कीव, रूस ,बेलारूस और यूक्रेन के बारे में

 अभिनय आकाश

किसी भी भूभाग को समझने के लिए वहां के जल, जंगल, जमीन के मिजाज को समझना जरूरी होता है। यूक्रेन पर आक्रमण से पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन को एक फर्जी देश के रूप में वर्णित किया और कहा कि इसका कोई इतिहास, पहचान नहीं है।

रूस और यूक्रेन के मध्य युद्ध का हफ्ता भर गुजर गया है। यूक्रेन पर रूसी हमले के 24 घंटे में ही खेल खत्म होने का सपना देख रहे लोग तो हमले के दिन से ही पुतिन की आसान जीत की भविष्यवाणी भी कर रहे थे। लेकिन कीव का इतिहास तो कुछ और ही कहता है। कीव ने रूसी सेना के सामने सरेंडर करने की बजाय अपनी बर्बादी को चुना। कीव से लेकर खारकीव तक बम गोले बरस रहे हैं। लेकिन इन सब के बीच सबसे बड़ा सवाल कि क्या रूस कीव को जीत सकता है? रूस कीव को जीत भी ले तो क्या वो उस पर कब्जा करके जबरन उसे रख सकता है? राष्ट्रपति पुतिन को ये भलि-भांति ज्ञात है कि दोनों ही मामलों में परिस्थितियां रूस के पक्ष में नहीं है। किसी भी भूभाग को समझने के लिए वहां के जल, जंगल, जमीन के मिजाज को समझना जरूरी होता है। यूक्रेन पर आक्रमण से पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन को एक फर्जी देश के रूप में वर्णित किया और कहा कि इसका कोई इतिहास, पहचान नहीं है। पुतिन के आधुनिक यूक्रेन पूरी तरह से रूस द्वारा बनाया गया था, विशेष रूप से बोल्शेविक, कम्युनिस्ट रूस द्वारा यूक्रेन का गठन किया गया था। रूसी राष्ट्रपति भले जो भी कहें लेकिन इतिहास बताता है कि यूक्रेन लंबे वक्त तक एक आज़ाद मुल्क कभी रहा ही नहीं पर किसी आक्रमणकारी को लंबे समय तक अपने यहां टिकने भी नहीं दिया। ऐसे में आइए आपको बताते हैं कि क्या है यूक्रेन का इतिहास और इन सबमें कीवियन रूस की अहमियत को समझना बहुत जरूरी है। 

