भारतीय करेंसी में आ रही खतरनाक गिरावट


अभिनय आकाश 

शुरुआती सत्र में भारतीय शेयरों में 2.6 फीसदी की गिरावट आई, क्योंकि दुनिया भर के इक्विटी बाजारों में अमेरिकी मई के मुद्रास्फीति के आंकड़ों के चार दशक के उच्च स्तर 8.6 फीसदी तक पहुंचने के बाद बिकवाली देखी जा रही है।

घरेलू शेयर में इन दिनों भारी गिरावट दिख रही है। वैश्विक बाजारों में निवेशकों की धारणा कमजोर पड़ने से बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी गिरावट के साथ खुले। शुरुआती सत्र में भारतीय शेयरों में 2.6 फीसदी की गिरावट आई। दुनिया भर के इक्विटी बाजारों में अमेरिकी मई के मुद्रास्फीति के आंकड़ों के चार दशक के उच्च स्तर तक पहुंचने के बाद बिकवाली देखी जा रही है। मई महीने में अमेरिका में खुदरा महंगाई दर 8.6 फीसद पर पहुंच गई है। यह दिसंबर, 1981 के बाद सबसे ज्यादा है। घरेलू शेयर बाजार में सोमवार को बड़ी गिरावट आयी और बीएसई सेंसेक्स 1,457 अंक का गोता लगाकर बंद हुआ। एनएसई निफ्टी भी लुढ़क कर 15,774 के स्तर पर आ गया। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 36 पैसे टूटकर रुपया अपने सबसे निचले स्तर 78.29 पर आ गया।  

बाजार में गिरावट
शुरुआती सत्र में भारतीय शेयरों में 2.6 फीसदी की गिरावट आई, क्योंकि दुनिया भर के इक्विटी बाजारों में अमेरिकी मई के मुद्रास्फीति के आंकड़ों के चार दशक के उच्च स्तर 8.6 फीसदी तक पहुंचने के बाद बिकवाली देखी जा रही है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दरों में बढ़ोतरी के बारे में चिंता बढ़ गई है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 14 साल के उच्च स्तर 3.15 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि डॉलर इंडेक्स 104 के स्तर से ऊपर चला गया। शुक्रवार को बड़ी बिकवाली के बाद अमेरिकी वायदा भी एक फीसदी नीचे है। इसके अलावा, इस सप्ताह केंद्रीय बैंकों की विभिन्न बैठकों से पहले बाजार अलर्ट मोड पर है। घरेलू स्तर पर, जैसा कि भारत के मुद्रास्फीति के आंकड़े सोमवार को आने वाले हैं, निवेशक आरबीआई की अगली कार्ययोजना को लेकर घबराए हुए हैं। यदि खुदरा मुद्रास्फीति और बढ़ती है और भारत में 8 प्रतिशत के स्तर को पार करती है, तो आरबीआई इस महीने फिर से नीतिगत दरों में वृद्धि कर सकता है। भारत के 10 साल के बेंचमार्क बॉन्ड पर यील्ड सोमवार को 7 बेसिस प्वाइंट बढ़कर 7.59 फीसदी हो गई है।

रुपया नीचे क्यों है?
अमेरिकी मुद्रास्फीति में वृद्धि, दरों में बढ़ोतरी की चिंता और शेयर बाजार में गिरावट का असर रुपये पर पड़ रहा है। विश्लेषकों ने कहा था कि कमजोर फंडामेंटल के कारण आने वाले दिनों में रुपया गिर सकता है। बढ़ी हुई कमोडिटी की कीमतें, विशेष रूप से क्रूड, व्यापार घाटे को और बढ़ा सकती हैं, जो मई 2022 में पहले ही रिकॉर्ड 23.3 बिलियन डॉलर हो गई है। एफपीआई ने रुपये पर दबाव डालते हुए इस साल जनवरी से अब तक भारत से 2.40 लाख करोड़ रुपये निकाले हैं। सुबह डॉलर के मुकाबले रुपया 78 के स्तर से नीचे गिर गया क्योंकि आरबीआई डॉलर की बिक्री नहीं कर रहा था। रुपये में गिरावट से आयात महंगा और निर्यात आकर्षक हो सकता है। 15 जून को एफओएमसी की बैठक से पहले और अधिक कमजोरी दर्ज की जा सकती है। 
कब सुधरेंगे बाजार?
भारतीय बाजार तभी स्थिर होगा जब अमेरिकी बाजार स्थिर होगा और यूएस फेड द्वारा दरों में बढ़ोतरी बंद हो जाएगी। जब एफपीआई वापस आएंगे और फिर से पैसा पंप करना शुरू करेंगा तो बाजार में उछाल आएगा। इसलिए, निवेशक बाजार के रुझान पर स्पष्टता आने तक इंतजार कर सकते हैं। जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा, आईआईपी में 7.1 फीसदी की बढ़ोतरी से यह संकेत मिलता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अच्छा प्रदर्शन कर रही है। विश्लेषकों ने कहा कि अगर निवेशकों के पास लंबी अवधि की निवेश योजना है तो उन्हें निवेशित रहना चाहिए और म्यूचुअल फंड निवेशकों को निवेश को तोड़े बिना अपनी एसआईपी योजना जारी रखनी चाहिए। दूसरी ओर, बड़ा सुधार निवेशकों को आकर्षक स्तरों पर अच्छी गुणवत्ता वाले शेयरों को लेने का मौका देगा। “निवेशकों को कोई भी बड़ी प्रतिबद्धता बनाने से पहले प्रतीक्षा करनी चाहिए और सामने आने वाली स्थिति को देखना चाहिए। खरीदारी केवल ऐसे शेयरों/सेगमेंट तक ही सीमित रहनी चाहिए, जिनकी काफी वैल्यू हो या जिनकी आमदनी अच्छी हो।

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