारतीय प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति की सदस्य सुश्री शमिका रवि द्वारा हाल ही में सम्पन्न किए गए एक रिसर्च पेपर में, आंकड़ों के साथ, कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई हैं। इस रिसर्च पेपर में भारत के आर्थिक विकास के कई क्षेत्रों के सम्बंध में तथ्यों पर आधारित सारगर्भित बातें बताने के साथ साथ यह - [ओ३म् “वेदज्ञान और वेदानुकूल आचरण से ही मनुष्य धार्मिक बनता है”](https://www.ugtabharat.com/102617/) - =========== धार्मिक मनुष्य के विषय में समाज में अविद्या पर आधारित अनेक आस्थायें व असद्-विश्वास प्रचलित हैं। इन आस्थाओं पर विचार करते हैं तो इसमें सत्यता की कमी अनुभव होती है। सच्चा धार्मिक मनुष्य कौन होता है? इसका उत्तर यह मिलता है कि सच्चा धार्मिक वही मनुष्य हो सकता है जिसको वेदज्ञान उपलब्ध वा प्राप्त - [वेदों के आविर्भाव विषयक महर्षि दयानन्द जी के मन्तव्य •](https://www.ugtabharat.com/102690/) - • [भूमिका : 1882 में उदयपुर में स्वामी दयानन्द जी का मौलवी अब्दुर्रहेमान से एक शास्त्रार्थ हुआ था। यह शास्त्रार्थ स्वामी जी के शास्त्रार्थ संग्रह में एवं जीवनचरित्र में उपलब्ध है। ईश्वर वेद के माध्यम से ज्ञान एवं भाषा दोनों का आविर्भाव करता है, यह बात स्वामी जी ने प्रतिपादित की है। इस शास्त्रार्थ के - [महाभारत : विदेशों में प्रचार प्रसार ..](https://www.ugtabharat.com/102684/) - महाभारत- संस्कृत श्लोक व हिन्दी अनुवाद। महाभारत में से अनावश्यक, असम्भव, असभ्य और काल्पनिक मिलावट को हटा कर आदर्श स्वरूप में प्रकाशित किया है। लगभग 16000 श्लोकों में मूल कथा को संरक्षित रखा है। मूल्य ₹1300 (डाक खर्च सहित ) मंगवाने के लिए 7015591564 पर वट्सएप द्वारा सम्पर्क करें। महाभारत : विदेशों में प्रचार प्रसार - [ट्रम्प की विजय में भारत की भूमिका](https://www.ugtabharat.com/102665/) - सुरेश हिंदुस्तानी अमेरिका में रिपब्लिकल पार्टी की ऐतिहासिक विजय के बाद अब यह तय हो गया है कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प दूसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति बनेंगे। अमेरिका का इतिहास बताता है कि ट्रम्प की यह जीत उनकी ऐतिहासिक वापसी है। अमेरिका में यह विजय किसी चमत्कार से कम नहीं है। 130 वर्ष के - [अभी बाकी है 'हर घर शौचालय' का लक्ष्य](https://www.ugtabharat.com/102658/) - अजमेरी ख़ानम गया, बिहार इसी वर्ष सितंबर माह में केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय की ओर से बताया गया कि 24 सितंबर 2024 तक देश के पांच लाख 54 हज़ार 150 गांवों को ओडीएफ प्लस (खुले में शौच से मुक्त) का दर्जा दिया जा चुका है. वहीं 3,00,368 गांवों को ओडीएफ प्लस मॉडल गाँव - [ओ३म् “वैदिक विवाह का स्वरूप और आधुनिक विवाह परम्परा में धन का अपव्यय”](https://www.ugtabharat.com/102652/) - ================ संसार का सबसे प्राचीन धर्म व संस्कृति वैदिक धर्म है। संसार के सभी मनुष्यों का धर्म एक ही होता है और वह वैदिक धर्म ही है। वैदिक धर्म वेदानुकूल सिद्धान्तों पर आधारित मान्यताओं के पालन को कहते हैं। वेद से भिन्न इतर मान्यताओं का पालन धर्म नहीं होता। आजकल संसार में जितने भी मत-मतान्तर - [*ध्यान का प्रपंच और भोली -भाली जनता* *भाग-6*](https://www.ugtabharat.com/102645/) - विशेष : आजकल आपको अधिकांश बड़े शहरों में ध्यान केंद्र और ध्यान गुरु मिलेंगे ,लेखी। ये ध्यान के नाम पर अपनी दुकान चला रहे है।ध्यान की स्थिति तक पहुंचने से पहले साधक को किस किस स्थिति से गुजरना होता है ,ये नहीं बताया जाता। ये लेख माला 7 भागों में है ,जो वैदिक विद्वानों के - [ध्यान का प्रपंच और भोली -भाली जनता* *भाग-5*](https://www.ugtabharat.com/102642/) - * विशेष : आजकल आपको अधिकांश बड़े शहरों में ध्यान केंद्र और ध्यान गुरु मिलेंगे ,लेखी। ये ध्यान के नाम पर अपनी दुकान चला रहे है।ध्यान की स्थिति तक पहुंचने से पहले साधक को किस किस स्थिति से गुजरना होता है ,ये नहीं बताया जाता। ये लेख माला 7 भागों में है ,जो वैदिक विद्वानों - [ध्यान का प्रपंच और भोली -भाली जनता* *भाग-4*](https://www.ugtabharat.com/102638/) - विशेष : आजकल आपको अधिकांश बड़े शहरों में ध्यान केंद्र और ध्यान गुरु मिलेंगे ,लेखी। ये ध्यान के नाम पर अपनी दुकान चला रहे है।