मनुष्य स्वस्थ तो रहना चाहते हैं परंतु….

      यह संसार ईश्वर ने बनाया है। इसलिए संसार में ईश्वर के नियम चलते हैं, उन नियमों का उल्लंघन कोई भी नहीं कर सकता। "जो लोग ईश्वर के नियमों का उल्लंघन करने का प्रयास करते हैं, उन्हें दंड स्वरूप अनेक प्रकार से दुख ही भोगना पड़ता है। इसलिए अधिक अच्छा तो यही है, कि ईश्वर के नियमों को समझें, उनका पालन करें, और जीवन में सुख शांति आनंद को प्राप्त करें।" 
       उदाहरण के लिए ---- "लोग स्वस्थ तो रहना चाहते हैं, परन्तु स्वस्थ रहने के लिए जो परिश्रम पुरुषार्थ करना पड़ता है, उसे करना नहीं चाहते। आलस्य प्रमाद आदि दोषों से ग्रस्त रहते हैं।" "वे समझते हैं, कि हमारे पास बहुत रुपए हैं, हम रुपए से सब कुछ खरीद लेंगे। परंतु ऐसा नहीं है। आप रुपए से हर वस्तु नहीं खरीद सकते।"
           "आप रुपए से दवाई खरीद सकते हैं, परंतु स्वास्थ्य नहीं। आप रुपए से बिस्तर खरीद सकते हैं, परंतु नींद नहीं। आप रुपए से भोजन खरीद सकते हैं, परंतु भूख नहीं।" इस प्रकार से सब वस्तुएं रूपयों से नहीं मिलती। "कुछ वस्तुओं की प्राप्ति के लिए तो ईश्वरीय नियमों का पालन करना ही उपाय है। इसलिए ईश्वर के नियमों का पालन करें।"
      ईश्वर के नियम ये हैं। "प्रतिदिन सुबह-शाम दोनों समय निराकार सर्वशक्तिमान न्यायकारी आनन्दस्वरूप ईश्वर का ध्यान करें। मन और इंद्रियों पर संयम रखें। मन में सदा प्रसन्न रहें। खान-पान में नियंत्रण रखें। अपनी दिनचर्या को ठीक रखें। रात को जल्दी सोएं। सुबह जल्दी उठें। प्रतिदिन थोड़ा व्यायाम भी करें। सेवा परोपकार आदि कर्म करें। वेदों के प्रचार में दान करें। कमजोर रोगी विकलांग आदि लोगों पर दया करें। सभ्यता और अनुशासन में रहें। ईश्वर कर्मफल पुनर्जन्म बंधन मुक्ति आदि इन बातों में विश्वास करें। सब की उन्नति में अपनी उन्नति समझें, और इसी प्रकार के कार्य करें। स्वार्थी न बनें। यदि आप ईश्वर के इन नियमों का पालन करेंगे, तो इससे निश्चित रूप से आपका शरीर भी स्वस्थ रहेगा, मानसिक प्रसन्नता भी बनी रहेगी, और जीवन में आनन्द होगा।"

—- “स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक – दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात.”

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