क्षेत्र, जनसांख्यिकी, अर्थव्यवस्था
यूक्रेन पूर्वी यूरोप में स्थित एक देश है। इसकी सीमा पूर्व में रूस, उत्तर में बेलारूस, पोलैंड, स्लोवाकिया, पश्चिम में हंगरी, दक्षिण पश्चिम में रोमानिया और माल्दोवा और दक्षिण में काला सागर और अजोव सागर से मिलती है। यह रूस के बाद यूरोप का सबसे बड़ा देश है, जिसका क्षेत्रफल 603,550 वर्ग किमी या महाद्वीप का लगभग 6% है। बेशक, यूक्रेन रूस से बौना है, जो लगभग 4 मिलियन वर्ग किमी और यूरोप के 40% हिस्से में फैला है। जुलाई 2021 में यूक्रेन की आबादी 43.7 मिलियन आंकी गई थी। इसमें से 77.8% यूक्रेनी जातीयता का था और 17.3% रूसी था। सीआईए वर्ल्ड के 2001 में किए अनुमान के अनुसार देश में यूक्रेनी बोलने वाले 67.5% और रूसी बोलने वाले 29.6% आबादी है। रूसी बोलने वाले ज्यादातर पूर्व में रहते हैं, रूस के साथ सीमा के करीब, जहां रूसी सरकार ने आठ साल तक सशस्त्र विद्रोह को प्रोत्साहित करने और बनाए रखने के बाद, इस सप्ताह दो स्वतंत्र गणराज्यों को मान्यता दी, जो कि अपरिहार्य युद्ध का संकेत था। सकल घरेलू उत्पाद और प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय के मामले में यूक्रेन यूरोप का सबसे गरीब देश है। इसमें लौह अयस्क और कोयले के भंडार हैं, और मक्का, सूरजमुखी तेल, लौह और लौह उत्पादों और गेहूं का निर्यात करता है। एशिया प्रशांत क्षेत्र में भारत यूक्रेन का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है। भारत से यूक्रेन का प्रमुख आयात फार्मास्युटिकल उत्पाद है।
यूक्रेन का प्रारंभिक इतिहास
राष्ट्रपति पुतिन जिस अखंड रूस की परिकल्पना लिए वर्तमान समय में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमीर जेलेंस्की को अपनी राह का सबसे बड़ा कांटा मान रहे हैं। उस जमीन के हिस्से का राजा-रजवाड़ों का 1400 साल पुराना इतिहास है। उस वक्त न तो रूस हो या यूक्रेन पूरे विशालकाय भू भाग को कीवियन रूस के नाम से जाना जाता था। माना जाता है कि रूस शब्द ओल्ड नॉर्स का टर्म है। रूस शब्द का अर्थ होता है जो चप्पू से नाव खेता है। ओवेग नामक राजा ने अपनी शक्ति के बल पर 879 ईं में कीवियन रूस पर कब्जा जमा लिया। 10वीं और 11वीं शताब्दी में कीवन रस अपने सबसे बड़े आकार और शक्ति पर पहुंच गया। 988 ईस्वी में, कीव के ग्रैंड प्रिंस, व्लादिमीर (वलोडिमिर) द ग्रेट ने ईसाई धर्म को राज्य धर्म बना दिया। कीवन रस का शिखर यारोस्लाव द वाइज़ के अधीन आया, जिसने 1019-54 तक शासन किया। बेलारूस, रूस और यूक्रेन सभी कीवियन रूस को ही अपना सांस्कृतिक पूर्वज मानते हैं। बेलारूस और रूस ने तो किवियन रूस से ही अपना वर्तमान का नाम हासिल किया है। 
मंगोलों का हमला और कीवियन रूस का पतन 
कीव में सबकुछ सही और सुचारू ढंग से चल रहा था। लेकिन 13वीं शताब्दी के मध्य में मंगोल यहां दस्तक दे चुके थे। 1240 में बाकू खान के नेतृत्व में हुए हमले ने कीव को बर्बाद कर दिया। बीजान्टिन साम्राज्य के पतन के कारण व्यापार में गिरावट से कमजोर हुआ कीवन रूस’ मंगोल के हमले के तहत अलग हो गया। कीवियन रूस के पतन के बाद इस क्षेत्र में जिस शासन का जन्म हुआ उसका केंद्र बिंदु मॉस्को रहा। इसे ग्रैंड डची ऑफ मॉस्को के नाम से जाना जाता था। रशियन ऑर्थोडॉक्स चर्च की सहायता लेकर राज्य ने तब मंगोलों को पराजित किया था। 
जार का शासन
रूस के सम्राट को जार कहा जाता था। इवान चतुर्थ के शासनकाल में रूसी साम्राज्य का विस्तार हुआ। जब इवान को जार का जात पहनाया गया तो रूस समते संपूर्ण विश्व को एक संदेश दिया गया कि रूस अब अब महज एक छोटा राज्य नहीं बल्कि एक बड़ा साम्राज्य बन चुका है। जिसका शासक जार यानी इवान चतुर्थ है। वहीं देश का सर्वोच्च शासक है जिसकी इच्छाओं पर कोई सवाल नहीं उठा सकता। उसने काज़ान, आस्त्राख़ान, और मध्य साइबेरिया में स्थित सिबिर को भी जीत कर रूस में मिला लिया। इस तरह से रूस एक बड़ा साम्राज्य बन चुका था, जिसे ग्रेट रशियनल एंपायर कहा गया। इवान ने अपने साम्राज्य का विस्तार करने के दौरान कई लड़ाईयां लड़ीं एक तरफ कजान औऱ आस्ट्रखान के मंगोलों को हराकर रूस में मिलाया। वहीं वोल्गा और यूरल्स को जीतकर साइबेरिया की विशाल भूमि तक अपना विजयी पताका फहरा दिया। उस वक्त क्रीमिया ऑटोमन साम्राज्य का अंग बन गया। दूसरी तरफ 1558 से 1583 तक रूस को स्वीडन और पोलिश लिथुआनियन राष्ट्मंडल के खिलाफ लिवोनीयन युद्ध में हार का सामना करना पड़ा। दशकों तक क्रीमिया के ततार मध्य रूस पर हमला करते रहे। सन 1571 में उन्होंने मॉस्को पर सबसे बड़ा हमला कर वहां सब-कुछ तहस-नहस कर दिया और आग लगा दी। इस घटना के लगभग एक सदी बाद आधुनिक यूक्रेनी राष्ट्रीय पहचान की शुरुआत का पता लगाया जा सकता है।

