नेहरू से मोदी, जिन्ना से शहबाज तक, कभी भारत से भी दमदार थी पाकिस्तान की इकॉनमी, 75 सालों में दोनों देशों ने क्या खोया, क्या पाया?

अभिनय आकाश

पन्नों में वर्षों का हिसाब सिमट जाता है और वर्षों का हिसाब रखने वाली शख्सियतें गजों में दफ्न हो जाती है। हिन्दुस्तान के इतिहास ने भी ऐसे ही कद्दावर नेता देखें हैं। जिनका असर आम लोगों के सिर चढ़कर बोलता था। मोहनदास करमचंद गांधी, पंडित नेहरू, सरदार पटेल और मोहम्मद अली जिन्ना। कुछ तारीखें ऐसी होती हैं जिन्हें इतिहास कभी भुला नहीं सकता। भारत विभाजन के ठीक पहले एक अस्थाई सरकार बनी थी। जिसके प्रधानमंत्री थे जवाहर लाल नेहरू। इस सरकार के फाइनेंस मिनिस्टर थे लियाक़त अली खान और ये सरकार कांग्रेस-मुस्लिम लीग के लिए आखिरी मौका थी, पार्टीशन रोकने के लिए। पर ऐसा हुआ नहीं। दोनों एक-दूसरे पर इल्जाम लगाते रहे। लियाकत पर इल्जाम लगता था कि फाइनेंस मिनिस्टर की हैसियत से वो किसी भी मंत्रालय को पैसा ही नहीं रिलीज करते थे। 16 अगस्त 1946 की एक तारीख हिन्दुस्तान की आजादी के इतिहास की ऐसी ही तारीख है जिसने बंटवारे की हकीकत पर मुहर लगा दी। मोहम्मद अली जिन्ना के नेतृत्व में अपने स्वार्थ के लिए एक धड़े ने भारत को बांटने का दावा पेश कर दिया था। उनकी मांग थी पश्चिम के पेशावर से लेकर पंजाब के अमृतसर और कोलकाता समेत एक अलग राष्ट्र जो सिर्फ मुसलमानो के लिए बनेगा और जिसका नाम होगा पाकिस्तान। नतीजतन 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान बना और लियाकत अली खान इसके पहले प्रधानमंत्री बने। दोनों देश अलग एक साथ हुए और लगभग एकसाथ ही आगे बढ़े। लेकिन आज भारत कहां खड़ा है और पाकिस्तान की हालात तो किसी से भी छुपी नहीं है। दोनों देशों को आजादी एक साथ मिली। लेकिन एक बन गया दुनिया का महानतम देश और दूसरा बर्बाद, तबाह और दुनिया के लिए आतंक का अड्डा। 75 साल पहले बंटवारे के साथ ही भारत के भू-भाग पर ऐसी लकीर खीची जिसने जमीन, जंगल, लोग यहां तक की विचारों को भी बांट दिया। भारत और पाकिस्तान ने बंटवारे के बाद अपनी-अपनी नीति और नियती चुनी। लीकरों से शुरू हुआ खेल तकदीरों तक कितना पहुंचा। इस रिपोर्ट के जरिए बताएंगे।

पाकिस्तान में लालच तंत्र की शुरुआत

हजारों वर्षों की विरासत, सैकड़ों सालों की गुलामी से मुक्ति, विशाल आबादी, अलग-अलग भाषाओं और परंपराओं में बंटा देश। आजादी के साथ ही भारत की जिम्मेदारी जितनी बड़ी थी। मजहब के नाम पर एक टुकड़ा लेकर अलग होने वाले पाकिस्तान का लालच उतना ही अधिक था। भारत की कुल रकम का 17.5 फीसदी पैसा पाकिस्तान को दिया गया। पाकिस्तान को अपना आधा अधूरा संविधान बनाने में 26 साल लग गए। जिन्ना की मौत पाकिस्तान निर्माण के 13 महीने बाद ही हो गई। कई रिपोर्ट्स में लिखा भी है कि जिन्ना के आखिरी शब्द थे कि पाकिस्तान बनाना मेरी सबसे बड़ी भूल थी। जिन्ना की मौत के साथ ही पाकिस्तान में सत्ता का लालच सिर चढ़कर बोलने लगा। पाकिस्तान का पहला चुनाव इससे पंजाब प्रांत में मार्च 1951 में हुआ। इस दौरान भी जनता ने सीधे तौर पर हिस्सा नहीं लिया। बल्कि चुनिंदा लोगों ने ही वोट डाले। बाद में पाकिस्तान के प्रथम प्रधानमंत्री लियाकत अली की गोली मारकर हत्या कर दी गई। 1958 तक पाकिस्तान में 8 प्रधानमंत्री अधूरे कार्यकाल के साथ अलविदा हो चुके थे।

