अमेरिका ने आतंकवाद से लड़ने में दिखाई सतर्कता से संसार को दिए हैं कई सबक


नीरज कुमार दुबे

अमेरिका से पूरी दुनिया को यह भी सीखना चाहिए कि मानवता के दुश्मनों और आतंकवादियों का कोई धर्म नहीं होता और उनको बचाने के लिए आधी रात को कोर्ट नहीं खुलवाना चाहिए और ना ही उनको मृत्युदंड सुनाये जाने का विरोध करके अपनी सियासत चमकानी चाहिए।

अल-कायदा सरगना अयमान अल-ज़वाहिरी को मौत के घाट उतार कर अमेरिका ने 9/11 हमले के पीड़ितों को पूरा न्याय दिला दिया है। देखा जाये तो जवाहिरी की मौत समूचे विश्व के लिए राहत भरी खबर है क्योंकि वह जिस तरह अपने संगठन को मजबूत कर रहा था उससे कई देशों के लिए चुनौतियां बढ़ गयी थीं। जवाहिरी का मारा जाना भारत के लिए तो खासतौर पर महत्व रखता है क्योंकि उसने हाल के कुछ वर्षों में भारत को केंद्र में रखते हुए वीडियो संदेशों के माध्यम से जिहादी गतिविधियों के लिए युवकों को उकसा कर देश की मुश्किलें बढ़ाई थीं।

9/11 हमलों की साजिश मिलकर रचने वाले अल-ज़वाहिरी और ओसामा बिन-लादेन का खात्मा यह भी दर्शाता है कि अमेरिका अपने देश पर हमला करने वालों को कभी बख्शता नहीं है। लादेन को यूएस नेवी सील्स ने दो मई 2011 को पाकिस्तान में एक अभियान के दौरान मार गिराया था और अब उसके 11 साल बाद जवाहिरी भी मारा गया। 9/11 के हमलों में शामिल रहे लादेन और जवाहिरी के अन्य सहयोगियों को अमेरिका पहले ही ठिकाने लगा चुका है। जवाहिरी को मार गिराने वाले अमेरिका से यह बात पूरी दुनिया को सीखनी चाहिए कि वह अपने नागरिकों पर हमलों की बात को कभी भूलता नहीं है और उसका बदला लेकर रहता है। 9/11 हमले को भले दो दशक से ज्यादा का समय हो गया हो लेकिन अमेरिकी सरकार के लिए उसके जख्म हमेशा ताजा रहे और भले ओसामा और जवाहिरी को मार गिराने के वर्षों लंबे अभियान के दौरान उसके अरबों-खरबों डॉलर खर्च हो गये मगर उसने इस बात की परवाह किये बिना आतंक के आकाओं का खात्मा करके ही चैन लिया।

अमेरिका से पूरी दुनिया को यह भी सीखना चाहिए कि मानवता के दुश्मनों और आतंकवादियों का कोई धर्म नहीं होता और उनको बचाने के लिए आधी रात को कोर्ट नहीं खुलवाना चाहिए और ना ही उनको मृत्युदंड सुनाये जाने का विरोध करके अपनी सियासत चमकानी चाहिए। ऐसे लोगों के मानवाधिकार के पक्ष में दलीलें देना भी बंद होना चाहिए। दुनिया को समझना होगा कि यह जो आतंकवादी वीडियो संदेश जारी कर जिहाद के लिए उकसाते हैं, दरअसल यह खुद बड़े डरपोक होते हैं। ये दूसरों को मौत के बाद जन्नत के सपने दिखाते हैं लेकिन खुद मौत से इन्हें कितना डर लगता है इसका अंदाजा इसी से लग जाता है कि जवाहिरी तालिबान के शीर्ष सरगना सिराजुद्दीन हक्कानी के घर में छिपा बैठा था। तो दूसरी ओर दुनिया का नंबर एक आतंकवादी रहा अल कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन कितना बहादुर था यह दुनिया ने तब देख ही लिया था जब वह डर के मारे एक गुफा से दूसरी गुफा में छिपता फिर रहा था। 
दूसरी ओर, आतंकवाद के खिलाफ अब तक की सबसे लंबी लड़ाई में मिली यह सबसे बड़ी सफलता घरेलू मोर्चे पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के लिए भी राहत लेकर आई है। अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी पर बाइडेन को काफी आलोचना झेलनी पड़ी थी और कहा गया था कि 9/11 के पीड़ितों को पूरा न्याय दिलाये बिना दो दशकों से जारी लड़ाई को बीच में छोड़ दिया गया। लेकिन अफगानिस्तान छोड़ने के 11 महीने बाद अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने आतंकवाद रोधी अभियान में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। जिस तरह अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने यह अभियान चलाया और उसे सफलतापूर्वक अंजाम तक पहुँचाया, निश्चित ही इससे बाइडेन प्रशासन की दक्षता साबित हुई है। महंगाई और बेरोजगारी के मोर्चे पर चुनौतियों से जूझ रहे राष्ट्रपति जो बाइडेन की लोकप्रियता में हाल ही में गिरावट भी देखी गयी थी जोकि अब वापस बढ़ सकती है। बाइडेन ने दिखा दिया है कि कैसे उन्होंने अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाकर उनके जीवन की रक्षा की, अमेरिकी खजाने से अफगानिस्तान में जो अरबों डॉलर खर्च हो रहे थे उसे भी बचाया और अपनी रणनीति के चलते अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी नहीं होने के बावजूद जवाहिरी को मार गिराया।

बहरहाल, जॉर्ज डब्ल्यू बुश के कार्यकाल में आतंकवाद के खिलाफ जिस अभियान की शुरुआत हुई थी उसे आगे बढ़ाते हुए बराक ओबामा ने ओसामा को मार गिराया फिर ट्रंप ने भी आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख बरकरार रखा और अमेरिका के दुश्मनों का सफाया करने के साथ ही आतंकवाद को फंडिंग करने वालों की भी कमर तोड़ी। अब बाइडेन के कार्यकाल में जवाहिरी की मौत से अमेरिका का बदला लेने का संकल्प भी सिद्ध हुआ है और दुनिया ने भी चैन की सांस ली है। देखा जाये तो लादेन और जवाहिरी का खात्मा आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में बहुत बड़ी कामयाबी के साथ-साथ आतंकवाद के प्रतीकों पर सबसे बड़ा हमला भी है। आतंक के प्रतीकों पर हमले से निश्चित रूप से आतंकवादियों और आतंकवाद के समर्थकों का मनोबल गिरेगा जोकि पूर्णतया मानवता के हित में है।

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