काशी, मथुरा, सोमनाथ विध्वंस से संभाजी, गुरु तेग बहादुर के सिर काटने तक, औरंगजेब की क्रूरता की लिस्ट बहुत लंबी है

अभिनय आकाश

औरंगजेब मजहबी तौर पर कट्टर शासक था जिसके राज में हिंदुओं और सिखों का जबरन धर्म परिवर्तन करवाया गया। औरंगजेब को जब कभी भी याद किया जाएगा तो उसके क्रूरता, मंदिर को तोड़ने, जजिया कर लगाने और सबसे बढ़कर भारतीय समुदाय पर अत्याचार करने के लिए ही याद किया जाएगा।

औरंगजेब को मरे 300 साल से ज्यादा गुजर चुके हैं लेकिन उसकी हुकूमत के किस्से इतने साल बाद भी चर्चा में हैं। हिंदुस्तान में औरंगजेब का मतलब क्रूरता है। उसने भले ही अफगानिस्तान से दक्षिण भारत तक मुगल साम्राज्य का विस्तार किया हो। फिर भी वो अपने वंश का सबसे बदनाम बादशाह रहा है। जिसके शासनकाल में बेहिसाब हिन्दुओं के मारने के साथ मंदिरों को निशाना बनाया गया। औरंगजेब मजहबी तौर पर कट्टर शासक था जिसके राज में हिंदुओं और सिखों का जबरन धर्म परिवर्तन करवाया गया। औरंगजेब को जब कभी भी याद किया जाएगा तो उसके क्रूरता, मंदिर को तोड़ने, जजिया कर लगाने और सबसे बढ़कर भारतीय समुदाय पर अत्याचार करने के लिए ही याद किया जाएगा।  जवाहर लाल नेहरू ने भी 1946 में प्रकाशित अपनी किताब डिस्कवरी ऑफ इंडिया में औरंगजेब को एक धर्मांध और पुरातनपंथी शख्स के रूप में पेश किया। औरंगजेब ने 15 करोड़ हिन्दुस्तानियों पर करीब 48 सालों तक राज किया। उसके शासन के दौरान मुगल साम्राज्य इतना फैला कि पहली बार उसने करीब-करीब पूरे उपमहाद्वीप को अपने साम्राज्य का हिस्सा बना लिया। लेकिन फिर भी हिन्दुओं के प्रति उसकी नफरत ने इस कामयाबी को कभी चमकने नहीं दिया।

संभाजी को इस्लाम कबूलने के लिए मजबूर करते हुए आंखे निकाल ली
शिवाजी की मृत्यु के बाद उत्साहित मुगल बादशाह औरंगजेब को लगता है कि मराठों को हराने का इससे बढ़िया मौका नहीं मिलेगा। उस दौर में सारे षड़यंत्रों से लड़ते हुए आखिरकार शिवाजी के पुत्र सांभाजी महाराज ने मराठा साम्राज्य पर काबिज होने में सफलता पाई थी। संभाजी से नाराज उनका साला गनोजी शिर्के धोखे से अपने जीजा को मुगलों के हवाले कर देता हैं। उन्हें बंधक बनाकर औरंगजेब के सामने पेश किया जाता है। उन्हें कई दिन तक अमानवीय यातनाएं दी जाती हैं। सबसे पहले तो संभाजी महाराज की जीभ काट कर उन्हें रात भर तड़पने के लिए छोड़ दिया गया। फिर लोहे की गर्म सलाखें घोपकर उनकी आंखें तक निकाल ली जाती हैं, लेकिन वे मुगलों के सामने घुटने नहीं टेकेते हैं। अपनी जान और राजपाट बचाने के लिए इस्लाम स्वीकार नहीं करते हैं और धर्म एवं राष्ट्र की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहूति दे देते हैं। औरंगज़ेब ने अपना डर कायम रखने के लिए और हिन्दुओं की रूह कँपाने के लिए संभाजी के सिर को कई शहरों में घुमाया।
अपने भाई दारा शिकोह का सिर कलम करवा दिया
