महंगाई को लेकर भारत सहित विश्व के अन्य देशों की हालत क्या है ?

 नीरज कुमार दुबे

आइये आपको विश्व भर में महंगाई के हालात से रूबरू कराने के क्रम में सबसे पहले पड़ोसी देश पाकिस्तान की बात करते हैं। वहां इमरान खान की सरकार पर संकट ही इसलिए आया है क्योंकि पाकिस्तान में महंगाई बेलगाम हो गयी है।

बढ़ती महंगाई के खिलाफ पूरा विपक्ष मोदी सरकार के खिलाफ हमलावर है। देश के विभिन्न राज्यों में विपक्ष के नेता और कार्यकर्ता भाजपा पर महंगाई रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन भी कर रहे हैं। मोदी सरकार वैश्विक हालात को महंगाई का कारण बता रही है तो विपक्ष का कहना है कि सरकार आम आदमी की जेब काटकर अपना खजाना भर रही है और चंद उद्योगपतियों को फायदा पहुँचा रही है। ऐसे में आम आदमी के मन में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक ही है कि सरकार सही बोल रही है या विपक्ष?

कोरोना महामारी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर ऐसा कहर ढाया है कि अमीर देशों में गरीबी बढ़ गयी और गरीब देशों के लिए जीना दुश्वार हो गया है। महामारी थमी और अर्थव्यवस्थाओं ने फिर से पटरी पर दौड़ना शुरू किया तो यूक्रेन पर रूस के युद्ध ने ऐसे हालात पैदा कर दिये कि कोई देश प्रभावित होने से नहीं बचा। ये जो महंगाई आपको भारत में देखने को मिल रही है वह सिर्फ हमारे देश की नहीं बल्कि विश्व की इस समय की सबसे बड़ी समस्या हो गयी है। रूस-यूक्रेन युद्ध से सप्लाई चेन पर असर पड़ा है, तेल की कीमतों में इजाफे के चलते हर चीज की महंगाई बढ़ी है जिससे दुनिया के लगभग सभी देशों की सरकारों को जनता की नाराजगी झेलनी पड़ रही है।
आइये आपको विश्व भर में महंगाई के हालात से रूबरू कराने के क्रम में सबसे पहले पड़ोसी देश पाकिस्तान की बात करते हैं। वहां इमरान खान की सरकार पर संकट ही इसलिए आया है क्योंकि पाकिस्तान में महंगाई बेलगाम हो गयी है। पाकिस्तान में महंगाई ने अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिये हैं जिसके चलते इमरान खान की कुर्सी खतरे में पड़ गयी है। श्रीलंका के हालात सबके सामने ही हैं। अभूतपूर्व आर्थिक संकट के दौरान श्रीलंका में महंगाई बेलगाम हो गयी है। श्रीलंका में हालात ये हैं कि चावल 500 और चीनी 300 रुपये किलो तक बिक रही है। बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल, मालदीव में भी महंगाई चरम पर है।
थोड़ा दक्षिण एशिया से बाहर चलें और पश्चिमी देशों की ओर देखें तो अमेरिका में महंगाई ने 40 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। देखा जाये तो अमेरिकियों को 1982 के बाद से सबसे अधिक महंगाई का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका में मंदी का खतरा मंडरा रहा है जो वहां की सरकार की चिंता बढ़ा रहा है और हर चीज की बढ़ी कीमतों ने वहां आम आदमी की कमर तोड़ कर रख दी है। ब्रिटेन की बात करें तो वहां भी बेतहाशा महंगाई देखने को मिल रही है। बैंक ऑफ इंग्लैंड ने अनुमान जताया है कि सालाना महंगाई की दर इस साल 8.0 फीसदी को पार कर सकती है और अप्रैल में यह 7.25 फीसदी पर रह सकती है। बैंक ऑफ इंग्लैंड ने एक बयान में माना है कि यूक्रेन पर रूस के आक्रमण ने महंगाई के मोर्चे पर दिक्कत और बढ़ा दी है।
जर्मनी की बात कर लें तो वहां भी तीन दशक में महंगाई सबसे ज्यादा देखने को मिल रही है जिससे खाने-पीने की वस्तुओं समेत बुनियादी चीजों और ईंधन के दामों में बड़ा उछाल आने की वजह से लोगों का गुस्सा बढ़ रहा है। जर्मनी में जमा पर बैंक ब्याज दरें घटने से बचत पर जोर देने वाले लोग भी निराश दिख रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में महंगाई से इतना बुरा हाल है कि वहां की सरकार के खिलाफ लोगों की नाराजगी बढ़ती जा रही है। आस्ट्रेलिया में मई में होने वाले चुनावों को देखते हुए वहां की सरकार ने महंगाई को नियंत्रित करने के लिए कुछ उपाय किये हैं जिसके तहत कुछ करों को कम किया गया है। तुर्की में मुद्रास्फीति की दर बढ़कर 20 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई है। तुर्की में ऊर्जा की कीमतें लागतार चढ़ रही हैं। तुर्की सांख्यिकी संस्थान के अनुसार, उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें पिछले महीने 4.81% बढ़ी हैं। महंगाई को काबू में करने के लिए तुर्की के राष्ट्रपति ने करों में कटौती का ऐलान किया है। स्पेन में महंगाई लगभग चार दशकों में सबसे तेज दर से बढ़ी है और उम्मीदों से आगे निकल गई है जिससे जनता बेहाल है। चीन में भी महंगाई बढ़ रही है और कोरोना के चलते कुछ शहरों में लगे लॉकडाउन की वजह से अर्थव्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ा है।

