मुसलमानों का पक्का ईमान ?


मुसलमान लगों के सामने अक्सर यह कहते हैं कि ,हम अपने ईमान के पक्के हैं ,हमारा इमान पुख्ता है ,हम ईमान से समझौता नहीं कर सकते .तो लोग इसे भूल से इसे मुसलमानों की ईमानदारी( Honesty )समझ लेते हैं .वैसे इमान का अर्थ विश्वास (faith ,Belief ,Creed )भी होते हैं लेकिन बहुत कम लोग मुसलमानों के इमान का सही मतलब नहीं जानते हैं ,और धोखा खा जाते हैं .
यहाँ पर आपको प्रमाण सहित मुसलमानों के ईमान का सही नमूना दिया जा रहा है .औरइसका कारण बताया जा रहा है कि मुसलमान क्यों कहते है ,कि हमारा ईमान पक्का है .थोड़े से नमूने देखिये –
1-ईमान में यकीन (belief in Iman)
अपने बाप की ह्त्या करके माँ से सम्भोग करने से ईमान में कमी नहीं होगी
having sex with one’s mother and murdering one’s father does not lessens one’s faith
वकी ने कहा है ,एक बार सुफ़यान अल सवरी,शुरयाक अल हसन बिन सालेह ,इब्ने अबी लैला ने इमाम अबू हनीफा को बुलाया .और उनके आने पर सवाल किया यदि कोई व्यक्ति अपने बाप को क़त्ल करके अपनी माँ से सम्भोग करे ,और बाप की खोपड़ी में शराब भर कर पिए ,तो आप ऐसे व्यक्ति को क्या कहेंगे .इमाम ने कहा -वह मोमिन है (यानी ईमान वाला है )
(यही कारण है कि हरेक कुकर्म करने बाद भी मुसलमान खुद को ईमान वाला कहते हैं और कहते हैं हम ईमान के पक्के हैं )
We read in Tarikh Baghdad, Volume 13 page 378:

حدثنا وكيع قال اجتمع سفيان الثوري وشريك والحسن بن صالح وبن أبي ليلى فبعثوا إلى أبي حنيفة قال فأتاهم فقالوا له ما تقول في رجل قتل أباه ونكح أمه وشرب الخمر في رأس أبيه فقال مؤمن
(अरबी में लिखा है ” रजल कतल अबाहु व् नकह उम्महु व शरब अल खमर फी रास अबीहि )

Wakee narrated that Sufyan al-Thawri, Shurayk, al-Hassan bin Saleh, Ibn Abi Layla gathered and invited and invited Abu Hanfia. When Abu Hanifa arrived, they asked: ‘What is your opinion about a man who killed his father, had sexual intercourse with his mother and drank alcohol in his father’s skull?’ He replied: ‘He is Momin’.

2-मुसलमान जूतों की इबादत कर सकते हैं
(Muslims can worship a shoe)
तारीखे बगदादी में याहया बिन सईद ने लिखा है कि ,इमाम अबू हनीफा ने कहा है ,गर कोई मुसलमान की नजदीकी हासिल करने लिए अपने जूतों की पूजा करे तो इसमे कोई गुनाह नहीं है (यानी इमान पक्का रहेगा )
( फिर मुसलमान मूर्ति पूजा के कारण हिन्दुओं को काफ़िर क्यों कहते हैं ,मूर्तिपूजा जूता पूजा से अच्छी है )
We read in Tarikh Baghdad, Volume 15 page 509:

حدثنا يحيى بن حمزة وسعيد يسمع ، أن أبا حنيفة قال : لو أن رجلا عبد هذه النعل يتقرب بها إلى الله ، لم أر بذلك بأسا

Yahya bin Saeed said: ‘Abu Hanifa said that if anyone worships this shoe in order to get close to Allah (swt), it is not a sin’