औरंगजेब के क्रूर शासक की छवि इसलिए भी बनी कि उसने सत्ता पाने के लिए अपने ही भाईयों का कत्ल करवा दिया। शाहजहां के चार बेटे थे। दारा शिकोह, शाह शुजा, औरंगजेब, मुराद बख्श। शाहजहां अपने बड़े बेटे दारा शिकोह को अपनी गद्दी सौंपना चाहता था। दारा शिकोह की खूबियों की वजह से पिता शाहजहां उन्हें बेहद पसंद किया करते थे। लेकिन दारा शिकोह के भाई औरंगजेब को ये कतई मंजूर नहीं था। दिल्ली सल्तनत हासिल करने के लिए औरंगजेब ने दारा शिकोह के साथ तीन-तीन युद्ध लड़े और तीनों में उसकी मात हुई। बाद में औरंगजेब ने अपने भाई मुराद बख्श के साथ मिलकर दारा शिकोह को मौत की सजा देकर जबरन बादशाह बन गया। औरंगजेब ने जब साल 1659 में एक भरोसेमंद सिपाही के जरिए दारा शिकोह कलम करवा दिया था तब सिर आगरा में दफ्नाया गया था और धड़ को दिल्ली में। शाहजहांनामा के मुताबिक औरंगजेब से हारने के बाद दारा शिकोह को जंजीरों से जकड़कर दिल्ली लाया गया और उसके सिर को काटकर आगरा फोर्ट भेजा गया, जबकि उनके धड़ को हुमायूं के मकबरे के परिसर में दफनाया गया था। औरंगजेब कितना क्रूर था उसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब 1659 में उसका बड़ा भाई दारा शिकोह पकड़ा गया तो औरंगजेब ने उसे और 14 साल के बेटे शिफिर शिकोह को तपती गड़पी में खुजली की बीमारी से ग्रसित हाथियों पर बैठाकर दिल्ली की सड़कों पर घुमाया था। अपनी महत्वकांक्षा के लिए औरंगजेब ने अपने पिता को साढ़े सात साल तक कैद में रखने से नहीं चूका। आगरा के किले में शाहजहां को नजरबंद करके अपनी हुकूमत की उसने शुरुआत की। अगले 48 सालों तक वो हिंदुस्तान में जमकर अपने अत्याचारों को अंजाम देता रहा।
काशी को लेकर औरंगजेब का फरमान
औरंगजेब को काशी विश्वनाथ की गंगा जमुनी तहजीब बिल्कुल भी रास नहीं आई। जैसे ही उसने राजगद्दी संभाली वैसे ही सबसे पहले काशी की ओऱ रूख किया। 18 अप्रैल को औरंगजेब ने पूरे देश में फैले अपने सभी सूबेदारों को खास फरमान जारी किया। सभी सूबेदार अपनी इच्छा से हिन्दुओं के सभी मंदिरों और पाठशालाओं को गिरा दें। मूर्ति पूजा को पूरी तरह से बंद करवा दें। इस आदेश के बाद 2 सितंबर 1669 को औरंगजेब को खबर दी गई कि काशी के प्रसिद्ध विश्वनाथ मंदिर को गिरा दिया गया है। औरंगजेब द्वारा काशी विश्वनाथ के विध्वंस को लेकर इतिहासकारों में मतभेद नहीं है। औरंगजेब की सबसे प्रमाणिक जीवनी मासिर ए आलमगीरी में भी इस घटना का जिक्र किया गया है। इस बात को इतिहासिक तौर पर भी माना जाता है कि मंदिर तोड़कर ज्ञानव्यापी मस्जिद का निर्माण हुआ और औरंगजेब ने ही मंदिर तोड़ने के आदेश दिए थे। औरंगजेब के जीवन पर लिखी गई सबसे प्रमाणिक किताब मासिर ए आलमगीरी जिसे साकी मुस्ताद खान ने लिखा है। जो मुगलों के दरबारी इतिहासकार थे। साथ में वो मुगल शासक के वक्त फतवे-फरमान और दस्तावेजों के भी गवाह थे। इस किताब में औरंगजेब के द्वरा काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़े जाने की घटना का पूरा जिक्र मौजूद है।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि के आधे हिस्से पर ईदगाह बना दी
