कोरोना महामारी से दुनिया को स्वदेशी वैक्सीन ही बचाएगी

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जयंतीलाल भंडारी

चंद रोज पहले ही अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच टेलिफोन वार्ता हुई। इसमें बाइडेन ने कहा कि अमेरिका कोरोना वैक्सीन के उत्पादन की खातिर भाररत को कच्चे माल की आपूर्ति पर लगी रोक हटाएगा। साथ ही, इसकी आसानी से आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह कोरोना महामारी की शुरुआत में भारत ने अमेरिका को मदद भेजी थी, उसी तरह अब अमेरिका भी भारत की मदद के लिए प्रतिबद्ध है। बेशक, आज जब कोरोना की दूसरी घातक लहर के बीच स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थिति दिखाई दे रही है, तब देश और दुनिया की कोरोना वैक्सीन की जरूरतों की पूर्ति के लिए रणनीतिपूर्वक आगे बढ़ रहे भारत के लिए अमेरिका की नई मदद महत्वपूर्ण है। इससे भारत कोरोना वैक्सीन निर्माण के नए मुकाम की ओर तेजी से आगे बढ़ते हुए वैश्विक मानव कल्याण में अहम भूमिका निभा सकेगा।

टीका बनाने में तेजी
कोई एक साल पहले कोरोना संक्रमण का फैलाव होने के बाद देश में वैक्सीन से संबंधित शोध और उत्पादन के विचार आने शुरू हुए। सामान्य तौर पर किसी बीमारी का टीका बनाने में कई वर्ष लगते हैं, लेकिन भारत ने कुछ महीनों में ही टीका बनाने का मुश्किल लक्ष्य पूरा किया। साथ ही, बड़े पैमाने पर इसका उत्पादन भी शुरू कर दिया गया। यह भी महत्वपूर्ण है कि देश में कोरोना वैक्सीन के दाम दुनिया में सबसे कम हैं। ऑक्सफर्ड-एस्ट्राजेनेका के साथ मिलकर बनाई गई सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया की ‘कोविशील्ड’ और स्वदेश में विकसित भारत बायोटेक की ‘कोवैक्सीन’ का उपयोग 16 जनवरी से शुरू हुए देशव्यापी टीकाकरण अभियान में किया जा रहा है। 26 अप्रैल तक देश में कोरोना वैक्सीन की 14 करोड़ से अधिक खुराक दी जा चुकी थी।

 

20 अप्रैल को केंद्र सरकार ने टीका वितरण के जो नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, वे कोरोना की रोकथाम के लिहाज से ही नहीं, अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दृष्टि से भी कारगर साबित होंगे। इसके तहत 1 मई से 18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी भारतीयों को टीका लगाया जा सकेगा। सरकार स्वास्थ्यकर्मियों और अग्रिम पंक्ति में काम करने वालों के नि:शुल्क टीकाकरण का काम जारी रखेगी। राज्य सरकारों को यह अधिकार दिया गया है कि वे देसी या विदेशी कंपनियों से टीके की खरीद और अपने यहां टीकाकरण से जुड़े आवश्यक निर्णय ले सकेंगी। यह भी महत्वपूर्ण है कि 26 अप्रैल को केंद्र सरकार ने कोरोना की वैक्सीन बनाने वाली देश की दोनों कंपनियों से कहा कि वे वैक्सीन की कीमत घटाएं।

केंद्र सरकार की नई नीति से जहां टीका निर्माता कंपनियों के लिए बड़ा बाजार खुल गया है, वहीं मानव कल्याण के मद्देनजर भारत के लिए कोरोना वैक्सीन का वैश्विक उत्पादक देश बनने का रास्ता भी साफ हुआ है। देश में सरकार के समर्थन से दुनिया की सबसे बड़ी टीका विनिर्माता सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया अपनी मासिक उत्पादन क्षमता बढ़ाकर 20 करोड़ खुराक कर सकती है। भारत बायोटेक सालाना 70 करोड़ खुराक और जायडस कैडिला सालाना 24 करोड़ खुराक उत्पादन करने की डगर पर आगे बढ़ सकती हैं। इतना ही नहीं, सरकार सीरम इंस्टिट्यूट और भारत बायोटेक को क्रमश: 3,000 करोड़ रुपये और 1,500 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि भी देने वाली है।

स्पष्ट है कि भारत कोरोना वैक्सीन का वैश्विक स्तर पर बड़ा सप्लायर बनने की तैयारी कर रहा है। इस दिशा में 15 अप्रैल को सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशंस (सीडीएससीओ) की तरफ से कई अहम फैसले लिए गए हैं। भारत ने डब्ल्यूएचओ की इमरजेंसी यूज लिस्टिंग (ईयूएल) में सूचीबद्ध कोरोना वैक्सीन के भारत में आने का रास्ता साफ कर दिया है, जिससे तत्काल विदेशी वैक्सीन का आयात किया जा सकेगा। वैक्सीन उत्पादन से जुड़े कच्चे माल का आयात करके बड़ी मात्रा में कोरोना वैक्सीन का निर्यात भी किया जा सकेगा। अब शीघ्र ही विदेशी कंपनियां भारत में अपनी सब्सिडियरी या फिर अपने अधिकृत एजेंट के माध्यम से वैक्सीन का उत्पादन कर सकेंगी।

हैदराबाद की प्रमुख दवा कंपनी डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज (डीआरएल) कोविड-19 के लिए रूस में तैयार टीका स्पूतनिक वी के लिए भारतीय साझेदार है। इसके जरिए स्तूपनिक वी का 60 से 70 फीसदी वैश्विक उत्पादन भारत में होगा। इतना ही नहीं क्वाड ग्रुप के सदस्य देशों ने भारत में 2022 के अंत तक कोरोना वैक्सीन के सौ करोड़ डोज बनाने और इसके लिए वित्तीय और अन्य संसाधन जुटाने में मदद करने का जो फैसला किया है, उससे भी भारत को वैक्सीन महाशक्ति के रूप में उभरने में मदद मिलेगी।

भारत की अहम भूमिका
माना जा रहा है कि कुछ विकसित देश साल 2021 के अंत तक कोरोना टीकाकरण के पूर्ण लक्ष्य को प्राप्त कर लेंगे, लेकिन ज्यादातर देशों को यह लक्ष्य प्राप्त करने में समय लगेगा। यदि सभी गरीब और विकासशील देशों की पहुंच वैक्सीन तक संभव नहीं हो सकी, तो विश्व मानवता और विश्व अर्थव्यवस्था दोनों को नुकसान उठाना पड़ेगा। करोड़ों लोगों को कोरोना की पीड़ा से बचाना तो मुश्किल हो ही जाएगा, वैश्विक अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में भी कठिनाई बढ़ जाएगी। कोरोना नए-नए रूपों में लोगों की जान लेता रहेगा और बार-बार वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित होती रहेगी।

ऐसे में गरीब और विकासशील देशों के लोगों के लिए कोरोना टीकाकरण में भारत की कल्याणकारी भूमिका महत्वपूर्ण हो जाएगी। जरूरी है कि कोरोना से हाहाकार के बीच भारत के वैक्सीन का वैश्विक हब बनने की जो नई संभावनाएं निर्मित हुई हैं, उन्हें मुट्ठी में लेने का हरसंभव प्रयास किया जाए ताकि यह मौका जाया न हो।

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