ध्यान की स्थिति तक पहुंचने से पहले साधक को किस किस स्थिति से गुजरना होता है ,ये नहीं बताया जाता। ये लेख माला 7 भागों में है ,जो वैदिक विद्वानों के - [ध्यान का प्रपंच और भोली -भाली जनता* *भाग-3*](https://www.ugtabharat.com/102634/) - विशेष : ये लेख माला 7 भागों में है ,जो वैदिक विद्वानों के लेख और विचारों पर आधारित है। जनहित में आपके सम्मुख प्रस्तुत करना मेरा उद्देश्य है , कृपया ज्ञानप्रसारण के लिए शेयर करें और अपने विचार बताए। डॉ डी के गर्ग योग का तीसरा अंग;आसन अष्टांग योग के पहले दो अंग यम और - [ध्यान का प्रपंच और भोली -भाली जनता* *भाग-१*](https://www.ugtabharat.com/102630/) - विशेष : ये लेख मला ५ भागों में है ,जो वैदिक विद्वानों के लेख और विचारों पर आधारित है। जनहित में आपके सम्मुख प्रस्तुत करने मेरा उद्देश्य है , इसलिए कृपया शेयर करे। डॉ डी के गर्ग पिछले कई वर्षोंसे मेरे पास अलग लग गुरुओं के शिष्य आ रहे है और उनके बाबा गुरु द्वारा - [ध्यान का प्रपंच और भोली -भाली जनता* भाग- 2](https://www.ugtabharat.com/102627/) - * विशेष : ये लेख माला ५ भागों में है वैदिक विद्वानों के लेख और विचारों पर आधारित है। जनहित में आपके सम्मुख प्रस्तुत करना मेरा उद्देश्य है , इसलिए कृपया शेयर करें। डॉ डी के गर्ग योग का दूसरा अंग–नियम यम की तरह ‘नियम’ भी दुखों को छुड़ाने वाला है। पहले यम व नियम - [क्या भारत एक स्वस्थ युवाओं का देश भी है?](https://www.ugtabharat.com/102623/) - वर्तमान भारत जिसके विषय में हम गर्व से कहते हैं कि यह एकयुवा देश है, क्या हम उसके विषय में यहभी कह सकते हैं कि भारत स्वस्थ युवाओं का देश है? यह प्रश्न अनायास नहीं है अपितु यह प्रश्न उन सर्वेक्षणोंके आधार पर है जिनमें हमारे बच्चों में टाइप 2 मधुमेह के बढ़ते मामलों का - [प्रकृति के गूढ़ रहस्य और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस](https://www.ugtabharat.com/102611/) - सुनील कुमार महला सूचना क्रांति के इस दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) यानी कि कृत्रिम बुद्धि का कंसेप्ट बहुत ही प्रसिद्ध कान्सेप्ट है। वास्तव में यह एक ऐसी तकनीक है, जिसमें मानव जैसी समस्या-समाधान क्षमताएँ विद्यमान होती हैं। आज इस तकनीक की मदद से मेडिकल क्षेत्र, मीडिया के क्षेत्र, इंजीनियरिंग क्षेत्र, कंप्यूटर विज्ञान, मनोविज्ञान,भाषा विज्ञान, - [जबरन धर्मांतरण पर लगाम कसने की तैयारी में सरकार](https://www.ugtabharat.com/102607/) - रामस्वरूप रावतसरे केंद्रीय गृह मंत्रालय ने विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम 2010 (एफसीआरए) के तहत पंजीकरण रद्द करने या नवीनीकरण से इनकार करने के कुछ कारणों को सूचीबद्ध कर एक नोटिस जारी किया है। इसमें ‘विकास विरोधी गतिविधियों, जबरन धर्मांतरण और देश विरोधी प्रदर्शन आदि में शामिल होने को बतौर कारण दर्ज किया गया है। इस - [भगवा के सामने पंख फैलाती फतवा की राजनीति](https://www.ugtabharat.com/102603/) - वीरेन्द्र सिंह परिहार स्वर्गीय बाला साहब ठाकरे ने जब शिवसेना की स्थापना की तो उस समय उनका लक्ष्य भले मराठी अस्मिता रही हो लेकिन आगे चलकर उनके ही दौर में वह हिन्दुत्व की ध्वजा वाहक हो गई। 1990 के आसपास से ही शिवसेना और भाजपा का जो गठजोड़ बना, वह लम्बे समय तक चला। चूँकि - [बिरसा मुंडा और आदिवासियों को साधने का प्रयास](https://www.ugtabharat.com/102599/) - कुमार कृष्णन जनजातीय गौरव दिवस, जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के साथ ही रोहिंग्या और घुसपैठिया का मसला संथाल परगना इलाके का बड़ा चुनावी मसला बना हुआ है। आगामी 20 नवंबर को संथाल परगना इलाके में मतदान है। उस बाबत नरेंद्र मोदी का झारखंड के गोड्डा में चुनावी सभा और बिहार के जमुई में जनजातीय गौरव - [भगवा विरोध में उभरते मल्लिकार्जुन खड़गे के सुर](https://www.ugtabharat.com/102595/) - विजय सहगल पिछले दिनों कॉंग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे मुंबई की एक चुनावी रैली मे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ का नाम लिये बिना उनके भगवा वस्त्रो पर अशोभनीय टिप्पणी कर विवादों के घेरे मे आ गये। उन्होने कहा कि कई नेता साधु वेश मे रहते हैं और अच्छे राजनीतिज्ञ बन गये हैं और - [● वेद - आस्तिक्य - यज्ञ - यास्क - वैदिक-भाषा - दयानन्द - आर्यसमाज ● --](https://www.ugtabharat.com/102514/) - ● वेद-विमर्श ● स्वामी (डॉ.) सत्यप्रकाश सरस्वती [4 नवम्बर 1983 को महर्षि दयानन्द निर्वाण शती समारोह में आयोजित वेद सम्मेलन में दिए गए अध्यक्षीय भाषण के संकलित अंश । संकलनकर्ता : भावेश मेरजा] 1. अपौरुषेय रचनाओं में जिसकी आस्था है, उसे ही आस्तिक कहते हैं । भौतिक निर्मितियों में भी दो प्रकार की निर्मितियां हैं - [लगनी चाहिए ' डिस्कवरी ऑफ इंडिया' पर रोक](https://www.ugtabharat.com/102589/) - प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा लिखी गई पुस्तक "भारत एक खोज " में लिखा है कि आर्य विदेशी थे ,मध्य एशिया से आए थे। भारत के प्राचीन गौरव पर नेहरू जी को अधिक गर्व नहीं था। उन्होंने अपनी मान्यता स्थापित की और कह दिया कि :- सर जमीन ए हिंद पर अखलाक ए आवामे फिराक। - [अकवन का पौधा और उसके औषधीय गुण](https://www.ugtabharat.com/102583/) - #अकवन अकवन को हिंदी में मदार कहते हैं और इसे एक जहरीले पौधे के रूप में जाना जाता है। मदार का पौधा किसी जगह पर उगाया नहीं जाता है। यह पौधा अपने आप ही कहीं पर भी उग जाता है हालांकि यह पौधा अपने आप में औषधीय गुणों से लबरेज है। मदार का वैज्ञानिक नाम - [दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की मौत, बेटी के लव जिहाद की शिकार होने की वजह से हुई....](https://www.ugtabharat.com/102566/) - कुटिल दामाद ने सब कुछ लूटा और पैसे और शीला दीक्षित की भतीजी को लेकर भागा !!