वैकल्पिक ईंधन अपनाने का यह सही समय है

नीरज कुमार दुबे

जनता जल्दी से जल्दी इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर आकर्षित हो इसके लिए सरकार खुद जल्दी से जल्दी पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग करने की योजना भी बना चुकी है। केंद्रीय मंत्री गडकरी ने कहा है कि वह अपने मंत्रालय की सभी गाड़ियों को इलेक्ट्रिक वाहन में बदलने जा रहे हैं।

अपनी खुद की गाड़ी लेने का सपना हर किसी का होता है और आजकल यह सपना आसानी से पूरा भी हो जाता है क्योंकि आसान किश्तों में कार लोन उपलब्ध हो जाते हैं। तो अब कार लेना तो आसान है लेकिन पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों को देखते हुए उसमें सफर करना मुश्किल होता जा रहा है। अब चूंकि पेट्रोलियम उत्पादों पर हम लगभग पूरी तरह आयात पर ही निर्भर हैं इसीलिए यह परेशानी बढ़ती जा रही है लेकिन अब मोदी सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की योजना तैयार की है ताकि लोगों की जेब पर भी असर नहीं पड़े और पर्यावरण को शुद्ध भी रखा जा सके।

इसके लिए केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने योजना बनाई है कि दो साल के अंदर पेट्रोलियम ईंधन और बिजली से चलने वाली गाड़ियों की कीमत एक जैसी कर दी जायेगी ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग बिजली से चलने वाले वाहनों को खरीदें। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का इस बारे में कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने से प्रदूषण में तो कमी आयेगी ही स्पीड भी बढ़ेगी। इस बार के बजट में भी जो स्वैच्छिक वाहन स्क्रैप पॉलिसी की घोषणा की गयी है उससे इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा इस समय इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर तमाम सरकारें सब्सिडी भी दे रही हैं और वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन भी ज्यादा से ज्यादा बनाये जा रहे हैं। यही नहीं इलेक्ट्रिक गाड़ियों में चूंकि लिथियम आयोन बैटरी होने से उसकी कीमत पेट्रोलियम ईंधन से चलने वाली गाड़ियों से ज्यादा होती है इसलिए ऐसी बैटरी के निर्माण पर भी काम चल रहा है जिसकी कीमत ज्यादा नहीं हो। मोदी सरकार इस संबंध में नीति आयोग, इसरो और अन्य विभागों के साथ समन्वय बनाये हुए है। हालांकि इस बार के बजट में कई ऑटो कंपोनेंट पर कस्टम ड्यूटी बढ़ा दी गयी है जिससे इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं के लिए कीमतों को काबू में रखना मुश्किल हो सकता है इसलिए सरकार को इस मुद्दे पर गौर करना होगा।

जनता जल्दी से जल्दी इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर आकर्षित हो इसके लिए सरकार खुद जल्दी से जल्दी पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग करने की योजना भी बना चुकी है। केंद्रीय मंत्री गडकरी ने कहा है कि वह अपने मंत्रालय की सभी गाड़ियों को इलेक्ट्रिक वाहन में बदलने जा रहे हैं। उन्होंने अन्य विभागों से भी इसका अनुसरण करने को कहा ताकि तेल के आयात पर भारत की निर्भरता में कमी लायी जा सके। यही नहीं उन्होंने आंकड़ों के हवाले से बताया है कि अकेले दिल्ली में 10 हजार इलेक्ट्रिक बसों के इस्तेमाल से हर महीने 30 करोड़ रुपये की बचत होगी।

नितिन गडकरी का यह भी सुझाव है कि सरकार को परिवारों को रसोई गैस के लिये सब्सिडी देने की बजाए बिजली से चलने वाले खाना पकाने के उपकरण खरीदने को लेकर सहायता देनी चाहिए। ‘गो इलेक्ट्रिक’ अभियान शुरू किये जाने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि बिजली से खाना पकाने की प्रणाली साफ-सुथरी है और इससे गैस के लिये आयात पर निर्भरता भी कम होगी।

इसके अलावा ईंधन के बढ़ते दाम को देखते हुए सड़क परिवहन मंत्रालय ने लिथियम ऑयन और हाइड्रोजन सेल जैसे वैकल्पिक ईंधन के क्षेत्र में संभावना टटोलने के लिये कदम उठाया है। फिलहाल देश 8 लाख करोड़ रुपये का जीवाश्म ईंधन का आयात करता है। देखा जाये तो वैश्विक बाजार में जीवाश्म ईंधन के दाम बढ़ रहे हैं और भारत में 70 प्रतिशत जीवाश्म ईंधन का आयात होता है।

बहरहाल, मोदी सरकार वैकल्पिक ईंधन के उपायों पर तेजी से काम कर रही है पर यह तभी सफल हो सकता है जब ज्यादा से ज्यादा जन सहयोग मिले। इलेक्ट्रिक वाहनों को अपना कर हम इसमें सहयोग की शुरुआत कर सकते हैं। साथ ही आज जो पेट्रोल-डीजल के दामों में लगातार वृद्धि की मार हम झेलते रहते हैं उससे भी निजात मिलेगी। देश ने भले देर से ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम उठाये हैं लेकिन कहा जा सकता है कि देर आये दुरुस्त आये। पेट्रोल के दाम 100 रुपये के ऊपर निकलने के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसी सप्ताह कहा था कि पिछली सरकारों ने देश के ऊर्जा आयात पर निर्भरता में कमी लाने पर ध्यान दिया होता तो मध्यम वर्ग पर इतना बोझ नहीं बढ़ता। ईंधन के दाम में लगातार वृद्धि के बीच प्रधानमंत्री ने बताया था कि भारत ने 2019-20 में अपनी तेल जरूरतों का 85 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस की जरूरत का 53 प्रतिशत से अधिक आयात से पूरा किया। अब आप ही सोचिये कि विदेशों पर इस निर्भरता को कम करके यदि हम ईंधन के मामले में आत्मनिर्भर बनें तो आर्थिक रूप से देश कितने फायदे में रहेगा साथ ही हम हमारे पर्यावरण की भी रक्षा कर पाएंगे।

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