इंग्लैंड में हिंदू-मुस्लिम दंगों की पूरी कहानी क्या है?

अभिनय आकाश

क्रिकेट मैच से शुरू हुई तकरार सांप्रदायिक दंगों तक कैसे पहुंची, इंग्लैंड में हिंदू-मुस्लिम दंगों की पूरी कहानी क्या है?
जाहिलों का कोई शहर नहीं क्या जयपुर क्या दिल्ली, राहगीर ने ये गाना गाया तो था ये बताने के लिए कि जाहिलों का कोई शरह नहीं होता है, वो हर जगह किसी न किसी रूप में मौजूद रहते हैं। वक्त और जगह भले ही बदल जाए लेकिन नहीं बदलती है तो उनकी जहालियत। मजहब के नाम पर लोगों का यूं बरगलाना, इंसान को आपस में एकदूसरे का दुश्मन बनाना हमेशा से होता आया है। वैसे तो क्रिकेट को जेंटल्समैन गेम कहा जाता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस जेंटल्समैन गेम के प्रशंसक के बीच की तकरार में देखते ही देखते धर्म के ठेकेदार भी हिस्सेदार बन बैठेंगे। ऐसा माना जाता था कि धर्म के नाम पर उदंडता, सांप्रदायिक नारेबाजी और धार्मिक प्रतीकों पर हमला ऐसी घटनाएओं पर अल्पविकसित देश और विकासशील देशों का एकाधिकार है। लेकिन ये ताना बाना अब टूट रहा है। सांप्रदायिकता की आग अमेरिका और यूरोप तक भी पहुंच चुकी है। इंग्लैंड के लेस्टर में इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा हिंदू लोगों पर हमले का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ कि बर्मिंघम के स्मेथविक से दुर्गा मंदिर के बाहर हंगामे की खबर आई। मुस्लिम भीड़ ने इंग्लैंड के स्मेथविक में एक हिंदू मंदिर के सामने विरोध करने का प्रयास किया। मंदिर की ओर जाते समय भीड़ का अल्लाहु अकबर के नारे लगाने का एक वीडियो सामने आया है। प्रदर्शनकारी स्मेथविक क्षेत्र में दुर्गा भवन हिंदू मंदिर की ओर जा रहे थे। यहां सुरक्षाबलों ने जहां भीड़ को रोककर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की, वहीं इनमें से कुछ प्रदर्शनकारियों ने दीवार पर चढ़ने की भी कोशिश की। भारत पाकिस्तान क्रिकेट मैच से शुरू हुई तनाव अब हिंदू मुस्लिम दंगे में बदल चुका है। रैलियां निकल रही है, नारेबाजी हो रही है। झंडे जलाए जा रहे हैं। पुलिस की तरफ से गिरफ्तारियां भी की जा रही हैं। ऐसे में आज आपको बताते हैं कि क्रिकेट मैच से शुरू हुई तकरार सांप्रदायिक दंगों तक कैसे पहुंची। इंग्लैंड में हिंदू-मुस्लिम दंगों की पूरी कहानी क्या है?

क्रिकेट मैच की तकरार धर्म तक पहुंची

यूरोपीय महाद्वीप के उत्तर पश्चिम में बसा इंग्लैंड यूनाइटेड किंगडम का हिस्सा है। इंग्लैंड की राजधानी लंदन से 165 किलोमीटर दूर लेस्टर शहर को आबादी के हिसाब से देखें तो हिंदू और मुसलमान लगभग बराबर आबादी में हैं। सिखों की भी ठीक-ठाक संख्या है। लेकिन इन दिनों दंगों की आग यहां देखने को मिल रही है। आपको 28 अगस्त का भारत और पाकिस्तान के बीच खेले गए एशिया कप 2022 के हाईवोल्टेज मुकाबले के बारे में तो जरूर याद होगा। हार्दिक पटेल की तरफ से आखिरी ओवर में लगाई गई बॉन्ड्री और भारत की जीत का जश्न। जब आमने-सामने होते हैं भारत और पाकिस्तान तो धड़कनों का भी होता है इम्हितान। हार जीत से इतर लोग बहुत कुछ दांव पर लगा देते हैं। टीवी तोड़ने और सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग जैसी चीजें तो आम दिनचर्या का हिस्सा हैं। लेकिन 28 अगस्त को लेस्टर में मामला सिर से ऊपर निकल गया। बेलग्रेव इलाके में बड़ी स्क्रीन पर मैच चल रहा था। देखने वालों में भारत-पाकिस्तान दोनों मुल्क के लोग थे। अचानक किसी बात पर तकरार हुई और फिर कुछ लोगों ने मिलकर एक शख्स की पिटाई कर दी। इस घटना का वीडियो भी बना। इस घटना में पाकिस्तान विरोधी नारे भी लगाए जा रहे थे। फिर ये वीडियो लोकल व्हाट्सएप ग्रुप्स में वायरल हो गया। ये विवाद तो शांत हो गया लेकिन अपने पीछे एक चिंगारी छोड़ गया। दोनों पक्ष एक दूसरे पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाते रहे। लेस्टर के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन होने लगे। नारेबाजी की घटनाएं भी सामने आने लगी। इसी बीच ब्रिटेन की हिंदू कम्युनिटी के व्हाट्सएप ग्रुप में एक वीडियो और वायरल हुआ जिसमें एक शख्स हिंदुओं की बहुलता वाले इलाके में तोड़फोड़ करता नजर आ रहा था। इस दौरान वो भगवा ध्वज को भी तोड़कर नीचे गिराता नजर आया। इस वीडियो से हिंदुओं के खेमे में संदेश गया कि कुछ मुस्लिम कट्टरपंथी जानबूझकर उनके धर्म को निशाना बना रहे हैं। इसे रोकने के लिए एकजुट होना होगा। ये देख मुस्लिम पक्ष के कई एकटिविस्ट सोशल मीडिया में उकसावे वाले पोस्ट भी लिखने लगे। इतना सबकुछ हो रहा था तो पुलिस क्या कर रही थी?

