देश के दुश्मन इतिहासकारों का कमाल : पढ़ाया जाता रहा है भारत में हिंदू विरोधी इतिहास ?


-इंजीनियर श्याम सुन्दर पोद्दार,वीर सावरकर फ़ाउंडेशन                             ———————————————

स्वाधीनता के बाद भारत का इतिहास भारत के उन दुश्मनों ने लिखा जो भारतीयता, हिंदी और हिंदुत्व से घृणा करते थे। उन्होंने मुगलों को हिंदुस्तान के लिए एक वरदान सिद्ध करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया। यह दुर्भाग्यपूर्ण रहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री नेहरू ने इस प्रकार के प्रयासों को अपनी ओर से भरपूर सहयोग और समर्थन दिया। बदकिस्मती से अपने आप को हिंदू मानने वाले नेहरू के लिए मुगलों और अंग्रेजों का इतिहास हिंदू वैभव और गौरव के इतिहास से कहीं ऊपर था।
       नेहरू ने देश का पहला शिक्षामंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद को बनाया। जिन्होंने देश के इतिहास का सत्यानाश कर दिया ।इसके पश्चात हिंदू वैभव और गौरव को मिटाने का षड्यंत्र गहराता ही चला गया । बाद में उनके इस प्रयास को कम्युनिस्टों ने और भी अधिक हवा दी। इन सभी इतिहासकारों ने इतिहास के तथ्यों को इस प्रकार तोड़ मरोड़ दिया कि पाकिस्तान मांगने वाले भी अच्छे लगने लगे अर्थात उनके पाप को भी पुण्य में बदलने का काम देश के दुश्मन इतिहासकारों ने किया।
    वर्तमान प्रचलित इतिहास में इस बात को बार-बार दोहराया गया है कि गांधी को एक सिरफिरे हिंदू नाथूराम गोडसे ने मार दिया था। ऐसा लिखकर यह दर्शाया जाता है कि हिंदू आतंकवादी होते हैं जो एक महात्मा को भी मार देते हैं। जबकि इन इतिहासकारों ने कभी यह नहीं बताया कि मुस्लिम लीग ने 1913 से देश को तोड़ने की बातें कहनी शुरू कर दी थी। इस प्रकार देश को तोड़ने वाले गद्दारों को दुश्मन इतिहासकारों ने माफी के खाने में डालने का काम किया।
   अंत में १९४७ में ये मुस्लिम लीग के नेता कामयाब हुए व देश का विभाजन कराके इस्लामिक राष्ट्र पाकिस्तान का निर्माण कराया।इतिहास का इतना महत्वपूर्ण अध्याय इतिहास की किताबों में जगह ही नही पाये – यह भारत के इतिहास लेखन के साथ क्या अन्याय नही है ? इतिहास लेखन के इस अन्याय को समाप्त कर अविलम्ब भारतीय इतिहास का यह सच पढ़ाने की तुरन्त व्यवस्था  हो। क्या यह सच नही कि भारतवर्ष में ५०० से अधिक रियासतें स्वाधीनता के बाद हिंदुस्तान में मिल गई थीं। इन ५०० से अधिक रियासतों में मात्र ३ रियासत जूनागढ़,भोपाल,हैदराबाद ही मुस्लिम रियासतें थीं अन्य सभी रियासत हिन्दु रियासते थीं। जो इतिहास का सच है कि मराठों व सिखों ने मुग़ल साम्राज्य को समाप्त कर लाल क़िले से क़ुतुबमीनार तक संकुचित कर दिया था।  महाराजा रणजीत सिंह ने गोरी के अफगनिस्तान को भी जीत लिया था। किसी समय भारत पर जीत हासिल कर मुग़ल साम्राज्य बनाने वाले  अकबर को महान क्यों कहा जाता है,? जिस मुग़ल साम्राज्य को मराठों व सिखो ने समाप्त कर दिया महान तो वे हैं। यह सत्य क्यों नही पढ़ाना चाहिये।


   देश के गद्दारों को पुरस्कार और देशभक्तों को तिरस्कार देने का कांग्रेसी धंधा देश की आजादी से पहले ही शुरू हो गया था। जो देश के स्वाधीन होने के पश्चात भी निरंतर जारी रहा। अब समय आ गया है जब हम अपने वास्तविक इतिहास को जान व समझकर और अपनी पीढ़ी को अपने हिंदू वैभव को बताने का काम करें।

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