* शीला दीक्षित के जीवन से कुछ सीखने के लिए सभी हिंदुओं और उनकी बेटियों को यह लेख अवश्य ही पढ़ना चाहिए। अपने अंतिम दिनों में, शीला दीक्षित की बेटी लतिका के मुस्लिम पति मोहम्मद इमरान द्वारा उनकी बेटी - [कैल्शियम की कमी को पूरी करेंगी ये चीजें, जोड़ों का दर्द होगा दूर*](https://www.ugtabharat.com/102561/) - * हड्डियों के कमजोर होने से जोड़ों में दर्द होने लगता है। यह एक ऐसी समस्या है जो हर वक्त परेशान करती है। असहनीय दर्द के कारण ना ही बैठते बनता है और ना ही ढंग से खड़े हो पाते हैं। आजकल के दौर में दर्द की इस समस्या से बुजुर्गों के साथ-साथ बच्चे और - [ध्यान का प्रपंच और भोली -भाली जनता* *भाग-१*](https://www.ugtabharat.com/102552/) - * विशेष : ये लेख माला ५ भागों में है ,जो वैदिक विद्वानों के लेख और विचारों पर आधारित है। जनहित में आपके सम्मुख प्रस्तुत करने मेरा उद्देश्य है , इसलिए कृपया शेयर करे। डॉ डी के गर्ग पिछले कई वर्षोंसे मेरे पास अलग लग गुरुओं के शिष्य आ रहे है और उनके बाबा गुरु - [रिश्तों की कीमत पर विवाहेत्तर संबंध का मजमा*](https://www.ugtabharat.com/102549/) - -राजेश बैरागी- हालांकि इस प्रकार की घटनाएं न तो अद्भुत रह गई हैं और न अभूतपूर्व। गौतमबुद्धनगर जनपद के गांव जारचा निवासी शाहरुख ने अपनी उम्र में बड़ी चाची की गला रेत कर हत्या कर दी। चाची विधवा थी और भतीजे के साथ कई वर्षों से अवैध संबंध में थी। पुलिस ने शाहरुख को गिरफ्तार - [मेवात में बढ़ते साइबर अपराध](https://www.ugtabharat.com/102542/) - 🔥🔥 अति ज्वलंत समस्या🔥🔥 दिल्ली के समीप मेवात ने साइबर क्राइम में जामताड़ा को पीछे छोड़ दिया है। साइबर क्राइम में सेक्सटॉर्शन का आविष्कार मेवात के ठगो के द्वारा ही किया गया। मेवात के अकेले जिले डीग के साइबर ठगों ने 3 महीने में तीन अरब 36 करोड रुपए कमाए हैं। केवल एक जिले डीग - [काशी शास्त्रार्थ की आज 155 वीं वर्षगांठ - 16 नवंबर पर विशेष](https://www.ugtabharat.com/102538/) - “मूर्तिपूजा पर ऋषि दयानन्द का अकेले काशी के 40 विद्वानों से एक साथ सफल शास्त्रार्थ” ............. ऋषि दयानन्द ने अपने जीवन में जो महान् कार्य किए उनमें से एक काशी के दुर्गा-कुण्ड स्थित आनन्द बाग में लगभग 50-60 हजार लोगों की उपस्थिति में ‘मूर्तिपूजा वेद सम्मत नहीं है’, विषय पर उनका शास्त्रार्थ भी था जिसमें - [नास्तिकों का ईश्वर विषयक एक प्रश्न और उसका उत्तर](https://www.ugtabharat.com/102535/) - ● ● किसी पदार्थ के विषय में मतभेद होना उसके अभाव का हेतु नहीं हो सकता (A logical solution to a query raised by the Atheist) पण्डित देवप्रकाश ● नास्तिक का प्रश्न : ईश्वर के मानने वाले जितने भी सम्प्रदाय ओर मत हैं उन सबका ईश्वर की सत्ता और स्वरूप में बड़ा भारी मतभेद है। - [ओ३म् “वेदज्ञान और वेदानुकूल आचरण से ही मनुष्य धार्मिक बनता है”](https://www.ugtabharat.com/102530/) - =========== धार्मिक मनुष्य के विषय में समाज में अविद्या पर आधारित अनेक आस्थायें व असद्-विश्वास प्रचलित हैं। इन आस्थाओं पर विचार करते हैं तो इसमें सत्यता की कमी अनुभव होती है। सच्चा धार्मिक मनुष्य कौन होता है? इसका उत्तर यह मिलता है कि सच्चा धार्मिक वही मनुष्य हो सकता है जिसको वेदज्ञान उपलब्ध वा प्राप्त - [*केवल एक चुकंदर खाएं रोजाना, शरीर में कई पौष्टिक तत्वों की कमी होगी पूरी*](https://www.ugtabharat.com/102522/) - चुकंदर का सेवन करने से एनीमिया, कब्ज, माहवारी की समस्या दूर होती है। चुकंदर का सेवन शरीर में खून की मात्रा बढ़ाता है, इसलिए महिलाओं के लिए ये किसी वरदान से कम नहीं है। चुकंदर का सेवन सलाद व जूस के रूप में करना काफी फायदेमंद होता है। इसमें आयरन, पोटेशियम, फास्फोरस, कैल्शियम, विटामिन डी - [दिव्य- रथ है तन तेरा, धैर्य-शौर्य चक्र।](https://www.ugtabharat.com/102493/) - यह शरीर माटी का पुतला नही अपितु दिव्य-लोक का साधन है। इसमें छिपी प्रभु- प्रदत्त शक्तियों को पहचानो: - दिव्य- रथ है तन तेरा, धैर्य-शौर्य चक्र। आत्मज्ञान प्रदीप्त कर, काहे चले तू वक्र॥2732॥ भावार्थ : - प्रायः देखा गया है, कि इस संसार में कतिपय लोग इस मानव शरीर को 'माटी का पुतला' कहते है। - [*सांख्य, सांप और केचुली*](https://www.ugtabharat.com/102482/) - -------------- लेखक आर्य सागर तिलपता ग्रेटर नोएडा 🖋️ धरती पर विचरण करने वाला प्रत्येक सांप चाहे वह विषैला हो या विषहीन, जंगली हो या पालतू अपनी केंचुली का त्याग अवश्य करता है। त्याग हमेशा ही सुखदायक होता है यह इस लेख के अंत तक स्पष्ट हो जाएगा। सांप अपनी केंचुली को त्यागता है। प्रथम हम - [है धनियों से भी श्रेष्ठ धनी तू,](https://www.ugtabharat.com/102479/) - हे मानव ! बैठ अकेले में, चिंतन कर कुछ चिंतन कर, में कौन कहां से आया हूं ? मंथन कर कुछ मंथन कर।। आने से पहले जगती में, जो वचन दिया था ईश्वर को। वचन का सुमिरण कर प्यारे , क्यों मूर्ख बनाता है नर को ? यह देह अनमोल मिला तुझको, श्वासों का कोष - [गुरु नानक और अकर्मण्यता का रोग](https://www.ugtabharat.com/102468/) - (गुरु नानक प्रकाशोत्सव पर विशेष रूप से प्रकाशित) #डॉविवेकआर्य गुरु नानक ने बाबर नामक राक्षस को भारत की प्रजा पर अकथनीय अत्याचार करते अपनी आँखों से देखा था। गुरु नानक ने इस अत्याचार से व्यथित होकर अपने मन की इच्छाओं को अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रस्तुत किया था। यह रचनायें उस काल में देश - [बिन्दुक्षणी मां का मन्दिर पाली](https://www.ugtabharat.com/102463/) - आचार्य डॉ राधेश्याम द्विवेदी वंश के रक्षक के रूप में :- कुलदेवी, किसी खास खानदान या कुल की आदि देवी होती हैं।कुलदेवी की पूजा उनके पिंडी या मूर्ति के रूप में की जाती है। वहीं, कुलदेवता को उस कुल के देवता के रूप में पूजा जाता है। कुलदेवी या कुलदेवता कुल या वंश के रक्षक - [परमात्मा के साथ अपनी सर्वमान्य संगति की चेतना को किस प्रकार बनाकर रखा जाये?](https://www.ugtabharat.com/102456/) - परमात्मा के ऊर्जा रूप की तुलना भिन्न-भिन्न वस्तुओं जीवों से किस प्रकार की जाती है? (2) परमात्मा के साथ अपनी सर्वमान्य संगति की चेतना को किस प्रकार बनाकर रखा जाये? दाधार क्षेममोको न रण्वो यवो न पक्वो जेता जनानाम। ऋषिर्न स्तुभ्वा विक्षु प्रशस्तो वाजी न प्रीतो वयो दधाति।। ऋग्वेद मन्त्र 1.66.2 (कुल मन्त्र 754) (दाधार) - [*पौराणिक पञ्चाङ्गों की अनुपालना में हम स्वयं भी पौराणिक ही हैं।*](https://www.ugtabharat.com/102449/) - प्रणाम आचार्य जी, आज के प्रचलित पंचांगों में सामान्यतः एवं संदिग्ध स्थिति में भी व्रत पर्व, त्योहारों का निर्धारण निर्णय सिंधु नामक ग्रंथ से किया जाता है। ऐसे में भ्रांत पंचांगों की निर्थकता कैसे सिद्ध किया जाये। ऐसी स्थिति में यह आवश्यक है जनसाधारण में सर्वप्रथम सौरमास, तत् अनुगत चांद्रमास, चांद्रमास के अमांत होने, तत् - [स्वयं विधाता निराकार, तूने जग कैसे साकार रचा](https://www.ugtabharat.com/102446/) - परमपिता परमेश्वर तूने, किस भाँति सन्सार रचा, स्वयं विधाता निराकार, तूने जग कैसे साकार रचा परमपिता ऽऽऽऽऽऽऽ तारों से भरा नभ का आँगन, चन्दा सूरज कर रहे गमन घन घोर घटा करती गर्जन, कहीं शीतल मन्द सुगन्ध पवन यह बिन सीमा का नील गगन, जिसमें पक्षी कर रहे भ्रमण, दे रहा उन्हें निशिदिन भोजन, हे - [गन्ना_ग्यारस जैसे पर्वों से दूर होती युवा पीढ़ी](https://www.ugtabharat.com/102438/) - कल #गन्ना_ग्यारस थी एक अनुमान के अनुसार देशभर में इतने गन्नों की बिक्री हुई कि गन्ने बेचने वालों से लेकर गन्ने उगाने वाले किसान के चेहरे भी खिल गए। सिर्फ गन्ना ही क्यों कल सिंघाड़े उगाने वाले से लेकर बेचने और आंवले वालों की भी अच्छी कमाई हुई। कुछ समझ आया ? नही ? हमारे - [स्वास्थ्य समस्याएं और भारत का युवा वर्ग](https://www.ugtabharat.com/102435/) - हमारे बच्चों में टाइप 2 मधुमेह के बढ़ते मामलों का गम्भीर विषय सामने आया है । क्या भारत एक स्वस्थ युवाओं का देश भी है?वर्तमान भारत जिसके विषय में हम गर्व से कहते हैं कि यह एक युवा देश है, क्या हम उसके विषय में यह भी कह सकते हैं कि भारत स्वस्थ युवाओं का - [वैश्विक परिवेश को गंदला करती असहिष्णुता](https://www.ugtabharat.com/102430/) - अन्तर्राष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस – 15 नवम्बर 2024 -ललित गर्ग – व्यक्तियों, समाजों एवं राष्ट्रों की एक दूसरे के लिये बढ़ती असहिष्णुता ही युद्ध, नफरत एवं द्वेष का कारण है, यही साम्प्रदायिक हिंसा एवं उन्माद का भी कारण है। असहिष्णुता, घृणास्पद भाषण और दूसरों के प्रति भय, नफरत, घृणा एवं द्वेष न केवल संघर्ष और युद्धों - [जनजातीय सम्मान को बढ़ावा देने में अग्रणी रहा है मध्य प्रदेश](https://www.ugtabharat.com/102426/) - – लोकेन्द्र सिंह मध्यप्रदेश वह राज्य है, जिसकी पहल पर देश को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ मिला है। यह बात तो हर कोई मानता है कि मध्यप्रदेश की सरकार ने जनजातीय नायकों का गौरव बढ़ाने के लिए उनसे जुड़े