Categories
विविधा

रामायणकाल हो या फिर महाभारतकाल हो, हर काल में रहा है मजदूरों का विशेष महत्तव

धर्मदास शुक्ला

भारतीय मजदूर संघ ने समय-समय पर विपदा के समय में बढ़-चढ़कर कर अपनी भूमिका का निर्वहन किया है। वर्तमान में कोरोना की महामारी में भारतीय मजदूर संघ के कार्यकर्ताओं ने देश के साथ ही मध्य प्रदेश में भी मजदूरों के हित में काम किया।

भारतीय मजदूर संघ की स्थापना से पूर्व देश में कई श्रम संगठन कार्यरत थे, जो किसी न किसी राजनैतिक विचारधारा एवं पाश्चात संस्कृति से ओत-प्रोत थे। देश में ट्रेड यूनियनों का प्रचलन 1889 से आया, जब एमए लोंखडे ने बाम्बे मिल एसोशिएसन की शुरूआत की। उनके बाद एनएस जोशी ने 1890 में मद्रास लेबर एसोशिएशन की शुरूआत की। 1891 में बंगाल में एमएन राय ने जूट मिल एसोसिएशन की। एमएन राय ने मार्क्सवाद-लेनिनवाद का लबादा ओढ़कर रखा था। वे चीन जाकर पाश्चात संस्कृति का अध्ययन कर भारत लौटे और भारत में कम्युनिज्म के फैलाव के लिए मजदूरों के माध्यम से ट्रेड यूनियनें बनाने लगे। यह विचार पूरी तरह भारतीय संस्कृति के विपरीत है।

देश की आजादी के आन्दोलन के समय 1942 में कम्युनिस्टों ने स्वयं को महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन से अलग रखा। 1962 के भारत-चीन युद्ध के समय भी चीन के साथ खड़े होकर डिंफेस और टेली कम्यूनिकेशन में हड़ताल का आह्वान किया। कम्युनिस्ट संगठनों द्वारा चाइना को मुक्ति वाहिनी घोषित करना, यह देश के साथ गद्दारी करने जैसा व्यवहार था। जब देश युद्ध के संकट में हो तब ‘चाहे जो मजबूरी हो, मांगें हमारी पूरी हो’ जैसे नारे देना, यह देश के साथ विश्वासघात करने जैसा था।

भारत में प्राचीन काल में श्रम संघ था

अगर हम प्राचीन काल की बात करें तो पता चलता है कि उस समय भी श्रम संगठनों की परिकल्पना थी। प्राचीन काल, रामायणकाल या फिर महाभारतकाल हो, हर काल में मालिक और मजदूरों का रिश्ता रहा है। वेदों में भी श्रम की महत्ता रही है। उस समय में भी राजा-रजवाड़े भी अपने यहां काम करने को पारिवार्षिक देते थे।

शुक्रनीति एवं चाणक्त नीति

शुक्राचार्य की अर्थ नीति में बोनस और महंगाई भत्ता आदि तय था, जिसे हम आजकल शुक्र नीति का उदाहरण देकर बात करते हैं। विदूर नीति में भी इस प्रकार का उदाहरण मिलता है। उस समय श्रमिकों की अगुवाई और उनके सुख-दुख की चिंता करने वाला एक टोली प्रमुख होता था, जो उनके सुख-दुःख की चिंता करता था।

औद्योगिकीकरण

जहाँ एक ओर इंग्लैंड से औद्योगिकीकरण की शुरूआत मानी जाती है वहीँ हमारे यहां का मलमल का कपड़ा विश्व प्रसिद्ध था। हमारे देश में प्राचीन समय से ही कुटीर उद्योग के रूप में छोटे-छोटे व्यवसाय गांव-गांव तक फैले हुए थे, जो जनता की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करते थे। किसी को भी शहर की तरफ दौड़ना नहीं पड़ता था।

प्रथम एवं द्वितीय विश्व युद्ध के समय विश्व के सभी देशों के सामने आर्थिक संकट आने लगा था। भारत के ग्रामीण लोग बड़े शहरों मुंबई, कलकत्ता, मद्रास की तरफ बड़ी संख्या में आने लगे, जिनकी कार्यदशाओं एवं आय के स्त्रोतों एवं बुनियादी समस्याओं को लेकर संघर्ष होते रहते थे। उस समय तक कोई श्रम कानून श्रमिकों को लेकर नहीं बनाया गया था और इसी कारण से अंग्रेजों ने 1918 में पहली बार रॉयल कमीशन ऑफ लेबर की स्थापना की। इसके बाद 1919 में (आई.एल.ओ.) अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन का निर्माण हुआ। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर श्रमिकों की समस्याओं के बारे में जागरूकता एवं उनके बेहतर जीवन स्तर कार्यदशा के सुधार लाना था। 1920 में एटक का निर्माण किया गया था, जिसमें विभिन्न विचारधारा के लोग सम्मिलित हुए थे और इसके बाद 1926 में श्रमिकों के लिए ट्रैड यूनियन एक्ट का निर्माण किया गया।

