Categories
इतिहास के पन्नों से

भारत विभाजन के विरोधी बादशाह खान की जयंती के अवसर पर

6 फरवरी 1890 को जन्मे खान अब्दुल गफ्फार खान की आज जयंती है । खान अब्दुल गफ्फार खान को इतिहास में बादशाह खान ,बच्चा खान और सीमांत गांधी के नाम से भी जाना जाता है। वे ऐसे नेता थे जिन्होंने अंतिम क्षणों तक जिन्ना की विभाजनकारी नीति का विरोध किया था ।
विभाजन के उपरांत उन्होंने कहा था कि गांधी और उनकी कांग्रेस ने हमें भूखे भेड़ियों के सामने डाल दिया है।
उनके अतिरिक्त जिन अन्य प्रमुख मुस्लिम लोगों ने जिन्ना की विभाजनकारी नीति का विरोध किया था , उनमें सम्मिलित थे इमारत-ए-शरिया के मौलाना सज्जाद, मौलाना हाफ़िज़-उर-रहमान, तुफ़ैल अहमद मंगलौरी । बादशाह खान नहीं चाहते थे कि देश का विभाजन हो और उन्हें पाकिस्तान नाम के देश में रहकर अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़नी पड़े , क्योंकि वह जानते थे कि मुस्लिम शासन में लोगों के बीच कितना अधिक भेदभाव किया जाता है ? यह अलग बात है कि कांग्रेस के नेता न तो इस तथ्य को उस समय समझे थे और नहीं आज समझे रहे हैं।
समाजवादी नेता राममनोहर लोहिया ने अपनी पुस्तक ‘गिल्टी मेन ऑफ़ पार्टिशन’ में लिखा है कि कई बड़े कांग्रेसी नेता जिनमें नेहरू भी सम्मिलित थे वे सत्ता के भूखे थे जिनकी वजह से बँटवारा हुआ ।
बादशाह खान की इच्छा थी कि कांग्रेस मुस्लिम तुष्टीकरण के खेल को छोड़कर जिन्नाह की ‘जी हुजूरी’ करने की अपनी प्रवृत्ति पर अंकुश लगाए ,लेकिन कांग्रेस के नेताओं ने उनकी भावनाओं का सम्मान नहीं किया , यद्यपि वह अपने जीवन के अंतिम क्षणों तक गांधीवाद के प्रति समर्पित रहे।
सुप्रसिद्ध इतिहासकार बिपन चंद्रा ने विभाजन के लिए मुसलमानों की सांप्रदायिकता को उत्तरदायी माना है , जबकि कुछ इतिहासकारों का कहना है कि 1937 के बाद कांग्रेस मुसलमान जनमानस को अपने साथ लेकर चलने में असफल रही इसलिए विभाजन हुआ।
कुछ भी हो , हम खान अब्दुल गफ्फार खान की उस नीति का समर्थन करते हुए उनकी जयंती के अवसर पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित करते हैं जिनके चलते उन्होंने भारत विभाजन को अप्राकृतिक और हर दृष्टिकोण से अनुचित कहा था । काश ! उनकी आवाज को कांग्रेस के लोग सुनते और विभाजन को टालने के उद्देश्य से मोहम्मद अली जिन्ना की आरती उतारना छोड़कर यथार्थवादी दृष्टिकोण अपनाते ।

डॉ राकेश कुमार आर्य
संपादक : उगता भारत

Comment:Cancel reply

Exit mobile version