1679 में मुगल शासक औरंगजेब के आदेश पर उत्तर भारत में कई जगह ऐतिहासिक मंदिर तोड़े गए। इसके पीछे धार्मिक कारण थे और हिंदुओं की आस्था पर चोट करना इसका मकसद था। इसके अलावा इसके आर्थिक उद्देश्य भी थे, क्योंकि इन मंदिरों में काफी धन संपदा होती थी जिसे औरंगजेब ने लूट लिया। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर को भी उसी समय तोड़ा गया। इसका अभिलेखीय साक्ष्य भी है कि कब ऐसे आदेश दिए गए। औरंगजेब के कोर्ट में एक ‘मुहतसिब’ होता था, जो धार्मिक आचरण को नियंत्रित करता था और उसी की सलाह पर औरंगजेब ने मंदिरों को तोड़ने का अभियान चलाया।’ औरंगजेब की तरफ से जन्मभूमि के आधे हिस्से पर ईदगाह बना दी गई, जो आजतक कायम है।
सोमनाथ मंदिर को दो बार तोड़ने के आदेश जारी किए
औरंगजेब ने अपने शासनकाल में गुजरात के सोमनाथ मंदिर को भी दो बार तोड़ने के आदेश जारी किए। मुस्लिम क्रूर बादशाह औरंगजेब के काल में सोमनाथ मंदिर को दो बार तोड़ा गया- पहली बार 1665 ईस्वी में और दूसरी बार 1706 ईस्वी में। 1665 में मंदिर तुड़वाने के बाद जब औरंगजेब ने देखा कि हिन्दू उस स्थान पर अभी भी पूजा-अर्चना करने आते हैं तो उसने वहां एक सैन्य टुकड़ी भेजकर कत्लेआम करवाया। मुराक़त ए अबुल हसन के मुताबिक अपने शासनकाल के 10-12 सालों में ही औरंगजेब ने हर उस मंदिर को तुड़वा दिया जिसे ईट या मिट्टी से बनाया गया था।
ब्रज संस्कृति को खत्म करने की कोशिश
उत्तर भारत का सुंदर और विशाल गोविंद देव मंदिर में आज भी कट्टरपंथी विचारधारा के निशान मौजूद हैं। मंदिर की सातवीं मंजिल पर जलता हुआ विशालकाय घी का दीपक औरंगजेब को इतना खटका कि उसने चार मंजिल ही तुड़वा दी थीं। इसके बाद औरंगजेब ने मंदिर को खंडित और अपवित्र करने के प्रयास में यहां नमाज पढ़ी और शेष बचे मंदिर पर मस्जिद की संरचनाएं और गुंबद आदि बनवा दिए। हालांकि अंग्रेज कलक्टर ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराकर मस्जिद को हटवाया था। औरंगज़ेब ने ब्रज संस्कृति को खत्म करने के लिए ब्रज के नाम तक बदल डाले थे। उसने मथुरा को इस्लामाबाद, वृन्दावन को मेमिनाबाद और गोवर्धन को मुहम्मदपुर का बना दिया था।

भगवान कृष्ण की दीवानी बेटी को किया कैद