पाकिस्तान में सैन्य तख्तापलट की शुरुआत

साल 1958 में पाकिस्तान में पहली बार तख्तापलट हुआ था। उस वक्त पाकिस्तानी आर्मी ने तत्कालीन सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन को बढ़ावा दिया। पाकिस्तान के पहले राष्ट्रपति मेजर जनरल इस्कंदर मिर्ज़ा ने पाकिस्तानी संसद और प्रधानमंत्री फिरोज खान नून की सरकार को भंग कर दिया था। इसके साथ ही उन्होंने देश में मार्शल लॉ लागू कर आर्मी कमांडर इन चीफ जनरल अयूब खान को देश की सत्ता सौंप दी। तेरह दिन बाद ही अयूब खान ने तख्तापलट करते हुए देश के राष्ट्रपति को पद से हटा दिया था और खुद नए राष्ट्रपति बन गए थे।

1970 में हुआ पहला आम चुनाव

पाकिस्तान में पहला आम चुनाव आजादी के 23 साल बाद 1970 में हुआ। कुल 313 सीटों में से 167 सीटों पर आवामी लीग की जीत हुई। आवामी लीग का दबदबा पूर्वी पाकिस्तान यानी वर्तमान के बांग्लादेश में था। शेख मुजीब उर रहमान को पाकिस्तान का पहला लोकतांत्रिक प्रधानमंत्री बनना था लेकिन जुल्फिकार अली भुट्टों की मदद से सेना ने सत्ता देने से इनकार कर दिया। फिर 1971 का बांग्लादेश मुक्ति संग्राम और भारतीय फौज के सामने पाकिस्तान के सैन्य सरेंडर की कहानी से पूरी दुनिया वाकीफ है।

1977 में फिर लौटा सेना का राज

जिया उल हक़ दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से पढ़े थे। ब्रिटिश इंडियन आर्मी में अफसर थे। हिंदुस्तान के आज़ाद होने के बाद इन्होंने पाकिस्तान चुना। लौट के आये तो प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने इनको चीफ ऑफ़ आर्मी स्टाफ बना दिया। 5 जुलाई 1977 को जिया ने तख्तापलट कर दिया। ये हुआ 4 और 5 जुलाई, 1972 की दरम्यानी रात को। पाकिस्तान रात को जब सोया, तो लोकतंत्र था। अगली सुबह जगा, तो मालूम हुआ कि सेना का राज फिर लौट आया है। भुट्टो न केवल सत्ता से बेदखल हुए, बल्कि उन्हें जेल भी भेज दिया गया। अक्टूबर, 1977 में जुल्फिकार अली भुट्टो के खिलाफ हत्या का मुकदमा शुरू किया गया। मुकदमा लोअर कोर्ट में नहीं सीधे हाईकोर्ट में शुरू हुआ। उन्हें फांसी की सजा मिली। सुप्रीम कोर्ट ने भी बहुमत निर्णय में फांसी की सजा बहाल रखी। अप्रैल, 1979 में रावलपिंडी जेल में उन्हें फांसी से लटका दिया गया। भुट्टो के आखिरी शब्द थे, ‘या खुदा, मुझे माफ करना मैं बेकसूर हूं। दुनिया का सबसे पुराना लोकतांत्रिक देश अमेरिका जिया के सपोर्ट में था। क्योंकि जिया अमेरिका की मदद कर रहे थे अफगानिस्तान में रूस के खिलाफ। नतीजा ये हुआ कि जिया ने पाकिस्तान में एटम बम बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी।