स्मारकों का आगे बढ़कर विकास किया है। राजा शंकरशाह और रघुनाथ शाह, रानी कमलापति, रानी दुर्गावती, टंट्या - [ओ३म् “अपनी जीवन यात्रा को इसके लक्ष्य पर पहुंचाने का प्रयत्न करना चाहिये”](https://www.ugtabharat.com/102417/) - ============ संसार में मनुष्य वा इसकी आत्मा एक यात्री के समान हैं जो किसी लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए अपने वर्तमान जन्म व जीवन में यहां तक पहुंची हैं। मनुष्यों की अनेक श्रेणियां होती हैं। कुछ ज्ञानी व बुद्धिमान होते हैं। वह अपने सब काम सोच विचार कर तथा विद्वानों की सम्मति सहित ऋषियों व - [भारत में मूर्ति पूजा*!](https://www.ugtabharat.com/102408/) - विजय कुमार गोविंदराम हासानन्द प्रकाशन नई सड़क दिल्ली से प्रकाशित इस पुस्तक को 76 वर्ष पूर्व वैदिक विद्वान पंडित राजेंद्र निवासी अतरौली अलीगढ़ ने लिखा था। 230 पृष्ठ की यह छोटी सी पुस्तक बहुत ही विचारोत्तेजक विश्लेषण मूर्ति पूजा के संबंध में प्रस्तुत करती है। जैसा कि इस पुस्तक के शीर्षक से ही स्पष्ट है - [दादू दुनिया बावरी, कबरे पूजे ऊत।](https://www.ugtabharat.com/102404/) - दादू दुनिया बावरी, कबरे पूजे ऊत। जिनको कीड़े खा गए उनसे मांगे पूत ॥ अजमेर और बहराइच जैसी कब्रों की पूजा करने वाले विचार करें---- लाखों सूरमा वीर हृदय वाले महात्मा जान पर खेल कर धर्म पर बलि दे गये | सीस दिये किन्तु धर्म नहीं छोड़ा | आप जानते हैं जब मुसलमान नहीं आए - [ओ३म् “अपनी जीवन यात्रा को इसके लक्ष्य पर पहुंचाने का प्रयत्न करना चाहिये”](https://www.ugtabharat.com/102328/) - ============ संसार में मनुष्य वा इसकी आत्मा एक यात्री के समान हैं जो किसी लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए अपने वर्तमान जन्म व जीवन में यहां तक पहुंची हैं। मनुष्यों की अनेक श्रेणियां होती हैं। कुछ ज्ञानी व बुद्धिमान होते हैं। वह अपने सब काम सोच विचार कर तथा विद्वानों की सम्मति सहित ऋषियों व - [दिवंगत बड़े भाई को छोटे भाई की आदर्श श्रद्धांजलि](https://www.ugtabharat.com/102393/) - मेरा यह लेख अपने पूज्य भ्राता जी,उपनिषदों के ज्ञाता और वैदिक मूल्यों के प्रति समर्पित होकर जीवन जीने वाले प्रो0 विजेन्द्र सिंह आर्य जी के प्रति समर्पित है । जिनका विगत 1 नवंबर 2024 को देहांत हो गया था। मृत्यु से सही 2 दिन पूर्व जब मैं अपने अनुज डॉ राकेश के साथ उनसे मिला - [मूर्ख वह नहीं जो कुछ नहीं जानता, मुर्ख वह हैं जो जानने की कोशिश नहीं करता*!](https://www.ugtabharat.com/102389/) - आचार्य वीरेंद्र शास्त्री सहारनपुर। ग्राम पल्ला ग्रेटर नोएडा में यादराम आर्य जी के आवास पर आयोजित हो रहे ऋग्वेद पारायण यज्ञ के चौथे दिवस के सातवें प्रातः कालीन सत्र में आज यज्ञ के ब्रह्म आचार्य वीरेंद्र शास्त्री जी ने कहां मूर्ख वह व्यक्ति नहीं है जो कुछ नहीं जानता बल्कि मूर्ख वह है जो जीवन - [प्रथम रात्रि प्रभाव*!](https://www.ugtabharat.com/102385/) - * """"""""""""""""""""""""""" लेखक आर्य सागर 🖋️ सोना एक नियमित क्रिया है.... एक सामान्य इंसान का एक तिहाई जीवन सोने में ही चला जाता है। महर्षि चरक ,वागभट्ट आदि आयुर्वेदकारो ने स्वास्थ्य के तीन स्तंभों में से निद्रा को एक महत्वपूर्ण स्तंभ माना है... वही योग दर्शनकार महर्षि पतंजलि ने निद्रा को वृत्ति माना है अर्थात - [हिन्दू युवा नास्तिक क्यों हो रहे है ?*](https://www.ugtabharat.com/102382/) - * हिन्दू युवाओं के नास्तिक बनने के मुख्य चार कारण है। धर्मगुरु में दूरदृष्टि की कमी हिन्दू समाज के धर्मगुरु , अपने मठ बनाने में, धन जोड़ने में, पाखंड और अन्धविश्वास फैलाने में अधिक रूचि रखते हैं । हिन्दू समाज में ईसाई धर्मान्तरण, लव जिहाद, नशा, भोगवाद, चरित्रहीनता, नास्तिकता, अपने धर्मग्रंथों के प्रति अरुचि आदि - [लड़कियों को भी खेलने के अवसर मिलने चाहिए](https://www.ugtabharat.com/102376/) - सरिता नायक लूणकरणसर, राजस्थान हाल ही में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की पूर्व स्पिनर नीतू डेविड को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने अपने हॉल ऑफ़ फेम में शामिल किया है. यह सम्मान प्राप्त करने वाली वह दूसरी भारतीय महिला क्रिकेटर हैं. नीतू दुनिया की अकेली ऐसी महिला क्रिकेटर हैं जिनकी सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज़ी का रिकॉर्ड अभी - [बड़े भाई के दिवंगत होने पर छोटे भाई की श्रद्धांजलि](https://www.ugtabharat.com/102366/) - ‌ ‌ ‌ विगत 7 नवंबर 2024 को हमारे मार्गदर्शक, संरक्षक एवं पूज्य श्री विजेंद्र सिंह आर्य जी की अरिष्टी का आयोजन हुआ था। जिनका परलोकगमन 1 नवंबर 2024 को प्रातः 2. 