जैबुन्निसा ने किसी कार्यक्रम के दौरान बुंदेला महाराजा छत्रसाल को देखा तो वह उसको अपना दिल दे बैठी। यह बात औरंगजेब को नागवारा हुई क्यों कि महाराजा छत्रसाल को वह अपना दुश्मन मानता था। औरंगजेब ने फटकार लगाकर जैबुन्निसा को चुप करा दिया। महाराजा छत्रसाल को पसंद करने के बाद जैबुन्निसा का दिल शायर अकील खां रजी पर आ गया और दोनों की बेटी की इस मोहब्बत को औरंगजेब बर्दाश्त नहीं कर पाया।  मुलाकात इश्क में बदल गई। औरंगजेब ने उसे 1691 में दिल्ली के सलीमगढ़ किले में कैद करवा दिया गया। और अकील रजी को हाथियों से कुचलवा कर मरवा दिया पिता से नाराज राजकुमारी कैद में श्रीकृष्ण भक्त हो गईं और काफी सारी रचनाएं कृष्ण भक्ति में डूबकर लिखीं। वे किले में कैद होकर भी गजलें, शेर और रुबाइयां लिखती रहीं। 20 सालों की कैद के दौरान उन्होंने लगभग 5000 रचनाएं कीं, जिसका संकलन उनकी मौत के बाद दीवान-ए-मख्फी के नाम से छपा।
अय्याशी के मामले में भी था नं 1
सादगी का दिखावा करने वाला औरंगजेब असल मेंअव्वल दर्जे का अय्याश था। उसने अपने शासन काल में क्रूरता की हद कर दी थी। उसने हिन्दू औरतों पर बहुत अत्याचार किए। उसकी अय्याशी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 1669 में जब उसने मंदिर को गिराने का आदेश दिया था तब कई हिंदु मारे भी गए थे। उसने यह आदेश भी दिया था कि उनकी पत्नियां अपनी। इज्जत बचाने के लिए आत्महत्या ना कर सके।
सिखों के नौवें गुरु तेग बहादुर का हत्यारा
औरंगजेब ने जब कश्मीरी ब्राह्मणों को इस्लाम कबूल करने पर मजबूर किया, तो उन्होंने  सिक्खों के नौवें गुरु तेगबहादुर से मदद मांगी। तेगबहादुर ने इसका विरोध किया तो औरंगजेब ने उन पर भी इस्लाम स्वीकार करने का दबाव डाला। पर गुरु तेगबहादुर जी नहीं झुके। उन्होंने कहा हम शीश कटा सकते हैं, केश नहीं। यह सुनकर वह गुस्से से लाल हो गया और फिर उसने नानक जी का सबके सामने सिर कटवा दिया। इस दिन को सिक्ख आज भी अपने त्यौहारों में याद करते हैं।
देश की जनता पर लगा दिया जजिया कर
औरंगजेब ने हिन्दुओं पर जजिया टैक्स लगाया। जजिया एक अरबी शब्द है, जिसका मतलब टैक्स होता है। औरंगजेब के शासन में जो हिन्दू टैक्स दे सकते थे उनसे 3 रुपये सालाना, मध्यम वर्गीय हिन्दुओं से 6 रुपये और अमीर हिन्दुओं से 12 रुपये सालाना जजिया कर लिया। उस वक्त तीन रुपये की रकम एक महीने की कमाई के बराबर होती थी। औरंगजेब के शासन में हिन्दुओं के तीर्थ पर टैक्स लगाने के साथ-साथ त्योहारों पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया। इस्लाम धर्म को अपने शासन का आधार बनाने से उसकी कट्टर बादशाह के तौर पर इतिहास में छाप ऐसी बनी जो आज तक ताजा है। इसलिए भारत में कोई औरंगजेब की हिमायत करता है को उसे बुरी तरह से तिरस्कार सहना पड़ता है।
औरंगजेब की ये कहानी सुनकर आपके मन में भी ये आया होगा कि कितना क्रूर शासक था, आक्रांता था। सत्ता के नशे में चूर सियासत के लिए अपने भाई तक को नहीं छोड़ा, अपने पिता तक को नहीं छोड़ा। हिन्दुओं पर तो ऐसी बर्बरता की, ऐसा कहर ढाया कि जिसके अनगिणत किस्से हैं।

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