तुर्की क्यों बना तुर्किए ?

नीरज कुमार दुबे 

वैसे तुर्की पहला देश नहीं है जिसने अपना नाम बदला हो लेकिन जहां तक उसके इस निर्णय की बात है तो आपको बता दें कि राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन का प्रयास था कि उनका देश अपने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक मूल्यों की ओर लौटे।

अक्सर सड़कों के या शहरों के नाम बदलते तो आपने देखे होंगे लेकिन जब कोई देश अपना नाम बदल ले तो हैरत होती है कि आखिर उसने ऐसा क्यों किया। देश अगर तुर्की जैसा सुविधा संपन्न हो तो आपके मन में प्रश्न आयेगा कि आखिर उसने नाम क्यों बदला? जी हाँ, हम आपको बता दें कि तुर्की ने अपना नाम बदल कर तुर्किये रख लिया है। तुर्की के नाम में बदलाव को संयुक्त राष्ट्र ने भी अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है।

वैसे तुर्की पहला देश नहीं है जिसने अपना नाम बदला हो लेकिन जहां तक उसके इस निर्णय की बात है तो आपको बता दें कि राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन का प्रयास था कि उनका देश अपने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक मूल्यों की ओर लौटे। एर्दोगन इसके लिए काफी समय से प्रयास कर रहे थे। उन्होंने तुर्की के नाम में बदलाव करने से पहले देश और विदेश में माहौल बनाना शुरू कर दिया था। इसके लिए पिछले साल दिसंबर में एर्दोगन ने तुर्की की संस्कृति और मूल्यों का बेहतर प्रतिनिधित्व करने के लिए “तुर्किये” शब्द के उपयोग का आदेश दिया। इसके तहत निर्यात उत्पादों पर “मेड इन तुर्की” के बजाय “मेड इन तुर्किये” का उपयोग शुरू किया गया। इसके अलावा तुर्की के मंत्रालयों ने भी आधिकारिक दस्तावेजों में “तुर्किये” का उपयोग करना शुरू कर दिया था। यही नहीं साल 2022 की शुरुआत में तुर्की की सरकार ने नाम बदलने के प्रयासों के तहत एक प्रचार वीडियो भी जारी किया था। इस वीडियो में दुनिया भर के पर्यटकों को प्रसिद्ध स्थलों पर “हैलो तुर्किये” कहते हुए दिखाया गया था।

हम आपको बता दें कि तुर्की का नाम बदलने के पीछे जो सबसे बड़ा कारण बताया जा रहा है वह यह है कि तुर्की नाम के कारण देशवासियों को अक्सर हीन भावना का शिकार होना पड़ता था। दरअसल क्रैम्ब्रिज डिक्शनरी में Turkey से आशय ऐसी चीज से है जो बुरी तरह विफल हो जाता है। इसके अलावा तुर्की नाम इस देश को हमेशा गुलामी की यादें दिलाता था जिसके चलते इस नाम से छुटकारा पाया गया। हम आपको बता दें कि गुलामी के दिनों में तुर्किया को तुर्की कहा जाने लगा था। जब 1923 में यह देश आजाद हुआ तो यहां के लोगों ने अपने देश को तुर्किये बोला लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुर्की नाम ही प्रचलित रहा। इस तरह गुलामी की याद दिलाने वाले नाम से छुटकारा पाने के लिए इस देश ने अपना नाम ही बदल दिया।
इसके अलावा तुर्की के इस कदम को देश की छवि में बदलाव करने और पक्षी, टर्की तथा इसके साथ जुड़े कुछ नकारात्मक अर्थों से अपना नाम अलग करने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है। उल्लेखनीय है कि अंग्रेजी में तुर्की को टर्की कहा जाता है। अंग्रेजी में टर्की का मतलब मूर्ख भी होता है। इसके अलावा टर्की एक ऐसे पक्षी का नाम है जिसको पश्चिमी देशों में खूब खाया जाता है। इस पक्षी को भारत में तीतर कह कर पुकारा जाता है। आप यदि इंटरनेट पर Turkey लिखकर सर्च करेंगे तो तीतर पक्षी की ही तस्वीरें सामने आएंगी। इसके चलते भी तुर्की को कई बार हीन भावना का सामना करना पड़ता था। इसके अलावा तुर्क लोग भी अपने देश को तुर्किये कहना और सुनना पसंद करते हैं। इस तरह जन भावना को देखते हुए वहां की सरकार ने नाम बदलने का फैसला किया। देश का नाम बदल जाने से इस समय वहां हर्ष का माहौल भी देखा जा रहा है।
हम आपको बता दें कि तुर्की पहला देश नहीं है जिसने अपना नाम बदला है। तुर्की से पहले नाम बदलने वाले देशों में नीदरलैंड भी शामिल है। उसने हॉलैंड नाम बदल कर नीदरलैंड कर लिया था। इसके अलावा बर्मा अपना नाम बदल कर म्यांमार, फारस अपना नाम बदल कर ईरान, सीलोन अपना नाम बदल कर श्रीलंका, स्वाजीलैंड अपना नाम बदल कर इस्वातीनी, चेक रिपब्लिक अपना नाम बदल कर चेकिया और मैसेडोनिया अपना नाम बदल कर उत्तरी मैसेडोनिया कर चुके हैं। बहरहाल, तुर्किये नाम पाकर तुर्की इतिहास से जुड़ी शर्मसार करने वाली घटनाओं से तो छुटकारा पा गया लेकिन अब देखना होगा कि क्या यह देश अपनी नीतियों की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनी नकारात्मक छवि को बदलने की दिशा में भी कोई कदम उठाता है?

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