गजवा ए हिंद की पूरी कहानी

प्रस्तुति ज्ञान प्रकाश वैदिक

1. *अल तकिय्या:-*
ये चरण जब अपनाया जाता हैं, तब मुस्लिम कम सँख्या में होते हैं। इसमें काफिरों से झूठ बोलना, धोखा देना जायज माना जाता। अल तकिय्या का मुख्य उद्देश्य इस्लाम से जुड़ी सच्चाई, जानकारी को काफिरों से दूर रखना एवम छुपाना हैं। यही कारण पिछले 65वर्षो तक भारत मे
गजवा ए हिन्द जैसी जानकारी की भनक हिन्दूओ को लगी ही नही। इस चरण में शुरुआत में संख्या कम होने पर, बहुसंख्यक समाज का विश्वास जीता जाता हैं। उस देश के कानून, संविधान को मानने की कसमें खाई जाती हैं।
ईरान में पारसियों के विरुद्ध, मिस्त्र में ईसाइयों के विरुद्ध इसका सफल प्रयोग किया गया। भारत मे भी मुस्लिम अल्पसंख्यको द्वारा बार-बार संविधान की दुहाई देना इस प्रथम चरण अल तकिय्ये का एक हिस्सा हैं। गंगा-जमुनी तहजीब, ईस्लाम शांति का मज़हब हैं, हिन्दू मुस्लिम भाई-भाई इसी अल तकिय्ये के कुछ उदाहरण हैं।

2. *काफ़िरो के मन मे भय भरना:-*
इसमें प्रमुख रूप से काफ़िरो के मन मे भय भरना होता हैं। जिसमे धोखे से काफ़िरो पर हमला करना या हत्या करना। झुंड बनाकर एक जगह पर इकट्ठा होकर काफ़िरो पर हमला करना। पिछले कुछ वर्षों से देश के अलग अलग हिस्सों में यही चल रहा हैं।
काफ़िरो के अगुआ या आक्रमक नेताओ की घात लगाकर हत्या करना, जिससे अन्य काफिर भयभीत हो। और सार्वजनिक रूप से मुस्लिमों के खिलाफ अपनी जबान न खोल सके। कमलेश तिवारी की हत्या इसी चरण का हिस्सा थी। सोनू निगम से लेकर हर बात पर दिए जाने वाले फतवे भी इसमें शामिल हैं।

3. *हथियारों का जखीरा इकठ्ठा* *करना:-*
गजवा ए हिन्द का ये सबसे निर्णायक चरण हैं। जिसमे धर्मयुद्ध जैसे कोई नियम नही होते। इसमें झुंड या ट्रक भरकर काफ़िर बस्तियों पर हमला करना। काफ़िरो को दर्दनाक मौत देना(अन्य काफ़िरो के सामने).. मुर्शिदाबाद परिवार की हत्या जैसे उदाहरण इसी प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
बंगाल, केरल की स्थिति इस चरण से गुजर रही हैं। ये चरण वहाँ प्रभावी रूप से अपनाया जाता हैं, जहाँ मुसरिमो की सँख्या 15% से ऊपर हो।

4. *समय-समय पर काफ़िरो की* *ताकत को आंकना:-*
इसमें समय-समय पर दंगो का सहारा लेकर अपने आक्रमण से काफ़िरो की तरफ से प्रतिरोध आंकना प्रमुख हैं। छोटी-छोटी बातों पर दंगे, हिंसा का सहारा लेकर काफ़िरो की ताकत और एकजुटता का अंदाजा लगाना शामिल हैं।सहारनपुर दंगो से लेकर मुज़्ज़फ़्फ़राबाद, नवादा, मालदा, कैराना, मेरठ जैसे तमाम दंगे इसी चरण का हिस्सा हैं। ये प्रक्रिया उस जगह अपनाई जाती हैं, जहाँ मुस्लिमों की संख्या 15% से 20% तक पहुंच चुकी हो।

5. *शिविर या ठिकाने बनाना:-*
इस चरण में धर्म का सहारा लेकर, इस्लाम को अन्य धर्मो से सच्चा व सर्वश्रेष्ठ बताकर लोगो को इस्लाम के प्रति आस्थावान बनाना। ताकि लोग मुस्लिमों पर विश्वास करें। खासतौर से ऐसी जगहों से काफ़िरो को दूर रखना ताकि उन्हें ये आयोजन सिर्फ धार्मिक लगे। आयोजन की सच्चाई से गैर मुसरिम अनभिज्ञ और गाफिल ही रहे।
इस प्रक्रिया में बस्तियों और मस्ज़िदों का सहारा लिया जाता हैं। जहाँ लोगो को इकट्ठा करना, हथियार जमा करना तथा भड़काऊ भाषण देकर, भीड़ को भड़काकर काफ़िरो पर सयुंक्त हमला करना। काफ़िरो को मारकर अपने इलाके से दूर कर भगा देना या पलायन करने पर मजबूर कर देना।
ज़ुम्मे की नमाज़ के बाद मस्ज़िदों से होने वाली हिंसा इसी चरण का सुयोनिजित हिस्सा हैं। हिन्दू जिस इज्तिमा को मुस्लिमों का कुम्भ कहकर मूर्ख बनता हैं, वह इसी का एक रूप हैं। कश्मीर में यही चरण बड़े पैमाने पर अपनाया गया। बंगाल में जारी हैं। जहाँ कौमिया आबादी 20% से 30% के आसपास हैं, वहाँ ये तरीका अपनाया जाता हैं।

