सनातन हिंदू संसद के स्थापना दिवस पर केंद्रीय राज्य मंत्री प्रताप चंद्र सारंगी बोले – हिंदू और हिंदुत्व हमारे लिए गौरव का विषय है, इनमें सांप्रदायिकता लेश मात्र भी नहीं

 

नई दिल्ली ।(अजय आर्य ) सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय में राज्यमंत्री प्रताप चंद्र सारंगी ने कहा है कि हिंदू हमारी राष्ट्रीयता का प्रतीक है और हिंदुत्व हमारी जीवन शैली का प्रतीक शब्द है। जिनमें सांप्रदायिकता लेश मात्र भी नहीं है । इसीलिए ये दोनों शब्द हमारे लिए गर्व और गौरव का विषय हैं। उन्होंने हिंदू शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि यह शब्द हमें सिंधु से मिला है। जो कि दुर्भाग्य से आज बंटवारे के बाद पाकिस्तान में चली गई है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हिंदुत्व हमारी जीवन शैली है, जो संपूर्ण मानवता के कल्याण की भावना पर आधारित है। मानवता, करुणा, दया, प्रेम ,भाईचारा आदि ये सभी इस पवित्र जीवन शैली के विशेष आधार हैं।


स्वामी विवेकानंद की 158 वीं जयंती के अवसर पर यहां स्थित इस्कॉन मंदिर में सनातन हिंदू संसद के स्थापना दिवस पर लोगों को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का विराट दर्शन हिंदुत्व को व्यापकता और विशालता प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि आज भी संसार की सभी समस्याओं का समाधान हम हिंदुत्व की जीवन शैली को अपनाकर ही खोज सकते हैं । केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत फिर से अखंड बनने की ओर प्रधानमंत्री मोदी के सक्षम नेतृत्व में अग्रसर हो रहा है । हम एक मजबूत इच्छाशक्ति वाले नेतृत्व के साथ मजबूत इच्छाशक्ति रखने वाले भारत को आगे बढ़ता को देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृण्वन्तो विश्वमार्यम् का संकल्प हमारा प्राचीन संकल्प है ,जिसे आज क्रियान्वित करने का समय आ गया है।


कार्यक्रम के आयोजक डॉक्टर विवेक कौल ने कहा कि उन्हें भारतीयता, भारतीय संस्कृति और भारतीय जीवन मूल्यों से असीम अनुराग है। जिस पर उन्हें बहुत गर्व और गौरव की अनुभूति होती है ।इसीलिए वह भारत के इन जीवन मूल्यों को सनातन हिंदू संसद के माध्यम से विश्व के कोने कोने में फैलाने का इरादा रखते हैं।
हिंदू संस्कृति के लिए समर्पित संत यती नरसिंहानंद ने इस अवसर पर अपनी सिंह गर्जना करते हुए कहा कि इस समय हिंदुत्व के लिए व्यापक खतरा है। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व के खतरों को चुन चुन कर दूर करने का संकल्प लेकर आगे बढ़ना होगा, अन्यथा हिंदू संस्कृति संसार से विलुप्त हो जाएगी। यति नरसिंहानंद ने कहा कि यदि हिंदू संस्कृति को मिटाकर इस्लाम भारत में सफल हुआ तो वह सारे संसार के लिए बहुत खतरनाक होगा। क्योंकि तब इतनी बड़ी संख्या में रहने वाले लोग जिहादी मानसिकता को लेकर संसार को डराने धमकाने और खत्म करने की योजनाओं पर काम करेंगे। इसलिए भारत का हिंदू राष्ट्र बनना न केवल भारत के बल्कि संसार के भी हित में है।
हिंदूवादी नेता सर्वेश मित्तल ने इस अवसर पर कहा कि भारत की वैदिक संस्कृति के जीवन मूल्यों को मिटाने के लिए भारत ने सदियों से विदेशी आक्रमणकारियों के अत्याचार और आक्रमण सहे हैं और यह आक्रमण आज भी निरंतर जारी हैं। उन्होंने कहा कि हमें आक्रमण के बदले हुए स्वरूप को समझना होगा और उसी के अनुसार अपनी रणनीति में परिवर्तन पर आसन्न संकट से पार पाना होगा।


जबकि हिंदूवादी चिंतक और लेखक विनोद सर्वोदय ने कहा कि औरंगजेबवादी सोच आज भी जिंदा है ,जो हिंदू को समाप्त कर इस्लामी जेहाद के माध्यम से भारत का इस्लामीकरण करने की प्रक्रिया में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के इस पावन अवसर पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि इस प्रकार की मानसिकता में लगे लोगों का कठोरता के साथ दमन किया जाएगा। कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त करते हुए लेखक और इतिहासकार डॉ राकेश कुमार आर्य ने कहा कि भारत के इतिहास के साथ गंभीर छेड़छाड़ केवल इसलिए की गई है कि संसार से हिंदू विनाश को अंतिम स्वरूप दिया जा सके। उन्होंने कहा कि आज भारत के वास्तविक इतिहास को फिर से लोगों के सामने गौरव पूर्ण ढंग से प्रस्तुत करने की आवश्यकता है, जिससे कि हमारी युवा पीढ़ी को अपने गौरवपूर्ण अतीत का बोध हो सके। संगठन की महासचिव रुचिका अग्रवाल ने कहा कि फिल्मों के माध्यम से जिस प्रकार भारतीय संस्कृति का अपमान किया जा रहा है वह असहनीय है। उन्होंने कहा कि जानबूझकर हमारी उच्च और महान सांस्कृतिक परंपराओं को तुच्छ करके दिखाया जा रहा है। जिस पर हमें अभी से जागरूक होकर काम करने की आवश्यकता है।


सनातन हिंदू संसद के स्थापना दिवस के इस पवित्र अवसर पर अन्य कई वक्ताओं, विचारकों, शिक्षा प्रेमी और हिंदू चिंतक राष्ट्रवादी लोगों ने अपने विचार व्यक्त कर इस बात पर बल दिया कि भारत की सनातन संस्कृति का प्रचार प्रसार वैश्विक स्तर पर होना चाहिए। जिससे संसार में वास्तविक शांति स्थापित करने में मदद मिलेगी । वक्ताओं ने डॉक्टर विवेक कौल का इस बात के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया कि उन्होंने इस बेहतरीन विचार को लेकर आगे बढ़ने का संकल्प लिया लिया है। वक्ताओं का मानना था कि भारत की वैदिक संस्कृति ही वैश्विक संस्कृति है और इसे इसी रूप में संसार में मान्यता मिलनी चाहिए।

 

 

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