ग्लोबल महंगाई के जिम्मेदार देश रूस का खुद भी महंगाई से बुरा हाल हो गया है। रूस में वार्षिक मुद्रास्फीति 25 मार्च तक बढ़कर 15.66% हो गई, जो सितंबर 2015 के बाद से उच्चतम है। रूस में मुद्रास्फीति पिछले कुछ हफ्तों में तेजी से बढ़ी है क्योंकि रूबल की गिरावट अब तक के सबसे निचले स्तर पर है। रूस में खाद्य उत्पादों से लेकर कारों तक की मांग में तेज वृद्धि है क्योंकि लोगों को लगता है कि आने वाले समय में इनकी कीमत और बढ़ जायेगी। जापान की बात करें तो वहां महंगाई मार्च महीने में रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गई है। यूक्रेन संकट के चलते जापान में ऊर्जा और खाद्य उत्पादों की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। कनाडा में भी बढ़ती महंगाई के बीच माना जा रहा है कि 7 अप्रैल को आने वाले केंद्रीय बजट में सरकार शायद कुछ राहत उपायों की घोषणा कर सकती है। ईरान में महंगाई ने लगभग 60 सालों का, न्यूजीलैंड में 30 सालों और सिंगापुर में लगभग दस सालों का रिकॉर्ड तोड़ा है तो इजराइल, इटली, दक्षिण अफ्रीका, फ्रांस, आयरलैंड, स्पेन, चेक गणराज्य, एस्टोनिया, लिथुआनिया, बेल्जियम, आस्ट्रिया आदि देशों की जनता भी महंगाई से त्राहिमाम कर रही है। यही नहीं खाड़ी देशों में भी महंगाई का असर साफ देखने को मिल रहा है।
बहरहाल, इसमें कोई दो राय नहीं कि सरकारों को गरीब जनता को महंगाई से राहत दिलाने के उपाय करने ही चाहिए। भारत की सरकार ने इस दिशा में क्या किया है यदि इस पर बात कर लें तो हाल ही में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को छह महीने के लिए विस्तार दे दिया गया है ताकि गरीबों को हर माह मुफ्त राशन मिलता रहे। यही नहीं केंद्रीय कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते में तीन प्रतिशत की वृद्धि की गयी है। कई राज्य सरकारों ने भी अपने कर्मचारियों का महंगाई भत्ता बढ़ाया है। लेकिन यह भी एक तथ्य है कि सरकारी कर्मचारियों से ज्यादा संख्या निजी क्षेत्र के कर्मचारियों की है और उन्हें भी राहत मिलनी ही चाहिए। अंत में एक सवाल विपक्ष से भी है जोकि इन दिनों महंगाई के मोर्चे पर मोदी सरकार को घेर रहा है। विपक्ष को यह बताना चाहिए कि जिन राज्यों में वह सत्ता में है वहां महंगाई कम करने के लिए उसने क्या उपाय किये?

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