Categories
आओ कुछ जाने

आइए जाने एनजीओ के गठन प्रक्रिया

मिथिलेश कुमार सिंह

समाज सेवा के लिए कार्य करने हेतु अगर आप भी एनजीओ गठित करना चाहते हैं तो आपको बता दें कि यह मुख्यतः दो प्रकार का होता है। एक राज्य स्तरीय एनजीओ, जिसको रजिस्टर कराने के लिए कम से कम उसी राज्य के 2 लोगों का होना अनिवार्य है।

अक्सर हम आप रोजमर्रा की जिंदगी में इसकी बातें सुनते रहते हैं और इससे दो-चार भी होते हैं। कभी कोई एनजीओ गवर्नमेंट की योजनाओं को हम तक पहुंचाता नजर आता है, तो कभी कोई एनजीओ बच्चों की शिक्षा या फिर महिलाओं की सुरक्षा के लिए काम करता है और यह सब हमें अखबारों में पढ़ने को मिलता ही रहता है।

यह भी एक तथ्य है कि हम आप में से कई लोग खुद भी एनजीओ गठित कर समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय होना चाहते हैं, तो आइए जानते हैं इसकी गठन प्रक्रिया और दूसरे महत्वपूर्ण पहलुओं को…

समाज सेवा के लिए कार्य करने हेतु अगर आप भी एनजीओ गठित करना चाहते हैं तो आपको बता दें कि यह मुख्यतः दो प्रकार का होता है। एक राज्य स्तरीय एनजीओ, जिसको रजिस्टर कराने के लिए कम से कम उसी राज्य के 2 लोगों का होना अनिवार्य है। राज्य स्तरीय गैर-सरकारी संगठन में कार्य का दायरा सम्बंधित राज्य होता है।

इसके अलावा जो दूसरा एनजीओ होता है, वह नेशनल लेवल का एनजीओ होता है। मतलब आपका गैर सरकारी संगठन देश भर में कहीं भी कार्य कर सकता है। इसको रजिस्टर कराने के लिए आपको भिन्न राज्यों के मिनिमम सात लोगों की आवश्यकता होती है। इससे अधिक लोग भी इसमें शामिल हो सकते हैं, किंतु इससे कम नहीं होना चाहिए। इसे एनजीओ सेंट्रल सोसाइटीज एक्ट के अंतर्गत रजिस्टर्ड किया जाता है।

एनजीओ के कार्यों के बारे में बात करें तो यह कई प्रकार के कार्य करता है और इनमें से अधिकतर कार्य समाज कल्याण से जुड़े हुए होते हैं। जैसे जरूरतमंद लोगों की हेल्प करना, गरीब लोगों तक तमाम योजनाओं का लाभ पहुंचाना इत्यादि इसके मुख्य कार्य होते हैं। इसके अलावा जल संरक्षण से लेकर आदिवासी समाज की तमाम समस्याओं को सुलझाना, वृद्धों की अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग ढंग से मदद करना इसके मुख्य कार्यों में गिना जाता है। इसके अतिरिक्त भिन्न लोग अपनी कम्युनिटी को इसके तहत संगठित करने का प्रयत्न करते हैं।

खास बात यह है कि गैर सरकारी संगठन यानी एनजीओ से आप प्रॉफिट कमाने की सोच नहीं रख सकते। सामान्य रूप से यह नॉन प्रॉफिट के सिद्धांत का अनुपालन करता है।

तमाम बड़ी कारपोरेट कंपनियों के सीएसआर फंड यानी कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी फंड गरीबों, जरूरतमंदों तक एनजीओ के माध्यम से ही पहुंचते हैं। इसी प्रकार से कई सारे एनजीओ वातावरण की चिंताओं को दूर करने हेतु कार्य करते हैं।

कार्य के अनुसार देखा जाए तो कई सारे एनजीओ अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा भी फंड लेते हैं, जिसको लेकर अलग-अलग समय पर विवाद भी होता है। काले धन की आवाजाही का एक माध्यम भी एनजीओ को कई लोग मानते हैं। इसे लेकर कई सारे एनजीओ पर सरकार का समय-समय पर शिकंजा भी कसता रहा है।

