मायावती का बहुजन हिताय से परिजन हिताय तक का सफर

देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस और उसके सबसे बड़े नेता जवाहर लाल नेहरू ने डिस्कवरी ऑफ इंडिया (भारत की खोज) के साथ ही परिवारवाद की राजनीति की खोज भी की थी। कांग्रेस में तमाम काबिल नेताओं के होने के बावजूद नेहरू अपनी पुत्री इंदिरा गांधी को राजनीति में आगे लेकर आए। इंदिरा के बाद तो जैसे नेताओं में परिवार को आगे लाने की होड़ सी लग गई। इतिहास से लेकर वर्तमान तक ऐसे सैकड़ों उदाहरण मिल जाएंगे। हालांकि अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही कांग्रेस परिवारवाद से बाहर निकलने की कवायद में लगी है। पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी गैर गांधी परिवार में नया कांग्रेस अध्यक्ष ढूंढने की बात कह चुके हैं। वहीं दूसरी ओर बहुजन हिताय सर्वजन सुखाय का दावा करने वाली बहुजन समाज पार्टी और उसकी सुप्रीमो मायावती ने लखनऊ के गुलाबी महल में राष्ट्रीय अधिवेशन को संबोधित करते हुए परिजन हिताय शीर्षपद सुखाय को सबसे ऊपर रखा। इस अधिवेशन में लिए गए निर्णय से मायावती ने एक बार फिर साफ कर दिया कि उन्हें अपने राजनीतिक विरासत के लिए भाई और भतीजे पर ही भरोसा है।

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मायावती ने भाई आनंद कुमार को दोबारा बसपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया। वहीं मौजूदा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामजी गौतम को नेशनल कॉर्डिनेटर की जिम्मेदारी दी गई। दानिश अली को लोकसभा में बसपा का नेता बनाया गया है। मायावती के भतीजे आकाश आनंद को नेशनल कॉर्डिनेटर की जिम्मेदारी दी गई है। मायावती ने इस कदम से पार्टी में नंबर दो और नंबर तीन की पोजीशन भी तय कर दी। बसपा में अध्यक्ष के बाद उपाध्यक्ष सबसे ताकतवर माना जाता है। मायावती भी अध्यक्ष पद से पहले उपाध्यक्ष रही हैं। बसपा में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के बाद नेशनल कॉर्डिनेटर की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण होती है। बसपा में दो नेशनल कॉर्डिनेटर होते हैं। मायावती ने इस पद पर अपने भतीजे को बिठाकर नंबर तीन के लिए भी जमीन तैयार कर दी है। दूसरा नेशनल कॉर्डिनेटर रामजी गौतम को बनाया गया है। रामजी पहले राष्ट्रीय उपाध्यक्ष थे।

बता दें कि मई 2018 में मायावती ने अपने भाई आनंद कुमार को हटा दिया था। उस वक्त मायावती ने कहा था कि 20-22 साल तक कोई भी पार्टी का उत्तराधिकारी बनने का सपना न देखे। पार्टी अध्यक्ष के जीते जी या बाद में भी कोई परिवार का व्यक्ति पार्टी के किसी पद पर नहीं रखा जाएगा। परिवार के किसी भी सदस्य को चुनाव नहीं लड़ने दिया जाएगा। परिवार के किसी भी सदस्य को एमएलसी या राज्यसभा सदस्य या मंत्री नहीं बनाया जाएगा। लेकिन एक साल के भीतर ही मायावती अपना फैसला बदलने पर मजबूर हो गईं।

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लगातार मिल रही पराजय और लोकसभा चुनाव में भी अपेक्षित सफलता न मिलना व स्वामी प्रसाद मौर्या, नसीमुद्दीन सिद्दीकी और ब्रजेश पाठक जैसे पार्टी के कई बड़े नेताओं के चले जाने से बसपा में ऐसे विश्वसनीय लोगों की कमी हो गई जिस पर मायावती भरोसा करती रही हैं। ऐसे में मायावती का यह कदम पार्टी को खड़ा करने और अपनी मदद करने के लिए भाई को ही उन्होंने सबसे मुफीद माना। वैसे भी मायावती के सबसे खास माने जाने वाले सतीश चंद्र मिश्रा के मायावती के उत्तराधिकारी बनने के सपनों पर बसपा सुप्रीमो ने पहले ही पार्टी में उनका उत्तराधिकारी कोई दलित ही होगा, कहकर पूर्ण विराम लगा दिया था।

मायावती के छोटे भाई और वर्तमान में बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार कभी नोएडा में क्लर्क हुआ करते थे। 2013 में इंडियन एक्सप्रेस ने इनके साम्राज्य पर बड़ी रिपोर्ट प्रकाशित की थी। जिसमें बताया गया था कि 2007 से पहले आनंद की एक कंपनी थी, लेकिन 2007 में प्रदेश की सत्ता पर मायावती के काबिज होने के बाद आनंद ने लगातार 49 कम्पनियां खोली। इस काम में बसपा नेता सतीश मिश्रा के बेटे कपिल मिश्रा ने भी आनंद का साथ दिया। बता दें कि मीडिया रिपोर्टस के अनुसार साल 2007 में 7.5 करोड़ के मालिक आनंद सात सालों में लगभग 1400 करोड़ के मालिक बन गए।

वहीं अगर बात मायावती के भतीजे आकाश आनंद की करे तो वो मायावती के छोटे भाई आनंद कुमार के पुत्र हैं। समाजवादी पार्टी के साथ बसपा के गठबंधन के वक्त एक तस्वीर खूब वायरल हुई थी जिसमें अखिलेश यादव मायावती को शॉल ओढ़ाते नजर आते हैं और उनके बगल में एक 22-24 साल का नौजवान मुस्कुरा रहा होता है। बाद में पता चला कि ये नौजवान मायावती के भतीजे हैं। नाम है आकाश आनंद। जिसके बाद कई सारी जानकारियां सामने आई। उन्होंने लंदन से एमबीए की पढ़ाई की है, पहली बार मायावती के साथ 2017 में मेरठ में एक सार्वजनिक सभा में मंच साझा किया था। लोकसभा चुनाव के दौरान जब मायावती पर चुनाव आयोग ने आचार संहिता उल्लंघन के आरोप में 48 घंटे का प्रतिबंध लगाया था तब आकाश ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और रालोद प्रमुख अजीत सिंह के साथ आगरा में एक चुनावी जनसभा को भी संबोधित किया था। यूथ को लुभाने के लिए ही उन्हें स्टार प्रचारक बनाया गया था और लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने बसपा के लिए रणनीति बनाई। कहते हैं कि उनके कहने पर ही मायावती ने ट्विटर पर एंट्री की थी।

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उपचुनाव से ठीक पहले और विधानसभा चुनाव से दो साल पूर्व आकाश को नेशनल कॉर्डिनेटर बनाकर बसपा से युवाओं को जोड़ने की भी जिम्मेदारी उन्हें दी गई है। इसमें शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को शामिल कराने का लक्ष्य है। इसके अलावा आकाश को सोशल मीडिया के माध्यम से भी पार्टी से लोगों को जोड़ने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। 24 साल के आकाश आनंद अब बसपा को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाने के लिए काम करेंगे। बहरहाल, वंशवाद की राजनीति को समय-समय पर जनता ने स्वीकारा है और नकारा भी है। ऐसे में मायावती के इस कदम के बाद देखना होगा कि आनंद बसपा को राजनीतिक आकाश पर लेकर जाते हैं या सियासत की जमीन पर आ जाते हैं।

– अभिनय आकाश

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