विपक्ष को एक करने की अपनी कवायद में कितनी कामयाब हो पाएंगी ममता दीदी ?

 

अंकित सिंह

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी को रोकने के लिए विपक्ष का चेहरा बनाए जाने के मुद्दे पर कहा कि ‘‘यह सब परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।’’ इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यदि उनके अलावा किसी और को विपक्ष का नेतृत्व दिया जाता है तो उन्हें कोई समस्या नहीं है।

देश में राजनीतिक सरगर्मियां लगातार जारी है। कांग्रेस के लिए पंजाब सुलह के बाद राजस्थान में सुलह कराना बड़ी चुनौती है। पार्टी प्रभारी अजय माकन राजस्थान का लगातार दौरा कर रहे हैं जबकि सचिन पायलट दिल्ली में है और वो प्रियंका गांधी और पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल से मुलाकात कर चुके हैं। माना जा रहा है कि राजस्थान कांग्रेस में तथा राजस्थान के सरकार में बड़े बदलाव हो सकते हैं लेकिन यह बदलाव किस तरह के होंगे यह तो वक्त बताएगा। पर इतना जरूर है कि राजस्थान में कांग्रेस के अंदर की अर्तकलह आलाकमान के लिए चिंता का विषय है। साथ ही साथ प्रशांत किशोर के कांग्रेस में शामिल होने की खबरें आ रही है। यह जी-23 के नेताओं के लिए एक बड़ी टेंशन है। इसके अलावा कर्नाटक में भाजपा ने जो बदलाव किए हैं और ममता बनर्जी का दिल्ली दौरा इन्हीं तमाम विषयों पर हमने अपने प्रभासाक्षी के कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में बात की। इस चर्चा में हमेशा की तरह मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे।

राजस्थान मसले और प्रशांत किशोर को कांग्रेस में शामिल करने को लेकर नीरज कुमार दुबे ने कहा कि कांग्रेस ने पंजाब का मसला तो बड़ी आसानी से सुलझा लिया लेकिन राजस्थान में पार्टी का आंतरिक विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। कांग्रेस आलाकमान एक साल से ज्यादा समय से प्रयास कर रहा है कि अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच के मुद्दे सुलझा लिये जायें लेकिन अब तक कामयाब नहीं हो सका है। फिलहाल तो राज्य के प्रभारी अजय माकन पर सर्वमान्य हल निकालने की बड़ी जिम्मेदारी है। इसके साथ ही कांग्रेस ने प्रशांत किशोर को पार्टी में शामिल करने की तैयारी कर ली है लेकिन यह चुनावी रणनीतिकार क्या जी-23 नेताओं के बॉस बनकर पार्टी में आयेंगे यह देखने वाली बात होगी।
ममता बनर्जी के दिल्ली दौरे को लेकर नीरज कुमार दुबे ने कहा कि इसके साथ ही ममता बनर्जी का हालिया पाँच दिवसीय दिल्ली दौरा पश्चिम बंगाल के मुद्दों को आगे बढ़ाने की बजाय इस बात पर ज्यादा केंद्रित रहा कि कैसे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री को साल 2024 के लोकसभा चुनावों में विपक्ष का नेतृत्व करने वाले नेता के रूप में आगे बढ़ाया जाये। ममता अपने उद्देश्य में कितनी कामयाब हो पाती हैं यह तो समय ही बतायेगा लेकिन फिलहाल तो विपक्ष के नेता के रूप में किसी एक नाम पर आम सहमति बन पाना कठिन ही दिखाई दे रहा है। वहीं, कर्नाटक में भाजपा के बदलाव पर नीरज कुमार दुबे ने कहा कि एक तरह से पार्टी तय प्रक्रिया के तहत शांति पूर्वक सत्ता हस्तांतरित करने में कामयाब रही। येदयुरप्पा को इस्तीफा देने के पीछे का कारण उनका स्वास्थ्य है। लेकिन पार्टी उन्हें मनाने में कामयाब रही यह बड़ी बात है।
गहलोत मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल से पहले माकन ने कहा,कई मंत्री पद छोड़ने के इच्छुक