एनजीओ को लेकर एक बात बड़ी साफ है कि अगर आप इसे शुरू करना चाहते हैं तो इसकी जो कानूनी प्रक्रियाएं हैं, कमोबेश किसी कंपनी की तरह ही होती हैं। मतलब इसका समय-समय पर उसी प्रकार से रिटर्न फाइल करना पड़ता है, तमाम खातों का ब्योरा गवर्नमेंट को देना पड़ता है, जैसे किसी कंपनी का होता है। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं और कोई एनजीओ रन करते हैं, तो आप कठिनाई में पड़ सकते हैं।

एनजीओ चाहे आप राज्य स्तरीय गठित करें, चाहे आप नेशनल लेवल पर गठित करें, आपको अलग-अलग व्यक्तियों को पद देना पड़ता है और सुविधानुसार आप इसके भिन्न प्रारूप तय कर सकते हैं। इसमें प्रेसिडेंट, वाइस प्रेसिडेंट, सेक्रेटरी, जनरल सेक्रेटरी, मेंबर्स इत्यादि का पद और संख्या सृजित की जाती है।

एनजीओ को लेकर एक बात आपको और भी समझनी चाहिए कि जब तक आपके सामने उद्देश्य क्लियर ना हो, तब तक इसे शुरू करने से बचना चाहिए, क्योंकि इसकी तमाम औपचारिकताएं होते हैं। अगर आप इसे एक बार शुरू करते हैं तो आपको इसे चलाना चाहिए, ना कि छोटी-छोटी मुसीबतों से घबराकर इसका ऑपरेशन छोड़ देना चाहिए। इसका नुकसान यह भी होता है कि जिस क्षेत्र में आप एनजीओ चलाना चाहते हैं, जिस क्षेत्र में आपने इसे पंजीकृत किया होता है, उस क्षेत्र में लोगों की उम्मीद जगा कर उसे बीच मझधार में छोड़ना कहीं से भी न्यायोचित नहीं है।

एनजीओ को कई सारी कैटेगरी में आप अपनी सुविधा अनुसार डिवाइड कर सकते हैं।

मुख्यतः इसमें बिजनेस फ्रेंडली इंटरनेशनल एनजीओ (जिसे बिंगो भी कहते हैं, जैसे रेड क्रॉस), एनवायरनमेंटल एनजीओ (जिसे एंगो भी कहते हैं, जैसे ग्रीनपीस), गवर्नमेंट आर्गनाइज्ड एनजीओ (जिसे गोंगो भी कहते हैं, जैसे इंटरनेशनल युनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ़ नेचर), इंटरनेशनल एनजीओ (जिसे इंगो भी कहते हैं, जैसे ऑक्सफैम) और क्वासी ऑटोनोमस एनजीओ (जिसे क्वांगो भी कहते हैं, जैसे आईएसओ) शामिल किये जा सकते हैं।

फंडिंग की बात करें तो मेम्बरशिप फीस, प्राइवेट डोनेशन, सर्विसेज या सामान बेचकर की गयी कमाई अथवा ग्रांट के माध्यम से इसकी फंडिंग की जाती है।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
meritking giriş
betpark güncel giriş
betgaranti güncel giriş
kolaybet güncel giriş
betnano giriş
betpark
betpark
betpark
betpark
betpark
betpark
betnano giriş
vaycasino
vaycasino
vaycasino
vaycasino
vaycasino
vaycasino
betpark
betpark
supertotobet
supertotobet
betpark
betpark
supertotobet
bettilt giriş
supertotobet
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
vaycasino
vaycasino
hititbet giriş
hititbet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
supertotobet
supertotobet
vaycasino
vaycasino
bettilt giriş
bettilt giriş
jojobet giriş
jojobet giriş
vaycasino
vaycasino
vaycasino
vaycasino
betnano giriş
betpark giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark güncel giriş
supertotobet
supertotobet
jojobet giriş
jojobet giriş
jojobet giriş
jojobet giriş
vaycasino
vaycasino
supertotobet
supertotobet
celtabet giriş
celtabet giriş
prensbet giriş
prensbet giriş
prensbet giriş
vipslot giriş
vipslot giriş
cashwin giriş
betnano giriş
hiltonbet giriş
wbahis giriş
gobahis giriş
casinoroyal giriş
betpark giriş
roketbet giriş
betasus
betbox giriş
bettilt giriş
bettilt
kolaybet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
betpark giriş
realbahis
realbahis giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
kavbet giriş
vaycasino
vaycasino
betnano giriş
betasus
betasus
roketbet
roketbet
hititbet giriş
hititbet giriş