जब पूरी दुनिया कोरोना, तालिबान -अफगानिस्तान में ध्यान केंद्रित किए हुए थी तब नॉर्थ कोरिया के तानाशाह ने कुछ ऐसा कर दिया जिससे बढ़ गई दुनिया की धड़कनें

अभिनय आकाश 

उत्तर कोरिया ने पहला परमाणु परीक्षण करीब 15 साल पहले 9 अक्टूबर 2006 को किया था। इसके बाद कई सारे प्रतिबंध भी उसपर लगे। लेकिन इसकी परवाह किए बिना उत्तर कोरिया लगातार परमाणु परीक्षण करता रहा।

जब दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही थी तो उत्तर कोरिया क्या कर रहा था। और क्या कर रहा था उसका तानाशाह किम जोंग उन। क्या है उत्तर कोरिया के बम की कहानी, इसमें क्या बड़ा खुलासा हुआ है।  इन तमाम सवालों के जवाब आपको आज के इस विश्लेषण में देंगे। लेकिन सबसे पहले आपको एक कहानी सुनाते हैं। 

ये 1960 की बात है इजरायल के दक्षिणी हिस्से में नेगेव रेगिस्तान है। यहीं पर इसका शहर डीमोना बसा है, जिसके बाहर एक रिसर्च सेंटर मौजूद है। लेकिन एक दिन इसके आसमान में एक हेलीकॉप्टर मंडराता नजर आया जिसमें अमेरिकी राजदूत और इजरायली अधिकारी मौजूद थे। नीचे की ओर बिल्डिंग को देख अमेरिकी राजदूत के पूछे जाने पर इजरायली अधिकारी बताते हैं कि ये कपड़े बनाने का कारखाना है। लेकिन क्या ये उस सवाल का सही उत्तर था? जवाब है- नहीं। कुछ ही दिनों बाद दुनिया को उस सवाल का असल जवाब मिल गया। ये कारखाना तो था लेकिन कपड़े का नहीं बल्कि एटम बम की सामर्गी बनाने का कारखाना था। इस बिल्डिंग में उस वक्त फ्रांस की मदद से इजरायल न्यूक्लियर रिएक्टर बना रहा था। अमेरिका को कुछ वक्त तक तो इसका अंदाजा ही नहीं लगा लेकिन बाद में उसने इजरायल की इस हरकत पर अपनी रजामंदी दे दी। लेकिन बाद में ईरान ने ऐसा ही कुछ करना चाहा तो और इजरायल की एजेंसी मोसाद ने उसके परमाणु कार्यक्रमों के दस्तावेज रात के अंधेर में ही गायब कर दिए। जासूसी के जरिये इस तरह की ही कुछ हरकत अमेरिका ने उत्तर कोरिया में अपनानी चाही लेकिन कामयाब नहीं हो पाया। बराक ओबामा के दूसरे कार्यकाल के दौरान उत्तर कोरिया ऐसी मिसाइल बनाने में लगा था जो दूसरे महाद्विपों तक हमला कर सके। लेकिन बार-बार मिसाइल फाइनल टेस्टिंग में किसी न किसी वजह से फेल हो जाती। इसे साइबर और इलेक्ट्रानिक हमले के जरिये अंजाम दिया जा रहा था। लेकिन उत्तर कोरिया समय रहते चौकन्ना हो गया। 2016 में तानाशाह किंम जोंग उन के जांच के आदेश के एक साल बाद पांच अधिकारियों एंटी एयरक्रॉफ्ट गन के सामने खड़ा कर भून दिया गया। इन पर अमेरिका के साथ मिलकर उत्तर कोरिया के परीक्षण में बाधा डालने का संदेह था। इसके बाद से उत्तर कोरिया का न्यूक्लियर के जखीरे को बढ़ाने का मिशन जारी है। 