पुलिस ने मामले में तेजी से कार्रवाई की और कई लोगों को गिरफ्तार भी किया। धीरे-धीरे मामला शांत हो गया। लेकिन लेस्टर में 18 सितंबर, 2022 को हिंदुओं के समूह पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने हमला कर दिया था। इस दौरान ‘अल्लाह-हू-अकबर’ का नारा लगाते हुए मंदिर पर भी अटैक हुआ और उसके ऊपर लगे भगवा ध्वज को भी तोड़कर नीचे गिरा दिया गया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कम संख्या में पुलिसवाले इस दौरान तैनात थे। कई अधिकारी ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ के अंति संस्कार की तैयारियों के कारण लंदन में थे। पुलिस चीफ को इन घटनाओं से निपटने के लिए कुछ को वापस बुलाना पड़ा। हिंदुओं के समूह पर इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा किए गए हमले में पुलिस अब तक 47 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। लेस्टर पुलिस के अनुसार, शहर में फैली अशांति के मामले में 20 वर्षीय एक युवक को प्रतिबंधित हथियार रखने का दोषी पाया गया। ऐमॉस नोरोन्हा नाम के इस शख्स को 10 महीने जेल की सजा सुनाई गई है।

लीसेस्टर पर नेताओं का क्या है कहना?

मीडिया से दोनों समुदायों के नेताओं ने शांति की अपील करते हुए कहा कि हालात बहुत खतरनाक हैं। उन्होंने कहा कि घर में माता-पिता और दादा-दादी बच्चों से बात करें और उन्हें हिंसा भड़काने से रोकें। 2011 की जनसंख्या के अनुसार लेस्टर में हिंदू और मुस्लिम आबादी लगभग बराबर है। मुस्लिम 7.4% हैं और हिंदू 7.2 %, जबकि सिख 2.4 % हैं।

भारतीय उच्चायोग ने क्या कहा

इस घटना पर भारतीय उच्चायोग ने दोषियों के खिलाफ कड़े एक्शन की मांग की है। लंदन में भारतीय उच्चायोग ने कहा कि हम लेस्टर में भारतीय समुदाय के खिलाफ हिंसा और हिंदू धर्म के परिसरों और धार्मिक प्रतीकों की तोड़फोड़ की निंदा करते हैं। हमने ब्रिटिश अधिकारियों के साथ इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाया है। लंदन पुलिस ने कहा है कि हम लेस्टर हिंसा, अव्यवस्था और अराजकता को बर्दाश्त नहीं करेंगे। हम शांति रखने और बातचीत से मुद्दा सुलझाने के हक में हैं।

लंदन के लीसेस्टर में एक हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ सहित हिंसा की एक घटना के बाद मुस्लिम भीड़ ने इंग्लैंड के स्मेथविक में एक हिंदू मंदिर के सामने विरोध करने का प्रयास किया। मंदिर की ओर जाते समय भीड़ का अल्लाहु अकबर के नारे लगाने का एक वीडियो सामने आया है। प्रदर्शनकारी स्मेथविक क्षेत्र में दुर्गा भवन हिंदू मंदिर की ओर जा रहे थे। यहां सुरक्षाबलों ने जहां भीड़ को रोककर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की, वहीं इनमें से कुछ प्रदर्शनकारियों ने दीवार पर चढ़ने की भी कोशिश की। इंग्लैंड की पुलिस स्थिति को नियंत्रित करने को वहाँ मौके पर पहुँची। हालाँकि वो कुछ ज्यादा नहीं कर पाए। उनकी मौजूदगी में ही भीड़ में कुछ कट्टरपंथी मुस्लिम मंदिर की दीवारों पर चढ़ गए। इतना ही नहीं, कुछ आपत्तिजनक नारे और इशारे के जरिये हिंदुओं को डराने की भी खबर कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कही गई हैं। बर्मिंघम वर्ल्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, ‘अपना मुस्लिम’ नाम के एक सोशल मीडिया अकाउंट ने मंगलवार को दुर्गा भवन मंदिर के बाहर ‘शांतिपूर्ण विरोध’ के लिए भीड़ को बुलाया था। स्काई न्यूज के मुताबिक, मंदिर के बाहर करीब 200 लोग (इस्लामी कट्टरपंथी भीड़) एकत्र हो गई थी। इनमें में से किसी ने बोतलें भी फेंकी। इससे हालात काफी संवेदनशील हो गया ।

Comment: