बिहार का राज जे0पी0 नड्डा को मानो दीपावली का उपहार मिला

 

दीपक कुमार त्यागी

बिहार की जनता के बीच में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का जबरदस्त विरोध होने के बाद और राजद नेता तेजस्वी के पक्ष में कुछ लोगों के द्वारा आंधी चलाये जाने के बाद भी जेपी नड्डा ने विपक्षी दलों के प्रचार की हवा निकालने का काम किया है।

बिहार के विधानसभा चुनाव व उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक आदि राज्यों में अभी हाल ही में संपन्न हुए कुछ विधानसभा सीटों के उपचुनावों में भाजपा को मिली जबरदस्त सफलता ने देश के अधिकांश राजनैतिक विश्लेषकों के आकलन को गलत साबित करके सभी को आश्चर्यचकित करने का काम किया है। अधिकांश राजनैतिक विश्लेषकों व बहुत सारे राजनेताओं का चुनाव से पहले व चुनाव के दौरान मत था कि देश में कोरोना महामारी की वजह से जगह-जगह उत्पन्न हुई विभिन्न प्रकार की बेहद गंभीर समस्याओं के चलते, भाजपा को इन चुनावों में जनता का सामना करने में भारी दिक्कत का सामना करना पड़ेगा, जिसके परिणामस्वरूप चुनाव परिणामों में हार के चलते भाजपा को जबरदस्त निराश हाथ लगेगी। अधिकांश लोगों का मानना था कि जिस तरह से भयावह आपदा के वक्त में बिहार के प्रवासी मजदूर वर्ग के लोगों ने हजारों किलोमीटर पैदल सड़कों पर भूखे-प्यासे दर-दर की ठोकर खाने का काम किया था, उसका जबरदस्त आक्रोश बिहार विधानसभा चुनावों में भाजपा को हर-हाल में भुगतना होगा। लेकिन जब बिहार व अन्य राज्यों के चुनाव परिणाम सभी के सामने आये तो भाजपा ने जीत का सेहरा अपने सिर बांधकर सभी चुनावी विश्लेषकों व चुनावों में परास्त हुए राजनैतिक दलों को गहन आत्ममंथन करने पर मजबूर कर दिया है। इन चुनावों में विपक्षी दलों के हर चुनावी दांवपेंच को विफल करने का श्रेय भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को जाता है।

नड्डा ने विपक्षी दलों की हर तरह की चुनावी चाल को काटने के लिए जिस तरह की अचूक रणनीति धरातल पर बनाई, वह बहुत काबिलेतारीफ है। जिस समय बिहार में कोरोना महामारी के आपदा काल में जब बिहार के राजनेता भी अपनी जान बचाने के लिए अपने घरों में छिपकर बैठे थे, उस समय भाजपा का संगठन अपने शीर्ष कुशल रणनीतिकार राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के दिशानिर्देशों पर जरूरतमंद लोगों के घर-घर जाकर बिहारवासियों की मदद करने में व्यस्त था। बिहार में जेपी नड्डा ने पार्टी संगठन के माध्यम से राजनीति से इतर रणनीति बनाकर इंसानियत के सेवा भाव को सर्वोपरि रखते हुए काम किया। उन्होंने जिस तरह से शासन-प्रशासन के साथ-साथ संगठन की समानांतर व्यवस्था बनाकर जरूरतमंद लोगों की मदद करने की व्यवस्था बनाकर आम जनमानस तक राशन से लेकर अन्य सभी प्रकार की राहत सामग्री पहुंचाने का कार्य किया है, वह आज के स्वार्थपूर्ण राजनीतिक दौर में काबिलेतारीफ है। बिहार की जनता के बीच में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का जबरदस्त विरोध होने के बाद और राजद नेता तेजस्वी के पक्ष में कुछ लोगों के द्वारा आंधी चलाये जाने के बाद भी जेपी नड्डा ने विपक्षी दलों के प्रचार की हवा निकालने का काम किया है। बिहार की जनता ने राज्यस्तरीय व राष्ट्रीय स्तर पर आर्टिकल 370 जैसे मसलों व कोराना काल में किये गये सेवाभाव के चलते एनडीए को बिहार का राज राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को दीपावली के उपहार में दिया है।