3- अबूबकर और इब्लीस (शैतान )ईमान में बराबर हैं
(Abu Bakar and Iblis were equal in faith)
तारीखे बगदादी में इमाम अबू हनीफा ने लिखा है कि मुहम्मद के ससुर और पहले खलीफा अबूबकर सिद्दीकी का इमान इब्लीस (शैतान )के बराबर था
(जब मुसलमानों का पहला खलीफा ही इमान के मामले में शैतान के बराबर था तो दुसरे मुसलमानों का इमान कैसा होगा )

We read in Tarikh Baghdad, Volume 13 page 376:

سمعت أبا حنيفة يقول أيمان أبي بكر الصديق وإيمان إبليس واحد
(अरबी में है ” ईमान अभी बकर असिद्दीक वल इब्लीस वाहिद ”
“Imam Abu Hanifa said that Abu Bakr al-Sidiq and Iblis were equal in Iman”.
4-सहाबी रसूल की पत्नी पर नजर रखते थे
अल दुर्र अल मंसूर में लिखा है कि मुहम्मद का एक सहाबी “तल्हा” (साथी )मुहमद की पत्नी पर नजर रखता था .और मुहम्मद की मौत के बाद उस से शादी का इरादा रखता था .
Sahabi Talha was eying the wife of the Holy Prophet with the intention of marrying her after His death
कतदा ने कहा है कि सहाबी तल्हा बिन उबैदुल्लाह कहते थे कि अगर रसूल मर जाये तो मैं उसकी पत्नी आयशा से शादी कर लूंगा (इसके बाद ही कुरान में यह आयत लिखी गयी थी ,कि रसूल परेशान करना ठीक नहीं है )
( जो मुसलमान अपने रसूल की मौत के बाद उसकी पत्नी से शादी का इरादा रखतेहों वह उस रसूल पर इमान कैसे रखते होंगे )

We read in Al-Dur al-Manthur, Volume 6 page 644:

وأخرج عبد الرزاق وعبد بن حميد وابن المنذر عن قتادة رضي الله عنه قال : قال طلحة بن عبيد الله : لو قبض النبي صلى الله عليه و سلم تزوجت عائشة رضي الله عنها فنزلت وما كان لكم أن تؤذوا رسول الله
Qutada may Allah be pleased with said: ‘Talha bin Ubaidullah said:
‘If the prophet (pbuh) passes away, I will marry Ayesha’.
Thus the verse ‘{ and it does not behove you that you should give trouble to the Messenger of Allah,}’ was revealed’.

5-मुआविया अपनी माँ के जननांग की तारीफ़ से से खुश हो गया
(Muawiyah tolerated a person praising his mother’s genitalia)
शेख मुहम्मद बिन कासिम बिन याकूब ने लिखा है ,कि पांचवे खलीफा मुआविया अपने शांत स्वभाव के लिए प्रसिद्ध है .कोई उसे गुस्सा नहीं दिला सकता था .यही बात देखने के लिए एक व्यक्ति मुआविया के पास गया और बोला ,मैं तुम्हारी माँ से शादी करना चाहता हूँ ,क्योंकि उसकी योनी बड़ी ,और मजेदार है .मुआविया बोला इसीलिए तो मेरा बाप मेरी माँ की योनी को चाहता है ,फिर मुआविया ने खजांची से कहा इस आदमी को एक हजार सिक्के देदो ,जिस से यह अपने लिए गुलाम लड़की खरीद सके .
( मुसलमान कहते हैं की हम अल्लाह के आलावा किसी की भी तारीफ नहीं सुन सकते ,चाहे वह देश ही हो ,यह हमारा इमान हमारा ईमान है .लेकिन खलीफा अपनी माँ की योनी की तारीफ सुन कर इनाम दे रहा है ,क्या इसी को ईमान कहते हैं )