1929 से देश की आजादी का आंदोलन तेजी से शुरू हो गया, जिससे 1942 के असहयोग के कारण सभी नेता जेलों में बंद होने के कारण कम्युनिस्टों ने एटक पर अपना एकाधिकार जमा लिया। बाद में 1947 में बड़े नेताओं के जेल से छूटने के बाद इंटक का निर्माण किया गया था। 1947 में समाजवादियों ने एचएमएस का निर्माण किया तथा 1948 में कुछ लोगों ने एचएमपी एवं यूटीसी का निर्माण किया। ये संगठन किसी न किसी राजनैतिक दल के विंग के रूप में काम करते थे।

भारतीय मजदूर संघ

भारतीय मजदूर संघ के उदय से पूर्व चलने वाली सभी यूनियन ब्रेड-बटर के आधार पर चलती थी। मजदूरों के क्षेत्र में राष्ट्रीय सोच को लेकर काम न होते देख राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्कालीन सरसंघचालक माधवराव सदाशिव गोलवकर ने वरिष्ठ प्रचारक दत्तोपंत ठेंगड़ी को श्रमिकों के बीच काम करने हेतु कहा। इसके बाद ठेंगड़ी जी ने कार्य आरम्भ किया। वे 1952 से 1954 तक इंटक में प्रदेश संगठन मंत्री (मध्य प्रदेश) रहे। उन्होंने जूट इंडस्ट्रीज का अध्ययन किया। उन्होंने देखा कि ट्रेड यूनियन एवं राजनीति में एक साथ काम नहीं किया जा सकता। इसके बाद उन्होंने भारतीय संस्कृति के आधार पर 23 जुलाई 1955 को भोपाल में कपड़ा मिल से आजादी के प्रणेता बाल गंगाधर तिलक एवं चंद्रशेखर आजाद की जन्म तिथि के अवसर पर भारतीय मजदूर संघ की स्थापना की। स्थापना काल से ही भारतीय मजदूर संघ देशहित, उद्योगहित और श्रमिक हित में कार्य करने लगा। उस समय देश में चलने वाले नारे ‘चाहे जो मजबूरी हो, मांगें हमारी पूरी हो’ और ‘कमाने वाला खायेगा’ जैसे नारों को अमान्य करते हुए ‘भारत माता की जय’ और ‘देश के हित में करेंगे काम, काम के लेंगे पूरे दाम’, ‘कमाने वाला खिलायेगा’ जैसे नारे दिये। इसके अलावा विश्वकर्मा जयंती को राष्ट्रीय श्रम दिवस के रूप में मनाना शुरू किया। भारतीय मजदूर संघ शून्य से शुरू होकर आज देश का सबसे बड़ा श्रम संगठन बनकर देश के करोड़ों मजदूरों की आस्था का केन्द्र बन गया। वर्ष 1989 में भारत सरकार द्वारा कराये गए सर्वेक्षण में यह प्रथम क्रमांक का संगठन बना। बाद में मनमोहन सिंह की सरकार के समय भी वर्ष 2002 में 01 करोड़ 71 लाख की सदस्यता के आधार पर देश का प्रथम क्रमांक श्रम संगठन बना रहा, जिसके आधार पर भारत की ओर से प्रतिवर्ष (आई.एल.ओ.) अर्न्तराष्ट्रीय श्रम संगठन के सम्मेलन में प्रतिनिधित्व करता है।

आज भा.म.स. का कार्य देश के कोने-कोने तक फैल गया है, जो 65 साल की यात्रा पूरी कर समाज को विकास की दिशा में ले जाकर अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। यह स्वदेशी, पर्यावरण, सामाजिक समरसता, नारी सशक्तिकरण, स्वास्थ्य सुरक्षा एवं ग्रामीण विकास की अवधारणा पर निरंतर कार्य कर रहा है। राष्ट्र को परम वैभव पर पहुंचाने के लिए करोड़ों कार्यकर्ता समाज में अस्पृश्यता, छुआछुत, दुव्यर्सन जैसे कार्यों को मिटाने के लिए जन जागरण के कार्य में लगे हुए हैं।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

