आइए जाने – क्या है नई स्कैपिंग पॉलिसी

 

अभिनय आकाश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में नई टेक्सटाइल ऑटोमोबाइल स्क्रैपेज पॉलिसी लॉन्च कर दी है। गुजरात में आयोजति इनवेस्टर्स समिट को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये संबोधित करते हुए पीएम ने ऑटोमोबाइल स्क्रैपिंग की शुरुआत की और इसके फायदें गिनाए।

एक जमाना था जब लोग एक गाड़ी खरीदने के बाद सोचते थे कि पूरे जीवन इसी गाड़ी को चलाएंगे। लोग गाड़ी को भी परिवार का एक सदस्य मानते थे। लेकिन अगर आपकी कार भी पुरानी हो चली है और आप नई कार खरीदने का मन बना चुके हैं। तो अब आपके लिए आपकी पुरानी कार अब बोझ साबित नहीं होगी। बल्कि वो जाते-जाते आपको तमाम फायदें दिला सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में नई टेक्सटाइल ऑटोमोबाइल स्क्रैपेज पॉलिसी लॉन्च कर दी है। गुजरात में आयोजति इनवेस्टर्स समिट को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये संबोधित करते हुए पीएम ने ऑटोमोबाइल स्क्रैपिंग की शुरुआत की और इसके फायदें गिनाए।

सर्कलर इकोनॉमी में एक ऐसी वैकल्पिक व्यवस्था पर काम किया जाता है जो टिकाऊ तो हो ही साथ ही इनोवेशन से भी भरी हो। जिसमें हम अपने मौजूद संसाधनों का इस्तेमाल नए तरीके से कर सके। इस पहल से इकोनॉमी में तीव्रता आती है और इसमें एक बार इस्तेमाल करो और फेको वाला मॉडल नहीं चलता है। बल्कि एक बार इस्तेमाल किए संसधानों को नए तरीके से फिर से उपयोग में लाया जाता है। उदाहरण स्वरूप अगर किसी प्रोजेक्ट में बड़े लेबल पर ऐसा काम हो जिसके बाद उसमें काफी सारा कचरा निकलता हो, तो अमूमन है देखा जाता है कि कचरे को वेस्ट समझ कर फेंक दिया जाता है। लेकिन सर्कुलर इकोनॉमी में उसी कचरे को रिसाइकल करके उसे फिर से किसी प्रोजेक्ट में इवोवेशन करके उपयोग में लाया जाता है।

भारत में 51 लाख हल्के मोटर वाहन हैं जो 20 वर्ष से अधिक पुराने हैं और 34 लाख 15 वर्ष से अधिक पुराने हैं। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 17 लाख मध्यम और भारी वाणिज्यिक वाहन वैध फिटनेस प्रमाण पत्र के बिना 15 वर्ष से अधिक पुराने हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि वाहन मालिकों को अपने पुराने वाहनों को स्क्रैप करने के लिए जल्दबाजी करने की आवश्यकता है। भारत अभी भी इतनी बड़ी संख्या में वाहनों का परीक्षण या स्क्रैप करने के लिए बुनियादी ढांचे के साथ तैयार नहीं है। निवेशक शिखर सम्मेलन स्क्रैपेज उद्योग के दायरे और लाभप्रदता के बारे में भारत के उद्योग को संवेदनशील बनाने का प्रयास करता है। गडकरी ने मार्च में संसद को बताया था कि परिणामी पारिस्थितिकी तंत्र 10,000 करोड़ रुपये के निवेश को आकर्षित कर सकता है और 35,000 नई नौकरियां पैदा कर सकता है।

किस तरह के ऑटोमेटेड फिटनेस सेंटर बनने चाहिए और कौन उन्हें स्थापित कर सकता है, इस पर सरकार ने नियम और विशिष्टियां पेश की हैं। यह भी बताया गया है कि स्क्रैपिंग यार्ड कैसा होना चाहिए। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि व्हीकल स्कैप पॉलिसी के हिसाब से वाहनों को एक फिटनेस टेस्ट से गुजरना होगा। इसके लिए देशभर में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशप मोड में 400 से 500 व्हीकल फिटनेस सेंटर बनाए जाएंगे। वहीं 60 से 70 रजिस्टर्ड स्कैपिंग सेंटर होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश है कि फिटनेस टेस्ट के लिए व्हीकल को 150 से 200 किलोमीटर से ज्यादा दूर नहीं ले जाना पड़े। ये फिटनेस सेंटर पूरी तरह से ऑटोमेटेड होंगे।

पुरानी गाड़ी को स्कैप करने पर एक सर्टिफिकेट मिलेगा। ये सर्टिफिकेट जिसके पास होगा उसे नई गाड़ी की खऱीद पर रजिस्ट्रेशन के लिए कोई पैसा नहीं देना होगा। इसके साथ ही उसे रोड टैक्स में भी कुछ छूट दी जाएगी। दूसरा लाभ ये होगा कि पुरानी गाड़ी की मेटेंनेंस कॉस्ट, रिपेयर कॉस्ट या ईंधन क्षमता में भी बचत होगी। एक लाभ सीधा जीवन से जुड़ा है। पुरानी गाड़ियों,पुरानी टेक्नलॉजी के कारण रोड एक्सिडेंट का खतरा बहुत अधिक रहता है। इससे मुक्ति मिलेगी। इसके अलावा इससे हमारे स्वास्थ्य पर प्रदूषण के कारण जो असर पड़ता है उसमें कमी आएगी। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने पॉलिसि के फायदे बताते हुए ये भी कहा कि नए वाहनों को 40 प्रतिशत तक सस्ता बनाएगी। क्योंकि पुराने वाहनों से निकलने वाले कबाड़ से 99 प्रतिशत मेटल को रिकवर किया जा सकता है। केंद्रीय मंत्री की माने तो इससे इलेक्ट्रिक वाहनों की लागत कम होगी।
क्या यह अर्थव्यवस्था की मदद करता है?
विश्व स्तर पर नजर डालें तो खासकर यूरोप और अमेरिका में ऑटो विनिर्माण क्षेत्र में मांग में वृद्धि के साथ एक स्क्रैपेज नीति का पालन किया गया है। अमेरिका ने कार अलाउंस रिबेट सिस्टम लागू किया है। यहां पुराने वाहनों को स्कैप करने और उनसे नए और कुशल ईंधन वाहनों के साथ बदलने पर क्रेडिट प्रोत्साहन प्रदान करता है। स्कैप पॉलिसी स ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को सस्ता कच्चा माल मिलेगा। यह विनिर्माण क्षेत्र में आर्थिक मंदी और मंदी के कारण खपत से निपटने का एक उपकरण भी रहा है। इसके अलावा, पर्यावरण के साथ-साथ अन्य लाभ भी हैं क्योंकि नई कारें बेहतर उत्सर्जन मानकों और बेहतर ईंधन दक्षता के साथ आती हैं।
क्या होगा यदि कोई पुराना निजी वाहन फिटनेस टेस्ट पास करता है?
उस स्थिति में, स्वामी इसका उपयोग करना जारी रख सकता है, लेकिन पुन: पंजीकरण के लिए शुल्क बहुत अधिक होगा। मार्च में जारी एक मसौदा अधिसूचना में, सभी वाहनों के पुन: पंजीकरण शुल्क को वाहन के प्रकार के आधार पर आठ से बढ़ाकर लगभग 20 गुना करने का प्रस्ताव दिया गया है। ये शुल्क इस साल अक्टूबर से लागू होंगे।

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