सबका साथ और सबका विकास बनाम मोदी की कथनी करनी

नीरज कुमार दुबे

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनप्रतिनिधि के रूप में विभिन्न पदों पर रहते हुए बीस साल पूरे कर चुके हैं लेकिन देखिये उनके पास अन्य नेताओं की तरह ना तो आलीशान बंगला है, ना ही बड़े-बड़े बैंक बैलेंस हैं और ना ही चमचमाती कारें हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले अपना जन्मदिन नहीं मनाते हों लेकिन देश उनके जन्मदिन को बड़े धूमधाम से मनाता है क्योंकि भारत की जनता यही चाहती है कि उसे बरसों बाद जो सशक्त नेता मिला है वह अनंत काल तक नेतृत्व करता रहे। आज भले देश के समक्ष रक्षा-सुरक्षा संबंधी चुनौतियां खड़ी हैं लेकिन देश की जनता सिर्फ इसी बात से निश्चिंत है कि मोदी हैं तो हमारे देश की संप्रभुता और अखण्डता को कोई आंच नहीं आ सकती। दरअसल जनता बार-बार देख चुकी है कि ‘कोई भारत को छेड़ेगा तो हम छोड़ेंगे नहीं’ यह बात सिर्फ मोदी कहते भर नहीं हैं इसे समय-समय पर हकीकत भी बना कर दिखाते हैं। सिर्फ रक्षा क्षेत्र की ही बात कर लें तो मोदी ने हमारी सेना को आधुनिक हथियारों और सभी प्रकार की सुविधाओं से लैस ही नहीं किया है बल्कि दुश्मन को मुँहतोड़ जवाब देने के लिए जवानों को पूरी छूट भी दी है। हमारी सेना, वायुसेना और नौसेना जिन अत्याधुनिक हथियारों, लड़ाकू विमानों की बाट दशकों से जोह रही थीं उन्हें मोदी ने आते ही प्रदान भी किया और जिस तरह से देश को रक्षा मामले में आत्मनिर्भर बनाने का अभियान चलाया है वह आने वाले वर्षों में हमारी दूसरों पर निर्भरता तो कम करेगा ही साथ ही हम रक्षा निर्यात से भी बड़ी आमदनी कमा सकेंगे।

मोदी किन मायनों में भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं!
नरेंद्र मोदी भले भारत के 14वें प्रधानमंत्री हैं लेकिन इस मामले में वह पहले प्रधानमंत्री हैं जिसने गरीबी को सबसे करीब से देखा है। जिसकी माँ दूसरों के घरों में काम करती हो, जिसने खुद कभी रेलवे स्टेशन पर चाय बेची हो, जिसने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा दो जोड़ी कपड़ों में गुजारा हो, जिसने हिमालय की चोटियों पर बरसों संन्यासी के रूप में गुजारे हों, जिसने मुख्यमंत्री के रूप में गुजरात को ऐसा चमकाया हो कि दुनिया भारत के इस राज्य की चकाचौंध से जुड़ने के लिए खुद आतुर हुई हो, जिसने प्रधानमंत्री के रूप में भारत को गरीबी और निराशा की स्थिति से निकाला हो और देश को एकजुट कर ‘न्यू इंडिया’ की परिकल्पना साकार करने के लिए निकल पड़ा हो। वाकई ऐसे जुझारू, कर्मठ, कर्तव्यनिष्ठ, भारत की संस्कृति के प्रचारक और राष्ट्रभक्त जनसेवक बिरले ही होते हैं। जम्मू-कश्मीर से आतंकवाद की लगभग समाप्ति कर कश्मीरी युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने की बात हो या फिर पूर्वोत्तर क्षेत्र में उग्रवाद और कुछ राज्यों में आधार रखने वाले माओवाद पर काबू पाने की बात हो, मोदी सरकार के कार्यकाल में देश में लगभग शांति बनी हुई है। 
लोकतंत्र की मजबूती में मोदी का बड़ा योगदान
नरेंद्र मोदी जनप्रतिनिधि के रूप में विभिन्न पदों पर रहते हुए बीस साल पूरे कर चुके हैं लेकिन देखिये उनके पास अन्य नेताओं की तरह ना तो आलीशान बंगला है, ना ही बड़े-बड़े बैंक बैलेंस हैं और ना ही चमचमाती कारें हैं। हाँ, उनके पास अपनी माँ का आशीर्वाद और भारत की जनता का प्यार जरूर है तभी तो चुनावों के समय जनता खुद ही नारा लगाती है- ‘नमो नमो’, ‘मोदी मोदी’, ‘मोदी है तो मुमकिन है’, ‘हर हर मोदी घर घर मोदी’ लेकिन भारत के प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने देश को जो बड़े नारे या फिर कहिये सूत्रवाक्य दिये वह हैं- ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’, ‘सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास’। नरेंद्र मोदी ने अपने लिए बड़ा घर बनाने की जगह प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत रिकॉर्ड संख्या में जरूरतमंदों के सिर पर छत प्रदान की। नरेंद्र मोदी ने सिर्फ अपने निर्वाचन क्षेत्र या अपने गृहराज्य की चिंता करने की बजाय देश को समान रूप से विकास की ऐसी ढेरों परियोजनाएं प्रदान कीं जिससे नये भारत का निर्माण चारों ओर होता दिख रहा है।
एक नहीं अनेकों सौगातें दीं
भारत का पहला वॉर मेमोरियल, सेंट्रल विस्टा परियोजना आदि मोदी के कार्यकाल में ही साकार हुईं। स्वच्छ भारत, जीएसटी, वन रैंक वन पेंशन, सीडीएस, स्मार्ट सिटी, डिजिटल इंडिया अभियान, नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति और जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने के वादे भारत में बरसों से सुने जाते थे लेकिन यह सब साकार मोदी सरकार के कार्यकाल में ही हुए। यही वह सरकार है जिसने उद्योगों को मजबूती प्रदान करने के लिए उन्हें तमाम तरह की रियायतें प्रदान कीं, उद्योगों की स्थापना संबंधी प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया, मंजूरियां प्रदान करने की प्रक्रिया को भ्रष्टाचार मुक्त बनाया, युवाओं को रोजगार पाने की जद्दोजहद में जुटने की बजाय उन्हें रोजगार प्रदान करने लायक स्थिति में पहुँचाने के लिए तमाम योजनाओं को पेश किया, कोरोना के कहर से देश को बचाने के लिए भारत में वैक्सीन के निर्माण को प्रोत्साहित भी किया तथा दुनिया में सबसे ज्यादा और तीव्र गति से वैक्सीन लगाने का रिकॉर्ड भी बनाया, संकट के समय महीनों तक गरीब जनता को मुफ्त राशन उपलब्ध कराया। यही नहीं ओलम्पिक और पैरालम्पिक खेलों के सभी पदक विजेताओं और प्रतिभागी खिलाड़ियों का हौसला प्रधानमंत्री ने निजी रूप से बढ़ाया।
सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास पर कितने खरे उतरे मोदी ?
यह सही है कि मोदी की छवि हिंदूवादी नेता की रही है, लेकिन उन्होंने सदैव दूसरे धर्मों को भी समान रूप से सम्मान दिया। भोलेनाथ के भक्त और काशी के जनसेवक मोदी ने रामनगरी अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण कार्य का शुभारम्भ कर हिन्दुस्तान की जनता का सैंकड़ों वर्षों पुराना सपना साकार कर दिया तो मोदी सरकार के कार्यकाल में ही अल्पसंख्यक मंत्रालय ने मुस्लिमों के लिए इतनी योजनाएं पेश कीं कि आज यह वर्ग पहले की अपेक्षा ज्यादा पढ़ा-लिखा और संपन्न नजर आ रहा है। मोदी ने इस देश में बरसों से चल रही तुष्टिकरण की राजनीति को तो समाप्त किया ही मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक के अभिशाप से भी मुक्ति दिलाई। आज प्रधानमंत्री का जन्मदिन हो या फिर रक्षा बंधन या भैया दूज का त्योहार, मुस्लिम महिलाएं मोदी को भाई के रूप में राखी भेजती हैं, तिलक भेजती हैं। प्रधानमंत्री स्वयं कई बार अल्पसंख्यक वर्ग के प्रबुद्ध लोगों से बात कर उनकी समस्याएं हल करने की दिशा में कदम उठा चुके हैं। यही कारण है कि देश में लोकसभा और विधानसभा की कई ऐसी सीटें हैं जो अल्पसंख्यक बहुल होने के बावजूद भाजपा के पास हैं। यह दर्शाता है कि मुस्लिमों को वोट बैंक के रूप में देखने वालों के दिन अब लद चुके हैं।