20 पर हो गया था। श्री विजेंद्र सिंह आर्य जी का जन्म तीस हजारी कोर्ट दिल्ली के प्रांगण में 22 अगस्त 1947 को - [बच्चों को पढ़ाई लिखाई के साथ-साथ कुछ अतिरिक्त गतिविधियां Extra Activities भी करनी चाहिएं।](https://www.ugtabharat.com/102308/) - बच्चों को पढ़ाई लिखाई के साथ-साथ कुछ अतिरिक्त गतिविधियां Extra Activities भी करनी चाहिएं। *"उनसे बच्चों का विकास उत्तम रीति से होता है। उन्हें जीवन के सभी पहलू अच्छे ढंग से समझ में आते हैं। इन सब अतिरिक्त गतिविधियों को आजकल "सांस्कृतिक कार्यक्रम" के नाम से जाना जाता है।"* परंतु दुर्भाग्य की बात यह है - [सुषुप्ति समाधि मोक्ष में, आत्मा हो तद् रूप।](https://www.ugtabharat.com/102359/) - बिखरे मोती वे कौन सी तीन अवस्थाएं हैं ? जिनमें आत्मा अपने निजी स्वरूप में अवस्थित होती हैं अथवा जिनकी रसानुभूति अलौकिक और अपरिमित है: - सुषुप्ति समाधि मोक्ष में, आत्मा हो तद् रूप। ब्रह्म-शक्ति से युक्त हो, पावै निजी स्वरूप॥2730॥ भावार्थ:- मनुष्य जब गहरी नींद में होता है,योगी जब गहन समाधि में होता है - [चिंतन कर कुछ चिंतन कर,](https://www.ugtabharat.com/102355/) - हे मानव ! बैठ अकेले में, चिंतन कर कुछ चिंतन कर, में कौन कहां से आया हूं ? मंथन कर कुछ मंथन कर।। आने से पहले जगती में, जो वचन दिया था ईश्वर को। वचन का सुमिरण कर प्यारे , क्यों मूर्ख बनाता है नर को ? यह देह अनमोल मिला तुझको, श्वासों का कोष - [पुस्तक *"पाकिस्तान और भारत का विभाजन",](https://www.ugtabharat.com/102344/) - पुस्तक "पाकिस्तान और भारत का विभाजन", लेखक का नाम "बी.आर. अम्बेडकर" पेज नंबर 123 मुसलमानों को भारत में नहीं रहना चाहिए। पेज नंबर 125 मुसलमान भारत के लिए खतरा बने रहेंगे और भारत में सांप्रदायिक दंगे कराते रहेंगे। पेज नंबर 231 बुर्के से यौन इच्छा बढ़ती है जिससे अधिक बच्चे पैदा होते हैं। पृष्ठ 233, - [हमारी सर्वमान्य चेतना क्या होनी चाहिए?](https://www.ugtabharat.com/102337/) - परमात्मा के ऊर्जा रूप की तुलना भिन्न-भिन्न वस्तुओं जीवों से किस प्रकार की जाती है? (1) हमारी सर्वमान्य चेतना क्या होनी चाहिए? रयिर्नचित्रा सूरा न संदृगायुर्न प्राणो नित्यो न सूनुः। तक्वा न भूर्णिर्वना सिषक्ति पया न धेनुः शुचिर्विभावा।। ऋग्वेद मन्त्र 1.66.1 (कुल मन्त्र 753) (रयिः) सम्पदा (न) जैसे कि (चित्रा) अद्भुत, इच्छा करने योग्य (परमात्मा) - [15 नवम्बर: भगवान बिरसा मुंडा के जन्म दिवस एवं जनजातीय गौरव दिवस पर लेख](https://www.ugtabharat.com/102333/) - भारत के स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज का रहा है विशेष योगदान मां भारती को अंग्रेजी शासनकाल की दासता की यन्त्रणा से मुक्त कराने हेतु जनजातीय समाज ने अंग्रेजों को नाको चने चबवा दिए थे। दरअसल, जनजातीय समाज चूंकि बहुत घने जंगलों में निवास करता था अतः वह अंग्रेजों की पकड़ से कुछ दूर ही - [नेहरू से विज्ञान का नाता](https://www.ugtabharat.com/102320/) - कल्पना पांडे इतने सालों बाद हमे शर्म से ये स्वीकार कर लेना चाहिए कि धार्मिक आडंबरों, पाखंड और अंधविश्वास फैलाने वाले और दकियानूसी सोच के सभी धर्मों के धर्मगुरुओं के बढ़ते प्रभाव और वोटों के लिए उन्हे मिलते राजनीतिक संरक्षण के इस दौर में वैज्ञानिक दृष्टिकोण की नेहरूवादी समझ और भारतीय संदर्भ में इसके वास्तविक - [भारत के प्रमुख स्वामीनारायण मंदिर](https://www.ugtabharat.com/102315/) - आचार्य डॉ. राधेश्याम द्विवेदी उत्तर प्रदेश में अयोध्या के निकट स्थित छपिया स्वामी नारायण संप्रदाय के प्रर्वतक घनश्याम महाराज की जन्म और बचपन की कर्मस्थली है। यहां हर साल कार्तिक पूर्णिमा और चैत्र पूर्णिमा (कार्तिक और चैत्र मास की पूर्णिमा) पर यहां विशाल मेला लगता है, जिसमें हर साल दुनिया के हर हिस्से से लाखों - [◆ मैं ऋषि दयानन्द का आदर क्यों करता हूँ?](https://www.ugtabharat.com/102312/) - श्री जहूर बख्श हिंदी कोविद (हिंदी के प्रसिद्ध बाल साहित्य के प्रणेता तथा कहानी-लेखक) "ऋषि दयानन्द के चरित्र में अनेक सद्गुणों का विकास इस प्रकार हुआ है कि वह मुझे बरबस अपनी ओर आकृष्ट कर लेता है। कुछ लोग महर्षि के जिस गुण को एवं उसके विकास को दोष समझते हैं, उसे ही मैं एक - [संजॉय घोष ग्रासरूट्स लीडरशिप अवार्ड्स 2024 के विजेताओं की घोषणा](https://www.ugtabharat.com/102291/) - नई दिल्ली (प्रेस विज्ञप्ति), मीडिया के रचनात्मक उपयोग के माध्यम से वंचित ग्रामीण समुदायों के सामाजिक और आर्थिक समावेशन की दिशा में काम करने वाली गैर-लाभकारी संगठन चरखा डेवलपमेंट कम्युनिकेशन नेटवर्क ने "संजॉय घोष ग्रासरूट्स लीडरशिप अवार्ड्स 2024" के विजेताओं की घोषणा कर दी है. इस वर्ष तीन विजेताओं क्रमशः हिरा शर्मा, शबनम शेख और - [इतिहास की पड़ताल पुस्तक से ... मालदेव राठौड़ और शेरशाह सूरी (अध्याय-9)](https://www.ugtabharat.com/102300/) - राजस्थान के जोधपुर के राजवंश का विशेष महत्त्व