ज्ञान के आलोक में रत रहकर ज्ञान का प्रसारक रहा है भारत : डॉ राकेश कुमार आर्य

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ललितपुर ( विशेष संवाददाता ) यहां पर नेहरू महाविद्यालय ललितपुर में महर्षि दयानंद सरस्वती योग संस्थान महरौनी द्वारा आयोजित किए गए कार्यक्रम “भारत के इतिहास का पुनर्लेखन क्यों ?” विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए सुप्रसिद्ध इतिहासकार और 65 राष्ट्रवादी पुस्तकों के लेखक डॉक्टर राकेश कुमार आर्य ने कहा कि भारत ज्ञान की दीप्ति में, आलोक में रत रहने वाला देश है। जिसने परमपिता परमेश्वर के तेज स्वरूप का ध्यान करने को जीवन का लक्ष्य बनाया और ऊर्जा अर्थात एनर्जी की उपासना के माध्यम से अनेक ऐसे आविष्कार करके संसार का उपकार किया जिससे मानवता का भला हो सकता था।
उन्होंने कहा कि भारत के हिंदू इतिहास में ऋषि महात्मा ही नहीं बल्कि राजा जनक जैसे अनेक राजा भी हुए हैं जो आध्यात्मिक क्षेत्र में भी उन्नति की चरम अवस्था को प्राप्त हो चुके थे। आज उन्हीं के चरित्र को पढ़ने की आवश्यकता है। जिससे हमारी युवा पीढ़ी का निर्माण हो सके। डॉ आर्य ने कहा कि युवा पीढ़ी चरित्र भ्रष्ट होकर पथ भ्रष्ट हो चुकी है। जिसके लिए एक गैंग देश में काम कर रहा है। यदि कोई देश अपनी युवा पीढ़ी को नहीं बचा पाता तो उसका नष्ट होना तय है। डॉक्टर आर्य ने कहा कि आज यह समय की आवश्यकता है कि हम एक भाषा, एक देश, एक धर्म, एक संस्कृति, एक सोच और एक दिशा के उपासक बनें और अपने ऋषियों के देश और उनकी संस्कृति की रक्षा के लिए संकल्पित होकर आगे आएं।
उन्होंने कहा कि हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि हमारे वेदों का मानवतावादी चिंतन ही संसार की बिगड़ी हुई व्यवस्था को सुधार सकता है। सबसे उत्तम उपाय अथवा उपचार हमारे पास है परंतु हम पश्चिमी संस्कृति की ओर भाग रहे हैं। जिससे हम अपना ही नहीं मानवता का भी अहित कर रहे हैं। संपूर्ण संसार हमारे देश से उर्जा लेता था। ज्ञान की धारा यहां से बहती थी, जो सारे संसार को तृप्त करती थी, पर आज उल्टी चाल चल गई है। जिससे भारत की गरिमा को ठेस पहुंची है।
उन्होंने कहा कि हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि भारत के इतिहास के साथ छेड़छाड़ करते हुए विकृतिकरण से भी आगे बढ़कर इतिहास के नायकों के महान कार्यों को इतिहास से विलुप्त करने की मानसिकता से काम किया गया है। जिसके कारण अनेक ऐसे वीर योद्धा हैं जिनके बारे में इतिहास पूर्णतया मौन है । आज हमको पूरे देश में वैचारिक क्रांति के माध्यम से अपने इतिहास नायकों को ढूंढ ढूंढकर स्थापित करने की आवश्यकता है। इतना ही नहीं भारत से बाहर उन देशों में भी भारत के इतिहास नायकों की खोज होनी चाहिए जिन्होंने काल विशेष में पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान ,इराक या ऐसे ही अन्य देशों में किसी काल विशेष में आर्य संस्कृति की रक्षा के लिए महान कार्य किए या अपना बलिदान दिया। उन सबको समाविष्ट करके ही हम इतिहास को समग्र रूप में प्रस्तुत कर पाएंगे।
डॉक्टर आर्य ने कहा कि हमारे चिंतन और हमारी क्रांति का क्षेत्र भारत ही नहीं होना चाहिए बल्कि भारत से बाहर के वे सभी देश इसमें सम्मिलित होने चाहिए जिनका मूल कभी वैदिक धर्मियों का रहा है। “भारत को समझो” अभियान का अर्थ स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि इसका अर्थ केवल आज के भारत की भौतिक और भौगोलिक सीमाओं के भीतर रहने वाले लोगों को समझने तक सीमित नहीं है बल्कि इसे बहुत व्यापक अर्थों में समझने की आवश्यकता है। चिंतन की उसी गहराई और ऊंचाई को समझ कर हम भारत को उसका सही इतिहास दे सकते हैं।
इससे ना केवल भारत का बल्कि सारी मानवता का भला होना निश्चित है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित रहे स्थानीय विधायक राम रतन कुशवाहा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत का उज्ज्वल इतिहास प्रस्तुत करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की योगी सरकार इस दिशा में महत्वपूर्ण कार्य कर रही है और माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी भारत के प्राचीन गौरव को स्थापित करने के लिए विशेष रूप से कार्यशील हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य राकेश नारायण द्विवेदी द्वारा की गई। कार्यक्रम में संस्था के प्रबंधक प्रदीप चौबे भूपेंद्र जैन उगता भारत समाचार पत्र के संपादक श्री निवास आर्य समाचार संपादक रविंद्र आर्य , समाजसेवी भूपेंद्र जैन ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का सफल संचालन समाजसेवी शिक्षक आर्य रतन लखनलाल आर्य द्वारा किया गया । उन्होंने प्रस्ताव रखा कि भारत का नाम भारत के संविधान में भारतवर्ष किया जाए। कृण्वंतो विश्वमार्यम् और वसुधैव कुटुंबकम को भारत सरकार संयुक्त राष्ट्र का सूत्र वाक्य बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए , भारत के इतिहास को विदेशी इतिहासकारों की काली छाया से मुक्त किया जाए । ऋग्वेद के संगठन सूक्त को भारत के संविधान के मौलिक कर्तव्यों में सम्मिलित किया जाए।

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