क्यों हटाया गया पाकिस्तानी आईएसआई चीफ को?

नीरज कुमार दुबे

इस समय फैज हमीद को पद से हटाये जाने पर तमाम तरह की अटकलें चल रही हैं लेकिन हम आपको बताते हैं कि क्यों हो गयी फैज हमीद की पद से छुट्टी। दरअसल आईएसआई चीफ की कुर्सी पाते ही फैज हमीद अपने आप को सबसे शक्तिशाली समझने लगे थे।

पाकिस्तान में प्रधानमंत्री से ज्यादा महत्वपूर्ण है सेनाध्यक्ष और आईएसआई चीफ का पद। पाकिस्तान में भले दिखाने के लिए लोकतांत्रिक सरकार हो लेकिन देश को वहां के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री नहीं बल्कि सेनाध्यक्ष और आईएसआई के चीफ ही चलाते हैं। अब पाकिस्तान के इन दो महत्वपूर्ण पदों पर कौन बैठता है और हटाया जाता है इस पर सभी की नजरें रहती हैं इसलिए दुनिया तब चौंक गयी जब इस सप्ताह पाकिस्तानी सेना ने चौंकाने वाला कदम उठाते हुए शक्तिशाली खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद को पद से हटाते हुए उनका तबादला कर दिया और उन्हें पेशावर कोर का कमांडर बना दिया। हम आपको बता दें कि फैज हमीद को 16 जून, 2019 को आईएसआई का प्रमुख नियुक्त किया गया था। उससे पहले उन्होंने आईएसआई में आंतरिक सुरक्षा के प्रमुख के रूप में काम किया था। फैज हमीद को सेना प्रमुख जनरल कमर बाजवा का करीबी माना जाता है इसलिए उन्हें हटाये जाने पर सबको आश्चर्य है।

इस समय फैज हमीद को पद से हटाये जाने पर तमाम तरह की अटकलें चल रही हैं लेकिन हम आपको बताते हैं कि क्यों हो गयी फैज हमीद की पद से छुट्टी। दरअसल आईएसआई चीफ की कुर्सी पाते ही फैज हमीद अपने आप को सबसे शक्तिशाली समझने लगे थे और जिन सेनाध्यक्ष बाजवा ने उन्हें यह कुर्सी दिलाई थी, फैज उनकी ही अनदेखी करने लग गये थे। पिछले महीने जब तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया तो आईएसआई चीफ के रूप में फैज हमीद काबुल पहुँच गये थे लेकिन इस यात्रा के लिए उन्होंने अपने बॉस कमर जावेद बाजवा से कोई मंजूरी नहीं ली थी। तालिबान की पार्टी में मस्ती करते फैज हमीद की तस्वीरों से पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच बड़ी किरकिरी हुई थी। अमेरिका भी इस बात से नाराज था कि पाकिस्तान ने तालिबान की मदद के लिए अपने बड़े अधिकारी को भेज दिया है जो इंटरनेशनल आतंकवादियों से गलबहियां करता दिख रहा है। यही नहीं इस पार्टी के दृश्य देखने के बाद बाइडेन प्रशासन को ऐसा महसूस हुआ था कि पाकिस्तान अफगानिस्तान में अमेरिका की नाकामी का जश्न मना रहा है। इस पार्टी में एक ब्रिटिश पत्रकार भी मौजूद थीं जिन्होंने जश्न मनाते फैज हमीद की कुछ ऐसी तस्वीरें ले ली थीं जिससे अमेरिका पाकिस्तान पर आग बबूला हो गया। यही नहीं जब पत्रकार ने फैज से सवाल पूछा था तो उन्होंने उत्तर में कहा था- ‘ऑल इज वेल’। यह जवाब पूरी दुनिया को चौंका गया था क्योंकि काबुल से जिस तरह की तस्वीरें सामने आ रही थीं उससे पूरी दुनिया अफगानियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित थी और फैज हमीद कह रहे थे कि सब ठीक है।
फैज हमीद और बाजवा के बीच मतभेद कब उबरे?
देखा जाये तो फैज हमीद की कुर्सी ऐसे समय गयी है जब अगले साल वह सेनाध्यक्ष बनने वाले थे। इमरान खान भी फैज हमीद से काफी प्रसन्न थे लेकिन जब फैज उड़ने लगे तो उनके पर कतर दिये गये। फैज और बाजवा में मतभेद तब शुरू हुए थे जब रावलपिंडी में पाकिस्तानी सेना के एक हाउसिंग प्रोजेक्ट को लेकर विवाद हुआ था। इसके अलावा जब इमरान खान ने सेनाध्यक्ष के रूप में बाजवा का कार्यकाल बढ़ा दिया तो फैज हमीद नाराज हो गये थे और कई बार खुलकर उन्होंने यह नाराजगी जाहिर की थी और बाजवा के निर्देशों की अनदेखी करने लगे थे। यहाँ गौर करने लायक बात यह है कि पाकिस्तानी मीडिया की इतनी हिम्मत नहीं हुई कि सेना और आईएसआई के बीच चल रही इस रस्साकशी को रिपोर्ट कर सके।

इमरान खान ने भी चल दी चाल!
खैर फैज हमीद जो खुद को सर्वेसर्वा समझने लगे थे उनको बाजवा ने कैसे चलता किया यह भी आपको बताते हैं। दरअसल आईएसआई प्रमुख की नियुक्ति और बर्खास्तगी सेनाध्यक्ष की सलाह पर ही पाकिस्तानी प्रधानमंत्री करता है। बताया जा रहा है कि बाजवा तो फैज हमीद की बर्खास्तगी पर अड़े थे लेकिन इमरान खान ने किसी तरह उनके गुस्से को शांत किया और फैज को आईएसआई चीफ पद से बर्खास्त नहीं कर उनका तबादला भर कर दिया। लेकिन इमरान खान इसी के साथ यहां एक राजनीतिक चाल भी चल गये। दरअसल बाजवा के दबाव के चलते एक तो उनका कार्यकाल बढ़ाना पड़ा दूसरा वह सरकार पर और भी तमाम मुद्दों पर दबाव बनाते हैं इसलिए इमरान भी बाजवा की काट ढूँढ़ रहे हैं और उन्हें उम्मीद है कि फैज यह काम कर सकते हैं। इसलिए इमरान खान ने चाल चलते हुए फैज हमीद को भले आईएसआई चीफ पद से हटा दिया है लेकिन उन्हें पेशावर कोर का कमांडर बनाकर भविष्य में उनके लिए बड़ी संभावनाओं के द्वार भी खोल दिये हैं। हम आपको बता दें कि पाकिस्तान में सेनाध्यक्ष बनने के लिए कम से कम एक साल के लिए किसी कोर स्तर की कमान संभालने का अनुभव अनिवार्य है।
बहरहाल, देखना होगा कि पाकिस्तान में चल रही इस आंतरिक उठापटक का अगला एपिसोड क्या होता है। इमरान खान अगर बाजवा के साथ इस तरह की चालें चलेंगे तो कहीं बाजवा इमरान की सत्ता ही ना पलट दें जैसे तत्कालीन पाकिस्तानी सेनाध्यक्ष जनरल परवेज मुशर्रफ ने नवाज शरीफ की सरकार का तख्तापलट कर खुद को राष्ट्रपति घोषित कर दिया था। इसलिए दुनिया को अफगानिस्तान के हालात के साथ-साथ पाकिस्तान में चल रही उठापटक पर भी नजर बनाये रखनी होगी।

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