कुमकुम नागर ने स्थायी लोक अदालत में वरिष्ठ सदस्य का पदभार ग्रहण किया

 

ग्रेनो। ( संवाददाता) प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती । वह आदमी को अपने बल पर ऊंचाई की ओर खींच ले जाती है। प्रतिभा संपन्न लोगों पर जब समाज की नजर पड़ती है तो समाज भी उसे सर आंखों पर बिठा लेता है। कुछ ऐसा ही हुआ है श्रीमती कुमकुम नागर के साथ। जिनकी प्रतिभा इस समय अपने सकारात्मक स्थान पर सम्मानित होती हुई दिखाई दी है।


श्रीमति कुमकुम नागर द्वारा स्थायी लोक अदालत, ज़िला गौतमबुद्ध नगर उ प्र में वरिष्ठ सदस्य ( न्यायिक) का पदभार ग्रहण किया है l उनको स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष / चेयरमैन श्री अल्लाह रक्खे खान साहब ( ज़िला जज सेवा निवृत) द्वारा पद भार ग्रहण कराया गया l पद भार ग्रहण करने से पूर्व श्रीमति कुमकुम नागर द्वारा माननीय अध्यक्ष जी का पुष्प गुच्छ भेट करके अभिनंदन किया l
नव सृजित स्थायी लोक अदालत, ज़िला गौतमबुद्ध नगर में उत्तर प्रदेश शासन द्वारा दो लोगों को माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद के परामर्श से तथा उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की संस्तुति पर और राज्य सरकार के अनुमोदन पर महामहिम राज्यपाल महोदया आनंदी बैन पटेल की स्वीकृति द्वारा नियुक्ति की गई है l
श्रीमति कुमकुम नागर पत्नी श्री राम शरण नागर एडवोकेट पूर्व अध्यक्ष, ज़िला न्यायालय बार एसोसिएशन, गौतमबुद्ध नगर एवं श्रीमति बिबन शर्मा पत्नी श्री विजय कुमार शर्मा पूर्व ज़िला जज को उत्तर प्रदेश शासन द्वारा नियुक्त किया गया है l
श्रीमति कुमकुम नागर ने अधिवक्ता के रूप में ज़िला न्यायालय, गौतमबुद्ध नगर में लगभग 10 वर्ष कार्य किया है l वे केंद्र सरकार से नोटरी अधिवक्ता भी रही हैं तथा ज़िला उपभोक्ता फोरम / आयोग, ज़िला गौतमबुद्ध नगर में वरिष्ठ सदस्य एवं कार्यवाहक अध्यक्ष / चेयरमैन भी रह चुकीं हैं l स्थायी लोक अदालत में पद धारण करने से पूर्व श्रीमति कुमकुम नागर परिवार न्यायालय, ज़िला गौतमबुद्ध नगर में प्रधान परामर्श दाता के रूप में कार्य कर रही थीं l
श्रीमति कुमकुम नागर, चौधरी रति राम सरपंच बरौला की पुत्री हैं l
श्रीमती कुमकुम नागर की यह विशेषता रही है कि उन्होंने जिस दायित्व को भी संभाला है उसे ही अपनी पूर्ण निष्ठा के साथ निभाया है। अपनी नियुक्ति पर वह कहती हैं कि समाज के प्रति वह ईमानदारी से काम करने को प्राथमिकता देंगी। जिससे एक नई आदर्श व्यवस्था को स्थान दिया जा सके। उनका कहना है कि गरीबों के लिए विशेष रूप से काम करना चाहेंगी। ‘उगता भारत’ के साथ एक विशेष बातचीत में श्रीमती नागर ने कहा कि उनकी इच्छा रहेगी कि जिन लोगों की कोई आवाज नहीं होती वह उनकी आवाज बनें।

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