कांग्रेस महासचिव व पार्टी के राजस्थान प्रभारी अजय माकन ने अशोक गहलोत मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल में कई मंत्रियों को हटाए जाने का स्पष्ट संकेत देते हुए कहा कि कुछ मंत्रियों ने पद छोड़कर संगठन के लिए काम करने की इच्छा जताई है। माकन ने गहलोत मंत्रिमंडल में फेरबदल व हजारों की संख्या में राजनीतिक नियुक्तियों की सुगबुगाहट के बीच यहां कांग्रेस व समर्थक विधायकों से एक-एक कर चर्चा करने के बाद यह बात कही। माकन ने विधायकों से फीडबैक लेने का काम बृहस्पतिवार को पूरा कर लिया था। माकन के अनुसार, हर किसी ने उनसे कहा कि पार्टी आलाकमान जो भी उनके लिए तय करेगा वे उसे स्वीकार करेंगे। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस समिति कार्यालय के बाहर संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि कुछ मंत्री ऐसे भी हैं जिन्होंने पद छोड़कर संगठन के लिए काम करने की इच्छा जताई है। हालांकि, उन्होंने किसी मंत्री विशेष का नाम नहीं लिया। वहीं, उनकी इस टिप्पणी को इस बात का संकेत माना जा रहा है कि कई मंत्रियों को हटाकर नए चेहरों को जगह दी जा सकती है। माकन ने कहा, हमारे यहां ऐसे भी लोग हैं जो सरकारी पदों को छोड़कर संगठन के लिए काम करने को आतुर हैं। हमें ऐसे लागों पर गर्व है। सरकार द्वारा करवाए गए विकास कार्यों व हमारे ऐसे साथी जो सबकुछ छोड़कर संगठन के साथ काम करने को तैयार हैं, ऐसे लोगों के साथ मिलकर 2023 में कांग्रेस वापस सरकार बनाएगी। कांग्रेस नेता के अनुसार, मंत्रियों ने खुद उनका उदाहरण दिया जब 2013 में उन्होंने संगठन के लिए काम करने के वास्ते मंत्री पद छोड़ दिया था। माकन द्वारा अपनी रपट दिल्ली में आलाकमान को सौंपे जाने के बाद राज्य में बदलाव की संभावना के सवाल पर माकन ने मुस्कुराते हुए कहा, मैं ही दिल्ली हूं।

पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के समर्थकों द्वारा सत्ता में अधिक भागीदारी की मांग के बीच राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार व जिला तथा ब्लॉक स्तर पर सांगठनिक नियुक्तियां जल्द होने की उम्मीद है। पूर्व उपमुख्यमंत्री पायलट के लिए कोई भूमिका तय किए जाने के सवाल पर माकन ने कहा, हर कोई आलाकमान पर विश्वास रखता है सबने यही कहा है कि जो आलाकमान तय करेगा जिस भूमिका के लिए तय करेगा वह सबको मंजूर है। इसके साथ ही माकन ने राज्य की अशोक गहलोत सरकार के प्रदर्शन पर मुहर लगाते हुए शुक्रवार को कहा कि सभी विधायक अपने अपने निर्वाचन क्षेत्रों में हुए विकास कार्यों से खुश हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पार्टी का जोर अब सरकार व संगठन में बेहतर तालमेल पर है ताकि 2023 में आगामी विधानसभा चुनाव में राज्य में एक बार फिर कांग्रेस की सरकार बने। माकन ने कहा, जब मैं विधायकों से बात कर रहा था तो हर विधायक ने मुझे बताया कि उसके निर्वाचन क्षेत्र में किस तरह से अभूतपूर्व विकास कार्य हुए हैं। चाहे शिक्षा हो, स्वास्थ्य हो, सड़क हो, अस्पतालों की बात हो … एक के बाद एक विधायक आकर बता रहे थे।सब विधायक संतुष्ट हैं और सब विकास की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। माकन ने शुक्रवार को कांग्रेस प्रदेश कार्यालय में प्रदेश कार्यकारिणी से चर्चा की।
कांग्रेस नेता ने कहा, पिछले तीन दिन में मैंने राजस्थान में हमारे कांग्रेस व कांग्रेस समर्थक सभी विधायकों से बात की। 115 विधायकों से विधानसभा में चर्चा की। इसके अलावा, मुख्यमंत्री गहलोत, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, विधानसभा अध्यक्ष डॉ सीपी जोशी व पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट से अलग अलग, सबसे मैंने बात की। उन्होंने कहा, हमने मुख्य रूप से इस बात पर चर्चा की कि 2023 में किसी प्रकार से हम कांग्रेस पार्टी की सरकार वापस कैसे ला सकते हैं। प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में भी हमने इस पर चर्चा की कि सरकार व संगठन में बेहतर समन्वय हो सके ताकि हम लोग मिलकर 2023 में कांग्रेस को वापस सत्ता में ला सकें। राज्य की अशोक गहलोत सरकार दिसंबर 2018 में सत्ता में आई और अपना लगभग आधा कार्यकाल पूरा कर चुकी है। राजस्थान की 200 सदस्यों वाली विधानसभा में कांग्रेस के 106 विधायक हैं। इसके अलावा 13 निर्दलीय विधायकों का उसे समर्थन प्राप्त है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी मंत्रिपरिषद में नौ और मंत्री रख सकते हैं। इस समय गहलोत मंत्रिपरिषद् में मुख्यमंत्री सहित कुल 21 मंत्री हैं।