भारतीय मजदूर संघ ने समय-समय पर विपदा के समय में बढ़-चढ़कर कर अपनी भूमिका का निर्वहन किया है। वर्तमान में कोरोना की महामारी में भारतीय मजदूर संघ के कार्यकर्ताओं ने देश के साथ ही मध्य प्रदेश में भी मजदूरों के हित में काम किया। जो मजदूर देश के अन्य प्रान्तों में काम करने के लिये गये थे, वह मध्य प्रदेश में अपने घर की ओर वापस आ रहे थे एवं दूसरे प्रदेशों के भी मजदूर मध्य प्रदेश की सीमा से पार हो रहे थे; उन सबके लिए भोजन-पानी, दवा एवं आवागमन के साधनों की व्यवस्था की। मध्य प्रदेश के बडे औद्योगिक क्षेत्रों- पीथमपुर, खरगोन, परासिया, सिंगरौली आदि क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं ने प्रवासी मजदूरों एव अन्य आसपास के जरूरतमंद लोगों के लिये लगातार तीन माह तक भोजन कराने की व्यवस्था संभाली।

सरकार जगाओ सप्ताह

केन्द्रीय सरकार द्वारा सार्वजनिक प्रतिष्ठानों के निजीकरण करने एवं समस्त श्रम कानूनों को शिथिल करने के विरोध में भारतीय मजदूर संघ द्वारा विरोध किया जाता है। श्रम कानूनों को तीन साल तक स्थगित करने का भी विरोध करता है क्योंकि इसके कारण श्रमिकों का शोषण बढ़ेगा। भारतीय मजदूर संघ अपने 65वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य पर निम्न कार्यक्रम आयोजित करेगा, जिसमें भारतीय मजदूर संघ केन्द्रीय योजना के अनुसार 24 जुलाई से लेकर 30 जुलाई तक सरकार जगाओ सप्ताह का आयोजन कर पूरे प्रदेश में जन जागरण अभियान चलायेगा। सरकार का ध्यान आर्कषण करने के लिये धरना आदि कार्यक्रम करेगा।

24 जुलाई 2020 को समस्त स्कीम वर्कर आशा, आंगनवाड़ी, मध्याह्न भोजन, मनरेगा, 108 एम्बुलेंस, एन.एच.एम., आदि अपने-अपने क्षेत्र में धरना/प्रदर्शन करेंगे।

25 जुलाई को ऊर्जा क्षेत्र समस्त परिवहन निजी एवं सार्वजनिक पूरे देश में सुविधा अनुसार कार्यक्रम करेंगे।

26 जुलाई को प्राईवेट सेक्टर में सीमेंट इंजीनियरिंग, जूट, टेक्सटाईल्स, सुगर, डिस्टलरी, फार्मास्क्यूटिकल, मेडिकल रिप्रिजेन्टेटीव एवं औद्योगिक क्षेत्र के समस्त मजदूर/श्रमिक।

27 जुलाई को राज्य सरकारों के कर्मचारी एवं स्थानीय नगर निगम एवं निकायों के कर्मचारी तथा केन्द्रीय सरकार के रेलवे, पोस्टल डिफेंस आदि।

28 जुलाई को फाईनांस सेक्टर, बैंकिंग एवं एल.आई.सी. के कर्मचारी कार्यक्रमों में भाग लेंगे।

29 जुलाई को असंगठित क्षेत्र के समस्त श्रमिक, बीडी कृषि, भवन निर्माण, लोडिंग, अनलोडिंग, स्ट्रीट वेंडर आदि कार्यक्रमों में भाग लेंगे।

30 जुलाई को भारत सरकार के समस्त सार्वजनिक उद्योगों के कर्मचारी भेल, कोल, स्टील, एन.टी.पी.सी. नॉन कोल आदि क्षेत्र के कर्मचारियों द्वारा पूरे देश में सरकार जगाओ सप्ताह बनाया जायेगा।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betgaranti güncel giriş
Kolaybet Giriş
bettilt giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
bettilt giriş
Betgaranti
betgaranti
betgaranti giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
Betgaranti Giriş
Kolaybet Giriş
betgaranti giriş
holiganbet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
perabet giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
bettilt giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
bettilt giriş
betnano giriş
Kolaybet
kolaybet giriş
betnano giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
marsbahis giriş
marsbahis giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betorder giriş
betorder giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
betorder giriş
betorder giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
betgaranti international
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
kolaybet
kolaybet giriş
kolaybet güncel giriş
kolaybet
sahabet giriş
onwin giriş
kolaybet giriş
onwin giriş
kolaybet giriş
Kolaybet Giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet güncel giriş
sahabet güncel giriş
onwin güncel giriş
onwin güncel giriş
betpark
sahabet güncel giriş
sahabet güncel giriş
sahabet güncel giriş
sahabet güncel giriş
betpark
sahabet güncel giriş
sahabet güncel giriş