दक्षिण कोरिया के नए राष्ट्रपति यूं सुक-योल और उनकी प्रस्तावित नीतियां

 अभिनय आकाश

दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए हुए चुनाव के बाद यूं सुक-योल ने जीत दर्ज कर ली है। यानी अब दक्षिण कोरिया के नए राष्ट्रपति बन गए हैं। उदारवादी सत्तारूढ़ पार्टी के उम्मीदवार और रूढ़िवादी पूर्व अभियोजक के बीच मुकाबला काफी कड़ा रहा।

10 दिसंबर की तारीख यानी चुनावी नतीजों के आने का दिन। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे आ रहे थे और बीजेपी के चेहरे की मुस्कान खिलखिलाहट में तब्दिल होती जा रही थी। लेकिन भारत से लगभग 5 हजार किलोमीटर दूर एक और चुनाव के नतीजे आ रहे थे। पूर्वी एशिया में स्थित कोरियाई प्रायद्वीप के दक्षिणी अर्धभाग को घेरता देश जिसे हम दक्षिण कोरिया के नाम से जानते हैं। दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए हुए चुनाव के बाद यूं सुक-योल ने जीत दर्ज कर ली है। यानी अब दक्षिण कोरिया के नए राष्ट्रपति बन गए हैं। उदारवादी सत्तारूढ़ पार्टी के उम्मीदवार और रूढ़िवादी पूर्व अभियोजक के बीच मुकाबला काफी कड़ा रहा। लेकिन आखिरकार मुख्य विपक्षी पीपल पावर पार्टी के 60 वर्षीय यूं ने चुनाव में 48.6 प्रतिशत वोट पाकर सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक पार्टी के ली जे-म्युंग को राष्ट्रपति की दौड़ से बाहर कर दिया। डेमोक्रेटिक पार्टी को 47.8 प्रतिशत वोट मिले थे। यूं सुक-योल की जीत के बाद बधाईयों का सिलसिला भी शुरू हुआ जो अक्सर किसी भी राजनेता की चुनावी जीत के बाद चलता है। लेकिन खास बात ये रही कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूं सुक-योल को देश का नया राष्‍ट्रपति चुने जाने पर बृहस्पतिवार को उन्हें बधाई दी। साथ ही, कहा कि वह दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और विस्तार व मजबूती देने के लिए उनके साथ मिलकर काम करना चाहते हैं। 

पीएम मोदी ने किया ट्वीट
पीएम मोदी ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘मैं राष्ट्रपति पद के लिए चुने गए यूं सुक-योल को गर्मजोशी से बधाई देता हूं। मैं उनके साथ मिलकर दोनों देशों के बीच की विशेष राजनीतिक साझेदारी को आगे और विस्तार व मजबूती देने के काम करने को उत्सुक हूं।’’ 
मई में संभालेंगे कार्यकाल
यूं सुक-योल मई में राष्ट्रपति पद और दुनिया की 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के नेता के तौर पर पांच साल का कार्यकाल संभालेंगे। ली और यून के बीच हाल के इतिहास में सबसे कटु राजनीतिक प्रचार अभियान चला। हाल में दोनों इस पर सहमत हुए कि अगर वे जीत गए तो अन्य के खिलाफ राजनीति से प्रेरित जांच नहीं कराएंगे। आलोचकों का कहना है कि किसी भी उम्मीदवार ने इस पर स्पष्ट रणनीति पेश नहीं की कि वे उत्तर कोरिया और उसके परमाणु हथियारों के खतरे से कैसे निपटेंगे।

जापान की गुलामी से आजादी और कोरिया का विभाजन
सबसे पहले आपको थोड़ा इतिहास में लिए चलते हैं। कोरिया की कहानी शुरू होती है उस दौर से जब वहां सिला राजवंश का शासन हुआ करता था। 900 साल के सिला शासन काल में कोरियाई द्वीप चीन और जपान से अलग दुनिया के नक्शे पर अपनी अलग पहचान रखता था। 20वीं सदी के दौरान सिला राजवंश की पकड़ कोरिया से ढीली हुई और 1910 में जापान ने इस पर कब्जा कर लिया। 1939 से 1945 तक चले दूसरे विश्व युद्ध में अमेरिकी दुश्मनी जापानियों को भारी पड़ी और इस युद्ध में बुरी तरह हारने के साथ ही जापान हथियार डालने पर मजबूर हुआ। इसी घटना ने कोरिया के 36 सालों की गुलामी से आजाद होने के दरवाजे खुल गए। कोरिया को जापान से आजादी तो मिल गई पर जापान के कोरिया छोड़ते ही कोरिया में गृहयुद्ध जैसे हालात बन गए। आज़ादी के लिए बने गुट अब दो अलग अलग पावर सेंटर में बंट गए थे। कोरिया के उत्तरी हिस्से पर अपना कब्ज़ा जमाए किम इल संग के कम्युनिस्ट गुट को सोवियत संघ का समर्थन हासिल था। जिसके बाद कोरिया का विभाजन हो गया और एक उत्तर कोरिया कहलाया और दूसरा दक्षिण कोरिया के नाम से जाना गया। अब बात वर्तमान यूं सुक-योल की करते हैं।
क्रूर तानाशाह का गुणगान 
कई पर्यवेक्षकों और कुछ प्रकाशनों ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यून के बीच समानताएं बताई हैं। विशेष रूप से उनकी बोलने की शैली। विश्लेषकों का मानना ​​है कि घरेलू स्तर पर दक्षिण कोरिया में राजनीतिक बदलाव देखने की गहरी इच्छा थी। लेकिन कुछ विशेषज्ञों का मानना ​​​​है कि यून ने जिस मामूली अंतर से जीत हासिल की, वह इस बात का संकेत है कि दक्षिण कोरिया का राजनीतिक स्पेक्ट्रम वास्तव में कितना ध्रुवीकृत हो गया है। अभियान के दौरान, यूं द्वारा सबसे गंभीर रूप से आलोचना की गई टिप्पणियों में से एक में मतदाताओं सहित कई पर्यवेक्षकों ने पूर्व राष्ट्रपति चुन डू-ह्वान, एक सैन्य तानाशाह की प्रशंसा के रूप में व्याख्या की, जो 1980 के दशक में लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों के क्रूर व्यवहार के लिए जाने जाते थे। , जिसके लिए पिछले साल 90 साल की उम्र में च्युन ने अपनी मृत्यु तक कभी माफी नहीं मांगी। कोरिया हेराल्ड की एक रिपोर्ट ने यूं को चुनाव प्रचार के दौरान यह कहते हुए उद्धृत किया कि ऐसे कई लोग थे जो मानते थे कि “सैन्य तख्तापलट” को छोड़कर चुन ने “राजनीति में अच्छा किया”। हालांकि विद्रोह बाद में यून को इन टिप्पणियों के लिए माफी मांगने के लिए मजबूर होना पड़ा।