पोलैंड पर हमला और यूक्रेन 
1648 में यूक्रेनी नेता हेतमांटे बोहदान खमेलनित्सकी ने पोलैंड के खिलाफ विद्रोह किया और कीव पर नियंत्रण कर लिया और यूक्रेनी राज्य की स्थापना की जो आज का मध्य यूक्रेन है। हालांकि, लगभग एक सदी के बाद रूस की महारानी कैथरीन द ग्रेट (1762-96) ने हेतमांटे के शासन को सामप्त कर पूरे यूक्रेनी क्षेत्र को रूसी साम्राज्य में समाहित कर लिया। रूसीकरण की ज़ारिस्ट नीति ने यूक्रेनियन सहित जातीय पहचान और भाषाओं का दमन किया। हालांकि रूसी साम्राज्य के भीतर, कई यूक्रेनियन समृद्धि और बड़े पदों पर पहुंचे, और रूस के अन्य हिस्सों में बसने के लिए चले गए। प्रथम विश्व युद्ध में 3.5 मिलियन से अधिक यूक्रेनियन रूसी साम्राज्य के पक्ष में लड़े, लेकिन एक छोटी संख्या ने ऑस्ट्रो-हंगेरियन के साथ ज़ार की सेना के खिलाफ लड़ाई लड़ी।
यूएसएसआर के हिस्से के रूप में यूक्रेन
युद्ध के कारण ज़ारिस्ट और ओटोमन साम्राज्य दोनों का अंत हो गया। मुख्य रूप से कम्युनिस्ट के नेतृत्व वाले यूक्रेनी राष्ट्रीय आंदोलन के रूप में उभरा, कई छोटे यूक्रेनी राज्य उभरे। 1917 की अक्टूबर क्रांति में बोल्शेविकों के सत्ता में आने के महीनों बाद, एक स्वतंत्र यूक्रेनी पीपुल्स रिपब्लिक की घोषणा की गई, लेकिन सत्ता के विभिन्न दावेदारों के बीच एक गृहयुद्ध जारी रहा, जिसमें यूक्रेनी गुट, अराजकतावादी, ज़ारिस्ट और पोलैंड शामिल थे। 1922 में, यूक्रेन सोवियत सोशलिस्ट रिपब्लिक (USSR) संघ का हिस्सा बन गया।
सोवियत पतन के बाद
1991 में यूएसएसआर का विघटन हो गया। यूक्रेन में आजादी की मांग कुछ साल पहले से बढ़ रही थी, और 1990 में, 300,000 से अधिक यूक्रेनियन ने स्वतंत्रता के समर्थन में एक मानव श्रृंखला बनाई और छात्रों की तथाकथित ग्रेनाइट क्रांति ने एक नए समझौते पर हस्ताक्षर को रोकने की मांग की। 24 अगस्त, 1991 को, राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव को हटाने और कम्युनिस्टों को सत्ता में बहाल करने के लिए तख्तापलट की विफलता के बाद, यूक्रेन की संसद ने देश के स्वतंत्रता अधिनियम को अपनाया। इसके बाद, संसद के प्रमुख लियोनिद क्रावचुक यूक्रेन के पहले राष्ट्रपति चुने गए। दिसंबर 1991 में, बेलारूस, रूस और यूक्रेन के नेताओं ने औपचारिक रूप से सोवियत संघ को भंग कर दिया और स्वतंत्र राज्यों के राष्ट्रमंडल (सीआईएस) का गठन किया। हालांकि, यूक्रेन की संसद, वेरखोव्ना राडा ने कभी भी परिग्रहण की पुष्टि नहीं की, इसलिए यूक्रेन कानूनी रूप से कभी भी सीआईएस का सदस्य नहीं था।
कुल मिलाकर कहा जाए तो रूस, बेलारूस और यूक्रेन पूर्वी यूरोप में कीवियन रूस जिन्हें ईस्ट स्लानियन की प्रजाति का माना जाता है वो ऐतिहासिक रूप से भी एक रहे हैं। रूस की जिद है कि यूक्रेन दोस्त देश बनकर रहे और अमेरिका व उसके सहयोगी इसे पोलैंड की तरह आजाद लोकतांत्रिक देश के नाम पर नाटो का हिस्सा बनाने की चाह में है। देखते ही देखते बात युद्ध और मरने-मारने पर आ गई है। तो आज हमने आपको यूक्रेन के इतिहास के बारे में बताया। 

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