कारगिल युद्ध का बहाना बना कर नवाज शरीफ को किया गया सत्ताबदर

पाकिस्तान में एक बार फिर तख्तापलट का दौर देखने को मिला और परवेज मुशर्रफ तीसरे मिलिट्री कमांडर थे, जिन्होंने पाकिस्तान पर शासन किया, जब उन्होंने 1999 में नवाज शरीफ की लोकतांत्रिक सरकार का तख्ता पलट कर दिया था। उन्होंने देश के संविधान को सस्पेंड कर दिया था। इसके बाद मुशर्रफ खुद पाकिस्तान के नए राष्ट्रपति बन गए। दिलचस्प है कि नवाज शरीफ को 2017 में भ्रष्टाचार के मामले में 10 साल जेल की सजा सुनाई गई, जब उन्हें इस्तीफा देने को मजबूर होना पड़ा। पाकिस्तान के 75 साल के शासन में 33 साल सत्ता सैन्य तानाशाहों के हाथ में रही। यही वजह है कि पाकिस्तान में 75 साल में 31 प्रधानमंत्री बने, लेकिन कार्यकाल कोई पूरा नहीं कर सका। पाकिस्तान का इतिहास इस बात का गवाह है कि जब भी वहां राजनैतिक अस्थिरता फैलती है तो सेना को तख्ता पलट का मौका मिल जाता है।

पाकिस्तान के पास हैं भारत से ज्यादा परमाणु बम

भारत के पास इस वक्त करीब 110-120 परमाणु बम हैं, जबकि पाकिस्तान के पास 120-130 परमाणु बम हैं। गौरतलब है कि पाकिस्तान ने कई छोटे-छोटे परमाणु हथियार तैयार कर रखे हैं, जिसके इस्तेमाल की धमकी वो हमेशा देता रहता है। भारत के पास छोटे-छोटे परमाणु हथियार नहीं है। जो भी हैं, उनका असर बड़ा और खतरनाक हो सकता है। भारत की मिसाइलों की जद में पूरा पाकिस्तान आता है। जबकि पाकिस्तान की मिसाइल 2750 किलोमीटर तक परमाणु हथियारों से हमला कर सकती है।

भारत में क्या चल रहा था?

पाकिस्तान के राजनीतिक अस्थिरता की कहानी तो हमने आपको बता दी आप इस दौरान भारत देश में क्या कुछ हो रहा था। इस पर भी एक नजर डाल लेते हैं। आज से करीब 71 साल पहले 25 अक्टूबर को भारत में लोकसभा का पहला चुनाव शुरू हुआ। जो लगभग पांच महीनों तक चला था। उस समय भारत के लोगों के लिए आजादी बिल्कुल नई चीजें थी। पहला आम चुनाव 25 अक्टूबर 1951 से 27 मार्च 1952 के बीच हुआ था। चुनाव के लिए करीब 1874 उम्मीदवारों और 53 पार्टियों ने चुनाव लड़ा था। पार्टियों ने 489 सीटों पर चुनाव लड़ा। कांग्रेस ने 364 सीटों के साथ चुनाव जीता क्योंकि लोगों ने उस पार्टी को वोट दिया जिसका नेतृत्व जवाहरलाल नेहरू ने किया था। भाकपा वह पार्टी है जो 16 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही क्योंकि उन्हें लगभग 3.29 प्रतिशत वोट मिले। देश के पहले आम चुनाव में आजादी की लड़ाई का दूसरा नाम बनी कांग्रेस ने 364 सीटें जीत कर प्रचंड बहुमत प्राप्त किया। देश के पहले आम चुनाव के बाद पंडित जवाहर लाल नेहरू प्रधानमंत्री बने। उनके अलावा 2 ऐसे नेता भी चुनाव जीते जो आगे चलकर भारत के प्रधानमंत्री बने, ये थे- गुलजारी लाल नंदा और लाल बहादुर शास्त्री। आपातकाल के 21 महीनों यानी 1975 से 1977 के दौर से इतर भारत में लोकतंत्र कभी भी खतरे में नहीं पड़ा है। देश ने आजादी के बाद से अब तक 14 प्रधानमंत्री देखें हैं। जिनमें से 8 ने पूरे पांच वर्षों तक अपना कार्यकाल पूरा किया। भारत के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू सबसे अधिक 16 साल 286 दिनों तक देश के पीएम पद पर रहे।

