राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार: कैसे होता है कलाकारों का चयन

अभिनय आकाश 

फिल्म समारोह निदेशालय के अनुसार विजेताओं का फैसला करने वाली जूरी में “सिनेमा, अन्य संबद्ध कला और मानविकी के क्षेत्र में प्रतिष्ठित व्यक्ति” शामिल होते हैं।

68वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा 22 जुलाई को उन फिल्मों के लिए की गई जो 2020 में रिलीज हुई थीं। कोविड -19 महामारी के कारण पुरस्कारों में दो साल की देरी हुई थी। विजेताओं की घोषणा नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में की गई और इसे पीआईबी यूट्यूब चैनल पर स्ट्रीम किया गया। तमिल फिल्म ‘सोरारई पोटरु’ ने पांच श्रेणियों में पुरस्कार जीता है। बेस्ट फीचर फिल्म, बेस्ट एक्टर, बेस्ट एक्ट्रेस के अलावा ‘सोरारई पोटरु’ के लिए बेस्ट म्यूजिक डायरेक्शन (बैकग्राउंड स्कोर) का अवॉर्ड जीवी प्रकाश कुमार और बेस्ट स्क्रीनप्ले का पुरस्कार शालिनी उषा नायर व सुधा कोंगरा को मिला है। अजय देवगन स्टारर फिल्म ‘तान्हाजी: द अनसंग वॉरियर’ को  बेस्ट पॉपुलर फिल्म प्रोवाइडिंग होलसम एंटरटेनमेंट का अवॉर्ड मिला। इसके साथ ही सूर्या को फिल्म ‘सोराराई पोटरु’ और अजय देवगन को फिल्म ‘तान्हाजी’ के लिए सम्मिलित रूप से बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड दिया गया। मनोज मुंतशिर को भी बेस्ट लिरिसिस्ट का अवार्ड मिला है। सच्चिदानंदन के आर ने मलयालम फिल्म ‘अयप्पनम कोशियुम’ के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशन का पुरस्कार जीता है और तमिल फिल्म ‘मंडेला’ के लिए मैडोन अश्विन ने निर्देशक की सर्वश्रेष्ठ पहली फिल्म का पुरस्कार जीता है।

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार क्या हैं?
केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय के फिल्म समारोह निदेशालय के अनुसार, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार “सौंदर्य और तकनीकी उत्कृष्टता और सामाजिक प्रासंगिकता की फिल्मों के निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए दिया जाता है। पुरस्कारों का उद्देश्य पूरे भारत में विभिन्न संस्कृतियों और समुदायों को प्रोत्साहित करना है। एकता और अखंडता को बढ़ावा देना है। ये पिछले वर्ष की फिल्मों के लिए प्रत्येक वर्ष भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रस्तुत किए जाते हैं। पहली बार 1954 में एक दर्जन क्षेत्रीय भाषाओं की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों को पुरुस्कृत किए जाने से इसकी शुरुआत हुई। उस वक्त इसे स्टेट अवार्ड कहा गया। 
अभिनेत्री शारदा ने तीन बार जीता पुरस्कार
1968 में कलाकारों और तकनीशियनों के लिए अलग-अलग पुरस्कार दिए गए। रात और दिन एक सुपरहिट साइकोलॉजिकल फिल्म थी जो 1967 में रिलीज़ हुयी और इसकी मुख्य अदाकारा नागिस को अपने वरुणा और पेग्गी के किरदार के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रिय पुरुस्कार भी मिला था।  यह फिल्म सत्येन बोस के निर्देशन में बनी और इसमें नरगिस के किरदार को बहुत सराहना मिली। जबकि उत्तम कुमार ने ‘एंटनी फिरंगी’ और ‘चिड़ियाखाना’ दोनों के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार जीता। पुरस्कारों को आधिकारिक तौर पर क्रमशः उर्वशी पुरस्कार और भारत पुरस्कार नामित किया गया था। अभिनेत्री शारदा जिन्होंने तीन बार थुलाभरम’, ‘स्वयंवरम’ और ‘निमाज्जनम’ के लिए पुरस्कार जीता जिसके बाद उन्हें उर्वशी शारदा” के रूप में भी जाना जाने लगा। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में हर कैटेगरी जैसे फीचर्स’, ‘नॉन-फीचर्स, सर्वश्रेष्ठ लेखन के आधार पर अलग अवॉर्ड दिया जाता है, जिन्हें रजत कमल, स्वर्ण कमल आदि नाम से जाना जाता है। कुछ अवॉर्ड में नकद पुरस्कार भी दिया जाता है, जबकि कुछ कैटेगरी में सिर्फ मेडल ही दिया जाता है। इस बार बेस्ट क्रिटिक का कोई अवॉर्ड नहीं दिया गया। सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ पुस्तक किश्वर देसाई की ‘द लॉन्गेस्ट किस’ को मिली, जो देविका रानी के बारे में है, जिन्हें अक्सर “भारतीय सिनेमा की पहली महिला” कहा जाता है।

विजेताओं का चयन कौन करता है?
फिल्म समारोह निदेशालय के अनुसार विजेताओं का फैसला करने वाली जूरी में “सिनेमा, अन्य संबद्ध कला और मानविकी के क्षेत्र में प्रतिष्ठित व्यक्ति” शामिल होते हैं। 2018 में राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद द्वारा कुल 140 विजेताओं में से केवल 11 श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान करने पर विवाद छिड़ गया था।  60 से अधिक पुरस्कार विजेताओं ने विरोध में एक खुला पत्र लिखा। पत्र में राष्ट्रपति से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए कहते हुए, उल्लेख किया गया कि राष्ट्रीय पुरस्कार, “अन्य पुरस्कार समारोहों के विपरीत, सबसे प्राचीन और निष्पक्ष माना जाता है। इससे पहले 2017 में, प्रख्यात फिल्म निर्माता ए आर मुरुगादॉस ने जूरी के चयन में पक्षपात और भाई-भतीजावाद का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि पुरस्कार जूरी सदस्यों के पक्षपात को दर्शाते हैं, जिसकी अध्यक्षता अनुभवी निर्देशक प्रियदर्शन कर रहे थे।
पुरस्कारों के सबसे बड़े विजेता कौन रहे हैं?
शबाना आज़मी ने 1982-84 तक ‘अर्थ’, ‘खंधार’ और ‘पार’ के लिए तीन बैक-टू-बैक जीत सहित पांच बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीतने का रिकॉर्ड बनाया है। बंगाली अभिनेत्री इंद्राणी हलदर और रितुपर्णा सेनगुप्ता दो पुरस्कार विजेता रहीं। जिन्हें एक ही फिल्म, रितुपर्णो घोष की ‘दहन’ (1997) के लिए पुरस्कृत किया गया। प्रसिद्ध सत्यजीत रे की छह फिल्मों पाथेर पांचाली’ (1955), ‘अपुर संसार’ (1959), ‘चारुलता’ (1964), ‘गूपी जाने बाघा बनने’ (1968), ‘सीमाबद्ध’ (1971), और ‘अगंतुक’ (1991) ने चार अलग-अलग दशकों में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार जीता। प्रमुख भूमिका में शाहरुख खान अभिनीत सात फिल्मों ने सर्वश्रेष्ठ मनोरंजन प्रदान करने वाली सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म का पुरस्कार जीता है, जो किसी भी अभिनेता के लिए सबसे अधिक है। हालाँकि, शाहरुख को स्वयं कभी व्यक्तिगत रूप से ये पुरस्कार नहीं मिल पाया है।

अवॉर्ड्स में हिंदी सिनेमा का दबदबा
ऐसी धारणा रही है कि अवॉर्ड्स में हिंदी सिनेमा का दबदबा है। संख्याओं को देखते हुए, यह देखना आसान है कि यह धारणा कहाँ से आती है: श्रेणियों को पेश किए जाने के बाद से, सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए 25 पुरस्कार, सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म के लिए 27, सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन के लिए 19, सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के लिए 17 पुरस्कार आदि बॉलीवुड को गए हैं। पिछले कुछ वर्षों के विजेताओं को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि राष्ट्रवाद और देशभक्ति के विषयों से संबंधित फिल्मों को पुरस्कार देने का चलन है। इसमें ऐतिहासिक शख्सियतों से संबंधित फिल्में शामिल हैं: ‘तानाजी: द अनसंग वॉरियर’ (2020) इसका एक उदाहरण है। अन्य उदाहरण हैं ‘मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी’ (2019), जिसने कंगना रनौत को अपना तीसरा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीतवाया। ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ (2018), जिसे विक्की कौशल को उनका पहला सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला; और ‘मरक्कर: अरेबिकादलिनते सिंघम’ (2019), जिसे सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म घोषित किया गया था।

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