6. *सुरक्षा तंत्र को कमजोर* *करना:-* वरदान केयर
इस चरण में सेक्युलर सरकारें व सेक्युलर ताकते स्वयं शामिल हैं। जिसमे जुम्मे की नमाज़ के बाद पुलिस,सेना पर हमले कर उनका मनोबल तोड़ना हैं। ये प्रक्रिया वहाँ ज़्यादातर अपनाई जाती हैं, जहाँ इनकीं सँख्या बहुत ज्यादा हो या वहाँ सेक्युलर सरकार हो।
इसमें मानवाधिकार के नाम पर हमलावरों, पत्थरबाजों का बचाव करना व पुलिस,सेना की करवाई का विरोध करना या उनके हाथ बांधकर(हथियार न चलाने देना) हमलावरों,पत्थरबाजों द्वारा पीटने देना प्रमुख हैं, ताकि उनका मनोबल तोड़कर सुरक्षा तंत्र को कमज़ोर किया जा सके। कश्मीर में इसका सफल प्रयोग हो चुका हैं। बंगाल,केरल गजवा ए हिन्द के 6वे चरण में पहुंच चुके हैं।
वर्तमान में CAA पर चल रहा सुनियोजित एवं संघठित आंदोलन व देश विरोधी, हिन्दू विरोधी ताकतों द्वारा समर्थन इसी 6वें चरण का हिस्सा हैं।

7. व्यापक दंगो का प्रयोग:-
यह गजवा हिन्द का अंतिम चरण हैं। जिसमे बड़े स्तर पर हथियारों के साथ बड़ा मुस्लिम जनसमूह (भीड़)द्वारा काफ़िरो पर हमला करता हैं। कम समय में बड़ी संख्या में गैर मुस्लिम कत्ल कर दिए जाते हैं।
कश्मीर में 90 के दशक में कश्मीरी पंडितों के दमन तथा 1947 बंटवारे “डायरेक्ट एक्शन डे” में गजवा ए हिन्द के अंतिम चरण का सफलतापूर्वक प्रयोग किया जा चुका हैं।
#गजवा ए हिन्द के लिए सबसे प्रमुख शर्त हैं, जनसंख्या बढ़ाना, जो बच्चे पैदा करने से लेकर घुसपैठ द्वारा कौमिय जनंसख्या को काफिर देश मे 40% से 50% तक पहुंचाना फिर तलवार(हिंसा, झिहाद) के दम पर पूरे देश मे एक साथ गजवा हिन्द लाना। इसलिए हमेशा जनसंख्या कानून का पुरजोर विरोध किया जाता हैं।

पिछले 1400 वर्षों से इस्लाम द्वारा पूरी दुनिया में गजवा चल रहा हैं। जो अलग-अलग देशों में अलग-अलग नामो से चल रहा हैं। गजवा दुनिया के 57 देशों व उनकी बहुसंख्यक सभ्यताओ को लील गया। यूरोप सहित दुनिया के 7 से ज़्यादा देश गजवा की चपेट में हैं।

भारत का बड़ा हिस्सा गजवा ए हिन्द के 6वे चरण में पहुंच चुका हैं। किंतु CAA-NRC ने इनके ख्याब को अंतिम चरण में पहुंचने पर ब्रेक लगा दिया।
इसी कारण अपना सबसे बड़ा ख़्वाब टूटते, वर्षो की मेहनत पर पानी फिरते, जीवन के एकमात्र लक्ष्य से दूर होने पर , हताशा और बौखलाहट में बिलबिलाए मुस्लमान देशभर में प्रदर्शन कर रहे हैं। जिनका साथ देश विरोधी, हिन्नु विरोधी ताकते दे रही। जो हिन्दू सेक्युरिज्म,लिब्रिजम के प्रेम में मुस्लिमों संग खड़े हैं, वे समझ ले गजवा का पहला लालच “मरने पर 72 हूर” और जीवित रह गए तो “जवान काफिर ओरतों संग सहवास की अनंत संभावनाएं” प्रस्तावित की जाती हैं।
**ओ३म् सर्वज्ञ*
*वेद वरदान आर्य*
अतः CAA-NRC पर सरकार के साथ एकजुटता से खड़े रहे, अल तकिय्ये में न फँसे। मोदी जी का साथ दे और अपने भारत देश को गजवा-ए-हिन्द से बचाए।
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डॉ॰ राकेश कुमार आर्य

डॉ॰ राकेश कुमार आर्य

मुख्य संपादक, उगता भारत

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