जीडीपी की क्या है स्थिति

भारत: आजादी के बाद पिछले 74 सालों में भारत दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर उभरा है। आजादी के बाद 1950-51 में भारत की अर्थव्यवस्था 2.93 लाख करोड़ रुपए की थी, जो अब 198.91 लाख करोड़ रुपए पहुंच गई है। वर्तमान में भारत की आर्थिक विकास दर 8.4 प्रतिशत है।

पाकिस्तान: पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था दुनिया में 25वें स्थान पर है। वहीं वर्तमान में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था 292 अरब डॉलर है। वर्तमान में पाकिस्तान की आर्थिक विकास दर 4.5 फीसदी है।

प्रति व्यक्ति आय

आपको ये जानकर हैरानी होगी की 1960 में पाकिस्तान की प्रति व्यक्ति आय भारत से 89 रुपये ज्यादा हुआ करती थी। 1960 लेकिन 75 साल बाद भारत इस मामले में पाकिस्तान से काफी आगे निकल गया है। एक तरफ पाकिस्तान कंगाल होने के करीब है तो वहीं दूसरी तरफ भारत दुनिया की 5 बड़े इकोनॉमी में भी शामिल हो गया है। भारत की प्रति व्यक्ति आय 1900.71 यूएस डॉलर (1.43 लाख रुपए) है। पाकिस्तान की सालान प्रति व्यक्ति आय 1193.73 यूएस डॉलर ( 89.99 हजार रुपए) है।

खूंखार आतंकी संगठनों का पनाहगाह पाकिस्तान

2019 में अमेरिका यात्रा के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने स्वीकार किया था कि उनके देश में 40 से ज्यादा आतंकी संगठन सक्रिय हैं। साथ ही उन्होंने कहा था कि अभी भी पाकिस्तान में 30 से 40 हजार आतंकी मौजूद हैं। संयुक्त राष्ट्र की तरफ से इसके 146 नागरिकों को बैन किया जा चुका है।

लश्कर-ए-तैयबा- इसका गठन 1980 के दशक में पाकिस्तान में हुआ। 2001 में इसे विदेशी आतंकी संगठन के रूप में चिन्हित किया गया।

जैश-ए-मोहम्मद- इसका गठन साल 2000 में कश्मीरी आतंकी मसूद अजहर ने किया। भारतीय संसद पर हमले समेत कई आतंकी वारदातों को इसने अंजाम दिया है।

हरकत उल जिहाद इस्लाम- साल 1980 में इसकी स्थापना अफगानिस्तान में सोवियत सेना से लड़ने के लिए हुई थी।

हिज्बुल मुजाहिद्दीन- पाकिस्तान की सबसे बड़ी इस्लामी पार्टी की आतंकवादी शाखा है। इसका गठन 1989 में हुआ था।

अलकायदा- पाकिस्तान से अपनी गतिविधि को अंजाम देता है।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्या है हाल

भारत कुल 43,486 निजी अस्पताल हैं, वहीं, 25,778 सार्वजनिक अस्पताल हैं।

पाक कुल 8,953 अस्पताल हैं, जिनमें 1,282 सरकारी अस्पताल हैं।

रक्षा बजट

भारत : रक्षा बजट 5.25 लाख करोड़ रुपये है।

पाक: रक्षा बजट 1.37 लाख करोड़ रुपये है।

भारत ने अपनी नीतियों में भारत को सर्वोपरि रखा। देशहित के साथ कभी किसी भी शक्ति या महाशक्ति से समझौता नहीं किया। आजादी के 75 साल बीतते-बीतते पाकिस्तान को भी भारत की ताकत का अहसास हो चला है। इसलिए तो तीन बार युद्ध करके देख लिया अब बातचीत का राग अलापने लगा है। हालांकि पाकिस्तान को अपने हालात को समझने में देर हो गई क्योंकि वो कर्ज और खैरात के उस दलदल में डूब चुका है। जहां से उसे निकलने में शायद सदियां लगेंगी। वहीं स्वतंत्रता के 75वें वर्ष में भारत अगले 25 वर्षों के रोडमैप पर काम कर रहा है। वहीं पाकिस्तान के लिए तो इतना ही लग रहा है कि हर बीतते दिन के साथ वो कुछ कदम पीछे ही खिसक रहा है।

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