अपने इतिहास को भूलकर हम एक सफल भविष्य नहीं बना सकते

इराक में आज जो हो रहा है, उससे भी कहीं ज्यादा बर्बर हमलों को हमारे देश ने झेला है. .
मीर कासिम ने सिंध में रात को धोखे से घुस कर एक रात में 50000 से ज्यादा हिन्दुओं का कत्ले आम कर सिंध पर कब्ज़ा किया।
सोमनाथ मंदिर के अन्दर मौजूद 32500 ब्राह्मणों के खून से मुहम्मद गजनवी ने परिसर को नहला दिया था।
सोमनाथ मंदिर में लगी भगवान् की मूर्तियों को मुहम्मद गजनवी ने अपने दरबार और शौचालय के सीढि़यों में लगवा दिया था ताकि वो रोज उनके पैर नीचे आती रहे।
औरंगजेब के इस्लाम कबूल करवाने के खुले आदेश के बाद सबसे ज्यादा तबाही आई। कुछ को जबरदस्ती से मुस्लिम बनवाया गया।
औरंगजेब ने ब्राह्मणों द्वारा इस्लाम कबूल ना करने पर उन्हें गर्म पानी में उबाल कर जिन्दा चमड़ी उतरवाने का फरमान जारी किया। ब्राह्मणों की शिखाएं और जनेऊ जलाकर औरंगजेब ने अपने नहाने का पानी गर्म किया।
मुहम्मद जलालुदीन ने हर हिन्दू राज्य जीतने पर वहां की लडकियों को उठवा दिया जो मीना बाजार और हरम में पंहुचा दी जाती थीं।
अजमेर का सोमेश्वर नाथ शिव मंदिर तोड़कर अजमेर दरगाह खड़ी की गयी. .साथ ही वैष्णव मंदिर तोड़ ढाई दिन का झोपड़ा तैयार किया गया। इनका सबूत है वहां लगी कलाकृतियां जिस पर हिन्दू देवी देवता स्वास्तिक आदि बने हुए हैं।
अलाउद्दीन खिलजी की सेना से धरम और कुल की रक्षा करने के लिए चित्तौड़ की रानी पद्मिनी और 26000 राजपूत वीरांगनाओं ने अग्नि कुंड में कूदकर जौहर प्रथा निभाई।
बहादुर शाह जफ़र की चित्तौड़ पर आक्रमण के बाद फिर मुगलों से धरम और स्वाभिमान रक्षा के लिए चितौड़ की रानी कर्णावती ने 18000 राजपूत स्त्रियों के साथ अग्निकुंड में कूद जोहर करना चाहा पर लकड़ी कम पड़ने के कारन बारूद के ढेर के साथ वीरांगनाओ ने खुद को उड़ा दिया।
मुहम्मद जलालुदीन के आक्रमण पर चित्तौड़ में फिर महारानी जयमल मेड़तिया ने 12000 राजपूत स्त्रियों के साथ अग्निकुंड में कूद जोहर किया।
एक समय था अरब के पर्शिया से लेकर इंडोनेशिया तक हिन्दू धरम अनुयायी थी, कितने करोड़ लाखो की लाशे बिछा दी गयी, कितनी ही स्त्रियों ने बलिदान दिए, कितने लाखो मन्दिर टूटे, कितने तरह के जुल्म हए तब कही आज हम हिन्दू हुए हें।
अपने इतिहास को भूलकर हम एक सफल भविष्य नहीं बना सकते।

सिन्धू गुप्ता

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