Categories
महत्वपूर्ण लेख

क्यों है आवश्यक गाय को ”राष्ट्र माता”घोषित करना

cowभारतीय नस्ल के गोवंष संरक्षण, सम्पोशण, संवर्धन एवं गोउत्पादों के विनियोगार्थ केन्द्रीय तथा सभी राज्यों में स्वतन्त्र ” गोपालन मन्त्रालय ” के गठन से ही गोरक्षा एवं गोसेवा के वास्तविक लक्ष्यों की प्राप्ति संभव।
-पूनम राजपुरोहित ”मानवताधर्मी”
(प्रख्यात गोविषयक-चिन्तक)
भारतवर्ष में धार्मिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, सामाजिक और व्यवहारिक दृष्टि से पूज्या गोमाता तथा उसके अखिल गोवंश को उनके द्वारा समष्टि प्रकृति के पोषण एवं समग्र मानवकल्याणार्थ पंचगव्य की अदभुत-अनुपम महत्ता, उपादेयता और आवश्यकता के कारण सर्वोच्च स्थान प्राप्त था। गोवंश भारतीय जीवन शैली का प्राण है। सात्विक आहार, सद्चिन्तन, सद्भाव एवं सत्संग का स्त्रोत गोवंश ही है। मानव जाति एवं सम्पूर्ण जीव-जन्तु चराचर जगत के हित गोवंश के हित में समाहित हैं। मानव जाति को सम्पूर्ण आरोग्य, पवित्र व मांगलिक समृद्धि तथा समाधानपरक समझ गोवंश द्वारा ही प्राप्त होती है। स्पष्ट है कि भारतवर्ष के लिए गोवंश अत्यन्त महत्वपूर्ण अमूल्य एवं अक्षय निधी है।
सभी वैदिक ग्रन्थों मेें उल्लेखित है कि ”गावो विश्वस्य मातर:” अर्थात गाय विश्व की माता है और ”गोस्तु माता न विधते” अर्थात गाय के समान इस भूमण्डल में दूसरा कोई नहीं है। भारतीय गोवंश की रक्षा तथा गोसेवा विशुद्ध धार्मिक, आध्यात्मिक एवं मानवीय प्रश्न है। गाय की उपस्थिति एवं उनका पंचगव्य मानव के भाव, मन और शरीर की पूर्ण स्वस्थता तथा समष्टि प्रकृति के पंचभूतों अग्नि, वायु, जल, पृथ्वी और आकाश की सात्विक पुष्टि व सन्तुलन के लिए अमोघ है।
बहुतायात भारतीय समाज के भावपूर्ण संकल्प को पूरा करते हुए भारतीय शासन नीति में गोरक्षा-गोसेवा की महत्ता स्थापना के रूप में अविलम्ब देश में पूर्ण ” गोहत्या प्रतिबन्ध ” लगाकर गोमाता को ” राष्ट्र माता ” घोषित करना अति आवश्यक है। तभी देश के आस्तिक, धार्मिक, आध्यात्मिक एवं परमार्थ पथ के पथिक राष्ट्रभक्त तत्वों का सम्पूर्ण गोसंरक्षण, प्रत्यक्ष गोपालन, प्रभावी व प्रमाणिक गोसंवर्धन, समग्र व वृहद पंचगव्य परिष्करण व विनियोग की दिशा में संकल्प पूरा होगा तथा मानव मात्र के जीवन में पंचगव्य उपयोग की सहज सुलभता सम्भव हो सकेगी।
यह मांग धार्मिक न होकर पूर्णतया: व्यवहारिक है और वैज्ञानिक दृष्टि से भी तर्कसंगत, तथ्यात्मक एवं प्रमाणिक है। गाय को मात्र हिन्दुओं से जोडकर देखने के कारण ही पिछले 66 वर्षों में कोई भी राजनैतिक दल ”गोहत्या प्रतिबन्ध” की दिशा में पुरजोर प्रयास नहीं कर पाया है। जबकि सत्य में देश का कोई वर्ग, धर्म, सम्प्रदाय या पंथ गाय के विरुद्ध नहीं है। प्रत्येक भारतीय नागरिक तथा सभी राजनैतिक दलों के नेताओं के हृदय में सजग व सक्षम शासकीय गुणों से युक्त गोसेवाभाव व गोभक्ति स्वाभाविक रुप से विद्यमान है।