अमेरिका से उत्तर कोरिया की पुरानी अदावत 
परमाणु बम कितना खतरनाक है इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि जिस इलाके पर भी ये गिरेगा उसके 10 सेकेंड के भीतर वहां की भूमि अंगारों की भांति धधकने लगेगी। चारों तरफ सफेद तेज चमक पैदा हो सकती जो आंखों से देखी तक नहीं जा सकती। सबसे खतरनाक होता है रेडिएशन का असर जो दिखाई तो नहीं देता लेकिन सैकड़ों-हजारों मौतें तुरंत हो जाती हैं। जापान दुनिया का एकलौता ऐसा देश है जिसने परमाणु हमले के दर्द को झेला है। आज से करीब 75 साल पहले जब हिरोशिमा और नागासाकी पर हमला हुआ था तब ढाई लाख  लोग मारे गए थे। इनमें से आधे लोग हमले वाले दिन ही मर गए थे। उसके बाद कोरिया युद्ध हुआ।  चीन और रूस उत्तर कोरिया के सपोर्ट में थे। वहीं अमेरिका साउथ कोरिया का साथ दे रहा था। हालात काबू में करने के लिए अमेरिका ने उत्तर कोरिया पर हवाई हमले शुरू कर दिये। अमरीकी बमवर्षक विमान बी-29 और बी-52 देश के हर हिस्से में मंडराने लगे। इससे गांव के गांव और शहर तबाह हो गए। लाखों उत्तर कोरियाई मारे गए। इस क्रूर हमले के बारे में खुद अमरीकी विदेश मंत्री डेयान रस्क ने कहा था- ‘हम ने हर हिलती हुई चीज़ पर बमबारी की। तीन सालों तक उत्तर कोरिया पर नॉनस्टॉप हवाई हमले किए जाते रहे। इसके बाद कई देशों के दखल के बाद युद्दविराम का एलान हो गया। अपने लोगों के मारे जाने के कारण उत्तर कोरिया के मन में आज भी अमेरिका को लेकर गुस्सा है। इसके बाद ये देश खुद को परमाणु शक्ति संपन्न करने लगा। 
किम का परमाणु मिशन
उत्तर कोरिया ने पहला परमाणु परीक्षण करीब 15 साल पहले 9 अक्टूबर 2006 को किया था। इसके बाद कई सारे प्रतिबंध भी उसपर लगे। लेकिन इसकी परवाह किए बिना उत्तर कोरिया लगातार परमाणु परीक्षण करता रहा। 25 मई 2009 को उत्तर कोरिया ने दूसरा परमाणु परीक्षण किया। 13 फरवरी 2013 को तीसरा और 6 जनवरी 2016 को किम जोंग ने हाइड्रोजन बम का परीक्षण किया। वहीं 9 सितंबर 2016 की तारीख उत्तर कोरिया के पांचवें परमाणु परीक्षण की तारीख बन गई। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि उत्तर कोरिया आज दुनिया के लिए बड़ा परमाणु खतरा बन चुका है। 

 शुरू हुआ उत्तर कोरिया का न्यूक्लियर प्लांट
संयुक्त राष्ट्र परमाणु एजेंसी ने कहा है कि ऐसा प्रतीत होता है कि उत्तर कोरिया ने हथियार ईंधन का उत्पादन करने के लिए उपयोग किए जाने वाले अपने मुख्य परमाणु रिएक्टर का संचालन फिर से शुरू कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की वार्षिक रिपोर्ट में उत्तरी प्योंगयांग के योंगब्योन में उत्तर कोरिया के मुख्य परमाणु परिसर में पांच मेगावाट के रिएक्टर को संदर्भित किया गया है। इस परिसर को उत्तर कोरिया अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम का “दिल” कहता है। ये दशकों से अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए चिंता की वजह रहा है। रिएक्टर प्लूटोनियम का उत्पादन करता है, जो अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के साथ परमाणु हथियार बनाने के लिए उपयोग किए जाने वाले दो प्रमुख अवयवों में से एक है। आईएईए की रिपोर्ट में कहा गया है, जुलाई 2021 की शुरुआत से, रिएक्टर के संचालन के अनुरूप शीत जल के निर्वहन सहित कई संकेत मिले हैं। इससे पहले योंगब्योन रिएक्टर दिसंबर 2018 से बंद पड़ा था। एजेंसी ने कहा, (उत्तर कोरिया की) परमाणु गतिविधियां गंभीर चिंता का कारण बनी हुई हैं। इसके अलावा, 5-मेगावाट रिएक्टर और रेडियोकेमिकल प्रयोगशाला के संचालन के नए संकेत गंभीर चिंता पैदा करते हैं।