है। इसमें कई ऐसे शासक हुए जिन्होंने अपने महान् कार्यों से इतिहास में अपना विशिष्ट स्थान प्राप्त किया। इन्हीं में से राव मालदेव राठौड़ भी एक रहे हैं। जिनका जीवनकाल 1511 से 1562 ई0 तक माना जाता है। इनके पिता का नाम गांगा था। इनका जन्म 5 - [ओ३म् ‘संसार में ईश्वर एक ही है और वह सबसे महान् है’](https://www.ugtabharat.com/102297/) - =========== हमारा यह संसार मनुष्यों वा जीवात्माओं के सुख के लिये बनाया गया है। अन्य जो प्राणी योनियां हैं उनके जीव अपने पूर्व जन्मों के कर्मों का भोग करते हैं। उन्हें भी सुख तथा दुःख दोनों होते हैं। मनुष्य जाति व इतर प्राणियों को उत्पन्न करने वाली सत्ता को हम ईश्वर के नाम से जानते - [जम्मू कश्मीर में फिर 370 का राग](https://www.ugtabharat.com/102288/) - सुरेश हिंदुस्तानी जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव के परिणाम के बाद नई प्रदेश सरकार ने फिर से पुराने एजेंडे पर काम करना प्रारम्भ कर दिया है। इससे निश्चित ही यह संकेत मिलता है कि जिस धारा 370 और 35ए के कारण कश्मीर को शेष भारत से अलग दिखने जैसी स्थिति दिखती थी, वैसी ही स्थिति - [गुर्जर जागरण पत्रिका का गुर्जर प्रतिभा सम्मान समारोह पूरी भव्यता से हुआ संपन्न](https://www.ugtabharat.com/102251/) - गाजियाबाद।( विशेष संवाददाता ) यहां कवि नगर स्थित गुर्जर भवन में गुर्जर समाज की प्रतिष्ठित पत्रिका गुर्जर जागरण का गुर्जर प्रतिभा सम्मान समारोह पूरी भव्यता के साथ संपन्न हो गया। इस अवसर पर गुर्जर समाज की अनेक प्रतिभाओं और समाजसेवी लोगों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इस संबंध में जानकारी देते हुए पत्रिका - [वैदिक सम्पत्ति -253 *वेदमंत्रों के उपदेश*](https://www.ugtabharat.com/102285/) - (यह लेखमाला हम पंडित रघुनंदन शर्मा जी की 'वैदिक सम्पत्ति' नामक पुस्तक के आधार पर सुधि पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं।) प्रस्तुति देवेंद्र सिंह आर्य चेयरमेन उगता भारत गतांक से आगे .. यद्यपि संसार में सभी प्राणियों को अर्थ की आवश्यकता है, पर मनुष्य की अर्थसम्बन्धी आवश्यकता अन्य प्राणियों की अपेक्षा बहुत ही - [आर्य समाज हिंदू समाज का विरोधी नहीं बल्कि उसका सुधारक है](https://www.ugtabharat.com/102246/) - आर्य समाज ये नहीं मानता कि श्रीकृष्ण जी माखनचोर थे, गौएँ चुराते थे, गोपियों संग रास रचाते थे, राधा संग प्रेम प्रसंग में लिप्त थे, कुब्जा दासी से समागम किए थे, ईश्वर का अवतार थे । बल्कि ये मानता है कि वे जन्म से लेकर ४८ वर्ष तक ब्रह्मचारी थे, केवल एक रुक्मणी से विवाह - [भारत के लिए पाकिस्तान का अनुकरण करता कनाडा](https://www.ugtabharat.com/102242/) - राकेश सैन कनाडा में जिस तरीके से खालिस्तानी अलगाववादियों व आतंकी तत्वों को खुल कर मनमानी करने का अधिकार मिलता जा रहा है और इस पर वहां की सरकार मौन साधे बैठी है, उससे लगने लगा है कि दुनिया में पाकिस्तान के बाद कनाडा ऐसा देश है जो आतंकवाद को आतंकवाद को अपनी स्टेट पॉलिसी - [देश विरोधी अंधेरी सुरंग में प्रवेश करती जम्मू कश्मीर की राजनीति](https://www.ugtabharat.com/102237/) - -ललित गर्ग – गाजियाबाद ( ब्यूरो डेस्क ) नेशनल कॉन्फ्रेंस एवं उमर अब्दुला सरकार ने सदन में अपने बहुमत का लाभ उठाते हुए बुधवार को बिना अनुच्छेद 370 की पुर्नबहाली शब्द का इस्तेमाल कर, विशेष दर्जे की बहाली का प्रस्ताव तीखी झड़पों, हाथापाई, लात-घूंसे एवं शोरशराबे के बीच ध्वनिमत से पारित करा, साबित कर दिया - [अमेरिका में ट्रंप की वापसी और भारत](https://www.ugtabharat.com/102234/) - डॉ. सत्यवान सौरभ अमेरिका एक तरह से भारत की तरह है, जो इस सदी की शुरुआत में नई दिशा की तलाश में था; चीजों को हिलाने और एक नया रास्ता बनाने के लिए दो आम चुनाव, एक नीरस दशक और नरेंद्र मोदी के उग्र आगमन की ज़रूरत पड़ी। व्यवसायी ट्रम्प के लिए, खातों को संतुलित - [सीधी कार्यवाही दिवस और भारत का मुसलमान](https://www.ugtabharat.com/102226/) - 1946 में मजहब के नाम पर डायरेक्ट ऐक्शन में हिन्दूओं का नरसंहार कर अलग पाकिस्तान मांगने वाले दो करोड़ मुसलमान तो पाकिस्तान गये ही नहीं, अपितु भारत की छाती पर मूंग दलते हुए आज चालीस करोड़ हो गये। यानी 75 वर्ष में 20 गुना हो गये। और अपने जनसंख्या जिहाद, हिन्दुओं के धर्मांतरण और रोहिंग्या - [*छठ या षष्ठी पूजा पर्व*](https://www.ugtabharat.com/102217/) - Dr D K Garg छठ पर्व छठ या षष्ठी पूजा कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी को मनाया जाने वाला एक पर्व है। सूर्योपासना का यह लोक पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है। कहा जाता है यह पर्व बिहारियों का सबसे बड़ा पर्व है - [वेदों में विज्ञान है तो कोई अविष्कार करके दिखाओ। :-](https://www.ugtabharat.com/102214/) - वेद कोई आविष्कार करने की पुस्तक नही है जिसे पढ़ कर कोई भी मिनटों में आविष्कार कर देगा। आविष्कार तो मात्र एक विज्ञान का प्रयोग है।