भारत में कुछ अपवादों व विसंगतियों को छोड दें तो मुगलकाल तक गाय को ”मां” का दर्जा सुरक्षित रहा। अंग्रेजों ने शासकीय नीति युक्त गोहत्या प्रारम्भ की। सर्वविदित है कि अंग्रेजों को भगाने के आन्दोलन की मुख्य शक्ति एवं शीलता भी जनमानस की ”गोहत्या” रोकने की प्रतिबद्घता ही रही थी तथा महात्मा गांधी के लिए आजादी का प्रथम अर्थ ही पूर्ण ”गोहत्या प्रतिबन्ध”था। आजादी पश्चात 1966 में करपात्री महाराज के आन्दोलन के बाद गाय को ”राष्ट्र माता” घोषित करवाने सहित समग्र गोकेन्द्रित समाज ,शासकीय नीति एवं गोआधरित व्यवस्थाओं की स्थापना हेतु सन 1993 से विश्व विख्यात गोसंरक्षण केन्द्र श्रीपथमेड़ा गोधाम महातीर्थ के संस्थापक एवं प्रधान संरक्षक गोऋषि स्वामी श्री दत्तशरणानन्दजी महाराज उारा विभिन्न प्रयास पूरी शक्ति से प्रारम्भ हुए। मूलत: आज देश मे गाय के विषय पर सुपरिणामकारी अनुकुलताएं बढने लगी हैं। स्वयं लेखक को भी अनवरत गोऋ षि स्वामीजी के पावन सानिध्य में सतत, समग्र एवं सम्पूर्ण प्रयासरत रहते इसी महान कार्य में जीवन लगाने का सौभाग्य प्राप्त है।
यहां ज्वलन्त प्रश्न है कि समाज उारा जिस शासन व्यवस्था से गाय को ”राष्ट्र माता” का दर्जा दिलवाने का प्रयास हो रहा है, उसी शासन की नीतियों के अन्र्तगत देश में प्रतिदिन लाखों गायें कत्लखानों में काटी जा रही हैं। अत: स्पष्ट है कि तब तक गोमाता को वैदिक काल का सम्मान दिलवा पाना असंभव है, जब तक कि गोकेन्द्रित-गोआधारित नीति-रीति युक्त व्यवस्थाओं के निर्माण तथा उस पर चलने के लिए शासक वर्ग को मजबूर न कर दिया जावे।
गोवंश के मानव जाति पर उपकारों एवं सम्पूर्ण आरोग्य हेतु उनके द्वारा पंच महाभौतिक पर्यावरण शुद्धता के महान संदर्भों को ध्यान में रखकर उपरोक्त महान उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु बिन्दुवार तथ्यात्मक, न्यायोचित, तर्कसंगत, अनुभव के साथ व्यवहारपरक किए जा सकने वाली कार्य योजनाओं को शासन द्वारा निम्नानुसार लागू किया जाना अत्यावश्यक है-
1.केन्द्र तथा सभी राज्यों के शासन-प्रशासन द्वारा प्रत्येक ग्राम, ग्राम पंचायत, पंचायत समिति तथा नगरपालिका क्षेत्र के स्थानीय निराश्रित, उपेक्षित, असहाय गोवंश को पूर्व में संचालित क्षेत्रीय गोशालाओं में तथा नव गोसेवा सदनों की स्थापना करके प्रवेश दिलाया जाए। उनके भरण-पोषण हेतु निरन्तर अनुदान प्रदान किया जाए। प्रत्येक गोसेवा सदन के आसपास उपलब्ध गोचर भूमि को संरक्षण एवं विकास तथा गोचारण हेतु आरक्षित कर उपलब्ध करवायी जाए।
2.देश के समस्त गोचर, ओरण, पहाड़, नदी-नाले, वन क्षैत्र आदि भूमियों पर राष्ट्रीय नीति बनाकर सीमांकन करके समस्त जिलों में दस हजार एकड़ के आस-पास की सबसे बड़ी उपलब्ध भूमि पर ”गोवंश अभ्यारण्य” स्थापित किये जावें। गोवंश अभ्यारण्य की स्थापना तथा संचालन का आधारभूत ढांचा तैयार करने में तकनिकी एवं वितिय सहयोग सरकारें करें।
3.प्रत्येक गोसेवा सदन में गोबर-गोमूत्र का प्लान्ट लगाकर बिजली, गैस, खाद तथा कीटनियंत्रक आदि के निर्माण की नीतिगत योजनाओं का क्रियान्वयन से गोसेवा सदनों के संचालन हेतु स्थानीय प्रबन्धन समिति का गठन हो तथा प्रत्येक गोसेवा सदन में गोचिकित्सा व गोपालन का प्रशिक्षण प्राप्त प्रबन्धकों की नियुक्त की जाए।
4. गोपालन हेतु ”गोमाता फैमिली कार्ड” बनाएं जाये, गोवंश का जन्म-मृत्यु पंजीकरण अनिवार्य किया जाये तथा गोपालकों को भी गोशालाओं की तरह दुध न देने योग्य गोवंश की सेवा हेतु परिश्रमिक एवं चारा, दाणा, दवाई आदि पर सब्सिडी दी जाये। ऐसे गोवंश को निराश्रित सुना छोडऩे पर दण्ड का प्रावधान भी हो।