लिंग नीतियां
चुनाव प्रचार के दौरान, यूं ने लैंगिक समानता मंत्रालय को खत्म करने का वादा किया था और देश की कम जन्म दर के लिए दक्षिण कोरिया में नारीवाद और महिलाओं के अपने अधिकारों के बारे में अधिक मुखर होने का आरोप लगाया था।दक्षिण कोरिया विकसित देशों में महिलाओं के अधिकारों पर सबसे खराब रिकॉर्ड वाला देश है। देश में महिलाओं को अपने घर के अंदर और साथ ही बाहर विभिन्न रूपों में हिंसा और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि देश के कानून लड़कियों और महिलाओं के खिलाफ अपराधों के लिए पर्याप्त दंड प्रदान नहीं करते हैं और महिलाओं के खिलाफ अपराधों के लिए दक्षिण कोरिया की न्यायिक प्रणाली का दृष्टिकोण देश के पितृसत्तात्मक समाज में लिंग भूमिकाओं से जुड़ा हुआ है।
विदेश नीति
जहां तक ​​नये राष्ट्रपति की विदेश नीति का संबंध है तो उनसे जुड़े लोगों का कहना है कि दक्षिण कोरिया सरकार उत्तर कोरिया के साथ बातचीत को फिर से जारी करने की कोशिश करेगी और अगर प्योंगयांग परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए ठोस कार्रवाई की जाती है तो उसके लिए महत्वपूर्ण और त्वरित लाभ के साथ एक रोडमैप तैयार किया जाएगा। यूं सुक-योल अमेरिका के साथ विस्तारित परमाणु गठबंधन परामर्श का विस्तार करना चाहते हैं। इसके साथ ही वह वाशिंगटन और टोक्यो के साथ एक त्रिपक्षीय साझेदारी को मजबूत करना चाहते हैं और संयुक्त राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान और भारत की क्वाड सभा में भी शामिल होना चाहते हैं।
ट्रंप से तुलना क्यों?
पिछले साल नवंबर में यूं ने देश के औपनिवेशिक इतिहास के संदर्भ में जापान के साथ दक्षिण कोरिया के संबंधों के लिए अपनी संभावित योजनाओं पर संकेत दिया था। यूं ने कहा था, “दोनों देशों के बीच के मुद्दे आसान नहीं हैं, लेकिन उन्हें सुलझाना असंभव नहीं है। अगर दोनों देश उनसे दूरदर्शी तरीके से संपर्क करते हैं तो उन्हें निश्चित रूप से हल किया जा सकता है।”प्रचार अभियान के दौरान, यूं के आलोचकों ने विशेष रूप से पार्टी राजनीति, विदेश नीति और राज्य से जुड़े अन्य मुद्दों में अनुभव की कमी के लिए उन पर हमला किया था। यह बात करने वाले बिंदुओं में से एक था, जहां बार-बार ट्रम्प और यून के बीच तुलना की जाती थी।  उस समय, यूं ने कहा था कि वह अनुभवी अधिकारियों को उन मामलों को संभालने देंगे जिनमें विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है, लेकिन पर्यवेक्षकों ने सवाल किया है कि वास्तविकता में इसे कितना निष्पादित किया जाएगा।

घरेलू नीतियां
द कोरिया हेराल्ड की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि यूं के शीर्ष एजेंडे में से एक कोविड-19 की चुनौतियों से निपटना है। चुनाव प्रक्रिया ऐसे समय में हुई है जब देश कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन की वजह से सबसे खराब लहरों में से एक का सामना कर रहा था। यूं इसको ध्यान में रखते हुए कोविड -19 मुआवजे के लिए समर्पित एक राष्ट्रपति समिति स्थापित करने का वादा किया है, और देश भर में मुआवजा कार्यक्रम शुरू करने के लिए नए कानूनों को पेश करने और संबंधित नियमों को संशोधित करने का वादा किया है। नौकरियां और आवास, यूं के अभियान के दो मुख्य बिंदु रहे हैं, जहां उन्होंने कॉरपोरेट निवेश की सुविधा के लिए नियामक सुधार की देखरेख करने वाली एक सरकारी संस्था स्थापित करने की योजना बनाई है। 

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