और विज्ञान , वेद का मात्र एक छोटा सा अंश है। वेद में सम्पूर्ण ब्रह्मांड का नित्य ज्ञान विज्ञान निहित है।विज्ञान की सभी शाखाओं का मूल वेद में ही है।वेद - [वैदिक धर्म में कर्म फल और पुनर्जन्म की व्यवस्था](https://www.ugtabharat.com/102209/) - कर्मफल व पुनर्जन्म ये रुपाणि प्रतिमुञ्चमाना असुराः सन्तः स्वधया चरन्ति । परापुरो निपुरो ये भरन्त्यग्निष्टाँल्लोकात् प्रणुदात्यस्मात् ।। -(यजु० २/३०) अर्थ:- जो दुष्ट मनुष्य अपने मन, वचन और शरीर से झूठे आचरण करते हुए अन्याय से अन्य प्राणियों को पीड़ा देकर अपने सुख के लिए दूसरों के पदार्थों को ग्रहण कर लेते हैं, ईश्वर उनको दुःखयुक्त - [जीवन में दिव्यताओं को कैसे प्राप्त करें?](https://www.ugtabharat.com/102203/) - उस व्यक्ति के कैसे लक्षण होते हैं जो परमात्मा की अनुभूति करना चाहता है और उसके लिए सक्षम है? जीवन में दिव्यताओं को कैसे प्राप्त करें? जामिः सिन्धूनां भ्रातेव स्तस्त्रामिभ्यान्न राजा वनान्यत्ति। यद्वातजूतो वना व्यस्थादग्निर्ह दाति रोमा पृृथिव्याः ।। ऋग्वेद मन्त्र 1.65.4 (कुल मन्त्र 751) (जामिः) भाई (सिन्धूनाम्) समुद्रों और नदियों का (भ्राता इव) भाई - [ओ३म् “मनुष्य जीवन का कल्याण वेदज्ञान के धारण व आचरण से ही संभव”](https://www.ugtabharat.com/102175/) - ============ परमात्मा ने हमें मनुष्य जीवन दिया है। हमारा सौभाग्य है कि हम भारत में जन्में हैं जो सृष्टि के आरम्भ से वेद, ऋषियों व देवों की भूमि रही है। मानव सभ्यता का आरम्भ इस देवभूमि आर्यावर्त वा भारत से ही हुआ था। मनुष्य जीवन की उन्नति व कल्याण के लिए परमात्मा ने सृष्टि के - [स्वदेशी एवं वैश्वीकरण के बीच सामंजस्य चाहते थे श्री दत्तोपंत जी ठेंगड़ी](https://www.ugtabharat.com/102195/) - युगदृष्टा एवं राष्ट्रऋषि श्री दत्तोपंत ठेंगड़ी के जन्म दिवस (10 नवम्बर) पर लेख श्री दत्तोपंत जी ठेंगड़ी का जन्म 10 नवम्बर, 1920 को, दीपावली के दिन, महाराष्ट्र के वर्धा जिले के आर्वी नामक ग्राम में हुआ था। श्री दत्तोपंत जी के पित्ताजी श्री बापूराव दाजीबा ठेंगड़ी, सुप्रसिद्ध अधिवक्ता थे, तथा माताजी, श्रीमती जानकी देवी, गंभीर - [वेदों में वर्णित सूर्य एवं छठ पर्व](https://www.ugtabharat.com/102188/) - #डॉविवेकआर्य 👍🏾 सूर्योपासना का यह पर्व कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष के चतुर्थी से सप्तमी तिथि तक मनाया जाता है। सूर्यषष्ठी व्रत होने के कारण इसे 'छठ' कहा जाता है। सुख-समृद्धि और मनोवांछित फल देने वाले इस पर्व को पुरुष और महिला समान रूप से मनाते हैं, लेकिन आमतौर पर व्रत करने वालों में महिलाओं - [भारतीय समाज को लेकर स्वामी दयानंद का चिंतन](https://www.ugtabharat.com/102185/) - ■ स्वामी दयानन्द का भारतीय समाज का ज्ञान... “…विवेकानन्द ने भारतीय अध्यात्म के अद्वैत तत्त्व पर बल दिया है और गाँधी ने वैष्णव भावना को महत्त्व प्रदान किया है। ये दोनों तत्त्व भारतीय दर्शन, साधना और अध्यात्म के उच्चतम स्वरूप का परिचय दे सकते हैं, परन्तु सपूर्ण भारतीय मानस को इन तत्त्वों ने एकांगी और - [अमेरिका की वे ताकतें खुद ही उखड़ गई जो ट्रंप को उखाड़ना चाहती थीं](https://www.ugtabharat.com/102181/) - ट्रंप की जीत में अमेरिका के वो उखड गए जो मोदी को उखाड़ना चाहते थे राहुल गांधी का एक और सहारा टूट गया अब डोनाल्ड लू का बैंड बजना चाहिए अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की जीत करिश्मा है क्योंकि भारत की तरह वहां भी एक नरेटिव गढ़ा गया था ट्रंप के खिलाफ - [प्राथमिक शिक्षा के ढांचे को बेहतर बनाने की ज़रूरत](https://www.ugtabharat.com/102171/) - ममता अजमेर, राजस्थान इसी सप्ताह राजधानी जयपुर में राइजिंग राजस्थान समिट के तहत एजुकेशन समिट का आयोजन किया गया, जहां पर शिक्षा, उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा सहित कौशल व उद्यमिता विभाग के साथ निवेशकों ने 28 हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा के एमओयू साइन किया. इससे सरकारी स्कूलों में सोलर सिस्टम की स्थापना, - [कश्मीर में देश की एकता के साथ किया जा रहा है खिलवाड़ और बेशर्म देशद्रोही मौन हैं](https://www.ugtabharat.com/102165/) - धारा 370 पर हो रही है विधायकों में मारपीट। जम्मू कश्मीर विधानसभा सत्र के दौरान गुरुवार को विधायकों के बीच जमकर मारपीट हुई। इसका कारण केवल एक था कि अभी हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में सत्ता में आने के लिए जनादेश पाने वाली नेशनल कांफ्रेंस के सदस्य खुर्शीद अहमद शेख ने सदन - 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