5.केन्द्रीय तथा राज्यों में बने हुए गोरक्षा सम्बन्धित कानूनों को सशक्त बनाकर प्रदेशों में अवैध रूप से संचालित कत्लखानों पर प्रतिबन्ध लगे। गोवधिकों, गोतस्करों, परिवहन करने वाले चालक, परचिालक,वाहन के मालिक तथा गोतस्करी माफिया को ऐसा गोवंश बेचने वाले को भी गैर जमानती सजा मिले। तस्करी एवं वध हेतु गोवंश का परिवहन करने वाले वाहनों को आबकारी अधिनियम की भांति जप्त किया जाये। वधिकों से छुड़वाये हुए गोवंश को सरकार की स्थायी अनुदान प्राप्त गोशालाओं में प्रवेश दिलाया जाए।
6.गोसेवा सदनों में उन्नत नस्ल के सांडों का प्रबन्ध किया जाए जिससे भविष्य में अच्छी भारतीय गोवंश नस्लें तैयार हो सके। विदेशी संकरीकरण पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाया जाए। गांवों के गरीब गोपालकों के अनुपयोगी गोवंश को अगर वो पालने में असमर्थ हो तो गोसेवा सदनों में प्रवेश कराया जाये, जिससे गरीब गोपालकों के ऊपर अतिरिक्त खर्च का बोझ न पड़े। वर्तमान में समस्त नस्लवहीन नर गोवंश को सेवा-सुश्रुषा के साथ सम्पूर्ण संरक्षण प्रदान करते हुए शास्त्रीय रीतियुक्त सात्विक नर नस्लीय गो संवर्धनात्मक प्रयासों के माध्यम से नस्लहीन नर गोवंश पैदाईश एवं बढोतरी पर विराम लगाने के गंभीर प्रयास किए जाये।
7.यूरिया व पैस्टीसाईड द्वारा खेती करने वाले विषवर्धक किसानों को गोपालक किसान बनाया जाये अर्थात प्रति एक एकड़ कृषि भूमि पर एक गोवंश पालन करने, बैलों से कृषि करने तथा गोबर व गोमूत्र की खाद से कृषि उपज करने वाले गोपालक किसानों को प्रोत्साहित किया जावे। गोसेवा सदनों के कृषि योग्य बैलों को अल्प शुल्क अथवा नि:शुल्क स्थानीय गोपालक किसानों को खेती व परिवहन हेतु निश्चित अवधि के लिए देने व पुन: प्रवेश दिलाने के प्रावधान किए जाए।
8.गोसेवा सदनों में निर्मित खाद, कीटनियंत्रक, बिजली तथा गैस आदि उत्पादों को उचित मूल्य पर किसानों को दिया जाए तथा उनके गोकृषि उत्पादों को अनुदानित मूल्य पर क्रय करने का प्रबन्ध हो। गोदुग्ध उत्पाद तथा गोकृषि उत्पादों को सभी प्रकार के करों से मुक्त रखते हुए सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर क्रय प्रबन्ध हेतु बाजार विकसित किया जावे।
9. भारतीय नस्ल की गायों के गव्यों से निर्मित पंचगव्य ओषधियों की खरिदी शासन द्वारा की जाए, साथ ही गोदुग्ध के पाउडर व मक्खन को प्राथमिक शालाओं में अध्यनरत बालक-बालिकाओं के सम्पूर्ण पोषणार्थ उनको मध्याहन भोजन में प्रदान किया जाए।
10.भारतीय गोवंश के संवर्धन एवं पंचगव्य अनुसंधान हेतु ”गो विश्वविद्यालय” की स्थापना की जाए। जिसमें विद्यार्थियों को वैदिक कामधेनु विज्ञान के अनुसार विभिन्न तकनिकी व भाषायी रोजगारोन्मुखी पाठयक्रमों के अन्र्तगत शिक्षा देने का प्रबन्ध हो।
11.उपरोक्त गोसेवा के समस्त कार्यों की क्रियान्विति हेतु गोमाता को सर्वप्रथम ”राष्ट्र माता” घोषित करते हुए केन्द्र तथा देश के सभी राज्यों में स्वतन्त्र ” गोपालन मन्त्रालय ” का गठन करना अत्यावश्यक माना जावे।
लेखक का दृढविश्वास है कि साक्षात प्रकृति स्वरूपा गाय के वैज्ञानिक व व्यवहारिक महत्व, उपादेयता एवं आवश्यकता को मानव जाति के लिए अधिक समय तक अनदेखी करना असंभव है। निश्चित ही देश में एक न एक दिन सजग, सुयोग्य, सुसंस्कारी, राष्ट्र सेवापरायण,पवित्र हृदय युक्त जागृत बुद्धि युक्त शासन व्यवस्था उभरेगी। जिससे करोड़ों गोप्रेमी, गोभक्त, गोउपासक, गोरक्षक, गोसेवक एवं गोपालक किसानों सहित सम्पूर्ण जनमानस की भावनानुसार गोमाता को ” राष्ट्र माता ”घोषित करते हुए गोवंश के संरक्षण, सम्पोषण, संवर्धन एवं गोउत्पादों के विधिपूर्वक विनियोग हेतु शिघ्रातिशिघ्र उपरोक्त बिन्दुओं पर विशेषज्ञों के साथ गहन चिंतन-मनन करके केन्द्र एवं सभी राज्यों में स्वतन्त्र ” गोपालन मंत्रालय ” की स्थापना का मार्ग प्रशस्त अवश्य होगा।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