वैसे यहां आपको याद दिला दें कि बिहार से जेपी नड्डा का बहुत पुराना व बेहद भावनात्मक रिश्ता है, नड्डा का जन्म बिहार की राजधानी पटना में हुआ था और वो बिहार के लाड़ले सपूत जयप्रकाश नारायण के द्वारा चलाए गए देश के मशहूर “जेपी आंदोलन” से ही राजनीति की सुर्खियों में आए थे। लेकिन आज जगत प्रकाश नड्डा भारतीय राजनीति का एक ऐसा लोकप्रिय विश्वसनीय चेहरा बन गये हैं, जो देश के आम व खास सभी वर्गों के वोटरों की नब्ज पकड़ कर चुनाव प्रबंधन करने की रणनीति में माहिर माने जाते हैं। वैसे भी आज के समय में हमारे देश की राजनीति में सफलता प्राप्त करने के लिए किसी भी राजनेता का राजनीतिक रूप से आराम करना गलत माना जाता है, उसको हर वक्त काम करते हुए चौबीसों घंटे सातों दिन राजनीतिक उधेड़बुन व आगे की रणनीति बनाने में उलझे रहना पड़ता है। देश की राजनीति के मिजाज को विशेष रूप से समझने वाले जेपी नड्डा हर तरह के माहौल में बाखूबी काम करना जानते हैं, जिसकी बिहार चुनावों में उन्होंने हाल ही में मिसाल कायम की है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में जेपी नड्डा ने बिहार विधानसभा चुनावों में खुद को पूरी तरह से लगा दिया। उन्होंने पूरे बिहार में करीब चार हजार किलोमीटर यात्रा कर अपने सहयोगी नीतीश कुमार के खिलाफ बने नकारात्मक माहौल को सही करते हुए, भाजपा के पक्ष में जबरदस्त सकारात्मक माहौल बनाने का काम किया। वह अपनी यात्राओं के दौरान भाजपा के जमीनी कार्यकर्ताओं से लगातार क्षेत्रों का फीडबैक लेते रहे। जिस क्षेत्र में भी उन्हें कोई कमीबेशी नज़र आयी, उन्होंने तुरंत ही समय रहते उसको सुधारने की कारगर रणनीति अपनाई।

अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष नड्डा की मेहनत देखकर भाजपा के आम कार्यकर्ताओं में भी जबरदस्त उत्साह का संचार हुआ और उन्होंने बिहार की हारी बाजी को जीत में बदल डाला। जेपी नड्डा की आम जनमानस की सेवाभाव की उस शुरुआती बेहद कारगर रणनीति ने ही “आपदा को अवसर में बदल कर” आज भाजपा को बिहार में 19.46 प्रतिशत मतों के साथ 74 सीटों पर विजय दिलाकर अपने सहयोगी जदयू का बड़ा भाई बनाने का कार्य किया है। बिहार विधानसभा के चुनाव में जेपी नड्डा का स्ट्राइक रेट बहुत जबरदस्त रहा है। उनकी 26 विधानसभा के क्षेत्रों में रैलियां हुई थीं, उनकी सभाओं से एनडीए के प्रत्याशियों को बहुत लाभ हुआ है और एनडीए 26 में से 20 सीटें जीतने में कामयाब हुआ है। नड्डा ने इन चुनावों में अपनी अथक मेहनत के बूते बिहार में राजद की 75 सीटों के बाद भाजपा को 74 सीटों पर विजय दिलाकर दूसरे नंबर का सबसे बड़ा राजनीतिक दल बनाने का काम किया है। जब देश भयंकर महामारी कोराना के आपदा काल से जूझ रहा है, उस समय जेपी नड्डा ने भाजपा के 11वें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के मात्र दस महीने के अंदर जबरदस्त मेहनत करके पार्टी को बिहार के साथ-साथ कई अन्य राज्यों के उपचुनावों में जबरदस्त सफलता दिलाई है।

बिहार चुनावों में प्रचार के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पार्टी के सबसे ताकतवर व विश्वसनीय ब्रांड मोदी के जरिए उसको और सशक्त बनाते हुए, बिहार की जनता के दिलोदिमाग में भाजपा की पैठ को और मजबूत करने का काम किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बिहार में 12 रैलियां करवा कर तेजस्वी की आंधी को रोकने का काम किया है। आम लोगों व राजनेताओं का कहना है कि बिहार में एनडीए की जीत में प्रधानमंत्री मोदी की इन 12 रैलियों की रणनीति ने बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बिहार विधानसभा चुनाव जीतकर जेपी नड्डा ने देश की जनता को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि जिस तरह से कोरोना से पहले के दौर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में देश की जनता का विश्वास कायम था, वो कोरोनाकाल के बाद देश में बने बेहद विपरीत हालातों में भी पूरी तरह से कायम है। बिहार व अन्य राज्यों के उपचुनावों में जनता ने ब्रांड मोदी के जलवे को कायम रखा है, इन चुनावों में भाजपा को मिली जीत से पता चलता है कि देश में अभी भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर हर वर्ग के मतदाताओं में कायम है। बस उस लहर को धरातल पर पार्टी के लिए वोट में बदल कर सफल बनाने के लिए गृहमंत्री अमित शाह व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा जैसे चाणक्य की जरूरत है।

डॉ॰ राकेश कुमार आर्य

डॉ॰ राकेश कुमार आर्य

मुख्य संपादक, उगता भारत

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