सनातन और हिंदू धर्म का अंतर


*पहले तो “हिंदू* शब्द ही अरबी का शब्द है। वेदों में हिंदू शब्द का कोई जिक्र नहीं है, हिंदू धर्म मुसलमानों ने गड़ा, उन्होंने बुर्के के विकल्प में पर्दा प्रथा दे दी। हमारे यहां विवाह दिन में होते थे,राम जी का विवाह दिन में हुआ था,जो वैदिक था, किन्तु मुसलमानों के काल में बने हिंदू धर्म में रात में विवाह होने लगे, सनातन धर्म में शारीरिक संबंध का अर्थ विवाह के साथ जुड़ा था, शकुंतला दुष्यंत को अर्जुन उलूपी आदि उदाहरण हैं, विवाह नहीं तो शारीरिक संबंध नहीं किंतु हिंदू धर्म में ऐसी कोई अनिवार्यता नहीं। सनातन धर्म में संध्या, गायत्री मंत्र और यज्ञ हर गृहस्थ के अनिवार्य अंग थे पर हिंदू धर्म में नहीं। सनातन धर्म में चार आश्रमों का विधिवत पालन होता था, जिसमें ब्रह्मचर्य, गृहस्थ,वानप्रस्थ और फिर संन्यास था। इसका पालन हमारे सप्त ऋषियों और राम कृष्ण तक ने किया उन्होंने इन चारों आश्रमों का पालन किया , पर भारत में इस्लाम के आगमन के बाद जब जिसकी मर्जी आती है वह तब सन्यासी बन जाता है, या गृहस्थ में चला जाता है जबकि इन आश्रमों की आयु निश्चित थी और भी बहुत सारी बातें हैं, जैसे सनातन में वर्ण व्यवस्था थी जाति प्रथा नहीं थी, चार वर्ण भी व्यक्ति के गुण, कर्म और स्वभाव से निर्धारित होते थे आज तो चमड़े का व्यवसाय करने वाला ब्रह्मण कहा जाता है,वेद पाठ करने वाला शुद्र।ये विकृति हिंदू धर्म में आई, सनातन धर्म में नहीं थी, इसलिए हम सनातन धर्म को मानते हैं, हिंदू एक संप्रदाय है जो मुसलमानों के आगमन के बाद हम पर थोप दिया गया।*

साभार प्रस्तुति डॉक्टर अर्जुन पांडे

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