maritbet giriş
maritbet giriş
betplay giriş
betplay giriş
timebet giriş
timebet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
ikimisli giriş
ikimisli giriş
nesinecasino giriş
roketbet giriş
betci giriş
betci giriş
roketbet giriş
nisanbet giriş
İmajbet giriş
İmajbet giriş
Safirbet giriş
Safirbet giriş
İmajbet giriş
piabellacasino giriş
betnano giriş
vaycasino
vaycasino
betnano giriş
vaycasino
vaycasino
betpark giriş
betplay
timebet giriş
timebet giriş
hititbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
grandpashabet
grandpashabet
nitrobahis giriş
betbox giriş
betbox giriş
betorder giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betpark giriş
betorder giriş
casival
casival
vaycasino
vaycasino
betorder giriş
katlabet giriş
katlabet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
meybet giriş
betorder giriş
betorder giriş
meybet
meybet
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
casival
casival
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
wojobet
wojobet
betpipo
betpipo
betpipo
betpipo
Hitbet giriş
nisanbet giriş
bahisfair
bahisfair
timebet giriş
timebet giriş
yakabet giriş
yakabet giriş
vaycasino
vaycasino
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betnano giriş
vaycasino
vaycasino
vaycasino
vaycasino
betci giriş
betci giriş
betgaranti giriş
bahisfair giriş
bahisfair giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
bahisfair
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark
kolaybet
betgaranti
betpark
kolaybet
betgaranti
casibom
casibom
casibom
casibom
betpark
betpark
hitbet giriş
nitrobahis giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
casibom
casibom
casibom giriş
casibom giriş
casibom
casibom
hititbet giriş
katlabet giriş
katlabet giriş
yakabet giriş
bahisfair giriş
bahisfair
betnano giriş
betorder giriş
betorder giriş
timebet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
timebet giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
hititbet giriş
betorder giriş
betorder giriş
vaycasino
vaycasino
betpark
betpark
casibom giriş
casibom giriş
kolaybet giriş
betpark
betpark
vaycasino
vaycasino
betgaranti
casibom
casibom
casibom
casibom
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
casibom giriş
betplay giriş
betplay giriş
roketbet giriş
casibom giriş
casibom giriş
betorder giriş
betorder giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
fixbet giriş
fixbet giriş
fixbet giriş
fixbet giriş
betorder giriş
betnano giriş
betnano giriş
meritking giriş
meritking giriş