संयुक्त राष्ट्र की परमाणु एजेंसी चिंतित
संयुक्त राष्ट्र की परमाणु एजेंसी ने उत्तर कोरिया के इस कदम पर अपनी चिंता जाहिर की है। संयुक्त राष्ट्र परमाणु एजेंसी के निरीक्षकों को निष्कासित किए जाने के बाद भी उत्तर कोरिया ने परमाणु हथियार विकसित करना जारी रखा है और 2017 में अपना अंतिम परीक्षण किया है। वह प्लांट प्लूटोनियम का उत्पादन करता है, जो अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के साथ परमाणु हथियार बनाने के लिए उपयोग किए जाने वाले दो अहम अवयवों में से एक है।  
किम ने ट्रंप को दिया था ये प्रस्ताव
2019 की शुरुआत में उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग ने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ शिखर सम्मेलन के वक्त व्यापक प्रतिबंधों से राहत मिलने पर पूरे परिसर को नष्ट करने की पेशकश की थी। लेकिन अमेरिका की तरफ से किम के इस प्रस्ताव को नहीं ठुकरा दिया गया था। 2018 में दक्षिण कोरिया ने आशंका जताई थी कि उत्तर कोरिया पहले ही 20-60 परमाणु हथियार बना चुका होगा। बाद में उत्तर कोरिया की तरफ से ये चेतावनी भी दी गई थी कि अमेरिका उत्तर पर अपनी शत्रुतापूर्ण नीति वापस नहीं लेता है तो वह अपने परमाणु कार्यक्रम का विस्तार करेगा।
किसके पास कितने परमाणु बम?
आज दुनिया के पास पहले के मुकाबले कई गुना ज्यादा क्षमता वाले परमाणु बम हैं। ऐसे में परमाणु युद्ध के बाद की तस्वीर भयावह होगी। दुनिया में कई देशों के पास परमाणु हथियार मौजूद हैं। इस रेस में सबसे आगे रूस और अमेरिका हैं। 

रूस- 6500 परमाणु हथियार

अमेरिका- 6185 परमाणु हथियार

फ्रांस- 300 परमाणु हथियार

चीन- 290 परमाणु हथियार

ब्रिटेन- 215 परमाणु हथियार

इस्राइल- 80 परमाणु हथियार

पाकिस्तान- 140-150 परमाणु हथियार

भारत- 130-140 परमाणु हथियार

उत्तर कोरिया- 20-30 परमाणु हथियार

परमाणु प्रसार पर चिंता
सेंटर फॉर नॉनप्रोलिफरेशन स्टडीज में ईस्ट एशिया नॉनप्रोलिफरेशन प्रोजेक्ट के पूर्व डिप्टी प्रोजेक्ट डायरेक्टर डैनियल पिंकस्टन ने चेतावनी दी कि उत्तर कोरिया परमाणु तकनीक या पूर्ण हथियार बेचने की योजना बना सकता है। अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों की वजह से उत्तर कोरिया में आर्थिक समस्याएं हैं। लेकिन कोरोना महामारी की वजह से देश पैसे के लिए बेताब है। उत्तर कोरिया ने कई वर्षों से इस कार्यक्रम के लिए अपने सीमित संसाधनों की एक बड़ी राशि आवंटित की है।
दक्षिण कोरिया और अमेरिका वार्ता चाहते हैं
दक्षिण कोरिया के परमाणु दूत कोरियाई प्रायद्वीप के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए वाशिंगटन पहुंचे। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जेन साकी ने संवाददाताओं से कहा कि अमेरिका कोरियाई प्रायद्वीप के परमाणु निरस्त्रीकरण पर उत्तर कोरिया के साथ बातचीत करना जारी रखे हुए है। उत्तर कोरिया के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन के विशेष दूत सुंग किम ने कहा कि वह अपने उत्तर कोरियाई समकक्ष के साथ ‘‘कहीं भी और किसी भी समय’’ वार्ता के लिए तैयार है। वहीं जो बाइडेन के अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेने के बाद से उत्तर कोरिया ने पिछले प्रयासों की अनदेखी की है। बातचीत की ताजा पेशकश पर प्योंगयांग की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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