Sheikh Muhammad bin Qasim bin Yaqub (d. 940 H) records in his book Rawudh al-Akhbar al-Muntakhab min Rabee al-Abrar, pages 220-221:
“وكان معاوية بن أبي سفيان (رضي) الشهيرة لمزاجه بارد ولا يمكن لأحد أن يجعله غاضبا وهكذا ، شخص واحد ادعى أنه سيجعله غاضبة ذهب اليه (معاوية) ، وقال :’ أود أن أطلب منكم أن يتزوج أمك لي لأنها كبيرة المهبل تذوق الحلو “. فأجاب معاوية بن أبي سفيان،’ وهذا هو السبب والدي يحبها. معاوية بن أبي سفيان ثم أمر له امينا للصندوق لاعطائه 1000 النقود بحيث انه قد يشتري لنفسه فتاة الرقيق

“Muawiyah (ra) was famous for his cool temperament and no one could make him angry. Thus, one person claimed that he would make him angry. He went to him (Muawiyah) and said: ‘I would like to ask you to marry your mother to me because she had a large sweet tasting vagina.’ Muawiyah replied, ‘That is why my father loved her’. Muawiyah then ordered his treasurer to give him 1000 coins so that he might buy a slave girl for himself”
. Rawudh al-Akhbar al-Muntakhab min Rabee al-Abrar, pages 220-221

6-सहाबी अमरू बिन आस ने जान बचाने के किये अपने चूतड पेश कर दिए
(Sahabi Amro bin al-Aas offered his buttocks to his enemy in order to save his life)

एक बार अली ने अमरू बिन आस पर हमला किया और उस पर भाला फेका ,जो नीचे गिर गया .अमरु जमीन पर गिर गया और अली के सामने अपने चूतड (anus )कर दिया .अली वापस लौट गए .लोग बोले यह अमरू बिन आस है .अली ने कहा जब इसने अपने चूतड(anus ) मुझे दिखाया तो मुझे रहम आ गया .जब अमरू बिन आस मुआविया के पास गया तो मुआविया ने कहा तुम अल्लाह के साथ अपने चूतड (anus )की भी तारीफ़ करो ,जिसके कारण जान बच गयी .
( लोगों ने अपने धर्म ईमान के किये सब कुछ त्याग कर दिया ,लेकिन मुसलमान सिर्फ अपनी anus के सहारे जान बचा लेते है .और इसके लिए अल्लाह के साथ anus की तारीफ तरते हैं , इसीको ईमान कहते हैं .
Sahabi Amro bin al-Aas offered his buttocks to his enemy in order to save his life
سقط عمرو يوم واحد هاجم علي عمرو بن العاص، وقال انه رمى الرمح وعمرو سقط على الأرض ، على الأرض ، وأنه يتعرض له ثم الأرداف. [قال شخص] ثم تحولت بعيدا علي وجهه : “كان هذا عمرو بن العاص”. ردت علي : “لقد أراني شرجه، وهذا جعلني رحيم له. وقال معاوية بن عمرو العاص عندما عاد : “يجب بحمد الله والشرج الخاص’
One day Ali attacked Amro bin al-Aas, he threw a spear and Amro fell to the ground, Amro fell to the ground and he then exposed his buttocks. Ali then turned away his face, [people said]: ‘This was Amro bin Aas’. Ali replied: ‘He showed me his anus and this made me merciful to him’. When Amro ibn Aas returned, Mu’awiya said: ‘You should praise Allah and your anus’
We read in Al-Bidayah wa al-Nihayah, Volume 7 page 293:

इतना पढ़ने बाद आपको पता चल गया होगा कि जब आतंकवादी इतने गुनाह करते हैं ,तो मुल्ले मौलवी ,या मुसलमान उसका विरोध क्यों नहीं करते .क्योंकि बड़े से बड़ा पाप करने पर भी मुसलमानों का इमान ज्यों का त्यों बना रहता है .उनको अपने किये पर कोई पश्चाताप क्यों नहीं होता .
अब आगे से मुसलमानों के इमान पर भरोसा कभी न करें !
प्रबुद्ध पाठकों से निवेदन है कि इस लेख को ध्यान से पढ़ें नहीं तो मेरी मेहनत व्यर्थ हो जाएगी

(87/57)
Brij Nandan Sharma

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