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भारतीय संस्कृति

सत्यार्थ प्रकाश में इतिहास विर्मश ( एक से सातवें समुल्लास के आधार पर) अध्याय – 23 ( क) युद्ध क्षेत्र में राजा की युद्ध नीति

युद्ध क्षेत्र में राजा की युद्ध नीति स्वामी दयानंद जी की देशभक्ति और राष्ट्रप्रेम की भावना को देखकर भारतवर्ष के अनेक महान स्वतंत्रता सेनानियों ने उनकी मुक्त कंठ से प्रशंसा की है। ऐसा कहने वाले वही लोग थे जिन्होंने स्वामी दयानंद जी के परिश्रम और पुरुषार्थ को पहचान लिया था और यह जान लिया था […]

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भारतीय संस्कृति

सत्यार्थ प्रकाश में इतिहास विर्मश ( एक से सातवें समुल्लास के आधार पर) अध्याय 22 ख लोकपाल और भारत की प्राचीन शासन व्यवस्था

लोकपाल और भारत की प्राचीन शासन व्यवस्था हमारे देश में दीर्घकाल से लोकपाल की नियुक्ति की मांग की जाती रही है। वास्तव में ऐसी मांग करना हमारी मृगतृष्णा का ही प्रतीक है। हमारे ऐसा कहने का कारण यह है कि जो लोग यह मानते हैं कि लोकपाल की नियुक्ति के पश्चात तुरंत सारे घपले घोटालों […]

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इतिहास के पन्नों से साक्षात्‍कार

“विभाजनकालीन भारत के साक्षी” नामक पुस्तक के लेखक कृष्णानंद सागर जी से विशेष बातचीत के कुछ अंश

हिंदू मुस्लिम एकता का वह नायाब फार्मूला और गांधी जी “विभाजन कालीन भारत के साक्षी” नामक ऐतिहासिक दस्तावेज के रूप में चार खंडों में प्रकाशित पुस्तक के लेखक कृष्णानंद सागर जी किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उन्होंने 20 वर्ष के परिश्रम साध्य कार्य को पूर्ण करते हुए इस पुस्तक को चार खंडों में प्रकाशित […]

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संपादकीय

जनसंख्या विस्फोट और भारत

भारत में बढ़ती जनसंख्या बहुत बड़े खतरे की घंटी है। स्वाधीनता प्राप्ति के पश्चात ही यदि इस दिशा में सरकारों की ओर से उचित कदम उठाए जाते तो आज देश में भुखमरी, बेरोजगारी, गरीबी जैसी समस्याओं से जूझने की स्थिति नहीं आती। निस्संदेह भारत ने स्वाधीनता प्राप्ति के पश्चात कई क्षेत्रों में आशातीत उन्नति की […]

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भारतीय संस्कृति

सत्यार्थ प्रकाश में इतिहास विर्मश ( एक से सातवें समुल्लास के आधार पर) अध्याय 22 ( क ) राजपुरुषों का आचरण

राजपुरुषों का आचरण स्वामी सत्यानंद जी महाराज ने “श्रीमद दयानंद प्रकाश” की भूमिका के अंत में लिखा है – “स्वामी जी महाराज पहले महापुरुष थे जो पश्चिमी देशों के मनुष्यों के गुरु कहलाए । … जिस युग में स्वामी जी हुए उससे कई वर्ष पहले से आज तक ऐसा एक ही पुरुष हुआ है जो […]

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भारतीय संस्कृति

सत्यार्थ प्रकाश में इतिहास विर्मश ( एक से सातवें समुल्लास के आधार पर) अध्याय – 21 ख राजा की नीति ऐसी हो

राजा की नीति ऐसी हो महर्षि मनु प्रतिपादित संविधान अर्थात मनुस्मृति की यह व्यवस्था या इस जैसी अनेक व्यवस्थाऐं आज के संविधानों में कहीं दिखाई नहीं देती हैं। आगे भी लिखा है :- वकवच्चिन्तयेदर्थान् सिहवच्च पराक्रमेत्। वृकवच्चावलुम्पेत शशवच्च विनिष्पतेत्।। इसका अभिप्राय है कि जैसे बगुला ध्यानावस्थित होकर मछली पकड़ने को ताकता रहता है, वैसे राजा […]

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भारतीय संस्कृति

सत्यार्थ प्रकाश में इतिहास विर्मश ( एक से सातवें समुल्लास के आधार पर) अध्याय – 21 क राजा प्रजा के लिए योगक्षेमकारी हो

राजा प्रजा के लिए योगक्षेमकारी हो जब मुसलमानों ने भारत पर आक्रमण करने आरंभ किए तो उस समय उनके पास कोई वैतनिक सेना नहीं होती थी। अधिकतर आक्रमणकारी अपने साथ ऐसे लुच्चे, लफंगे और बदमाश लोगों को अपनी सेना में भर्ती करके लाते थे जिन्हें लूट का आकर्षण दिया जाता था। उन तथाकथित सैनिकों को […]

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भारतीय संस्कृति

युद्ध में भी धर्म निभाने वाला देश है भारत – सत्यार्थ प्रकाश में इतिहास विर्मश (एक से सातवें समुल्लास के आधार पर) अध्याय 20(ख)

युद्ध में भी धर्म निभाने वाला देश है भारत जब महाभारत का युद्ध आरंभ हुआ तो उससे पहले युद्ध के लिए नियम बनाए गए थे कि दोनों पक्षों के द्वारा दिन भर न्यायपूर्वक युद्ध करने के बाद संध्या काल में दोनों पक्षों के लोगों के बीच आपसी प्रेम बना रहेगा। उस समय कोई भी शत्रुता […]

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सत्यार्थ प्रकाश में इतिहास विर्मश ( एक से सातवें समुल्लास के आधार पर) अध्याय 20 ( क ) युद्ध में भी धर्म निभाने का भारत का दर्शन

युद्ध में भी धर्म निभाने का भारत का दर्शन राजनीति में पवित्रता बनाए रखने और सार्वजनिक जीवन के प्रति अपने कर्तव्य भाव को उत्कृष्टता के साथ निर्वाह करने के लिए दिव्य गुणों से युक्त जीवनसंगिनी का होना आवश्यक है। जिन जिन सम्राटों या क्रूर तानाशाहों के विरुद्ध इतिहास में क्रांति हुई हैं, उन उनकी जीवनसंगिनी […]

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भारतीय संस्कृति

सत्यार्थ प्रकाश में इतिहास विर्मश ( एक से सातवें समुल्लास के आधार पर) अध्याय 19( ख ) स्वामी दयानंद जी का चिंतन

स्वामी दयानंद जी का चिंतन अपने देश के आत्म गौरव पर भी शर्म करना कोई कांग्रेसियों से सीख सकता है। जबकि अपने देश की महान विरासत पर गर्व करना स्वामी दयानंद जी से ही सीखा जा सकता है। अपने इस प्रकार के विचारों को प्रकट करते हुए उन्होंने लिखा “यह आर्यावर्त ऐसा देश है, जिसके […]

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