राहुल गांधी भारत को राष्ट्र नहीं मानते और सोनिया कर्नाटक की संप्रभुता की बात करती हैं

नीरज कुमार दुबे

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी जब इस साल लंदन गये थे तब उन्होंने वहां जो विवादित बातें कही थीं उनमें एक विवादित बात यह भी थी कि भारत एक राष्ट्र नहीं बल्कि राज्यों का संघ है। इससे सवाल उठा था कि क्या कांग्रेस भारत को एक राष्ट्र नहीं मानती? अब राहुल गांधी की माताजी और कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कर्नाटक विधानसभा चुनावों में रैली को संबोधित करते हुए राज्य की संप्रभुता की बात कर नया विवाद छेड़ दिया है जिससे सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या कांग्रेस कर्नाटक को भारत से अलग करने की किसी साजिश का हिस्सा बन गयी है? इससे पहले कि हम इस पूरे विवाद का विस्तृत घटनाक्रम आपको बताएं उससे पहले आपको याद दिलाना चाहेंगे कि साल 2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस सरकार के तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कर्नाटक के एक नये राज्य ध्वज के डिजाइन को मंजूरी दी थी और इसका एक प्रस्ताव केंद्र के पास भेजा था। इससे पहले जम्मू-कश्मीर में भी कांग्रेस ने 70 सालों तक अनुच्छेद 370 को बनाये रखा था जिससे वहां अलग राज्य ध्वज था और भारत की संसद से पारित अधिकतर कानून वहां लागू नहीं होते थे। इसलिए सवाल उठता है कि कांग्रेस क्यों एक देश एक ध्वज की अवधारणा के विपरीत सोचती है?

लोकसभा चुनाव 2019 के बाद पहली बार किसी रैली को संबोधित कर रहीं सोनिया गांधी ने कर्नाटक की संप्रभुता को लेकर जो बयान दिया है वह कांग्रेस की विभाजनकारी मानसिकता को प्रदर्शित करता है। संप्रभुता का अर्थ सोनिया गांधी और उनके भाषण लेखक यदि नहीं जानते हैं तो हम उन्हें बताना चाहते हैं कि परिभाषा के अनुसार ‘संप्रभु’ शब्द एक स्वतंत्र राष्ट्र के लिए उपयोग किया जाता है। जब कोई देश स्वतंत्र हो जाता है, तो उस देश को संप्रभु देश कहा जाता है। जैसे भारत एक संप्रभु देश है और कर्नाटक राज्य इसका एक गौरवशाली हिस्सा है। इसलिए जब सोनिया गांधी ने कहा कि उनकी पार्टी किसी को भी कर्नाटक की प्रतिष्ठा, संप्रभुता या अखंडता के लिए खतरा पैदा नहीं करने देगी तो सवाल उठेगा ही कि क्या कांग्रेस कर्नाटक को देश से अलग करना चाहती है या पार्टी ऐसे तत्वों के दबाव में है जो कर्नाटक को अलग करने की महत्वाकांक्षा रखते हैं?

सोनिया गांधी ने जो कहा वह देश के साथ ही कर्नाटक के स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान है, जिन्होंने भारत की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी। यह करोड़ों देशभक्त कन्नड़ लोगों का अपमान है, जो भारत की कसम खाते हैं और अपनी भारतीयता को संजोते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगर यह आरोप लगा रहे हैं कि कांग्रेस कर्नाटक को भारत से ‘‘अलग करने’’ की खुलकर वकालत कर रही है तो इसमें दम नजर आता है क्योंकि जो सोनिया गांधी ने कहा उसे कांग्रेस ने ट्वीट कर दोहराते हुए कहा था कि, ‘‘कांग्रेस किसी को भी कर्नाटक की प्रतिष्ठा, संप्रभुता या अखंडता के लिए खतरा पैदा नहीं करने देगी।” इसलिए सवाल यह भी उठता है कि भारत की आजादी के संघर्ष का श्रेय सिर्फ एक परिवार को देने वाली कांग्रेस पार्टी में क्या कोई भी ऐसा नेता नहीं है जिसे संप्रभुता का अर्थ पता हो?

इस मामले में भाजपा ने सोनिया गांधी के खिलाफ निर्वाचन आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। देखना होगा कि आयोग क्या कार्रवाई करता है। फिलहाल तो भाजपा ने ठीक मतदान से पहले सोनिया गांधी के इस बयान को बड़ा मुद्दा बना लिया है। पार्टी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने कहा है कि सोनिया गांधी ने जो संप्रभुता की बात कही है वो कांग्रेस पार्टी की सोच के मानसिक दिवालियापन का नतीजा है। उन्होंने कहा है कि वोट की खातिर कुछ भी बोलना और कुछ भी कहना ये बहुत ही निंदनीय है और चिंताजनक है। वहीं केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस संसदीय पार्टी की प्रमुख सोनिया गांधी की कर्नाटक की सम्प्रभुता संबंधी टिप्पणी कांग्रेस की भारत को विभाजित करने की ‘गहरी साजिश’ का खुलासा करती है। अनुराग ठाकुर ने ट्वीट किया, ‘‘सोनिया गांधी जी, कर्नाटक की सम्प्रभुता का उल्लेख करके आपने भारत को विभाजित करने की कांग्रेस की गहरी साजिश को उजागर किया है।’’ उन्होंने दावा किया, ”न तो सोनिया गांधी जी और न ही उनकी पार्टी ने भारत को एक राष्ट्र के रूप में स्वीकार किया। कन्नड़ लोग कांग्रेस के खेल को विफल कर देंगे।’’

बहरहाल, कर्नाटक विधानसभा चुनावों के पूरे प्रचार पर नजर दौड़ाएं तो कहा जा सकता है कि काफी समय बाद कोई ऐसा चुनाव आया जोकि कांग्रेस की प्रदेश और केंद्रीय इकाई ने पूरी ताकत और एकजुटता के साथ लड़ा। भले कर्नाटक कांग्रेस की इकाई आपस में विभाजित दिखी लेकिन इस चुनाव को कांग्रेस हाईकमान ने अपने हिसाब से आगे बढ़ाया। कब कौन-सा मुद्दा आगे बढ़ाना है, कहां किसकी रैली या रोड शो कराना है सब कुछ दिल्ली से तय हुआ। कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के दावेदारों डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया ने स्थानीय स्तर पर चुनावी राजनीति की कमान संभाली। लेकिन जैसे ही चुनाव प्रचार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एंट्री हुई, वैसे ही एकतरफा नजर आने वाला यह चुनाव कांटे की टक्कर में तब्दील हो गया। नरेंद्र मोदी ने 18 रैलियां और रोड शो तथा अमित शाह ने 33 रैलियां और रोड शो करके अपनी पार्टी की स्थिति को बहुत बेहतर बना दिया। यह देख कांग्रेस को समझ नहीं आया कि क्या करें इसलिए उसने विभाजनकारी चीजों को आगे बढ़ाना शुरू किया। पहले कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में वादा कर दिया कि वह बजरंग दल जैसे संगठनों पर प्रतिबंध लगायेगी, मुस्लिमों के लिए चार प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था को बहाल करेगी और आरक्षण की कुल सीमा को 75 प्रतिशत तक लेकर जायेगी। इसको लेकर बवाल अभी थमा भी नहीं था कि सोनिया गांधी भी प्रचार में पहुँच गयीं और वो बात कह दी जोकि कोई भी स्वाभिमानी राष्ट्र स्वीकार नहीं करेगा।

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