2021 का वर्ष भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है

 

नीरज कुमार दुबे

कोरोना और लॉकडाउन ने अर्थव्यवस्था को काफी हद तक प्रभावित किया, हालांकि सरकार ने हालात को बड़ी संजीदगी के साथ संभाला लेकिन अब भी कई सेक्टर राहत का इंतजार कर रहे हैं और बेरोजगारी की दर कम करने के मोर्चे पर भी सरकार को काफी काम करना है।

नया साल आ चुका है। वर्ष 2020 जहाँ कोरोना लेकर आया वहीं साल 2021 कोरोना की वैक्सीन लेकर आया है। लोगों ने 31 दिसम्बर 2020 की रात जमकर खुशियां मनाईं और यह खुशियाँ नये साल के आने से ज्यादा पुराने साल के जाने की थी। शायद ही कोई ऐसा साल रहा होगा जिसकी शुरुआत में ही लोग उसके खत्म होने का इंतजार करने लगे थे। लेकिन जैसा कि हर रात के बाद सुबह होती है, 2020 खत्म हुआ और 2021 का सूर्योदय हुआ। नया साल भारत के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण रहने वाला है। पूरी दुनिया देखेगी कि कैसे विश्व में सर्वाधिक दूसरी बड़ी आबादी वाला देश सबको वैक्सीन लगाता है। भारत के लिए वर्ष 2021 इस मायने में भी महत्वपूर्ण रहने वाला है कि नये साल में आने वाले नये बजट से लोगों को काफी उम्मीदें हैं। पिछले वर्ष कोरोना और लॉकडाउन ने अर्थव्यवस्था को काफी हद तक प्रभावित किया, हालांकि सरकार ने हालात को बड़ी संजीदगी के साथ संभाला लेकिन अब भी कई सेक्टर राहत का इंतजार कर रहे हैं और बेरोजगारी की दर कम करने के मोर्चे पर भी सरकार को काफी काम करना है। सरकार के लिए बजट सत्र चुनौतीपूर्ण भी रहने वाला है क्योंकि विपक्ष तीन कृषि सुधार कानूनों को वापस लेने के लिए दबाव बनायेगा।

राजनीतिक लिहाज से देखें तो साल 2021 में होने वाले पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और असम के विधानसभा चुनाव काफी महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। असम में जहां भाजपा के सामने अपनी सरकार बचाने की चुनौती है तो वहीं पश्चिम बंगाल में भाजपा हर हाल में अपनी सरकार बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है। इन दोनों राज्यों में भाजपा किस कदर सफलता हासिल कर पाती है यह तो चुनाव परिणाम ही बताएंगे लेकिन यदि असम में भाजपा की सरकार नहीं बनी तो इसका असर पूरे उत्तर-पूर्व की राजनीति पर पड़ सकता है। अभी भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में भाजपा का पूरी तरह दबदबा है लेकिन असम में पार्टी की सरकार दोबारा बनने पर ही यह दबदबा कायम रह पायेगा। यही नहीं पश्चिम बंगाल में यदि तृणमूल कांग्रेस अपनी सरकार बचा पाने में सफल हो गयी तो यह भाजपा के लिए मनोबल गिराने वाली बात होगी और साथ ही तृणमूल कांग्रेस अगर जीती तो विपक्षी एकता और मजबूत हो सकती है। केरल में भी भाजपा ने पिछले कुछ वर्षों में कड़ी मेहनत की है लेकिन हालिया स्थानीय निकाय चुनाव परिणाम बताते हैं कि अभी केरल की सत्ता हासिल करना भाजपा के लिए दूर की कौड़ी है। तमिलनाडु की राजनीति में इस बार दिलचस्प मुकाबला होगा क्योंकि यह पहला विधानसभा चुनाव होगा जब एम करुणानिधि और जयललिता का नेतृत्व नहीं होगा। अन्नाद्रमुक और द्रमुक का नया नेतृत्व कितना असर दिखा पायेगा इस पर पूरे देश की निगाह रहेगी। रजनीकांत यदि अपनी राजनीतिक पारी शुरू करते तो स्थापित दलों के लिए बड़ी चुनौती बन सकते थे लेकिन उन्होंने राजनीति में आने का फैसला बदल दिया है। 2021 में होने वाले चुनावों की दृष्टि से देखें तो भाजपा के लिए सिर्फ बंगाल और असम ही चुनौती नहीं हैं बल्कि उसे गुजरात, उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड में और काम करके भी दिखाने होंगे साथ ही पार्टी को भी एकजुट रखना होगा क्योंकि अगले साल के शुरू में उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड तथा साल के अंत से पहले गुजरात में विधानसभा चुनाव होने हैं। केंद्र की सत्ता में बने रहने के लिए भाजपा का उत्तर प्रदेश की सरकार में बने रहना काफी अहम है इसलिए इस साल उसे बहुत काम करने की जरूरत है। गुजरात चूँकि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री का गृहराज्य है इसलिए वहां की सत्ता में भाजपा का बने रहना इन नेताओं के लिए आवश्यक है।

जहाँ तक कांग्रेस की बात है तो देखना होगा कि क्या देश की सबसे पुरानी पार्टी को इस साल पूर्णकालिक अध्यक्ष मिलता है या नहीं। यह भी देखना होगा कि क्या नया अध्यक्ष गांधी परिवार से बाहर का बनता है या परिवार के पास ही पार्टी की कमान बनी रहती है। केरल में हर चुनाव में होने वाला पलट क्या इस बार भी होता है यह देखने वाली बात होगी। कांग्रेस यहाँ इस बार अपनी बारी की प्रतीक्षा में है लेकिन वामदलों ने जिस तरह अपने को मजबूत किया है उसे देखते हुए सत्ता पलट होना मुश्किल नजर आ रहा है। पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी को गुटबाजी खत्म करने पर इस साल ध्यान देना होगा।

इसके अलावा पर्यावरण संबंधी चुनौतियों से निबटना भी सरकार के लिए चुनौती बना रहेगा। वैश्विक दृष्टि से देखें तो अमेरिका की नयी सरकार के साथ सामंजस्य बढ़ाना, अफगानिस्तान से अमेरिका यदि पूरी तरह बाहर चला जाता है तो पाकिस्तान की ओर से बढ़ने वाली चुनौतियों से निबटना, चीन की ओर से दी जा रही चुनौतियों का सामना करना, नेपाल को अपने पाले में बनाये रखना आदि भी बड़े लक्ष्य हैं। सेना के आधुनिकीकरण की राह पर आगे बढ़ना, देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सतत प्रयास आदि भी लगातार करने होंगे। नागरिकों के जीवन स्तर को उठाने के लिए भी केंद्र तथा राज्यों को मिलकर काम करने होंगे और कोरोना के खतरे को देखते हुए सतर्कता बनाये रखने होगी। यकीनन एकजुटता के साथ सभी लोग प्रयास करेंगे तो वर्ष 2021 सभी के लिए हितकारी और मंगलमयी होगा।

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