दलितों, पिछ़डों के जीवन में परिवर्तन लाये मोदी
इस देश में दलितों और पिछड़ों को भी सिर्फ वोट बैंक के रूप में देखा जाता था लेकिन मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से उनकी सामाजिक और आर्थिक दशा में बड़े बदलाव आये हैं। सबको याद होगा कि प्रयागराज के कुंभ मेले में स्वच्छता कर्मियों के पैर खुद प्रधानमंत्री ने धोये थे और उन्हें सम्मानित किया था। आज पिछड़े वर्गों को आगे बढ़ाने का काम जितना नरेंद्र मोदी ने किया है उतना आजाद भारत के इतिहास में कभी नहीं हुआ। यही नहीं गांवों और किसानों की चिंता करते हुए प्रधानमंत्री ने उन्हें सभी प्रकार की सुविधाएं प्रदान करने के लिए ना सिर्फ अनेकों योजनाएं पेश कीं बल्कि उनके क्रियान्वयन पर खुद निगाह भी रखी। गरीब किसानों की मदद के वादे तो पहले भी किये जाते थे लेकिन नरेंद्र मोदी ने किसान सम्मान योजना के जरिये ना सिर्फ उनकी आर्थिक मदद की बल्कि तमाम तरह की फसलों का एमएसपी समय-समय पर बढ़ाकर उन्हें और सशक्त भी किया।
बहरहाल, आज पूरे विश्व भर का जो माहौल है उसमें जनता से मिले भारी बहुमत की ताकत रखने वाला नेता ही देश के हितों से जुड़े मुद्दों को वैश्विक मंचों पर पूरी ताकत के साथ उठा सकता है। मोदी राष्ट्र हित में फैसले लेने के लिए राजनीतिक नुकसान की परवाह नहीं करते इसलिए वह देश के लिए कई साहसिक निर्णय ले पाये हैं। प्रतिदिन 24 में से 18 घंटे काम करने वाले भारत के लोकप्रिय प्रधानमंत्री के लिए देश सेवा ही सबकुछ है और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के सबसे बड़े पद तक पहुँचने का उनका सफर हमारे लोकतंत्र की ताकत को दर्शाता है जहाँ सामान्य परिवार से जुड़ा व्यक्ति भी शीर्ष पद तक पहुँच सकता है।

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