बसवराज बोम्मई ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली; ईमानदार सरकार का आश्वासन दिया
बसवराज बोम्मई ने कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने यहां राज भवन में उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके साथ ही राज्य में नेतृत्त्व परिवर्तन को लेकर महीनों से चल रही अटकलों पर विराम लग गया। कर्नाटक में भाजपा के विधायक दल ने मुख्यमंत्री पद पर असमंजस को खत्म करते हुए 61 वर्षीय बोम्मई को अपना नया नेता चुना था। बोम्मई ने कद्दावर नेता बीएस येदियुरप्पा का स्थान लिया है। उत्तर कर्नाटक से लिंगायत समुदाय के नेता बोम्मई को येदियुरप्पा का करीबी माना जाता है। पार्टी सूत्रों ने बताया कि बोम्मई को मुख्यमंत्री बनाने में वरिष्ठ भाजपा नेता की पूरी सहमति है। जैसे ही बोम्मई ने मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला, मंत्री पद के उम्मीदवारों ने नए मंत्रिमंडल में अपना स्थान सुरक्षित करने के लिए लामबंदी शुरू कर दी। नए मुख्यमंत्री के सामने मंत्रिमंडल का विस्तार करना पहली बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि उन्हें राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा के भीतर गुटों के बीच संतुलन बनाए रखते हुए कैबिनेट गठन की कवायद से गुजरना होगा।
पार्टी के पुराने नेताओं और 2019 में कांग्रेस-जद(एस) गठबंधन छोड़ने के बाद भाजपा में शामिल हुए कई विधायक मंत्री पद के लिये दावेदारी पेश कर रहे हैं। बुधवार को बोम्मई ने अकेले शपथ ली। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही मंत्रिमंडल का विस्तार करेंगे। मंत्रिमंडल विस्तार पर पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मैंने केंद्रीय पर्यवेक्षक धर्मेंद्र प्रधान, जी किशन रेड्डी और महासचिव सिंह से मुलाकात की थी, उन्होंने कहा कि आज इस पर चर्चा नहीं करते हैं, जब वे दिल्ली वापस चले जाएंगे, तब देखते हैं। यह पूछने पर कि क्या वह मंत्रिमंडल विस्तार के लिए ‘‘आषाढ़’’ महीने का इंतजार करेंगे जिसे अशुभ माना जाता है। इस पर उन्होंने कहा कि नऐसा कुछ नहीं है। हम जल्द से जल्द इसे करेंगे, ज्यादा वक्त नहीं लेंगे क्योंकि मुझे कोविड और बाढ़ के कारण काम करने के लिए पूरी टीम चाहिए। यह पूछने पर कि क्या उनके मंत्रिमंडल में पहले वाले मंत्री ही रहेंगे, इस पर बोम्मई ने कहा कि ये सभी मंत्रिमंडल गठन का हिस्सा हैं और सभी के बारे में मिलकर फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वह अपने दिल्ली दौरे पर इस पर चर्चा तथा फैसला करेंगे। शपथ ग्रहण समारोह से पहले बोम्मई ने येदियुरप्पा, प्रधान, रेड्डी और सिंह से मुलाकात की।
अगले सप्ताह हो सकता है मंत्रिमंडल का विस्तार: कर्नाटक के मुख्यमंत्री
कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा कि राज्य के कुछ जिलों में कोविड-19 के बढ़ते मामलों और बाढ़ के मद्देनजर मंत्रिमंडल का विस्तार अगले सप्ताह तक हो सकता है। मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार दिल्ली आए बोम्मई ने कहा कि उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ बैठक में ‘‘जल्द से जल्द मंत्रिमंडल विस्तार की आवश्यकता के बारे में बताया।’’ उन्होंने कहा कि हमें अगले सप्ताह तक मंजूरी मिल जाएगी। मैंने आज की बैठक में संभावितों की सूची पर चर्चा नहीं की है। लेकिन इस मुद्दे पर जल्द निर्णय की जरूरत बतायी। बोम्मई ने कहा कि वह इस मुद्दे पर फिर से दिल्ली का दौरा कर सकते हैं और उन्होंने भाजपा आलाकमान से समय मांगा है। सत्तारूढ़ भाजपा के भीतर सभी धड़े के बीच संतुलन बनाते हुए मंत्रिमंडल का विस्तार करना बोम्मई के लिए बड़ी चुनौती होगी।

