आत्मन: प्रतिकूलानि परेषाम् न समाचरेत

आज का सभ्य संसार तनाव, दुराव और अलगाव का शिकार होकर दु:ख तकलीफों व कष्टï क्लेशों की समस्याओं से जूझ रहा है। यह अत्यंत ही दु:ख की बात है कि हम संसार में जो चाहते हैं उस आदर्श व्यवस्था को स्थापित करने के प्रति व्यक्तिगत रूप से अपनी ओर से प्रयास नहीं करते। हम अच्छा चाहते हैं अच्छे की बात करते हैं और उस अच्छे की स्थापनार्थ समाज से अपेक्षा भी करते हैं पर अपनी ओर से समाज की एक ईकाई के रूप में उसमें हमारे रचनात्मक सहयोग का जब समय आता है तो हम ऐसे सहयोग को देने के लिए कन्नी काटने लगते हैं। हम दूसरों से अपने प्रति अच्छे व्यवहार की अपेक्षा करते हैं दूसरे हमारे प्रति अपनत्व का भाव दिखायें और हमारी बात का पालन करें यह अपेक्षा भी हम करते हैं। दूसरों से हमारी अपेक्षा यह भी होती है कि वह हमारे दुख तकलीफों को दूर करने में सहायक बनें। ये इच्छायें तो प्रत्येक व्यक्ति की दूसरों से अपने प्रति मिल जाएंगी किंतु दूसरों के प्रति उनकी विषम परिस्थितियों में उन्हें सहयोग देने के समय हम किसी प्रकार की आफत मोल नहीं लेना चाहते। ऐसे स्वार्थी युग में व्यक्ति आत्म केन्द्रित हो गया है। हम यह भूल चुके हैं अथवा भूलने की कोशिश कर रहे हैं कि समाज का ताना बाना एक व्यक्ति से ही शुरू होता है। भवन की एक एक ईंट अगर अपने कर्तव्य से च्युत हो जाए तो भवन का गिरना लाजिम है। आज समाज का ढांचा लड़खड़ाया हुआ है। सामाजिक व्यवस्था चरमरा गयी है। व्यक्ति के चारों ओर मानव समुदाय की भीड़ है। किंतु फिर भी वह अकेलापन महसूस करता है। उसे रिश्तों में और सामाजिक लोगों में अपने प्रति उस रस के दर्शन नहीं होते जिसकी उसे प्यास है, चाह है। हिंसक वन्य जीवों से आत्म रक्षार्थ मानव ने संभवत: हथियारों की खोज की होगी ताकि उसका जीवन के प्रति भय समाप्त हो जाए, किंतु इन हथियारों के भारी जखीरे के बावजूद भी हर व्यक्ति असुरक्षित है? अर्थात सुरक्षा के प्रति चिंता का युगों पुराना भाव आज भी यथावत कायम है। अगर ये माना जाए कि समाज में शांति व्यवस्था के विरोधी दुष्टï प्रवृत्ति के आततायी लोगों के विनाश हेतु राज्य को कभी न कभी सर्वप्रथम हथियारों की आवश्यकता अनुभव हुई होगी और वहां से इस ओर मनुष्य ने सोचना और कार्य करना आरंभ किया होगा तो स्वाभाविक रूप से प्रश्न किया जा सकता है कि आज अत्यंत तीक्ष्ण और विनाशकारी हथियारों के होने के बावजूद भी समाज में अशांति और उपद्रव का साम्राज्य क्यों है? क्यों आज भी समाज में अपराधिक प्रवृत्ति के समाज विरोधी, आततायी असुरों का बोल बाला है?
अपने चारों ओर भारी भीड़ होने के बावजूद भी अकेले पन की अनुभूति और भारी मात्रा में तीक्ष्ण किस्म के आधुनिकतम हथियारों के होने के बावजूद भी मनुष्य का स्वयं को असुरक्षित अनुभव करना निश्चय ही किसी गंभीर चूक की परिणति है। यह सब हमारा ध्यान हमारे द्वारा अतीत में की गयी किसी गलती की ओर आकर्षित करती है। ऋषियों ने मनुष्य मात्र के प्रति ही नहंी अपितु प्राणिमात्र के प्रति भी हमारे रिश्तों की कसौटी ही ये बतायी कि-
आत्मन: प्रतिकूलानि परेषां न समाचरेत् अर्थात जो बात अपने लिए प्रतिकूल हो अथवा जो स्वयं को अच्छी न लगे उसे दूसरों के प्रति भी मत करो। अगर हम ये चाहते हैं कि दूसरे लोग हमारा सम्मान करें तो हम उनके प्रति अपमान का व्यवहार न करें। अगर हमको सम्मान अच्छा लगता है तो हम दूसरों का भी सम्मान करें। हमको यदि अपनी जान से प्यार है तो हम दूसरों की जान की कीमत भी समझें। किंतु व्यवहार में हम मनसा, वाचा, कर्मणा दूसरों के सर्वनाश और अपने विकास की छल और कपट की प्रपंच पूर्ण योजनाओं में व्यस्त रहते हैं। स्वयं के हितों की पूर्ति के लिए दूसरों की जान के भी दुश्मन बन जाते हैं। इससे भी आगे जाकर मनुष्य ने अपनी रसनेन्द्रिय के अधीन होकर व मांसाहारी बनकर हजारों जीव जंतुओं की नस्लें ही दुनिया से समाप्त कर दी हैं। आज सौंदर्य प्रसाधनों के लिए अपने तन की रौनक बढ़ाने के लिए भौतिक वादी मनुष्य रोज कितने ही निरीह और बेजुबान पशुओं और पक्षियों को अपनी भेंट चढ़ा रहा है, और उसके अस्तित्व को समाप्त कर रहा है। यह इस भावना के विरूद्घ है। जीवन में शांति के लिए हमें यही मूलमंत्र अपनाना होगा।

Comment:

Latest Posts

hititbet giriş
betgaranti giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
hititbet giriş
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
hititbet
hititbet
Tuzla İpek Kirpik
hititbet giriş
hititbet
betgaranti giriş
Hititbet Giriş
hititbet
Hititbet
Hititbet Güncel Giriş
Hititbet Yeni Giriş
Hititbet Resmi Gİriş
betnano
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betyap giriş
hititbet giriş
betpark giriş
betnano
betnano
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
hititbet
hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti
betgaranti güncel giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
betnano
betnano
betkom giriş
hitbet giriş
hitbet giriş
betbox giriş
betbox giriş
betpas giriş
betpas giriş
betkom giriş
betpas giriş
betpark giriş
betpark giriş
hititbet
casibom giriş
casibom giriş
casibom giriş
jojobet
jojobet