बोम्मई ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार रबर स्टांप नहीं होगी। उन्होंने कहा कि कोई बोम्मई स्टांप या रबर स्टांप नहीं, मेरे प्रशासन में केवल भाजपा स्टांप होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक के बारे में बोम्मई ने कहा कि उन्होंने उनको कोविड-19 और बाढ़ की स्थिति के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मैंने राज्य में टीके की कमी के बारे में चर्चा की। प्रधानमंत्री ने पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है। बोम्मई ने केंद्रीय परियोजनाओं की मंजूरी में तेजी लाने के लिए एक छोटे कार्यसमूह के गठन और दिल्ली में कर्नाटक आयुक्तालय को सक्रिय तथा जवाबदेह बनाने की भी घोषणा की। बोम्मई ने प्रधानमंत्री के अलावा गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी और जल शक्ति मंत्री से मुलाकात की। बोम्मई ने यहां होटल अशोक में राज्य के सांसदों के लिए दोपहर के भोजन का भी आयोजन किया। बी एस येदियुरप्पा के इस्तीफे के बाद भाजपा विधायक दल के नेता चुने गए बोम्मई ने बुधवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
विपक्ष का नेतृत्वः ममता ने कहा- सबकुछ परिस्थितियों पर निर्भर करेगा
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी को रोकने के लिए विपक्ष का चेहरा बनाए जाने के मुद्दे पर कहा कि ‘‘यह सब परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।’’ इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यदि उनके अलावा किसी और को विपक्ष का नेतृत्व दिया जाता है तो उन्हें कोई समस्या नहीं है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद राष्ट्रीय राजधानी की पहली यात्रा पर आईं बनर्जी ने कहा कि चुनाव में उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस का नारा था- ‘खेला होबे’, जो कि अब देशभर में गूंजेगा। उन्होंने कहा कि अब “अच्छे दिन” की बजाय “सच्चे दिन” आने का समय है। बनर्जी को 2024 के आम चुनाव के लिए उनकी पार्टी द्वारा विपक्ष का चेहरा बनाने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन इसे लेकर खुद उनके भीतर मिलाजुला भाव है। नेतृत्व के मुद्दे पर उन्होंने कहा, “मैं स्थिति से मुकाबले के लिए सभी विपक्षी दलों की सहायता करना चाहती हूं। मैं नेता नहीं, बल्कि आम कार्यकर्ता बनना चाहती हूं।” बनर्जी से यहां संवाददाताओं ने पूछा कि क्या वह विपक्ष का चेहरा बनना चाहती हैं, जिसके जवाब में उन्होंने कहा, “मैं कोई राजनीतिक भविष्यवक्ता नहीं हूं। यह परिस्थिति पर निर्भर करता है। अगर कोई और नेतृत्व करता है तो मुझे कोई समस्या नहीं। जब इस मुद्दे पर चर्चा होगी तब हम निर्णय ले सकते हैं। मैं अपना निर्णय किसी पर थोप नहीं सकती।”
बनर्जी ने कहा कि जब चुनाव नजदीक आएंगे तो भगवा पार्टी से लड़ने के लिए कई चेहरे होंगे। उन्होंने कहा, ‘‘आकार के आधार पर भाजपा बड़ी हो सकती है लेकिन राजनीतिक नजरिये से विपक्ष, भाजपा से अधिक मजबूत है। वे इतिहास रचेंगे।’’ तृणमूल अध्यक्ष बनर्जी, प्रधानमंत्री के सबसे तीखे आलोचकों में से एक हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल एक साथ बैठेंगे और इस पर निर्णय करेंगे कि मोदी के खिलाफ कौन उम्मीदवार होगा। जब उनसे पूछा गया कि क्या एकजुट विपक्ष के लिए उन्होंने ‘ खेला होबे’ का नारा तय किया है जिसका इस्तेमाल पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उनके द्वारा किया गयाथा, तो बनर्जी ने हिंदी में कहा,‘‘पूरे देश में खेला होगा।’’ उन्होंने कहा, “ यह निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है…जब मोदी अगला चुनाव लड़ेंगे तब उन्हें पूरे देश से लड़ना होगा।” मुख्यमंत्री ने कहा कि अगला लोकसभा चुनाव मोदी बनाम एकजुट विपक्ष होगा। उन्होंने भाजपा के 2014 के चुनावी नारे पर कटाक्ष करते हुए कहा, “मैं सच्चे दिन देखना चाहती हूं, बहुत अच्छे दिन देख लिये।” पांच दिवसीय यात्रा पर दिल्ली आईं बनर्जी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से चाय पर मुलाकात की और दिल्ली के मुख्यमंत्री से भी मिलीं। मंगलवार को उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस के अन्य नेताओं से मुलाकात की थी। बनर्जी ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल के नेता लालू प्रसाद यादव से फोन पर बातचीत की थी। कांग्रेस पार्टी और तृणमूल से उसके संबंध के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी से उनका संबंध दशकों पुराना है। बनर्जी ने कांग्रेस के भविष्य पर टिप्पणी करने से मना कर दिया और कहा कि यह पार्टी का अंदरूनी मामला है। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी विपक्ष की एकता चाहती हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘मैं उनके आंतरिक मामले पर टिप्पणी नहीं करना चाहती हूं और मैं अन्य राजनीतिक पार्टी की कार्यप्रणाली में हस्तक्षेप नहीं करना चाहती।’’ उन्होंने कहा कि राजनीति में गठबंधन और समझौते फर्जी होते हैं और लक्ष्य बदलते रहते हैं। भाजपा के विरुद्ध क्षेत्रीय दलों की एकता नहीं होने के मुद्दे पर बनर्जी ने कहा, “उत्तर प्रदेश में अगर संबंधित नेताओं को भाजपा के खिलाफ लड़ना है तो उन्हें साथ आना होगा। यदि मायावती जैसी नेता अकेले लड़ना चाहती हैं तो वह लड़ेंगी। इसमें मैं क्या कर सकती हूं?” उन्होंने कहा, “मैं सभी का सम्मान करती हूं, जितना सम्मान किया जाना चाहिए।”
पेगासस के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि स्थिति आपातकाल से भी ज्यादा गंभीर है और केंद्र सरकार जवाब नहीं दे रही। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पार्टी मजबूत है और उन्हें ‘गंभीरता’ और ‘एकजुटता’ से सुनिश्चित करना होगा कि मतों का विभाजन नहीं हो। तृणमूल कांग्रेस नेता ने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में और भी क्षेत्रीय दल अपना रुख तय करेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘ अगर सभी क्षेत्रीय पार्टियां एक साथ आ जाएं, तो वे एक पार्टी प्रणाली से कहीं अधिक मजबूत होंगी।’’ जब उनसे पूछा गया कि क्या वह उन पार्टियों से संपर्क करेंगी जिनके बारे में माना जाता है कि उनका भाजपा के साथ दोस्ताना रिश्ता है। बनर्जी ने कहा कि उनके बीजद के नवीन पटनायक, वाईएसआर कांग्रेस के जगन मोहन रेड्डी, द्रमुक के एमके स्टालिन और अन्य विरोधी दल के नेताओं से अच्छे संबंध हैं। ममता बनर्जी ने कहा, ‘‘आज अगर नहीं हो सका, तो कल हो जाएगा। अगर राजनीतिक तूफान आता है तो आप रोक नहीं सकते।’’ हालांकि, जब बनर्जी से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘‘वह इस समय भाजपा के साथ हैं। अगर वह भाजपा का साथ छोड़ते हैं तब देखा जाएगा।’’ बनर्जी से जब उन्हें ‘बाहरी’ कहे जाने के बारे में सवाल किया गया तो वह अपना आपा खोती नजर आईं। उन्होंने कहा, ‘‘ नरेंद्र मोदी गुजरात से आते हैं क्या वह यहां भीतरी हैं। ममता बनर्जी बंगाल से आती हैं और उन्हें बाहरी माना जाता है…मैं आम आदमी हूं, इसलिए सभी से बात कर सकती हूं।’’ तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष बनर्जी ने कहा, “सभी जगह वे प्रवर्तन निदेशालय आयकर विभाग को छापा मारने के लिए भेज रहे हैं। यहां कोई जवाब नहीं दे रहा है। लोकतंत्र में सरकार को जवाब देना चाहिए। स्थिति बेहद गंभीर है, यह आपातकाल से भी ज्यादा गंभीर है।” बनर्जी ने आरोप लगाया कि उनका फोन हैक किया गया। उन्होंने कहा, ‘‘जब मैं (रणनीतिकार) प्रशांत किशोर और (भतीजा एवं तृणमूल कांग्रेस महासचिव) अभिषेक बनर्जी से बात करती थी तब मेरा फोन हैक किया गया कृपया इसे याद रखें।

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